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जब कामुक साली ने कहा जीजा जी मुझे रंडी समझकर चोदो

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नाम है अविनाश। उम्र 34 साल। पत्नी का नाम सुहानी। शादी को 7 साल हो चुके थे और इस पूरे वक्त में मैंने कभी किसी दूसरी औरत की तरफ आंख उठाकर नहीं देखा था। लेकिन पिछले 8 महीनों से सुहानी मुझसे ऐसे दूर हो गई थी जैसे मैं कोई अजनबी हूं। रात में करवट बदलकर सो जाती, छूने की कोशिश करता तो बहाना बना देती — सिर दर्द है, थकान है, फिर कभी। मेरी 6 इंच की तनी हुई मरदानगी को हथेली के सिवा कोई और नसीब नहीं थी।

फिर एक दिन फोन आया। सुहानी की छोटी बहन, आरोही, जो भोपाल में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी, हमारे शहर इंदौर में 2 हफ्तों की ट्रेनिंग के लिए आ रही थी। सुहानी ने कहा, “सुनो जी, आरोही हमारे यहां रुकेगी। मैं अगले हफ्ते अपनी मम्मी के पास नागपुर जा रही हूं, तब तक आप दोनों रहोगे। कोई प्रॉब्लम नहीं है ना?” मैंने ऊपरी मन से हामी भर दी।

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आरोही 22 साल की थी। जब वह घर में दाखिल हुई तो मैंने अपनी सांस रोक ली। 5 फुट 4 इंच की कद-काठी, गोरा रंग मानो दूध से नहाया हो, और बाल कमर से नीचे झूलते हुए। उसने हल्के नीले रंग की सलवार-कमीज़ पहनी थी, जिसके नीचे से उसकी 34B की चूचियों की भरपूर गोलाई साफ झलक रही थी। दुपट्टा गर्दन पर लटक रहा था, कोई परवाह नहीं उसे।

“नमस्ते जीजा जी! बहुत दिनों बाद।” वह मुस्कुराई, और वो मुस्कान सीधे मेरे अंदर उतर गई। मैंने नज़रें झुका लीं। पहले 3 दिन सुहानी की मौजूदगी में सब सामान्य रहा। आरोही सुबह जल्दी ट्रेनिंग पर चली जाती, शाम को लौटती। रात में हम तीनों साथ खाना खाते। लेकिन चौथे दिन सुहानी नागपुर के लिए निकल गई। और फिर घर में सिर्फ हम दो रह गए।

उसी शाम मैं छत पर बैठा था, हाथ में व्हिस्की का 1 पैग। आरोही नहाकर आई और मेरे ठीक बगल वाली कुर्सी पर बैठ गई। उसने छोटी सी लाल रंग की फ्रॉक पहनी थी, जो घुटनों से काफी ऊपर थी। बाल गीले थे और पानी की कुछ बूंदें उसके गले से होकर चूचियों के बीच की गहरी दरार में गुम हो रही थीं। उसके बदन से नहाने के साबुन की भीनी-भीनी सुगंध आ रही थी, जिसमें कुछ नशीला सा था।

“जीजा जी, आप अकेले पी रहे हैं?” उसकी आवाज़ में चुहल थी।

“हां, बस यूं ही।”

“मुझे भी चखाइए ना।”

मैंने उसे अपना गिलास बढ़ाया। उसने 1 घूंट लिया और हल्की सी खांसते हुए हंस पड़ी। फिर उसका पैर मेरी टांग से छू गया। मैंने हटना चाहा पर वह और सट गई।

“जीजा जी, एक बात पूछूं?” उसकी आवाज़ अब धीमी थी।

“हां?”

“दीदी से आपकी लड़ाई क्यों चल रही है?”

मेरा दिल तेज़ी से धड़का। “तुझे किसने बताया?”

“दीदी ने ही तो बताया। कह रही थीं कि पिछले 8 महीने से उनका मन नहीं करता। और आप… आप बहुत परेशान रहते हो।”

मैं खामोश रहा। आरोही ने अपना हाथ मेरे घुटने पर रख दिया। उसकी उंगलियां ठंडी थीं, पर जैसे ही वह मेरी जांघ पर सरकीं, मेरे शरीर में आग लग गई।

“आरोही, ये ठीक नहीं…” मैंने फुसफुसाया।

“जाने दीजिए ना। मैं कोई बच्ची नहीं हूं। और आप भी तो इंसान हो। बताइए, आखिरी बार कब किया था आपने?”

उसने ये सवाल इतनी सहजता से किया कि मैं शरमा गया। मैं 34 साल का आदमी, और ये 22 साल की लड़की मुझसे मेरी हवस का हाल पूछ रही थी। मेरा लंड अब जवाब दे चुका था — वो पैंट के भीतर तन कर खड़ा हो गया था।

“मैं जानती हूं दीदी ने आपको भूखा रखा है।” उसने मेरी जांघ को हल्के से दबाया। “और मैं… मैं भी तो 6 महीने से अकेली हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मुझे छोड़कर चला गया। कहता था मैं बहुत ज़्यादा गर्म हूं।” उसने अपने होंठों पर जीभ फेरी।

“ये गलत है, आरोही।” मेरी आवाज़ भारी हो गई थी।

“गलत तो बहुत कुछ है दुनिया में। पर ये गलत नहीं… ये सिर्फ दो भूखे लोगों का सच है।”

उसकी उंगलियां अब मेरे खड़े लंड के ऊपर से गुज़रीं। पैंट के कपड़े के पार भी उसे मेरी गर्मी महसूस हो रही थी। उसने हल्के से दबाया और मेरे मुंह से एक धीमी कराह निकल गई। उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी कोमल चूचियों पर रख दिया। फ्रॉक के पतले कपड़े के नीचे से उसके निप्पल सख्त होकर मेरी हथेली को चीरने लगे थे।

“चलिए नीचे।” मैंने उसकी कलाई पकड़ी और हम सीढ़ियों से उतरते हुए बेडरूम में पहुंचे।

बेडरूम का दरवाज़ा बंद करते ही आरोही ने अपनी फ्रॉक उतार फेंकी। उसके बदन पर सिर्फ काली ब्रा और पैंटी रह गई। ब्रा के भीतर उसकी 34B की सफ़ेद चूचियां ऊपर तक उभर आई थीं। निप्पल भूरे रंग के और खड़े हुए, मानो मुझे बुला रहे हों। उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, 1-1 करके। उसकी सांसें तेज़ थीं।

“जीजा जी, प्लीज़… बहुत देर कर दी आपने।”

मैंने उसका ब्रा का हुक खोला और उसके गोरे-गोरे बोबे बाहर निकल आए। मैंने झुककर उसके बाएं निप्पल को अपने मुंह में ले लिया। वो गर्म और नमकीन था। मेरी जीभ उसके उभार पर गोल-गोल घूमती रही। आरोही जोर-जोर से हांफने लगी और उसने मेरे बाल पकड़ लिए।

“हाएं… जीजा जी… आप तो मेरी जान ही चूस रहे हैं। दूसरे वाला भी… प्लीज़…”

मैंने उसके दाएं निप्पल को चूसना शुरू किया। उसकी चूचियों का हल्का सा दूधिया स्वाद और पसीने की नमकीन मिलकर एक नशा बन गई थी। मैं बारी-बारी से दोनों बोबों की मालिश कर रहा था, हल्के-हल्के दबा रहा था। आरोही कराह रही थी।

उसने अचानक मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया और मेरी पैंट उतार दी। मेरा 6 इंच का तना हुआ लंड हवा में खड़ा हो गया, लंड के गोटे पसीने से भीग चुके थे। उसने मेरे लंड को एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ से मेरी अंड की थैली सहलाने लगी।

“कितना सुंदर लंड है आपका… एकदम मोटा और लंबा… और ये नीली-नसें…” वो मेरे लंड को ऐसे देख रही थी जैसे कोई भूखी शेरनी शिकार को।

उसने पहले तो अपना मुंह मेरे लंड के ऊपरी छेद के पास ले गई और जीभ से वीर्य की बूंद को चाट लिया। फिर उसने धीरे-धीरे पूरा मोटा लंड अपने गर्म मुंह में भर लिया। मेरी आंखें पीछे मुड़ गईं। ये कोई पहली बार नहीं था, लेकिन इतना ज़बरदस्त ब्लोजॉब मुझे आज तक किसी ने नहीं दिया था। उसने जोर से चूसना शुरू किया, उसका गला मेरे लंड के ऊपरी हिस्से को दबा रहा था।

“हाएं… आरोही… तुम तो कमाल हो… मैं तो अभी मुंह में ही झड़ जाऊंगा।”

उसने लंड मुंह से निकाले बिना ‘हूं’ की आवाज़ दी, मानो कह रही हो ‘झड़ जाओ’। फिर उसकी रफ्तार और बढ़ गई। मेरा 6 इंच का लंड उसके गले के अंदर तक जा रहा था। 2 मिनट के भीतर ही मैं कंट्रोल खो बैठा और मेरा गाढ़ा चिपचिपा माल उसके गले से टकराया। उसने एक भी बूंद बाहर नहीं गिरने दी, सब कुछ निगल गई। फिर होंठों से लंड को साफ किया और मुस्कुराई।

“अब मेरी बारी, जीजा जी।”

मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी पैंटी उतारी। उसकी बालों वाली चूत सामने थी। झांट के बाल हल्के भूरे और बहुत मुलायम थे। चूत के होंठ अंदर से गीले थे और चूत का रस पहले ही टपक रहा था। मैंने उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपना चेहरा उसकी टाइट चूत के पास ले गया।

“चाटो ना… प्लीज़… मेरी चूत चाट डालो।” उसने मेरे बालों में उंगलियां फंसा लीं।

मैंने पहले उसके चूत के बाहरी होंठों को चूमा, फिर अपनी जीभ उसके भोसड़े के भीतर डाल दी। वो अंदर से बिलकुल रसदार चूत थी — गर्म, मीठा और हल्का चिपचिपा रस मेरी जीभ पर उतर रहा था। मैंने उसकी चूत को पूरी तरह चाटा, हर सिलवट से रस पिया। आरोही जोर-जोर से चिल्लाने लगी।

“हाएं… जीजा जी… मेरा भोसड़ा पूरा चाट डाला आपने… अब उंगली भी डालो… 2 उंगली…”

मैंने अपनी 2 उंगलियां मेरी कामुक साली की तंग चूत के अंदर डाल दीं। इतनी टाइट थी कि मुझे लगा अंदर की दीवारें मेरी उंगलियों को कुचल देंगी। फिर मैंने अपने दूसरे हाथ की 1 उंगली उसकी गांड के छेद पर रखी। आरोही ने अपने कुल्हे ऊपर उठाकर मुझे इजाज़त दे दी। मैंने धीरे से उंगली उसके गुदा सेक्स के छेद में डाल दी। वो और भी ज़्यादा टाइट था।

“हाएं… आगे-पीछे… दोनों जगह… मैं पागल हो रही हूं।”

मैंने आगे चूत में 2 उंगलियां और पीछे गांड में 1 उंगली डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसके बोबे हिल रहे थे। उसके मुंह से सिर्फ अनियंत्रित कराहें और गालियां निकल रही थीं।

“अब बस… मुझे चोदो… अपना बड़ा लंड मेरी चूत में डालो… जीजा जी मुझे रंडी समझकर चोदो।”

मैं फौरन मेरी कामुक साली के ऊपर आ गया। उसकी टांगें मेरे कंधों पर उठा दीं और अपने खड़े लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे-धीरे 1 इंच, 2 इंच, 3 इंच… और फिर पूरा 6 इंच का मोटा लंड उसकी कसी हुई चूत में समा गया। आरोही ने जोर की चीख मारी।

“आह… पूरा अंदर… मेरी चूत फट जाएगी… पर रुकना मत… जोर-जोर से चोदो… मेरी चूत की चुदाई करो।”

मैंने तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए। लंड मेरी नंगी साली के अंदर-बाहर हो रहा था, हर बार नीचे तक जाकर वापस आ रहा था। चूत के रस की चिपचिपाहट और हमारे शरीर के पसीने की नमी से कमरे में सेक्स की तेज़ महक फैल गई थी। उसके अंडकोष मेरे अंडकोष से टकरा रहे थे, टप-टप की गीली आवाज़ें आ रही थीं।

“आरोही, बहुत टाइट हो तुम… तुम्हारी चूत ने मेरा लंड जकड़ रखा है।”

“तो क्या करूं? आपको तो ढीली चूत वाली रंडी नहीं चाहिए थी… मैं तो 6 महीने बाद चुदवा रही हूं… मेरी चूत तो कुंवारी जैसी टाइट है।”

वो शब्द सुनकर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मेरे धक्के अब बेकाबू हो गए थे। आरोही जोर-जोर से चिल्ला रही थी — “हां… हां… ऐसे ही… मेरी चूत फाड़ दो… मुझे छिनाल समझकर चोदो… आज मैं तुम्हारी रखैल हूं… तुम्हारी कॉलगर्ल… जो चाहो समझो और चोदो।”

फिर मेरी नंगी कामुक साली ने मुझे रोका, “जीजा जी मुझे अपनी रंडी समझकर डॉगी स्टाइल में चोदो।” मैंने लंड बाहर निकाला और वो पलटकर कुत्ते की तरह हाथ-घुटनों पर आ गई। उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत के होंठ खुले हुए मानो मुझे बुला रहे हों। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया। इस बार वो आराम से अंदर चला गया। मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।

“हां… यही… मेरी चूत की चुदाई करो… और हां… मेरी गांड में उंगली डालो… साथ-साथ।”

मैंने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरे हाथ की उंगली उसके गांड के छेद में डाल दी। अब मेरा लंड उसकी चूत में और मेरी उंगली उसकी गांड में थी, दोनों एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। आरोही बुरी तरह कांप रही थी।

“हाएं… ये क्या हो रहा है… मुझे चरमसीमा आ रही है… मैं झड़ रही हूं जीजा जी… झड़ रही हूं…”

उसकी चूत की मांसपेशियां सिकुड़-सिकुड़कर मेरे लंड को दबोचने लगीं। मैंने भी अपनी आखिरी ताकत लगा दी।

“आरोही… मैं भी झड़ने वाला हूं।”

“हां झड़ो… मेरी चूत में… पूरा शुक्राणु अंदर भर दो… मेरी कोख भर दो…”

ये सुनते ही मेरा लंड जोर से फड़फड़ाया और 6-7 तेज़ धारों में मेरा गाढ़ा वीर्य उसकी चूत की गहराई में भर गया। मैं उसकी पीठ पर गिर गया और हम दोनों के शरीर एक-दूसरे में उलझ गए।

करीब 20 मिनट बाद जब हमारी सांसें सामान्य हुईं, आरोही ने मेरी छाती पर सिर रखकर कहा, “जीजा जी, पता है, मैं आपसे पहली बार तब प्यार करने लगी थी जब मैं 16 साल की थी। दीदी की शादी में आपको देखा था। तब से चाहती थी ये पल।”

मैं चौंक गया। “लेकिन ये तो गलत है ना?”

“गलत तो है। पर सच भी तो है। और मैं कोई वेश्या नहीं हूं। मैंने जो किया, सिर्फ आपके लिए किया। क्योंकि आप इसके हकदार हो।”

मैंने उसे चूम लिया। उस रात हमने 2 बार और बहुत शानदार चुदाई की — एक बार बाथरूम के फर्श पर और एक बार रसोई की स्लैब पर सेक्स करा। हर बार उसकी चूत ने मुझे पागल कर दिया।

अगले 10 दिन ऐसे ही बीते। दिन में हम औपचारिक रहे, रात में हम जानवर बन गए। फिर सुहानी लौट आई और आरोही वापस भोपाल चली गई।

आज उस रात को गुज़रे 4 महीने हो गए। आरोही कभी-कभी फोन करती है, और उसकी आवाज़ सुनते ही मेरा लंड फिर से तन जाता है सेक्स करने के लिए। लेकिन हम दोनों जानते हैं कि वो रातें अब सिर्फ यादें हैं। खूबसूरत, गीली, और बेहद गर्म यादें।

प्रिय पाठकों, अगर आपको मेरी ये जीजा साली अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी पसंद आई हो, तो कृपया नीचे कमेंट करके अपनी राय ज़रूर बताएं। आपके एक-एक फीडबैक से मेरी लेखनी को नई ऊर्जा मिलती है। आप अगली कहानी में क्या पढ़ना चाहेंगे, वो भी लिखें। धन्यवाद।

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