HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesपत्नी बोली मेरी गांड का छेद आज तुम्हारे लंड के लिए खुला है

पत्नी बोली मेरी गांड का छेद आज तुम्हारे लंड के लिए खुला है

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लोनावला की उस सुनसान और खूबसूरत वादी में हमारा प्राइवेट विला रात के अंधेरे में डूबा हुआ था। बाहर बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं, लेकिन विला के अंदर का माहौल बहुत ही गर्म और उत्तेजक हो चुका था। मेरी उम्र 34 साल है, और मेरी पत्नी अंजलि 32 साल की है। मेरी पत्नी अंजलि हमेशा से एक संस्कारी और शांत स्वभाव वाली औरत रही है, लेकिन शादी के 5 साल बाद आज उसने अपने अंदर की एक ऐसी कामुक औरत को बाहर निकाला था, जिसके बारे में मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। उसकी फिगर 36-28-36 है, और उसके 36D के बूब्स किसी भी मर्द का ईमान डगमगाने के लिए काफी हैं।

आज रात मेरी संस्कारी पत्नी ने मुझे अपनी सबसे गहरी और हवस भरी फैंटेसी के बारे में बताया था, और आज हम उन सभी हदों को पार करने वाले थे। बेडरूम की हल्की पीली रोशनी में अंजलि मेरे सामने खड़ी थी। उसने एक पारदर्शी काले रंग की नाइटी पहन रखी थी, जिसके आर-पार उसके भरे हुए स्तन और उनकी डार्क ब्राउन निप्पल साफ नजर आ रहे थे। मेरी धड़कनें तेज हो गई थीं। मैं धीरे से उसके पास गया और उसकी कमर को अपनी बाहों में भर लिया।

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मेरे होंठ उसके कानों के पास गए और मैंने फुसफुसाते हुए कहा, “आज तुम बहुत खूबसूरत और उत्तेजक लग रही हो मेरी जान।” अंजलि ने एक गहरी सांस ली और अपनी नशीली आंखों से मुझे देखते हुए बोली, “आज मुझे तुम्हारी पत्नी की तरह नहीं, बल्कि एक छिनाल की तरह चोदना। मुझे एक रंडी की तरह महसूस कराओ, मुझे आज कोई प्यार नहीं, सिर्फ एक जंगली चुदाई चाहिए।”

मेरी संस्कारी पत्नी की इन गंदी और कामुक बातों ने मेरे शरीर में जैसे आग लगा दी। मेरे पैंट के अंदर मेरा खड़ा लंड झटके मारने लगा था। मैंने उसे कसकर अपने सीने से लगाया और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा। हमारी जीभ एक दूसरे के मुंह में पागलों की तरह लड़ रही थी। मेरे हाथ उसके 36D के बोबे पर गए और मैं उन्हें नाइटी के ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने लगा। “आहह… धीरे से मेरे राजा,” वह मीठे-मीठे दर्द के मारे जोर से कराह उठी।

मैंने मेरी संस्कारी पत्नी की नाइटी की स्ट्रैप्स को कंधों से नीचे गिरा दिया। अब उसके दोनों बड़े और भारी चुचे पूरी तरह से मेरी आंखों के सामने नंगे थे। मैंने अपने हाथों से बोबों की मालिश करना शुरू कर दिया। उसकी निप्पल एकदम सख्त होकर तन चुकी थीं। मैं नीचे झुका और मैंने एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया। मैं पागलों की तरह निप्पल चूसना शुरू कर चुका था, जैसे मुझे उन चूचियों का दूध पीना हो। मेरी कामुक पत्नी ने मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और अपना सीना मेरी तरफ और उभार दिया।

मेरी जीभ और दांतों के खेल से अंजलि पागल हो रही थी। उसने अचानक मुझे पीछे धक्का दिया और मुझे बेड पर धकेल दिया। वह मेरे ऊपर आ गई और मेरे पैंट की जिप खोलकर उसने मेरा मोटा लौड़ा बाहर निकाल लिया। मेरा तना हुआ लंड देखकर उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई।

मेरी संस्कारी पत्नी ने अपने कोमल हाथों से उसे पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। यह एक बहुत ही उत्तेजक हैण्डजॉब था। “मुझे कभी कोई पतला लंड पसंद नहीं आया,” उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा, “मुझे तुम्हारा यह बड़ा लंड और लम्बा लंड ही हमेशा से अपनी चूत को फाड़ने के लिए चाहिए था।” इतना कहकर उसने अपना मुंह खोला और मेरे लंड के टोप को अपने मुंह में ले लिया।

उस संस्कारी महिला का मुखमैथुन इतना शानदार था कि मेरी नसें फटने को हो गईं। वह एक प्रो कॉलगर्ल की तरह मेरा ब्लोजॉब कर रही थी। उसकी जीभ मेरे लंड के गोटे और अंडकोष तक जा रही थी। वह मेरी अंड की थैली को सहलाते हुए मेरे लंड को गहराई तक अपने गले में उतार रही थी।

लगभग 10 मिनट तक मुझे इस चरम सुख में रखने के बाद, अंजलि उठी और उसने अपनी पैंटी उतार कर बेड के नीचे फेंक दी। अब वह पूरी तरह से नंगी थी। उसने अपनी टांगें चौड़ी कर दीं। मैंने देखा कि उसकी रसदार चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। वहां थोड़े-थोड़े झांट के बाल थे, जो उसकी बालों वाली चूत को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। उसके भोसड़ा से चूत का रस बहकर उसकी जांघों तक आ रहा था। मैं बेड से नीचे उतरा और उसकी दोनों टांगों के बीच अपना चेहरा ले गया।

मैंने अपनी जीभ निकाली और मेरी संस्कारी पत्नी की फुद्दी की दरार पर फेर दी। “उफ्फ्फ… मां… खा जाओ मेरी बुर को,” अंजलि जोर से चिल्लाई। मैं बहुत ही बेताबी से उसकी चूत चाटना शुरू कर चुका था। मेरी जीभ उसके दाने से खेल रही थी और चूत का सारा रस पी रही थी। अंजलि के चूतड़ बेड पर हवा में उठने लगे थे। तभी मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी टाइट चूत के अंदर डाल दीं और जोर-जोर से अंदर बाहर करने लगा। उसी समय मैंने अपने दूसरे हाथ से उसकी गांड में उंगली डाल दी। दोनों तरफ से हो रहे इस घर्षण ने अंजलि को पागल कर दिया। उसका छिनालपन अब पूरी तरह से बाहर आ चुका था।

“बस करो मेरे रंडीबाज पति… अब और इंतजार नहीं होता… फाड़ दो मेरी भोसड़ी को,” अंजलि हांफते हुए गिड़गिड़ाई। मैं उठा और मैंने उसके दोनों पैरों को उसके कंधों तक मोड़ दिया। मैंने अपने लंड के टोप को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक ही झटके में अपना पूरा 8 इंच का लंड उसकी गहराई में उतार दिया। अंजलि के मुंह से एक जोर की चीख निकल गई, “आआहहहह… ओफ्फ्फ… मेरी मां… फाड़ दी तुमने मेरी चूत!”

मैंने मेरी संस्कारी पत्नी की चीख की परवाह किए बिना अपने धक्के तेज कर दिए। मैं बहुत ही बेरहमी से उसे चोदना शुरू कर चुका था। “चोद साले… अपनी इस वेश्या को जोर से चोद,” वह गंदी गालियां बकते हुए मुझे उकसा रही थी। हर धक्के के साथ मेरे अंडकोष उसके कुल्हे से टकरा रहे थे और पूरे कमरे में ‘थप-थप-थप’ की आवाजें गूंज रही थीं।

मैंने लगभग 20 मिनट तक उसे मिशनरी पोजीशन में बेतहाशा चोदा। उसके 36D के बूब्स मेरे सीने से टकराकर कुचल रहे थे। इसके बाद मैंने उसे पलटा और डॉगी स्टाइल में झुका दिया। उसकी बड़ी और गोल गांड मेरे सामने हवा में उठी हुई थी। मैंने उसके दोनों चूतड़ को अपने हाथों से जोर से पकड़ा और उन्हें फैला दिया। मुझे उसकी लाल और गीली चूत के साथ-साथ उसका गांड का छेद भी साफ नजर आ रहा था।

मेरी संस्कारी पत्नी अंजलि ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और बोली, “आज मैं तुम्हारी कोई चरित्रहीन रांड बनना चाहती हूं… मेरी गांड का छेद आज तुम्हारे लंड के लिए खुला है… मुझे गुदा सेक्स चाहिए।” मेरी धड़कनें तेज हो गईं। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और उसे उसके गांड के छेद पर सेट किया। मैंने धीरे से धक्का दिया और मेरा लंड उसकी गांड की तंग दीवारों को चीरते हुए अंदर घुस गया।

चुदते चुदते मेरी नंगी धर्मपत्नी अंजलि दर्द और मजे के मिले-जुले अहसास से चीख पड़ी। “उईईई मां… बहुत टाइट है… धीरे… आआहहह…” लेकिन कुछ ही पलों में दर्द की जगह चरम आनंद ने ले ली। मैं उसके कुल्हे को कसकर पकड़ कर पूरी ताकत से उसकी गांड मार रहा था। मैं एक हाथ से उसके आगे लटकते हुए भारी स्तनों को मरोड़ रहा था और पीछे से पागलों की तरह धक्के लगा रहा था। पसीने की गंध, कामुक आहें और हमारे शरीर के टकराने की आवाजें उस कमरे के माहौल को हवस के सातवें आसमान पर ले जा चुकी थीं।

लगातार 15 मिनट की इस खतरनाक चुदाई के बाद, मुझे महसूस हुआ कि मेरा वीर्य अब छूटने वाला है। मैंने अपने धक्के अपनी चरम सीमा तक तेज कर दिए। “मैं झड़ने वाली हूं… आहहह… मुझे चोदो… मुझे और जोर से चोदो,” मेरी संस्कारी पत्नी अंजलि चुदवाते हुए बहुत ही ज्यादा जोर-जोर से चिल्ला रही थी। उस छिनाल की चूत और गांड दोनों में एक साथ मरोड़ उठने लगी। तभी मुझे भी वह परम सुख मिला। मैंने अपना सारा सफेद चिपचिपा माल और लाखों शुक्राणु उसकी गांड की गहराई में छोड़ दिए। मेरा लंड लगातार झटके खा रहा था और मैं उसकी पीठ पर गिर पड़ा।

हम पति-पत्नी दोनों पसीने से लथपथ थे। हमारी सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। अंजलि ने पलटकर मुझे गले से लगा लिया और मेरे होठों को चूम लिया। आज की इस रात ने हमारी शादीशुदा जिंदगी के सारे पर्दे गिरा दिए थे। हमने एक दूसरे के शरीर और आत्मा को उस जंगली रूप में स्वीकारा था, जिसने हमें हमेशा के लिए एक हवस और प्यार के गहरे बंधन में बांध दिया था। दोस्तों यदि आप सभी को हम पति-पत्नी की यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी पसंद आयी हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करना…

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