कॉलेज में मुँहबोली बहन को चोदा मेन गेट पर ताला लगा कर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मेरा नाम रवि है, और मैं मथुरा (उत्तर प्रदेश) के एक छोटे से कॉलेज में अध्यापक हूँ। मेरी मुँहबोली बहन, सरिता, उसी कॉलेज में पढ़ाती हैं। उनकी बेटी अर्थात मेरी भांजी, काव्या, जो कॉलेज में पढ़ती थी, मेरे साथ फोन सेक्स करा करती थी। उसकी शादी ने मुझे तोड़ दिया, और बाद में सरिता के साथ मेरी नजदीकियाँ बढ़ीं। यह कहानी मेरे और काव्या, फिर सरिता के साथ हुए अंतरंग पलों की है, जो मथुरा के एक किराए के मकान और कॉलेज के सुनसान कमरों में घटी। यह सेक्स कथा उत्साह, शर्म, और लाचारी से भरी है, जो मैंने खुद अनुभव की।
मैं रवि, 35 साल का, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के एक कॉलेज में अध्यापक। सरिता, मेरी मुँहबोली बहन, 45 की, उसी कॉलेज में पढ़ाती हैं। उनकी बेटी काव्या, 22 की, गोरी, भरी-पूरी, बड़ी-बड़ी आँखों और 34 की चूचियों वाली लड़की थी। वो मुझे मन ही मन चाहती थी। रात को मोबाइल पर हमारी बातें शुरू होतीं, और जल्दी ही चुदाई की बातों तक पहुँच जातीं। उसकी आवाज़ में मादकता थी, जैसे मेरे लंड को सहला रही हो। हम मामा भांजी अब फोन सेक्स करके अपनी कामवासना शांत करने लगे थे…
एक दिन मैंने मेरी भांजी काव्या को मथुरा के बाजार में बुलाया। मेरी पुरानी मारुति में वो मेरे पास आगे वाली सीट पर अपनी गांड टेक कर बैठी। उसकी नीली सलवार में उसकी चूचियाँ तनी हुई थीं। मैंने गाड़ी चलाते हुए एक हाथ से उसकी चूची दबाई। वो सिहर उठी, पर कुछ बोली नहीं। मेरी उंगलियाँ उसकी चूत को कुर्ते के ऊपर से सहलाने लगीं। उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने गाड़ी एक सुनसान गली में रोकी। उसकी चड्डी में हाथ डाला, तो उसकी चूत गीली थी।
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मैंने मेरी कुंवारी भांजी की वर्जिन चूत में एक उंगली डाली। वो मेरी उंगली पर अपनी चूत रगड़ने लगी। “रवि मामा, और करो,” उसने फुसफुसाया। मैंने उसकी चूचियों को मसला, पर चुदाई की जगह नहीं थी। वो बोली, “यहाँ नहीं, कोई देख लेगा।” डर और उत्साह में मेरी धड़कनें तेज थीं।
इसके बाद मैं मेरी भांजी सरिता की चुदाई करने का सही मौका तलाशने के के लिए उनके घर अक्सर जाता। जब कोई नहीं होता, मैं मेरी वर्जिन भांजी काव्या की अर्जिन चूत सहलाता, उसकी चूचियाँ मसलता। पर कभी उस कुंवारी लड़की की सील पैक वर्जिन चूत की चुदाई करके उसकी सील तोड़ने का मौका नहीं मिला। डर था कि कोई आ न जाए। कुछ महीनों बाद सरिता ने बताया, “काव्या की शादी तय हो गई।” मेरा दिल टूट गया। शादी के दिन मैं गया, पर उदासी में वहाँ से भाग आया। काव्या का नंबर बदल गया। मैंने सरिता के घर जाना छोड़ दिया।
मेरी मुँहबोली बहन सरिता के साथ नई शुरुआत
डेढ़ साल बाद मेरे मोबाइल फोन पर मेरी मुँहबोली बहन सरिता का फोन आया। मैं उस वक्त दो बियर पी चुका था। “तुम घर क्यों नहीं आते भाई आज कल?” उसने पूछा। नशे में मैंने कह दिया, “मेरी प्यारी भांजी काव्या होती तो आता।” सरिता चुप रही। फिर बोली, “वो नहीं है, तो क्या मैं नहीं हूँ?” उसकी आवाज़ में कामुकता बिलकुल साफ़ साफ़ झलक रही थी।
मैंने साफ पूछा, “बहन तुम्हारी बेटी काव्या मेरी उंगली से अपनी सील पैक वर्जिन चूत रगड़वाती थी, मेरा लंड पकड़ती थी और मेरा मुठ मारा करती थी। आप ऐसा कर सकती हो क्या…?” मेरी मुँहबोली बहन सरिता हँसी। “मुझे सोचने दे,” उसने कहा। एक मिनट बाद बोली, “भाई मैं 45 की हूँ, शायद तुझे मेरी बेटी काव्या जितना मज़ा न दे सकूँ।” मैंने कहा, “आपकी चूचियाँ तो आपकी बेटी काव्या से भी गोल और टाइट हैं।”
आखिर कार मेरी मुँहबोली बहन मेरे साथ सेक्स करने के लिए मान गई। मैंने कहा, “मैं अभी आ रहा हूँ।” उसने मना किया, पर मैं 8 बजे उसके किराए के मकान पहुँच गया। सरिता ने लाल नेट की साड़ी पहनी थी। उसकी चूचियाँ ब्रा में टाइट थीं। मेरा लंड जींस में तन गया। उसका पति, रमेश, नशे में सोया था। मैंने उसके पैर छुए, पर उसने कुछ नहीं कहा। मकान मालिक छत पर टहल रहा था।
मेरी मुँहबोली बहन सरिता चाय लेकर एक अंधेरे कमरे में आई। मैंने कहा, “दीदी, आपको अपनी रंडी बनाकर चोदना चाहता हूँ आपकी चूत की चुदाई करने के साथ साथ आपकी गांड भी मरना चाहता हूँ।” वो बोली, “अभी तो तुम्हारे रमेश जीजा जी घर पर हैं, और मकान मालिक बाहर। यहाँ नहीं चुदवा सकती भाई।” फिर उसने कहा, “कॉलेज में लंच टाइम में चोद लेना मुझे रंडी बनाकर चोद लेना और शांत कर लेना अपनी अन्तर्वासना भाई। मेरी चूत थोड़ी ढीली जरुर है, पर लंड लेने के लिए बहुत कुलबुला रही है।”
मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया। उसका चमकीला ब्लाउज़ खोला। सफेद ब्रा में उसकी चूचियाँ शानदार थीं। मैंने ब्रा उतारी और चूचियाँ मसलीं। उसकी साटन की पैन्टी में हाथ डाला। उसकी चूत रसीली थी। मैंने उंगली डाली, और वो सिसकारी। फिर मेरी मुँहबोली बहन ने मेरी जींस खोली, मेरा लंड बाहर निकाला। मेरा 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा लंड देखकर वो बहुत खुश हो गई और बोली की भाई आज पहली बार इतना मस्त लंड देखा है मैंने, तेरे जीजा जी का लंड तो बहुत छोटा और पतला सा है उनसे चुदने में तो जरा भी आनंद नहीं आता…
मुझे ब्लोजॉब देने के लिए मेरी मुँहबोली बहन घुटनों पर बैठी और मेरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे खड़े लंड पर नाच रही थी। मैंने उसका सिर पकड़ा। कुछ देर बाद मेरा माल उसके मुँह में गिर गया। उसने सारा पी लिया। “कल कॉलेज में चुदाई करेंगे,” उसने कहा। मैं वहाँ से चला गया।
कॉलेज में मुँहबोली बहन की चुदाई का मौका मिला तो मेन गेट पर ताला लगा कर चोदा
अगले दिन कॉलेज में मेरी मुँहबोली बहन सरिता हरी साड़ी में थी। उसकी चूचियाँ ब्लाउज़ में उभरी हुई थीं। लंच टाइम का इंतज़ार था। दोपहर को बच्चे खाना खाने गए। मैंने मेन गेट में ताला लगाया और ऑफिस में बैठ गया।
मेरी मुँहबोली बहन सरिता डरते-डरते चुदवाने के लिए आई। “कोई आ गया और हम भाई-बहन को अवैध सेक्स संबंध बनाते देख लिया तो?” उसने पूछा। मैंने कहा, “गेट बंद है, डर मत और चुदाई का असली आनंद लेने के लिए तैयार हो जा।” वो चुदने के लिए निचे जमीन पर बैठ गई। मैंने उसकी चूचियाँ मसलीं जिससे वो चुदने के लिए और जायदा गर्म हो गई। मैंने उसका ब्लाउज़ खोला। काली ब्रा में मेरी बहन की चूचियाँ मेरी भांजी काव्या से भी सख्त थीं। मैंने बहन की ब्रा उतारी और फिर किसी छोटे बच्चे की तरह से उसकी चूचियाँ मुंह में लेकर चूसीं।
मेरा हाथ मेरी शादी शुदा बहन की साड़ी से होते हुए उसके पेटीकोट में गया। उसकी चूत को सहलाया। वो बोली, “भाई मैंने मेरी चूत को फिटकरी से धोया है, टाइट है।” मैंने मेरी मुँहबोली बहन की पैन्टी नीचे की और थूक लगाकर मेरा लंड उसकी चूत में पेल दिया। मेरी शादी शुदा बहन की चूत टाइट थी। मैंने जोर-जोर से पुरे जोश के साथ उसे चोदा। चुदते चुदते वो सिसकार रही थी।
“और जोर से चोद मेरी प्यारी चूत को, भाई आज मैं तेरी रंडी हूँ खुद भी सेक्स के मजे ले और मुझे भी लेने दे,” चुदते चुदते मेरी मुँहबोली बहन ने कहा। उसकी चूचियाँ मेरे मुँह में थीं। वो कमर उठा-उठा कर चुदवाती रही। आखिर में हम दोनों झड़ गए। चुदवाने के बाद वो अपने कपड़े पहनकर कॉलेज का में गेट खोलने चली गई।
इसके बाद जब भी हम भाई बहन को सेक्स करने का सही मौका मिलता, मेरी मुँहबोली बहन सरिता मुझे उसकी चूत चोदने के लिए और गांड मारने के लिए बुलाती। कभी ऑफिस में, कभी घर पर, हम चुदाई करते। उसकी चूत की गर्मी और उसकी चूचियों का मज़ा मुझे पागल करता।
कॉलेज में मुँहबोली बहन को चोदा मेन गेट पर ताला लगा कर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
काव्या की शादी ने मुझे तोड़ दिया था, पर मेरी मुँहबोली बहन सरिता ने मेरी चुदास को नया रास्ता दिया। उस शादी शुदा महिला की टाइट चूत और गोल चूचियाँ मेरे लिए नशा बन गईं। यह सेक्स कहानी मेरी शर्म, उत्साह, और लाचारी की थी। अब मैं और सरिता जब भी मौका मिलता है, एक-दूसरे की आग बुझाते हैं। काव्या की याद अब धुंधली है। आपको यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी कैसी लगी? क्या रवि और सरिता का रिश्ता आपको उत्साहित करता है? काव्या की वापसी होनी चाहिए थी? कृपया अपने विचार साझा करें।


