फ्री में पढ़ें खेत में जोरदार आउटडोर चुदाई करने के बाद देवर ने पेशाब की धार छोड़ी भाभी की चूत पर अन्तर्वासना हिंदी आउटडोर सेक्स स्टोरी :- मेरा नाम विजय है। उम्र तैंतीस साल। कालापुर गाँव, हरियाणा का रहने वाला हूँ। यहाँ खेतों की हरियाली और गर्मी की तपिश बस्ती की जान है। लेकिन असली आग तो लोगों की चूत और लंड में जलती है। मेरी भाभी, राधिका, गाँव की सबसे मस्त माल। गोरी चमड़ी, बूब्स ऐसे कि लंड सलामी दे, और गांड इतनी भारी कि हर कदम पर लचकती है। मेरा देवर, सूरज, जवान, हरामी, और चूत का भूखा। उसकी आँखें भाभी की चूत पर टिकी रहती थीं।
मैं एक गरीब मजदुर हूँ और खेतों में मजदूरी करता हूँ। लेकिन उस दिन, खेत में जो देखा, उसने मेरी चुदास को आग लगा दी। भाभी और सूरज की नंगी चुदाई, उनकी गंदी गालियाँ, और वो पेशाब का खेल—सब मेरे दिमाग में बस गया। ये कहानी उसी वासना, गंदगी और निषिद्ध चुदाई की है, जो तुम्हारे लंड और चूत को तड़पाएगी।
मुफ्त में पढ़ें चुदाई के बाद देवर ने पेशाब की धार छोड़ी भाभी की चूत पर अन्तर्वासना हिंदी आउटडोर सेक्स स्टोरी

उस दिन दोपहर थी। सूरज आग बरसा रहा था। मैं गन्ने के खेत में कुदाल चला रहा था। पसीना टपक रहा था। तभी देखा, राधिका भाभी और सूरज खेत के कोने में जा रहे थे। भाभी की लाल साड़ी हवा में उड़ रही थी। उनकी नंगी कमर चमक रही थी। बूब्स ब्लाउज में कैद थे, लेकिन उफान मार रहे थे। सूरज की पैंट में लंड का उभार साफ दिख रहा था। मेरे मन में चुदास जागी। कुछ तो गंदा होने वाला था।
मैं चुपके से गन्ने की आड़ में छिप गया। दिल धड़क रहा था। डर था कि पकड़ा जाऊँगा। लेकिन चूत की भूख ने पैर रोक दिए। सूरज ने भाभी को बाँहों में खींच लिया। “भाभी, तेरी चूत आज फाड़ दूँगा और इसका आज तेरी चूत का भोसड़ा बना डालूँगा,” सूरज ने गंदी हँसी के साथ कहा। भाभी ने उसका गाल थपथपाया, “हरामी, धीरे बोल! कोई सुन लेगा।” लेकिन उनकी आँखों में वासना चमक रही थी।
उसके बाद सूरज ने भाभी की साड़ी खींची। साड़ी जमीन पर गिरी। भाभी की गोरी जाँघें नंगी थीं। उनकी चूत सिर्फ पतली पैंटी में छिपी थी। सूरज ने पैंटी फाड़ दी। भाभी की चूत गुलाबी, गीली, और चुदाई के लिए तड़प रही थी। “साले, मेरी चूत को नंगा कर दिया!” भाभी चिल्लाई। सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, ये तो अब मेरा भोसड़ा है।” उसने अपनी उंगलियाँ भाभी की चूत में डाल दीं।
भाभी की सिसकियाँ शुरू हुईं। “उह! हरामजादे, धीरे! चूत फट जाएगी।” सूरज ने दो उंगलियाँ और गहरी डालीं। भाभी की गांड हिलने लगी। उनकी चूत से पानी टपक रहा था। मैं छिपा हुआ देख रहा था। मेरा लंड पैंट में तंबू बना रहा था। शर्मिंदगी थी, लेकिन चुदास इतनी कि मैं रुक नहीं सका। मैंने पैंट में हाथ डाला और लंड सहलाने लगा।
अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए सूरज ने गाँव वाली सेक्सी भाभी को खेत की गीली मिट्टी पर लिटाया। उनकी साड़ी अब पूरी उतर चुकी थी। बूब्स ब्लाउज से बाहर थे। सूरज ने ब्लाउज फाड़ा। भाभी के बूब्स उछलकर बाहर आए। गोल, भरे हुए, और निप्पल्स सख्त। सूरज ने एक बूब्स पकड़ा और चूसने लगा। “कुत्ते, मेरे बूब्स खा जाएगा?” भाभी ने हँसते हुए कहा। सूरज ने जवाब दिया, “भाभी, ये तो मेरी मलाई है।” उसकी जीभ भाभी की निप्पल्स पर नाच रही थी।
खेत में भाभी देवर की मिशनरी चुदाई का तूफान
उसके बाद सूरज ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड बाहर आया। मोटा, लंबा, और नसों से भरा। भाभी ने देखा और मुँह में पानी भर लिया। “साले, ये तो बैल का लंड है!” सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, ये तेरी टाइट चूत फाड़कर भोसड़ा बनाने के लिए है।” उसने गाँव वाली कामुकता से भरी भाभी की दोनों टाँगें फैलाईं। चूत गीली और तैयार थी फटकर भोसड़ा बनने के लिए। सूरज ने लंड चूत के मुँह पर रखा। एक जोरदार धक्का मारा। भाभी चीखी, “माँ की चूत! धीरे, हरामी!”
सूरज ने धक्के शुरू किए। उसका लंड भाभी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ भाभी के बूब्स उछल रहे थे। उनकी सिसकियाँ खेत में गूँज रही थीं। “चोद साले, मेरी चूत का भोसड़ा बना दे!” भाभी चिल्ला रही थी। सूरज ने एक बूब्स पकड़ा और निप्पल काटा। भाभी की चीख और तेज हुई। “कुत्ते, मेरे बूब्स को चैन दे!” लेकिन उनकी चूत और गीली हो गई।
मैं छिपा हुआ देख रहा था। मेरा लंड अब पैंट फाड़ने को तैयार था। मैंने लंड बाहर निकाला और मुठ मारना शुरू किया। भाभी की सिसकियाँ, सूरज के धक्के, और उनकी गंदी गालियाँ मेरे दिमाग में आग लगा रही थीं। सूरज ने भाभी को डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदने के लिए घोड़ी बनाया। भाभी की गांड हवा में थी। उसने पीछे से लंड डाला। भाभी की चीख निकली, “हरामी, मेरी चूत फाड़ दी!” सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, अभी तो गांड बाकी है।”
उसने भाभी की गांड पर थप्पड़ मारा। भाभी की गांड लाल हो गई। उनकी चूत से पानी टपक रहा था। सूरज का लंड अब और तेजी से चूत में जा रहा था। भाभी की सिसकियाँ अब सिर्फ मजा थीं। “चोद साले, और जोर से चोद!” सूरज ने जवाब दिया, “भाभी, तेरा भोसड़ा आज मेरा है।” मैं देख रहा था। मेरी चुदास अब बेकाबू थी।
छिपा कैमरा और भाभी देवर की कामुकता से भरी गंदी हरकतें
तभी मैंने देखा, सूरज ने पास में एक छोटा कैमरा रखा था। हरामी ने सब रिकॉर्ड करने की ठानी थी। भाभी को नहीं पता था। वो बस चुदाई में डूबी थी। सूरज ने भाभी को फिर मिशनरी में लिटाया। उसका लंड चूत में गहरे तक जा रहा था। भाभी के बूब्स उछल रहे थे। उनकी निप्पल्स सख्त थीं। सूरज ने एक निप्पल मुँह में लिया और चूसा। भाभी चीखी, “कुत्ते, मेरे बूब्स चूस ले!”
सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, तेरे बूब्स तो रसीले आम हैं।” उसने चुदाई करते करते धक्के और तेज किए। भाभी की चूत अब पूरी गीली हो चुकी थी चुदते चुदते। आउटडोर सेक्स के दौरान हर धक्के के साथ चप-चप की आवाज आ रही थी। भाभी चिल्लाई, “साले, मेरी चूत का रस निकाल दे!” सूरज का लंड अब चूत में पूरा अंदर था। भाभी की गांड मिट्टी में धँस रही थी। मैं छिपा हुआ देख रहा था। मेरा लंड पानी छोड़ने को तैयार था।
उसके बाद सूरज ने भाभी की गांड में उंगली डाली। भाभी चौंकी, “हरामी, ये क्या कर रहा है?” सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, तेरी सेक्सी गांड भी चखनी है।” उसने भाभी की गांड के छेद में उंगली डालकर अंदर-बाहर की। जैसे ही भाभी की गांड में उसकी ऊँगली अंदर बाहर होने लगी वो मदक सिसकियाँ लेने लगी। भाभी की सिसकियाँ में दर्द और मजा दोनों था। उसने भाभी की गांड में थूक लगाया और धीरे से लंड डाला। भाभी चीखी, “माँ की चूत! मेरी गांड फट जाएगी!” लेकिन वो रुकी नहीं। उनकी गांड अब सूरज के लंड को झेल रही थी।
मैं देख रहा था। मेरी चुदास अब हद पार कर रही थी। मैंने मुठ मारकर पानी छोड़ दिया। लेकिन आँखें उनकी चुदाई से नहीं हटीं। भाभी की गांड लाल थी। सूरज का लंड अब गांड में पूरा अंदर था। भाभी की सिसकियाँ अब चीख बन गई थीं। “चोद साले, मेरी गांड और चूत दोनों फाड़ दे!” सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, तू तो रंडी बन गई है।”
आउटडोर सेक्स के दौरान देवर भाभी ने खेला पेशाब का गंदा खेल
चुदाई के बाद सूरज और भाभी थक गए। लेकिन उनकी वासना खत्म नहीं हुई। सूरज ने भाभी को गन्ने के ढेर पर लिटाया। उसका लंड अभी भी खड़ा था। उसने भाभी के बूब्स पर पानी छोड़ा। भाभी हँसी, “हरामी, मेरे बूब्स गंदे कर दिए!” सूरज ने जवाब दिया, “भाभी, अभी तो असली गंदगी बाकी है।” उसने अपना लंड पकड़ा और भाभी के मुँह के पास लाया।
भाभी ने चौंककर कहा, “साले, ये क्या कर रहा है?” सूरज ने हँसकर कहा, “भाभी, मेरे पेशाब का स्वाद चख।” उसने अपना लंड हिलाया और भाभी के मुँह पर पेशाब की धार छोड़ दी। भाभी पहले चौंकी, फिर हँस पड़ी। “कुत्ते, तू तो पूरा हरामी है!” उसने मुँह खोला और सूरज का पेशाब पीने लगी। गर्म, पीला पेशाब भाभी के होंठों पर टपक रहा था।
उसके बाद भाभी ने सूरज का लंड चूसा। पेशाब की बूंदें अभी भी उसके मुँह पर थीं। “साले, तेरा पेशाब भी नमकीन है,” भाभी ने हँसते हुए कहा। सूरज ने जवाब दिया, “भाभी, तेरी चूत का रस तो इससे भी मीठा है।” उसने भाभी की चूत चाटी। भाभी की सिसकियाँ फिर शुरू हुईं। “चाट साले, मेरी चूत का पानी पी ले!” मैं देख रहा था। मेरी चुदास फिर जाग गई।
सूरज ने भाभी को फिर लिटाया। इस बार उसने भाभी की चूत में उंगलियाँ डालीं। गाँव वाली नंगी भाभी की चूत से चिपचिपा पानी टपक रहा था। सूरज ने अपनी उंगलियाँ चाटी और कहा, “भाभी, तेरा रस तो अमृत है।” भाभी ने हँसकर कहा, “साले, तेरा पेशाब भी कम नहीं।” उनकी गंदी बातें और हरकतें मेरे लंड में आग लगा रही थीं। मैंने फिर मुठ मारी। लेकिन उनकी चुदास खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।
आउटडोर सेक्स के दौरान भाभी देवर की चुदास का चरम और शर्मिंदगी
उसके बाद सूरज ने भाभी की चुदाई करने के लिए उन्हें फिर से घोड़ी बनाया। जैसे ही भाभी चुदवाने के लिए घोड़ी बनी वैसे ही उसका लंड भाभी की चूत में फिर से घुसा चुदाई करने के लिए। अब वह भाभी को बहुत जल्दी जल्दी चोदने लगा और भाभी की सिसकियाँ अब दर्दनाक चीख बन गई थीं। “चोद साले, मेरी चूत का भोसड़ा बना दे आफ फाड़ कर!” सूरज ने धक्के और तेज किए। उसका लंड अब चूत और गांड दोनों में जा रहा था। भाभी की गांड खेत की गीली मिट्टी में रगड़ खा रही थी। उनकी चूत से पानी टपक रहा था। सूरज ने फिर पेशाब की धार छोड़ी, इस बार लंड से निकली पेशाब की धार सीधी भाभी की चूत पर पड़ी।
भाभी हँसी, “हरामी, मेरी चूत का भोसड़ा बनाने के बाद नहला दिया पेशाब की धार मारकर!” सूरज ने जवाब दिया, “भाभी, ये तो तेरी चूत की पूजा है।” उसने भाभी के बूब्स चूसे और चूत चाटी। भाभी की सिसकियाँ अब सिर्फ मजा थीं। “चाट साले, मेरी चूत का रस पी ले!” मैं छिपा हुआ देख रहा था। मेरी चुदास अब हद पार कर रही थी। मैंने फिर मुठ मारकर पानी छोड़ दिया।
लेकिन शर्मिंदगी भी थी। मैं अपनी भाभी और देवर की चुदाई देख रहा था। ये गलत था। लेकिन मेरी चूत की भूख मुझे रोक नहीं रही थी। भाभी और सूरज की गंदी हरकतें—चूत में लंड, गांड में उंगली, और पेशाब का खेल—मेरे दिमाग में बस गई थीं। मैं लाचार था। उनकी चुदाई मेरे लिए नशा बन गई थी। मैं अब उनकी हरकतों का हिस्सा बनना चाहता था।
आखिरकार, सूरज और भाभी सेक्स करते करते बहुत ज्यादा थक गए। करीब दो घंटे बाद उन दोनों की आउटडोर चुदाई खत्म हुई। चुदवाने के बाद भाभी ने अपनी साड़ी ठीक की। सूरज ने पैंट पहनी। लेकिन विडियो कैमरा अभी भी चल रहा था और विडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। मैं चुपके से वहाँ से निकल गया। मेरा दिल धड़क रहा था। शर्मिंदगी थी। लेकिन चुदास ज्यादा थी। रात को नींद नहीं आई। भाभी की चूत, सूरज का लंड, और उनका पेशाब का खेल मेरे दिमाग में घूम रहा था। अपनी अन्तर्वासना को शांत करने के लिए मैंने मुठ मारी तब जाकर मेरे दिल को करार आया…
आउटडोर चुदाई के बाद देवर ने पेशाब की धार छोड़ी भाभी की चूत पर अन्तर्वासना हिंदी आउटडोर सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
राधिका भाभी और सूरज की खेतों में मस्त आउटडोर चुदाई, गंदी गालियाँ, और पेशाब का खेल मेरी चुदास को जगा गया। उनकी नंगी हरकतें—चूत में लंड, गांड में उंगली, और पेशाब की धार—मुझे शर्म और उत्तेजना में डुबो गईं। यह कहानी गाँव की वासना और निषिद्ध चुदाई का नंगा सच है। आपकी राय? कहानी, किरदार और गंदा लहजा कैसा लगा? और ऐसी कहानियाँ चाहेंगे?


