पहले बहन को चोदकर प्रेग्नेंट करा फिर गर्भपात करवाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- करवाचौथ की रात, जब चाँद की रोशनी में प्रेम और वासना का एक निषिद्ध मेल हुआ, मैं, रवि, अपनी छोटी बहन काव्या के साथ एक ऐसी राह पर चल पड़ा, जो समाज की नज़रों में गलत थी। त्योहार की चमक और घर की रौनक के बीच, हमारी नज़रें चुपके से मिलीं, और एक अनकही चाहत ने हमें करीब ला दिया। एकांत में, हमने अपने मन की आग को बुझाया, जहाँ कामुकता और भावनाओं का तूफान उमड़ा। काव्या की कोमल देह और मेरी बेकाबू इच्छाएँ उस रात एक हो गईं। लेकिन इस रात का परिणाम हमारी ज़िंदगी बदल देगा—काव्या गर्भवती हो गई। अब हम दोनों एक रहस्य को छिपाने की जद्दोजहद में हैं, जहाँ डर, प्यार और पश्चाताप का मिश्रण है। यह कहानी निषिद्ध प्रेम, तीव्र वासना और इसके नाटकीय परिणामों की है।
First I made my sister pregnant by fucking her then I got her abortion done Antarvasna Hindi 18+ adult sex story :- मैं, रवि, 26 वर्ष का हूँ, और मेरी छोटी बहन काव्या 21 वर्ष की। करवाचौथ का दिन था, और हमारा घर मथुरा में त्योहार की रौनक से जगमगा रहा था। माँ और ताई ने दीयों से आँगन सजाया था, और मेहंदी की सुगंध हवा में तैर रही थी। काव्या ने लाल साड़ी पहनी थी, जो उसके गोरे रंग और भरे हुए नितंबों को और उभार रही थी। उसकी कमर की लचक और चोली से झाँकते उसके उन्नत स्तन मुझे बेकाबू कर रहे थे। दिनभर उसकी मुस्कान और मेरी नज़रों का मेल कुछ अनकहा बयान कर रहा था। जब वह मेहंदी लगवा रही थी, उसने मुझे एक चुलबुली नज़र दी, जिसने मेरे दिल में आग सी लगा दी। मैं उसका भाई था, पर उस पल मेरे मन में केवल एक पुरुष की चाहत थी।
उसके बाद, रात को चाँद निकलने का समय आया। सभी छत पर थे, और काव्या ने व्रत खोला। उसकी आँखों में एक चमक थी, जो मुझे बुला रही थी। जब सब खाना खाकर अपने कमरों में चले गए, हमने एक-दूसरे को संकेत दिया। हम चुपके से घर के पिछले हिस्से में गोदाम के पास पहुँचे, जहाँ केवल एक मद्धम दीया जल रहा था। मैंने उसकी कलाई पकड़ी और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उसकी साँसें गरम थीं, और उसने धीरे से कहा, “भैया, ये ठीक नहीं, पर मैं रुक नहीं पा रही।” उसकी बातों ने मेरे जोश को और भड़का दिया। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू सरकाया और उसके कोमल होंठों को चूम लिया।
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काव्या ने मेरी कमीज के बटन खोल दिए, और उसकी उंगलियाँ मेरे सीने पर फिसलने लगीं। मैंने उसकी चोली के हुक खोले, और उसके गोल, मुलायम स्तन मेरे सामने थे। मैंने उन्हें सहलाया, और उसकी सिसकारियाँ हवा में गूँजने लगीं। “भैया, धीरे,” उसने फुसफुसाया, पर उसकी आँखें और चाह रही थीं। मैंने उसकी साड़ी को कमर तक उठाया और उसकी जाँघों को सहलाया। उसकी चूत गीली थी, और मेरी उंगलियाँ वहाँ फिसल रही थीं। उसने मेरे लौड़े को पकड़ा और उसे मुठियाने लगी। उसका स्पर्श इतना कामुक था कि मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा किया और अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा।
उसकी सिसकारियाँ अब तेज हो चली थीं। मैंने उसे चुप कराया, क्योंकि घर में सब सो रहे थे। फिर मैंने अपनी पैंट उतारी और अपने तने हुए लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। “भैया, डाल दो,” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने धीरे से अपना लौड़ा उसकी तंग चूत में प्रवेश कराया। वह चीखी, पर मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया। धीरे-धीरे मैंने धक्के मारे, और उसकी चूत मेरे लंड को लपेट रही थी। हम दोनों पसीने से तरबतर थे, और उसकी सिसकारियाँ मेरे कानों में संगीत बन रही थीं। यह पल इतना तीव्र था कि समय का पता ही नहीं चला।
अन्तर्वासना शांत करने के लिए सगे भाई बहन के निषिद्ध प्रेम की आग
उसके बाद, मैंने काव्या को गोद में उठाया और गोदाम के पुराने गद्दे पर लिटाया। उसकी साड़ी अब पूरी तरह खुल चुकी थी, और उसका नंगा बदन चाँदनी में चमक रहा था। मैंने चुदाई करते करते बहन के नंगे स्तनों को अपने मुँह में लिया और उन्हें चूसना प्रारंभ कर दिया, जिससे उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गईं। उसने मेरे लौड़े को फिर से पकड़ा और उसे अपने मुँह में ले लिया। उसकी जीभ मेरे लंड के चारों ओर घूम रही थी, और मैं आनंद से पागल हो रहा था। मैंने उसका सिर पकड़ा और धीरे-धीरे उसके मुँह में धक्के मारे। उसकी आँखों में वासना की चमक थी, और वह मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी। यह कामुक पूर्वक्रीड़ा हमें और बेकाबू कर रही थी।
फिर मैंने उसे पुरुष ऊपर वाली मुद्रा में लिटाया और उसकी चूत में अपना लौड़ा डाल दिया। उसकी तंग चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया, और मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। काव्या की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल रही थीं, और उसने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से खरोंच दिया। “भैया, और तेज,” उसने कहा, और मैंने अपनी गति बढ़ा दी। उसका बदन मेरे नीचे लहरा रहा था, और उसकी चूत का रस मेरे लंड पर लिपट रहा था। मैंने उसे कसकर पकड़ा और तब तक धक्के मारे, जब तक मैंने उसके अंदर वीर्य की धार छोड़ दी। वह संतुष्ट होकर मेरे सीने से लिपट गई।
लेकिन यह आनंद का अंत नहीं था। मैंने उसे पलटाया और पीछे से बहन की गांड को सहलाया। उसकी गोल, मुलायम गांड देखकर मेरा लौड़ा फिर से तन गया। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे, और वह सिहर उठी। “भैया, ये क्या कर रहे हो?” उसने शरारती अंदाज में पूछा। मैंने उसकी गांड में अपनी उंगली डाली, और वह सिसकने लगी। फिर मैंने धीरे से अपना लौड़ा उसकी गांड में प्रवेश कराया। वह दर्द से चीखी, पर धीरे-धीरे उसे मज़ा आने लगा। मैंने धीमे धक्के मारे, और उसकी गांड मेरे लंड को जकड़ रही थी। यह अनुभव इतना तीव्र था कि हम दोनों खो गए।
रात के 3 बज चुके थे, और हम दोनों थककर चूर थे। मैंने काव्या को अपनी बाहों में लिया, और हमने एक-दूसरे को चूमा। उसने कहा, “भैया, ये हमारा रहस्य है, किसी को नहीं पता चलना चाहिए।” मैंने हामी भरी, और हम चुपके से अपने कमरों में लौट गए। अगले दिन काव्या सामान्य व्यवहार कर रही थी, जैसे कुछ हुआ ही न हो। लेकिन मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। क्या हमने गलत किया? पर उस रात की गर्मी और आनंद मेरे दिमाग से नहीं जा रहा था। काव्या की हर मुस्कान मुझे उस रात की याद दिला रही थी।
घोड़ी बनाया और पीछे से बहन की चूत में धक्के मारे
कई दिन बीत गए, और हम दोनों चुपके-चुपके नज़रें मिलाते रहे। एक रात, जब माँ और पिताजी किसी रिश्तेदार के यहाँ गए थे, हम फिर से एकांत में मिले। इस बार काव्या ने नीली साड़ी पहनी थी, जो उसके बदन से चिपक रही थी। मैंने उसे बाहों में लिया और उसके होंठों को चूमा। उसने मेरे लौड़े को पकड़ा और उसे सहलाने लगी। मैंने उसकी साड़ी खींची और उसे नंगा कर दिया। उसकी चूत पहले से गीली थी, और मैंने अपनी जीभ से उसे चाटा। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “भैया, तुम मुझे पागल कर दोगे,” उसने सिसकते हुए कहा। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत में अपना लौड़ा डाला।
इस बार मैंने उसे अलग-अलग मुद्राओं में चोदा। पहले पुरुष ऊपर वाली मुद्रा, फिर काव्या को मेरे ऊपर बिठाया। वह मेरे लंड पर उछल रही थी, और उसके स्तन मेरे सामने हिल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ा और चूसा, जिससे वह और उत्तेजित हो गई। उसकी चूत का रस मेरे लंड पर बह रहा था, और मैंने उसे और जोर से चोदा। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से बहन की चूत में धक्के मारे। उसकी गांड मेरे हर धक्के के साथ हिल रही थी, और उसकी चीखें मुझे और उकसा रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़े और उसे तब तक चोदा, जब तक मैंने फिर से उसके अंदर वीर्य छोड़ दिया।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। काव्या ने मेरे सीने पर सिर रखा और कहा, “भैया, ये गलत है, पर मुझे ये सब बहुत अच्छा लगता है।” मैंने उसे चुप कराया और कहा, “काव्या, ये हमारा रहस्य है।” लेकिन मेरे मन में डर था। क्या होगा अगर किसी को पता चल गया? हमारा समाज, हमारा परिवार—सब कुछ दाँव पर था। फिर भी, उस रात की गर्मी और काव्या की देह का नशा मुझे बार-बार उसकी ओर खींच रहा था। हमने उस रात फिर से चुदाई की, और हर बार पहले से ज़्यादा तीव्र थी।
लेकिन कुछ हफ्तों बाद, काव्या ने मुझे एकांत में बुलाया। उसकी आँखों में डर था। “भैया, मेरा मासिक धर्म नहीं आया,” उसने धीरे से कहा। मेरा दिल धक-धक करने लगा। हमने एक गर्भ परीक्षण किट लिया, और परिणाम ने हमें हिला दिया—काव्या गर्भवती थी। मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। यह हमारी निषिद्ध वासना का परिणाम था। काव्या रोने लगी, और मैंने उसे गले लगाया। “हम इसका हल निकाल लेंगे,” मैंने कहा, पर मेरे मन में कोई रास्ता नहीं था। हमारा रहस्य अब एक भारी बोझ बन चुका था।
मेरी बहन काव्या का प्रेग्नेंट होना हमारे लिए किसी चक्रवाती तूफान (Tropical Cyclone) की तरह था। हम दोनों डर और पश्चाताप से भरे थे। मैंने उसे चुपके से एक डॉक्टर के पास ले जाने का फैसला किया ताकि अपनी प्रेग्नेंट बहन का गर्भपात करवा सकूँ। लेकिन मथुरा जैसे छोटे शहर में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे को जानता है, यह आसान नहीं था। काव्या ने कहा, “भैया, अगर किसी को पता चल गया की मैं आपके साथ बिना कॉन्डोम के सेक्स करने की वजह से प्रेग्नेंट हुई हूँ, तो हमारा परिवार बर्बाद हो जाएगा और तो और समाज में बहुत बदनामी भी होगी।” मैंने उसे दिलासा दिया, पर मेरे मन में भी डर था।
हम भाई बहन ने तय किया कि वह कुछ समय के लिए अपनी सहेली के घर चली जाएगी, ताकि कोई शक न करे। मैंने उसे पैसे दिए और कहा, “तुम चिंता मत करो, मैं सब संभाल लूँगा।” लेकिन रात को नींद नहीं आती थी। बहन काव्या की टाइट चूत का स्वाद, उस कुंवारी लड़की की मदक सिसकारियाँ, और उस रात की गर्मी मेरे दिमाग में बार-बार आ रही थी। मैं खुद को कोसता था, पर उसकी देह की चाहत मुझे रोक नहीं पा रही थी। एक रात, जब वह सहेली के घर से लौटी, हम फिर से एकांत में मिले अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए। मैंने उसे बाहों में लिया और उसकी चूत को चाटा। उसने मेरे लौड़े को मुँह में लिया, और हम फिर से वासना के सागर में डूब गए। उसकी गीली चूत में मेरा लंड फिसल रहा था, और हम दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया।
इस बार हम भाई बहन ने सेक्स करने के दौरान बहुत सावधानी बरती, बहन फिर से प्रेग्नेंट ना हो जाये इस लिए चुदाई करने के बाद मैंने वीर्य चूत के बाहर छोड़ा। लेकिन काव्या का गर्भवती होना एक हकीकत थी, जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते थे। उसने कहा, “भैया, मैं डर रही हूँ। अगर माँ-पिताजी को पता चला, तो वे हमें मार डालेंगे।” मैंने उसे गले लगाया और कहा, “हम कोई रास्ता निकाल लेंगे।” लेकिन मेरे मन में कोई जवाब नहीं था। हमारा प्यार, हमारी वासना, और हमारा रहस्य अब एक जाल बन चुका था। हम दोनों इसके कैदी थे।
काव्या ने फैसला किया कि वह गर्भपात करवाएगी। मैंने एक दूर के शहर में एक डॉक्टर से संपर्क किया, जो गोपनीयता का वादा करता था। हमने चुपके से वहाँ जाने का प्लान बनाया। लेकिन उस रात, जब हम ट्रेन में बैठे, काव्या ने मेरे हाथ को पकड़ा और कहा, “भैया, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, पर ये सब गलत है।” उसकी आँखों में आँसू थे, और मेरा दिल टूट रहा था। मैंने उसे गले लगाया और कहा, “काव्या, मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोडूँगा।” लेकिन मेरे शब्द खोखले थे।
प्रेग्नेंट बहन का गर्भपात करवाने के बाद पश्चाताप और प्रायश्चित
गर्भपात करवाने के बाद, मेरी बहन काव्या कुछ दिनों तक चुप रही। मैंने उसे हँसाने की कोशिश की, पर उसकी आँखों में उदासी थी। मैं खुद को कोस रहा था। हमारी वासना ने हमें कहाँ ला खड़ा किया था? मैंने काव्या से कहा, “हम अब ऐसा नहीं करेंगे।” उसने हामी भरी, पर उसकी नज़रें कुछ और कह रही थीं। एक रात, जब हम फिर से अकेले थे, उसने मुझे बाहों में लिया और कहा, “भैया, मैं तुम्हें चाहती हूँ, पर ये आखिरी बार होगा।” मैंने उसे चूमा, और हम फिर से एक-दूसरे में खो गए। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी, और उसकी सिसकारियाँ मेरे कानों में गूँज रही थीं।
हमने उस रात पुरुष ऊपर वाली मुद्रा, घोड़ी मुद्रा, और कामसूत्र की कई अन्य मुद्राओं में चुदाई की। उसकी गांड को मैंने फिर से थप्पड़ मारे, और वह सिहर उठी। मैंने उसके स्तनों को चूसा, और उसने मेरे लौड़े को मुँह में लिया। यह रात पहले से भी ज़्यादा तीव्र थी, क्योंकि हम दोनों जानते थे कि यह आखिरी बार था। मैंने बाहर वीर्य छोड़ा, और हम दोनों थककर लेट गए। काव्या ने कहा, “भैया, अब हमें रुकना होगा।” मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “हाँ, काव्या, अब बस।”
लेकिन यह इतना आसान नहीं था। काव्या की देह का नशा मेरे दिमाग में बसा था। मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, पर हर बार उसकी मुस्कान मुझे कमज़ोर कर देती थी। एक दिन, जब माँ-पिताजी घर पर नहीं थे, हम भाई बहन फिर से अपनी अन्तर्वासना शांत करने के इरादे से एक-दूसरे के करीब आ गए। मैंने उसकी साड़ी उतारी और उसकी टाइट चूत को अपनी जीभ से चाटा। उसने मेरे लंड को मुठियाया और उसे मुँह में भी लिया। हमने फिर से चुदाई की, और इस बार मैंने उसकी गांड में भी धक्के मारे। उसकी चीखें और सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
लेकिन इस बार हमने सावधानी बरती। मैंने बाहर वीर्य छोड़ा, और काव्या ने कहा, “भैया, ये आखिरी बार था।” हम दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया, और मैंने वादा किया कि अब हम इस रास्ते पर नहीं चलेंगे। लेकिन मेरे मन में एक सवाल था—क्या हम सचमुच रुक पाएँगे? काव्या की देह, उसकी सिसकारियाँ, और उस रात की गर्मी मेरे दिमाग में बार-बार आ रही थी। क्या यह प्यार था, या सिर्फ वासना?
गर्भपात करवाने के बाद अन्तर्वासना शांत करने के लिए अंतिम मुलाकात
कई महीने बीत गए। काव्या का विवाह तय हो गया। वह एक नामी और मालदार परिवार में ब्याहने वाली थी। मैं खुश था, पर मेरे मन में एक टीस थी। हम भाई बहन ने अपनी गुप्त चुदाई अब पूरी तरह से बंद कर दी थीं, पर उसकी यादें मेरे साथ थीं। एक रात, विवाह से पहले, वह मेरे कमरे में आई। उसने कहा, “भैया, ये हमारी आखिरी मुलाकात है।” मैंने उसे बाहों में लिया, और हम फिर से एक-दूसरे में खो गए। मैंने उसकी साड़ी उतारी और उसके स्तनों को चूसा। उसने मेरे लौड़े को मुँह में लिया, और उसकी जीभ मेरे लंड पर फिसल रही थी। मैंने उसकी चूत को चाटा, और वह सिसकने लगी।
हमने उस रात हर मुद्रा में चुदाई की। पुरुष ऊपर वाली चुदाई मुद्रा, घोड़ी सेक्स मुद्रा, और फिर मैंने उसकी गांड में भी धक्के मारे। उसकी चीखें और सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैंने बाहर वीर्य छोड़ा, और हम दोनों थककर लेट गए। काव्या ने कहा, “भैया, अब मैं तुम्हारी बहन नहीं, किसी और की पत्नी बनने वाली हूँ।” उसकी बातों ने मेरा दिल तोड़ दिया। मैंने उसे गले लगाया और कहा, “काव्या, तुम हमेशा मेरी हो।”
काव्या का विवाह हो गया, और वह अपने ससुराल चली गई। मैं अकेला रह गया, उसकी यादों के साथ। उसकी साड़ी की सिलवटें, उसकी सिसकारियाँ, और उसकी चूत का स्वाद मेरे दिमाग में बने रहे। मैंने खुद को समझाया कि यह सब गलत था, पर मेरे दिल में एक खालीपन था। काव्या ने मुझे एक पत्र लिखा, जिसमें उसने कहा, “भैया, मैं खुश हूँ, पर तुम्हें कभी नहीं भूलूँगी।” मैंने वह पत्र पढ़ा और रो पड़ा।
अब मैं अकेला हूँ, और मेरे मन में पश्चाताप है। हमारी वासना ने हमें एक ऐसी राह पर ले जाया, जहाँ से वापसी मुश्किल थी। लेकिन काव्या की यादें मेरे साथ हैं। मैंने फैसला किया कि अब मैं अपनी ज़िंदगी को एक नई दिशा दूँगा। मैंने एक नौकरी ज्वाइन की और अपने परिवार के लिए जीने का फैसला किया। लेकिन काव्या की देह का नशा मेरे दिमाग से नहीं जाता। क्या यह प्यार था, या सिर्फ वासना? यह सवाल मेरे साथ हमेशा रहेगा।
पहले बहन को चोदकर प्रेग्नेंट करा फिर गर्भपात करवाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
First I got my sister pregnant by fucking her then I got her abortion done Antarvasna Hindi Sex Story :- करवाचौथ की वह रात मेरी ज़िंदगी का एक ऐसा मोड़ थी, जिसने मुझे और मेरी बहन काव्या को हमेशा के लिए बदल दिया। हमारी वासना, जो उस रात एक चिंगारी की तरह भड़की, एक ऐसी आग बन गई, जिसने हमारे रिश्ते को जलाकर राख कर दिया। मेरे साथ बिना कॉन्डोम के अवैध सेक्स संबंध बनाने के दौरान मेरी बहन काव्या का गर्भवती होना और फिर गर्भपात ने हमें यह एहसास कराया कि हम भाई बहन की चाहतों की कीमत बहुत भारी थी। हमने समाज और परिवार की नज़रों में एक निषिद्ध रास्ता चुना, और इसके परिणाम ने हमें पश्चाताप की आग में झोंक दिया। काव्या का विवाह और उसका ससुराल चले जाना मेरे लिए एक राहत थी, पर मेरे दिल में एक खालीपन छोड़ गया। उसकी सिसकारियाँ, उसकी देह का स्पर्श, और उसकी आँखों की चमक मेरे दिमाग में बसी हैं।
मैंने सीखा कि वासना एक ऐसी आग है, जो पलभर में सब कुछ जला सकती है। मेरे और काव्या के बीच जो हुआ, वह शायद प्यार था, या शायद सिर्फ शारीरिक भूख। लेकिन इसने मुझे एक सबक दिया—कुछ रिश्ते पवित्र होते हैं, और उनकी सीमाएँ लाँघने की कीमत बहुत भारी होती है। मैंने अपनी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी, और अब मैं अपने परिवार के लिए जीता हूँ। लेकिन काव्या की यादें मेरे साथ हैं, और शायद हमेशा रहेंगी। यह कहानी न केवल मेरी और काव्या की है, बल्कि उन सभी की है, जो अपनी चाहतों के जाल में फँस जाते हैं। यह एक चेतावनी है कि वासना का रास्ता आसान हो सकता है, पर उसका अंत हमेशा दुखद होता है। दोस्तों आपको मेरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी “पहले बहन को चोदकर प्रेग्नेंट करा फिर गर्भपात करवाया” कैसी लगी मुझे ईमेल करके जरुर बताना…

