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छाती पर बैठकर मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा

छाती पर बैठकर मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा लिया भांजे ने गँव में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश: यह कामुकता से भरी अन्तर्वासना कहानी एक युवक, रवि, की है जो गर्मी की छुट्टियों में अपनी नानी के गाँव जाता है। वहाँ उसकी मुलाकात अपनी खूबसूरत मामी, सावित्री, से होती है, जिनके बड़े-बड़े, रसीले स्तन और घाघरा-चोली में ढका बदन उसे पागल कर देता है। एक दिन, जब घर खाली होता है, सावित्री के ब्लाउज के बटन टूटने से शुरू हुई घटना अनैतिक और कामुक रिश्ते में बदल जाती है।

इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी में मामी और उसके भांजे का जंगली चुंबन, गंदी गालियाँ, और कई कामसूत्र पोजीशन जैसे घोड़ी (Doggy Style), मिशनरी, 69 मुखमैथुन, और स्पून्स में तीव्र चुदाई के दृश्य हैं। रवि और सावित्री की वासना, शर्म, और हास्य से भरी यह कहानी गाँव की पृष्ठभूमि में बुनती है, जिसमें सावित्री का दूधमुँहा बच्चा अनजाने में उनकी हरकतों का गवाह बनता है। यह कहानी पूरी तरह मौलिक है, जिसमें हर दृश्य विस्तार से वर्णित है, और यह पाठकों में गहरी उत्तेजना जगाने के लिए लिखी गई है।


कामुकता भरी हिंदी सेक्स कहानी की शुरुआत :- मेरा नाम रवि है। उम्र 22 साल। गर्मी की छुट्टियों में मैं अपनी नानी के गाँव, सूरजपुर, गया था। सूरजपुर एक छोटा-सा गाँव है, जहाँ खेतों की हरियाली और मिट्टी की सोंधी खुशबू मन को सुकून देती है। लेकिन इस बार सुकून से ज्यादा कुछ और ही हुआ। मेरी नानी के साथ मेरे मामा, राजू, उनकी पत्नी, सावित्री, और उनका एक साल का दूधमुँहा बच्चा, छोटू, रहता था। मामा खेतों में काम करते थे, और नानी अक्सर पड़ोसियों के साथ गपशप में व्यस्त रहती थीं। लेकिन मेरी नजरें बार-बार सावित्री मामी पर अटक जाती थीं।

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छाती पर बैठकर मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा लिया भांजे ने गँव में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी The nephew enjoyed fucking the big boobs of the aunt by sitting on her chest in the village. Antarvasna Hindi sex story
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सावित्री मामी, उफ्फ! क्या बताऊँ? उनकी उम्र होगी कोई 28 साल। रंग गोरा, चेहरा गोल, और आँखें ऐसी कि मानो काजल से भरी तलवारें हों। उनका बदन, हाय! घाघरा-चोली में उनका हर अंग जैसे बोलता था। खासकर उनके बूब्स। बड़े-बड़े, भारी, और रसीले, जैसे दो पके खरबूजे। जब वो चलती थीं, तो उनकी चोली में कैद वो उछलते स्तन मानो मुझे बुलाते थे। उनका घाघरा कमर से नीचे बंधा था, और उनके मोटे-मोटे कूल्हे हर कदम पर लहराते थे। मैं शहर से आया था, लेकिन गाँव की इस माल को देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था।

जंगली चुंबन और वासना की शुरुआत

एक दिन दोपहर का वक्त था। गर्मी अपने चरम पर थी। नानी पड़ोस में गई थीं, और मामा खेत में। घर में सिर्फ मैं, सावित्री मामी, और उनका बच्चा छोटू था। छोटू अपनी चारपाई पर लेटा सो रहा था। मैं आँगन में बैठा एक पुरानी किताब पढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरी आँखें बार-बार मामी की ओर जा रही थीं। वो झाड़ू लगा रही थीं। उनका घाघरा थोड़ा ऊपर उठा था, और उनकी गोरी टाँगें साफ दिख रही थीं। उनकी चोली इतनी टाइट थी कि उनके बूब्स जैसे बाहर आने को बेताब थे।

जैसे ही मेरी सेक्सी माल मामी झुकीं वैसे ही अचानक से उनकी चोली के बटन टूट गए। “टक-टक-टक!” तीनों बटन फर्श पर बिखर गए। मेरी मामी के बड़े-बड़े, रसीले बूब्स लपककर मेरी आँखों के सामने आ गए। वो दूधिया स्तन, गोल, भारी, और उनके बीच की गहरी खाई! मेरी साँसें रुक गईं। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया, जैसे कोई लोहे का डंडा। मामी शर्म से लाल हो गईं। उन्होंने जल्दी से अपने बूब्स को चोली से ढकने की कोशिश की, लेकिन वो इतने बड़े थे कि ढकते ही नहीं थे।

“मामी, ये क्या!” मैंने हँसते हुए कहा, “आपके ये रसीले खरबूजे छुपाने की चीज नहीं, दिखाने की चीज हैं!” “हट, जंगली कहीं का!” मामी ने शरमाते हुए डाँटा, लेकिन उनकी आँखों में एक चमक थी। “रिश्तों की मर्यादा का तो ख्याल कर!” मर्यादा? मेरा लंड मर्यादा को चोदने को तैयार था। मैं उठा और उनके पास गया। उनके चेहरे पर शर्म थी, लेकिन उनकी साँसें तेज थीं। मैंने उनके कंधे पकड़े और उन्हें अपनी ओर खींच लिया। “मामी, आप इतनी सेक्सी हो, मैं खुद को रोक नहीं पा रहा!”

उसके बाद, मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक जंगली, भूखा चुंबन। मेरी जीभ उनकी जीभ से टकराई। वो पहले तो हल्का विरोध करने लगीं, लेकिन फिर वो भी मेरे होंठों को चूसने लगीं। मैंने उनके बूब्स को जोर से दबाया। “आह!” वो कराह उठीं। उनके भारी स्तन मेरे हाथों में थे, जैसे दो नरम तकिए। मैंने उनके कूल्हों को भी जोर से दबाया। उनका घाघरा ऊपर उठ गया, और उनकी मोटी जाँघें नजर आईं।

मैंने उन्हें दीवार के सहारे धकेल दिया। मेरी उंगलियाँ उनकी चोली के अंदर गईं और मैंने उनके निप्पल्स को मसला। “रवि, ये गलत है… आह!” वो बोलीं, लेकिन उनकी आवाज में वासना थी। मैंने उनकी चोली को पूरा फाड़ दिया। उनके बूब्स अब पूरी तरह नंगे थे। मैं उन पर टूट पड़ा। एक बूब को मुँह में लिया और चूसने लगा। उनका दूध मेरे मुँह में आया। गर्म, मीठा। मैंने उनके निप्पल को दाँतों से हल्का काटा। “उफ्फ, रवि, तू तो जानवर है!” वो चिल्लाईं, लेकिन उनके हाथ मेरे बालों में थे।

मैंने उनके दूसरे बूब को भी चूसा। मेरे हाथ उनके कूल्हों को मसल रहे थे। उनका घाघरा अब पूरी तरह ऊपर था। उनकी चूत साफ दिख रही थी। गीली, चमकती हुई। मैंने उनकी चूत पर उंगली फेरी। “आह, रवि, ये क्या कर रहा है!” वो शरमाते हुए बोलीं, लेकिन उनकी चूत गीली थी। मैं समझ गया, वो भी चुदाई के लिए तैयार थीं।

घुटनों पर बैठकर लंड मुँह में लेने के बाद मामी ने रंडी की तरह ब्लोजॉब दिया

मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड, 8 इंच का, लोहे की तरह खड़ा था। “मामी, इसे देखो!” मैंने हँसते हुए कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उनकी आँखें मेरे लंड पर टिक गईं। “ये क्या, इतना बड़ा!” वो बोलीं। मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखा। वो पहले हिचकिचाईं, लेकिन फिर उन्होंने उसे सहलाना शुरू किया।

“मामी, इसे चूसो!” मैंने कहा। वो घुटनों पर बैठ गईं। जैसे कोई रंडी। उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में लिया। उनकी गर्म जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी। “उफ्फ, मामी, तुम तो जादूगरनी हो!” मैंने कहा। वो मेरे लंड को चूस रही थीं, जैसे कोई लॉलीपॉप। उनका मुँह मेरे लंड के चारों ओर लपेटा हुआ था। मैं उनके बाल पकड़कर उनके मुँह को चोदने लगा। “चूस, रंडी!” मैंने कहा। वो और जोर से चूसने लगीं।

छोटू अचानक जाग गया। वो अपनी चारपाई पर बैठकर हमें देख रहा था। उसकी आँखों में मासूमियत थी, लेकिन वो हँस रहा था। “मामी, छोटू को भी मजा आ रहा है!” मैंने हँसते हुए कहा। वो शरमा गईं, लेकिन चूसना नहीं रोका। मैंने उनके मुँह में अपना लंड और गहरा धकेला। “आह, मामी, तुम तो सच्ची रंडी हो!” मैंने कहा। वो मेरे लंड को चूसती रहीं, और उनका थूक मेरे लंड पर चमक रहा था।

मैंने उन्हें खड़ा किया और उनकी गुलाबी चूत को फिर से सहलाने लगा। उनकी गुलाबी चूत इतनी गीली थी कि मेरी उंगलियाँ फिसल रही थीं। मैंने उनकी चूत में दो उंगलियाँ डालीं। “आह, रवि, धीरे!” वो कराह उठीं। लेकिन मैंने उनकी चूत को और जोर से चोदा। मेरी उंगलियाँ उनकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थीं। वो सिसक रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में वासना थी।

69 में मुखमैथुन की आग

मैंने उन्हें जमीन पर लिटाया। “मामी, अब 69 करेंगे!” मैंने कहा। वो शरमा गईं, लेकिन मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया। मेरा मुँह उनकी चूत पर था, और उनका मुँह मेरे लंड पर। मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। उनकी चूत का स्वाद नमकीन और मीठा था। मेरी जीभ उनकी चूत के दाने को चाट रही थी। वो सिसक रही थीं। “रवि, ये क्या कर रहा है, हरामी!” वो बोलीं, लेकिन उनकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ रही थी।

मैंने उनकी चूत को और जोर से चाटा। मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर तक जा रही थी। वो मेरे लंड को चूस रही थीं। हम दोनों की साँसें तेज थीं। छोटू अब भी हमें देख रहा था। वो अपनी छोटी-छोटी हथेलियाँ बजा रहा था, जैसे उसे मजा आ रहा हो। “मामी, तुम्हारे बच्चे छोटू को तो हमारी चुदाई पसंद आ रही है!” मैंने हँसते हुए कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उनकी चूत मेरे मुँह में और गीली हो गई।

मैंने उनकी चूत को चाटते हुए उनके कूल्हों को जोर जोर से दबाया। उनके मोटे-मोटे कूल्हे मेरे हाथों में थे और मैं उन्हें अपनी पूरी ताकत के साथ दबाने में लगा हुआ था। मैंने उनकी गांड में उंगली डाली। “आह, रवि, ये क्या!” वो चिल्लाईं। लेकिन मैंने उनकी गांड को और जोर से चोदा। मेरी उंगली उनकी गांड के अंदर-बाहर हो रही थी। वो सिसक रही थीं, लेकिन उनकी चूत मेरे मुँह में पानी छोड़ रही थी।

छाती पर बैठकर मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा

मैंने उन्हें उठाया और निचे लेटा दिया और खुद उनकी छाती के उप्पर चढ़कर बैठ गया। उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे लंड के बिलकुल सामने थे। मैंने अपने लंड को उनके बूब्स के बीच रखा। “मामी, अब तुम्हारे खरबूजों को चोदता हूँ!” मैंने कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उन्होंने अपने बूब्स को दबाकर मेरे लंड को पकड़ लिया। मैंने उनके बूब्स को चोदना शुरू किया। मेरा लंड उनके रसीले बूब्स के बीच फिसल रहा था।

“उफ्फ, रवि, तू तो सच्चा हरामी है!” वो बोलीं। उनके बूब्स मेरे लंड को दबा रहे थे। मैंने उनके निप्पल्स को चूसा। उनका दूध मेरे मुँह में आ रहा था। मैंने उनके बूब्स को और जोर से दबाया। वो सिसक रही थीं। “रवि, धीरे, मेरे बूब्स दुख रहे हैं!” वो बोलीं। लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी। मैं उनके बूब्स को चोदता रहा।

मामी का बच्चा छोटू अब हम दोनों को सेक्स करते देख और जोर से हँस रहा था। वो अपनी चारपाई पर उछल रहा था। “मामी, छोटू को तो हमारी चुदाई में बहुत मजा आ रहा है!” मैंने कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उनके बूब्स मेरे लंड को और जोर से दबा रहे थे। मैंने उनके बूब्स के बीच अपना लंड और तेजी से रगड़ा। मेरे लंड का टोपा उनके निप्पल्स को छू रहा था। करीब दस मिनट की बूब्स चुदाई के बाद मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी चल पड़ी और मामी के बूब्स मेरे वीर्य में संद गए…

गाँव में मिशनरी सेक्स पोजीशन में कामुकता से भरी मामी की तीव्र चुदाई

मैंने उन्हें जमीन पर लिटाया। उनका घाघरा अब पूरी तरह उतर चुका था। उनकी चूत गीली और चमक रही थी। मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रखा। “मामी, अब तुम्हारी चूत की बारी है!” मैंने कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उनकी चूत मेरे लंड को बुला रही थी। मैंने एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड उनकी चूत में पूरा घुस गया। “आह, रवि, धीरे!” वो चिल्लाईं।

मैंने उनकी चूत को चोदना शुरू किया। मेरे धक्के इतने जोरदार थे कि उनकी चूत से “पच-पच” की आवाजें आ रही थीं। उनके बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने उनके निप्पल्स को चूसा और उनकी चूत को और जोर से चोदा। “रवि, तू तो जानवर है!” वो बोलीं। लेकिन उनकी चूत मेरे लंड को और गहरा ले रही थी।

छोटू अब भी हमें देख रहा था। वो अपनी चारपाई पर लेटकर हँस रहा था। “मामी, छोटू को हमारी चुदाई बहुत पसंद आ रही है!” मैंने हँसते हुए कहा। वो शरमा गईं, लेकिन उनकी चूत मेरे लंड को और जोर से पकड़ रही थी। मैंने उनकी चूत को और तेजी से चोदा। मेरे धक्के इतने जोरदार थे कि उनका पूरा बदन हिल रहा था।

मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा लेने के बाद घोड़ी बनाकर पीछे से चुदाई

मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। उनके बूब्स नीचे लटक रहे थे, जैसे दो बड़े-बड़े खरबूजे। मैंने अपने लंड को उनकी चूत में डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनके बूब्स इतने जोर से हिल रहे थे कि छोटू उन्हें देखकर ताली बजा रहा था। “मामी, छोटू को तुम्हारे बूब्स बहुत पसंद हैं!” मैंने हँसते हुए कहा।

वो शरमा गईं, लेकिन उनकी चूत मेरे लंड को और गहरा ले रही थी। मैंने उनकी गांड को थप्पड़ मारा। “आह, रवि, मार क्यों रहा है!” वो बोलीं। लेकिन मैंने उनकी गांड को और जोर से थप्पड़ मारा। उनकी चूत गीली थी, और मेरे धक्कों से “पच-पच” की आवाजें आ रही थीं। मैंने उनके बाल पकड़े और उनकी चूत को और जोर से चोदा।

“रवि, तू तो सच्चा रंडीबाज है!” वो बोलीं। मैंने उनकी चूत को और तेजी से चोदा। उनके बूब्स इतने जोर से हिल रहे थे कि छोटू उन्हें देखकर हँस रहा था। मैंने उनकी गांड में उंगली डाली। “आह, रवि, ये क्या!” वो चिल्लाईं। लेकिन मैंने उनकी गांड को और जोर से चोदा।

स्पून्स चुदाई पोजीशन में मामी के साथ नाजायज आनंद

मैंने उन्हें अपनी बगल में लिटाया। स्पून्स पोजीशन में। मेरा लंड उनकी चूत में था, और मेरे हाथ उनके बूब्स पर। मैंने उनकी चूत को धीरे-धीरे चोदा। मेरे धक्के गहरे थे। उनके बूब्स मेरे हाथों में थे। मैंने उनके निप्पल्स को मसला। “आह, रवि, तू तो मुझे पागल कर देगा!” वो बोलीं।

मैंने उनकी चूत को और जोर से चोदा। मेरे धक्के अब तेज हो गए थे। उनकी चूत मेरे लंड को पकड़ रही थी। मैंने उनके कूल्हों को दबाया। उनकी चूत गीली थी, और मेरे लंड से “पच-पच” की आवाजें आ रही थीं। छोटू अब भी हमें देख रहा था। वो अपनी चारपाई पर लेटकर हँस रहा था। “मामी, छोटू को तो हमारी चुदाई में बहुत मजा आ रहा है!” मैंने कहा।

वो शरमा गईं, लेकिन उनकी चूत मेरे लंड को और गहरा ले रही थी। मैंने उनकी चूत को और जोर से चोदा। मेरे धक्के इतने जोरदार थे कि उनका पूरा बदन हिल रहा था। मैंने उनके बूब्स को और जोर से दबाया। “आह, रवि, तू तो मेरी चूत को फाड़ देगा!” वो बोलीं।

मामी की चुदाई का अंतिम चरम और वीर्य का विस्फोट

एक घंटे तक हमने अलग-अलग पोजीशन में चुदाई की। मिशनरी, घोड़ी, स्पून्स, 69, और बूब्स की चुदाई। हर पोजीशन में उनकी चूत मेरे लंड को पकड़ रही थी। उनकी सिसकियाँ और मेरी गालियाँ कमरे में गूँज रही थीं। छोटू हमें देखकर हँस रहा था।

अंत में, मैंने उन्हें मिशनरी पोजीशन में लिटाया। मैंने उनकी चूत में अपना लंड डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनके बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। मैंने उनकी चूत को और जोर से चोदा। “मामी, अब मेरा निकलने वाला है!” मैंने कहा।

“रवि, अंदर मत छोड़!” वो बोलीं। लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी। मैंने उनकी चूत में और जोर से धक्के मारे। मेरा लंड फटने वाला था। “आह, मामी, ले लो मेरा माल!” मैंने चिल्लाया। मेरा वीर्य उनकी चूत में छूट गया। गर्म, गाढ़ा वीर्य। उनकी चूत मेरे वीर्य से भर गई।

वो सिसक रही थीं। “रवि, तूने तो मुझे बर्बाद कर दिया!” वो बोलीं। लेकिन उनकी आँखों में संतुष्टि थी। “मामी, तुम तो मेरे मामा से भी ज्यादा अच्छी चुदाई करती हो!” मैंने हँसते हुए कहा। वो शरमा गईं। “हट, हरामी!” वो बोलीं, लेकिन उनकी मुस्कान बता रही थी कि उन्हें भी मजा आया।

मामी की की गुलाबी चूत के साथ दूसरे दिन भी गंदी शरारत

अगले दिन सुबह मैं फिर से मामा के पास गया। नानी और मामा बाहर बैठे थे और दोनों किसी रिश्तेदार से मिलने जाने के लिए निकलने वाले थे। मामा रसोई में खाना बना रही थी। मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसके बूब्स दबा दिए। वो बोली, “हट, कमीने! फिर से शुरू मत हो जा!” लेकिन मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई और उसकी चूत में उंगली डाल दी। वो गीली थी। मैंने कहा, “मामी, तुम तो पहले से तैयार हो चुदाई के लिए, अभी मामा और नानी को जाने दो फिर आपकी अन्तर्वासना शांत करूँगा!”

मैंने उसे रसोई की चौकी पर बिठाया और कपड़े उप्पर करके उसकी चूत चाटने लगा, उसका स्वाद नमकीन और गर्म था। वो सिसक रही थी, “रवि, तू तो चूत के पीछे पागल है… हाय!” मुझसे रहा नहीं गया और फिर मैंने उस कामुकता से भरी महिला की गुलाबी चूत को कुत्ते की तरह इतना चाटा कि वो मेरे मुँह में ही झड़ गई। अचानक नानी की आवाज आई की बहू हम दोनों जा रहे हैं दरवाजे पर कुण्डी लगा लेना… । फिर नानी और मामा के घर से बाहर चले जाने के बाद मैंने मेरी कामुकता से भरी मामा को रसोई की चौकी पर ही चोदा। उसके बड़े बड़े बूब्स हर धक्के के साथ आगे पीछे हिल रहे थे। मैं आज भी चुदाई करते करते मामा की चूत में ही झड़ गया।


छाती पर बैठकर मामी के बड़े-बड़े बूब्स की चुदाई का मजा लिया भांजे ने गँव में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

उस दिन के बाद, मैं और सावित्री मामी कई बार चुदाई के खेल में डूबे। हर बार नया जोश, नई पोजीशन। लेकिन हमने छोटू के सामने ज्यादा नहीं किया। वो मासूम बच्चा था, और हमें अपनी वासना को छुपाना पड़ता था। फिर भी, वो गर्मी की छुट्टियाँ मेरे लिए जिंदगी का सबसे कामुक अनुभव थीं। सावित्री मामी की रसीली चूत, उनके बड़े-बड़े बूब्स, और उनकी गालियाँ मेरे दिमाग में हमेशा रहेंगी।

मैं जानता हूँ, हम मामी भांजे का ये रिश्ता नाजायज था। शर्म, अपराध, और वासना का मिश्रण। लेकिन उस गाँव की गर्मी में, मैंने वो आग जलाई जो मेरे अंदर आज भी जल रही है। पाठकों, आपको यह कहानी कैसी लगी? रवि और सावित्री की वासना, छोटू की मासूम हँसी, और गाँव की पृष्ठभूमि ने क्या आपकी इंद्रियों को जगाया? कृपया अपने विचार साझा करें। क्या आपको पात्रों का जुनून, कहानी का हास्य, या गंदी गालियों का मसाला पसंद आया? आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

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