HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesभाभी बोली क्या तू मेरे जिस्म की भूख मिटा सकता है अपने लंड से

भाभी बोली क्या तू मेरे जिस्म की भूख मिटा सकता है अपने लंड से

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मैं विक्रम महरा हूँ। 25 साल का एक आम लड़का, जो जिंदगी में कुछ खास करने का सपना लेकर दिल्ली आया और हर रात पोर्न फ़िल्में देखकर मुठ मारने लग गया अपनी कामुकता शांत करने के चक्कर में। यहाँ एक चौथी मंजिल का किराए का फ्लैट लिया, जहाँ से पूरी बस्ती नजर आती। मैं अकेला था और अकेलापन आदत बन चुका था। लेकिन मेरी कामुक इच्छाएँ हर रात बिस्तर में करवटें बदलवा देती थीं।

फिर एक दिन सामने वाला फ्लैट खुला। एक औरत ने बाहर झाँका और मेरी नज़रें जम गईं। वो थीं मेरी नयी पड़ोसन कविता भाभी, 34 साल की, गोरा रंग, लम्बे घने बाल, और आँखों में एक अदृश्य आग। उनका पति राजेश एक सेल्स मैनेजर था जो 15 दिनों में मुश्किल से 4-5 दिन ही घर रहता। भाभी का शरीर किसी नाशपाती की तरह था—ऊपर हलका, नीचे भारी। उनके 36C के चुचे और चौड़े कुल्हे मुझे बेचैन कर देते।

पहली बार जब वो मेरे घर चीनी माँगने आईं, तब वो एक हल्के नीले सूट में थीं। दुपट्टा उनके बोबों पर से खिसक रहा था और गहरी नाभि का वो गड्ढा मेरे लंड को तेज़ कर गया। मैंने किसी तरह सँभाला और चीनी दे दी।

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भाभी बोली क्या तू मेरे जिस्म की भूख मिटा सकता है अपने लंड से अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी
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धीरे-धीरे मैं उनके लिए “काम का लड़का” बन गया। कभी पानी की बोतल लानी होती तो कभी कोई भारी सामान। हर बार वो मेरी प्यासी आखों के सामने कुछ ऐसे झुकतीं कि उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों की खाई जैसी गहरी दरार मुझे बिलकुल साफ़-साफ दिखती। हो सकता है वो कामुक पड़ोसन जानबूझकर करती थीं या फिर मेरा ही मन खराब था। लेकिन असलियत यही थी कि मेरा 7 इंच का तना हुआ लंड उन्हें हर बार छू लेने की तड़प रखता।

एक दिन मैं उनके यहाँ पंखा ठीक करने गया। वो नहाई हुई थीं और बिना ब्रा के एक टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट्स में थीं। उनके निप्पल टी-शर्ट के कपड़े को चीरते हुए से बाहर आ रहे थे। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। मैंने पंखा ठीक किया और जाते-जाते उन्होंने मेरी बाँह पर हाथ रखा – “थैंक्स विक्की, तू तो मेरी बहुत मदद करता है।” उनके स्पर्श से मेरे अंडकोष तक करंट दौड़ गया।

शाम को जब भी लाइट जाती तो वो अपनी बालकनी में खड़ी होकर हवा खातीं। मेरी नज़रें उनके उभारों पर टिक जातीं। मुझे पता था कि वो भी मुझे देख रही हैं। हमारी आँखों में एक अनकही बातचीत होती, एक कामुक साज़िश।

फिर एक दिन मौसम बदला। आसमान काला हुआ और बारिश शुरू हो गई। ऐसी बारिश जो पूरी रात नहीं रुकी। रात के 9 बजे के करीब लाइट गुल हो गई। सारी बिल्डिंग अँधेरे में डूब गई। मैं मोमबत्ती जलाकर बैठा था कि दरवाज़े पर हल्की दस्तक सुनाई दी।

मैंने खोला। कविता भाभी हाथ में एक मोमबत्ती पकड़े खड़ी थीं। उनके चेहरे पर उदासी थी, लेकिन उनकी सफेद नाइटी में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थीं। बारिश की नमी से उनके बाल चेहरे पर चिपक रहे थे और बिना ब्रा के उनके बोबों का आकार पूरी नंगाई से उभर रहा था। उनके पैरों की खनक और इत्र की मीठी खुशबू ने मेरा दिमाग सुन्न कर दिया।

“विक्की, थोड़ी देर तेरे पास बैठ सकती हूँ? आज बहुत डर लग रहा है। इतनी तेज़ बिजली… और राजेश जी का फोन भी नहीं लग रहा।” मैंने जवाब दिया की “ज़रूर भाभी, आओ। मैं तो अकेला ही था।” फिर वो आकर सोफे पर बैठ गईं। मैं भी थोड़ी दूरी पर बैठ गया। कुछ मिनट खामोशी रही, बस बारिश की बूँदों और बिजली की कड़क सुनाई पड़ रही थी। मोमबत्ती की पीली रोशनी में उनकी गीली आँखें और गहरे होंठ जादू कर रहे थे।

सहसा उन्होंने आह भरी। “विक्की, तुझे कभी अकेलापन अखरता है?” मैंने धीरे से कहा, “हाँ भाभी, बहुत। मैं तो पूरे दिन की थकान के बाद रात में बिस्तर पर गर्म बदन का साथ ढूँढ़ता हूँ। लेकिन नसीब में नहीं है।”

उनकी आवाज़ रुआँसी हो गई। “तुझे शायद पता होगा, मेरी शादी को 8 साल हो गए, लेकिन मेरी चूत अभी तक जवान है। राजेश को बस अपनी भूख मिटानी है। 5 मिनट की चुदाई और फिर खर्राटे। मेरी भोसड़ी में तो आग लगी रहती है… कभी-कभी तो खुद ही अपनी उँगलियाँ डालकर गुस्सा ठंडा करती हूँ।”

उनकी स्पष्टवादिता ने मेरे खड़े लंड को और सख्त कर दिया। मेरा तन मन डोल रहा था, लेकिन मैंने सँभलकर कहा, “भाभी, आपको ऐसा नहीं सोचना चाहिए। आप तो पूरी हूर हो।” कामुक पड़ोसन भाभी बोली ने नज़रें मिलाकर देखा। “तो क्या तू मेरे जिस्म की भूख मिटा सकता है अपने लंड से …? क्या तू मेरी चूत को असली मर्द का स्वाद चखा सकता है?” ये सुनते ही सारी मर्यादा ध्वस्त हो गई। मैंने उनका हाथ पकड़कर अपनी जाँघ पर रख लिया। “भाभी, आज मैं आपको एक ऐसी चुदाई का मज़ा दूँगा जो आप कभी नहीं भूलेंगी।”

अब हमारे शरीर आपस में गुत्थम-गुत्था हो रहे थे। मेरे होंठ उनके गले पर चले गए। उनका नमकीन स्वाद और इत्र की मिली-जुली खुशबू ने मुझे मदहोश कर दिया। मैंने उनकी नाइटी का पट्टा खींचा। नाइटी सरककर कमर तक आ गई। उनके 36C के भारी-भरकम चुचे बाहर आ गए। दूधिया चमड़ी पर नीली नसें, भूरे बड़े निप्पल पहले से ही खड़े थे। मैंने एक बोबे को दोनों हाथों से दबोचा और मुँह में भर लिया। “आह… विक्की… मेरे चुचे बड़े संवेदनशील हैं… हल्के से चूसो, लेकिन निप्पल को जीभ से सहलाओ।”

मैंने मेरी कामुक पड़ोसन भाभी का आदेश माना। पहले हल्की चुस्की, फिर दाँतों से हल्की कुतरन। उनकी कराहट पूरे कमरे में गूँजने लगी। मेरे दूसरे हाथ ने उनके दूसरे स्तन को मसलना शुरू कर दिया। मैंने देखा, उनके निप्पल चूची के दूध की भाँति सख्त हो रहे थे। “भाभी, आपकी चूचियों का स्वाद तो बहुत ही प्यारा है।” “चूसता रह, मेरे बच्चे… माँ का दूध नहीं, मेरी चाहत चूस।”

फिर उनके हाथ मेरी पैंट पर आ गए। मैंने खुद अपनी पैंट और अंडरवियर उतार फेंका। मेरा 7 इंच लम्बा और 2 इंच मोटा तना हुआ लंड बाहर कूद पड़ा। सिरे पर चमकता हुआ चिपचिपा प्री-कम और फूली हुई लाल-लाल नसें देखकर वो आँखें फाड़ गईं। “हे भगवान विक्की! ये तो बहुत मोटा लौड़ा है। कहीं मेरी टाइट चूत फाड़कर भोसड़ी ना बना दे।” मैंने बोला की “आज आपकी भोसड़ी का श्रृंगार मेरा देसी लंड करेगा भाभी। आपने कभी ऐसा बड़ा लंड नहीं लिया होगा अपने जीवन में।”

उन्होंने झुककर मेरे लंड को पकड़ लिया और अपने मुँह में ले लिया मुखमैथुन करने के लिए। उनके गर्म होंठों ने सिरे को दबाया, फिर जीभ ने मेरे लंड के गोटे चाटे। वो बारी-बारी से मेरे अंडकोष और लंड की लम्बी त्वचा पर जीभ फेर रही थीं। मैं कराह उठा – “भाभी, पूरा गले में लो।”

ब्लोजॉब करने के लिए उन्होंने धीरे से पूरा 7 इंच का देसी लंड अपने मुँह में भर लिया। मेरा लंड उनके गले के अंदर तक पहुँच गया। वो बिना घबराए अपना सिर आगे-पीछे कर रही थीं, बिल्कुल किसी कॉलगर्ल की तरह। उनका एक हाथ मेरे अंड की थैली को सहला रहा था। “मम्म… तेरे लंड का स्वाद कितना अच्छा है… मैं तो बस पीती रहूँ।”

“अब मैं आपकी रसदार चूत चाटूँगा, भाभी।” फिर मैंने मेरी कामुक पड़ोसन भाभी को सोफे पर लिटा दिया और उनकी टाँगें कंधों पर रख लीं। उनकी नाइटी पूरी निकल गई। उनकी भरी जाँघों के बीच एक काली झाड़ी सी जमी झांट के बाल नजर आ रहे थे। उस जंगल के बीच में उनकी चूत की दरार गुलाबी और चमकदार! पहले से बहती हुई चूत का रस उनकी गांड की लकीर तक आ पहुँचा था। मैंने हाथ से झांट हटाई और जीभ से चूत के होठ चाटे।

“आह… और… अंदर डाल जीभ… मेरी फुद्दी में आग लगा दे।” मैंने जीभ से उनकी भोसड़ी के अंदर तक चाटा। चूत का रस मीठा-नमकीन था। मेरे हाथ ने उनके कुल्हों को सहलाते हुए गांड के छेद पर उंगली रखी। “विक्की, मत छेड़… पहले चूत चोद।” मैंने उनकी बात मान ली।

मैंने खुद को पोज़ीशन में लाया। पहले मिशनरी स्टाइल में—उनकी टाँगें फैलीं, मेरा लंड उनकी चूत के मुहाने पर अड़ा। “भाभी, अब तैयार हो जाओ।” मैंने धक्का दिया। उनकी टाइट भोसड़ी ने पहले तो रोक लगाई, लेकिन फिर चूत के रस की चिकनाहट से मेरा 7 इंच का लंड सरकता हुआ पूरी तरह अंदर तक समा गया।

“हाइ गॉड… विक्की… बहुत गहरा जा रहा है… लेकिन दर्द मीठा है… चोद… मुझे बेरहमी से चोद।” मैंने ज़ोर-ज़ोर से झटके देना शुरू किया। हर झटके पर मेरी कामुक पड़ोसन भाभी की टाइट चूत से स्क्विश-स्क्विश की आवाज़ आ रही थी। उनके बोबे ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने उनके निप्पल मुँह में भरे और लगातार चूत पर वार किए। “भाभी… तुम्हारी चूत तो बिल्कुल रसदार कुएँ जैसी है। मेरा लंड डूब रहा है।”

भाभी चुदते हुए बोली की “मैं रंडी हूँ तेरी… बस चोदता जा… चूत का सारा रस पी जा।” कुछ 5 मिनट तक मिशनरी में चुदाई करने के बाद मैंने उन्हें कुत्ते की पोज़िशन में मोड़ा। उनके मोटे चूतड़ ऊपर उठे, गांड का भोंपू साफ नजर आ रहा था। मैंने पीछे से लंड घुसा दिया। ये एंगल गहरी चुदाई के लिए बेस्ट था। मेरे अंडकोष उनके चूतड़ों पर थप-थप बज रहे थे।

चुदते चुदते भाभी मोंन करने लगी “और तेज़… मेरी भोसड़ी के अंदर तक दे… मेरी सारी सप्ताह की भूख मिटा दे।” मैंने उनके बाल पकड़कर खींचें और चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी। अब मेरा लंड उनकी चूत के हर कोने को खुरच रहा था। “भाभी… मैं आपके बिना नहीं रह सकता। इतनी गर्म चूत पाकर तो मन करता है रोज़ चुदवाऊँ।”

“चुदवा लेना… मैं तेरे लिए हर रात घर का दरवाज़ा खोलूंगी। मेरी चूत अब से तेरी।” इसी बीच मैंने अपनी 1 उंगली उनकी गांड के छेद पर रगड़ी। पहले तो वे सिटपिटाईं, लेकिन फिर उन्होंने कहा, “डाल… आज तू सब ले ले मेरा।” मैंने चूत में लंड रखते हुए गांड में उंगली धीरे-धीरे घुसाई। दोहरी घुसाई से उनकी कराहट असहनीय हो गई। “अब माल निकाल विक्की… बहुत हो गया… मुझे पूरा पिला दे अपना वीर्य।”

मैं भी लगभग 20 मिनट तक चोदकर थक चुका था। मेरे अंडकोष में जोर का झटका लगा। मैंने लंड बाहर खींचा और उन्हें सामने घुटनों पर बैठा लिया। वो हाथ फैलाए मेरे लंड का इंतज़ार कर रही थीं, जैसे भूखी रंडी माल के लिए तरसे।

मैंने अपना देसी लंड जोर से हिलाया। कमशॉट के दौरान वीर्य का पहला मोटा फव्वारा सीधे उनके खूबसूरत चेहरे पर गिरा, उनके माथे और गालों पर चिपचिपा माल फैल गया। दूसरा धार उनके बोबों पर, निप्पलों को ढकते हुए। तीसरा और चौथा झटका उनके होठों पर। वो चट से माल चाट गईं और बाकी बचे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं।

भाभी मेरा गढ़ा वीर्य देखकर बोली “इतना गाढ़ा वीर्य… पूरे 4 हफ्ते की तपस्या का फल है क्या?” मैंने कहा की “हाँ भाभी, आज पूरी तपस्या आप ही को समर्पित है।” हम देवर-भाभी दोनों वहीं सोफे पर फैल गए। बारिश थम चुकी थी और लाइट वापस आ चुकी थी।

उन्होंने मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए कहा, “ये हमारी फर्स्ट चुदाई थी, लेकिन लास्ट नहीं। अब मैं हर 2 दिन में तेरे लंड का पानी पीने आऊँगी।” मैंने हँसते हुए कहा, “भाभी, अब तो इस फ्लैट का मालिक समझो, बस राजेश भाई से बचके रहना।” “उनकी तो नज़र सिर्फ सूटकेस पर रहती है। मेरी टाइट चूत और तेरा देसी लंड उनके लिए नॉट फॉर सेल।”

अगली सुबह जब मैंने मेरी कामुक पड़ोसन भाभी की बोल्कॉनी की तरफ देखा तो वो अपने घर की बालकनी में खड़ी अपने बूब्स सहलाते हुए नजर आईं। लेकिन अब उनकी आँखों में एक अपनापन था। हम दोनों जानते थे कि बस रात का इंतज़ार करना है – उनके पति के 2 हफ्ते के टूर के बाद भी यही सिलसिला कभी नहीं रुकेगा। आपको कामुक पड़ोसन भाभी की चुदाई की ये अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी कैसी लगी? कमेंट में जरूर बताएं – आपकी फीडबैक से अगली स्टोरी और हॉट बनाऊंगा।

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