HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesसामूहिक सेक्स के दौरान नशे में पति पत्नी स्वैपिंग का खेल

सामूहिक सेक्स के दौरान नशे में पति पत्नी स्वैपिंग का खेल

सामूहिक सेक्स करने के दौरान शराब के नशे में पति पत्नी की स्वैपिंग का गंदा खेल अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी बिलकुल मुफ्त में पढ़ें इस अन्तर्वासना हिंदी सामूहिक सेक्स कहानी का सारांश :-  यह कहानी बिंदु (इंदु) नाम की एक महिला की है, जो पति पत्नी स्वैपिंग का खेल खेलती है और अपने सामूहिक सेक्स करने के अनुभवों को हिंदी सेक्स स्टोरी के माध्यम से साझा करती है। वह अपने पति विमल, अपनी सहेली शशि, और शशि के पति अविनाश के साथ मिलकर सामूहिक सेक्स करती है और सामूहिक सेक्स के दौरान पति पत्नी स्वैपिंग का गंदा खेल खेलती है। कहानी में बिंदु और शशि की दोस्ती, उनकी शादीशुदा जिंदगी में बोरियत, और एक मुलाकात के दौरान उनके बीच होने वाली यौन उत्तेजना और सामूहिक सेक्स के दौरान सेक्स पार्टनर अर्थात पति पत्नी की स्वैपिंग की घटनाओं का जिक्र है। यह कहानी स्पष्ट और वयस्क सामग्री से भरी है, जिसमें सामूहिक सेक्स और अन्य अंतरंग गतिविधियों का वर्णन किया गया है। कहानी का अंत चारों पात्रों के बीच एक यौन मुठभेड़ के साथ होता है, जो उनकी इच्छाओं और उत्तेजना को दर्शाता है।

नमस्ते प्रिय मित्रों, मेरा नाम बिंदु है, जिसे लोग प्यार से इंदु भी बुलाते हैं। मैं हर तरह के यौन सुख की प्रेमी हूँ, विशेष रूप से समूह सेक्स, पारिवारिक संबंध, और लेस्बियन अनुभवों में रुचि रखती हूँ। तीन साल पहले मेरी शादी विमल से हुई थी। विमल मेरी माँ की सहेली का बेटा है। वह एक व्यवसायिक कंपनी में नौकरी करता है और अक्सर दौरे पर रहता है। हमारी यौन जिंदगी ठीक-ठाक थी। शादी से पहले मैंने किसी के भी साथ अवैध सेक्स संबंध नहीं बनाये थे मैं पूरी तरह कुंवारी थी, यानी किसी पुरुष ने मुझे स्पर्श तक नहीं किया था। मेरा रंग गोरा है, कद 5 फीट 5 इंच, और शरीर भरा हुआ है। मेरी छातियाँ 36C, कूल्हे 36 इंच, और कमर 28 इंच की है। शादी से पहले मेरी एक सहेली थी, शशि, जो विमल की चचेरी बहन भी थी।

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सामूहिक सेक्स के दौरान शराब के नशे में पति पत्नी की स्वैपिंग का गंदा खेल

शशि की शादी दो साल पहले अविनाश से हुई थी। अविनाश भी एक ऐसी नौकरी करता था, जिसमें उसे अक्सर यात्राएँ करनी पड़ती थीं। शशि एक चुलबुली और आज़ाद ख्यालों वाली लड़की थी, जिसके कई पुरुषों के साथ संबंध थे। उसका ससुराल दिल्ली में था, लेकिन अब उसके पति का तबादला हमारे शहर, यानी गुरुग्राम में हो गया था। एक दिन शशि का फोन आया, “साली बिंदु, मैं तेरे शहर आ रही हूँ। खूब मज़े करेंगे। अगर विमल भैया से मन भर गया हो, तो मेरे पास कई हट्टे-कट्टे यार हैं, जो मेरी तसल्ली अच्छे से करते हैं। अगर विमल भैया के 6 इंच के लिंग से बोर हो गई हो, तो बता देना। मैं इस इतवार को पहुँच रही हूँ। मेरा पता नोट कर ले, वहीं मिलते हैं।” मैं उसकी बात सुनकर शरमा रही थी और डर थी कि कहीं विमल सुन न ले, इसलिए मैंने कहा, “अच्छा यार, मिलते हैं।”

“किसका फोन था, बिंदु?” विमल ने पूछा।
“मेरी सहेली और आपकी बहन शशि का फोन आया था। अविनाश का तबादला भी गुरुग्राम (दिल्ली) में हो गया है। जल्द ही वे यहाँ आ रहे हैं,” मैंने जवाब दिया।
अचानक मेरी नज़र विमल की पैंट के सामने वाले हिस्से पर पड़ी, जहाँ उसका लौड़ा उत्तेजित हो रहा था। “अच्छा, तब तो बढ़िया है। तेरी सहेली आएगी, तेरा मन भी बहल जाएगा। शशि बहुत हँसमुख लड़की है। हमें अच्छी कंपनी मिलेगी,” विमल ने स्वाभाविक अंदाज़ में कहा। लेकिन मुझे लगा कि वह शशि के प्रति आकर्षित हो रहा है। मेरी आँखों के सामने शशि का भरा हुआ शरीर उभर आया। मैंने कई बार विमल को शशि के कूल्हों को घूरते देखा था। इन दिनों हमारी यौन जिंदगी नीरस हो चुकी थी, लेकिन शशि का नाम सुनते ही विमल का लिंग तन गया था। खैर, देखते हैं क्या होता है।

मेरे घर में मेरी माँ और मेरा छोटा भाई संजय हैं। संजय 20 साल का है, और माँ, जिनका नाम रजनी है, 46 साल की हैं। मेरे पिताजी का देहांत हो चुका है। शशि के घर में उसका भाई जिमी और अन्य परिवारजन हैं। इतवार को मैं और विमल शशि से मिलने गए। शशि ने बहुत टाइट जींस पहनी थी, जिससे उसके कूल्हे उभरे हुए थे। नीली जींस के ऊपर उसने सफेद टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें उसकी भारी छातियाँ बाहर निकलने को बेताब थीं। उसके निप्पल कपड़े से बाहर झाँक रहे थे। “विमल भैया, आप कैसे हैं? अपनी शशि की कभी याद नहीं आई? आप तो हमें भूल ही गए लगते हैं,” कहते हुए शशि मेरे पति के गले लग गई। विमल ने भी उसे गले लगाया। दोनों ऐसे मिल रहे थे जैसे बिछड़े हुए प्रेमी हों।

अविनाश ने इसका बुरा नहीं माना और मेरी ओर बढ़ा। मैं उसकी बाहों में समा गई। “जीजा जी, आपका क्या हाल है? आपने तो कभी फोन भी नहीं किया। क्या बात है, शशि ने ऐसा क्या जादू कर दिया कि हम याद ही न रहे?” मैंने मज़ाक में कहा। अविनाश ने प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरा, “क्या बताऊँ, बिंदु, काम में इतना व्यस्त हो गया था कि समय ही नहीं मिला। अब आराम से मिलेंगे। इस हफ्ते मुझे दौरे पर जाना है, अगले हफ्ते मैं फ्री हूँ। विमल भैया, आप अगले हफ्ते फ्री होंगे? यार, पार्टी करेंगे। इससे हमारी बीवियाँ भी खुश होंगी, और हम भी दो-दो पैग पी लेंगे।”
विमल हँसकर बोला, “ठीक है, मैं भी इस हफ्ते दौरा कर लेता हूँ और अगला हफ्ता फ्री रखता हूँ।”

मैंने देखा कि विमल का हाथ शशि की छाती पर रेंग रहा था। उधर, अविनाश ने अनजाने में मेरी छाती को दबा दिया। मेरे शरीर में करंट-सा दौड़ा, और मैं काँप गई। थोड़ी देर में विमल और अविनाश शराब पीने लगे, और हम दोनों सहेलियाँ गप्पें मारने लगीं।
“अब बता, मेरी बन्नो, कोई नया यार बनाया या नहीं? या फिर सिर्फ भैया से ही चुदवाया जा रहा है? भैया तो नए शिकार की तलाश में लगे हैं। बिंदु, मेरी रानी, मर्द एक औरत से बंधकर नहीं रह सकता!” शशि ने कहा।
मैं हँसकर बोली, “और तेरी जैसी चुलबुली लड़की एक मर्द से खुश नहीं रह सकती! अब यहाँ मेरे पति को पटाने आई है? साली, याद रखना, विमल तेरा भाई भी है। कहीं अपनी आदत से मजबूर होकर मेरे पति को बहनचोद न बना दे, वरना मैं भी तेरे पति को पटा लूँगी!”
शशि ने मेरे गले में बाहें डालते हुए कहा, “बिंदु, मेरी रानी, तेरा पति तो पहले से ही बहनचोद है। न जाने कब से बहन-बहन बोलकर मेरे साथ छेड़खानी करता रहा है। अभी भी भैया मेरी छाती पर हाथ फेर रहे थे। और फिर, मर्द का कोई धर्म नहीं होता। जहाँ औरत दिखी, चोदने की योजना बना लेते हैं। अविनाश भी कम नहीं है। अगर मौका मिले, तो अभी तुझे चोद डाले। मर्द तो कुत्ते ही होते हैं, और मैं हूँ सेक्स से भरी एक कुतिया, जिसकी तसल्ली एक लिंग से नहीं हो सकती। तू बता, कोई यार बनाया या नहीं?”

मैंने बताया कि विमल के साथ सेक्स में अब वह मज़ा नहीं रहा, लेकिन मैंने अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए कोई यार नहीं बनाया। “यार, मैं तो चुदाई की भूखी हूँ। अगर तू भी पूरी औरत है, तो तेरा भी मन तरह-तरह के लंड अपनी गांड और चूत के अंदर लेने को करता होगा। हम ऐसा करेंगे कि तू अविनाश को पटा ले, और मैं विमल भैया को। एक-एक बार चुदवाकर हम स्थायी सेक्स पार्टनर स्वैपिंग का माहौल बना लेंगे अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए। जब अविनाश तुझे और विमल मुझे चोदना चाहेगा, तो हम दोनों इसे खुलेआम करने की शर्त रखेंगे। फिर तो हमारी चाँदी हो जाएगी, मेरी रानी। दिल्ली में मेरे यार रघु, जगन, वीरू, और शाहिद रहते हैं। सबके साथ तुझे ऐश करवाऊँगी। रघु और जगन का तो 10-10 इंच का लंड है। दर्दनाक चुदाई क्या होती है, तुझे पता चल जाएगा।”

मैं शशि की बात सुनकर दंग रह गई। मेरी योनि से पानी बहने लगा, और मुझे अविनाश के हाथ अब भी अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। “शशि, साली, तू बहुत गंदी है, बिल्कुल रंडी। तू विमल को पटा लेगी?”
शशि ने उत्साह में कहा, “साली, अगर शर्त लगा लो, तो 5 मिनट में विमल को बहनचोद न बना दूँ और पति पत्नी की स्वैपिंग के लिए राजी नहीं कर लूँ, तो मेरा नाम बदल देना। तू बस अपने जीजा को पटाने की सोच। मेरे पास एक योजना है। हम भी अंदर जाकर शराब पी लेते हैं और नशे का बहाना बनाकर आज ही पति बदलने का काम कर लेते हैं।”
मैंने पूछा, “वो कैसे?”
शशि बोली, “ये मुझ पर छोड़ दे।”

जब हम अंदर गईं, शशि ने शरारत से कहा, “अविनाश, हमें अपनी मेहफिल में शामिल नहीं करोगे क्या…? भैया, हमें शराब नहीं पिलाओगे?” शशि जानबूझकर अपनी गाँड मटकाती हुई विमल के सामने गई और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगी। मेरा पल्लू भी सरक गया, और अविनाश मेरी नंगी छातियों को भूखे जानवर की तरह देखने लगा।
“मेरा भी मन कर रहा है कि मैं एक पैग पी लूँ। पीना कोई मर्दों का ही अधिकार नहीं है, क्यों जीजू?” कहते हुए मैं और आगे झुक गई, जिससे मेरी छातियाँ अविनाश के सामने पूरी तरह नंगी हो गईं।

विमल ने शशि को अपनी ओर खींच लिया, और शशि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया। “मुझे कोई ऐतराज़ नहीं अगर तुम लोग पीना चाहते हो। क्यों, अविनाश, थोड़ा मज़ा हो जाए? लेकिन मेरी बहना, कहीं पीकर नशे में बेहक न जाना!” विमल ने कहा।
शशि ने अपनी बाहें विमल के गले में डालते हुए कहा, “भैया, अगर शराब के नशे में बेहक भी गई, तो क्या होगा? यहाँ मैं आपकी बहन हूँ, और बिंदु लगती है अविनाश की साली! भाई-बहन में कोई भेद नहीं होता, और साली तो होती ही आधी घरवाली है अपने जीजा की! क्यों, अविनाश?”
अविनाश हँस पड़ा और मेरे कंधों पर हाथ फेरने लगा। मेरा शरीर अब सेक्स की आग से जलने लगा था।

“भैया, हमें भी दो न। मैं गिलास ले आती हूँ,” कहकर शशि किचन में गिलास लेने चली गई। जब वह चल रही थी, विमल बेशर्मी से उसके मादक कूल्हों को निहार रहा था, और यह अविनाश भी देख रहा था।
“विमल, तू तो बड़ा बेशर्म हो गया है। अपनी बहन की गाँड घूर रहा है? साले, शशि मेरी पत्नी है! बिंदु यहाँ है, उसे देख,” अविनाश ने कहा।
विमल हँसकर बोला, “अविनाश, यार, यारों में तेरा-मेरा क्या? जो मेरा है, वो तेरा है, और जो तेरा है, वो मेरा। अब तेरी पत्नी पर मेरा भी कुछ हक है, नहीं? जब तू बिंदु को गले लगा रहा था, तो मैंने कुछ कहा? यारों में सब कुछ बाँट लिया जाता है, अगर किसी को ऐतराज़ न हो। चल, एक और पैग बना। आज का दिन यादगार बना देते हैं।”

तभी शशि आ गई और उसने दो पैग बना लिए। मैं बहुत कम पीती हूँ, और मुझे जल्दी नशा हो जाता है। शराब कड़वी थी, तो मैंने कहा, “शशि, साथ में कुछ नमकीन नहीं है? ये बहुत कड़वी है।” शशि बोली, “चल, हम किचन में जाकर अंडे फ्राई कर लेते हैं। ये भी खा लेंगे। क्यों, अविनाश, अंडे खाओगे?” अविनाश हँसकर बोला, “जानेमन, आज तो तुम लोगों को खा जाने का मन कर रहा है। अगर खिलाना ही है, तो अपने आम चुसवा लो हम दोनों से। क्यों, विमल? और तुम्हें कुछ खाना है, तो हमारे केले हाज़िर हैं!” उसकी बेशर्म बात सुनकर मैं शरम से लाल हो गई। “हाँ, खा लेंगी आपके केले भी, अविनाश। लेकिन अगर केले में दम न हुआ, तो? वैसे, मैं और बिंदु भी बहुत भूखी हैं। हम केले के साथ आपके लुकाठ भी चूस लेंगी!”

सब हँस पड़े, और मैं और शशि किचन में अंडे फ्राई करने लगीं। शशि ने मेरे ब्लाउज़ में हाथ डालकर मेरी छाती पर लटके मेरे बड़े बड़े बूब्स को मसल दिया और बोली, “बिंदु, मेरी जान, क्यों न आज ही पति बदलकर स्वाद लिया जाए? अविनाश और विमल अब नशे में हैं। हमें कुछ करने की ज़रूरत नहीं। विमल भैया तो कब से मुझे सेक्सी नज़रों से घूर रहे हैं, और अविनाश तो कल्पना में तेरे कपड़े उतार रहा है। क्यों न देखा जाए कि विमल को मैं कैसी लगती हूँ, और तुझे अविनाश का लिंग कैसा लगता है? एक बार खुल गए, तो हम बिना किसी डर के सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं। मेरी रानी, आजकल समूह सेक्स का बहुत फैशन है। खूब मज़े करेंगे!”

मेरे अंदर चुदवाने के लिए आग भड़क उठी। अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए अविनाश मुझे एक कामुक पुरुष नज़र आ रहा था, और मेरी योनि ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उत्तेजना में मैंने शशि को गले लगाया और उसके होंठ चूमने लगी। “साली, तूने मुझे आज बहुत गर्म कर दिया है। ऊपर से शराब का नशा। आज जो होना है, हो जाने दे! मुझे अपने पति के साथ चुदवाने दे, और तू मेरे पति से चुदवा ले, सखी!” कहते हुए मैंने शशि की छाती मसल दी। मेरी साँसें तेज़ चल रही थीं। मेरा अपने पर काबू नहीं रहा।

“चल, बिंदु, पहले हम कपड़े बदल लें। इससे काम आसान हो जाएगा,” शशि ने कहा। वह मुझे अपने कमरे में ले गई और सारे कपड़े उतारकर एक खुला हुआ, घुटनों तक का पजामा और बिना बाजू की शर्ट पहन ली। मुझे भी वैसी ही एक ड्रेस दे दी। पजामे और शर्ट के नीचे हम पूरी तरह नंगी थीं। मैंने देखा कि शशि ने भी मेरी तरह अपनी योनि को ताज़ा शेव किया था। जब मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज़ उतारा, तो शशि मस्ती में भर गई और मेरी योनि को मुठ्ठी में भरकर कस दिया। “अरे, मादरचोद, तू भी मेरे पति को चोदने के विचार से बहुत उत्तेजित हो गई है! अविनाश ठीक से चोदेगा तुझे, मेरी बन्नो! साली, तेरी योनि तो गंगा-जमुना बहा रही है!”

शर्ट का गला इतना नीचा था कि कल्पना की कोई ज़रूरत नहीं थी। जब मैं अंदर जाने के लिए मुड़ी, तो शशि ने मेरे कूल्हों पर ज़ोर से चाँटा मारा, जिससे मेरी चीख निकल गई। “ओह, शशि, साली कुतिया, मार क्यों रही है?” शशि शरारत से मुस्कुराते हुए बोली, “क्योंकि मेरे पति तेरी डबल रोटी जैसी गाँड पर चाँटे ज़रूर मारेंगे, और शायद तेरे पिछले हिस्से का भी उद्घाटन कर देंगे। अविनाश को भारी गाँड बहुत पसंद है!”

जब हम कमरे में गईं, तो मर्दों की आँखें खुली की खुली रह गईं। विमल के मुँह से निकला, “ओह, बहनचोद, कितनी सेक्सी हैं ये दोनों औरतें!” अविनाश बस देखता रह गया।
“यार, गर्मी बहुत थी, तो हमने कपड़े बदल लिए। पसीने से भीग रही थीं हम दोनों। तुम तो यहाँ AC में बैठे हो, हमें औरतों को किचन में काम करना पड़ता है। मेरे तो स्तनों से पसीना नीचे तक जा रहा था। ओह, बिंदु, यहाँ आराम है। बैठ जा और शराब के मज़े ले,” शशि ने कहा।

तभी विमल ने ताश उठा लिया और बोला, “चलो, ताश खेलते हैं। सबका मनोरंजन हो जाएगा। क्यों, बिंदु, खेलेगी?” मैं अब इस सेक्स के खेल में शामिल होने को तैयार थी। “विमल, यार, आज जो भी खेल खेलेगा, मैं साथ हूँ। मुझे लगता है कि आज का दिन हम भूल नहीं पाएँगे। लेकिन खेल की शर्त क्या होगी? हारने वाला जीतने वाले को कितने पैसे देगा? मेरे पास तो बस 500 रुपये हैं!”

अविनाश बोल उठा, “मेरी प्यारी साली साहिबा, अंग्रेज़ लोग एक खेल खेलते हैं, स्ट्रिप पोकर। क्यों ना वही स्ट्रिप पोकर खेला जाए? जो हारता है, उसे अपने शरीर से एक कपड़ा उतारना होगा। शशि को ये स्ट्रिप पोकर खेल पसंद है, क्यों शशि?” शशि हँस पड़ी, “यार, नंगी तो होना ही है, तो ताश के खेल में क्यों न हो जाए?” मुझे लगा कि अविनाश और विमल भी वही योजना बना चुके थे, जो मैं और शशि बना कर आई थीं। हम चारों बैठ गए, और विमल ने ताश बाँट दिए। “बिंदु, अभी से सोच ले, अगर हार गई, तो सबके सामने कपड़े उतारने पड़ेंगे और नंगी होना पड़ेगा।” मैं अब शराब के नशे में थी। “पति देव को अगर अपनी पत्नी को नंगा दिखाने में कोई शरम नहीं, तो पत्नी को क्या ऐतराज़ होगा, पति देव?”

पहली गेम विमल हारा। शशि ने आगे बढ़कर कहा, “विमल भैया की पैंट उतारी जाए, ठीक है?” हम सबने सहमति दी, और शशि ने विमल की पैंट की बेल्ट खोली और नीचे सरका दी। मेरा पति अब कच्छे में बैठा था। उसे कोई शरम नहीं थी, क्योंकि उसका लिंग तना हुआ था। शशि ने विमल की जाँघों पर हाथ फेरा, तो अविनाश बोल उठा, “शशि, मेरी रानी, विमल का तो पहले ही खड़ा है। अगर तूने हाथ फेरा, तो कहीं छूट न जाए!” सब हँस पड़े।

दूसरी गेम में शशि हारी। अविनाश ने कहा, “विमल, यार, अब तेरी बारी है। मेरी बीवी से बदला ले। मेरी मानो, तो इसका पजामा उतार दे। कम से कम अपनी बहन की योनि के दर्शन तो कर ले!” विमल मुस्कुराते हुए उठा, “ठीक है, यार, अगर तू अपनी बीवी की योनि दिखाना चाहता है, तो देख ही लेते हैं। क्यों, शशि, मेरी बहना, कहीं नीचे पैंटी तो नहीं पहन रखी?”
शशि भी बेशर्मी से बोली, “भैया, अपनी बहन की योनि देखने का शौक है, तो पजामा उतारकर ही देखना होगा। मुझे भी लगता है कि तुम बरसों से मेरी योनि के दीदार करने के इच्छुक हो। क्यों, बिंदु से दिल नहीं भरा?”

विमल ने शशि के होंठों पर चूमा और फिर पजामे का इलास्टिक खींच दिया। जब वह इलास्टिक नीचे सरका रहा था, तो उसने जानबूझकर अपनी उंगलियाँ शशि की फूली हुई योनि पर रगड़ दीं। अविनाश मुस्कुराते हुए बोला, “विमल, साले, तू हरामी का हरामी रहा। साले, शशि की योनि छूने की इजाज़त तुझे किसने दी? अपनी बहन की योनि पर हाथ फेरते हुए कैसा लगा?” शशि बोली, “अविनाश, मैं अपनी योनि पर जिसका हाथ फेरना चाहती हूँ, फेर सकती हूँ। मेरे विमल भैया से शिकायत मत करना। जब तेरी बारी आएगी, तो बिंदु पर हाथ साफ कर लेना!”

तीसरी बाज़ी अविनाश हारा। विमल ने मुझे उसकी पैंट उतारने को कहा। जब मैंने उसकी पैंट उतारी, तो वह बोला, “शशि, तेरी सहेली के हाथ से नंगा होना मज़े की बात है।” तभी मेरे हाथ अविनाश के नंगे लिंग से टकरा गए। “उई, ये क्या? आपने कच्छा नहीं पहना?” अविनाश हँस पड़ा, “क्यों, साली साहिबा, हमारा हथियार पसंद नहीं आया, जो चीख मार दी आपने चुदवाते चुदवाते? आपकी सखी तो इसकी परफॉर्मेंस से काफी खुश है!” उस बहन के लौड़े का लंड किसी नाग देवता की तरह फुँफकार रहा था। अविनाश ने जानबूझकर पैंट के नीचे कुछ नहीं पहना था। उसका लिंग विमल के लिंग से थोड़ा बड़ा था।

अगली गेम फिर शशि हार गई, और बिना कुछ बोले विमल ने उसकी शर्ट उतार दी। शशि की भारी छातियाँ सबके सामने थीं, और मेरी सखी पूरी तरह नंगी हो गई। विमल ने झुककर उसके निप्पल को चूम लिया। “बहनचोद विमल, ये फाउल है। मादरचोद, तेरी बीवी एक भी गेम नहीं हारी, और मेरी को तू नंगा कर चुका है। इतना ही नहीं, साले, अपनी बहन का दूध भी पी रहा है!” अविनाश ने कहा।
विमल बोला, “अविनाश, यार, हिम्मत है, तो मेरी बीवी को हरा और उसे नंगा कर। मुझे कोई ऐतराज़ नहीं। मेरी बीवी भी हम सबके बराबर है।”

अब मेरी बारी थी, और मैं हार गई। सब बहुत खुश हुए। “साली साहिबा, अब हमारी बारी आई। मैं भी तेरी शर्ट उतारकर तुझे नंगा करता हूँ। देखूँ तो सही कि पत्नी की छातियाँ ज़्यादा सेक्सी हैं या साली की?” अविनाश के हाथों ने पहले मेरी छातियों को अच्छे से टटोला। मेरी छातियाँ पत्थर की तरह कड़ी हो गईं। कसम से, अविनाश का हाथ लगते ही मैं पागल हो गई। मेरी शर्ट उतारकर जब उसने मेरी छाती को चूमा, तो मैं चुदासी हो गई और चाहती थी कि आज अविनाश मुझे चोद डाले। मेरी छातियाँ गुलाबी हो गईं। “ओह, अविनाश, मत करो, प्लीज़!”
अविनाश ने मेरे होंठों पर चूमा और बोला, “साली साहिबा, जब आपने हाथ लगाकर मेरे लिंग को दीवाना बनाया था, भूल गईं? अभी तो आपकी योनि को नंगा करना बाकी है।”

फिर अविनाश हारा, और विमल ने मुझे कहा, “बिंदु, डार्लिंग, अब अपने जीजा को पूरी तरह नंगा कर दो। इसकी कमीज भी उतार दो।” मैंने वैसा ही किया। अविनाश का सीना काले बालों से ढका था, और जब उसने मुझे अपने सीने से लगाया, तो मेरी कड़ी छातियाँ उसके स्पर्श से फटने को आ गईं। अविनाश ने एक हाथ मेरे पजामे में डालकर मेरी योनि को छुआ, तो मेरी सिसकारी निकल गई। मेरी योनि से पानी की धारा बह रही थी। “साली साहिबा, आपकी योनि तो पागल हुई जा रही है। क्यों न इसका इलाज मैं अपने लिंग से कर दूँ? विमल, यार, आज मेरी बात मान ले, प्लीज़। तुम शशि को चोदो, और मुझे बिंदु को चोदने दे। इतनी गर्म चुदासी मैंने आज तक नहीं देखी। अगर किसी को ऐतराज़ है, तो अभी बोल दे।”

विमल और शशि ने हाँ बोल दी। वे हैरान हुए जब मैंने कहा, “मुझे ऐतराज़ है, जीजा जी! मुझे आज की पार्टनर बदलने की योजना पर ऐतराज़ है। अगर करना ही है, तो फैसला हो जाए कि ये व्यवस्था हमेशा के लिए होगी। हम चारों आपस में किसी के साथ भी, जब चाहें, जो करना हो, कर सकते हैं। अगर मंज़ूर है, तो बोलो।”
अविनाश ने मेरी छाती को चूमते हुए कहा, “साली साहिबा, आपने तो मेरे मन की बात कर दी। लेकिन शायद विमल को रोज़-रोज़ अपनी बहन चोदना पसंद न आए।”
विमल ने शशि को अपनी गोद में उठाते हुए कहा, “अगर ये प्रोग्राम अच्छा है, तो इसमें ऐतराज़ क्यों? चलो, एक और पैग बनाओ हमारे इस नए रिश्ते के लिए। आज पता चल जाएगा कि घर की चूत कितनी स्वादिष्ट होती है।”

शशि उठी और पैग बनाकर ले आई। अविनाश ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, और शशि विमल की गोद में जा बैठी। विमल के सिवा हम सब नंगे थे। अविनाश का लिंग मेरी गाँड में घुसने की कोशिश कर रहा था। मैंने देखा कि विमल शशि की योनि को हाथों से रगड़ रहा था। जब उसके गिलास से कुछ शराब शशि की छाती पर गिरी, तो विमल उसे चाटने लगा। “ओह, मेरे भाई… ये क्या कर रहे हो… मैं तो कब से जल रही हूँ… चूस लो मेरी छातियाँ… आह… चूसो, भैया… मैं मर गई… मेरी योनि एक शोला बनी हुई है… बस करो, भैया… अब नहीं रहा जाता… पेल दो अपना पापी लिंग अपनी बहन की योनि में… मैं मरी… ऊफ… भैया, चोद डालो मुझे… ओह, बहनचोद!”

अविनाश ने अब शराब अपने लंड के सुपाड़े पर गिराई और मुझे चाटने को कहा। उसका सुपाड़ा उछल रहा था। जब मैं उसे चाटने के लिए झुकी, तो उसने लिंग मेरे मुँह में डाल दिया। मैंने आँखें बंद कर लिंग चूसना शुरू कर दिया और उसके अंडकोष को हाथों में लेकर मसलने लगी। अविनाश मेरे मुँह को किसी योनि की तरह चोदने लगा। “ओह, बहनचोद, बिंदु… बिल्कुल रंडी है तू… मेरी पत्नी जैसी रंडी, जो अपने भाई से चुदवाने को तड़प रही है… आह… रुक जा, वरना मैं झड़ जाऊँगा… तेरी माँ की चूत, साली, बस कर!” मैं भी अविनाश को झड़ने नहीं देना चाहती थी, इसलिए रुक गई। विमल ने कहा, “हमें हमारे डबल बेड पर जाकर एक साथ चुदाई शुरू करनी चाहिए। वहाँ मैं तुझे अपनी बहन को चोदते देखना चाहता हूँ, चाहे वह मेरी बीवी ही क्यों न हो!”

विमल ने नंगी शशि को अपनी बाहों में उठाया और उसे बेड पर ले गया। अविनाश ने मुझे उठाया, और मैं और शशि साथ-साथ नंगी बेड पर लेट गईं। दोनों मर्दों के लिंग रॉड की तरह खड़े थे। “साली साहिबा, मैं तुझे घोड़ी बनाकर चोदना चाहता हूँ, क्योंकि तुम्हारी गाँड मुझे बहुत सेक्सी लगती है। मैं अपना लिंग पीछे से तुम्हारी योनि में जाता हुआ देखना चाहता हूँ,” अविनाश ने कहा। सामूहिक सेक्स के दौरान मैं अपने मर्द के हुक्म की पालना करते हुए डॉगी सेक्स पोजीशन में चुदने के लिए घोड़ी बन गई और हाथों व घुटनों पर झुक गई।

“हाँ, मेरे हरामी पति देव, मैं जानती थी, तू यही करेगा! अब मेरी सहेली की गाँड भी चाट ले, क्योंकि तुझे उसकी गाँड में भी घुसना है थोड़ी देर बाद!” शशि बोली और फिर विमल की ओर मुड़ी, “मुझे क्या हुक्म है, भैया? मुझे भी घोड़ी बनाओगे क्या डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदने के लिए ? अगर घोड़ी बनाओगे, तो भी ठीक है, क्योंकि कम से कम बहनचोद बनते वक्त बहन की शक्ल नहीं देख पाओगे!”

विमल ने कहा, “बहना, बहनचोद रोज़-रोज़ तो नहीं बनता। कब से तमन्ना थी तुझे अपनी रंडी बनाकर चोदने की। पहली बार तो देखना चाहता हूँ कि मेरी बहना भी अपने भैया से चुदाई के लिए तैयार है? मेरी लाडो बहना, मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे ऊपर चढ़कर मुझे बहनचोद बनाओ। मैं अपनी बहन की योनि में अपना लिंग जाता हुआ देखना चाहता हूँ। लेकिन पहले एक बार अपनी योनि मेरे मुँह से लगाकर अपनी नमकीन चूत का स्वाद तो चखा दे, मेरी बहना। अपनी चूत मेरी ज़ुबान पर रख दे, प्लीज़।”

विमल लेट गया, और शशि उसके ऊपर चढ़कर अपनी चूत चटवाने लगी। अविनाश ने पीछे जाकर एक उंगली शशि की गाँड में डाल दी और उसे उंगली से चोदने लगा। “अविनाश, मादरचोद, हट जा… साले, तुझे बिंदु जैसी हसीन औरत मिली है, और तू हमें भाई-बहन को आराम से चुदाई नहीं करने दे रहा। लगता है, किसी दिन भैया से तेरी गाँड मरवानी पड़ेगी मुझे,” शशि ने कहा।

सामूहिक सेक्स के लिए और पति पत्नी स्वैपिंग के लिए अब असली मंच सज चुका था। अविनाश मेरे पीछे झुका और अपनी ज़ुबान मेरी गाँड में घुसाकर मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा। मेरी गाँड आज तक कुंवारी थी। गांड चटवाते वक्त एक नया आनंद मेरे कामुक शरीर में दौड़ रहा था। उधर, शशि अब उठी और अपनी दोनों जाँघें फैलाकर विमल के लिंग पर सवार होने लगी। विमल ने अपने हाथ उसकी छातियों पर कस दिए, और शशि ने उसका लिंग हाथ में पकड़कर अपनी योनि पर रखा और नीचे होने लगी।

अविनाश ने भी गाँड चाटना बंद किया और मेरे ऊपर चढ़ गया। अविनाश के लंड का सुपाड़ा किसी आग के शोले जैसा गर्म था। उसने मेरे कूल्हों को फैलाया और जाँघों के बीच से अपना गरमा गर्म लंड मेरी टाइट चूत में पेल दिया। “आ… भैया… अंदर जा रहा है तेरा लिंग… ओह, बहनचोद बन गए तुम, विमल भैया… तेरी बहन चुद रही है तुझसे आज… शाबाश, मेरे भाई!” लगता था कि विमल का लिंग शशि की योनि की जड़ तक समा गया था। अविनाश का सुपाड़ा भी मेरे अंदर जा चुका था, और मैं आनंद सागर में गोते लगा रही थी। “उर्र्र… डाल दो, जीजा… चोद लो अपनी साली को… मादरचोद, एक ही बार में घुसा दो, जीजा… मत रोको… पेलो मुझे… ऊस्स्स्सी… मर गई मेरी माँ… आ… पेलो, जीजा!”

अविनाश ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर पेल दिया। उसका लंड मेरी टाइट चूत में बूरी तरह फिट हो गया, और वह मुझे डॉगी सेक्स पोजीशन में बुरी तरह चोदने लगा। मैं भी अपनी कमर उछालकर अपनी गाँड उसके लिंग पर मारने लगी। सामूहिक सेक्स के दौरान पूरा कमरा फच-फच की आवाज़ों से गूँज उठा। एक बेड पर हम चार लोग नंगे होकर जन्नत की सैर कर रहे थे। विमल ने अपनी बहन के कूल्हे जकड़ लिए और नीचे से चोदने लगा। अविनाश भी अब एक कुत्ते की तरह हाँफ रहा था। “अविनाश, मादरचोद, थक गए? देखो, मेरा पति कैसे चोद रहा है तेरी पत्नी को? तुझमें दम नहीं है क्या? साले, चोद अपनी साली साहिबा को ज़ोर से… ज़ोर से… अंदर तक पेल अपना लिंग, जीजा!”

सामूहिक सेक्स के दौरान अविनाश ने मेरे बाल पकड़ लिए और घोड़े की लगाम की तरह खींचकर मुझे चोदने लगा। अब उसका लिंग मेरी कोख से टकराने लगा। बगल में अपनी सहेली और अपने पति को देखकर मेरी उत्तेजना की कोई सीमा न रही, और मैं झड़ने लगी। “ओह, ज़ोर से चोदो… मैं झड़ रही हूँ… अविनाश, चोद मुझे… आह… मैं झर रही हूँ!” अविनाश ने भी धक्के तेज़ कर दिए। मुझे लगा कि वह भी मंज़िल के करीब है। अचानक लिंग रस की गर्म धारा मेरी योनि में गिरने लगी, और मेरा योनि रस अविनाश के लिंग रस से मिल गया। उधर, शशि ने एक चीख मारी और विमल पर ढेर हो गई। हम चारों झड़ चुके थे। यह एक ऐसी रात थी, जिसने हम चारों के बीच की सीमाओं को तोड़ दिया और हमें एक नई, खुली सामूहिक सेक्स की दुनिया में ले गई।

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