फ्री में पढ़ें बीमार गर्लफ्रेंड की चुदाई हॉस्पिटल के प्राइवेट रूम में अन्तर्वासना हिंदी बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड सेक्स कहानी – free mein padhein beemar girlfriend ki chudai hospital ke private room mein antarvasna hindi boyfriend girlfriend sex kahani …
आज भी जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ, तो मेरा लंड तुरंत तन कर खड़ा हो जाता है। बात शायद पिछले महीने की है, जब मेरी गर्लफ्रेंड अनन्या को अचानक तेज़ बुखार और उल्टियों के बाद दिल्ली के सिटी हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा। मैं दफ्तर से सीधा अस्पताल पहुंचा, दिल पर बेतरह धुकधुकी थी। बाहर से ही एंटीसेप्टिक दवाइयों की तीखी महक और दबी हुई कराहटों का माहौल दिल को कमजोर कर रहा था। रिसेप्शन पर पूछा तो पता चला कि अनन्या, मेरी 26 साल की प्यारी और छरहरी सी लड़की, तीसरी मंजिल के प्राइवेट रूम नंबर 302 में शिफ्ट है। सीढ़ियां चढ़ते हुए मेरे मन में एक बेचैनी थी, लेकिन जब मैंने दरवाज़ा खोला तो अन्दर का नज़ारा कुछ और ही कहानी लिखने वाला था।
मेरी बीमार गर्लफ्रेंड अनन्या हॉस्पिटल के सफेद बिस्तर पर पीठ के बल लेटी थी। उसने हल्के हरे रंग का पतला सा गाउन पहना हुआ था, जो पूरे शरीर पर ढीला-ढीला लटक रहा था। चेहरा पीला पड़ा था, लेकिन बड़ी-बड़ी काली आँखों में वही पुरानी शरारत झलक रही थी। 36D के भारी भरकम बोबे उस गाउन के पतले कपड़े के नीचे साफ उभर रहे थे। कमर पतली थी, मानो किसी ने ब्लेड से तराशा हो, और चूतड़ों का उभार हल्की चादर के नीचे गोल मटोल पहाड़ जैसा लग रहा था। मुझे देखते ही उसकी होंठो पर एक छिछोरी सी मुस्कान तैर गई।
फ्री में पढ़ें बीमार गर्लफ्रेंड की चुदाई हॉस्पिटल के प्राइवेट रूम में अन्तर्वासना हिंदी बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड सेक्स कहानी

“कितनी बार बोला था बाहर का खाना मत खा, पर तुझ छिनाल को तो हर रोज़ एक नए ठेले का स्वाद चखना है,” मैंने बिस्तर के पास रखी कुर्सी खींचते हुए हल्की डांट लगाई मेरी प्रेमिका को।
“अच्छा बाबा, अब मरती हुई औरत को और मत तड़पाओ। बल्कि पास आकर बैठो ना,” वह अपनी कामुक अदाओं से मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगी। उसकी आवाज़ में वही छिनालपन था जो हमेशा मेरे खून को गर्म कर देता था। मैंने झुककर उसके माथे पर एक प्यार भरा किस किया, और तभी मेरी नज़र नीचे उसकी खुलती गर्दन और गाउन के ढीले गले से झांकते हुए गहरे क्लीवेज पर पड़ी। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। मेरा लंड अपने आप फड़फड़ाने लगा।
करीब 15 मिनट तक हम सामान्य बातें करते रहे। नर्स आई, एंटीबायोटिक का ड्रिप चेक किया और रात के लिए ‘गुड नाइट’ कहकर चली गई। कमरे में अब सिर्फ हम दोनों थे। खिड़कियों पर लगे पर्दों के पीछे शहर की धुंधली रोशनी एक कोमल नीली चादर बनकर हमारे बिस्तर पर फैल रही थी। दवाइयों और फिनाइल की गंध के बीच मुझे अनन्या के शरीर की भीनी सी खुशबू साफ पहचान आने लगी थी – दूध और शहद का सा मादक मिश्रण। मैंने धीरे से दरवाज़े की कुंडी चढ़ा दी और वापस लौटते हुए अपनी जींस की ज़िप खोल दी। मेरा खड़ा लंड अब कपड़े के अन्दर तड़प रहा था।
“अकेली हो, बीमार हो, फिर भी इतनी प्यारी लग रही हो कि तुझे घोड़ी बनाकर चोदने का मन कर रहा है,” मैंने उसके कान के पास मुंह ले जाकर फुसफुसाया। उसके गालों पर लाली दौड़ गई और होंठ खुल गए।
“तो चोदो ना मुझे घोड़ी बनाकर, कौन मना करता है। पर धीरे से, ड्रिप की सुई लगी है हाथ में,” उसने शरारत से अपनी बाईं कलाई दिखाई जिसमें कैनुला लगा हुआ था। मैंने उसके असहाय रूप को देखा तो मेरे अन्दर का रंडीबाज पूरी तरह जाग उठा। मैं उसके ऊपर बिना पूरा वजन डाले झुका और उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। अनन्या ने जवाब में अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और हमारी लार एक दूसरे की लार में मिलने लगी। कमरे में चुंबन की गीली आवाज़ें गूंजने लगीं।
मेरा एक हाथ सीधे उसके गाउन के नीचे गया और उसके नंगे, गर्म और मुलायम कुल्हे को दबोच लिया। गांड का मटकेदार मांस मेरी उंगलियों में भर गया। धीरे-धीरे मैं ऊपर की ओर बढ़ा और मेरी हथेली ने उसके बाएं बोबे को पूरा भर लिया। निप्पल पहले ही सख्त हो चुका था, मानो बादाम का दाना मेरे स्पर्श की राह देख रहा हो। मैंने अंगूठे और पहली ऊंगली के बीच उस निप्पल को दबाया तो अनन्या सिसकारी भरते हुए बोली, “अह्ह्ह… ज़ोर से दबाओ ना, मेरे बोबे बहुत दिनों से भूखे हैं।”
अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने मेरी बीमार गर्लफ्रेंड का गाउन सरका कर कंधों से नीचे उतार दिया। पूरी छाती सामने थी – सफेद गूदेदार 36D के बोबे, चारों तरफ नीली-हरी नसों की हल्की झलक। मैंने अपना चेहरा बीच के गड्ढे में दबा दिया और फिर बारी-बारी से दोनों गहरे भूरे निप्पलों को चूसने लगा। चूचियों का दूध तो नहीं था, लेकिन मानो हर चुसाई के साथ अनन्या की चूत से रस टपकने लगता था। वह मेरे बालों को खींचती और अपनी जांघें आपस में रगड़ती जा रही थी। हॉस्पिटल के बिस्तर की हल्की सी चरमराहट उसकी कराहों के साथ मिलकर एक गंदा सुर छेड़ रही थी।
मैंने नीचे खिसक कर मैंने मेरी बीमार गर्लफ्रेंड के पेट पर गीले चुंबन छोड़ने शुरू किए। नाभि में जीभ डाली तो वह ज़ोर से खिलखिलाई और बोली, “वहाँ गुदगुदी होती है, नीचे जाओ ना पगले।” उसकी आज्ञा पाते ही मैंने उसके दोनों पतले पैरों को घुटनों से मोड़ कर फैला दिया।
मेरी मरीज गर्लफ्रेंड ने अब तक अपनी पैंटी नहीं पहनी थी, डिस्पोज़ेबल वाला कमर का कवर हटाते ही सामने थी उसकी झांट के हल्के बालों वाली, रसदार चूत। भोसड़े की दोनों गदराई पंखुड़ियां आपस में चिपकी हुई थीं और उनके बीच चमकता हुआ चूत का रस दीये की लौ की तरह टिमटिमा रहा था। मैंने लम्बी सांस ली और अपनी जीभ उसके भोसड़े के बीचोंबीच रख दी। अनन्या तड़प कर उठ खड़ी हुई और मेरा चेहरा अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
“हाँ… चाट मेरी चूत को, बहुत प्यासी है आज तेरी ये बेचारी रंडी,” उसके मुँह से ये भद्दे बोल निकलते ही मानो बिजली कौंध गई। मैंने अपनी जीभ को लिंग की तरह उसकी टाइट चूत के अन्दर ऊपर-नीचे करना शुरू किया। हर बार भीतर धकेलता तो वहाँ की गर्म और चिपचिपी दीवारें मेरी जीभ को निगलने को दौड़तीं। मैं उसकी भग-फुद्दी को बुरी तरह चूसने लगा। उसके चूत का खट्टा-मीठा रस मेरे गले से नीचे उतर रहा था और मेरा लंड अब पैंट में पूरी तरह अकड़ चुका था।
मैंने उसकी गांड के छेद पर भी उंगली रगड़ी तो वह चौंकी, पर फिर खुद ही मेरी तर्जनी को पकड़ कर अपने गुदा द्वार पर रख दिया। मैंने हल्का सा दबाव डालते हुए गांड में उंगली घुसा दी और साथ-साथ चूत को जीभ से जमकर साफ करता रहा। अनन्या पागलों की तरह हिल रही थी और बार-बार मेरा नाम लेकर कह रही थी, “रोहन… अब अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दे, वरना मैं मर जाऊँगी।”
उसकी यह बेताबी देखकर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर घुटनों तक सरका दिए। हॉस्पिटल के प्राइवेट रूम में मेरा लम्बा और मोटा लंड हल्की लाली लिए हुए, फूली नसों के साथ बाहर निकल आया मेरी बीमार गर्लफ्रेंड की चुदाई करने के लिए।
सुपारी के समान चमकता हुआ लंड का टोपा प्री-कम से भीग चुका था। अनन्या ने अपनी आँखें चौड़ी करके मेरे लंड को देखा और अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए बोली, “इतना बड़ा और तना हुआ लंड है, पहले इसे तो अपनी रांड के मुँह का स्वाद चखने दे।” उसने खुद उठने की कोशिश की लेकिन ड्रिप वाले हाथ के कारण ठीक से हिल नहीं पा रही थी।
मैंने उसके सिर के नीचे तकिया ऊंचा कर दिया और बिस्तर पर उसकी तरफ घुटनों के बल ऐसे सरका कि मेरा लंड सीधा उसके चेहरे पर लटक गया। अनन्या ने बिना किसी हिचक के मेरे लंड को अपने दाहिने हाथ से थामा, और धीरे-धीरे हस्तमैथुन करते हुए टोपे पर अपनी नर्म जीभ फिराने लगी।
“आजा मेरे मोटा लौड़ा, मेरे इस भोसड़ी में कितना तड़प रहा है तू,” वह गंदी बातें करती हुई मेरे लंड के पूरे टोपे को अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगी। मुँह की गर्मी और लार की फिसलन से मेरे अंडकोष तक सिकुड़ गए। वह एक हाथ से मेरे लंड के गोटे मसल रही थी और अपनी जीभ से मेरे लंड की नस को रेखांकित कर रही थी। मैं उसके बालों को मुट्ठी में भरकर ज़ोर-ज़ोर से उसके मुँह में झटके देने लगा। कभी टोपा उसके गालों को अन्दर से धकेलता, कभी लंड का एक हिस्सा सीधे उसके गले तक जा रहता।
पूरे 10 मिनट तक मेरी बीमार गर्लफ्रेंड ने बिना किसी उल्टी या शिकायत के मेरा ब्लोजॉब किया। मेरा वीर्य अब फूटने को तैयार था लेकिन मैंने खुद को रोका और अपना लंड खींच कर बाहर निकाल लिया। चिपचिपा माल और उसकी लार की सफ़ेद झाग मेरे पूरे लंड पर लग गई थी।
“बहुत देर हो गई मेरे लंड की पूजा की, अब असली चुदाई का टाइम आ गया है,” मैंने कहा और उसके हाथ की ड्रिप वाली पाइप को ज़रा साइड करके उसे पूरा बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मैंने उसके दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिए और अपने खूंखार लंड को उसकी रसीली चूत के द्वार पर रगड़ने लगा। रगड़ाई सुनकर अनन्या का पूरा शरीर थरथरा उठा। वह अपनी कमर उछाल रही थी और नीचे से अपने भोसड़े को खुद उंगलियों से खोलकर गुहार करने लगी, “रोहन, अब तो डाल दे अपना मोटा लंड। मेरी चूत में आग लगी है, कितना चोदोगे मुझे?”
मैंने एक ही ज़ोरदार धक्के में अपना 8 इंच का लम्बा लंड मेरी बीमार गर्लफ्रेंड की टाइट चूत में ठूस दिया। जो चीख अनन्या के मुँह से निकली, वह इस हॉस्पिटल की दीवारों के लिए अश्लील थी, लेकिन हमारे लिए किसी सिम्फनी से कम नहीं। उसकी चूत अन्दर से गर्म पानी के झरने की तरह भीगी और तंग थी।
हर बार जब मेरा लंड बाहर निकलता, उसका मांस उसे पकड़ लेता और फिर जोरदार धक्के पर वह पूरा निगल जाती। मैंने मिशनरी पोजीशन में ही रफ्तार बढ़ाई और उसे जोश से चोदने लगा। हमारे जघन की हड्डियाँ आपस में टकरातीं और बिस्तर जानलेवा चरमराहट कर रहा था। मैंने झुककर उसके दोनों बोबों को एक साथ मुँह में भर लिया और निप्पलों पर दाँत गड़ा दिए।
“चूस मेरे चूचे, ऐसे चोद जैसे मैं तेरी वेश्या हूँ और आज रात ही मेरी बोली लगी है,” अनन्या अब पूरी छिनाल बनी हुई थी। उसका एक हाथ मेरी गांड पर चिपट गया और वह नाखून गड़ाकर मुझे और गहराई तक धकेल रही थी। 150 से भी ज्यादा तेज झटकों के बाद मैंने अपनी पोजीशन बदली। अब वह अपने घुटनों और हाथों के बल बिस्तर पर पलट गई थी, केवल एक हाथ को ड्रिप देने वाला एंगल संभाल कर।
मैं उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया और उसके मोटे-मोटे चूतड़ फैलाकर गांड का छेद और फिर चूत का छेद एक साथ देखने लगा। गांड की सिलवटें गुलाबी पड़ रही थीं। मैंने अपना चेहरा वहाँ दबाकर एक बार फिर से उसके भोसड़े को जीभ से साफ किया और फिर ऐन डॉगी स्टाइल में अपना लंड पीछे से उसकी चूत में ठेल दिया।
पीछे से चुदाई का मज़ा ही कुछ और है। मेरा लंड अब और गहराई तक घुस रहा था। हर झटके पर मेरे अंडकोष की थैली उसके भग पर ज़ोर-ज़ोर से चोट कर रही थी। मैंने उसके कुल्हों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और एकदम जानवरों की तरह चोदने लगा। अपशब्दों की बौछार शुरू हो गई। “ले मज़ा अपनी चूत का, एक रंडी की तरह मटक मटक कर पूरा लौड़ा अंदर तक ले।” इतने में मैंने अपना अंगूठा लार से गीला करके उसके गांड के छेद पर रगड़ा और धीरे-धीरे आधा अंगूठा अंदर घुसा दिया।
दर्द के मारे मेरी बीमार गर्लफ्रेंड अनन्या बहुत जोर से चिल्लाई, “हाँ, मेरी गांड में भी डाल, लंड से नहीं तो कम से कम उंगली ही कर।” मैं अंगूठे से उसकी गांड को चोदने लगा और लंड से उसकी चूत को। दोनों छेद एक साथ भरे जाने की अनुभूति से वह बिलख उठी। 5-7 मिनट की इस डबल पेनेट्रेशन के बाद मुझे लगा कि मेरा वीर्य अब बाहर आने को बेताब है।
चुदाई के आखिरी और सबसे रोमांचक मोड़ पर मैंने उसे अपने ऊपर बिठा लिया। ड्रिप वाले हाथ को सहारा देकर वह मेरे लंड पर इस तरह बैठी जैसे कोई रानी अपने सिंहासन पर बैठती है। काउगर्ल पोजीशन में उसने अपनी चूत का पूरा वजन मेरे लंड पर डाल दिया। अब बारी थी उसके झटके मारने की।
वह मेरी छाती पर हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से पूरे शरीर को उछालने लगी। उसके 36D के बोबे हवा में ज़ोर से हिल रहे थे और उनकी चपेचप की आवाज़ सुनाई दे रही थी। मैंने आगे झुककर दोनों बोबों को थाम लिया और सख्त निप्पलों को ज़ोर-ज़ोर से चूसते हुए अपनी कमर से धक्के लगाने लगा। हम दोनों के शरीर पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। अस्पताल की ठंडी हवा और हमारी गर्म चुदाई के बीच का अंतर अद्भुत था।
“अब तो झड़ जायगी ना कुतिया…?” मैंने उसकी कमर को जकड़ कर नीचे से आखिरी दौर के 20 ज़ोरदार झटके लगाए। अनन्या ने अपना सिर पीछे फेंक कर एक लम्बी चीख मारी और मेरे लंड पर ही पूरी तरह झड़ गई। उसकी चूत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को ऐसे जकड़ा जैसे बच्चा माँ का स्तन पकड़ता है। उसके रिलीज़ होते ही मैंने अपना लंड बाहर खींच लिया।
मैं चाहता था कि मेरा चिपचिपा माल मेरी बीमार गर्लफ्रेंड के मुलायम पेट और उभरी हुई नाभि पर गिरे। मैंने तीन-चार ज़ोरदार हस्तमैथुन किए और मेरा एक के बाद एक गाढ़ी, सफेद वीर्य की धार उसके पूरे पेट पर गिर गई। कुछ बूँदें छिटक कर उसके बोबों तक पहुँच गईं। वीर्य की गर्माहट और गंध ने पूरे प्राइवेट रूम को एक अल्हड़ कामुकता से भर दिया।
हम दोनों हांफ रहे थे। अनन्या ने मेरे माल को अपनी उंगलियों से उठाकर अपने होंठों पर लगाया और बड़े ही छिछोरे अंदाज़ में उसे चाट गई। “स्वाद तो बहुत नमकीन था, पर चोदाई का मज़ा इस दवाई से हज़ार गुना बेहतर,” वह मुस्कुराई। मैंने बिस्तर के पास रखे टिशू पेपर से उसका शरीर साफ किया और फिर उसे प्यार से गले लगा लिया। वह थक कर मेरी बाँहों में दुबक गई। रात के 2 बजे हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए थे, बिस्तर पर केवल सेक्स और पसीने की मिली-जुली गंध तैर रही थी।
अगली सुबह जब नर्स आई, अनन्या का चेहरा एकदम तरोताज़ा था। डॉक्टर ने शाम को उसे डिस्चार्ज कर दिया। वह मुस्कुरा कर मेरे कान में फुसफुसाई, “अब घर चलकर तो इस बीमार छिनाल की और अच्छी तरह दवाई करनी पड़ेगी।” मैं अपनी हंसी नहीं रोक पाया। अस्पताल का वह प्राइवेट रूम नंबर 302 आज भी मेरी सबसे खतरनाक और रोमांचक चुदाई की यादों में सबसे ऊपर बना हुआ है।
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