मुफ्त में पढ़ें विधुर वृद्ध ससुर के लंड से मिली नौजवान बहू की प्यासी चूत को संतुष्टि अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी – Muft mein padhein vidhur vriddh sasur ke lund se mili naujawan bahu ki choot ko santushti Antarvasna Hindi sex kahani – Read for free: Young daughter-in-law’s pussy found satisfaction from widower elderly father-in-law’s dick – Antarvasna Hindi sex story …
बिस्तर पर लेटे-लेटे मैं करवटें बदल रही थी। मेरा शौहर ज़ैन मुझसे 10 फीट दूर अपने मोबाइल की स्क्रीन पर आँखें गड़ाए हुआ था, मानो मेरा कोई वजूद ही न हो। मेरी उम्र 32 साल थी और शादी को 8 बरस हो चुके थे, लेकिन इस कमरे में मैं हर रोज़ थोड़ी-थोड़ी मरती थी। एक नौजवान बीवी के तन की भूख को न समझना – शायद यही मर्दों की सबसे बड़ी गलती होती है।
मुझ नौजवान बहू की साँसें भारी हो रही थीं और सीने के नीचे एक जानी-पहचानी सी हलचल मचल रही थी। 36D के मेरे उभरे हुए चुचे इस फ़ालतू कमीज़ के अंदर कैद होकर रह गए थे और मेरी जाँघों के बीच वाली जगह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी आँखें बंद कीं और सोचा कि आखिर कब तक ऐसे ही प्यासी रहूँगी। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई – मेरे ससुर जी, अकबर मियाँ, जो अपनी उम्र के 58 बसंत देख चुके थे लेकिन जिनका हुस्न आज भी बुलंद था। उनकी मोगरे वाली सफेद दाढ़ी और चौड़े कंधे देखकर मेरे पेट में अजीब सी गुदगुदी हुई।
“ज़ैन, बेटा, ज़रा बाहर तो आना।” उनकी भारी आवाज़ ने कमरे का सन्नाटा चीर दिया। मेरा मर्द बिना एक नज़र डाले बाहर निकल गया और मैं अकेली रह गयी – मेरे कच्चे धागे और अधूरी साँसों के साथ। मेरे पति के बाद मेरे ससुर जी ही अब घर में अकेले मर्द थे जो मेरे तन की भूख शांत कर सकते थे, सास तो दो साल पहले ही गुज़र गयीं। उनकी आँखों में वही प्यास झलकती जो उम्र के उस पड़ाव पर किसी मर्द को अंदर ही अंदर खाए जा रही होती है।
मुफ्त में पढ़ें विधुर वृद्ध ससुर के लंड से मिली नौजवान बहू की प्यासी चूत को संतुष्टि अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

थोड़ी देर बाद ही ज़ैन लौटा और उसने कहा, “आयशा, मैं 2 दिन के लिए बाहर जा रहा हूँ। अब्बा का ख्याल रखना।” और वह चला गया – अपनी सुस्त आदतों की तरह ही, बिना किसी हलचल के। अब इस सुनसान घर में सिर्फ मैं थी और वो अधेड़ उम्र का मर्द, जिसकी निगाहें मेरे जिस्म पर साँप की तरह लिपट जाती थीं। मेरे अंदर का डर और उत्तेजना एक साथ नाचने लगे।
शाम ढलते ही मैंने आँगन में चारपाई बिछायी और ठंडी हवा खाने बैठ गयी। हल्की लाल रंग की सूती सलवार और छोटी सी कमीज़, जो मेरे उभारों को किसी भी हवसी मर्द की आँखों का निवाला बनाने को काफ़ी थी। अकबर मियाँ भी धीमे कदमों से आये और मेरे पास ही बैठ गए। “बहू, आज अकेली हो, बड़ा सूना लग रहा है न?” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास और खिंचाव था।
“जी, थोड़ा सा,” मैंने नज़रें झुकाकर कहा। अचानक मेरे ससुर जी की उँगलियाँ मेरी बाँह पर रेंगने लगीं – पहले धीरे से, फिर ज़रा कसकर। “मुझे पता है तुम्हारी तकलीफ क्या है। एक जवान औरत और उसका मर्द ऐसा सुस्त… ये तो गुनाह है।” उनके ये शब्द मेरे कानों में पिघलता शहद बनकर उतर गए।
मैं चाहकर भी कुछ न बोल पाई। मेरी साँसों की रफ़्तार बढ़ गयी और मेरे निप्पल कमीज़ के कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब हो गए। मैंने सिर्फ़ इतना सुना, “चल, अंदर चलते हैं।” और मेरी रज़ामंदी का इंतज़ार किये बगैर, उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली।
अंदर कमरे का अँधेरा मेरी शर्म को कुछ देर के लिए छुपा गया। लेकिन फिर उन्होंने बत्ती जला दी। “मैं सबकुछ साफ़-साफ़ देखना चाहता हूँ, बहू। तू किसी रंडी से कम नहीं है आज रात।” यह सुनते ही मेरी चूत के अंदर बिजली सी कौंध गयी। मेरी बुर पानी से लबालब भर चुकी थी। मैं एक पाक दामन बीवी से एक कामुक औरत में बदलती जा रही थी।
मेरे विधुर वृद्ध ससुर ने पहले मेरी कमीज़ के बटन खोले। मेरे 36D के बोबे बाहर झूल गए, जिन पर पसीने की बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। “क्या मोटे-मोटे चुचे हैं! इन्हें चूसने का मज़ा तो आयेगा।” यह कहकर उन्होंने मेरा एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगे। मेरे मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकली। दूसरे हाथ से वो मेरी दूसरी चूची को मसल रहे थे। बोबों की मालिश का वो अंदाज़ इतना गहरा था कि मेरे पूरे जिस्म में आग लग गयी।
फिर वो नीचे झुके और मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। मेरी बालों वाली चूत अब खुली हवा में सिसक रही थी। “अरे, इतना घना झांट के बालों का जंगल! ऐसी रसदार चूत तो मैंने कभी नहीं देखी।” उनकी उँगलियाँ मेरी चूत के होंठों पर फिरने लगीं। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से वो मेरी भोसड़ी को रगड़ने लगे। मैं जैसे ही उनकी उँगलियों का दबाव सह नहीं पायी, वो मेरी चूत के अंदर घुस गयीं। “हाँ… यही तो चाहिए था।” मेरे मुँह से चीख निकल गयी।
मेरे विधुर वृद्ध ससुर मुझे बुरी तरह चोदने से पहले मेरी चूत चाटना चाहते थे। वो घुटनों के बल बैठ गये और अपनी जीभ मेरी फुद्दी के अंदर डाल दी। वो मेरी प्यासी चूत का रस पीने लगे। मेरी जाँघें काँपने लगीं और मैंने उनके बालों को ज़ोर से पकड़ लिया। “अब्बा… ससुर जी… ये क्या कर रहे हैं आप?” लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मेरे ससुर जी की जीभ मेरी चूत के हर कोने को बड़े अच्छे से साफ़ कर रही थी। मेरे जिस्म का काँपना बंद होने का नाम नहीं ले रहा था।
“अब देख, मैं तुझे कैसे चोदता हूँ,” उन्होंने अपना सफेद कुर्ता उतारा और पाजामा खोला। उनका लंड बाहर निकला – 6 इंच का मोटा लौड़ा जो खड़ा होकर तना हुआ था। उसके ऊपर की नसें नीली और फूली हुई लग रही थीं। लंड के गोटे नीचे लटक रहे थे, भारी और बड़े। “इसे पकड़, और अपनी चूत के पास ले जा।” मैंने लंड को अपने हाथ में लिया – वो गर्म और चिपचिपा सा लग रहा था। मैंने धीरे से उसे अपनी बुर के होठों पर रगड़ा। “हाँ, रगड़ पहले। ऐसे ही,” उनकी आवाज़ में शहद घुल चुका था।
फिर अचानक उन्होंने मुझे चारपाई पर लिटा दिया और मेरी दोनों टाँगें ऊपर उठाकर अपने कंधों पर रख लीं। बिना किसी चेतावनी के, उन्होंने अपना पूरा लम्बा लंड मेरी टाइट चूत में झटके से घुसेड़ दिया। “अब बोल, बहू… तेरी बुर किसकी है?” उन्होंने मेरी गांड पर एक तमाचा मारा। “आपकी… सिर्फ आपकी।” मैंने दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में चीखकर कहा।
हर झटके के साथ मेरा जिस्म तख़्त से रगड़ खा रहा था। मेरे ससुर जी का बड़ा लंड मेरी प्यासी चूत की तंग दीवारों को रगड़ रहा था और मेरी उन्हें जख्मी भी कर रहा था। कमरे में चुदाई की आवाज़ गूँजने लगी – भोसड़े के अंदर लंड की घिसाई की आवाज़। मेरे स्तन इतनी ज़ोर से हिल रहे थे कि मुझे लगा अभी फट जायेंगे। मैंने उन्हें अपने हाथों से दबा लिया। “छोड़, मैं पकड़ता हूँ।” अकबर ने मेरी चूचियों को अपने बड़े-बड़े हाथों से कसकर पकड़ लिया और जोर-जोर से मसलने लगे। मेरे मुँह से सिर्फ़ और सिर्फ़ हाँफने की आवाज़ें आ रही थीं।
फिर मेरा ध्यान कमरे के कोने में रखी एक अजीब चीज़ पर गया – ज़ैन का मोबाइल। उस पर एक लाल बत्ती जल रही थी। “बाप रे, देसी पोर्न वीडियो रिकॉर्ड हो रही है?” मेरे दिमाग में बिजली कौंधी। लेकिन तब तक अकबर मुझे घुमा चुके थे। अब वो मुझे कुत्ते की तरह चोदना चाहते थे। “गांड ऊपर कर बहू… तेरा गांड का छेद भी आज इस्तेमाल होगा।” मेरी गांड के बालों के बीच उन्होंने अपना लंड रगड़ना शुरू किया। मैंने अपने चूतड़ भींच लिये।
“ढीला छोड़, नहीं तो फट जायेगी।” उन्होंने गुस्से से कहा। उन्होंने अपने लंड पर थूका और धीरे-धीरे मेरी गांड के छेद में डालने लगे। मेरी आँखों से आँसू निकल आये, लेकिन वो दर्द के नहीं, एक अजीब सी बेबसी और कामुकता के थे। पहली बार मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी बड़ी रंडी बन चुकी हूँ – अपने ही ससुर के नीचे। “हाँ… अब बोल, किसकी रंडी है तू?” “आपकी रंडी… सिर्फ आपकी छिनाल।” मेरी आवाज़ काँप रही थी।
करीब 45 मिनट तक एक विधुर वृद्ध आदमी और नौजवान औरत के बीच चली इस जंग में मैं नौजवान औरत पूरी तरह हार चुकी थी। फिर अचानक अकबर की साँसें तेज़ हुईं और उन्होंने मेरी चूत के अंदर ही अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया। गर्म-गर्म शुक्राणु मेरी बुर में फैल गए और मेरी तन की भूख शांत हो गयी। मुझे लगा मानो कोई जलती हुई नदी मेरे अंदर बह रही है। फिर वो मेरे ऊपर गिर गये और हम दोनों की हाँफती हुई आवाजें एक हो गयीं।
अगली सुबह जब मेरा नामर्द पति लौटा, तो मेरे विधुर वृद्ध ससुर अकबर पहले की तरह बाहर बैठे थे। लेकिन मेरी आँखों में अब शर्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसी आग थी जो कभी नहीं बुझने वाली। मैं जान गयी थी कि मेरा तना हुआ बदन और मेरी रसदार बुर सिर्फ मेरे ससुर के बड़े लंड के लिए ही बनी है। देखने वालों ने हमारी वीडियो देख ली होगी या नहीं – लेकिन मैं अपनी असली पहचान पा चुकी थी।
तो प्यारे दोस्तों, ये मुझ प्यासी नौजवान बहू की आपबीती थी। आपको मेरी यह कहानी “वृद्ध ससुर के लंड से मिली नौजवान बहू की चूत को संतुष्टि” कैसी लगी? क्या मैंने अपनी भड़ास सही तरीके से बयान की? कृपया अपनी बेशकीमती राय ज़रूर दें और कमेंट में बताएं कि मेरी इस छिनालपन की हदों को आप किस नज़र से देखते हैं। आपके विचार मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं।


