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ऑफिस डेस्क पर चोदा बैंक मैनेजर ने लोन अप्रूवल के लिए

चूत चाटकर ऑफिस डेस्क पर चोदा रंडीबाज बैंक मैनेजर ने लोन अप्रूवल के लिए अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- एक जरूरतमंद युवती शहर के व्यस्त बैंक में पर्सनल लोन के लिए जाती है। मैनेजर का आकर्षक व्यक्तित्व उसे बेचैन कर देता है। मीटिंग के बीच एक निजी पल में वह खुद को संभालने की कोशिश करती है, लेकिन मैनेजर इसे पूरी तरह गलत समझ बैठता है। यह छोटी-सी गलतफहमी दोनों के बीच तीव्र कामुक तनाव पैदा कर देती है जो धीरे-धीरे अनियंत्रित जुनून में बदल जाती है। कहानी में शर्मिंदगी, लालच, और बेहद तीव्र शारीरिक आकर्षण का ऐसा मिश्रण है जो पाठक को शुरू से आखिर तक बांधे रखता है।


Hindi Office Sex Story – Choot chaatkar office desk par choda randeebaz bank manager ne loan approval ke liye :- मैं विक्रम हूं, पैंतीस साल का बैंक मैनेजर। शहर के डाउनटाउन इलाके में स्थित हमारी ब्रांच में हर दिन दर्जनों लोग लोन की अर्जी लेकर आते हैं। ज्यादातर के चेहरे पर वही बेबसी और उम्मीद का मिश्रण होता है। लेकिन उस दिन जब अंजलि गुप्ता नाम की सेक्सी लड़की मेरे केबिन में दाखिल हुई, तो कुछ अलग था।

वह लगभग पच्चीस साल की थी, गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, और ऐसी कामुक बॉडी कि किसी का भी लंड तुरंत खड़ा हो जाए सेक्स करने के लिए। टाइट ब्लैक स्कर्ट और सफेद शर्ट में उसके भारी भरकम बोबे ऐसे उभरे हुए थे मानो बटन फटने को बेकरार हों। उसकी गांड की गोलाई और चाल देखकर मेरे दिमाग में पहला ख्याल यही आया कि ये रंडी जैसी मटक क्यों रही है।

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Hindi Office Sex Story – Choot chaatkar office desk par choda randeebaz bank manager ne loan approval ke liye

वह सेक्सी माल लड़की मेरे सामने वाली कुर्सी पर अपनी गांड टेककर बैठी। उसने आवेदन फॉर्म भरते हुए अपनी समस्या बताई – छोटा बिजनेस शुरू करने के लिए पर्सनल लोन चाहिए था। उस सेक्सी लड़की की आवाज में हल्की सी घबराहट थी। मैंने लोन का फॉर्म देखा, क्रेडिट स्कोर औसत था, लेकिन उसकी आंखों में जो बेचैनी थी वह मुझे अच्छी तरह समझ आ रही थी।

बात करते-करते मैंने महसूस किया कि वह बार-बार अपनी जांघें सिकोड़ रही है। उसका चेहरा लाल हो रहा था। अचानक उसने कहा, “सर, जरा वॉशरूम हो आऊं?” मैंने इशारा किया कि मेरे केबिन के कोने में एक छोटा सा प्राइवेट एरिया है, पर्दे के पीछे, जहां स्टाफ कभी-कभी कपड़े बदल लेता है। वह उठी और पर्दे के पीछे चली गई।

मुझे लगा सिर्फ एक-दो मिनट की बात है। मैं फाइलें व्यवस्थित करने लगा। लेकिन पांच मिनट बीत गए। मुझे कुछ शोर सा लगा – हल्की सांसें, कपड़ों की सरसराहट। मैं उठा और धीरे से पर्दा हटाकर देखा। जो नजारा था, उसने मेरे लंड को पत्थर जैसा कड़क कर दिया। अंजली की स्कर्ट कमर तक ऊपर उठी हुई थी, उसकी पैंटी घुटनों तक नीचे, और वह अपनी उंगलियां अपनी रसदार चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उसकी आंखें बंद थीं, होंठ काट रही थी। मैं समझ गया कि यह हरामजादी मेरे सामने बैठकर इतनी गर्म हो गई थी कि खुद को रोक नहीं पाई। मेरे दिमाग में तुरंत ख्याल आया – ये लोन के लिए मुझे ललचा रही है।

मैंने गला खंखारा। वह चौंकी, आंखें खोलीं और मुझे देखकर बुरी तरह शर्मिंदा हो गई। उसने जल्दी से स्कर्ट नीचे की, लेकिन उसकी चूत से रस टपक रहा था। मैं मुस्कुराया और बोला, “लोन के लिए इतना जोश? मुझे लगा था तुम सिर्फ फॉर्म भरवाने आई हो।” वह कुछ बोल नहीं पाई, बस सिर झुका लिया। लेकिन उसकी सांसें तेज थीं। मैंने दरवाजा लॉक किया और उसके करीब गया। मेरी पैंट में मेरा मोटा लौड़ा पहले से ही तन चुका था। मैंने कहा, “अगर सच में लोन चाहिए, तो साफ-साफ बोलो। मैं देख रहा हूं तुम्हारी भोसड़ी कितनी प्यासी है।”

पंद्रह मिनट तक मैंने उसकी चूत चाटी और उंगली से चोदा

अंजलि ने मेरी ओर देखा। उसकी आंखों में शर्म थी, लेकिन उससे ज्यादा कुछ और – हवस। उस लड़की ने अपने बूब्स सहलाते हुए धीरे से कहा, “सर… अगर मेरा लोन अप्रूव हो जाए… तो मैं कुछ भी कर सकती हूं।” उसकी यह बात सुनकर मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी पैंट की जिप खोली। मेरा तना हुआ लंड बाहर आ गया – मोटा, नसों वाला, सात इंच का। मेरे मुसल लंड को देखकर उस लड़की ने अपनी सांस रोक ली। मैंने उसके बाल पकड़े और उसका मुंह अपने लंड के पास लाया मुखमैथुन (Blowjob) करवाने के लिए। वह बिना विरोध किए घुटनों पर बैठ गई और अपना मुंह खोल लिया। उसकी गर्म जीभ मेरे लंड के सुपारे पर लगी और मैं सिसकारी भर उठा।

वह रंडी की तरह लंड चूसने लगी। गहराई तक मुंह में लेती, फिर बाहर निकालकर चाटती। उसके थूक से मेरा लंड चिपचिपा हो गया। मैंने उसके सिर को आगे-पीछे किया, उसका मुंह चोदते हुए। “चूस साली… पूरा लंड मुंह में ले… हां ऐसे ही…” मैं बड़बड़ा रहा था। उसने मेरे गोटे भी मुंह में लिए, चूसे। दस मिनट तक उसने मेरा लंड चूसा, फिर मैंने उसे उठाया और उसकी शर्ट के बटन खोल दिए। उसके भारी बोबे बाहर आए – गुलाबी निप्पल, सख्त। मैंने उन्हें जोर से दबाया, निप्पल चूसे। वह कराह रही थी, “आह… सर… जोर से…”

मैंने उस लड़की को ऑफिस डेस्क पर लिटाया। उसकी स्कर्ट पूरी ऊपर की और पैंटी फाड़कर फेंक दी। उसकी गुलाबी चूत पूरी तरह गीली थी, झांट साफ किए हुए, गुलाबी भोसड़ा चमक रहा था। मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर रखा और जीभ अंदर डाल दी। उसका रस मीठा था, चूत चाटते हुए मैंने उसकी भगनासा को भी चूसा। वह चीख रही थी, “आह… मर गई… चाटो सर… पूरी चूत चाटो…” उसके कुल्हे ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने दो उंगलियां उसकी चूत में डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। उसकी चूत से पछ-पछ की आवाज आ रही थी।

पंद्रह मिनट तक मैंने उसकी चूत चाटी और उंगली से चोदा। वह दो बार झड़ चुकी थी, उसका रस मेरे मुंह पर लगा हुआ था। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। वह बेचैन हो रही थी, “डालो सर… अपना मोटा लंड मेरी भोसड़ी में डालो… चोदो मुझे…” मैंने एक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड उसकी टाइट चूत में घुस गया। वह जोर से चीखी, “मादरचोद… फट गई मेरी चूत…” लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी। मैंने तेज-तेज चोदना शुरू किया। डेस्क हिल रहा था, चुदाई की आवाज पूरे केबिन में गूंज रही थी।

लोन अप्रूवल के लिए ऑफिस डेस्क पर बेतहाशा चुदाई

मैंने उसे कुत्ते की तरह चोदा। उसके बोबे हिल रहे थे, मैं उन्हें दबाता जा रहा था। हर धक्के के साथ उसकी चूत से रस बाहर निकल रहा था। वह गंदी-गंदी बातें बोल रही थी, “चोदो हरामी… अपनी रंडी बना लो मुझे… लोन के बदले रोज चोदना…” मैंने उसके मुंह पर अपना हाथ रखा और और जोर से धक्के मारे। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड फंस सा जा रहा था। मैंने उसे पलटा और पीछे से गांड ऊपर करवाई। उसकी गोल गांड देखकर मैं पागल हो गया। मैंने अपना लंड फिर उसकी चूत में डाला और गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदने लगा।

हर थप्पड़ पर वह चीखती, “मारो… और मारो… चोदो मुझे अपनी रंडी बनाकर…” मैंने उसकी गांड का छेद देखा – गुलाबी, सिकुड़ा हुआ। मैंने उंगली से उस नंगी लड़की के गांड के छेद को सहलाया। वह सिहर उठी लेकिन मना नहीं किया। मैंने थूक लगाकर अपनी उंगली उसकी गांड में डाल दी। वह कराह रही थी, “आह… गांड में… धीरे…” लेकिन मैंने दो उंगलियां डाल दीं और चूत साथ-साथ चोदता रहा। वह तीसरी बार झड़ने वाली थी। मैंने भी अपना माल रोक नहीं पाया। मैंने लंड बाहर निकाला और उसके बोबों पर गरम वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। चिपचिपा माल उसके चेहरे तक पहुंच गया।

हम दोनों हांफ रहे थे। लेकिन मेरी हवस खत्म नहीं हुई थी। मैंने उसे कुर्सी पर बिठाया और फिर उसका मुंह चोदने लगा । उसने फिर से लंड चूसा, इस बार और गहराई तक। मैंने उसके गले तक लंड ठूंसा। वह खांस रही थी लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रही थी। फिर मैंने उसे उठाया और दीवार के सहारे खड़ा किया। उसकी एक टांग ऊपर उठाई और फिर से चूत में लंड पेल दिया। इस बार चुदाई और तेज थी। उसके निप्पल मैं मुंह में लेता और काटता। वह चीख रही थी, “चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… मैं तुम्हारी वेश्या हूं आज…”

लगभग आधे घंटे तक हमने अलग-अलग पोजीशन में चुदाई की। कभी वह मेरे ऊपर बैठकर खुद उप्पर-निचे उछलती, उसके बोबे मेरे मुंह में। कभी मैं उसे गोद में उठाकर चोदता। उसकी चूत अब ढीली हो चुकी थी, मेरे माल और उसके रस से भरी हुई। आखिर में मैंने उसे फिर ऑफिस डेस्क पर लिटाया और मिशनरी पोजीशन में जोर-जोर से धक्के मारे। वह बार-बार झड़ रही थी, उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मैंने भी आखिरी बार अपना सारा माल उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। गरम वीर्य उसकी बच्चेदानी तक पहुंचा। वह थरथरा रही थी।

चुदाई के बाद का नशा और जिस्म का सौदा

हम दोनों पसीने से तर थे। उसने मेरे लंड को फिर से मुंह में लिया और साफ किया। मैंने उसके बाल सहलाए और कहा, “लोन अप्रूव हो जाएगा, चिंता मत करो।” वह मुस्कुराई, उसकी आंखों में संतुष्टि थी। उसने कपड़े ठीक किए, लेकिन उसकी चाल से साफ पता चल रहा था कि उसकी चूत अभी भी दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही है। उसने मुझे किस किया और बोली, “सर, कभी फिर बुलाना।” मैंने उसका नंबर लिया। वह चली गई, लेकिन उसके जाने के बाद भी उसके चूत के रस की खुशबू कमरे में फैली हुई थी।

उस दिन के बाद मैंने कई बार उसे याद किया। उसकी रंडी जैसी चुदाई, उसके कराहने की आवाज, उसकी चूत की टाइटनेस – सब कुछ। अप्रूवल के लिए आया उसका लोन मैंने तुरंत अप्रूव कर दिया। वह कभी-कभी “फॉलोअप” के बहाने आती रही। हर बार हमारा सेशन और जंगली होता गया। कभी मेरे केबिन में चुदाई, कभी बैंक बंद होने के बाद कैश काउन्टर पर चुदाई। लोन अप्रूवल के बाद तो वह सेक्सी माल लड़की मेरी पर्सनल रंडी बन गई थी। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक गलतफहमी इतना मजा दे सकती है।

कभी-कभी मुझे लगता है कि शायद वह लड़की जानबूझकर ऐसा कर रही थी। लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है? हमें दोनों को जो चाहिए था, वह मिल गया। उस बेचारी की पैसों की जरूरत पूरी हुई, मेरी हवस। और सबसे बढ़िया बात – कोई शिकायत नहीं, सिर्फ मजा।


ऑफिस डेस्क पर चोदा बैंक मैनेजर ने लोन अप्रूवल के लिए अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Hindi Office Sex Story – Choot chaatkar office desk par choda randeebaz bank manager ne loan approval ke liye :- उस दिन की चुदाई ने मेरी जिंदगी में एक नया रंग भर दिया। अनjali जैसी कामुक औरत मिलना सौभाग्य की बात थी। लोन तो सिर्फ बहाना था, असल में हम दोनों एक-दूसरे की देह के भूखे थे। आज भी जब कोई सुंदर लड़की लोन के लिए आती है, मेरे दिमाग में वही सीन घूम जाता है। शायद जिंदगी में ऐसे पल ही सबसे कीमती होते हैं – जहां गलतफहमी सही साबित हो जाए। आप भी कभी बैंक गए हों तो सोचिएगा… शायद आपकी किस्मत भी ऐसी ही खुल जाए।

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