फ्री में पढ़ें प्रोफ़ेसर के लंड से अपनी बालों वाली चूत की चुदाई करवाने के बाद छिनाल लाइब्रेरियन मैडम ने मुझसे भी चुदवाया कॉलेज लाइब्रेरी में कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स स्टोरी – Free mein padhein Professor ke lund se apni baalon wali chut ki chudai karwane ke baad chhinaal librarian madam ne mujhse bhi chudwaya college library mein kaamukta bhari antarvasna Hindi XXX sex story – Read for free After getting her hairy pussy fucked by the professor’s dick, the slutty librarian madam also got fucked by me in the college library. Erotic Hindi XXX sex story full of lusty inner desires …
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का प्रारंभ :- मैं रोहित महरा हूँ, 22 साल का एक आम लड़का, जो सरकारी कॉलेज में बी.ए. फाइनल ईयर का स्टूडेंट हूँ। मुझे लाइब्रेरी में पढ़ने का ऐसा जुनून था कि अकसर सबके जाने के बाद भी मैं वहीं रुका रहता था। उस मनहूस शाम घड़ी में 7:45 बजे थे और पूरा कॉलेज लाइब्रेरी हॉल सन्नाटे में डूबा था। तभी पिछली अलमारियों के धुँधले कोने से किसी औरत की कातर सिसकियाँ मेरे कानों में पड़ीं। मेरा दिल तेज़ी से धड़क उठा और मैं साँस रोककर जासूसी करने के लिए बढ़ चला।
मैं बेहद आहिस्ता से पुरानी किताबों की क़तारों के पीछे पहुँचा और वहाँ का नज़ारा देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। सेक्सी लाइब्रेरियन मैडम मिसेज़ वंदना शर्मा, जो 35 साल की एक सख़्त और रौबदार औरत मानी जाती थीं, एक बड़ी सी मेज़ पर अधनंगी पड़ी थीं। उनकी साड़ी और ब्लाउज़ फर्श पर बिखरे हुए थे, और सिर्फ एक लहराता हुआ साया उनके जिस्म पर था। प्रोफ़ेसर रंजन मेहरा, हमारे राजनीति शास्त्र के अध्यापक, उनके ऊपर झुके हुए अपनी उँगलियाँ उनकी बालों वाली चूत में ज़ोर-ज़ोर से अन्दर-बाहर कर रहे थे (Pussy Fingering)। उनके 36D के भारी बूब्स हर झटके के साथ बेतहाशा नंगे थिरक रहे थे।
फ्री में पढ़ें प्रोफ़ेसर के लंड से अपनी बालों वाली चूत की चुदाई करवाने के बाद छिनाल लाइब्रेरियन मैडम ने मुझसे भी चुदवाया कॉलेज लाइब्रेरी में कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स स्टोरी

प्रोफ़ेसर मेहरा ने गुर्राते हुए कहा, “क्या बात है छिनाल, आज तो तेरा भूखा भोसड़ा बहुत गरम है।” मिसेज़ शर्मा की आँखें मदहोशी में बंद थीं और उनके होंठों से बस अश्लील सिसकियाँ निकल रही थीं। यह सुनकर और देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई, क्योंकि कॉलेज में इन दोनों को मर्यादा की मूरत समझा जाता था। मेरी खुद की हालत भी अब ख़राब हो चुकी थी, और मेरा लंड मेरी जीन्स में तनकर खड़ा हो गया था। मैं सोच रहा था कि यह शरीफ़ लाइब्रेरी तो सरेआम एक भोसड़े में तब्दील हो चुकी थी।
फिर प्रोफ़ेसर ने अपनी पैंट की चैन खोली और एक मोटा, लम्बा लौड़ा बाहर निकाल दिया। वह कम से कम 7 इंच का तना हुआ लंड था, जिसके सिर पर पहले से ही चिपचिपा माल की बूँदें चमक रही थीं। उसकी झांट के घने बाल पूरी तरह साफ़ दिखाई दे रहे थे, और उसे देखकर मिसेज़ शर्मा की आँखों में एक जानवर सी भूख उभर आई। उन्होंने बिना एक पल गँवाए आगे झुककर उस पूरे लंड को एक ही बार में अपने मुँह के अन्दर खींच लिया।
अब वह उस लंड को ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई प्यासी छिनाल कई सालों बाद मर्द के लंड का स्वाद चख रही हो। उनकी ज़बान प्रोफ़ेसर के लंड के सिर पर नाच रही थी और उनके होंठ उस लंड के पूरे तने को कसकर जकड़े हुए थे। प्रोफ़ेसर की ज़ोरदार आहें और मिसेज़ शर्मा के मुँह से आने वाली गीली चूसने की आवाज़ें खामोश लाइब्रेरी में गूँज रही थीं। मैं मंत्रमुग्ध सा एक अलमारी के पीछे छुपा यह सब देखता और सुनता रहा, मेरे शरीर का रोम-रोम जल रहा था।
कुछ ही मिनटों बाद प्रोफ़ेसर ने उनके बालों को पकड़कर ज़ोर से पीछे खींचा और उन्हें घुमाकर कुत्ते की तरह (Doggy Sex Position) मेज़ पर झुका दिया। “अब अपनी रसीली चूत खोल, छिनाल,” चिल्लाते हुए उसने अपने तने हुए लंड को उनकी पहले से गीली चूत पर रगड़ना शुरू किया। मिसेज़ शर्मा ने अपने कूल्हे पीछे को उभारे और अगले ही पल वह मोटा लौड़ा एक ही झटके में पूरा अन्दर तक उनकी चूत में घुस गया। उनके मुँह से एक तेज़ चीख निकली, “अह्ह्ह… मेरी टाइट चूत फाड़ दी साले ने!”
प्रोफ़ेसर बिना रुके, बेरहमी से उन्हें चोदने लगा। हर झटके के साथ उनके बोबे आगे-पीछे ऐसे झूल रहे थे जैसे तूफ़ान में फँसे हों। मैं डर और रोमांच के मिले-जुले भाव से ठिठका खड़ा रहा, मेरा मन खुद को गुनाहगार समझ रहा था लेकिन मेरी नज़रें हट नहीं पा रही थीं। उनकी चूत से चूत का रस टपककर मेज़ पर गिर रहा था, और उस गंदे नज़ारे ने मेरे अन्दर एक बवंडर खड़ा कर दिया था।
प्रोफ़ेसर ने अपनी रफ़्तार और तेज़ की और गालियों की बौछार कर दी, “ले मेरा माल अपनी भोसड़ी में, रंडी!” आखिरकार उसने एक भर्रायी हुई आवाज़ के साथ अपना लंड बाहर खींचा और मिसेज़ शर्मा के चेहरे पर वीर्य की मोटी-मोटी धारें निकाल दीं। उनका चेहरा उस चिपचिपे माल से पूरी तरह लथपथ हो गया, और वह बेदम होकर मेज़ पर गिर पड़ीं। तभी मैंने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन मेरा जूता एक गिरी हुई किताब से टकरा गया और खटाक् की आवाज़ हुई। दोनों ने चौंककर मेरी तरफ देखा, और मेरी तो साँस ही रुक गई।
प्रोफ़ेसर घबराकर जल्दी से अपनी पैंट पहनकर वहाँ से भाग गया, लेकिन मिसेज़ शर्मा ने अपनी साड़ी समेटते हुए मुझे रोक लिया। “रोहित, इधर आ,” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी कँपकँपी और हुक्म की मिलावट थी। मैं डर के मारे थर-थर काँप रहा था, लेकिन उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया। उनका वीर्य से सना चेहरा और उनकी महकती हुई कामुक देह मेरे बेहद करीब थी।
उन्होंने मेरी आँखों में झाँकते हुए एक शैतानी मुस्कान बिखेरी और फुसफुसाई, “जो तुमने देखा, अगर किसी को बताया तो तुम्हारा पूरा साल बरबाद कर दूँगी। लेकिन शायद तुम्हें भी एक प्यासी औरत की भूख मिटाने का शौक हो।” इतना कहकर उनकी निगाहें सीधे मेरे जीन्स के उभार पर चली गईं, जहाँ मेरा खड़ा लंड साफ़ दिख रहा था। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर उस उभार को ज़ोर से सहलाना शुरू कर दिया, और मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
“बेटा तुमने आज तक किसी औरत की चूत का स्वाद नहीं चखा ना?” उन्होंने मेरी जीन्स की ज़िप नीचे खींचते हुए पूछा। मैं शर्म और हवस की दोहरी मार झेलते हुए बस ना में सिर हिला पाया। उन्होंने मेरा 6 इंच का तना हुआ लंड बाहर निकालकर अपनी गर्म मुठ्ठी में जकड़ लिया और धीरे-धीरे हैण्डजॉब (Masturbation) देने लगीं। मेरे पूरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गई, क्योंकि यह पहला मौका था जब किसी औरत ने मेरे लौड़े को इस तरह छुआ था।
छिनाल लाइब्रेरियन मैडम ने मेरा लंड अपनी उँगलियों से सहलाते हुए कहा, “बेटा बहुत प्यारा और सख़्त लंड है तुम्हारा, इससे तो पूरी रात रंडी बनकर चुदवाने का मन करे।” फिर उन्होंने नीचे झुककर अपने होंठ मेरे लंड के सिर पर रखे और उसे चूसना शुरू कर दिया। उनका मुखमैथुन इतना कला भरा था कि मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। वह बारी-बारी से लंड के सिर को चूमतीं, सहलातीं और पूरा अन्दर तक लेकर अपने गले की गर्माहट से मुझे पागल कर रही थीं।
मेरे हाथ अब खुद-ब-खुद उनके बालों में चले गए और मैं हल्के-हल्के कराहने लगा। इस पर उन्होंने अपनी ज़बान मेरे लंड के निचले हिस्से पर फेरते हुए मेरे अंडकोषों को सहलाना शुरू कर दिया। मैंने पहले कभी ऐसी अनुभूति नहीं पाई थी, यह दर्द और सुख का एक मिला-जुला एहसास था। उन्होंने मेरी अंड की थैली को हल्के से मुँह में लेकर चूसा, और मैं ज़ोर से काँप उठा। इसके बाद उन्होंने मुझे उसी मेज़ पर लिटा दिया, जहाँ कुछ देर पहले प्रोफ़ेसर उन्हें चोद रहे थे।
अब बारी थी उनके जिस्म का पूरा जायज़ा लेने की। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी साड़ी और ब्लाउज़ उतार फेंका, और अपने 36D के बोबे मेरे सामने नंगे कर दिए। उनके भूरे और खड़े निप्पल जैसे मुझे बुला रहे थे, और उनके शरीर से पसीने और इत्र की एक नशीली महक आ रही थी। मैंने तुरंत अपना मुँह उनकी चूचियों पर लगा दिया और एक भूखे बच्चे की तरह उनके निप्पल चूसने लगा। उस छिनाल लाइब्रेरियन मैडम ने मेरे बाल पकड़ लिए और ज़ोर-ज़ोर से आहें भरने लगीं।
मैं अपने एक हाथ से उनके दूसरे बोबे (Breast) की मालिश कर रहा था मेरा थूक लगा लगाकर, जबकि मेरा दूसरा हाथ उनकी पीठ से होता हुआ उनके चूतड़ों को सहला रहा था। “मेरी चूत को भी प्यार दो, रोहित,” उन्होंने कातर स्वर में कहा। मैंने धीरे से अपना चेहरा नीचे की ओर सरकाया और पहली बार किसी औरत की बालों वाली चूत अपनी आँखों के सामने पाई। उसमें से एक तेज़, नमकीन और थोड़ी सी तीखी गंध उठ रही थी, जो सीधे मेरे दिमाग़ में नशा बनकर दौड़ गई।
मैंने अपनी ज़बान निकाली और उनकी चूत के गुलाब की पंखुड़ी जैसे लाल लाल होंठों पर फेरी, तो उनका सारा बदन तन गया। उनकी चूत का रस मेरी ज़बान पर आया, और मैं पागलों की तरह उसे चाटने लगा। मिसेज़ शर्मा मेरे बालों को पकड़कर मुझे अपनी चूत पर दबा रही थीं और सिसक-सिसक कर कह रही थीं, “हाँ, ऐसे ही चाट मेरी फुद्दी को!” मैंने उनकी गीली चूत में अपनी दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर-बाहर करते हुए उनकी क्लिट पर ज़बान से तेज़ हरकतें कीं।
वह एकाएक ज़ोर से चीख पड़ीं और उनका पूरा जिस्म ऐंठ गया। मुझे लगा जैसे उन्होंने अपनी चूत से ढेर सारा रस छोड़ा है, और वह खुद को मेरे हवाले कर चुकी थीं। मैंने अपनी उँगलियाँ बाहर निकालीं और चिपचिपे रस से भरी उँगलियाँ चाट गया। उसके बाद उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपने ऊपर बिठाकर मेरा लंड अपनी गरम, तंग चूत के मुहाने पर रखवा लिया।
“बेटा अब मुझे ज़ोर से चोद,” उन्होंने हुक्म दिया, और खुद ही अपने कूल्हे नीचे करके पूरा लंड अन्दर ले लिया। वह क्षण अविस्मरणीय था, छिनाल लाइब्रेरियन मैडम की तंग चूत (Tight Vagina) की दीवारों ने मेरे लंड को इतनी कसकर जकड़ा कि मेरी चीख निकल गई। वह पूरी तरह रंडी बनकर मेरे ऊपर उछलने लगीं, उनके बोबे मेरे मुँह पर झूल रहे थे और मैं उन्हें चूसता जा रहा था। हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ और मेज़ की चरमराहट पूरे हॉल में गूँज रही थी।
कुछ देर बाद मैंने अपनी पकड़ बदली और उन्हें घुमाकर मेज़ के सहारे खड़ा कर दिया। मैंने उनकी पीछे से आकर उनके कूल्हे पकड़े और अपना मोटा लौड़ा झटके से उनकी पहले से भीगी हुई चूत में घुसा दिया। अब मैं उन्हें कुत्ते की तरह चोद रहा था, और हर झटके के साथ उनकी गांड मेरी जाँघों से टकराकर लहरा रही थी। मैंने एक हाथ आगे करके उनके बोबे को बुरी तरह मसलना शुरू किया, जबकि दूसरे से उनकी गांड का छेद सहला रहा था।
“मेरी चूत फाड़ डाल, और ज़ोर से चुदाई कर बेटा,” छिनाल लाइब्रेरियन मैडम लगातार चीख रही थीं। मैंने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी और उन्हें इतनी बेरहमी से चोदा कि हमारे जिस्म पसीने से तरबतर हो गए। उनकी चूत अब हर झटके पर चिपचिपी आवाज़ें निकाल रही थी, और मुझे अपने अंडकोषों में एक ज़बरदस्त दबाव महसूस होने लगा। वह भी समझ गईं और बोलीं, “हाँ बेबी, अब अपना सारा गरम माल मेरी चूत में उड़ेल दे।”
छिनाल लाइब्रेरियन मैडम की यह गुज़ारिश सुनते ही मेरे अंदर जोश भर गया और फिर मुझसे और रुका नहीं गया। मैंने 5-6 ज़ोरदार झटके और लगाए और फिर एक गहरी चीख के साथ अपने अंडकोषों का सारा गरम शुक्राणु सीधे उनकी चूत के अन्दर खाली कर दिया। उसी वक़्त मिसेज़ शर्मा का शरीर भी ऐंठकर रह गया और वह ज़ोर से चीखते हुए मेरे लंड पर ही झुक गईं। हम दोनों बेदम होकर मेज़ पर गिर पड़े, एक-दूसरे से लिपटे हुए, हमारे जिस्मों से चुदाई की गंध उठ रही थी।
काफी देर बाद जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो उन्होंने मेरा माथा चूमा और कहा, “तुम तो छुपे रुस्तम निकले, एकदम रंडीबाज़ हो तुम।” मैं शर्माते हुए हँस पड़ा, और मेरे अन्दर का डर अब एक गहरी शांति में बदल चुका था। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि अब से यह लाइब्रेरी हर शाम मेरे और उनके गुप्त मिलन का अड्डा होगी। मैं उस रात बदला हुआ इंसान था, एक ऐसा शख़्स जिसने अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ अपनी छाती में दबा लिया था।
अगले कुछ हफ़्तों में हमारी मुलाक़ातों और अवैध सेक्स संबंधों का कामुक सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। हर शाम लाइब्रेरी बंद होने के बाद छिनाल लाइब्रेरियन मैडम और मैं एक-दूसरे के जिस्म की भूख मिटाते और प्यास बुझाते थे। एक दिन उन्होंने शरारती अंदाज़ में अपनी गांड दिखाते हुए गुदा सेक्स की ख्वाहिश ज़ाहिर की। मैंने पहले अपनी उँगली से उनके गांड के छेद को ढीला किया, फिर धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डाला, और एक नयी दुनिया का अनुभव लिया। वह दर्द और मज़े से चीखती रहीं, लेकिन उनकी आँखों की चमक बता रही थी कि उन्हें यह सब कितना भा रहा है।
अब मैं अकसर सोचता हूँ कि कॉलेज की वह लाइब्रेरी दिन में ज्ञान का मंदिर और रात में बेलगाम चुदाई का गवाह बन चुकी है। मिसेज़ शर्मा अब सिर्फ मेरी लाइब्रेरियन नहीं, बल्कि मेरी हर कल्पना को साकार करने वाली औरत बन चुकी हैं। प्रिय पाठकों, मैं रोहित आप सभी से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि कृपया अपनी बेशकीमती राय और कमेंट ज़रूर दें। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी यह सच्ची और धमाकेदार कहानी पसंद आई होगी, और अगर आपको कोई ख़ास पल अच्छा लगा तो मुझे ज़रूर बताएँ।


