HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesकरवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई

करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई

करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मैं, रमेश, एक 26 वर्षीय युवक, अपनी 24 वर्षीय बहन राधिका के साथ एक छोटे से शहर में रहता हूँ। यह कहानी करवाचौथ की रात की है, जब राधिका, अपने पति के विश्वासघात से आहत, उदास मन से व्रत रखती है। उसका पति दो साल पहले किसी और रंडी किस्म की महिला के साथ भाग गया था, जिसके बाद मेरी शादीशुदा बहन वापस अपने मायके लौट आई। इस रात, जब परिवार जागरण में चला जाता है, हम दोनों अकेले रह जाते हैं। मेरी बहन की सुंदरता और उसकी कामुकता मुझे आकर्षित करती है, और हम दोनों निषिद्ध प्रेम की राह पर बढ़ जाते हैं। यह कहानी कामुकता, भावनात्मक उथल-पुथल, और सामाजिक सीमाओं को तोड़ने की है, जहाँ राधिका और मैं एक-दूसरे में सांत्वना पाते हैं। कहानी में गहन कामुक दृश्य, विस्तृत पूर्वक्रीड़ा, और नाटकीय परिणाम हैं, जो पाठक के मन में गहरी छाप छोड़ते हैं।


करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का प्रारंभ :- मैं रमेश, 26 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान, अपने माता-पिता और छोटी बहन राधिका के साथ एक छोटे शहर में रहता हूँ। करवाचौथ का दिन था, चारों ओर उत्सव का माहौल था। घर-घर में सुहागिनें सजी-संवरी, अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही थीं। लेकिन मेरी 24 वर्षीया बहन राधिका उदास थी। उसका पति, वह कमीना, दो साल पहले किसी रांड के साथ भाग गया था। राधिका, जो अपनी जवानी के पूरे शबाब पर थी, ससुरालवालों की तानों से तंग आकर मायके लौट आई थी। उसकी गोरी चमकती त्वचा, भरे-पूरे स्तन, पतली कमर, और कामुक चाल देखकर कोई भी पुरुष पागल हो सकता था। परन्तु, उसका मन उदास था, वह अपने पति की यादों में खोई रहती थी। मैं उसे देखकर सोचता, इस मादरचोद ने इतनी खूबसूरत औरत को क्यों छोड़ा?

राधिका ने करवाचौथ का व्रत रखा था, पर उसकी आँखों में आँसुओं की चमक साफ दिख रही थी। शाम को करीब 9 बजे, जब मोहल्ले की सभी औरतें अपने अपने पति का चेहरा देखकर करवाचौथ का व्रत खोल रही थीं, राधिका ने मुझसे कहा, “रमेश, चलो छत पर, चाँद निकल आया होगा। मेरी मदद कर दे, यह थाली और पूजा का सामान ले चल।” मैंने उसकी बात मान ली। छत पर चाँद की रोशनी में मेरी दुल्हन के जैसी सजी बहन राधिका और भी हसीन लग रही थी। उसकी लाल साड़ी में उसके उभरे हुए स्तन और गोल कूल्हे मानो मुझे पुकार रहे थे। मेरे मन में गलत ख्याल आने लगे, पर मैंने खुद को समझाया कि वह मेरी बहन है। फिर भी, उसकी कामुकता मेरे होश उड़ा रही थी।

मुफ्त में पढ़ें करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स स्टोरी

करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स स्टोरी Karva Chauth ki raat maine apni behen ko seduce kiya aur choda, jisse woh pregnant ho gayi Antarvasna Hindi Sex Story
Karva Chauth ki raat maine apni behen ko seduce kiya aur choda, jisse woh pregnant ho gayi Antarvasna Hindi Sex Story

राधिका ने पूजा शुरू की। उसने चाँद को अर्घ्य दिया और अपने पति की तस्वीर को देखने लगी। मैंने गुस्से में उस तस्वीर को छीन लिया और कहा, “इस मादरचोद की तस्वीर देखने की क्या जरूरत? अगर लंबी उम्र मांगनी है, तो मेरी मांग ले!” राधिका अवाक् रह गई। उसकी आँखों में आश्चर्य और कुछ अनकहा भाव था। फिर, उसने मेरी ओर देखकर पूजा पूरी की। मैंने उसे पानी पिलाया और रसगुल्ला खिलाया। उसका स्पर्श मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ा गया। हम दोनों की नजरें मिलीं, और कुछ अनकहा सा हमारे बीच पनपने लगा। उस रात, मुझे लगा कि हमारी जिंदगी बदलने वाली है।

हम दोनों नीचे आए। माँ-बाबूजी जागरण के लिए निकल गए, कहकर कि देर रात लौटेंगे। घर में सिर्फ मैं और राधिका थे। खाना खाने के बाद, मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। वह चौंकी और बोली, “रमेश, यह क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “उस गैर को याद करने से अच्छा है, मुझे याद कर ले। घर की बात घर में ही रहेगी।” मेरी बात सुनकर राधिका की आँखें नम हो गईं। उसने कहा, “कब से मैं इस पल का इंतजार कर रही थी।” वह मुझसे लिपट गई और मेरे होंठों को अपने होठों से चूमने लगी। शादीशुदा बहन का गर्म स्पर्श मेरे शरीर में आग लगा रहा था। मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया।

बेडरूम में कामुकता की पहली चिंगारी

बेडरूम में, मैंने राधिका को बिस्तर पर लिटाया। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया, और उसके गोरे, भरे-पूरे स्तन ब्लाउज में कैद दिखे। मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला। उसने पीछे हाथ बढ़ाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। ओह, क्या नजारा था! उसकी गोरी-गोरी चूचियाँ, गुलाबी निप्पल्स के साथ, मानो मुझे बुला रही थीं। मैंने बिना देर किए उसके स्तनों पर हाथ रखा और उन्हें मसलने लगा। राधिका की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं। उसने मेरी शर्ट उतारी और मेरे सीने को चूमने लगी। मैंने उसके होंठ अपने होंठों में ले लिए और गहरे चुम्बन में डूब गया। उसका हर स्पर्श मेरे लंड को और सख्त कर रहा था। मैंने उसकी साड़ी पूरी तरह उतार दी, और वह सिर्फ पेटीकोट में थी।

राधिका ने मेरी पैंट की ओर देखा और शरारत से बोली, “दिखा तो, भाई, तेरा लौड़ा कितना बड़ा है!” मैंने अपनी पैंट उतारी, और मेरा खड़ा लंड देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। उसने मेरे लंड को अपने नाजुक हाथों में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। फिर, उसने अपने गर्म होंठों से मेरे लंड को चूमा और उसे मुँह में ले लिया। ओह, उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर नाच रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और धीरे-धीरे अपने लंड को उसके गले तक धकेला। वह आह आह की आवाजें निकाल रही थी, और उसकी चूचियाँ उत्तेजना में और सख्त हो गई थीं। यह कामुक पूर्वक्रीड़ा मेरे होश उड़ा रही थी।

मैंने राधिका को बिस्तर पर लिटाया और उसके पेटीकोट को खोल दिया। उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, मानो कामरस से लबालब भरी हो। मैंने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत पर फिराईं, और वह सिसकार उठी। “रमेश, अब और मत तड़पा, डाल दे अपना लौड़ा मेरी बेकरार चूत में!” उसकी बात सुनकर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा। मेरा पूरा लंड उसकी गर्म, गीली चूत में समा गया। वह चिल्लाई, “आह, मादरचोद, कितना मोटा है तेरा लंड!” मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और कमरे में छप-छप की आवाजें गूँजने लगीं। उसकी चूचियाँ मेरे हर धक्के के साथ हिल रही थीं।

मैंने राधिका की चूचियों को मसलते हुए उसे और जोर से चोदा। वह अपनी गांड उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। बीच-बीच में वह कहती, “रमेश, मेरी चूचियों को चूस, इन्हें कोई प्यासा छोड़ देगा क्या?” मैंने उसके गुलाबी निप्पल्स को मुँह में लिया और चूसने लगा। उसकी सिसकारियाँ और तेज हो गईं। उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। करीब 20 मिनट तक मैंने उसे पुरुष ऊपर वाली मुद्रा में चोदा। फिर, मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा। वह बिस्तर पर घुटनों के बल झुक गई, और उसकी गोल, रसीली गांड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा और वह कामुकता से चिल्लाई।

भाई व बहन के निषिद्ध प्रेम की गहराई

मैंने राधिका की गांड के छेद पर नारियल का तेल लगाया और अपने लंड पर भी मला। फिर, धीरे से मैंने अपना लंड उसकी गांड में धकेला। वह दर्द से चिल्लाई, “रमेश, धीरे, मेरी गांड फट जाएगी!” लेकिन जैसे ही मेरा लंड उसकी गांड में पूरा घुसा, वह आनंद से सिसकारने लगी। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए, और उसकी गांड की गर्मी मुझे पागल कर रही थी। उसकी चूचियाँ नीचे लटक रही थीं, और मैं उन्हें मसलते हुए उसकी गांड में लंड पेल रहा था। वह बोली, “मादरचोद, तू तो मेरी गांड का दीवाना बना देगा!” मैंने और जोर से धक्के मारे, और कमरे में उसकी सिसकारियों और मेरे थप्पड़ों की आवाज गूँज रही थी।

इसके बाद, मैंने राधिका को अपनी गोद में बिठाया और उसे ऊपर-नीचे करने लगा। मेरा लंड उसकी चूत में गहराई तक जा रहा था, और वह मेरे कंधों को पकड़कर जोर-जोर से उछल रही थी। उसकी चूचियाँ मेरे मुँह के सामने हिल रही थीं, और मैंने उन्हें चूसते हुए उसे और उत्तेजित किया। वह चिल्लाई, “रमेश, मेरी चूत को फाड़ दे, आज मुझे पूरा मजा दे!” मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी, और उसकी चूत से कामरस बहने लगा। करीब 30 मिनट की इस चुदाई के बाद, मैं झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी चूचियों पर अपना वीर्य छोड़ दिया। वह हाँफते हुए मुस्कुराई।

मेरी बहन राधिका और मैं एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर लेट गए। उसने मेरे सीने पर सिर रखा और कहा, “रमेश, तूने मुझे आज वह सुख दिया, जो मैंने कभी मेरी पति के साथ महसूस नहीं किया।” मैंने उसके माथे को चूमा और कहा, “अब तू कभी उदास नहीं होगी, मैं हूँ ना।” लेकिन मेरे मन में डर था। अगर माँ-बाबूजी को पता चला, तो क्या होगा? हमारा यह निषिद्ध प्रेम समाज की नजरों में अपराध था। फिर भी, उस रात हम दोनों एक-दूसरे में खो गए। राधिका की कामुक साँसें और उसका गर्म स्पर्श मुझे बार-बार उत्तेजित कर रहा था। हमने रात भर कई बार चुदाई की, हर बार और अधिक तीव्रता के साथ।

सुबह होने से पहले, हम दोनों ने कपड़े पहने और सब कुछ सामान्य करने की कोशिश की। लेकिन मेरे मन में तूफान उठ रहा था। राधिका ने मुझसे कहा, “रमेश, यह हमारा राज रहेगा। लेकिन मैं चाहती हूँ कि तू हमेशा मेरे साथ रहे।” मैंने उसका हाथ पकड़ा और वादा किया कि मैं उसे कभी अकेला नहीं छोडूंगा। लेकिन मेरे दिल में डर था कि यह निषिद्ध रिश्ता हमें कहाँ ले जाएगा। क्या हम समाज की नजरों से बच पाएँगे? या फिर यह आग हमें जला देगी? उस रात के बाद, हम दोनों के बीच का रिश्ता बदल गया था। अब हम सिर्फ भाई-बहन नहीं, बल्कि प्रेमी भी थे।

नए रिश्ते की शुरुआत के दौरान टाँगे फैलाकर बहन की गुलाबी चूत चाटी

अगले दिन, राधिका की आँखों में एक नई चमक थी। वह पहले की तरह उदास नहीं थी। उसने मुझसे कहा, “रमेश, तूने मुझे फिर से जीना सिखा दिया।” मैंने उसे गले लगाया और कहा, “तू मेरी जिंदगी है, राधिका।” लेकिन मेरे मन में डर था कि माँ-बाबूजी को शक न हो जाए। हम दोनों ने तय किया कि हम अपने इस रिश्ते को छुपाकर रखेंगे। दिन में हम सामान्य भाई-बहन की तरह रहते, लेकिन रात होते ही हमारी कामुक दुनिया शुरू हो जाती। राधिका अब हर रात मेरे कमरे में आती, और हम एक-दूसरे के शरीर को नए-नए तरीकों से तलाशते। उसकी चूत की गर्मी और उसकी सिसकारियाँ मुझे पागल कर देती थीं।

एक रात, मैंने राधिका को मेज पर बिठाया और उसकी टाँगें फैलाकर उसकी गुलाबी चूत को चाटने लगा। उसकी चूत का स्वाद मुझे दीवाना बना रहा था। वह मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थी और चिल्ला रही थी, “रमेश, और जोर से चूस मेरी गुलाबी चूत को!” मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत के दाने को सहलाया, और वह उत्तेजना से काँपने लगी। फिर, मैंने उसे मेज पर ही लिटाया और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। मैंने उसे इतनी तेजी से चोदा कि मेज हिलने लगी। उसकी चूचियाँ मेरे धक्कों के साथ उछल रही थीं, और वह बार-बार मेरे नाम की रट लगाए जा रही थी।

इसके अलावा, हमने कई नई मुद्राएँ आजमाईं। एक बार मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा करके उसकी चूत में लंड डाला। वह मेरे कंधों पर टाँगें रखकर चिल्ला रही थी, “मादरचोद, और जोर से पेल!” उसकी गंदी बातें मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए उसे चोदा, और वह आनंद से पागल हो रही थी। हमारी चुदाई की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। करीब 40 मिनट बाद, हम दोनों एक साथ झड़ गए। राधिका की चूत से कामरस बह रहा था, और मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपट गए।

लेकिन, हमारे इस रिश्ते का डर मुझे सताने लगा था। एक दिन, माँ ने मुझसे पूछा, “रमेश, तू और राधिका इतना समय साथ क्यों बिताते हो?” मैं घबरा गया, लेकिन मैंने बहाना बनाया कि हम बस पुरानी बातें कर रहे थे। राधिका ने भी माँ को समझाया, लेकिन मुझे लग रहा था कि माँ को शक हो रहा था। मैंने राधिका से कहा, “हमें और सावधान रहना होगा।” उसने मेरी बात मान ली, लेकिन उसकी आँखों में वही कामुक चमक थी। वह बोली, “रमेश, मैं तुझे छोड़ नहीं सकती। तेरा लंड मेरी चूत का प्यासा है।” उसकी बात सुनकर मैं फिर से उत्तेजित हो गया, और हमने उस रात फिर से चुदाई की।

भाई-बहन के अवैध सेक्स संबंधों पर सामाजिक बंधनों का दबाव

कुछ हफ्तों बाद, मोहल्ले में अफवाहें फैलने लगीं। लोग कहने लगे कि रमेश और राधिका कुछ ज्यादा ही करीब हैं। माँ-बाबूजी को भी यह बातें सुनाई दीं। एक रात, बाबूजी ने मुझे बुलाया और गुस्से में कहा, “रमेश, यह क्या सुन रहा हूँ? तू अपनी बहन के साथ गलत हरकत कर रहा है?” मैंने इनकार किया, लेकिन मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। राधिका ने भी माँ से कहा कि यह सब झूठ है, लेकिन माँ की आँखों में शक साफ दिख रहा था। उस रात, हम दोनों अलग-अलग कमरों में सोए, लेकिन मेरे मन में तूफान उठ रहा था। क्या हमारा यह प्यार हमें बर्बाद कर देगा?

अगले दिन, राधिका मेरे कमरे में आई और बोली, “रमेश, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया हम भाई बहन के इस अवैध सेक्स संबंधों के बारे में क्या कहती है। मैं तुझसे प्यार करती हूँ और पूरा जीवन तेरी अर्धांग्नी बनकर रहना चाहती हूँ।” मेरी बहन की बात सुनकर मैंने उसे गले लगाया और कहा, “राधिका, हमारा प्यार निषिद्ध है, लेकिन मैं भी तुझे छोड़ नहीं सकता।” हमने उस रात फिर से एक-दूसरे को अपने शरीर का सुख दिया। मैंने उसकी चूत को इतनी देर तक चाटा कि वह बार-बार झड़ गई। फिर, मैंने उसे घोड़ी बनाकर उसकी गांड में लंड डाला और जोर-जोर से धक्के मारे। उसकी कामुकता से भरी सिसकारियाँ और गंदी बातें मुझे और उत्तेजित कर रही थीं। हम दोनों ने उस रात कई बार चुदाई की।

लेकिन, अगले दिन माँ ने हमें एक साथ देख लिया। वह चिल्लाई, “यह क्या बेहूदगी है? तुम दोनों भाई-बहन हो!” राधिका रोने लगी, और मैंने माँ को समझाने की कोशिश की। लेकिन माँ ने हमें घर से निकालने की धमकी दी। बाबूजी ने भी कहा कि अगर हमने यह पाप बंद नहीं किया, तो वे हमें समाज से बहिष्कृत कर देंगे। राधिका और मैंने तय किया कि हम घर छोड़कर कहीं और चले जाएँगे। हमने अपने कुछ कपड़े और पैसे लिए और रात को चुपके से घर से निकल गए। हम एक नए शहर में बस गए, जहाँ कोई हमें नहीं जानता था।

नए शहर में, हमने एक छोटा सा मकान किराए पर लिया। राधिका और मैं अब पति-पत्नी की तरह रहने लगे। हर रात, हम एक-दूसरे के शरीर को तलाशते। मैं उसकी चूत को चाटता, उसकी चूचियों को मसलता, और उसे अलग-अलग मुद्राओं में चोदता। वह मेरे लंड को अपने मुँह में लेती और उसे चूस-चूसकर मुझे पागल कर देती। हमारी चुदाई की आवाजें हमारे छोटे से घर में गूँजती थीं। लेकिन मेरे मन में हमेशा यह डर रहता था कि कोई हमें पहचान न ले। राधिका कहती, “रमेश, अब तू मेरी दुनिया है। मुझे किसी और की परवाह नहीं।” उसकी बातें मुझे हिम्मत देती थीं।

भाई-बहन के पति-पत्नी बनने पर उनके इस नए जीवन में चुनौतियाँ

नए शहर में, मैंने एक छोटी सी नौकरी शुरू की, और राधिका घर संभालती थी। दिन में हम सामान्य जोड़े की तरह रहते, लेकिन रात होते ही हमारी कामुक दुनिया शुरू हो जाती। एक रात, मैंने राधिका को बाथरूम में ले जाकर उसकी चूत को साबुन से धोया और फिर उसे चाटने लगा। वह शावर के नीचे खड़ी थी, और पानी उसकी चूचियों पर बह रहा था। मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा किया और उसकी टाइट चूत में अपना गधे जैसा लंड डाला। वह चिल्ला रही थी, “रमेश, मेरी चूत को फाड़ दे, मादरचोद!” मैंने उसे इतनी जोर से चोदा कि हम दोनों शावर में ही झड़ गए। उसकी गीली चूत और उसकी सिसकारियाँ मुझे हर बार नया जोश देती थीं।

लेकिन, एक दिन हमारे पुराने मोहल्ले का एक आदमी हमें बाजार में देख लिया। उसने हमें पहचान लिया और गाँव में खबर फैला दी। जल्द ही, हमारे माता-पिता को पता चल गया कि हम एक साथ रह रहे हैं। बाबूजी ने हमें फोन किया और कहा, “रमेश, तुमने हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दी। अब कभी हमारे सामने मत आना।” राधिका रोने लगी, लेकिन मैंने उसे समझाया कि हमारा प्यार किसी की इज्जत से बड़ा है। फिर भी, समाज का दबाव हमें तोड़ रहा था। हमने तय किया कि हम और दूर चले जाएँगे, जहाँ कोई हमें न जानता हो।

हम एक और शहर में बस गए। वहाँ हमने अपनी पहचान छुपाई और एक नया जीवन शुरू किया। राधिका अब पहले से ज्यादा खुश थी। वह हर रात मेरे साथ नए-नए तरीकों से चुदाई करती। एक बार, उसने मेरे लंड पर शहद डाला और उसे चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड पर नाच रही थी, और मैं आनंद से पागल हो रहा था। फिर, मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत में अपना लंड डाला। मैंने उसे इतनी जोर से चोदा कि वह बार-बार झड़ गई। हमारी चुदाई की आवाजें और उसकी गंदी बातें हमारे प्यार को और गहरा कर रही थीं।

लेकिन, हमारे इस नए जीवन में भी चुनौतियाँ थीं। समाज की नजरें हमें हर जगह ढूंढ रही थीं। एक दिन, कुछ लोग हमारे घर आए और हमें धमकाने लगे। उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता पाप है और हमें इसके लिए सजा मिलेगी। मेरी बहन राधिका उनकी धमकियों से बुरी तरह डर गई, लेकिन मैंने उसे हिम्मत दी। मैंने कहा, “राधिका, हमारा प्यार हमारी ताकत है। कोई हमें अलग नहीं कर सकता।” हमने फिर से अपना ठिकाना बदला और एक छोटे से गाँव में बस गए। वहाँ हमने एक साधारण जीवन शुरू किया, लेकिन हमारी कामुक रातें वही रहीं। हम दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे थे।

भाई-बहन के अवैध सेक्स संबंध और समाज का टकराव

हमारे नए गाँव में, हमने खुद को एक सामान्य जोड़े की तरह पेश किया। मैं खेतों में काम करता, और राधिका घर संभालती। लेकिन रात होते ही हमारी दुनिया बदल जाती। एक रात, मैंने राधिका को तेल से मालिश की। मैंने उसके पूरे शरीर पर तेल लगाया, उसकी चूचियों को मसला, और उसकी चूत को सहलाया। वह कामुकता से सिसकार रही थी। फिर, मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी गांड में अपना लंड डाला। वह चिल्लाई, “रमेश, मेरी गांड को और जोर से चोद!” मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए उसे चोदा, और वह आनंद से पागल हो रही थी। हमारी चुदाई की आवाजें पूरे घर में गूँज रही थीं।

लेकिन, एक दिन गाँव के कुछ लोग हमारे घर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें हम भाई-बहन के अवैध सेक्स संबंधो के बारे में पता चल गया है। उन्होंने हमें गाँव छोड़ने और ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी। मेरी बहन राधिका रोने लगी, और मैंने उसे गले लगाया। मैंने कहा, “राधिका, हम कहीं भी चले जाएँ, हमारा प्यार सच्चा है और हमेशा अमर ही रहेगा।” हमने फिर से अपना ठिकाना बदला और एक बड़े शहर में बस गए। वहाँ हमने एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। राधिका अब पहले से ज्यादा आत्मविश्वास से भरी थी। वह कहती, “रमेश, तू मेरे लिए सब कुछ है।”

हमारी रातें अब भी कामुक थीं, मैं हर रात मेरी बहन के साथ सुहागरात मनाया करता था। एक रात, मैंने BDSM सेक्स करने के लिए मेरी बहन राधिका को बिस्तर पर बाँध दिया और उसकी चूत को बर्फ से सहलाया। वह उत्तेजना से चिल्ला रही थी। फिर, मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसे जोर-जोर से चोदा। वह मेरे नाम की रट लगाए जा रही थी, और उसकी चूचियाँ मेरे धक्कों के साथ हिल रही थीं। हम भाई बहन दोनों ने मिलकर उस करवाचौथ वाली रात कई बार चुदाई की। लेकिन मेरे मन में हमेशा यह डर रहता था कि समाज हमें कभी स्वीकार नहीं करेगा। फिर भी, मेरी प्यारी बहन राधिका का प्यार मुझे हर डर से लड़ने की हिम्मत देता था।

मैं मेरी बहन की गांड और चूत को अधिकतर बिना कॉन्डोम के ही चोदा करता था जिस वजह से कुछ महीनों बाद, मेरी बहन राधिका गर्भवती हो गई। मेरी बहन के गर्भवती होने की खबर सुनकर मैं खुश भी था और डर भी रहा था। हमारा बच्चा हमारे प्यार की निशानी था, लेकिन समाज इस नाजायज प्यार की निशानी को कभी स्वीकार नहीं करता। हम भाई बहन ने तय किया कि हम अपने बच्चे को प्यार और सम्मान के साथ पालेंगे। राधिका ने कहा, “रमेश, हमारा बच्चा हम भाई-बहन के प्यार की जीवित मिसाल होगा।” मैंने उसे गले लगाया और वादा किया कि मैं हमेशा उसके और हमारे बच्चे के साथ रहूँगा। लेकिन मेरे मन में सवाल था कि क्या हमारा यह प्यार समाज की नजरों से बच पाएगा?


करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

मेरी बहन राधिका के गर्भवती हो जाने के बाद उसका और मेरा रिश्ता समाज की नजरों में एक पाप था, लेकिन हमारे लिए यह हमारी जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच था। हमने अपने प्यार को हर मुश्किल में जिया, चाहे वह परिवार का विरोध हो या समाज की नजरें। करवाचौथ की उस रात से शुरू हुआ हमारा सफर हमें कई शहरों और गाँवों में ले गया। हर जगह हमने अपने प्यार को छुपाने की कोशिश की, लेकिन हमारी कामुकता और एक-दूसरे के प्रति समर्पण ने हमें हमेशा जोड़े रखा। बहन की गर्भावस्था ने हम भाई बहन के अवैध रिश्ते को एक नया आयाम दिया। हमने सीखा कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती, और समाज के नियमों से बड़ा है दिल का बंधन।

हमारा बच्चा, जिसे हमने प्यार से पाला, हमारे निषिद्ध प्रेम की जीवित निशानी बन गया। हमने उसे एक ऐसे माहौल में बड़ा किया, जहाँ प्यार ही सबसे बड़ा धर्म था। राधिका और मैंने अपने रिश्ते को हर चुनौती के सामने मजबूत किया। हमारी रातें अब भी कामुक थीं, लेकिन अब उनमें एक गहरी भावनात्मक गहराई थी। हमने सीखा कि प्यार में बलिदान और संघर्ष भी शामिल हैं, लेकिन यह सब उस सुख के सामने छोटा है जो हमने एक-दूसरे में पाया।

हमारा यह सफर हमें यह सिखा गया कि समाज की नजरें भले ही हमें गलत ठहराएँ, लेकिन प्यार का रास्ता वही चुनता है जो दिल से दिल तक जाता है। राधिका और मैंने अपने प्यार को हर कीमत पर बचाया, और यह हमारी सबसे बड़ी जीत थी। आज हम एक छोटे से शहर में एक साधारण जीवन जी रहे हैं, लेकिन हमारी रातें अब भी वही आग लिए हुए हैं, जो उस करवाचौथ की रात शुरू हुई थी। हमारा प्यार, हमारी कामुकता, और हमारा समर्पण हमें हमेशा एक रखेगा। दोस्तों आप सभी को हमारी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी “करवाचौथ की रात बहन को चोदा जिससे वो गर्भवती हो गई” कैसी लगी हमें ईमेल के माध्यम से जरुर बताना…

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