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मरीज़ व डॉक्टर ने नर्स की चुदाई करी आईसीयू वार्ड में

मुफ्त में पढ़ें मरीज़ व डॉक्टर ने नर्स की चुदाई करी आईसीयू वार्ड में अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स कहानी – Muft mein padhein Mareez wa doctor ne nurse ki chudai kari ICU ward mein antarvasna Hindi XXX sex kahani – Read for free The patient and doctor fucked the nurse in the ICU ward. Erotic Hindi XXX sex story full of inner lust …

मैंने कभी सोचा नहीं था कि इंदौर के संजीवनी हॉस्पिटल की ICU वार्ड मतलब गहन चिकित्सा इकाई (Intensive Care Unit) की बर्फीली सफेद चादरें मेरी गर्म चूत के लिए बिस्तर बन जाएँगी। मेरा नाम श्वेता है, उम्र 32 साल, और मेरा फिगर देखकर हर मर्द की आँखें मेरे भारी चुचों और चौड़े कुल्हों पर अटक जाती थीं। नर्स की वर्दी के नीचे मेरा 36D का सीना और मांसल गांड का उभार किसी को भी पागल करने के लिए काफी था, लेकिन अंदर से मैं एक आम मध्यवर्गीय विधवा थी, जिसकी ज़िंदगी कर्ज और अकेलेपन में दम तोड़ रही थी।

एक रात शिफ्ट के दौरान ICU वार्ड के प्राइवेट केबिन में 45 साल के मरीज़ मिस्टर मल्होत्रा से मेरी पहली मुलाकात हुई, जिन्हें सब मर्जी बुलाते थे। वो दिल की बीमारी के बाद ठीक हो रहे थे, मगर उनकी नज़रें ठीक होने के बजाय मेरे बोबों के उभार पर चिपक गई थीं। उस रात उन्होंने सीधे कहा, “श्वेता, मुझे तेरा जिस्म चाहिए, एक रात के 20,000 रुपये ले ले।” मेरा दिमाग मना कर रहा था, मगर बेटे के स्कूल की फीस और माँ के इलाज के बिल ने मेरी आत्मा को कुचल दिया और मैंने हामी भर दी।

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मुफ्त में पढ़ें मरीज़ व डॉक्टर ने नर्स की चुदाई करीआईसीयू वार्ड में हिंदी XXX सेक्स कहानी Muft mein padhein — Mareez wa doctor ne nurse ki chudai kari ICU ward mein antarvasna Hindi XXX sex kahani
Muft mein padhein Mareez wa doctor ne nurse ki chudai kari ICU ward mein antarvasna Hindi XXX sex kahani

जैसे ही मैंने केबिन का दरवाजा बंद किया, मल्होत्रा के हाथ मेरी कमर पर आ गए और उनकी उँगलियाँ मेरे कूल्हों का मांस मसलने लगीं। उन्होंने मेरी नर्स की टोपी उतार फेंकी और मेरे खुले बालों में हाथ फेरते हुए मेरे होंठ चूम लिए। उनकी साँसों से विस्की की गंध आ रही थी, और मेरे शरीर पर एक अजीब सी कंपकंपी दौड़ गई। मैंने भी अपने अंदर की सारी झिझक को मारते हुए उनकी बेल्ट खोली और उनके पायजामे के अंदर झाँकते हुए तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया, जो देखने में मोटा और लम्बा लग रहा था।

मेरे मुँह से अनायास ही निकला, “उफ्फ, इतना बड़ा लंड तो मैंने सालों में नहीं देखा।” मल्होत्रा ने मुस्कुराते हुए मेरे सिर को अपनी गोद में दबा दिया और मैंने उनके लौड़े को अपने होंठों से छू लिया। उस तने हुए लंड की गरमाहट और नमकीन स्वाद ने मेरी तंग चूत में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। मैंने धीरे-धीरे उनका ब्लोजॉब (मुखमैथुन) शुरू किया, अपनी जीभ से उनके लंड के सुपारे को सहलाती रही और उनके अंडकोष को हल्के से मसलती गई। उनकी कराहें सुनकर मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी ज़िंदगी में पहली बार पैसों के लिए एक रंडी बन चुकी हूँ।

जब मेरे मुँह में उनका पूरा लंड घुसा तो मेरी साँस रुक गई और आँखों से आँसू छलक आए। फिर मल्होत्रा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी स्कर्ट ऊपर खींचते हुए बोले, “आज तो मैं तेरी इस रसदार चूत का पूरा मज़ा लूँगा।” उन्होंने मेरी पैंटी उतारी तो मेरी बालों वाली चूत की गीली दरारें साफ दिखने लगीं। उनकी उँगलियाँ जब मेरी चूत के भीतर घुसीं तो मैं सिहर उठी और मेरी चूत का रस उनकी उँगलियों पर चिपचिपा माल बनकर लग गया। मैंने अपने मोटे स्तन बाहर निकाल लिए और उन्हें निचोड़ने लगी ताकि मेरा तनाव कम हो, लेकिन जब उन्होंने मेरे निप्पल अपने दाँतों से काटे तो दर्द और मज़ा एकसाथ मेरे पूरे जिस्म में दौड़ गया।

मैंने जोर से चीखते हुए कहा, “अह्ह, मेरे बोबे छोड़ो, मेरी चूत में डालो न यार।” मल्होत्रा हँसे और बोले, “तू असली रंडी निकली श्वेता, चूत की आग बुझाने के लिए इतनी बेचैन।” उन्होंने अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत के छेद पर रगड़ा और एक तेज़ धक्के के साथ अंदर घुसा दिया। मेरी टाइट चूत में उस बड़े लंड के घुसते ही मेरी चीखें केबिन में गूँज उठीं, मगर मुझे रोकना नामुमकिन था। मेरी चूत की दीवारें उनके लंड को जकड़ रही थीं और उनकी हर धक्के के साथ मेरी साँसें तेज होती जा रही थीं।

तभी अचानक दरवाजा खुला और डॉक्टर वर्मा अंदर आ गए, उनकी आँखें इस दृश्य को देखकर फटी की फटी रह गईं। मैं सकते में आ गई और मल्होत्रा का लंड मेरी चूत में ही धड़कता रहा, जबकि डॉक्टर साहब की नज़रें मेरे नंगे जिस्म पर गड़ गईं। उन्होंने धीरे से दरवाजा बंद किया और रुंधे गले से बोले, “मैं सब कुछ भूल जाऊँगा, बस एक बार मुझे भी इस रसीले जिस्म को चोदने का मौका दे दो।” मेरे मन में डर और उत्तेजना दोनों एक साथ तूफान मचाने लगे, क्योंकि अब मैं सिर्फ मरीज़ नहीं, बल्कि अपने सीनियर डॉक्टर के सामने भी एक कॉलगर्ल बनकर रह गई थी।

डॉक्टर वर्मा ने सफेद कोट उतारते हुए कहा, “मैं यहाँ का डॉक्टर हूँ, लेकिन आज इस केबिन का माहौल देखो तो लगता है कोई धंधेवाली अपना भोसड़ा परोस रही है।” उनके शब्द सुनकर मेरी आँखें शर्म से झुक गईं, मगर मेरी टाइट चूत में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी। मल्होत्रा ने भी मुस्कुराकर कहा, “डॉक्टर साहब, आप भी आ जाइए, श्वेता एक नंबर की छिनाल निकली है, इसकी चूत में एक साथ दो लंड भी समा सकते हैं।” मैंने काँपते हुए हामी भर दी और मेरे मन का कोई कोना शर्म से गल गया जबकि दूसरी तरफ मेरा बदन और मेरी चूत दोनों गरमा गए।

डॉक्टर ने मेरे गांड के छेद (Ass Hole) पर अपनी ऊँगली रखी और धीरे-धीरे मेरी मोटी गांड को फैलाकर मेरी गुदा देखने लगे। उन्होंने मेरे चूतड़ों को जोर से दबाया और कहा, “तू तो पूरी कामुक औरत है श्वेता, तेरा तो हर छेद चोदे जाने लायक है।” उनकी ऊँगली जैसे ही मेरी गांड में घुसी (Ass Fingering), मेरी चीखें बेतहाशा निकल गईं और मेरे मुँह से बरबस ही निकला, “अह्ह, डॉक्टर साहब गांड में ऊँगली मत डालो, बहुत दर्द हो रहा है।” लेकिन वो नहीं रुके और मेरी गांड के छेद में अपनी दूसरी ऊँगली भी घुसा दी जबकि मल्होत्रा ने मेरी चूत में अपना लौड़ा और तेज़ी से धकेलना शुरू कर दिया।

उस पल मैं दोनों तरफ से घिर चुकी थी, डॉक्टर मेरी गांड में ऊँगली कर रहे थे और मरीज़ मेरी चूत को बुरी तरह चोद रहे थे। मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, लेकिन जिस्म का हर रोमांच एक अजीब सी तृप्ति दे रहा था। फिर डॉक्टर ने अपना पतला लेकिन लम्बा लंड बाहर निकाला और मुझे घुमाकर मेरी गांड के छेद पर लगा दिया। मैंने डरते हुए कहा, “ये गुदा सेक्स मैंने पहले कभी नहीं किया,” मगर उन्होंने बिना सुने एक झटके में अपना लंड मेरी गांड में पूरा घुसा दिया, और मेरी दुनिया जैसे रुक गई।

उस वक्त मुझे लगा जैसे मेरा पूरा अस्तित्व ही सिर्फ एक वेश्या का है जो दो मर्दों के लंड झेलने के लिए पैदा हुई है। डॉक्टर ने मेरी गांड को पकड़कर जोर-जोर से चोदना शुरू किया तो मेरे मुँह से सिर्फ अस्पष्ट चीखें निकल रही थीं, और मल्होत्रा ने मेरा मुँह अपने लंड की तरफ खींच लिया। मैंने बिना सोचे उनका गीला लंड चूसना शुरू कर दिया, मेरी जीभ पर मेरी ही चूत का रस और नमकीन स्वाद घुल गया। दोनों एकसाथ मुझे चोद रहे थे और मेरे शरीर से पसीने की बदबू और चूत की मुश्क मिलकर पूरे केबिन में फैल गई।

मेरे चुचे जोर से हिल रहे थे और मल्होत्रा ने उन्हें पकड़कर निप्पल चूसना शुरू कर दिया, जैसे किसी गाय के थन से दूध निकाल रहे हों। डॉक्टर गांड के छेद को बेरहमी से चोदते हुए बोले, “साली छिनाल, तूने तो पूरा अस्पताल ही रंडीखाना बना डाला।” मेरे आँसू और पसीना एक साथ बह रहे थे, लेकिन हर धक्के के साथ मेरी चूत और गांड दोनों में से चिपचिपा माल रिस रहा था। मैं बस इसी तड़प में थी कि कब ये दोनों अपना वीर्य मेरे अंदर छोड़ें और मुझे शांति मिले।

करीब 45 मिनट की बेरहम चुदाई के बाद पहले मल्होत्रा ने मेरे मुँह में अपना गाढ़ा शुक्राणु (Sperm) छोड़ दिया, जिसे मैंने घृणा और मजबूरी में निगल लिया। फिर डॉक्टर ने मेरी गांड से अपना लंड निकाला और मेरी पीठ पर धार मार दी, जिसकी गरमाहट मेरी रीढ़ में बिजली सी दौड़ गई। मैं बेहोशी की हालत में ICU के फर्श पर गिर पड़ी, मेरे पूरे जिस्म पर वीर्य और चूत का रस की परत जम गई थी और मेरी साँसें बुरी तरह फूल चुकी थीं। मेरी आँखों के सामने सिर्फ अँधेरा था और कानों में उन दोनों की हाँफने की आवाज़ गूँज रही थी।

अगली सुबह मैंने खुद को साफ किया और सोचा कि ये सब एक बुरा सपना था, लेकिन जब डॉक्टर और मरीज़ ने मुझे फिर बुलाया तो मैं चुपचाप उनके पास चली गई। अब हर रात ICU वार्ड की लाइटें बंद होते ही हम तीनों का सिलसिला शुरू हो जाता, और मैं बिना किसी लाज के उन दोनों को अपने हर छेद से संतुष्ट करती। मैंने अपने अंदर की शर्म को पूरी तरह मार दिया था, और अब मैं सिर्फ पैसों और चुदाई की भूखी रंडी बनकर रह गई थी, जिसे अस्पताल का हर कोना वेश्यालय जैसा लगता था।

एक दिन डॉक्टर ने मुझे अपने केबिन में बुलाकर कहा, “अब तू सिर्फ हम दोनों की नहीं, बल्कि पूरे स्टाफ की ज़रूरत बन गई है श्वेता।” मैंने बिना किसी हिचक के हामी भर दी क्योंकि मेरी चूत को अब हर रोज़ लंड की गर्मी चाहिए थी। वहीं मल्होत्रा ने मुझसे कहा, “तू असली रंडीबाज औरत है, जो पैसे और मज़े दोनों के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।” मैंने मुस्कुराकर उनकी बात का स्वागत किया और अपनी स्कर्ट उठाकर उन्हें अपनी बालों वाली चूत दिखा दी, जिसमें से अब हर वक्त गर्मी और गीलापन रिसता रहता था।

अगले कुछ हफ्तों में हमने ICU को सचमुच एक भोसड़ा बना दिया, जहाँ मरीज़ों की जगह मेरी चूत और गांड का इलाज होता था। कई बार तो डॉक्टर और मल्होत्रा के साथ मिलकर मैं नए मरीज़ों को भी रिझाने लगी, बशर्ते वो मेरी कीमत चुका सकें। मेरा शरीर अब बाजार की चीज़ बन चुका था, जहाँ मेरे बोबों की मालिश कोई भी खरीद सकता था और मेरी टाइट चूत का रस हर लंड के लिए उपलब्ध था।

एक शाम जब तीनों फिर इकट्ठे हुए तो डॉक्टर ने नई सेक्स पोजीशन ट्राई करने की बात कही और मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदने लगे। मल्होत्रा नीचे बैठकर मेरी चूत चाटने लगे, उनकी जीभ मेरी फुद्दी के भीतर तक जा रही थी और मेरे पैर काँप रहे थे। मेरे मुँह से बस यही निकल रहा था, “अह्ह, और जोर से, मुझे पूरा भोसड़ा फाड़ डालो।” मैं खुद अपनी गालियाँ सुनकर हैरान थी कि मैं कैसे पूरी तरह बदल गई हूँ, मेरी ज़बान से अब गंदी से गंदी बातें निकलने लगी थीं।

फिर एक दिन मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर की इंसानियत पूरी तरह मर चुकी है, लेकिन इसके बदले मुझे एक अजीब आज़ादी और ताकत मिली थी। मैंने सोच-समझकर अपनी इस नई पहचान को अपना लिया, और अस्पताल की हर नर्स को अपनी कहानी सुनाने लगी। कुछ ने मुझे चरित्रहीन कहकर थूक दिया, तो कुछ चुपचाप मेरी तरफ खिंचती चली गईं। मैं जानती थी कि समाज मुझे कभी माफ नहीं करेगा, पर मेरी चूत की भूख और मेरी गरीबी ने मुझे ये रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया था।

अब जब भी रात होती, हमारी तिकड़ी का अड्डा सज जाता, और सफेद चादरों पर चूत और वीर्य की बदबू अस्पताल के पूरे कॉरिडोर में फैल जाती। कभी डॉक्टर मुझे कुत्ते की तरह चोदते, तो कभी मल्होत्रा मेरे मुँह में अपना मोटा लंड देकर मुझे गला फाड़ देते। मेरी गांड का छेद इतना फैल गया था कि अब बड़े से बड़ा लंड भी आसानी से घुस जाता और मैं दर्द से ज्यादा मज़ा लेने लगी थी। मेरे लिए हर धक्का अब एक नशा बन चुका था, जो मुझे पैसे और सुकून दोनों देता था।

उस दिन ICU में एक नया इमरजेंसी केस आया, लेकिन हमारी हरकतें इतनी तेज़ थीं कि बाहर की दुनिया से हमारा रिश्ता कट चुका था। मैं बेड पर बिलकुल नंगी उल्टी लेटी थी, डॉक्टर मेरी चूत में था और मल्होत्रा ने मेरे मुंह की चुदाई करने के लिए मेरा सिर पकड़कर मेरे मुँह में अपना लंड ठूँस रखा था। थ्रीसम चुदाई के दौरान मेरा नंगा बदन पसीने से तर था और मेरे चुचों से दूध नहीं बल्कि पसीने की बूँदें टपक रही थीं। उस पल मुझे एहसास हुआ कि मैं अब पूरी तरह उनकी छिनाल बन चुकी हूँ, एक ऐसी छिनाल जो बिना लाज और बिना भविष्य के बस आज की चुदाई के लिए जीती है।

आखिरकार हमारी ये दुनिया तब बिखर गई जब एक दिन अस्पताल के डायरेक्टर ने सीसीटीवी फुटेज में हमारी चुदाई देख ली। मुझे बुलाकर उन्होंने कहा, “श्वेता रंडी, तूने इस अस्पताल का नाम डुबो दिया, तू तो अस्पताल में ही थ्रीसम चुदाई का आनंद ले रही है, साली रांड तू तो पूरी धंधेवाली निकली ।” मैं चुप रही क्योंकि मेरी आँखों में न कोई शर्म बची थी और न ही कोई डर। उसी शाम डॉक्टर और मल्होत्रा ने मुझसे आखिरी बार चुदाई की, और हम तीनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर रोते हुए अपनी थ्रीसम चुदाई खत्म की। मैंने वहाँ से जाते हुए बस इतना सोचा कि मेरी किस्मत में शायद यही लिखा था, लेकिन फिर भी मेरे कामुक जिस्म की आग कभी कम नहीं हुई।

आज मैं ये अन्तर्वासना हिंदी थ्रीसम चुदाई कहानी आपको सुना रही हूँ ताकि आप मुझे जज करें या मेरी मजबूरी समझें, फैसला आपका है। मैंने वो सबकुछ खुलकर बयान कर दिया जो ICU वार्ड की उन चार दीवारों के भीतर हुआ, जहाँ मेरी चूत, गांड और मुँह सबकुछ सिर्फ एक बाजारू चीज़ बन गए थे। कृपया मुझे बताएँ कि क्या आपको मेरी ये गंदी और दर्दभरी कहानी पसंद आई, और क्या आप मेरी अगली चुदाई की दास्ताँ सुनना चाहेंगे। आपकी राय मेरे लिए बहुत कीमती है, इसलिए बेझिझक मुझे कमेंट करके बताएँ।

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