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अश्लील वीडियो गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड चित्तौड़गढ़ राजस्थान में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल अरविंद व्यास ने ऑफिस में स्कूल की ही एक शिक्षिका कांता पांडे से करवाया मुखमैथुन चुम्मा चाटी के बाद ले रहे थे ब्लोजॉब का आनंद:- शिक्षा को समाज का आधार स्तंभ माना जाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा और नैतिक मूल्यों के साथ तैयार करता है। लेकिन जब इसी शिक्षा के मंदिर में अनुचित और अशोभनीय हरकतें सामने आती हैं, तो यह समाज की नींव को हिला देता है। हाल ही में चित्तौड़गढ़, राजस्थान के राउप्रावि सालेरा के स्कूल प्रिंसिपल अरविंद व्यास और स्कूल की ही महिला शिक्षिका कांता पांडिया के स्कूल में ही अश्लील कृत्य (ब्लोजॉब) करने का मामला सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया।
यह शर्मनाक घटना ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हिडन कैमरों से उजागर हुई, जिससे न केवल आक्रोश पैदा हुआ बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नैतिकता पर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए। सार्वजनिक स्थल (राउप्रावि सालेरा) में महिला अध्यापिका के साथ अश्लील/अनैतिक हरकत करने संबंधी सेक्स विडियो सोशल मिडिया पर वायरल हुआ । प्राप्त तथ्यों के अनुसार विभिन्न दिनांकों में विद्यालय में महिला शिक्षिका कान्ता पाण्डिया अध्यापिका लेवल-1 एवं श्री अरविन्द नाथ व्यास दोनों के प्रधानाध्यापक कक्ष में अश्लील / अनैतिक हरकत करते हुये के विडियो विभिन्न सोशल मिडिया में वायरल हो चुके हैं।
अश्लील ब्लोजॉब वीडियो गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड चित्तौड़गढ़ में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने शिक्षिका से करवाया मुखमैथुन

राजस्थान में सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल अरविंद व्यास ने अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए स्कूल की ही शिक्षिका कांता पांडे से करवाया मुखमैथुन (Blowjob) यह घटना तब प्रकाश में आई जब ग्रामीणों ने स्कूल के प्रिंसिपल अरविंद व्यास और शिक्षिका की हरकतों पर शक होने के बाद उनकी गतिविधियों पर नजर रखने का निर्णय लिया। कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे तंग आकर ग्रामीणों ने स्कूल में गुप्त कैमरे लगाए। मुखमैथुन करते हुए अश्लील वीडियो गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड हो गयी इस सेक्स विडियो में उन दोनों की अश्लील हरकतें साफ-साफ देखी जा सकती थीं। ये मुखमैथुन वीडियो सोशल मीडिया और पोर्न वेबसाइट पर बड़ी तेजी से वायरल हो गए और पूरे मामले ने तुरंत ही बड़ा रूप ले लिया। गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड हुई सेक्स विडियो में अरविंद व्यास स्वतः भगवान कामदेव के अवतार लग रहे हैं।
स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल की ही महिला टीचर नियमित रूप से प्रिंसिपल के ऑफिस में जाती थी और वहां कंप्यूटर पर काम करने का नाटक करती थी, लेकिन दोनों घंटों तक ऑफिस में अकेले रहते थे। विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने संदेह होने पर गाँव वालों की मदद से प्रिंसिपल के ऑफिस में गुपचुप तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए, जिसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल अरविंद व्यास का शिक्षिका कांता पांडे से मुखमैथुन करवाते हुए पोर्न विडियो सामने आया.
घटना के सामने आने के बाद कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय, प्रारम्भिक शिक्षा, चित्तौडगढ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल और शिक्षिका को सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। लेकिन यह कदम ग्रामीणों के गुस्से को शांत करने के लिए काफी नहीं था। ग्रामीणों ने मांग की कि दोनों को केवल निलंबित करने के बजाय नौकरी से बर्खास्त किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। इस घटना से आहत होकर ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला लगा दिया और तब तक स्कूल न खोलने का निर्णय लिया जब तक न्याय नहीं होता। अश्लील वीडियो वाले अध्यापक अरविंद व्यास को अब निलंबित की जगह सरकारी नौकरी से परमानेंट बर्खास्त कर दिया गया है।
कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय, प्रारम्भिक शिक्षा, चित्तौडगढ ने कार्यालय-आदेश जरी करा है की “प्रकरण में प्राप्त प्राथमिक जांच रिपोर्ट एवं अन्य अभिलेखों का गहन मनन, अध्ययन एवं उक्तानुसार किये गये विश्लेषण के उपरांत अधोहस्ताक्षरकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुँचे है कि श्री अरविन्द नाथ व्यास तत्कालीन अध्यापक वर्तमान निलंम्बित की नैतिक अधमता यथा अश्लील यौन दुराचरण रचना में अंतर्लिप्तता स्पष्ट रूप से पाई गई है तथा इनके द्वारा विधालय परिसर में प्रधानाचार्य कक्षा कक्ष में राजकीय कर्तव्य निर्वहन के दौरान किये गये अश्लील यौन दुराचरण से शिक्षा विभाग एवं राजस्थान सरकार के सुशासन की छवि धूमिल हुई है।
श्री अरविन्द नाथ व्यास तत्कालीन अध्यापक वर्तमान निलंम्बित द्वारा किये गये गंभीर दुराचरण के कारण छात्रो के भविष्य के साथ-साथ अभिभावकों के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है । श्री अरविन्द नाथ व्यास तत्कालीन अध्यापक वर्तमान निलम्बित का आचरण ऐसा है जिससे इनकी राज्य सेवा के प्रति सत्यनिष्ठा संदेहास्पद पाई गई है। अतः राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 19 (ii) में दिये गये प्रावधानान्तर्गत श्री अरविन्द नाथ व्यास तत्कालीन अध्यापक वर्तमान निलंम्बित को तत्काल प्रभाव से राज्य सेवा से पदच्युत (DISMISSAL FROM SERVICE) किया जाता है ।”
श्री अरविन्द नाथ व्यास को स्पष्टीकरण पत्र दिनांक 20.01.2025 जारी कर अपना अभिकथन चाहा गया । श्री अरविन्द नाथ व्यास ने अपना कोई प्रत्युत्तर जांच दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। इस घटना ने चित्तौड़गढ़, राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में गिरते नैतिक स्तरों को उजागर किया है। स्कूल, जिसे ज्ञान और मूल्यों का केंद्र माना जाता है, ऐसे कृत्यों से अपनी पवित्रता खो देता है। माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित और नैतिक माहौल में पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन जब शिक्षक ही अनुचित व्यवहार में लिप्त हों, तो यह भरोसा टूट जाता है। ऐसी घटनाएं न केवल शिक्षा व्यवस्था की छवि को धूमिल करती हैं बल्कि बच्चों के मनोविज्ञान पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

ग्रामीणों की शिकायतों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया, जो प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने बार-बार इनकी हरकतों की शिकायत की, लेकिन उनकी बातों को या तो अनदेखा कर दिया गया या उन्हें धमकियां दी गईं। आखिरकार, जब कोई अन्य विकल्प नहीं बचा, तो उन्होंने हिडन कैमरे लगाने का फैसला किया। यह कदम विवादास्पद हो सकता है, लेकिन ग्रामीणों के पास सच सामने लाने के लिए यही एकमात्र उपाय था।
यह मामला इस बात की आवश्यकता पर जोर देता है कि स्कूलों में अनुशासन और नैतिकता बनाए रखने के लिए शिक्षकों और स्कूल स्टाफ पर भी कड़े नियम लागू किए जाएं। शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की नियमित जांच और निगरानी होनी चाहिए। शिकायत निवारण तंत्र को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
ग्रामीणों की नाराजगी पूरी तरह से जायज है। उनकी मांगें, जैसे कि स्कूल में सेक्स करने वाले दोषियों को नौकरी से हटाना और उन्हें गिरफ्तार करना, इस बात को दर्शाती हैं कि वे अपने मासूम बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की पवित्रता को लेकर गंभीर हैं। केवल सस्पेंड करना या उन्हें दूसरी जगह ट्रांसफर करना समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें।
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के सरकारी स्कूल की यह घटना शिक्षा क्षेत्र में नैतिकता और जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करती है। शिक्षक न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार देते हैं। ऐसे में शिक्षकों को अपने नैतिक कर्तव्यों के प्रति अधिक सतर्क रहना चाहिए। यदि वे अपने मार्ग से भटकते हैं, तो इसका असर केवल उनके विद्यालय तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह पूरे समाज के लिए हानिकारक हो सकता है।
अंत में, राजस्थान की यह घटना शिक्षा व्यवस्था और समाज के लिए एक चेतावनी है। यह हमें याद दिलाती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी संरक्षित करना है। इस घटना को ध्यान में रखते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा संस्थान ऐसे कृत्यों से मुक्त रहें। आपकी इस घटना पर क्या राय है? क्या आपको लगता है कि सस्पेंशन पर्याप्त है या कठोर कदम उठाने चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।


