मुफ्त में पढ़ें दिवाली की रात भाई से चुदाई करवाते देखा समलैंगिक पति ने अन्तर्वासना हिंदी भाई बहन सेक्स स्टोरी :- मेरे हरामी दोस्तों, यह भाई बहन अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी एक ऐसी शादी शुदा औरत की है, जिसका नाम राधिका है, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी में समलैंगिक (Gay) पति की बेरुखी और ससुर के साथ उसके पति के नाजायज रिश्तों से तंग आ चुकी है। दिवाली की रात, जब उसका भाई रबी अपनी बहन और जीजा जी के ढोक लगाने उसके घर आता है, भाई बहन के बिच एक अनजानी आग भड़क उठती है और दोनों अवैध सेक्स संबंध बना बैठते हैं। यह कहानी राधिका के नजरिए से है, जो अपनी वासना, शर्म, और बेबसी को बयान करती है। कहानी में हास्य, गाली-गलौज, और अश्लील हरकतों का मिश्रण है, जो इसे और भी रसप्रद बनाता है। स्थान है मेरठ का एक आलीशान घर, जहां राधिका अपनी ससुराल की दौलत के बीच अकेलापन महसूस करती है। यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसमें सभी घटनाएं विस्तार से बताई गई हैं।
रात थी अमावस की, मगर मेरे दिल में एक अलग ही रोशनी जल रही थी। दिवाली की रात थी, और मेरठ के हमारे आलीशान बंगले में चारों तरफ दीयों की लौ टिमटिमा रही थी। मैं, राधिका, 29 साल की एक हसीन औरत, जिसकी जवानी हर मर्द की नजरों को अपनी ओर खींच लेती थी, उस रात अकेलेपन की आग में जल रही थी। मेरी शादी को आठ साल हो चुके थे, लेकिन मेरा पति, विशाल, एक नंबर का गंडमरा था अर्थात उसे गांड मरवाना और गांड मारना पसंद था। उसका लंड तो क्या, उसकी नजर भी मेरी चूत की तरफ नहीं उठती थी। वजह? उसका अपने समलैंगिक (Gay) बाप, यानी मेरे ससुर, धर्मपाल, के साथ गंदा रिश्ता। हाँ, आपने सही सुना—मेरे पति और ससुर दोनों समलैंगिक (Gay) थे। उनकी गांड मारने-मरवाने की कहानी इस घर की दीवारों में कैद थी।
मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी जिंदगी ऐसी होगी। मेरी शक्ल-सूरत ऐसी थी कि सड़क पर निकलूं तो मर्दों की आँखें मेरे बूब्स और गांड पर टिक जाती थीं। मेरी 36D की चूचियां, पतली कमर, और गोल-मटोल गांड किसी को भी पागल कर सकती थी। लेकिन मेरे पति को मेरी जगह अपने बाप की गांड ज्यादा प्यारी थी। इस घर में मैं अकेली थी—न सास, न ननद, बस मैं, विशाल, और धर्मपाल। और हाँ, ढेर सारी दौलत। 50 बीघा जमीन, 15 ट्रक, और एक फैक्ट्री—मैं इस सब की इकलौती वारिस थी। अब आप ही बताओ, इतनी दौलत छोड़कर मैं कहाँ जाती?
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मेरा भाई रवि, 26 साल का जवान लड़का, उस रात मेरे घर आया था। रवि एकदम मस्तमौला, हट्टा-कट्टा, और थोड़ा शरारती था। उसकी मूंछें और चौड़ा सीना किसी भी लड़की को ललचा सकता था। उस रात वो मुझसे मिलने आया था, और मैंने उसे गले लगाकर दिवाली की बधाई दी। लेकिन उस गले लगने में कुछ ऐसा हुआ कि मेरी चूत में आग लग गई। यह कहानी उसी रात की है, जब मेरे भाई ने मुझे चोदकर मेरी सारी प्यास बुझा दी, और वो भी मेरे समलैंगिक (Gay) पति के सामने।
राधिका: 29 साल, हसीन, सेक्सी, और वासना से भरी। लाल साड़ी में उसकी चूचियां और गांड उभरकर सामने आती थीं। उसकी जवानी की आग बुझाने वाला कोई नहीं था।
रवि: 26 साल, राधिका का भाई, जवान और मस्तमौला। उसका लंड और उसकी हवस राधिका को नई जिंदगी देती है।
विशाल: 32 साल, राधिका का पति, समलैंगिक (Gay)। अपने ससुर के साथ गंदे रिश्ते में डूबा हुआ।
धर्मपाल: 55 साल, राधिका का ससुर, समलैंगिक (Gay) और अपने विशाल का सेक्स पार्टनर। दोनों की गांड मारने की कहानी घर में आम थी।
स्थान: मेरठ, उत्तर प्रदेश, एक आलीशान बंगला, जहां दिवाली की रात चुदाई की आग में जल उठती है।
दिवाली की रात का जलवा
दिवाली की रात थी, और मैंने पूजा की थाली सजाई थी। दीये जलाए, मिठाइयाँ बांटीं, और घर को रंग-बिरंगे झालरों से सजाया। लेकिन मेरे दिल में एक खालीपन था। विशाल और धर्मपाल अपने कमरे में बंद थे, और मुझे पता था कि वो दोनों अपनी गांड मारने-मरवाने की दुनिया में खोए होंगे। मैंने लाल साड़ी पहनी थी, जिसके साथ कसी हुई चोली मेरी चूचियों को और उभार रही थी। मेरी लिपस्टिक सुर्ख लाल थी, और काजल से मेरी आँखें चमक रही थीं। मैं शीशे में खुद को देख रही थी, और सोच रही थी कि क्या मेरी जवानी ऐसे ही बर्बाद हो जाएगी?
तभी दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो सामने रवि खड़ा था। उसने नीली कुर्ता-पायजामा पहना था, और उसकी मूंछों में एक अलग ही ठसक थी। “हैप्पी दिवाली, दीदी!” उसने मुस्कुराते हुए कहा। मैंने भी हंसकर जवाब दिया, “हैप्पी दिवाली, रवि!” और उसे गले लगा लिया। उसकी छाती मेरी चूचियों से टकराई, और उसकी बाहों में मुझे एक अजीब सी गर्मी महसूस हुई। मैंने उसे अंदर बुलाया, और हम मेरे बेडरूम के सोफे पर बैठ गए।
“जीजा जी कहाँ हैं?” रवि ने पूछा। मैंने हंसकर कहा, “वो अपने गे बाप के साथ मस्ती कर रहे हैं।” रवि ने भौंहें चढ़ाईं, “मतलब?” मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुप रही। तभी बगल के कमरे से जोर-जोर की आवाजें आईं— “आआह्ह… ओह्ह… और जोर से गांड मार यार!” मैं समझ गई कि विशाल और धर्मपाल गे सेक्स करने में मस्त थे। रवि उठकर बाहर देखने गया, लेकिन मैंने उसे रोक लिया। “छोड़, रवि, ये रोज का ड्रामा है।” मेरी आँखों में आंसू आ गए।
रवि मेरे पास आया और बोला, “क्या हुआ, दीदी? कुछ बताओ ना!” मैं टूट चुकी थी। मैंने उसे सब बता दिया—विशाल की नामर्दी, उसका और ससुर का गंदा रिश्ता, और मेरी अधूरी जवानी। रवि अवाक् रह गया। “ये क्या बकवास है? तू यहाँ क्यों रह रही है?” उसने गुस्से में पूछा। मैंने कहा, “दौलत, रवि। इस ससुराल की दौलत मुझे यहाँ बांधे रखती है। लेकिन मेरी चूत की आग कौन बुझाएगा?” मेरी बात सुनकर रवि की आँखें चमक उठीं।
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला, “दीदी, तू इतनी हसीन है। तुझे कोई कमी नहीं रहने दूंगा।” उसकी बातों में एक अजीब सी गर्मी थी। मैंने उसकी आँखों में देखा, और मेरी चूत में सनसनी दौड़ गई। मैंने कहा, “रवि, ये गलत है।” लेकिन मेरे जिस्म ने मेरे दिमाग को धोखा दे दिया। रवि ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया, और मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया। “हैप्पी दिवाली,” उसने मेरे कान में फुसफुसाया, और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
उसके बाद जो हुआ, वो मेरी जिंदगी की सबसे गंदी और मजेदार रात थी। रवि ने मेरी साड़ी का पल्लू खींचा, और मेरी चोली के हुक खोल दिए। जैसे ही मेरी चोली के हुक खोले वैसे ही मेरी चूचियां आजादी का जश्न बनाने लगी। मेरे मोटे मोटे बूब्स को देखकर मेरा भाई पागल हो गया। “दीदी, तेरे बूब्स तो बहुत मस्त हैं, मैंने आज तक इतने शानदार स्तन नहीं देखे मेरे पुरे जीवन में !” उसने कहा और मेरी निप्पल्स को अपने मुँह में ले लिया। मैं सिसक उठी। उसकी जीभ मेरी निप्पल्स पर घूम रही थी, और मेरी चूत गीली हो रही थी। मैंने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और पैंटी उतार फेंकी। “चूस, रवि, मेरी चूत को चूस!” मैंने चिल्लाकर कहा।
मेरे बहनचोद भाई रवि ने मेरी दोनों टांगें फैलाईं और मेरी टाइट चूत पर अपनी जीभ रख दी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी, और मैं पागल हो रही थी। “आआह्ह… भाई… और चाट… भोसड़ी के, मेरी चूत को चाट!” मैं चिल्ला रही थी। मेरी बहनचोद भाई ने पहले तो कुत्ते की तरह मेरी बैचेन चूत बड़े मजे से चाटी और फिर जैसे ही मेरे चूत ने पानी चोदा तो वैसे ही उसने मेरी चूत का पानी पीना शुरू कर दिया। अपने भाई को चूत का पानी पिलाने के बाद मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले लिया ब्लोजॉब करने के लिए। उसका लंड 8 इंच का था, मोटा और कड़क। मैंने उसे चूसना शुरू किया, और वो मेरे मुँह में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा। “दीदी, तू तो रंडी से भी बढ़कर चूसती है!” उसने हंसते हुए कहा।
दिवाली की रात भाई के गधे के जैसे बड़े मोटे लंड से चुदाई करवाते देखा समलैंगिक पति ने
मैं मेरे भाई के गधे के जैसे लंड से चुद रही थी की तभी दरवाजा खुला, और मेरा गे पति विशाल अंदर आ गया। वो हम भाई बहन को आपत्तिजनक हालत में देखकर ठिठक गया। मैं नंगी थी, मेरी चूचियां मेरे भाई रवि के हाथों में थीं, और उसका गधे के लंड के जैसा लंबा काला लंड मेरे मुँह में। मैंने विशाल की तरफ देखा और हंस दी। “क्या देख रहा है साले समलैंगिक मर्द? तू अपने समलैंगिक बाप की गांड मारकर आया है ना?” मैंने ताना मारा। विशाल चुप रहा। रवि ने हंसते हुए कहा, “जीजा जी, हैप्पी दिवाली! देखो, मैं आपकी बीवी की चूत की पूजा कर रहा हूँ ठीक वैसे ही जैसे अभी कुछ देर पहले आप अपने पिता की गांड की पूजा कर रहे थे!”
विशाल कुछ नहीं बोला। वो बस खड़ा रहा, और फिर मेरे भाई रवि ने मेरी चुदाई करने के लिए मुझे बेड पर लिटा दिया। उसने मेरी टांगें फैलाईं और अपना गधे के लंड का जैसा बड़ा मोटा लंड मेरी चूत के छेद पर रखा। “दीदी, अब तुझे चोदकर तेरी सारी प्यास बुझा दूंगा,” उसने कहा और एक जोरदार धक्का मारा। उस जोरदार धक्के के साथ भाई का गधे के लंड का जैसा बड़ा मोटा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अंदर मेरी बच्चेदानी तक पूरा घुस गया, और मैं दर्द के मारे बहुत ही ज्यादा जोर से चिल्ला उठी, “आआह्ह… रवि… चोद आज मुझे अपनी रंडी बनाकर चोद… और जोर से चोद और आज अपनी के अतृप्त बहन की अन्तर्वासना शांत कर दे!”
रवि ने मेरी चूचियों को मसलते हुए मुझे चोदना शुरू किया। उसका लंड मेरी चूत को चीर रहा था, और मैं गांड हिलाकर उसका साथ दे रही थी। विशाल सामने खड़ा था, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। शायद वो अपनी गांड की खुजली मिटाकर आया था। मैंने उसे देखकर कहा, “देख, नामर्द, असली मर्द कैसे चोदता है!” रवि हंस पड़ा और बोला, “जीजा जी, तू भी आजा, तेरी गांड मार दूं!”
मैं हंसने लगी। रवि की बातों में हास्य था, लेकिन उसका लंड मेरी चूत में आग लगा रहा था। उसने मुझे 15 मिनट तक चोदा, और मैं दो बार झड़ चुकी थी। मेरी चूत का पानी बेड पर फैल गया था। फिर रवि ने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी सेक्सी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारते हुए अपना गधे के लंड का जैसा बड़ा मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। “आआह्ह… रवि… मेरी गांड फट जाएगी!” मैं चिल्लाई। लेकिन वो नहीं रुका। उसने मेरी गांड को चोदना शुरू किया, और मैं दर्द और मजा दोनों में डूब गई।
मेरा पति विशाल अभी भी खड़ा था और हम भाई बहन की चुदाई देख रहा था । मैंने उससे घुस्से से कहा, “क्या देख रहा है, गांडू? जा, अपने गे बाप के पास और उसके साथ समलैंगिक सेक्स कर ले साले हरामी!” वो चुपचाप चला गया। रवि ने मेरी गांड में अपना माल छोड़ दिया, और मैं थककर बेड पर गिर गई। रवि मेरे पास लेट गया और बोला, “दीदी, अब तुझे कोई कमी नहीं रहेगी।” मैंने उसकी छाती पर सिर रखा और मुस्कुराई।
उस रात हम भाई बहन ने खाना खाया, और मेरा समलैंगिक पति विशाल गुस्से में छत पर सोने चला गया। मैं और मेरा भाई रवि मेरे बेडरूम में थे। रात भर हम भाई बहन ने चुदाई कर करकर अपनी अन्तर्वासना शांत करी। रवि ने मुझे हर पोजीशन में चोदा—मिशनरी, डॉगी, 69 सेक्स पोजीशन, सब कुछ। उसने मेरी बैचेन चूत को किसी जंगली कुत्ते की तरह से चाटा, मेरी चूचियों को मसला, और कुतिया बनाकर मेरी गांड को फिर से चोदा। मैंने भी उसका लंड चूसा और उसके माल को पिया। हम दोनों प्यासे थे, और उस रात हमने एक-दूसरे की सारी प्यास बुझा दी।
सुबह जब मैं उठी, तो रवि मेरे पास लेटा था। उसका लंड अभी भी कड़क था। मैंने हंसकर कहा, “भोसड़ी के, तू भाई है या जल्लाद पूरी रात तो तूने मेरी रंडी बनाकर चुदाई करी है मगर तेरा लंड तो साला अभी भी खड़ा हुआ है?” उसने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और फिर से अपनी रंडी बनाकर चोदना शुरू कर दिया। उस सुबह हमने एक बार फिर चुदाई की, और मैंने महसूस किया कि मेरी जिंदगी में अब कोई कमी नहीं थी। मेरे भाई के गधे जैसे लंबे मोटे लंड ने मेरी चुदाई की प्यास को शांत कर दिया था…
दिवाली की रात भाई से चुदाई करवाते देखा समलैंगिक पति ने अन्तर्वासना हिंदी भाई बहन सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
यह भाई बहन हिंदी XXX सेक्स कहानी मेरे जीवन की उस रात की है, जब मेरे भाई ने मुझे वो सुख दिया, जो मेरा पति कभी नहीं दे सका। मैं जानती हूँ कि ये गलत था, लेकिन मेरी चूत की आग और मेरे जिस्म की प्यास ने मुझे मजबूर कर दिया। रवि ने मुझे वो मजा दिया, जो मैंने सालों से तरस रखा था। विशाल और धर्मपाल अपनी दुनिया में मस्त रहे, और मैंने अपनी दुनिया रवि के साथ बना ली। इस कहानी में हास्य था, क्योंकि मेरे पति की नामर्दी और गे ससुर की गांड मारने की आदत हंसी का पात्र थी। लेकिन इसके साथ-साथ मेरी बेबसी और वासना भी थी, जो इस कहानी को गहराई देती है।
मैं चाहती हूँ कि आप हम सगे भाई बहन की इस कामुकता से भरी हिंदी सेक्स कहानी पर अपने विचार बताएं। क्या आपको इस सेक्स स्टोरी में राधिका का किरदार पसंद आया? क्या रवि की शरारत और हास्य ने आपको हंसाया? क्या कहानी की गर्मी ने आपकी वासना को जगाया? मुझे बताएं कि आपको कहानी का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद आया। क्या आपको लगता है कि राधिका को अपनी दौलत छोड़कर कहीं और चले जाना चाहिए था? या उसने सही किया जो रवि के साथ अपनी प्यास बुझाई? आपकी राय मेरे लिए मायने रखती है। कृपया अपनी प्रतिक्रिया साझा करें।


