मुफ्त में पढ़ें चाचा ने मेरी चूत चाटकर चुदाई करी माँ की इजाज़त से अन्तर्वासना हिंदी 18+ एडल्ट सेक्स कहानी – Muft mein padhen chacha ne meri choot chaatkar chudai kari maa ki ijaazat se antarvasna hindi 18+ adult sex kahani – Read for free: Uncle licked my vagina and had sex with me with my mother’s permission – Antarvasna Hindi 18+ adult sex story …
मेरा नाम नेहा है और मैं उस वक्त 19 साल की थी, जब ये सब हुआ। मेरी ज़िंदगी बिल्कुल साधारण थी, एक छोटे से शहर लखनऊ के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में माँ और चाचा के साथ रहती थी। पापा का 5 साल पहले देहांत हो गया था, और तभी से चाचा हमारे घर की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे। माँ एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थीं, और चाचा बिज़नेस करते थे, जिसकी वजह से अक्सर दिन में मैं और चाचा घर पर अकेले होते थे।
चाचा का नाम राजन था, उम्र 35 साल, कद 6 फीट, गेहुँआ रंग, चौड़ी छाती और मज़बूत बाज़ुओं वाले एक हैंडसम आदमी। वो हमेशा मुझसे प्यार से बात करते, मेरी हर ज़रूरत का ख्याल रखते, और मुझे कभी महसूस नहीं होने देते थे कि मेरे पापा नहीं हैं। मैं भी उनका बहुत सम्मान करती थी, उन्हें अपना गार्जियन मानती थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरे अंदर कुछ अजीब से बदलाव आ रहे थे।
मेरा शरीर जवान हो रहा था, मेरे चुचे 36D साइज़ के हो गए थे, कमर पतली और कुल्हे चौड़े हो गए थे। मैं अक्सर आईने के सामने खड़ी होकर अपने आप को निहारती रहती, और मेरे अंदर कुछ ऐसी उथल-पुथल मचती जिसे मैं समझ नहीं पाती थी। रात को सोते वक्त मेरा हाथ अनजाने में मेरी जाँघों पर चला जाता, और एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती पूरे शरीर में। मुझे लगता कि मैं कोई गुनाह कर रही हूँ, लेकिन उस एहसास को रोकना मेरे बस में नहीं था।
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चाचा को देखकर भी मेरे अंदर कुछ हरकत होने लगती थी। जब वो सुबह नहाकर सिर्फ तौलिया लपेटे बाहर आते, तो उनकी चौड़ी छाती और मज़बूत बाज़ुओं को देखकर मेरी साँसें तेज़ हो जातीं। मैं नज़रें चुराने की कोशिश करती, लेकिन मेरी आँखें बार-बार उन्हीं पर जा टिकतीं। मुझे लगता कि ये सब गलत है, चाचा के बारे में ऐसा सोचना पाप है, लेकिन मेरा मन मेरी बात नहीं मानता था।
एक दिन मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी, दोपहर के 2 बजे होंगे, गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थीं और माँ स्कूल गई हुई थीं। मैंने शॉर्ट्स और एक ढीली सी टी-शर्ट पहनी हुई थी, पंखा पूरी स्पीड से चल रहा था, लेकिन गर्मी फिर भी बेतहाशा थी। मेरे शरीर से पसीने की बूँदें टपक रही थीं, और मेरी टी-शर्ट मेरे चुचों से चिपक गई थी, उनका पूरा उभार साफ दिख रहा था। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई, चाचा की आवाज़ थी।
“नेहा, बेटा, ज़रा पानी मिलेगा?” चाचा ने कहा। मैंने दरवाज़ा खोला और उन्हें अपने कमरे में आने दिया। उन्होंने सिर्फ एक लुंगी पहनी हुई थी, उनकी छाती पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। मुझे लगा कि मेरी नज़रें उनकी छाती पर ही टिक गई हैं, और मैंने फटाफट नज़रें झुका लीं। मैंने उन्हें पानी का गिलास दिया, और जब वो पानी पी रहे थे, तो मैंने देखा कि उनकी नज़र मेरी छाती पर थी।
चाचा ने गिलास रख दिया और मेरे पास आकर खड़े हो गए, बिल्कुल करीब, मेरी साँसें तेज़ हो गईं। “तुम बहुत खूबसूरत हो, नेहा,” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, और उनका हाथ मेरे गाल पर आ गया। मैंने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुकाए खड़ी रही, मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। “मैं तुम्हें देखता हूँ तो मेरा दिल काबू में नहीं रहता,” उन्होंने कहा और उनका दूसरा हाथ मेरी कमर पर आ गया।
“चाचा, ये आप क्या कर रहे हैं,” मैंने हल्की सी कोशिश की उन्हें रोकने की, लेकिन मेरी आवाज़ में कोई ताकत नहीं थी। असलियत तो ये थी कि मेरे अंदर भी कुछ ऐसा जाग रहा था, जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मेरी चूत में एक अजीब सी गर्माहट फैल रही थी, और मैं अपनी जाँघों को आपस में दबा रही थी ताकि वो एहसास रुक जाए। लेकिन चाचा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेड तक खींच ले गए।
“डरो मत, नेहा, मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं दूँगा,” उन्होंने कहा और मुझे बेड पर लिटा दिया। उनके हाथ मेरी टी-शर्ट के नीचे चले गए, और सीधे मेरे पेट पर आकर रुक गए। उनकी उँगलियाँ मेरी त्वचा पर ऐसे चल रही थीं जैसे कोई मुलायम पंख हो, और मेरे रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने मेरी टी-शर्ट को धीरे-धीरे ऊपर खींचा, और मेरे बोबे बाहर आ गए, मेरे निप्पल पहले से ही तने हुए थे।
उन्होंने मेरे निप्पल को अपने मुँह में ले लिया, और मैंने एक ज़ोरदार सिहरन महसूस की। मानो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया हो। “आह्ह्ह… चाचा…” मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया। वो बारी-बारी से मेरे दोनों बोबों को चूस रहे थे, उनकी जीभ मेरे निप्पल के इर्द-गिर्द घूम रही थी, और मैं कराह उठती थी हर बार। मेरी चूत अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, चूत का रस मेरी जाँघों से बहने लगा था।
चाचा ने मेरी शॉर्ट्स उतार दीं, और अब मैं सिर्फ एक पैंटी में उनके सामने आधी नंगी खड़ी थी, जो पूरी तरह से भीग चुकी थी। उन्होंने मेरी पैंटी पर अपना हाथ रखा, और मैंने महसूस किया कि उनकी उँगलियाँ मेरी चूत के ऊपर से गुज़र रही हैं। “तुम्हारी फुद्दी बहुत गर्म है, नेहा,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी, और मेरी बालों वाली चूत पूरी तरह से खुल गई, चूत का रस चमक रहा था रोशनी में।
चाचा ने अपनी उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं, और मैं चीख पड़ी, इतना तेज़ एहसास था वो। “आह्ह्ह्ह… चाचा… क्या कर रहे हो…” मैंने कहा, लेकिन मेरे हाथ उनके बालों में चले गए थे। वो मेरी चूत चाटने लगे, उनकी जीभ मेरी फुद्दी के अंदर तक जा रही थी, और मैं पूरी तरह से पागल हो रही थी। मेरी कमर बिस्तर से ऊपर उठ रही थी बार-बार, और मैं उनका नाम ले-लेकर कराह रही थी।
“चाचा… प्लीज़… मुझे रोको… नहीं तो मैं…” मैंने कहा, और उसी वक्त मेरे शरीर में एक ज़बरदस्त झटका लगा, मेरी चूत की मांसपेशियाँ ज़ोर से सिकुड़ीं, और मेरा पूरा शरीर काँपने लगा। चाचा ने अपनी उँगलियाँ तेज़ी से अंदर-बाहर कीं, और मेरी चूत से रस की बौछार निकल पड़ी, मानो किसी ने पानी की बोतल उलट दी हो। मेरी आँखों के आगे अंधेरा छा गया, और मैं पूरी तरह से ढीली पड़ गई।
चाचा ने अपनी लुंगी खोल दी, और उनका देसी लंड बाहर आ गया। मैंने पहली बार वास्तव में किसी मर्द का देसी लंड देखा था, और मैं हैरान रह गई थी उसका साइज़ देखकर। कम से कम 8 इंच का मोटा लौड़ा, जिसकी नसें उभरी हुई थीं और आगे से चमक रहा था। चाचा ने मुझसे कहा, “इसे पकड़ो, नेहा, महसूस करो।” मैंने हिचकिचाते हुए अपना हाथ बढ़ाया और उनके गर्म और तने हुए लंड को पकड़ लिया।
मेरे नंगे चाचा का देसी लौड़ा मेरी मुट्ठी में फड़फड़ा रहा था, मानो किसी जीवित चीज़ को पकड़ रखा हो। चाचा ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और उसे ऊपर-नीचे करने लगे, मुझे हैण्डजॉब देना सिखा रहे थे। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, और मैंने देखा कि उनके लंड के आगे से एक चिपचिपा पानी निकल रहा था। “अब इसे मुँह में लो, नेहा,” उन्होंने कहा, और मैंने बिना कुछ सोचे-समझे अपना मुँह खोल दिया।
उनका लम्बा मोटा लंड मेरे मुँह के अंदर गया (Big Fat Cock), और मेरा मुँह एकदम भर गया। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया, और चाचा ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगे। “हाँ… ऐसे ही… बहुत अच्छा… नेहा…” उनकी आवाज़ मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मेरी जीभ उनके लंड के इर्द-गिर्द घूम रही थी, और मैं उसे पूरा अंदर तक ले जाने की कोशिश कर रही थी। मेरे मुँह से लार टपक रही थी, और चाचा मेरे बाल पकड़कर अपनी गति से हिल रहे थे।
“बेटी अब मैं तुम्हारी चूत में डालूँगा मेरा देसी लंड,” चाचा ने कहा और उन्होंने मुझे बेड पर लिटाकर मेरी दोनों टाँगें फैला दीं। मेरी वर्जिन चूत की चुदाई करने के लिए उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रखा, और फिर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। मुझे एक तेज़ दर्द महसूस हुआ, मानो कुछ फट रहा हो, लेकिन वो दर्द भी एक अजीब सा सुख दे रहा था। “आह्ह्ह… चाचा… दर्द हो रहा है…” मैंने कराहते हुए कहा।
“थोड़ा सब्र करो, बेटा,” चाचा ने कहा और उन्होंने अपनी चुदाई करने की रफ्तार थोड़ी कम कर दी। धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा, और उसकी जगह एक गहरा सुख लेने लगा। चाचा अब मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे, उनका पूरा लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। बिस्तर की चरमराहट, हमारी साँसों की आवाज़, और हमारे शरीरों की टकराहट की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
“तेरी चूत बहुत टाइट है, नेहा बेटी” चाचा बोले। “मेरी रसदार चूत सिर्फ तुम्हारे लिए है, चाचा,” मैंने जवाब दिया। मैं खुद हैरान थी अपनी बातों पर, लेकिन उस वक्त मैं सिर्फ और सिर्फ एक कामुक औरत थी, जिसे सिर्फ अपनी चूत की प्यास बुझानी थी। चाचा ने मेरी टाँगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं, और अब वो और भी गहराई से मेरी चूत में घुस रहे थे।
डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदने के लिए चाचा ने मुझे घुमाकर कुतिया की तरह बेड पर लिटा दिया, मेरी गांड हवा में थी और मेरा चेहरा तकिए में दबा हुआ था। उन्होंने मेरे कुल्हे पकड़े और अपना लंड मेरी चूत में पीछे से डाल दिया। ये पोज़िशन और भी गहरी थी, और चाचा का लंड मेरी चूत की जड़ों तक जा रहा था। मेरी चीखें तकिए में दबकर धीमी हो रही थीं, लेकिन मेरे शरीर का हर रोमकूप खुला हुआ था।
चाचा की उँगलियाँ मेरी गांड के छेद पर आ गईं, और मैंने एक तेज़ झटका महसूस किया। “चाचा… वहाँ नहीं…” मैंने कहा, लेकिन उन्होंने अपनी उँगली धीरे-धीरे मेरी गांड के छेद में डाल दी। मैं और भी ज़ोर से कराह उठी, और मेरी चूत की मांसपेशियाँ ज़ोर से सिकुड़ गईं। चाचा ने अपनी उँगली मेरी गांड में डालते हुए मेरी चूत में अपना लंड तेज़ी से घुमाया, और मैं पूरी तरह से बेकाबू हो गई।
“अब मैं अपना माल तेरी चूत के अंदर डालूँगा,” चाचा ने कहा। उनकी साँसें बहुत तेज़ थीं, और उनकी पकड़ मेरे कुल्हों पर और मज़बूत हो गई थी। “हाँ चाचा… मेरी चूत में… पूरा माल डाल दो…” मैंने चिल्लाकर कहा। मेरा अपना शरीर भी एक और ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रहा था, और मैं जानती थी कि इस बार वो पहले से भी ज़्यादा ज़बरदस्त होगा।
चाचा ने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी, उनका लंड बिजली की तरह मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। अचानक मुझे महसूस हुआ कि उनका लंड और भी सख्त और मोटा हो गया, और फिर एक ज़ोरदार धक्के के साथ उनका गर्म चिपचिपा माल मेरी चूत के अंदर छूट पड़ा। उसी वक्त मेरी चूत भी ज़ोर से सिकुड़ी, और मैं चीख पड़ी, मेरी आँखों के आगे तारे नाच रहे थे। चाचा मेरे ऊपर गिर पड़े, पूरी तरह से बेजान।
करीब 10 मिनट तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे, हमारे शरीर पसीने से लथपथ थे और एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। चाचा का लंड अब नरम पड़ चुका था, लेकिन वो अब भी मेरी चूत के अंदर ही था, और उसकी गर्माहट मुझे एक अजीब सी शांति दे रही थी। चाचा ने मेरा माथा चूमा और कहा, “तुम अब मेरी औरत हो, नेहा।” मैंने सिर्फ अपनी बाँहें उनके गले में डाल दीं और अपनी आँखें बंद कर लीं।
जब माँ शाम को घर लौटीं, तो मैं अपने कमरे में थी और चाचा अपने कमरे में। माँ को कुछ पता नहीं चला, और मैंने भी कुछ नहीं कहा। लेकिन मेरे मन में एक तूफान चल रहा था। क्या मैं एक रांड थी? क्या ये सब गलत था? लेकिन मेरा शरीर और मन दोनों जानते थे कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जो मैं नहीं करना चाहती थी। चाचा ने मेरी माँ की इजाज़त नहीं ली थी, लेकिन मेरी अपनी इजाज़त ज़रूर ली थी।
अगले कुछ हफ्तों में, चाचा और मेरे बीच का ये अवैध शारीरिक रिश्ता और भी गहरा होता गया। हर दोपहर, जब माँ स्कूल जातीं, चाचा का मोटा लौड़ा मेरी टाइट चूत के अंदर उछल कूद कर रहा होता था। मैंने उन्हें ब्लोजॉब (Blowjob) देना सीख लिया था, वो मेरी गांड में उंगली डालना सीख गए थे, और हमारी हर चुदाई पिछली चुदाई से ज़्यादा तीव्र और ज़्यादा गहरी होती जाती थी। मैंने अपनी चूत को हर पोज़िशन में चुदवाया, और हर बार एक नई दुनिया का दरवाज़ा खुलता गया।
एक दिन माँ ने मुझसे कहा, “नेहा बेटी, तुम्हारे चाचा तुमसे बहुत प्यार करते हैं। वो मुझसे बोले थे कि वो तुमसे शादी करना चाहते हैं, अगर तुम राज़ी हो तो।” मेरी माँ की बात सुनकदर मैं सन्न रह गई। मेरे और चाचा के अवैध सेक्स सम्बन्ध के बारे में मेरी माँ को सब पता था? लेकिन माँ के चेहरे पर कोई गुस्सा या शर्म नहीं थी, सिर्फ प्यार था। “चाचा ने मुझसे पहले ही तुम्हारी चुदाई करने की इजाज़त माँग ली थी, बेटा, तुम्हारे साथ सोने से पहले ही,” माँ ने कहा, और मैं उनसे लिपट कर रो पड़ी।
आज चाचा और मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं, और मैं सबसे खुश औरत हूँ इस दुनिया में। हमारी रातें अब भी उतनी ही गर्म हैं, हमारी चुदाई अब भी उतनी ही जंगली है, और मेरी चूत अब भी सिर्फ और सिर्फ मेरे चाचा के देसी लंड के लिए तरसती है। कुछ लोग हम चाचा-भतीजी के इस रिश्ते को गलत कह सकते हैं, लेकिन मेरे लिए यही सच्चा प्यार है।
तो दोस्तों, ये थी मेरी पहली अन्तर्वासना हिंदी चाचा-भतीजी चुदाई की कहानी, जो मेरे अपने चाचा के साथ हुई। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी ये सच्ची कहानी पसंद आई होगी। प्लीज़ मुझे कमेंट्स में बताइएगा कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी, और अगर आप मेरी और कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं तो ज़रूर बताइएगा। आपके प्यार और सपोर्ट का बहुत-बहुत शुक्रिया।


