HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesसर ने चूत चाट के किया पास इंग्लिश टेस्ट में फेल लड़की को

सर ने चूत चाट के किया पास इंग्लिश टेस्ट में फेल लड़की को

फ्री में पढ़ें सर ने चूत चाट के किया पास इंग्लिश टेस्ट में फेल लड़की को अन्तर्वासना हिंदी स्टूडेंट टीचर सेक्स कहानी (Student Teacher Sex Story – Sir ne chut chaat ke kiya paas English test mein fail ladki ko) :- ज़िंदगी में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनकी उम्मीद आपको तनख्वाह की तरह हर महीने की पहली तारीख को होती है, और कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जो अचानक टैक्स के नोटिस की तरह आपकी गर्दन पर सवार हो जाती हैं। ऐश्वर्या मेरी ज़िंदगी का वही टैक्स नोटिस थी, बस फर्क इतना था कि ये नोटिस मुझे अपनी जेब काटने के लिए नहीं, बल्कि कुछ और भरने के लिए उकसा रहा था।

मेरा नाम राघवेंद्र प्रताप सिंह है। उम्र कोई पचपन के आसपास, शरीर पर उम्र का असर कम और तजुर्बे की परतें ज़्यादा थीं। दिल्ली के इस पॉश इलाके में मेरा अपना कोचिंग सेंटर है। अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ाता हूँ, शौक़ से, मजबूरी से नहीं। घर में पत्नी हैं, जिनके साथ रिश्ता अब एक ही कमरे में दो अलग-अलग सोफों पर बैठकर टीवी देखने जैसा रह गया था – साथ हैं पर आपस में कोई घर्षण नहीं, कोई गर्माहट नहीं, कोई सेक्स संबंध नहीं। बस एक सूखी, आदतन सी शांति।

और फिर थी ऐश्वर्या। उन्नीस साल की, हरियाणा के रोहतक से दिल्ली की हवा खाने और अंग्रेज़ी की हवा निगलने आई थी। उसकी आँखों में वो बेचैनी थी जो मुझे बरसों से अपनी क्लास की बेंचों पर बैठी दिखती थी, पर ऐश्वर्या की बेचैनी कुछ और ही थी।

सर ने चूत चाट के किया पास इंग्लिश टेस्ट में फेल लड़की को अन्तर्वासना हिंदी स्टूडेंट टीचर सेक्स कहानी

सर ने चूत चाट के किया पास इंग्लिश टेस्ट में फेल लड़की को हिंदी स्टूडेंट टीचर सेक्स कहानी Student Teacher Sex Story - Sir ne chut chaat ke kiya paas English test mein fail ladki ko
Student Teacher Sex Story – Sir ne chut chaat ke kiya paas English test mein fail ladki ko

उस सेक्सी स्टूडेंट की देह की बनावट ही ऐसी थी कि सलवार कमीज़ भी उस पर परचम की तरह लहराती थी। उसके स्तन ऐसे उभरे हुए थे जैसे कुर्ते के नीचे दो कबूतर आपस में लड़ रहे हों। और जब वो हँसती, तो उसके कुल्हों का थिरकना मेरी पचास साल पुरानी आँखों को भी सत्रह साल के लड़के की नज़र बना देता।

उस शाम बरसात का मौसम था। बिजली कड़क रही थी और बारिश की बूँदें मेरे ऑफिस की खिड़की से टकरा कर ऐसी आवाज़ कर रही थीं जैसे कोई बार-बार अंदर आने की इजाज़त मांग रहा हो। ऐश्वर्या अपने इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट में फेल हो गई थी और उसे इंग्लिश टेस्ट में पास होने के लिए अब खास ट्यूशन की ज़रूरत थी। मैं अक्सर देर शाम तक रुकता था, किताबों की धूल झाड़ता और अपनी जवानी की यादों को टटोलता था। वो शाम कुछ और ही करवट लेने वाली थी।

“सर, ये ‘सेड्यूस्ड’ का मतलब क्या होता है?” उस सेक्सी स्टूडेंट ने अपनी मोटी, काजल लगी पलकें झपकाते हुए पूछा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी। उसने आज जानबूझकर या अनजाने में बेहद पतली मलमल का गुलाबी कुर्ता पहना था, जो बारिश की नमी में उसके जिस्म से यूं चिपक रहा था जैसे किसी ने उस पर पानी का घूंघट डाल दिया हो। उसके बोबों की गोलाई साफ उभर कर सामने आ रही थी और निप्पल की कड़ी गाँठ कपड़े को छेदती हुई बाहर आने को बेताब थी।

“मतलब… बहकाना,” मैंने गला साफ करते हुए कहा। मेरी नज़र उसके चेहरे से फिसलकर उसकी गर्दन के नीचे उतर गई, जहां पसीने की एक बूँद लुढ़क कर उसके चुचों के बीच की गहरी खाई में समा गई। मेरे पेट के निचले हिस्से में एक गर्माहट सी दौड़ गई।

“जैसे?” उसने पूछा। अब उसकी आवाज़ शरारती हो चली थी। वो अपनी कुर्सी पर इस तरह हिली कि उसकी सलवार का नाड़ा ढीला होकर उसकी पीली नाभि का कुछ हिस्सा दिखाने लगा। उसकी चूतड़ों की मांसल गद्दी चमड़े की कुर्सी पर दब कर फैल रही थी।

“बहकाने के लिए इशारों की ज़रूरत नहीं होती, शब्दों की होती है। देखो, मैं तुम्हें समझाता हूँ,” मैं उठा और उसकी कुर्सी के पीछे आकर खड़ा हो गया। मेरी उंगलियाँ उसके कंधों पर रखी किताब के पन्नों को छू रही थीं, लेकिन मेरी सांसें उसके बालों में बिखरे गुलाब जल की खुशबू को सूंघ रही थीं। मेरा लौड़ा मेरी पैंट में करवट लेने लगा। वो अभी खड़ा लंड नहीं था, पर तना हुआ ज़रूर हो चला था।

“जैसे अगर मैं ये कहूं कि ये कमरे की नमी तुम्हारे जिस्म को और भी रसदार बना रही है, तो ये बहकाना है,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया। मेरी फुसफुसाहट से उसके कान की लौ हिली और उसकी रीढ़ में एक कंपकंपी दौड़ गई।

उस सेक्सी स्टूडेंट ने पलटकर मेरी आँखों में देखा। अब वो मासूम नहीं थी। वो एक कामुक औरत थी जो अपनी ताकत को पहचान रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी किताब पर रख दिया। “सर, ये शब्द समझ नहीं आया… ‘इंटिमेट’।”

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में कस लिया। मेरी उंगलियों ने उसकी हथेली की नसों को सहलाया। “इंटिमेट मतलब… करीब। बहुत करीब। जैसे इस वक्त मैं तुम्हारी सांसों की गर्मी अपने चेहरे पर महसूस कर सकता हूँ। जैसे तुम्हारे इस कुर्ते के नीचे से आ रही तुम्हारी देह की गंध मेरे नथुनों में भर रही है।”

ये सुनते ही उसने अपनी जीभ से अपने सूखे होंठों को गीला किया। मैं अब और सब्र नहीं कर सकता था। मैंने झुककर उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वो पत्थर की तरह जम गई, पर अगले ही पल मेरे सीने से लगकर ऐसे चिपक गई जैसे कोई चुंबक लोहे को खींच रहा हो। उसके होंठ नर्म थे, जैसे भीगी हुई गुलाब की पंखुड़ियाँ। मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घुसी और उसने मेरी जीभ को अपने दांतों के बीच हल्के से दबाया।

मेरे हाथ अब बेकाबू थे। एक हाथ उस सेक्सी स्टूडेंट की पीठ पर फिर रहा था और दूसरा उसके बोबों की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उसके स्तन के उभार पर पड़ीं, उसके मुंह से एक धीमी सी कराह निकली—”अह्ह्ह… सर… ये क्या।”

“यही तो परीक्षा है, ऐश्वर्या,” मैंने उसकी गर्दन चूमते हुए कहा। मैंने उसके कुर्ते के पीछे की तरफ हाथ डालकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसके चूचे आज़ाद होकर मेरी हथेलियों में भर गए। वो दही के पेड़ों की तरह मुलायम और गरम थे। मैंने उन्हें मसलना शुरू किया। बोबों की मालिश करते हुए मैंने उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से दबाया। वो सिकुड़कर और भी सख्त हो गए।

“सर… दर्द होता है… पर अच्छा लगता है,” वो हांफते हुए बोली। उसका एक हाथ मेरे सिर के पीछे था और दूसरा मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को टटोल रहा था। मेरा मोटा लौड़ा अब पूरी तरह तना हुआ लंड बन चुका था और पैंट की सिलाई तोड़कर बाहर आना चाहता था।

“ये तो अभी शुरुआत है,” मैंने फुसफुसाया और उसे उठाकर मेज पर बैठा दिया। मैंने उसका कुर्ता सिर के ऊपर से खींचकर फेंक दिया। अब वो सिर्फ अपनी हल्की सी सलवार और खुली हुई ब्रा में मेरे सामने बैठी थी। उसके बोबे बाहर झांक रहे थे। उसके चूतड़ मेज की ठंडी लकड़ी पर चिपके हुए थे।

मैं झुका और उस सेक्सी स्टूडेंट के सीने से लग गया। एक निप्पल मेरे मुंह में था और दूसरे को मेरी उंगलियाँ मरोड़ रही थीं। मैं उसे निप्पल चूसना शुरू कर दिया। उसके मुंह से अस्फुट स्वर निकल रहे थे। “हाँ… ऐसे ही… ओह… सर… काटिए मत… चूसिए…” उसने मेरे बाल पकड़ लिए और अपना सीना और आगे की तरफ धकेल दिया। मानो वो कह रही थी कि मेरा पूरा चूचियों का दूध पी जाओ।

मेरा हाथ नीचे खिसका और उसकी सलवार के नाड़े में उलझ गया। मैंने झटके से नाड़ा खोला और सलवार नीचे सरका दी। उसने अपने कुल्हे उठाकर मेरी मदद की। अब वो सिर्फ एक पतली सी लेस की कच्छी में थी। उस कच्छी के बीचोंबीच एक गीला सा धब्बा फैल चुका था।

वहाँ उसकी रसदार चूत का पानी रिसकर बाहर आ गया था। उसकी चूत की गर्माहट और खुशबू मेरे नथुनों में भर गई। ये खुशबू मछली या समुद्र जैसी नहीं थी, ये खट्टी-मीठी, नशीली खुशबू थी, जैसे मिट्टी के घड़े में रखी हुई कच्ची सौंधी शराब। “सर… वहाँ मत देखिए… शर्म आती है,” उसने अपने घुटने आपस में भींच लिए।

“शर्म तो बहकाने की दुश्मन होती है, ऐश्वर्या,” मैंने उसके घुटनों को ज़ोर से खोलते हुए कहा। मैं घुटनों के बल बैठ गया। मेरा चेहरा उसकी जाँघों के बीच था। मैंने उसकी गीली कच्छी को साइड में खिसकाया और पहली बार उसकी नंगी बुर देखी। वो बिल्कुल साफ थी, हल्के हल्के बालों वाली चूत थी।

उसकी फुद्दी गुलाबी और चमकदार थी, जैसे अभी-अभी धुली हुई स्ट्रॉबेरी। चूत का रस उसकी दरार से बहकर उसकी सेक्सी गांड के छेद तक पहुंच रहा था। मैंने चूत चाटने के लिए अपनी जीभ उसकी चूत के ऊपर रख दी। उसने ज़ोर की चीख मारी और मेरे बाल खींच लिए। “आह… सर… ये क्या कर रहे हो… गंदा…”

“चुप कर साली रंडी,” मैंने पहली बार गुस्से और प्यार से भरी गाली दी। मेरी जीभ उसकी फुद्दी की सिकुड़नों को सहला रही थी। मैं चूत चाटना शुरू किया। मैंने उसकी भगनासा को अपने होठों के बीच लेकर चूसा। मेरी नाक उसकी झांट के बाल से घिसट रही थी। वो मेरी जीभ के हर वार पर ऐंठ जाती थी। उसके कुल्हे मेरी नाक के नीचे नाच रहे थे।

मैंने अपनी दो उंगलियाँ उस नंगी स्टूडेंट की गीली चूत के अंदर डालीं और बाहर खींचीं। एक चिपचिपी सी आवाज़ हुई। उसकी चूत बेहद टाइट थी। मेरी उंगलियाँ भीतर जाकर उसके मांस की दीवारों से रगड़ खा रही थीं। “बहुत… बहुत हो गया… अब अंदर डालिए न,” वो गिड़गिड़ाने लगी। “मैं पागल हो रही हूँ… मेरी भोसड़ी जल रही है।”

ये सुनकर मेरे लंड के गोटे ज़ोर से सिकुड़ गए। मैं खड़ा हुआ और अपनी पैंट और अंडरवियर टखनों तक सरका दिए। मेरा लौड़ा बाहर निकल कर तन गया। वो मोटा और लम्बा लंड था, उसकी नसें नीली पड़ गई थीं और अगले हिस्से से चिपचिपा माल रिस रहा था। उसे देखते ही ऐश्वर्या के मुंह से निकला, “बाप रे… इतना बड़ा लंड।”

“अब इसे अपने हाथों से सहला,” मैंने कहा। उसने डरते-डरते अपना नर्म हाथ मेरे लंड पर रखा और हैण्डजॉब देने लगी। उसका हस्तमैथुन बेढंगा था, पर उसकी नर्म हथेली की रगड़ मेरी रीढ़ में बिजली दौड़ा रही थी।

“बस… अब लेट जा,” मैंने उसे धक्का देकर मेज पर पीठ के बल लिटा दिया। मैंने उसकी टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं। मेरा लंड उसकी चूत के मुहाने पर था। मैंने धीरे से दबाव बनाया। वो टाइट चूत मेरे सुपाड़े को लेने से इनकार कर रही थी। “आराम से सर… बहुत ही ज्यादा बड़ा और मोटा है आपका लौड़ा… फट जाऊंगी मेरी वर्जिन चूत… मेरी भोसड़ी फट जाएगी,” उसकी आँखों में पानी आ गया।

मैंने झुककर उस नंगी स्टूडेंट के होंठ चूमे और अपनी कमर ज़ोर से झटकी। चुदाई की एक ज़बरदस्त चीख के साथ मेरा पूरा लौड़ा उसकी रसदार चूत में समा गया। मेरे अंडकोष उसकी गांड के नीचे टकराए। उस नंगी स्टूडेंट की चूत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से जकड़ा कि मेरी सांस ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। वो इतनी गर्म और गीली थी कि मेरा माल बाहर निकलने को बेताब हो गया।

“अब तो चलाओ… सर… चोदना… ज़ोर से चोदो… आह… मुझे रंडी बना दो,” वो गिड़गिड़ाई। मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के देना शुरू किया। हर धक्के पर हमारी जांघों के टकराने की आवाज़ और उसकी गीली चूत की चिपचिपी आवाज़ कमरे में गूंज रही थी। उसके बोबे उछल रहे थे। वो बार-बार अपनी सेक्सी गांड ऊपर उठाकर मेरे लंड को अंदर खींच रही थी।

“बोल… कैसा लग रहा है छिनाल?” मैंने उसके बाल खींचते हुए पूछा। “बहुत मज़ा… मेरी चूत फट रही है… और चोदो… मेरी भोसड़ी में आग लगा दो,” वो चिल्लाई। अब उसे कोई शर्म नहीं थी। वो एक पूरी तरह से वेश्या की तरह पेश आ रही थी। उसकी आँखें मदहोश थीं।

मैंने पोज़ीशन बदली। मैंने उसे पलटकर उसके पेट के बल लिटा दिया। उसके गोल चूतड़ हवा में उठे हुए थे। उन गोल-गोल गांडों को देखकर मेरा मन ललचा गया। मैंने अपनी उंगली पर उस कुंवारी कन्या की चूत का रस लगाया और धीरे से उसकी गांड का छेद सहलाया। वो चौंकी, पर बोली नहीं। मैंने धीरे से अपनी उंगली उसकी गांड में डाली। वो इतनी टाइट थी कि उंगली भी मुश्किल से जा रही थी। “आज यहाँ नहीं… प्लीज़… बहुत दर्द होगा,” वो बोली।

मैंने उसकी बात मान ली और फिर से अपना लंड मेरी नंगी स्टूडेंट की गीली चूत में घुसेड़ दिया। पीछे से चुदाई करने में मेरा लौड़ा उसकी योनि की दूसरी दीवार को रगड़ रहा था, जिससे वो जोर जोर से चीख रही थी। मैंने उसके बोबों को पीछे से पकड़ा और चोदना तेज़ कर दिया। “अब तो निकालो… सर… मेरे अंदर मत डालना नहीं तो मैं आपके बच्चे की माँ बन जाउंगी… पेट पर डालो,” वो हांफी।

मेरे अंडकोष सिकुड़ चुके थे। मेरी पीठ की नसों में एक ज़बरदस्त खिंचाव हुआ। मैंने ज़ोर से दहाड़ लगाई और अपना लंड बाहर खींच लिया। उसके चूतड़ों पर अपना लौड़ा रगड़ते हुए मैंने वीर्य की तेज़ धारें छोड़ीं। गाढ़ा, सफ़ेद शुक्राणु उसकी पीठ पर फैल गया। मेरा चिपचिपा माल उसकी पीठ के गड्ढों में भर गया। मैं हांफता हुआ उसके ऊपर गिर पड़ा।

हम दोनों काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। मेरा मुरझाया हुआ लंड अब भी उसकी जांघों के बीच चिपका हुआ था। बारिश थम चुकी थी और कमरे में सेक्स की भीनी-भीनी गंध फैली हुई थी।

“सर,” उसने धीरे से कहा। “हम्म?” “मेरा टेस्ट… क्या मैं पास हूँ मेरे इंग्लिश टेस्ट में?” मैं मुस्कुराया। मेरी उंगलियाँ अब भी उसके चूतड़ों की नर्म गद्दी पर घूम रही थीं। “पास ही नहीं, ऐश्वर्या… तुमने तो इंग्लिश टेस्ट में डिस्टिंक्शन ले ली है।”

वो ज़ोर से हंसी और मुझसे लिपट गई। मैं समझ गया था कि ये एक दिन की रंडीबाज़ी नहीं थी, ये सिलसिला तो अभी शुरू हुआ था। आखिर एक शिक्षक का फर्ज़ होता है कि वो अपने शिष्य को पूरी तरह से पारंगत करे। और अभी तो गुदा सेक्स और ब्लोजॉब जैसे कई अध्याय बाकी थे।

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