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सस्ती रंडियां चुदाई के लिए उपलब्ध वो भी मात्र 500 रुपये में

देवगुराड़िया बायपास पर देह व्यापार करने वाली सस्ती रंडियां चुदाई के लिए उपलब्ध वो भी मात्र 500 रुपये में – Devguradiya bypass par deh vyapar karne wali sasti randiyaan chudai ke liye uplabdh woh bhi matr 500 rupaye mein – Cheap prostitutes engaged in sex work are available on the Devguradiya bypass for sex for only 500 rupees …

मैं विक्रम सकसेना, उम्र 32 साल। पिछले 2 साल से तलाकशुदा जिंदगी जी रहा हूं और मुठ मार मारकर अपनी अन्तर्वासना शांत कर रहा हूँ। इंदौर की इस भागती-दौड़ती जिंदगी में सेक्स बस एक सपना बनकर रह गया था। ऑफिस से लौटकर जब रात को अकेला बिस्तर पर पड़ा रहता, तो सिर्फ इंटरनेट पर हॉट हिंदी सेक्स स्टोरीज़ पढ़कर अपनी हवस शांत करता। कई बार खुद को हस्तमैथुन करते हुए सोचता, काश कोई औरत होती जिसकी रसदार चूत चोद पाता।

एक दिन ऑफिस के दोस्त राजू ने बताया कि देवगुराड़िया बायपास (रेड लाइट एरिया) पर देर रात बहुत सी लड़कियां खड़ी रहती हैं गलत धंधा करने के लिए, सस्ती रंडियां (Cheep Prostitutes or Call Girl), जो महज 500 रुपये में पूरी रात चुदाई करने का मजा दे देती हैं। सबसे बड़ी बात, पुलिस को इस देह व्यापार के बारे में सब पता है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। सस्ती रंडियां चुदाई के लिए उपलब्ध वो भी मात्र 500 रुपये में मेरे अन्दर का रंडीबाज जाग उठा।

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उसी रात मैंने योजना बनाई। हल्का इत्र लगाया, अपनी कार की पिछली सीट पर एक पुरानी चादर बिछा दी, और पैंट की जेब में 3 कंडोम रख लिए। हालांकि बाद में रूपा से मिलकर सब बिना कंडोम ही हुआ, पर उस वक्त मैं सतर्क था। रात के साढ़े 10 बजे, मैं विजय नगर से देवगुराड़िया की तरफ निकल पड़ा।

सर्द रात थी। बायपास पर ट्रकों की लम्बी कतारें दूर खड़ी थीं। देवगुराड़िया बायपास की सर्विस रोड सुनसान थी, बस कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइटें टिमटिमा रही थीं। मैंने गाड़ी धीमी कर ली और सस्ती रंडियां (Cheep Prostitutes) तलाशने के लिए आसपास निगाहें घुमाईं। पहले तो कुछ नहीं दिखा, पर फिर एक झाड़ी के पास हल्की नीली साड़ी में लिपटी एक लड़की नजर आई। वो बिल्कुल वैसी ही थी जैसी राजू ने बताई थी – सड़क किनारे खड़ी, हाथ में चमकीला पर्स, एक पैर को हल्का आगे निकाले हुए।

गाड़ी और करीब ले गया। वो मेरी तरफ देखकर मंद-मंद मुस्कुराई। उसकी उम्र 25 के आसपास होगी। चेहरा थोड़ा थका हुआ, पर आंखों में अजीब शोखी। होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक। मैंने खिड़की नीचे की और पूछा, “सुनो, एकांत में कहीं चल सकती हो?” उसने बिना पल झपकाए कहा, “500 रुपये, और कोई टेंशन नहीं।” मेरे मुंह से निकला, “पुलिस वगैरह का डर नहीं?” उसने एक बार फिर वही कहा जो मैंने कई बार सुना था, “पुलिस को सब मालूम है और तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।” ये सुनते ही मेरा खड़ा लंड मेरी जींस में तड़पने लगा।

मैंने पीछे का दरवाजा खोला और वो अंदर बैठ गई। गाड़ी में बैठते ही उसने मेरी तरफ देखा और बोली, “नाम रूपा है, मालिक।” मेरा नाम पूछने पर मैंने बताया और गाड़ी अंधेरे सर्विस रोड की तरफ मोड़ दी। करीब 1 किलोमीटर दूर एक खंडहरनुमा जगह थी, जहां झाड़ियों के बीच कार छुपाई जा सकती थी। चारों तरफ सन्नाटा, सिर्फ कुत्तों के भौंकने की दूर से आवाज।

गाड़ी रोकने के बाद, मैं भी पीछे की सीट पर उसके पास चला गया। अब हम आमने-सामने थे। सीट की जगह कम थी, इसलिए उसने अपनी साड़ी का पल्लू हटाकर अपने स्तनों को बाहर निकाल लिया। वो करीब 34B साइज के थे – गोल, गोरे, और पूरी तरह से मुलायम। निप्पल काले और हल्के से उभरे हुए थे, जो ठंड की वजह से और भी तने हुए लग रहे थे।

उसका एक हाथ सीधे मेरी जींस की जिप पर पहुंच गया। फुर्ती से जिप खोलकर उसने मेरा तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया। “अरे! मोटा लौड़ा है तुम्हारा, इससे तो मेरी चूत पूरी रात रोएगी,” कहते हुए उसने मेरे लंड के सुपारे पर उंगली घुमानी शुरू की। मैंने उसके स्तनों को भींचते हुए उसके निप्पल चूसने शुरू कर दिए। एक अजीब सी गंध उसके सीने से उठी – पसीने और सस्ते इत्र का मिलाजुला अहसास।

रूपा ने मुझे सीट पर थोड़ा झुकाकर अपना मुंह मेरे लंड के पास ले आई मुखमैथुन (Blowjob) करने के लिए। पहले उसने मेरे लंड के गोटों को चूसा, अंडकोष की थैली को जीभ से सहलाया। मैं कांप उठा। फिर उसने मेरा पूरा लंड मुंह में भर लिया। ब्लोजॉब का वह नजारा जिंदगी का सबसे गंदा और सबसे खूबसूरत अनुभव था। उसने मुखमैथुन ऐसे किया जैसे वो पिछले 10 सालों से रोज कर रही हो। जीभ लंड की नसों पर फिरती, होंठों का दबाव एकदम परफेक्ट, और बीच-बीच में आंखें मुझसे मिलाकर देखना।

“बहुत मजा आ रहा है, तू तो बड़ी छिनाल है,” मैंने उसके बाल पकड़ते हुए कहा। वो मेरा लंड मुंह से निकालकर बोली, “हां, मैं छिनाल हूं, रंडी हूं, पर आज तेरे लंड की प्यासी हूं।” फिर से उसने लंड मुंह में ले लिया और इस बार गले तक उतार दिया। मुझे लगा मेरा वीर्य अभी निकल जाएगा, इसलिए मैंने उसे रोकते हुए लिटा दिया।

अब मैंने उसकी साड़ी पूरी खोल दी। उसने पेटीकोट और पैंटी भी निकाल फेंकी। अब वो नंगी मेरे सामने थी। उसकी चूत घने झांट के बालों से ढकी हुई थी। काली और लम्बी झांट ने उसकी रसदार चूत को और भी भड़कीला बना दिया था। मैंने उसके पैरों को मोड़कर अलग-अलग कर दिया। उसकी फुद्दी के होंठ गीले और सूजे हुए से लग रहे थे। चूत का रस उसकी जांघों तक बह आया था।

मैं झुका और सीधे अपनी जीभ उसके भोसड़े के अन्दर डाल दी। वह चट-चट की आवाजें और उसका चिल्लाना – “हां, मेरी चूत चाट, मेरा भोसड़ा चूस, मेरे अंदर अपनी जीभ डाल” – सब मिलकर एक मादक संगीत बन गया था। मैंने उसकी चूत के ऊपर वाले मांसल हिस्से को जोर से चूसा, फिर उंगली डालकर उसकी चूत की गर्मी नापी। रूपा ने अपना कूल्हा उठाकर मेरी उंगली को पूरा अन्दर ले लिया।

“अब उंगली मत कर, बस अपना देसी लंड डाल दे और चुदाई के मजे ले,” वो सस्ती रंडी गिड़गिड़ाई। मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर डालकर अपना लंड उसकी चूत की दरार पर रगड़ा। उसने खुद लंड पकड़कर चूत के छेद पर लगाया और मैंने जोर का एक झटका दिया। “आह… मेरी मां…” वह चीखी। मेरा लम्बा लंड पूरा अन्दर था और उसकी टाइट चूत की मांसपेशियों ने मुझे जकड़ लिया था।

अगले 15 मिनट तक सिर्फ जंगली चुदाई, सिर्फ उठती-गिरती सांसें, और सीट की चरमराहट। मैंने उसे हर पोजीशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, और फिर उसे अपने ऊपर बिठाकर। जब वो मेरे ऊपर थी, तो उसके बोबे मेरे मुंह के ठीक सामने थे। मैं एक-एक करके दोनों स्तनों को चूस रहा था, और वो अपनी चूत मेरे खड़े लंड पर ऊपर-नीचे कर रही थी।

“तुझे तो पूरी रात चोदने का मन करे, रूपा। तेरी चूत का रस पी जाऊं,” मैंने उस सस्ती रंडी से कहा। वो हंसी, “तो पी ले, आज तो तेरा ही माल है यह।” मैंने फिर से उसे नीचे लिटाकर जोर-जोर से चोदना शुरू किया। मेरी गांड़ की मांसपेशियां कस रही थीं चुदाई करने के दौरान, लंड के गोटे उसकी चूत के निचले हिस्से से टकरा रहे थे।

मुझे लगा कि अब मैं झड़ूंगा, लेकिन रूपा ने कहा, “रुको, पहले मेरी गांड मारो। गांड की चुदाई का बहुत मन है।” मैंने लंड बाहर खींचा, जो उसके चूत के रस से पूरी तरह चिपचिपा हो गया था। फिर मैंने उसे पलटकर कुत्ते की तरह लिटा दिया। उसकी गोल चूतड़ और उनके बीच की गांड का छेद साफ नजर आ रहा था। मैंने पहले अपनी एक उंगली उस छेद में डाली। वो सिकुड़ गया। “गांड में उंगली डालकर तैयार करो, ताकि लंड घुस सके,” वो बोली।

मैंने 2 उंगलियां डालकर उसकी गांड फैलानी शुरू की। उसने थोड़ा कराहते हुए सहन किया। फिर मैंने अपना पूरा लंड धीरे से उसके गांड के छेद में लगाया। “अन्दर डाल, धीरे-धीरे,” उसने कहा। मैंने हल्का सा जोर लगाया और लंड का सिरा अंदर घुस गया। रूपा ने जोर की चीख मारी, पर हाथ आगे बढ़ाकर मेरी जांघ पकड़ ली। मैंने लंड को पूरा अन्दर तक धकेल दिया। गुदा सेक्स (Anal Sex) का वो अनुभव बिल्कुल अलग था – गर्म, तंग, और ज्यादा तीव्र। मैंने 7-8 मिनट तक उसकी गांड मारी, हर झटके के साथ वो “उह आह” करती रही।

अब मैं लगभग झड़ने वाला था। मैंने लंड बाहर निकाला और फिर से उसकी रसदार चूत में घुसा दिया। आखिरी 2 मिनट तक ताबड़तोड़ चोदने के बाद, मेरा वीर्य गर्म फुहार बनकर उसकी चूत के अंदर गिर गया। मैं उसके ऊपर ही ढह गया। दोनों के पसीने और मेरे शुक्राणु की गंदी मगर सुकून भरी महक गाड़ी में भर गई थी।

करीब 5 मिनट तक हम यूं ही लेटे रहे। फिर रूपा ने मुझे धीरे से हटाया और अपनी साड़ी से चूत पोंछने लगी। मैंने पूछा, “रोज ऐसा करती हो?” वो उदास होकर बोली, “मजबूरी है मालिक। घर में बीमार मां है, 6 साल का बेटा है। पति मर गया सड़क हादसे में। क्या करती? यह देहव्यापार करके ही पेट भरता है।” उस सस्ती रंडी का दुखड़ा सुनकर मेरा दिल भर आया। मैंने अपनी जेब से 500 के बजाय 1000 रुपये निकालकर उसे दे दिए। उसकी आंखें भर आईं।

मैंने उसे वहीं उतार दिया जहां से पहली बार देखा था। जाते-जाते वो बोली, “अगली बार जल्दी आना, विक्रम।” मैं चुपचाप घर लौट आया। रात भर बिस्तर पर पड़ा उसकी चूत की गर्माहट और हमारी चुदाई को याद करता रहा। यह सिर्फ एक सेक्स स्टोरी नहीं, बल्कि उस औरत की जिंदगी का एक हिस्सा है जिसे हम सब ‘रंडी’ कहते हैं।

अब आप बताइए, क्या आपको मेरी यह अन्तर्वासना कॉल गर्ल हिंदी आउटडोर सेक्स कहानी पसंद आई? क्या आप भी कभी देवगुराड़िया बायपास गए हैं या ऐसी ही किसी घटना का हिस्सा बने हैं? प्लीज कमेंट करके अपनी राय जरूर दें। अगर ऐसी ही और हॉट हिंदी सेक्स स्टोरीज़ चाहते हैं तो शेयर करें और फॉलो करना न भूलें।

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