HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesमम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला

मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला

मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- यह एक कामुक हिंदी सेक्स कहानी है जिसमें एक जवान लड़की अपनी जिज्ञासा के चलते मम्मी-पापा के निजी पलों की झलक पाती है। रात के सन्नाटे में घर की दीवारें गुप्त राज़ खोलती हैं, और वह लड़की धीरे-धीरे वासना की उस आग में खींची चली जाती है जो उसके अपने शरीर को जला देती है। कहानी में परिवार की साधारण ज़िंदगी के पीछे छिपी तीव्र कामुकता को बेहद संवेदनशील और उत्तेजक तरीके से दर्शाया गया है, जहाँ हर साँस, हर स्पर्श और हर आवाज़ पाठक के मन में lust की लहरें पैदा करती हैं।

दूसरे हिस्से में लड़की की आंतरिक उथल-पुथल, उसकी पहली बार महसूस की गई कामेच्छा और शरीर की हर कोशिका में दौड़ती गर्मी का वर्णन है। यह कहानी न केवल शारीरिक सुख की गहराई दिखाती है बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और निषिद्ध इच्छाओं के बीच के संघर्ष को भी उजागर करती है। बिना कुछ स्पॉइल किए, बस इतना कहूँगी कि यह पढ़ते हुए आपका शरीर खुद-ब-खुद गरम हो जाएगा और आप खुद को कहानी की हीरोइन की जगह महसूस करेंगे।


Mummy Papa ki chudai dekhkar maine apna poora haath chut mein daala :- मैं प्रिया शर्मा हूँ, उम्र बाईस साल, दिल्ली के एक पुराने मकान में रहती हूँ अपने मम्मी-पापा के साथ। पापा का नाम राजेश शर्मा है, वो एक सरकारी दफ्तर में नौकरी करते हैं, लम्बे-चौड़े, गेहुँआ रंग, मर्दाना कद-काठी। मम्मी का नाम संगीता है, घर संभालती हैं, गोरी-चिट्टी, भरी-भरी बॉडी, बड़े-बड़े चुचे और गोल-गोल चूतड़ जो साड़ी में भी हिलते दिखते हैं। मैं कॉलेज में पढ़ती थी उस वक्त, लेकिन घर पर अकेले में अक्सर अपनी वर्जिन चूत में उंगली डालकर मुठ मारती थी, क्योंकि मेरी चूत हमेशा रसदार रहती थी। मुझे नहीं पता था कि एक दिन मैं अपनी आँखों से मम्मी-पापा की असली चुदाई देखूँगी और मेरी चूत इतनी गीली हो जाएगी कि मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी।

फ्री पढ़ें मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला Mummy Papa ki chudai dekhkar maine apna poora haath chut mein daala
Free 18+ Sex Story for Adults – Mummy Papa ki chudai dekhkar maine apna poora haath chut mein daala

उस रात की बात है, गर्मी का मौसम था, जून की रात। डिनर के बाद मैं अपने कमरे में थी, फोन पर कुछ देख रही थी। अचानक मुझे नीचे से कुछ अजीब आवाज़ें आईं – जैसे कोई सिसकारी, कोई धप्प-धप्प की थाप। मैं चौंकी, क्योंकि मम्मी-पापा का कमरा ठीक मेरे कमरे के नीचे था। मैं धीरे से बिस्तर से उठी, दरवाज़ा खोला और सीढ़ियाँ उतरने लगी। घर पुराना था, छत पर एक रोशनदान था जो उनके कमरे की खिड़की के पास खुलता था। मैंने सोचा शायद कोई चोर वगैरह, लेकिन जैसे-जैसे पास गई, आवाज़ें साफ हुईं – “आह… राजेश… धीरे… बहुत तेज़ कर रहे हो…” मम्मी की आवाज़ थी, दबी-दबी लेकिन कामुक।

मैं छत पर चढ़ गई, बहुत धीरे-धीरे, क्योंकि रोशनदान से झाँकने की आदत मुझे पहले से थी – कभी मम्मी के कपड़े बदलते देख लिया था, पापा का तना हुआ लंड देखा था नहाते वक्त। लेकिन आज कुछ अलग था। रोशनदान से झाँका तो कमरे में हल्की लाइट जली थी, बल्ब की पीली रोशनी। मेरी प्यारी मम्मी बिस्तर पर पूरी नंगी लेटी थीं, पैर फैलाए, और पापा उनके ऊपर थे, अपना मोटा काला लौड़ा मम्मी की चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहे थे। पापा का लंड सचमुच घोड़े जैसा था – नौ इंच लम्बा, चार इंच मोटा, साँप की तरह मुड़ा हुआ, नसें उभरी हुईं। मम्मी की चूत बालों वाली थी, काली झांटें, लेकिन रस से भीगी हुई, चूत का रस लंड पर चिपक रहा था।

चुदाई के हर धक्के के साथ “थप… थप… चप… चप…” की आवाज़ आ रही थी, मम्मी के बोबे हिल रहे थे, बड़े-बड़े दूधिया चुचे, गुलाबी निप्पल तने हुए। पापा एक हाथ से मम्मी का बोबा दबा रहे थे, दूसरा हाथ कमर पर रखकर ज़ोर-ज़ोर से चोद रहे थे। मम्मी की आँखें बंद थीं, मुँह से निकल रहा था, “उफ्फ… आह… राजेश… बहुत मोटा है तेरा लंड… मेरी चूत फट जाएगी…” मैं वहाँ खड़ी देखती रह गई, मेरी अपनी चूत में खुजली होने लगी, पैंटी गीली हो गई। मैंने धीरे से अपनी सलवार उतारी, उंगली चूत में डाल ली और देखते-देखते मुठ मारने लगी।

रोशनदान से मम्मी-पापा की गरम चुदाई की पहली झलक ने मुझे पागल बना दिया

पापा ने अचानक मेरी माँ चोदने की रफ्तार बढ़ा दी, मम्मी की जोर से चीख निकल गई चुदते चुदते, “आह… मादरचोद… धीरे… बहनचोद… मेरी भोसड़ी फाड़ ही दोगे क्या आज!” लेकिन पापा नहीं रुके, बोले, “साली रंडी, आज तेरी चूत को अच्छे से चोदूँगा, तेरी टाइट बुर को ढीला कर दूँगा।” मम्मी हँस दीं, बोलीं, “हरामी, तेरा लौड़ा तो हमेशा खड़ा रहता है, सुवर की औलाद।” यह सुनकर मैं और उत्तेजित हो गई, मेरी उंगली तेज़ी से चूत के अंदर-बाहर हो रही थी, चूत का रस मेरी जाँघों पर बह रहा था। पापा ने मम्मी को पलटा, अब कुत्ते की तरह चोदने लगे, मम्मी घोड़ी बनीं, गांड ऊपर उठाई, पापा पीछे से लंड पेल रहे थे।

चुदाई के हर धक्के में मेरी नंगी मम्मी की गांड जोर जोर से हिल रही थी, गोल-मटोल चूतड़, बीच में गुलाबी गांड का छेद दिख रहा था। पापा ने एक उंगली गांड में डाल दी, मम्मी चीखीं, “आह… भोसड़ीके… गांड में क्या कर रहा है… लंड ही काफी है।” लेकिन पापा हँसे, बोले, “आज तेरी गांड भी मारूँगा, रंडी।” मैं यह सब देख रही थी, मेरी सिसकियाँ निकल रही थीं, मैंने तीन उंगलियाँ अपनी चूत में डाल लीं, इतनी गीली थी कि पूरा हाथ अंदर जा सकता था। मेरे निप्पल तने हुए थे, मैंने दूसरा हाथ से अपने बोबे मसलने शुरू कर दिए।

फिर पापा ने मम्मी को ऊपर चढ़ाया, मम्मी अब पापा के लंड पर सवार हो गईं, लंड पूरा चूत में गायब, मम्मी ऊपर-नीचे उछल रही थीं, बोबे लहरा रहे थे। “आह… आह… कितना मज़ा आ रहा है… चोद मुझे… ज़ोर से…” अब मम्मी खुद चुदवा रही थीं, उनकी चूत से चिपचिपा रस टपक रहा था पापा की गोटों पर। मैंने अपना पूरा मुक्का चूत में घुसेड़ लिया, इतनी उत्तेजना थी कि मैं झड़ने वाली थी। अचानक मम्मी की चीख गूँजी, “आह… झड़ रही हूँ… मेरा रस निकल रहा है…” और उनका शरीर काँपने लगा।

यह देखकर मेरी भी चूत सिकुड़ने लगी, मैंने रगड़ते हुए झड़ गई, मेरी चूत से फव्वारा सा निकला, रस छत पर गिरा। लेकिन मैं रुकी नहीं, फिर से उंगली डाल ली, क्योंकि पापा अभी भी चोद रहे थे। पापा बोले, “अब तेरी गांड मारता हूँ, कुत्तिया।” मम्मी ने मना किया, लेकिन पापा नहीं माने, लंड चूत से निकाला, गीला-गीला, मम्मी की गांड पर रगड़ा और धीरे से अंदर पेल दिया। मम्मी की चीख पूरे कमरे में गूँजी, “आह… मादरचोद… फाड़ दी गांड…”

पापा ने मम्मी की टाइट गांड में अपना मोटा लौड़ा पेलकर उन्हें रंडी बना दिया

गांड मारते वक्त पापा के धक्के इतने ज़ोरदार थे कि बिस्तर हिल रहा था। मम्मी अब दर्द और मज़े दोनों में सिसक रही थीं, “आह… हरामी… धीरे… तेरा लंड बहुत मोटा है… मेरी गांड का छेद फट जाएगा…” लेकिन पापा बोले, “चुप रंडी, तेरी गांड तो पहले से ढीली हो चुकी है, कितनों ने मारी है?” मम्मी हँसीं, बोलीं, “बस तेरा ही लौड़ा खाती हूँ, बहनचोद।” मैं यह सब सुन रही थी, मेरी चूत फिर गीली हो गई, मैंने छत की रेलिंग पर अपनी चूत रगड़नी शुरू कर दी, कल्पना कर रही थी कि पापा का लंड मेरी गांड में है।

पापा ने स्पीड बढ़ाई, उनकी गोटें मम्मी की चूतड़ों से टकरा रही थीं, “थपाक… थपाक…” की आवाज़। मम्मी अब मज़े ले रही थीं, बोलीं, “हाँ… चोद… गांड चोद मेरी… बना दे मुझे अपनी वेश्या…” पापा ने उनके बाल पकड़े, पीछे से झुकाकर और ज़ोर से चोदा। मैं रेलिंग पर अपनी चूत और गांड दोनों रगड़ रही थी, मेरे निप्पल रेलिंग से छू रहे थे, इतना मज़ा कभी नहीं लिया था। मेरी सिसकियाँ दबा रही थीं, कहीं मम्मी-पापा सुन न लें।

फिर पापा ने लंड निकाला, मम्मी को घुमाया और मुँह में दे दिया। मम्मी ने लंड चूसना शुरू किया, पूरा गीला लंड, चूत और गांड का रस लगा हुआ, मम्मी चाट रही थीं, “चटक… चटक…” की आवाज़। पापा बोले, “लंड चूस अच्छे से, रंडी, जैसे कॉल गर्ल चूसती है।” मम्मी ने गोटें मुँह में लीं, जीभ से चाटा। मैं यह देखकर पागल हो गई, मैंने अपनी उंगलियाँ मुँह में डालकर चूसने लगी, कल्पना कर रही थी पापा का लंड मेरे मुँह में है।

अब पापा ने मम्मी को फिर लिटाया, पैर ऊपर उठाकर चोदना शुरू किया। मम्मी की चूत पूरी खुली हुई थी, लाल-लाल भोसड़ी, रस से चिपचिपी। माँ की भोसड़ी में पापा का लंड तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था, मम्मी चीख रही थीं, “आह… चोद… ज़ोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे…” मैंने फिर मुट्ठी मारी (Masturbation), इस बार इतनी ज़ोर से कि मेरी टाँगें काँपने लगीं। पापा की साँसें तेज़ हो रही थीं, बोले, “अब माल छोड़ता हूँ, तेरी चूत में वीर्य भर दूँगा।”

पापा का गरम वीर्य मम्मी की चूत में छोड़ते देख मैं खुद तीन बार झड़ गई

पापा ने आखिरी धक्के मारे, उनका शरीर अकड़ गया, और ज़ोर से गरजते हुए बोले, “ले रंडी… ले मेरा माल…” पापा का लंबा मोटा लंड मेरी नंगी माँ की टाइट चूत में पूरा अंदर तक घुसा हुआ था, वीर्य की पिचकारियाँ मम्मी की चूत में गिर रही थीं। मम्मी भी चीखीं, “आह… गरम है… भर दे मुझे…” उनका शरीर काँप रहा था, चौथी बार झड़ रही थीं। मैंने यह देखते ही अपनी चूत पर इतना दबाव डाला कि मेरा रस फव्वारे की तरह निकला, मेरी चूत सिकुड़-सिकुड़ कर झड़ रही थी।

उसके बाद पापा लंड निकालकर मम्मी के बोबों पर रगड़ने लगे, बचा हुआ वीर्य मेरी माँ की बड़ी भारी चूचियों पर गिरा। मम्मी ने उंगली से उठाकर मेरे पापा का वीर्य चाटा, बोलीं, “कितना चिपचिपा माल है तेरा…” पापा हँसे, मम्मी को किस किया। मैं वहाँ से धीरे से हट गई, अपने कमरे में आई और बिस्तर पर गिर पड़ी। मेरी चूत अभी भी धड़क रही थी, मैंने फिर उंगली डाली और सोचते हुए फिर झड़ गई। उस रात मैंने तीन बार मुठ मारी, सिर्फ मम्मी-पापा की चुदाई याद करके।

अगले दिन सुबह मैंने मम्मी को देखा, वो सामान्य थीं, लेकिन उनकी चाल में कुछ अलग था, जैसे गांड में दर्द हो। पापा ऑफिस चले गए। मैं अकेली थी, फिर से उस रात की याद आई, मैंने अपने कमरे में कपड़े उतारे और आईने के सामने अपनी चूत देखी – बालों वाली, रसदार, टाइट। मैंने सोचा, काश पापा का लंड मेरी चूत में होता। लेकिन मैं डर भी रही थी। शाम को फिर वही हुआ, रात को आवाज़ें आईं।

इस बार मैं तैयार थी, छत पर गई, फोन साथ लिया ताकि रिकॉर्ड कर सकूँ। आज मम्मी-पापा और गरम थे। पापा ने मम्मी को दीवार से सटाकर चोदा, मम्मी का एक पैर ऊपर उठाया हुआ। पापा का लंड सीधा मेरी नंगी माँ की चूत में, ज़ोर-ज़ोर के धक्के। मम्मी बोलीं, “आज तो जैसे जानवर बन गए हो… चोदो मुझे जैसे वेश्या को चोदते हैं।” मैं फिर मुठ मारने लगी।

दूसरी रात मम्मी को दीवार से सटाकर चोदते देख मेरी चूत पानी-पानी हो गई

पापा ने मम्मी के निप्पल चूसे, बोबों को काटा, मम्मी सिसक रही थीं। फिर मम्मी ने पापा का लंड चूसा, गोटें मुँह में लीं, पूरा लंड गले तक उतारा। पापा बोले, “कितनी अच्छी लंडचूस है तू, साली छिनाल।” मम्मी हँसीं, और चूसती रहीं। मैंने अपनी चूत में चार उंगलियाँ डाल लीं, इतना रस था कि चपचप की आवाज़ आ रही थी। फिर पापा ने मम्मी को गोद में उठाया, खड़े-खड़े चोदा। मम्मी के पैर पापा की कमर पर लिपटे, लंड चूत में धँसा हुआ।

यह देखकर मैं पागल हो गई, मैंने छत पर लेटकर अपनी गांड में भी उंगली डाल ली। कल्पना कर रही थी कि मैं मम्मी की जगह पापा के लंड से चुदवा रही हूँ। पापा ने मम्मी को बिस्तर पर पटका, 69 पोजीशन में आ गए। पापा मम्मी की चूत चाट रहे थे, मम्मी लंड चूस रही थीं। चूत चाटने की आवाज़ “चर्प… चर्प…” आ रही थी। मम्मी की चीखें, “आह… जीभ अंदर डाल… चाट मेरी भोसड़ी…” मैंने अपनी चूत खुद चाटने की कोशिश की, लेकिन नहीं पहुँच पाई, बस उंगलियाँ तेज़ कीं।

फिर पापा ने मम्मी की गांड फिर मारी घोड़ी बनाकर, इस बार आसानी से घुस गया। मम्मी अब मज़े ले रही थीं, बोलीं, “हाँ… गांड मार… दोनों छेद भर दे…” पापा दोनों में बारी-बारी लंड डाल रहे थे। मैंने रेलिंग पर चूत रगड़ते हुए दो बार झड़ लिया। आखिर में पापा ने मम्मी के मुँह में माल छोड़ा, मम्मी ने सब पी लिया। मैंने फोन पर सब रिकॉर्ड कर लिया।

उसके बाद कई रातें ऐसी ही बीतीं। मैं हर बार देखती, मुठ मारती, कभी-कभी दिन में भी उस देसी पोर्न वीडियो को देखकर चुदाई की कल्पना करती। मेरी चूत अब और भूखी हो गई थी, मैं चाहती थी असली लंड से चुदवाना। लेकिन मैं डरती थी। एक दिन पापा ने मुझे शक की नज़र से देखा, जैसे उन्हें पता चल गया हो। लेकिन कुछ कहा नहीं।

हर रात छिपकर देखते हुए मैं खुद सेक्स की दीवानी बनती चली गई

धीरे-धीरे मेरी हिम्मत बढ़ी। एक रात मैं कमरे के दरवाज़े से झाँकने लगी, रोशनदान से नहीं। दरवाज़ा थोड़ा खुला था। आज मम्मी-पापा और जोरदार चुदाई कर रहे थे। पापा नंगी माँ को रंडी की तरह चोद रहे थे, गन्दी-गन्दी गालियाँ दे रहे थे, “ले साली… ले मेरे लौड़े की मार… तेरी चूत को फाड़ दूँगा।” मम्मी चीख रही थीं, मज़े में। मैं दरवाज़े के पास खड़ी मुठ मार रही थी। अचानक पापा की नज़र दरवाज़े पर पड़ी, मुझे देख लिया।

मैं डर गई, भागने लगी, लेकिन पापा ने आवाज़ लगाई, “प्रिया बेटी… रुको…” पापा की आवाज सुनकर डर के मारे मैं रुक गई। मम्मी भी चौंकीं, लेकिन पापा ने उन्हें चुप कराया। पापा लंड बाहर निकालकर मेरे पास आए, लंड अभी भी खड़ा, चिपचिपा। बोले, “कब से देख रही हो बेटी अपने पापा-मम्मी को चुदाई करते हुए?” मैं शर्मा गई, लेकिन मेरी चूत और गीली हो गई। पापा ने मुझे अंदर बुलाया। मम्मी ने कुछ नहीं कहा, बस पहले मुझे फिर पापा की तरफ देखकर मुस्कुराईं।

पापा ने मेरे कपड़े उतारे, मेरी चूत देखी, बोले, “कितनी टाइट है मेरी प्यारी बेटी तेरी सील पैक वर्जिन बुर… तेरी छिनाल मम्मी की चूत से भी ज्यादा रसदार।” मैं काँप रही थी, लेकिन उत्तेजना में। पापा ने मुझे बिस्तर पर लिटाया, मम्मी पास बैठी देख रही थीं। पापा ने अपने लंड को थूक लगाने के बाद मेरी चूत पर रगड़ा, मैं सिसकी, “पापा… धीरे…” लेकिन पापा ने एक झटके में अपना दौड़ा मेरी वर्जिन चूत के अंदर पेल दिया। जीवन की पहली चुदाई होने की बजह से कुछ देर तक दर्द हुआ और खून भी निकला मगर बाद में मज़ा आने लगा। और मैं पापा को कहते लगी “हाँ पापा और जोर से… आह… पापा… चोदो मुझे…”

मम्मी बोलीं, “चोद इसे अच्छे से, इसकी चूत की प्यास बुझा दे।” पापा ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया, मेरी फटी हुई चूत से खून और रस दोनों निकले। मैं चीख रही थी, “आह… मादरचोद पापा… कितना मोटा लंड है… फाड़ दो मेरी चूत…” उस रात पापा ने मुझे तीन बार चोदा, मम्मी भी शामिल हो गईं, मेरे बोबे चूसे, चूत चाटी।

आख़िरकार पापा का लंड मेरी चूत में घुसा और मैं रंडी बन गई

उसके बाद हम तीनों की सामूहिक चुदाई शुरू हो गई। हर रात ग्रुप सेक्स, कभी मैं पापा का लंड चूसती, मम्मी चूत चटवातीं। कभी पापा मेरी गांड मारते, मम्मी देखतीं। मैं सेक्स की दीवानी बन गई, मेरी चूत हमेशा भूखी रहती। मम्मी-पापा भी खुश थे, घर में अब खुलकर चुदाई होती। मैंने कॉलेज छोड़ दिया, बस घर पर रहकर चुदाई करती।

कभी-कभी हम तीनों नंगे घूमते, पापा का लंड हम माँ-बेटी दोनों की चूत में बारी-बारी जाया करता। मम्मी मुझे सिखातीं, कैसे पापा का लंड चूसना है, एनल सेक्स के दौरान कैसे गांड हिलानी है। मैं उनकी रंडी बन गई, पापा के लंड की गुलाम। आज भी जब याद करती हूँ, मेरी चूत गीली हो जाती है।


मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैंने अपना पूरा हाथ चूत में डाला अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Mummy Papa ki chudai dekhkar maine apna poora haath chut mein daala :- इस 18+ सेक्स कहानी के अंत में प्रिया पूरी तरह बदल चुकी थी – एक साधारण लड़की से कामुक औरत बन गई थी जो अपनी वासना को खुलकर जीती थी। मम्मी-पापा के साथ उसके रिश्ते में एक नया आयाम जुड़ गया, जहाँ प्यार और चुदाई दोनों साथ-साथ थे।

भावनात्मक रूप से वह और मजबूत हुई, अपनी इच्छाओं को स्वीकार किया और जीवन को पूरे मज़े से जिया। यह कहानी बताती है कि निषिद्ध इच्छाएँ भी अगर सही तरीके से पूरी हों तो जीवन को और रंगीन बना देती हैं। पाठकों, अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो अपनी फंतासियाँ शेयर करें, शायद आपकी भी कोई ऐसी याद हो जो आपको गरम कर देती हो। चुदाई का मज़ा लीजिए, ज़िंदगी छोटी है।

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