HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesपड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए जमकर चुदाई करी

पड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए जमकर चुदाई करी

अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी पड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए जमकर चुदाई करी का सारांश :- यह कहानी करन नाम के एक हवसी युवक की है, जो अपने पड़ोस में हुई एक शादी के दौरान अपनी पड़ोसन भाभी के साथ अवैध रूप से यौन संबंध स्थापित करता है अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए। शादी के बाद, जब सभी लोग थककर आराम कर रहे होते हैं, करन अपने घर की छत पर एक खाली कमरे में सोने जाता है।

वहाँ उसकी पड़ोसन भाभी, जो थकी हुई लेकिन आकर्षक लग रही होती हैं, आती हैं। दोनों के बीच हल्की-फुल्की बातचीत और मजाक से शुरू होकर अंतरंग पल बनते हैं, जो अवैध यौन संबंधों तक पहुँचते हैं। कहानी में उनके शारीरिक संबंधों का विस्तृत और स्पष्ट वर्णन है, जिसमें भाभी का पहला अनुभव, दर्द, और बाद में आनंद शामिल है। यह घटना एक बार की होती है, और बाद में दोनों को फिर से ऐसा मौका नहीं मिलता। यह कहानी वयस्क और स्पष्ट सामग्री पर आधारित है।

पड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए जमकर चुदाई करी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

पड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए जमकर चुदाई करी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी के पत्रों का परिचय :- हाय दोस्तों, मेरा नाम करन है। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपने पड़ोस में हुई एक शादी के दौरान अपनी पड़ोसन भाभी के साथ यौन संबंध बनाए। यह कहानी उस समय की है जब मेरे पड़ोस में एक शादी थी। शादी पड़ोसी की बेटी की थी। मैं और मेरा परिवार शादी के कामों में व्यस्त थे। उनके घर में बहुत सारे मेहमान आए थे, और कुछ मेहमान मेरे घर पर भी रुके थे, क्योंकि शाम को बारात आने पर उनके घर में जगह नहीं थी।

अगले दिन दुल्हन को लेकर बारात विदा हो गई। सभी लोग काफी ज्यादा थक गए थे और सोने में व्यस्त थे। मैं भी अपने घर लौट आया। मेरे घर में कई मेहमान थे, जो आराम कर रहे थे। मैंने देखा कि घर में जगह कम थी, तो मैं अपनी छत पर बने एक कमरे में चला गया, जो ज्यादातर खाली रहता था। मैंने वहाँ एक चारपाई डाली और आराम करने के लिए लेट गया। तभी मुझे किसी के आने की आवाज़ सुनाई दी। मैं उठा तो देखा कि मेरी पड़ोसन भाभी वहाँ अपनी पायल छनकाते हुए आई थीं। मेरी पड़ोसन भाभी बहुत मज़ाकिया स्वभाव की थीं। मैं भी उनके साथ हँसी-मजाक करने बैठ गया।

आज पड़ोसन भाभी मुझे अजीब-सी नज़रों से देख रही थीं। उनकी आँखों में थकान और नींद का नशा साफ दिख रहा था, जिससे वह और भी खूबसूरत लग रही थीं। उनके बिखरे हुए बाल, नशीली आँखें, लंबी गर्दन, और नीचे गोल-गोल स्तन उन्हें और आकर्षक बना रहे थे। उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैंने शरारती नज़रों से मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या बात है, भाभी? आप आज बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही हो बिलकुल किसी नयी नवेली दुल्हन की जैसे।”

वह मुस्कुराईं और बोलीं, “क्यों, आज पहली बार देख रहे हो क्या?”
मैंने कहा, “नहीं, ऐसी बात नहीं है भाभी जी, लेकिन आज कुछ ज़्यादा ही हॉट और सेक्सी लग रही हो आप।”
वह बोलीं, “तुम्हारे भैया ने तो कभी ऐसा नहीं कहा।”
मैंने कहा, “मैं तो कह रहा हूँ।” वह हँसने लगीं। फिर उन्होंने बताया कि वह बहुत थक गई हैं और सोने की जगह नहीं मिल रही। मैंने कहा, “यहीं लेट जाइए।”

वह मुस्कुराईं और बोलीं, “फिर तुम कहाँ जाओगे?”
मैंने कहा, “मैं कहीं और चला जाऊँगा।”
वह बोलीं, “कहीं मत जाओ। मैं बस थोड़ी देर में चली जाऊँगी।” यह सुनकर मैं वहीं बैठ गया और पड़ोसन भाभी के कामुकता से भरे हुस्न को गन्दी नजरों से निहारने लगा।

वह समझ गईं कि मैं उन्हें देख रहा हूँ। उनकी नज़र मेरे पजामे पर गई, जहाँ मेरा लंड तना हुआ था। वह बार-बार मेरे पजामे की ओर देखने लगीं। मैं समझ गया कि वह भी प्यासी हैं और उन्हें लंड चाहिए। मेरी हिम्मत बढ़ गई, लेकिन दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैंने हिम्मत करके बात आगे बढ़ाई और पूछा, “क्या मैं आपके पास बैठ जाऊँ?”

वह बोलीं, “क्या बात है? इरादे तो नेक हैं?”
मैंने कहा, “नहीं, भला आप जैसी हसीना को देखकर इरादे नेक कैसे रह सकते हैं?”
वह बोलीं, “क्या करने का इरादा है?”
मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया और दातों में अपनी जीभ दबाते हुए बड़े ही सेक्सी अंदाज में कहा, “बहुत कुछ भाभी जी।”
वह मुस्कुराकर बोलीं, “तो मना किसने किया है कर लो आज तुम्हे मेरे साथ जो कुछ भी करना है?”

यह सुनकर मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। अब मैं निडर होकर उन्हें अपनी बाहों में भरने लगा और उनके होंठों को चूमने लगा। उन्होंने भी कोई विरोध नहीं किया। मैंने अपना एक हाथ उनके ब्लाउज़ में डालकर उनके स्तन को दबाना शुरू किया। वह मस्ती में मुझसे चिपटकर मुझे चूमने लगीं। मैं पागलों की तरह कभी उनके होंठों को, कभी उनकी गर्दन को चूमने लगा। वह भी मुझसे लिपटने लगीं।

मैंने थोड़ी देर रुककर जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। फिर मैंने उन्हें चारपाई पर गिराया और उनके ब्लाउज़ को खोलना शुरू किया। वह बोलीं, “कोई आ गया तो?”
मैंने कहा, “यहाँ कोई नहीं आता।” मैंने एक झटके में उनका ब्लाउज़ खोल दिया। उनकी गुलाबी जालीदार ब्रा में उनके गोरे-गोरे स्तन देखकर मेरा लंड मेरे अंडरवियर को फाड़कर बाहर आने को बेताब हो गया। मैंने तुरंत उनकी ब्रा खोल दी। वह शरमाने लगीं। मैंने उनके एक स्तन के निप्पल को अपने होंठों में दबाकर चूसना शुरू कर दिया और दूसरे स्तन को धीरे-धीरे मसलने लगा। वह मस्ती में डूबती जा रही थीं।

कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उनके पेट को चूमना शुरू किया। उन्हें गुदगुदी होने लगी और वह हँस पड़ीं। फिर मैंने अपना एक हाथ उनकी साड़ी के अंदर डालकर उनकी जाँघों को मसलना शुरू किया। धीरे-धीरे मैंने अपनी उंगलियाँ उनकी पैंटी के अंदर डाल दीं और उनकी बुर में उंगली डाल दी। उनकी बुर हल्की गीली थी, जिससे मेरी पूरी उंगली उनकी बुर में चली गई। उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया।

अब मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट खोल दिए। उनकी गोरी-गोरी जाँघों में गुलाबी जालीदार पैंटी देखकर मैं पागल हो गया। मैंने एक झटके में उनकी पैंटी उतार दी और उनकी टाँगें फैलाकर अपने होंठ उनकी बुर पर रख दिए। वह पागल-सी हो गईं। उनका पूरा शरीर अकड़ गया। मेरा जोश बढ़ने लगा, और मैं उनकी बुर को अपने होंठों से कसकर चूसने लगा।

वह बोलीं, “क्या आज तक मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ।” उन्होंने अपने हाथों से मेरा सिर दबाना शुरू कर दिया, जैसे वह अपनी बुर का रस मुझे पिलाना चाहती हों। मैं भी ज़ोर-ज़ोर से चूसता रहा। फिर अचानक वह ढीली पड़ गईं, और उनकी बुर से पानी निकलने लगा।

मैं उठा और अपने सारे कपड़े उतारने लगा। मुझे नग्न देखकर वह मेरे लंड को निहारने लगीं। मैंने उनका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और कहा, “अब तुम्हारी बारी।” वह शरमाईं और मेरे लंड को सहलाने लगीं। वह चारपाई पर लेटी थीं, और मैं उनके पास खड़ा था। मेरा लंड उनके मुँह के ठीक सामने था। मैंने अपना लंड उनके होंठों से लगाया। उन्होंने मेरे लंड के सुपाड़े को धीरे से चूमा। यह देखकर मैं पागल हो गया। उन्होंने फिर से मेरे लंड को चूमना शुरू किया। मैंने तुरंत ही मुखमैथुन के लिए मैंने अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया।

वह धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसने लगीं और मुझे ब्लोजॉब देने लगी। मुखमैथुन के दौरान मुझे लगा जैसे मुझे जन्नत मिल गई हो। मैंने गति बढ़ानी शुरू की, जैसे मुझे बुर में नहीं, उनके मुँह में ही चुदाई करनी हो। मेरा 8 इंच लंबा लंड उनके मुँह में पूरा चला गया। मुखमैथुन करने के दौरान उन पड़ोसन भाभी के मुँह से “घुप… घुप…” की मादक आवाज़ निकलने लगी। मैंने एक जोरदार झटका दिया जिससे मेरा खड़ा लंड उनके गले तक चला गया और उन्हें एक जोरदार खांसी आ गयी. फिर उन्होंने अपना मुँह पीछे किया और बोलीं, “मार डालोगे क्या?”

मैंने कहा, ” मैं आपका कामुक जिस्म देखकर थोड़ा बहक गया था इसके लिए सॉरी भाभी, आप मुखमैथुन करों मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ की अब दुबारा से ऐसा नहीं होगा।”
वह बोलीं, “अब नहीं, मेरी बुर में लंबा मोटा लंड लेने की आग लग रही है। जल्दी से मेरी चूत को चोदकर इसमें लगी आग को बुझाओ।”

मैंने उनकी टाँगें अपनी ओर घुमाईं और अंग्रेजी के V अक्षर की आकार में फैला दीं। जैसे ही मैंने अपना लंड उनकी चुदने की आग में जल रही बुर पर रखा, मेरा एक पैर पीछे की ओर फिसल गया, और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उनकी टाइट बुर को फाड़ते हुए अंदर चला गया। मेरा लंड 8 इंच लंबा और मोटा होने की वजह से उनकी चूत फट गयी और उनकी आँखें भी इतनी बड़ी हो गयी मानो जैसे बाहर आ जाएँगी। उनके मुँह से चीख निकल गई। मैंने जल्दी से उनका मुँह दबाया और अपना संतुलन बनाकर लंड बाहर निकाला। मैं बहुत डर गया, जैसे उनकी बुर फट गई हो। वह काँपने लगीं और बोलीं, “मैं मर गई, मैं मर गई। अब नहीं करूँगी तुम्हारे साथ सेक्स।”

यह सुनकर मैं डर गया कि कहीं वह चली न जाएँ मेरी अन्तर्वासना शांत करे बिना ही। मैं उन्हें मनाने लगा कि मेरा पैर फिसल गया था। लेकिन वह नहीं मानीं। मैंने उनकी बुर को सहलाना शुरू किया, लेकिन वह फिर भी नहीं मानीं। मैंने उन्हें यकीन दिलाया कि अब लंड से नहीं करूँगा। तब जाकर वह मुश्किल से मानीं। मैं उनकी बुर को प्यार से चूमता रहा, कभी उंगलियों से उत्तेजित करता रहा। पुसी फिंगरिंग करने की वजह से अब वो धीरे-धीरे फिर से मस्ती में डूबने लगीं।

मैंने सोचा कि यही सही मौका है। मैं उनके बड़े बड़े बूब्स को चूसने के बहाने उनके ऊपर आ गया। फिर धीरे से मैंने थूक लगाने के बाद अपना तना हुआ लंड उनकी बुर पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। वह भी मुझे अपनी बाहों में भरने लगीं और बोलीं, “धीरे से करो, मेरे जान।” मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने आधा लंड अंदर डालकर धीरे-धीरे चुदाई शुरू कर दी। कुछ देर तक ऐसा करने के बाद वह भी अपनी कमर हिलाकर मज़ा लेने लगीं। उनके मुँह से बहुत ही ज्यादा कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं।

पड़ोसन भाभी की जमकर चुदाई करने के दौरान उनकी मादक सिसकारियों को सुनकर मेरा चुदाई करने का जोश बढ़ता जा रहा था। अब चोदते चोदते मैंने पड़ोसन भाभी की  चुदाई करने की गति तेज़ कर दी। अब मेरा पूरा लंड आसानी से पड़ोसन भाभी की की चूत के अंदर-बाहर होने लगा। अपनी बुर की आग भुजाने के लिए चुदाई के दौरान पड़ोसन भाभी की भी ज़ोर-ज़ोर से कमर उछालकर मेरे लंबे मोटे लंड का भरपूर मज़ा लेने लगीं। मैं अपनी चरम सीमा पर पहुँचने लगा। मैंने पूरी ताकत से तेज़ी से झटके मारने शुरू किए।

वह चुदते चुदते हर झटके का पूरा मज़ा ले रही थीं ताकि उनकी बुर की आग अच्छी तरह से शांत हो सके। उनकी सिसकारियाँ धीमी होती गईं, और मज़ा बढ़ता गया। कुछ देर बाद हम दोनों शांत हो गए और उसी अवस्था में एक-दूसरे को चूमते रहे। दोस्तों, इस तरह मैंने अपनी पड़ोसन भाभी की बुर की आग भुजाने के लिए उनकी जमकर चुदाई करी। इसके बाद पाँच महीने बीत गए, लेकिन हमें फिर कभी ऐसा मौका नहीं मिला। अब हम दूर से एक-दूसरे को देखकर उस दिन खतरनाक चुदाई को याद करते हैं।

RELATED ARTICLES

You Must Watch