HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesघोड़ी बनाकर चूत की जगह मकान मालकिन की गांड में लंड डाला

घोड़ी बनाकर चूत की जगह मकान मालकिन की गांड में लंड डाला

यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी “घोड़ी बनाकर चूत की जगह मकान मालकिन आंटी की गांड में लंड डाला” राहुल गुप्ता और उसकी मकान मालकिन अक्षरा उपाध्याय के बीच की एक कामुक और निषिद्ध रिश्ते की है। राहुल, 19 साल का एक छात्र, शहर में किराए के कमरे में रहता है। मकान मालकिन अक्षरा, एक आकर्षक और कामुक महिला, अपने पति के लंबे समय तक बाहर रहने के कारण अकेली होती है और सेक्स के लिए अतृप्त होती है। शादी शुदा मकान मालकिन और किरायेदार छात्र की बातचीत धीरे-धीरे अंतरंग हो जाती है, और एक रात उनकी वासना चरम पर पहुँचती है। यह कहानी उनके अवैध शारीरिक संबंधों का वर्णन करती है, जिसमें कामुकता और उत्तेजना का हर पल जीवंत है। अंत में, यह अवैध सेक्स संबंध नियमित हो जाता है, और मकान मालकिन अक्षरा की कामुक बहन की चुदाई की कहानी अगली कड़ी के लिए छोड़ी जाती है. आइये निचे पूरी हिंदी सेक्स स्टोरी विस्तार से पढ़ते हैं…

दोस्तों, नमस्ते! मेरा नाम राहुल गुप्ता है, और मैं आज आपको अपनी जिंदगी की एक ऐसी सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसने मेरे दिल और जिस्म को झकझोर दिया। कुछ साल पहले, जब मैं 19 साल का था, मैं पढ़ाई के लिए एक नए शहर में आया था। वहाँ मैंने एक कमरा किराए पर लिया। मेरे मकान मालिक एक दंपति थे—राजेश उपाध्याय अंकल और अक्षरा उपाध्याय आंटी। अंकल ज्यादातर बिजनेस के लिए बाहर रहते थे, और घर पर मकान मालकिन अक्षरा आंटी अकेली होती थीं। फिर, धीरे-धीरे हमारी बातचीत शुरू हुई।

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मकान मालकिन अक्षरा आंटी की उम्र करीब 35 साल थी, लेकिन उनकी खूबसूरती और फिगर किसी भी पुरुष को दीवाना बना दे। मकान मालकिन का फिगर 36-32-38 का था, और उनकी हर अदा में कामुकता झलकती थी। मकान मालकिन और मेरी बहुत पटती थी, वो कामुक महिला अक्सर मेरे कमरे में आकर बातें करती थीं। उनकी मीठी आवाज़ और हंसी मुझे बहुत पसंद थी। मैं शहर में बिलकुल नया था, इसलिए मकान मालकिन की बातों में मुझे सुकून मिलता था। उनकी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी, जो मेरे दिल को बेकरार करती थी।

एक दिन, बातों-बातों में मकान मालकिन अक्षरा आंटी ने पूछा, “राहुल, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?” मैंने शरमाते हुए कहा, “नहीं आंटी, अभी तो कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा? कभी जरूरत नहीं महसूस होती क्या गर्लफ्रेंड की तुझे…?” मैंने हंसकर जवाब दिया, “हाँ, जरूरत तो होती है, लेकिन क्या करूँ!” उनकी इस बात पर हम दोनों हंस पड़े। फिर मैंने भी हिम्मत करके मकान मालकिन से पूछ लिया, “आंटी, अंकल तो ज्यादातर बाहर रहते हैं, आपको उनकी याद नहीं आती?” वो बोलीं, “आती तो है, लेकिन मैं भी क्या करूँ?”

इसके बाद, हमारी बातें और खुलीं। अक्षरा आंटी अब मुझसे बिना झिझक बात करने लगी थीं। मैंने कई बार देखा कि जब मकान मालकिन फर्श पर पोंछा लगाती थीं, तो उनकी साड़ी ऊपर उठ जाती थी। उनकी गोरी जांघें और कभी-कभी पैंटी की झलक मेरे लंड को खड़ा कर देती थी। उनकी चूचियों को देखकर मेरे जिस्म में आग लग जाती थी। वो मेरी गन्दी नजरों को भांप लेती थीं, लेकिन कुछ कहती नहीं थी, बस हल्के से मुस्कुरा देती थीं। उनकी मुस्कान मुझे यह संकेत दे रही थी की सेक्स करने की आग दोनों तरफ लगी हुई है।

एक रात का कामुक तूफान

एक दिन अक्षरा आंटी ने कहा, “राहुल, आज मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा। मैं तुम्हारे कमरे में सो जाऊँ?” मैंने मकान मालकिन को तुरंत हामी भर दी। उन्होंने मेरे बिस्तर के पास अपना बिस्तर लगाया और बाहर चली गईं। रात को जब वो लौटीं, तो उनकी साड़ी में वो इतनी हॉट लग रही थीं कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और मन में मकान मालकिन आंटी का रफ सेक्स करने के गंदे गंदे ख्याल आने लगे। मैंने मकान मालकिन से मजाक में कहा, “आंटी, साड़ी में नींद कैसे आएगी? कुछ हल्का पहन लीजिए।” मेरी बात सुनकर मकान मालकिन ने मेरी आखों के सामने ही अपनी साड़ी उतार दी और पेटीकोट-ब्लाउज में बिस्तर पर लेट गईं। मकान मालकिन की मोटी मोटी चूचियाँ ब्लाउज से बाहर झांक रही थीं।

रात को नाइट बल्ब की हल्की रोशनी में उनका पेटीकोट जांघों तक उठ गया। उनकी गोरी जांघें और चूचियाँ मुझे पागल कर रही थीं। मैं एक घंटे तक उन्हें देखता रहा और अपना लंड सहलाता रहा। फिर, मुझसे रहा नहीं गया। मैं मकान मालकिन के बिस्तर पर गया और उनकी एक चूची को दबाने लगा। अचानक वो उठ गईं और बोलीं, “राहुल, ये क्या कर रहे हो?” मैंने बेकाबू होकर कहा, “आंटी, मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा। मुझे अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए आपको घोड़ी बनाकर चोदना है।”

वासना का चरम और राउंड नेक ब्लाउज खोलकर दूध पिलाने के लिए समर्पण

मकान मालकिन अक्षरा आंटी मेरी आँखों में देखने लगीं। फिर बोलीं, “नहीं, ये गलत है।” लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी और उनकी चूचियाँ जोर जोर से दबाने लगा। कुछ ही पलों में वो भी मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए गर्म हो गईं। उन्होंने कहा, “मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हूँ मगर तुम किसी को बताओगे तो नहीं की हम दोनों के बीच अवैध सेक्स संबंध हैं?” मैंने जवाब दिया, “कभी नहीं, आंटी।” फिर मैं मकान मालकिन के शरबती होंठों पर टूट पड़ा। उनकी जीभ मेरे मुँह में थी, और मैं उनके होंठ चूस रहा था। मैंने मकान मालकिन से कहा, “आंटी, अब चुदने के लिए अपनी साड़ी ब्लाउज व अन्य सभी कपड़े उतार दो।” उन्होंने अपने बड़े भारी स्तनों पर पहना हुआ राउंड नेक ब्लाउज खोल दिया। जैसे ही आंटी ने अपना राउंड नेक ब्लाउज खोला उनकी काली ब्रा में गोरी चूचियाँ देखकर मैं उनके बूब्स से दूध चूसने के लिए पागल हो गया।

मैंने उनकी ब्रा से एक चूची निकाली और चूसने लगा। उनके काले निप्पल बहुत मादक लग रहे थे। मैं उनकी एक चूची के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरी चूची मसल रहा था। उनका पेटीकोट ऊपर उठ गया था। मैंने उनकी काली पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा और चाटने लगा। वो ‘आह आह’ करने लगीं और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाने लगीं। फिर मैंने उनका पेटीकोट और पैंटी उतार दी। उनकी गोरी, मांसल चूत पर हल्की झांटें थीं। मैंने उनकी चूत चाटना शुरू किया, जो योनी से रिस रहे नमकीन पानी से गीली थी।

चुदाई की आग और चूत चाटकर मुखमैथुन करने का जुनून

मैं मकान मालकिन की चूत को कुत्ते की तरह चाट रहा था। उनकी चूत का खट्टा-नमकीन स्वाद मुझे दीवाना बना रहा था। आंटी मेरे सिर को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थीं। उनके नंगे मम्मे और चिकनी जांघें मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। मैं उनकी चूचियों पर टूट पड़ा और उन्हें मसलने लगा। आंटी बोलीं, “आह, और जोर से मसलो मेरी चूचियों को… खा जाओ इन्हें!” उनकी चुदास भरी बातें सुनकर मैं और गर्म हो गया।

फिर मकान मालकिन ने मेरा लंड पकड़ा और हिलाने लगीं। पहली बार कोई औरत मेरा लंड हिल हिला कर मेरा मुठ मार रही थी। मकान मालकिन ने मेरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगीं। ब्लोजॉब के दौरान मुझे ऐसा मजा आ रहा था कि मेरी साँसें रुक रही थीं। कुछ देर बाद मैंने मकान मालकिन को चोदने के लिए लिटाया और उनकी टांगें फैलाकर उनकी चूत में लंड डाल दिया। चूंकि उनकी चूत गीली थी, लंड बहुत आसानी से बुर के अंदर चला गया। मकान मालकिन को दर्द हुआ, लेकिन मैं रुका नहीं। मैं उनकी चूचियाँ पकड़कर जोर-जोर से चोदने लगा।

घोड़ी बनाकर गांड फाड़ चुदाई का रोमांचक अनुभव

करीब दस मिनट बाद मकान मालकिन आंटी लंड की सवारी करने के लिए मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरा लंड चूसा और फिर उस पर बैठकर उछलने लगीं। मेरे लंड की सवारी करने के दौरान मकान मालकिन के उछलते मम्मे देखकर मैं और जोश में आ गया। फिर हम मुखमैथुन करने के लिए 69 की सेक्स पोजीशन में आए। मैं उनकी चूत चाट रहा था, और वो मेरा लंड चूस रही थीं। इसके बाद मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। घोड़ी बनी हुई आंटी की मांसल गांड देखकर मेरा मन बहक गया। मैंने घोड़ी बनाकर चूत की जगह मकान मालकिन आंटी की गांड में लंड डाला और उनकी गांड मारने का प्रयास करने लगा। जैसे ही मेरा लंड आंटी की गांड के अंदर गया वैसे ही वो दर्द से चीख पड़ीं और गुस्सा हो गईं।

मैंने माफी मांगी और लंड गांड के सुराख़ से बहार निकालकर उनकी गांड में उंगली करने लगा। फिर मैंने तेल लगाकर मकान मालकिन की गांड ढीली की और फिर लंड डाला। गांड मरवाने के दौरान, शुरू-शुरू में उन्हें काफी ज्यादा दर्द हुआ, लेकिन बाद में मकान मालकिन बड़े मजे से डॉगी सेक्स पोजीशन में अपनी गांड मरवाने लगीं। करीब आधे घंटे की गांड चुदाई के बाद मैं मकान मालकिन आंटी की गांड में झड़ गया। फिर हम नंगे लेटकर अश्लील बातें करने लगे। आंटी ने पूछा, “कितनी लड़कियों को घोड़ी बनाकर चोदा है तूने आज तक?” मैंने कहा, “आप पहली हैं।” वो हंस पड़ीं और बोलीं, “तुम तो एक्सपर्ट हो गांड मारने में! मुझे लगा ही नहीं कि तुम पहली बार गांड मार रहे हो, गांड की चुदाई करवाने में थोड़ा दर्द जरुर हुआ मगर बाद में दर्द आनंद में बदल गया था”

कुछ देर बाद मेरा मूड फिर बना मकान मालकिन की चुदाई करने का। मैंने मुखमैथुन (Blowjob) करने के लिए मकान मालकिन आंटी को अपने मुँह पर बिठाया और उनकी चूत चाटी। उनकी मोटी चूत की फांकें चूसकर मैंने उन्हें पागल कर दिया। फिर मैंने उन्हें कुर्सी पर बिठाकर चोदा। मकान मालकिन आंटी जोश में बोलीं, “आह, और जोर से चोदो!” इसके बाद मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा किया और एक पैर उप्पर हवा में उठाकर उनकी चूत में मेरा खड़ा लंड डाल कर भी चोदा। सेक्स करने के दौरान हम दोनों का पानी एक साथ छूटा। उस रात एक बार और चुदाई हुई, फिर हम सो गए। इसके बाद, हमारी चुदाई रोज का खेल बन गया। एक साल तक मैंने अक्षरा आंटी को खूब चोदा। फिर उनकी छोटी बहन आई, और आंटी ने उसकी चूत भी मुझे दिलाई। वो कहानी मैं अगली बार सुनाऊंगा।

निष्कर्ष – घोड़ी बनाकर चूत की जगह मकान मालकिन की गांड में लंड डाला

यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी राहुल और अक्षरा आंटी के बीच की उस कामवासना और जुनून को दर्शाती है, जो अकेलेपन और चाहत से शुरू हुई। दोनों ने अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा किया और एक गुप्त रिश्ते को जन्म दिया। यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी न केवल कामुकता से भरी है, बल्कि यह मानवीय भावनाओं और निषिद्ध इच्छाओं की गहराई को भी दर्शाती है। अक्षरा और राहुल का यह रिश्ता एक साल तक चला, जो उनकी जिंदगी का एक रोमांचक हिस्सा बन गया।

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