HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesदेवर बोला भाभी देखो कैसे तुम्हारी गांड़ मेरे लंड को निगल रही है

देवर बोला भाभी देखो कैसे तुम्हारी गांड़ मेरे लंड को निगल रही है

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दोस्तों, मेरा नाम रजनी महरा है, और ये अन्तर्वासना हिंदी भाभी-देवर सेक्स कहानी है मेरी ज़िंदगी के उस मोड़ की, जिसने मुझे पूरी तरह बदल कर रख दिया। मैं आपको सबकुछ ऐसे बताऊँगी जैसे मेरे साथ घटा, बिना किसी लाग-लपेट के। मैं एक सीधी-साधी, मध्यमवर्गीय घर की बहू हूँ, या यूँ कहिए कि थी। मेरी शादी को 3 साल हो गए थे। मेरे पति, विशाल जी, एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनकी नौकरी उन्हें हफ्तों के लिए दूसरे शहर ले जाती थी। घर में अक्सर मैं और मेरे देवर, अमन, ही होते थे।

अमन, उम्र 23 साल, मुझसे करीब 5 साल छोटा है। वो पढ़ाई के सिलसिले में हमारे पास ही रहता था। एक शरीफ, थोड़ा शर्मीला लड़का, जिसकी बॉडी जिम की वजह से काफी सुडौल थी। मैं अक्सर उसे निहारती रहती, पर अपने मन के भावों को दबा देती। मेरा फिगर उस वक्त 36-28-38 का था, और उम्र 28 साल।

अमन के आने के बाद से घर में एक अजीब सी हलचल रहती। वो हमेशा मेरी तारीफ करता, “भाभी, आप आज बहुत सुंदर लग रही हैं,” या “ये साड़ी आप पर बहुत खिल रही है।” उसकी बातें सुनकर मेरे भीतर कुछ गुदगुदा सा जाता, पर मैं बस शरमा कर रह जाती। यही वो दौर था जब एक देवर भाभी अन्तर्वासना हिंदी एनल सेक्स स्टोरी (Bhabhi Devar Anal intercourse Sex Story) की नींव अनजाने में पड़ रही थी, और मेरे भीतर एक चुदाई की कहानी रची जाने को बेताब थी।

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एक दोपहर की बात है। बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी, और मैं अपने कमरे में साड़ी बदल रही थी। अचानक दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। “भाभी, अंदर आ सकता हूँ?” अमन की आवाज़ थी। मैंने बिना सोचे-समझे कह दिया, “हाँ, आ जाओ।” जैसे ही वो अंदर आया, मुझे एहसास हुआ कि मैं सिर्फ ब्लाउज़ और एक पतली सी साया में खड़ी हूँ, जिसमें मेरी बोबे और कुल्हे साफ़ झलक रहे थे। उसकी आँखें मुझ पर टिक गईं और वो पल भर के लिए वहीं ठिठक गया।

मैंने तुरंत साड़ी का पल्लू उठाकर अपने आप को ढकने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। शर्मिंदगी और सिहरन का एक मिलाजुला सा एहसास मेरे पूरे शरीर में दौड़ गया। मैं सोचने लगी, क्या यही किसी हिंदी सेक्स कहानी की शुरुआत होती है? क्या मैं सच में एक ऐसी भाभी बन रही थी, जो अपनी ही कामुक कहानी की नायिका बनने वाली थी?

उसने पहले तो नज़रें चुराई, फिर थोड़ा हकलाते हुए बोला, “वो… मैं बस आपका लैपटॉप लेने आया था, भाभी।” लेकिन उसकी निगाहें बार-बार मेरी छाती के उभार पर जा रही थीं। मैंने देखा, उसकी जींस पर हल्का सा उभार आ गया था। ये देखकर मेरी साँस तेज़ हो गई और मेरे पेट के निचले हिस्से में एक गर्म सी लहर उठी। वो माहौल, जो अभी तक सामान्य था, एकाएक बोझिल और मदहोश कर देने वाला बन चुका था।

मुझे याद आया, “कुछ रिश्ते बिस्तर तक पहुँचने से पहले ही दिल और दिमाग में अपनी जगह बना लेते हैं।” और शायद हमारे बीच वो रिश्ता पहले से ही कहीं बन चुका था। ये कोई आम बात नहीं थी, ये एक गहरी, शारीरिक भूख थी जो हम दोनों को अंदर ही अंदर खाए जा रही थी।

अगले कुछ दिनों तक हम दोनों के बीच बहुत कम बात हुई, लेकिन आँखों की गुफ्तगू लगातार जारी रही। फिर एक रात, विशाल जी ने फोन किया कि उनकी ट्रिप 1 हफ्ते के लिए और बढ़ गई है। फोन रखने के बाद मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। डर और एक अनजानी सी उत्तेजना का मिश्रण मेरे भीतर घुमड़ रहा था। मैं डाइनिंग टेबल पर बैठी चाय पी रही थी, तभी अमन आया और मेरे ठीक सामने बैठ गया। “क्या हुआ भाभी, आप परेशान लग रही हैं?” उसने बड़ी मासूमियत से पूछा। मैंने बस इतना कहा, “कुछ नहीं, बस तुम्हारे भैया की ट्रिप बढ़ गई है।”

अमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आई। उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा, “आप अकेली थोड़ी हो, मैं हूँ ना।” उसका स्पर्श बिजली के झटके जैसा लगा। मैंने अपना हाथ नहीं हटाया। मैंने बस अपनी नज़रें झुका लीं। मेरा दिल इतनी ज़ोरों से धड़क रहा था कि मुझे डर लग रहा था कि कहीं वो उसकी आवाज़ न सुन ले। ये वो लम्हा था जब एक भाभी और देवर के बीच की पतली सी रेखा, एक कामुक औरत की बेचैनी के आगे पूरी तरह धुंधली पड़ गई। एक रांड की तरह मेरा जिस्म पल भर के लिए उसकी छुअन को तरस गया, और मैं समझ गई कि अब इस बात से इनकार करना बेमानी था।

उस रात, मैं गहरी नींद में थी, जब मेरी आँख खुली। कमरे में हल्की रोशनी थी, और अमन मेरे बिस्तर के कोने पर बैठा मुझे देख रहा था। मैं चौंक कर उठ बैठी, “अमन! ये तुम…” उसने मेरे होठों पर उंगली रखते हुए कहा, “श्श्श… डरो मत, भाभी। मैंने सोचा कि आप अकेली होंगी।” मैं समझ गई थी कि ये वो मोड़ है जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार था। उसने धीरे-धीरे अपना चेहरा मेरी तरफ बढ़ाया और मेरे होठों को चूम लिया।

दोस्तों, एक पल के लिए मैं अपनी सुध-बुध खो बैठी, फिर मेरी बाँहें उसकी गर्दन के इर्द-गिर्द कस गईं और मैंने भी उसके चुंबन का पूरी शिद्दत से जवाब दिया। मेरे पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, जैसे मेरी बोबों की मालिश किसी ने बहुत प्यार से की हो।

मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं, और मेरे स्तन उभर कर बाहर आने को बेताब थे। अमन के हाथ मेरी कमर पर थे, लेकिन उसकी उंगलियाँ अब मेरे ब्लाउज़ के नीचे जाने लगी थीं। जैसे ही उसकी गर्म हथेली मेरे पेट की नर्म त्वचा पर पड़ी, मैंने एक गहरी, थरथराती हुई साँस छोड़ी।

मेरे अंदर का एक हिस्सा चिल्ला रहा था, ‘रुक जाओ, ये गलत है’, लेकिन मेरे जिस्म का एक-एक रोम कब से इसी एक स्पर्श का इंतज़ार कर रहा था। “तुम्हें पता है, मैं कितने दिनों से तुम्हें देख रहा हूँ,” उसने कान में फुसफुसाकर कहा, उसकी साँसें गर्म और उत्तेजक थीं। “हर सुबह तुम जब गीली साड़ी में बाथरूम से निकलती हो ना, तब तुम सिर्फ मेरी भाभी नहीं, बस एक बहुत ही कामुक औरत लगती हो।” उसकी ये बातें मेरे मन में बसे हर संयम और डर को तोड़ने के लिए काफी थीं।

“मुझे दिखाओ कि तुम कितना तरसती हो,” उसने मेरी ठुड्डी पकड़ कर मुझे सीधे अपनी आँखों में देखने के लिए विवश किया। मेरी आँखों में आँसू और हवस दोनों साफ़ झलक रहे थे। “हाँ… मुझे बहुत तरस हो रही है अमन… बहुत दिनों से,” मैंने टूटती हुई आवाज़ में कहा, “प्लीज़… अब मत जाना।” एक वेश्या या कॉलगर्ल की तरह मैंने उससे गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया, जैसे मेरी इज्ज़त मेरे कपड़ों में नहीं, बल्कि उसकी एक झलक में बंद हो। और अमन ने मुझे वो सब कुछ देने का वादा किया, जिसकी मेरे तन-मन को प्यास थी। एक धंधेवाली की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसी औरत की तरह जिसे अपनी भूख पर कोई शर्म नहीं थी।

उसके हाथ मेरी पीठ पर पड़े ब्लाउज़ के हुक खोलने में लगे थे। एक-एक करके वो हुक खुल रहे थे, और हर खुलते हुक के साथ जैसे मेरे भीतर का तनाव कम होता जा रहा था। आखिरकार, मेरा ब्लाउज़ फर्श पर गिर गया। अमन ने मेरी ब्रेसियर के ऊपर से ही मेरे बोबों की मालिश शुरू कर दी। उसका अंगूठा धीरे-धीरे मेरे सख्त हो चुके निप्पल पर रगड़ खा रहा था, जिससे मेरे मुँह से अनायास ही हल्की सी कराह निकल गई। उसकी ये हैण्डजॉब जैसी हरकत मेरे होश उड़ा रही थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और बस उस एहसास में डूब गई। मेरे निप्पल इतने तने हुए थे कि उन्हें चूसे जाने की ज़रूरत महसूस हो रही थी।

उसने अपनी पैंट उतार दी, और मैंने पहली बार उसका तना हुआ लंड देखा। वो पूरी तरह से खड़ा लंड था, एक बड़ा लंड, जो देखने में ही बहुत मज़बूत और गर्म लग रहा था। मेरी पिछली सारी चिंताएँ धुएँ की तरह उड़ चुकी थीं। अब मैं बस उस पल में जी रही थी, और सिर्फ और सिर्फ अमन को महसूस करना चाहती थी। मेरे पति का ख्याल आते ही मैंने झटका देकर उसे दिमाग से झटक दिया। अब ये मेरी बारी थी, मेरी भूख, मेरी ज़रूरत।

उसने मेरी साया भी उतार दी, और मैं उसके सामने पूरी तरह नग्न थी। मेरी रसदार चूत, जो झांट के बाल से ढकी हुई थी, अब बुरी तरह तर हो चुकी थी। मेरा चूत का रस मेरी जाँघों को भिगोने लगा था। अमन ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी टाँगें फैला दीं। उसने सबसे पहले अपना चेहरा मेरी जाँघों के बीच रखा। उसकी साँसों की गर्मी सीधे मेरी भीगी फुद्दी पर पड़ रही थी। और फिर उसने अपनी जीभ मेरी चूत पर लगा दी। वो मुझे चूत चाटना शुरू कर दिया, और मेरी तो जैसे चीख निकल गई।

उसकी जीभ कभी मेरी भोसड़ी के छेद पर मंडराती, तो कभी मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को चाटती। वो बड़ी बेदर्दी से मेरी रसदार चूत का रस पी रहा था, और मैं सिर्फ कराह रही थी। मेरे हाथ उसके बालों को पकड़ कर उसे और ज़ोर से अपनी ओर दबा रहे थे। “हाँ… बिल्कुल ऐसे ही… चाटो मेरी चूत… चूस लो,” मेरे मुँह से बेसाख्ता निकला। एक छिनाल की तरह मैं उससे ये मुखमैथुन करवा रही थी, और इस अहसास से मुझे कोई शर्म नहीं, बल्कि एक अद्भुत आज़ादी का एहसास हो रहा था।

मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया और पहली बार अपने हाथ से उसका लंड पकड़ा। वो गर्म और फड़फड़ाता हुआ मेरी मुट्ठी में था। मैंने उसे सहलाना शुरू कर दिया। हैण्डजॉब के दौरान मैंने उसके लंड के गोटे को भी सहलाया, जो मेरी इस हरकत से सख्त और ऊपर चढ़े हुए थे। उसके अंडकोष मज़बूत और भरे हुए थे, उनकी अंड की थैली गर्म और थोड़ी खुरदरी थी। अब मेरी बारी थी। मैंने उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया। उसका स्वाद नमकीन, थोड़ा चिपचिपा और बहुत ही मर्दाना था।

मैं उसके लम्बा लंड को पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी, फिर भी मैंने कोशिश जारी रखी। “बहुत अच्छा कर रही हो, भाभी… ऐसे ही करो, पूरा अंदर लो,” अमन की कराह ने मुझे और जोश दिला दिया। उसने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया और धीरे-धीरे मेरे मुँह पर ज़ोर देने लगा। ये ब्लोजॉब मेरे लिए एक नया एहसास था, लेकिन मुझे उसकी धड़कने अपने होठों पर महसूस करके बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी साँसें थम रही थीं, पर मैं रुक नहीं सकती थी। उसके लंड के ऊपर की नसें मेरी जीभ के नीचे फड़क रही थीं, और मैं जानती थी कि अब उसे मेरे अंदर होना है।

अमन ने मुझे बिस्तर पर घुमा दिया और मेरे ऊपर आ गया। उसने एक हाथ से अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत के दरवाज़े पर रखा। उसका अगला हिस्सा मेरी टाइट चूत पर ज़ोर दे रहा था। और फिर एक ही धक्के में उसने अपना पूरा बड़ा लंड मेरी भोसड़ी में घुसा दिया। “आह्ह… अमन… आहिस्ता से…,” मैंने ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा। इतने दिनों की भूख, इतने सारे सपने, सब एक साथ मेरे भीतर उतर रहे थे। मेरी चूत इतनी टाइट थी कि उसे अंदर घुसाने में ही मुझे लगा जैसे कोई दीवार टूट रही है।

लेकिन वो दर्द तुरंत एक अद्भुत सुख में बदल गया। उसकी हर घुसन के साथ मेरी चूत उसे और कस कर पकड़ लेती। बिस्तर की चरमराहट, हमारी साँसों की तेज़ आवाज़, और मेरी चूत का रस मिलकर एक गहरी चुदाई की तान छेड़ रहे थे। “इतनी टाइट चूत है तुम्हारी, पूरा जकड़ लिया है,” उसने मेरे कान में फुसफुसाया। मैं बस कराह कर रह गई। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ उस चीज़ पर था जो मेरे अंदर थी और बुरी तरह धक्के मार रही थी। एक रांड की तरह मैं हर धक्के को अपने भीतर खींच रही थी।

उसने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और मुझे और ज़ोर से चोदना शुरू किया। अब वो गहरी और ज़ोरदार घुसनें मार रहा था। “हाँ… वहीं करो… ज़ोर से… अमन, ज़ोर से चोदो मुझे,” मेरे मुँह से निकल रहा था। वो मेरी चूत के साथ-साथ मेरे कुल्हे भी सहला रहा था, और उसकी आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस थी। और मैं भी उसी हवस में कहीं खो चुकी थी। अब तक हमारी चुदाई पूरे ज़ोरों पर थी।

फिर अमन ने मुझे घुमाकर कुत्ते की तरह बिस्तर पर लिटा दिया गुदा सेक्स (Anal intercourse) करने के लिए। मेरे चूतड़ उभर कर सामने आ गए। उसने मेरे गांड का छेद पर अपनी उंगली रखी। मैं सिहर गई। “नहीं, अमन… वहाँ गांड में नहीं… प्लीज़ भगवन के लिए मेरी गांड मत मारना,” मैंने डरते हुए कहा। “आज तो पूरा एक्सप्लोर करूंगा तुम्हें,” उसने शरारत भरे लहज़े में कहा।

उसने थोड़ी सी लार मेरे गांड के छेद पर लगाई और बहुत ही आराम से अपनी 1 उंगली अंदर मेरी गांड में डाल दी। गांड में उंगली का वो पहला एहसास बहुत अलग, थोड़ा दर्द भरा लेकिन बहुत उत्तेजित करने वाला था। वो उंगली अंदर-बाहर कर रहा था, और मैं आँखें बंद करके उस पल का मज़ा ले रही थी।

“अब सहोगी मेरा लंड अपनी गांड में?” उसने पूछा। डर और एक शैतानी सी उत्तेजना ने मुझे ‘हाँ’ कहने पर मजबूर कर दिया। ये मेरा पहला अनुभव था गुदा सेक्स (Anal intercourse) का। उसने अपना बड़ा लंड मेरे गुदा द्वार पर रखा। मैंने अपने दाँत भींच लिए। जैसे-जैसे वो अंदर घुसता गया, मुझे लगा जैसे मेरा पूरा शरीर दो हिस्सों में बँट जाएगा। ये एक असहनीय दर्द और मीठी पीड़ा का मिश्रण था। “आह्ह… बहुत बड़ा है… नहीं जाएगा,” मेरी आँखों में आँसू आ गए। “अरे, जाने दे ना भाभी… आराम से… देखो कैसे तुम्हारी गांड़ मेरे लंड को निगल रही है,” उसने कहा और मेरे कुल्हे पकड़ कर एक और धक्का दिया।

मेरे नंगे देवर का पूरा लंड मेरी गांड के अंदर था। वो धीरे-धीरे हरकत कर रहा था, और कुछ ही पलों में मेरी गांड का वो तेज दर्द एक गहरी संतुष्टि में बदल गया। मैं अपने मन ही मन सोच रही थी, ‘भगवान, मैं कितनी बड़ी रंडी हूँ, अपने ही देवर से अपनी गांड चुदवा रही हूँ।’ लेकिन इस सोच ने मेरी उत्तेजना को और बढ़ा दिया। मेरी चूत फिर से टपकने लगी। मेरा चिपचिपा माल मेरी जाँघों पर बह रहा था।

अमन ने मुझे फिर से अपनी ओर घुमाया और मिशनरी पोजीशन में आ गया। इस बार उसने बिना कोई रहम किए, बहुत तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया। मेरे बोबे उछल रहे थे, और कमरे में सिर्फ हमारी त्वचा के टकराने की गीली आवाज़ गूँज रही थी। “निकाल रहा हूँ… अमन… में माल… अंदर हूँ… मैं….,” वो ज़ोर से चिल्लाया। “हाँ… अंदर डालो… अपना सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर भर दो…,” मैंने भी चिल्लाकर कहा। और उसके कुछ ही पल बाद, मैंने महसूस किया कि उसके गर्म शुक्राणु की धारें मेरे भीतर गहराई तक भर रही हैं। मेरी चूत ने हर बूँद को जज़्ब कर लिया।

हम दोनों बुरी तरह थके हुए और पसीने में लथपथ बिस्तर पर नग्न अवस्था में पड़े थे। मेरी साँसें अभी भी सामान्य नहीं हुई थीं। मेरी चूत में हल्की सी जलन और साथ ही एक गहरी शांति थी। अमन मेरी तरफ पीठ किए लेटा था। मैंने उसकी नंगी पीठ पर हल्के से हाथ फेरा और लगभग फुसफुसाते हुए पूछा, “अमन, क्या सोच रहे हो? कहीं तुम्हें ये सब गलत तो नहीं लग रहा?” अमन पलटा और उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।

“पागल हो गई हो क्या भाभी… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ,” उसने धीरे से कहा और मेरे माथे पर एक चुंबन रख दिया। उसकी बात सुनकर मेरी आँखों में आँसू आ गए। मैंने अपना चेहरा उसकी छाती में छिपा लिया। जिस्मानी भूख शांत हो चुकी थी, लेकिन एक नए रिश्ते की दास्तान अभी शुरू हुई थी।

तो दोस्तों, ये थी मेरी और अमन की इस अधूरी प्यास को पूरा करने की सच्ची हिंदी सेक्स कहानी, जो एक बेताब चुदाई से शुरू होकर एक अनजानी गहराई तक जा पहुँची। हालाँकि ये एक भाभी और देवर के बीच की बात थी, लेकिन इस सबके पीछे एक ऐसा प्यार भी था जिसे हमने उस रात पहली बार एक दूसरे के नाम कर दिया। अब मैं बहुत उत्सुक हूँ ये जानने के लिए कि आपको मेरी ये गर्म कहानी कैसी लगी और आपके दिल में क्या चल रहा है। कृपया मुझे कमेंट करके ज़रूर बताएँ, आपके विचार मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं।

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