HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesबहू की तड़पती चूत से मिलन हुआ बुढ़े ससुर के लंड का

बहू की तड़पती चूत से मिलन हुआ बुढ़े ससुर के लंड का

फ्री में पढ़ें जवान बहू की तड़पती चूत से मिलन हुआ बुढ़े ससुर के लंड का अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी – होली का त्योहार आते ही पूरा गाँव रंगों में सराबोर हो गया था। सत्तर वर्षीय ससुर मनोहर लाल धाकड़ अपनी झोपड़ी के आँगन में बैठे थे और उनकी गन्दी नजरें बार-बार अपनी 18 वर्षीय बहू माधवी के कमरे की तरफ जा रही थीं। सत्तर साल की उम्र में भी उनका लंड बिल्कुल जवानों की तरह खड़ा हो जाता था। आज सुबह से ही वह अपनी धोती के नीचे से उभर रहा था। उनकी पत्नी कमला तो पिछले पाँच साल से बिस्तर पर पड़ी थी और उनकी सूखी चूत में कोई दिलचस्पी नहीं रखता था। माधवी अकेले ही घर के सारे काम करती, उसका पति प्रकाश मुंबई में नौकरी करने गया हुआ था और दो साल से घर नहीं लौटा था। मनोहर लाल धाकड़ जानते थे कि उसकी जवान चूत कितनी तरस रही होगी।

दोपहर को जब जवान और सेक्सी बहू माधवी कुएँ से पानी भरने गई, सत्तर वर्षीय मनोहर लाल धाकड़ भी अपना लोटा लेकर बेटी समान बहू के पीछे-पीछे चल दिए। जानबूझकर उन्होंने आज लंगोट नहीं पहनी थी और उनका मोटा लंड बारबार धोती से बाहर झाँक रहा था। बहू माधवी ने जैसे ही पानी खींचना शुरू किया, मनोहर लाल धाकड़ ने पूछा, “बहू, अपने पति प्रकाश की कोई खबर है? होली पर त्योहार बनाने घर आ रहा है क्या?” माधवी ने सिर झुकाकर जवाब दिया, “नहीं बाबूजी, कल फोन आया था उनका, इस बार की होली पर भी नहीं आ पाएंगे वो।” मनोहर लाल धाकड़ के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई। उन्होंने जानबूझकर झुककर पानी का लोटा भरा ताकि उनका लंड और ज्यादा दिखे। माधवी की नजरें अपने पिता सामान ससुर के मोटे डंडे पर टिक गईं।

रात को जब सारा गाँव सो गया, मनोहर लाल धाकड़ अपनी पत्नी के पास लेटे-लेटे बेचैन हो रहे थे चुदाई के लिए। उनका लंड चादर को भेदकर बाहर निकलने को बेताब था। आखिरकार वह उठे और धीरे से अपनी 18 वर्षीय बहू माधवी के कमरे की तरफ बढ़ गए। दरवाजा खटखटाकर बोले, “बहू, जरा पैरों में दर्द हो रहा है, सरसों का तेल लगा दो ना।” माधवी ने अंदर से जवाब दिया, “आ जाइए बाबूजी, तेल लगा देती हूँ।” मनोहर लाल धाकड़ अंदर गए और खाट पर बैठ गए। माधवी ने तेल की शीशी निकाली और उनके पैरों पर हल्के हाथों से मालिश करने लगी। जैसे ही उसके नर्म हाथों ने उनकी जांघों को छुआ, मनोहर लाल धाकड़ का लंड फटाक से खड़ा हो गया।

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जवान बहू की तड़पती चूत से मिलन हुआ बुढ़े ससुर के लंड का अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

माधवी ने देखा कि उसके सत्तर वर्षीय ससुर की धोती के नीचे से एक मोटी गाँठ उभर आई है। मनोहर लाल धाकड़ ने कहा, “बहू, जरा ऊपर भी लगा दो, यहाँ भी दर्द हो रहा है।” माधवी का हाथ काँप रहा था, लेकिन वह समझ गई कि बाबूजी क्या चाहते हैं। दो साल से पति के बिना रह रही उसकी चूत में भी आग सुलग रही थी। उसने हिम्मत करके मनोहर लाल धाकड़ की जांघ के ऊपर हाथ फेरा और फिर धीरे से उनके लंड को छू लिया। मनोहर लाल धाकड़ ने आँखें बंद कर लीं और आह भरी। माधवी ने तेल से उनके लंड की मालिश शुरू कर दी, जो अब पूरे दस इंच का हो चुका था।

“बाबूजी, आपका तो लंड जवान मर्दों को भी मात दे देगा,” माधवी ने लजाते हुए अपने सत्तर वर्षीय ससुर जी से कहा। मनोहर लाल धाकड़ मुस्कुराए, “हम लोगों ने जवानी में रोज सौ बार चुदाई की है बेटा, आज भी वही ताकत है।” माधवी ने अब पूरी तरह से हार मान ली। उसने दीया बुझा दिया और मनोहर लाल धाकड़ के लंड को अपने मुँह में ले लिया। मनोहर लाल धाकड़ चीख उठे, “अरे बहू, ये क्या कर रही हो तुम मेरी बेटी जैसे हो और मैं तुम्हारे पिता समान हूँ? ये तो पाप है!” माधवी ने अपने मुँह से अपने सत्तर वर्षीय बुढ़े ससुर जी का तगड़ा लंड निकालकर जवाब दिया, “जब चोदना ही है तो पूरा मजा लीजिए ना बाबूजी।” और फिर वह दुबारा से उस मोटे डंडे को चूसने लगी, जैसे कोई ललचाया हुआ छोटा बच्चा दुनिए के सबसे महंगे आम “मियाजाकी” की गुठली चूस रहा हो।

18 वर्षीय बहू ससुर से चुदाई करवाने के लिए नंगी होकर खाट पर लेट गई

मनोहर लाल धाकड़ का लंड अब लोहे की रोड के जैसे कड़क हो चुका था। 18 वर्षीय बहू माधवी ने अपने कपड़े उतार फेंके और ससुर जी के लंड से अपनी तड़पती योनी की चुदाई करवाने के लिए नंगी होकर खाट पर लेट गई। मनोहर लाल धाकड़ ने उसके स्तनों को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। माधवी की चूचियाँ गुलाबी और नर्म थीं, जिन्हें चूसते ही वह कराह उठी। मनोहर लाल धाकड़ ने उसकी चूत को टटोला तो वह पहले से ही गीली हो चुकी थी। “बहू, तेरी चूत तो आग की तरह जल रही है,” मनोहर लाल धाकड़ ने कहा और अपने लंड को अपनी बहू की तड़पती चूत के द्वार पर रख दिया। माधवी ने आँखें बंद कर लीं जैसे वह किसी अधर्म और पाप के लिए तैयार हो रही हो।

सत्तर वर्षीय बुढ़े मनोहर लाल धाकड़ ने जोर से धक्का दिया और उनका मोटा लंड 18 वर्षीय बहू माधवी की तंग चूत को चीरता हुआ अंदर घुस गया। माधवी चीख उठी, “आह बाबूजी! धीरे से डालो अपना लंड मेरी बुर में!” दो साल बाद पहली बार कोई लंड जवान बहू की तड़पती चूत में घुसा था और वह भी इतना मोटा। मनोहर लाल धाकड़ ने धीरे-धीरे चुदाई शुरू की। माधवी की चूत उनके लंड को अपने अंदर समेटने की कोशिश कर रही थी। थोड़ी देर में ही मनोहर लाल धाकड़ ने तेज गति पकड़ ली और माधवी की टाइट चूत को जोर-जोर से चोदने लगे। खाट की चरचराहट से पूरा कमरा गूँज उठा। माधवी के स्तन हवा में उछल रहे थे और उसकी चूत से चिपचिपा रस बह रहा था।

आधे घंटे तक चुदाई करने के बाद मनोहर लाल धाकड़ ने माधवी को पलट कर कुतिया बना दिया डॉगी सेक्स पोजीशन में सेक्स करने के लिए और कुत्ते की मुद्रा में पीछे से अपनी नंगी बहू की तड़पती चूत जल्दी जल्दी मारने लगे। अब उनका लंड अपनी बहू की चूत में और भी जायदा गहराई तक जा रहा था। चुदते चुदते नंगी बहू माधवी जोर सेचिल्ला उठी, “आह बाबूजी! मैं स्खलित होने वाली हूँ मेरी बुर पानी छोड़ने वाली है!” मनोहर लाल धाकड़ ने और तेजी से धक्के मारे और अचानक उनका गर्म वीर्य जवान बहू की तड़पती चूत के अंदर गिरने लगा। माधवी भी चरम सुख पर पहुँच गई और उसके शरीर में झटके लगने लगे। दोनों थककर खाट पर गिर पड़े। मनोहर लाल धाकड़ ने माधवी को गले लगा लिया और कहा, “बहू, आज से तू मेरी रखैल है, समझी?” माधवी ने सिर हिला दिया, उसकी आँखों में संतुष्टि थी।

अगले कुछ महीनों में सत्तर वर्षीय बुढ़े मनोहर लाल धाकड़ और 18 वर्षीय बहू माधवी का यह अवैध यौन संबंध नियमित हो गया। जब भी मौका मिलता, वे एक-दूसरे को संतुष्ट करते। मनोहर लाल धाकड़ ने माधवी को हर तरह की चुदाई सिखाई – कुत्ते की मुद्रा, सिंह की मुद्रा, कमल की मुद्रा। माधवी ने भी बुढ़े के लंड को चूसने और उसकी गेंदों को दबाने में महारत हासिल कर ली। एक दिन जब प्रकाश का पत्र आया कि वह होली पर घर आ रहा है, मनोहर लाल धाकड़ और माधवी दोनों चिंतित हो गए। उन्हें पता था कि अब उनकी यह गुप्त मुलाकातें बंद हो जाएँगी।

प्रकाश के आने से पहले ही माधवी ने मनोहर लाल धाकड़ को बताया कि वह गर्भवती है। मनोहर लाल धाकड़ पहले तो घबरा गए, लेकिन फिर खुश हो गए। उन्होंने कहा, “चिंता मत करो बेटा, मैं प्रकाश को समझा दूँगा कि वह तुझे छोड़कर गया था तब तू गर्भवती हो गई थी।” प्रकाश जब आया तो उसने खुशी-खुशी इस खबर को स्वीकार कर लिया की उसकी पत्नी के पेट में जो बच्चा पल रहा है वह उसी का अंश है। नौ महीने बाद गर्भवती माधवी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। मनोहर लाल धाकड़ ने उसे गोद में लेकर कहा, “मेरा बेटा प्रकाश तो नपुंसक निकला, लेकिन मैंने अपनी बहू से ही पोता पैदा कर दिया!” और फिर वह जोर से हँस पड़े। माधवी ने भी मुस्कुराते हुए सिर झुका लिया।

सेक्स कहानी का निष्कर्ष – जवान बहू की तड़पती चूत से मिलन हुआ बुढ़े ससुर के लंड का

इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी के अंदर हमने देखा कि कैसे बसंत के मौसम और होली के उत्सव ने एक बूढ़े आदमी और उसकी युवा बहू के बीच एक अप्रत्याशित यौन संबंध को जन्म दिया। मनोहर लाल धाकड़, जो अपनी उम्र के बावजूद यौन रूप से सक्रिय थे, ने अपनी जवान और सेक्सी बहू माधवी की यौन भूख को शांत किया, जो दो साल से पति के बिना तड़प रही थी।

शुरुआत में ससुर और बहू दोनों को इस अवैध सेक्स संबंध में पाप का भय था, लेकिन धीरे-धीरे वे इन अवैध सेक्स संबंधों के आदी हो गए। इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का अंत एक विडंबना के साथ होता है जब 18 वर्षीय जवान बहू माधवी अपने सत्तर वर्षीय ससुर मनोहर लाल धाकड़ से चुदवाकर गर्भवती हो जाती है और उनका बेटा प्रकाश इस बात को सहजता से स्वीकार कर लेता है। यह कहानी गाँव की सामाजिक संरचना, मानवीय कमजोरियों और यौन इच्छाओं के बारे में है जो उम्र और पवित्र रिश्तों की सीमाओं को पार कर जाती हैं।

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