मुफ्त में पढ़ें कामुक भाभी ने मेरे बाल पकड़कर मेरा मुंह अपनी रसदार चूत पर दबा दिया अन्तर्वासना हिंदी भाभी-देवर सेक्स कहानी – Muft mein padhen Bhabhi ne mere baal pakadkar mera munh apni rasdaar choot par daba diya Antarvasna Hindi Bhabhi-Devar sex kahani – Read for free Bhabhi grabbed my hair and pressed my mouth against her juicy pussy Antarvasna Hindi Bhabhi-Devar sex story …
मैं अपनी उस घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसने मेरी पूरी ज़िंदगी बदल दी, एक ऐसी शाम जो मेरी रगों में आज भी बिजली की तरह दौड़ती है। मैं अपने बड़े भाई और भाभी के साथ लखनऊ के एक पुराने मोहल्ले में रहता था, और भाभी यानी रूपाली, एक बेहद ही खूबसूरत औरत थीं। मेरी उम्र उस वक्त 22 साल थी और भाभी मुझसे करीब 5 साल बड़ी थीं, उनका शरीर एक बेहतरीन मूर्ति की तरह ढला हुआ था। उनके भारी भरकम बोबे और गोल गांड मेरे हर सपने का हिस्सा बन चुके थे, और मैं हर वक्त बस उन्हें गन्दी नजरों से एकटक देखता रहता था। मेरे भाई अक्सर ऑफिस के काम से महीनो घर से बाहर रहते थे, और यही मेरे और भाभी के बीच करीबी बढ़ने की वजह बना।
वो एक चिलचिलाती गर्मी की रात थी जब सारा घर एक आलस भरी शांति में डूबा हुआ था, लेकिन मेरा दिल अपनी ही बेताबी की वजह से तेज़ धड़क रहा था। मैंने पाया कि मेरी खूबसूरत भाभी का कमरा हमेशा मुझे एक अजीब सी खिंचाव से भर देता था, मानो उसकी दीवारों में ही कोई रसीला राज छिपा हो। मुझे यह जानने की उत्सुकता हुई की भैया के बिना भाभी अपने बंद कमरे में अकेली क्या करती है।
उस दिन मैंने गलती से उनके कमरे की दरार से झाँक लिया, और जो देखा उसने मेरे पैरों तले की ज़मीन खिसका दी। रूपाली भाभी अपने बेड पर लेटी हुई थीं और अपनी ही उंगलियों से अपनी मोटी, रसदार चूत को सहला रही थीं (Wet Pussy Fingering)। उनकी आँखें मूँदी हुई थीं और होंठों से धीमी-धीमी आहें निकल रही थीं, जो सीधे मेरे लंड तक पहुँच रही थीं। मैं वहाँ से हिल नहीं पाया, मेरा सारा शरीर एक अजीब सी कमज़ोरी और बेचैनी से भर गया।
मैं पूरी तरह से पत्थर का बना हुआ खड़ा था, और मेरी साँसें अटक सी गई थीं। भाभी ने अपनी सूती साड़ी ऊपर तक उठा रखी थी, और उनके मोटे-मोटे गोरे चुचे हवा में खुलेआम लहरा रहे थे, जिनके निप्पल भूरे और सख्त हो चुके थे। उनकी एक उंगली उनके गीले छेद के अंदर-बाहर हो रही थी, और उससे एक चिपचिपी, खुशबूदार चूत का रस बह रहा था जो चादर पर दाग बना रहा था। उस पल मुझे एहसास हुआ कि यह कामुकता भरी औरत मेरे लिए सिर्फ एक सपना ही थी, लेकिन अब ये सपना सच होने की कगार पर खड़ा था।
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तभी अचानक उनकी आँखें खुल गईं और वो सीधे मेरी आँखों में देखने लगीं, और मैं डर के मारे वहीं गड़ गया। मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई, मुझे लगा कि अब तो ये बात मेरे भाई तक पहुँच जाएगी और सब बर्बाद हो जाएगा। लेकिन मेरी कामुकता से भरी भाभी के चेहरे पर एक अजीब सी शरारत उभरी, और उन्होंने अपनी उंगली बाहर निकालकर उसे अपने होंठों से चाट लिया। उनकी वो हरकत इतनी कामुक थी कि मेरी पैंट में पड़ा मेरा तना हुआ लंड दर्द करने लगा। “अंदर आओ ना, देवर जी,” उनकी आवाज़ शहद से भी मीठी थी, और मेरे पैर अपने आप उनकी तरफ बढ़ गए।
एक पल को तो मैंने सोचा कि मैं भाग जाऊँ, लेकिन मेरी हिम्मत ने मेरे कदमों को रोक लिया। भैया-भाभी का वो कमरा अब मेरे लिए जन्नत बन चुका था, जहाँ हवा में इत्र और मेरी कामुक भाभी की चूत की नमकीन खुशबू घुली हुई थी। भाभी बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उनकी जाँघें खुली हुई थीं, जिनके बीच का नज़ारा साफ़ दिख रहा था। उनके झांट के बाल हल्के से गीले थे और एक सुंदर तिकोने आकार में फैले हुए थे। “तुम बहुत शरीफ़ बनते हो वरुण,” उनकी आवाज़ में एक गहरी प्यास थी, “लेकिन यहाँ तो तुम मुझे रोज़ घूरते हो।”
मेरे चेहरे पर शर्म और हवस का मिलाजुला भाव था, और मैं बस सिर झुकाए खड़ा था। “अब जब आ ही गए हो, तो बंद करो ये नौटंकी और पास आओ,” उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू पूरी तरह से हटा दिया और अपने भारी बोबों को पूरी तरह से मेरे सामने उघाड़ दिया। वो माँस के गोले इतने रसीले लग रहे थे कि मेरे मुँह में पानी भर आया। मैंने हिम्मत जुटाई और लड़खड़ाते कदमों से उनके बिस्तर की तरफ बढ़ गया। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था, और मेरा 7 इंच का लम्बा लंड पैंट के अंदर तड़प रहा था।
“पहली बार है क्या ऐसे मौके पर देवर जी?” उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और धीरे से अपनी एक बूब पर रख दिया, और मैंने महसूस किया कि वो कितनी मुलायम और गर्म थी। मैंने हाँ में सिर हिलाया, और मेरी साँसें तेज़ हो गईं। “तो चलो, आज मैं तुम्हें वो सब सिखाती हूँ जो तुम्हारी किताबों में नहीं लिखा है,” उन्होंने एक धीमी सी हँसी के साथ कहा और मेरी पैंट की ज़िप खोलने लगीं। जैसे ही उसकी ठंडी उंगलियाँ मेरे लंड के गोटे से छुईं, मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। मैंने उनके बोबे को ज़ोर से दबा दिया, और उनके मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली।
फिर मेरी कामुक भाभी ने शरारत भरे अंदाज में मेरी पैंट नीचे खींची और मेरा खड़ा लंड हवा में तनकर खड़ा हो गया, जिसका सिरा पूरी तरह से लाल और चमक रहा था। “वाह, देखने में तो बहुत प्यारा है,” उन्होंने हस्तमैथुन (Masturbation) करने के लिए मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया और मुझे एक ज़बरदस्त हैण्डजॉब (Handjob) देने लगीं। उनके हाथों की पकड़ इतनी मज़बूत और तंग थी कि मेरा वीर्य बाहर आने को बेताब हो उठा। “भाभी, ऐसे मत करो, निकल जाएगा,” मैंने कराहते हुए कहा, लेकिन उन्होंने अपनी पकड़ और तेज़ कर दी और मेरे लंड के सिरे पर अपना अंगूठा रगड़ने लगीं। “चुप रहो, अभी तो बहुत कुछ बाकी है,” वो बोलीं और झुककर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया।
उनके होंठों ने मेरे लंड के सिरे को एक नर्म और गीली गुफा में बंद कर दिया, और मुझे लगा जैसे मेरी रूह निकल गई हो। यह मेरा पहला ब्लोजॉब था, और भाभी इस कला में पारंगत थीं। उनकी जीभ मेरे लंड की नसों पर धीरे-धीरे घूम रही थी, और वो बीच-बीच में मेरे लंड के गोटे को अपने मुँह में लेकर चूस रही थीं। कमरे में सिर्फ उनके चूसने की गीली आवाज़ें और मेरी दबी हुई कराहें गूँज रही थीं। मेरे लिए ये सब किसी जन्नत से कम नहीं था।
कुछ मिनटों तक वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर इस तरह खेलती रहीं जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा चीज़ चूस रहा हो। फिर उन्होंने अपना मुँह हटाया और मेरे लंड पर अपनी लार की एक पतली सी धार छोड़ी, जो नीचे तक बह गई। “अब तुम मेरी चूत चाटो, वरुण,” उनका आदेश था, और वो अपनी पीठ के बल लेटकर अपनी टाँगें फैला दीं। मैं उनकी टाइट चूत के ठीक सामने था, जो अब पूरी तरह से गीली और फूली हुई थी, और मुझे उसकी एक अजीब सी मीठी-मीठी महक आ रही थी। मैंने अपनी जीभ निकाली और उस गर्म गीली चूत पर एक लंबी सी चाट मारी, और मेरे मुँह में उनका नमकीन-मीठा रस भर गया।
“हाँ, ऐसे ही, बहुत अच्छा कर रहे हो,” भाभी ने मेरे बाल पकड़कर मेरा मुंह अपनी रसदार चूत पर दबा दिया, और मैं उनकी हर सलवट और हर सिलवट को अपनी जीभ से महसूस करने लगा। मैं उनकी भोसड़ी में अपनी जीभ डालकर उसे अंदर-बाहर कर रहा था, और वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थीं। फिर मैंने थूक लगाकर अपनी 2 उंगलियाँ भाभी की टाइट चूत के अंदर डाल दीं, और उनके अंदर की गर्मी और तंगी को महसूस करते हुए उन्हें तेज़ी से चोदने लगा। उनके पूरे शरीर में एक ज़बरदस्त ऐंठन उठी और उनकी चूत से रस की एक बौछार सी निकल पड़ी, जिससे मेरा पूरा हाथ भीग गया।
अब बारी थी मेरी तड़प को खत्म करने की। मैं उनके ऊपर चढ़ गया और मेरा मोटा लौड़ा उनकी चूत के दरवाज़े पर दस्तक देने लगा। “धीरे से, देवर जी, ये मेरी नहीं तुम्हारी पहली बार है,” वो हँसी और उन्होंने मेरे लंड के सिरे को अपनी चूत पर रगड़ा। फिर मैंने एक हल्का सा धक्का दिया, और मेरा पूरा लंड एक झटके में उनके अंदर चला गया। “आह, भाभी, बहुत टाइट है आपकी,” मेरी चीख निकल गई, और मैंने उनके ऊपर झुककर उनके एक निप्पल को अपने मुँह में भरकर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया।
मैं उनकी चूत में अपना लंड बुरी तरह से घुसा रहा था और बाहर निकाल रहा था, और हर धक्के के साथ बिस्तर की चरमराहट तेज़ होती जा रही थी। मेरी नंगी भाभी की टाइट चूत ने मेरे लंड को ऐसे जकड़ लिया था जैसे वो उसे निगलना चाहती हो, और मैं पागलों की तरह उन्हें चोद रहा था। “हाँ, चोदो मुझे, मेरी चूत फाड़ दो देवर जी अपने इस देसी लंड से,” भाभी की आवाज़ अब एक रंडी की तरह गंदी और बेकाबू हो चुकी थी। मैंने उनके दोनों बोबों को ज़ोर से दबाया और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी, और कुछ ही देर में मुझे लगा कि मेरा वीर्य अब बाहर आने ही वाला है।
“अभी झड़ना मत देवर जी, जल्दी से पीछे से गुदा मैथुन (Anal Sex) भी करते हैं,” उन्होंने मुझे रोक दिया और वो अपने हाथों और घुटनों के बल आ गईं, जिससे उनकी मोटी गांड का छेद मेरे ठीक सामने था। मैंने उनकी गांड पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा, जिसकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज गई, और फिर अपना लंड उनकी चूत में फिर से घुसा दिया। इस पोज़ीशन में मेरा लंड और भी गहराई तक जा रहा था, और हर धक्के के साथ भाभी की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरे लंड के गोटे उनके चूतड़ों पर ज़ोर से टकरा रहे थे, और उनकी पीठ पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं।
मैंने अपनी एक उंगली नंगी भाभी की गांड के छेद पर रखी और धीरे से अंदर धकेलने लगा। “हाँ, वहाँ भी करो, मेरी गांड में उंगली डालो,” उनकी भीख माँगती आवाज़ ने मुझे और पागल कर दिया। अब मैं एक साथ उनकी चूत में अपना लंड और गांड में अपनी उंगली डालकर उन्हें दोहरी चुदाई का मज़ा दे रहा था। भाभी अब पूरी तरह से बेकाबू थीं और बस चिल्ला रही थीं, उनके शरीर की हर नस इस पल को पूरी शिद्दत से जी रही थी।
फिर आखिरकार वो पल आ ही गया जब मेरा सब्र जवाब दे गया। मैंने अपना पूरा ज़ोर लगाकर एक आखिरी धक्का दिया और अपना गाढ़ा, चिपचिपा माल उनकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया। मेरे वीर्य की गर्म धार ने उनके गर्भ को भर दिया, और वो एक ज़बरदस्त चरमसीमा पर पहुँचकर मेरे नीचे ढेर हो गईं। हम दोनों ही पसीने से लथपथ और हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपट गए, और कमरे में सिर्फ हमारी थकी हुई साँसों की आवाज़ बची थी।
आज भी जब बारिश की बूँदें मेरी खिड़की पर गिरती हैं, तो मुझे वो रात याद आ जाती है जिसने मुझे एक लड़के से एक आदमी बना दिया। उस एक रात ने मेरी सारी शर्म और झिझक छीन ली, और मैंने जाना कि एक कामुक औरत के शरीर का हर राज कितना गहरा होता है। यह सिर्फ एक चुदाई की कहानी नहीं, बल्कि मेरी ज़िंदगी का वो मोड़ था जहाँ मैंने अपनी हवस और अपनी भावनाओं को पहचाना।
प्रिय पाठकों, मैं आशा करता हूँ कि हम भाभी देवर की पहली चुदाई की यह हिंदी सेक्स कहानी आपको पसंद आई होगी और यह आपको मेरे साथ उस कमरे में ले गई होगी। क्या आपको लगता है कि मैंने अपनी भावनाओं और शारीरिक अनुभवों का सही वर्णन किया है, या कोई और मोड़ इस कहानी को और बेहतर बना सकता था? कृपया अपनी बेबाक राय और प्रतिक्रिया नीचे कमेंट में ज़रूर दें, क्योंकि आपके विचार ही मेरी अगली कहानी को आकार देते हैं।


