मुफ्त में पढ़ें मुझे घोड़ी बनाकर डॉगी पोजीशन में चोदो सौतेली माँ ने कहा सेक्स करने के दौरान अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी – Muft mein padhein mujhe ghodi banakar doggy position mein chodo sauteli maa ne kaha sex karne ke dauran Antarvasna Hindi sex story – Read for free Make me a mare and fuck me in doggy position said stepmother during sex Antarvasna Hindi sex story …
वो एक आम सी शाम थी जब मैं कॉलेज से वापस लौटा और दरवाज़ा खोलते ही मेरी साँसें थम गईं। मेरी सौतेली माँ, रूपाली, हाथ में मेरा वो सफ़ेद बनियान लिए खड़ी थीं जिस पर मैंने बीती रात हस्तमैथुन करते हुए वीर्य निकाला था और फिर मेरे कमरे में छिपा दिया था। मेरी सौतेली माँ की आँखों में ग़ुस्से की जगह एक अजीब सी उत्सुकता थी, और उनके गोरे चेहरे पर हल्की लाली दौड़ गई थी। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा क्योंकि मुझे पता था कि उस कपड़े पर मेरे वीर्य के सूखे हुए धब्बे थे।
“ये क्या है, आरव बेटा?” उन्होंने बनियान को मेरे सामने लहराते हुए पूछा। मेरी सौतेली माँ की आवाज़ में एक अनजानी सी कंपकंपी थी। मैंने नज़रें झुका लीं, अपनी 21 साल की ज़िंदगी में पहली बार इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई थी। वो बनियान, जिस पर मेरे वीर्य के चिपचिपे निशान अब भी साफ़ दिख रहे थे, मेरी रातों की हवस का गवाह बन चुकी थी। और अब वही कपड़ा मेरी सौतेली माँ के हाथों में था, जो ख़ुद सिर्फ़ 38 साल की एक बेहद ख़ूबसूरत और कामुक औरत थीं।
मैं कुछ बोल नहीं पाया, बस शर्म से मेरी सौतेली माँ के सामने गर्दन झुकाए खड़ा रहा। मेरी सौतेली माँ ने एक क़दम मेरी तरफ़ बढ़ाया, उनकी साड़ी की महक और पसीने की हल्की गंध मेरे नथुनों में भर गई। उनका कामुक शरीर मेरे बिल्कुल करीब था, उनके 36D के बोबे साड़ी के ब्लाउज़ में क़ैद थे और उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थीं। “तुम रात को अपने कमरे में अकेले क्या करते हो, ये मैं जानती हूँ,” उन्होंने धीमे से कहा, उनकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास घुली हुई थी।
मुफ्त में पढ़ें मुझे घोड़ी बनाकर डॉगी पोजीशन में चोदो सौतेली माँ ने कहा सेक्स करने के दौरान अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

मेरी सौतेली माँ का वो अंदाज़ मेरे लिए बिल्कुल नया था, क्योंकि पिछले 5 सालों में हमारा रिश्ता एक औपचारिक माँ-बेटे का ही रहा था। पिताजी की मौत के बाद वो अकेली पड़ गई थीं और मैं उनके साथ इस दिल्ली के फ़्लैट में रह रहा था। मैंने कभी उन्हें इस नज़र से नहीं देखा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरी नज़रें उनके उभरे हुए कुल्हों और भरे हुए बोबों पर बार-बार चली जाती थीं। और आज जब वो मेरे इतने करीब खड़ी थीं, तो मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई।
“आपको मेरे कमरे में क्या करना था माँ…?” मैंने हिम्मत जुटाकर मेरी सौतेली माँ से पूछा, मेरी आवाज़ काँप रही थी। मेरी सौतेली माँ ने एक गहरी साँस ली और बनियान को बिस्तर पर फेंक दिया, फिर अपनी पल्लू को ठीक करते हुए बोलीं, “मैं तुम्हारे कपड़े धोने आई थी, लेकिन ये तो मुझे कुछ और ही मिल गया।” उनकी नज़रें मेरी आँखों में गड़ गईं और उनके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई। मैंने महसूस किया कि मेरे पायजामे के अंदर मेरा लंड धीरे-धीरे तनने लगा है।
“ये बताओ, जब तुम हस्तमैथुन (Masturbation) करते हो न, तो क्या सोचते हो बेटा?” उन्होंने पूछा, उनकी उँगलियाँ उनके चुस्त ब्लाउज़ के किनारे पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि शायद वो भी सुन सकती थीं। “आपको शर्म नहीं आती अपने जवान बेटे से ऐसे सवाल पूछते हुए?” मैंने सकपकाते हुए कहा, लेकिन मेरी नज़रें उनके उभरे हुए निप्पलों पर जा चुकी थीं जो ब्लाउज़ के कपड़े से साफ़ झलक रहे थे।
कामुकता से भरी रूपाली माँ हल्के से हँसी और उन्होंने अपने बालों को पीछे किया, उनकी ये हरकत मुझे बेहद सेक्सी लगी। “शर्म तो तुम्हें आनी चाहिए, जो अपनी माँ के सामने खड़े हो और तुम्हारा लौड़ा खड़ा हो रहा है,” उन्होंने सीधे-सीधे कह दिया। मैं शर्म से पानी-पानी हो गया, लेकिन मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ था और पायजामे में एक तंबू बना चुका था। उनकी नज़रें मेरे उभार पर जमी हुई थीं और वो अपने होंठों को धीरे-धीरे चाट रही थीं।
“क्या तुम जानते हो, पिछले 3 सालों से मैंने किसी मर्द को नहीं छुआ है?” उन्होंने अचानक अपनी आवाज़ धीमी करते हुए कहा, उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। मैं चौंक गया, क्योंकि उनका ये रूप मैंने कभी नहीं देखा था। “तुम्हारे पिता के जाने के बाद से मैं अकेली हूँ, और आज जब मैंने तुम्हारी बनियान पर ये चिपचिपा माल देखा, तो मुझे लगा कि अब बहुत हुआ,” वो बोलीं और मेरी तरफ़ बढ़ आईं।
उनकी ये बातें सुनकर मेरा शरीर काँप उठा, मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मेरी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी सौतेली माँ, जो इतनी शरीफ़ और धार्मिक दिखती हैं, उनके अंदर इतनी हवस भरी होगी। “आप क्या कह रही हैं, माँ?” मैंने हकलाते हुए पूछा, लेकिन मेरे शरीर की प्रतिक्रिया कुछ और ही कह रही थी। मेरे लंड के गोटे अब पूरी तरह भर चुके थे और मेरी अंड की थैली में एक अजीब सी भारीपन था।
“बस इतना कि अब और बर्दाश्त नहीं होता,” उन्होंने कहा और अपने ब्लाउज़ के ऊपर से ही अपने बोबों को दबाने लगीं। मैं मंत्रमुग्ध सा उन्हें देखता रहा, उनकी उँगलियाँ अपने निप्पलों को कुचल रही थीं और वो धीरे-धीरे कराह रही थीं। “पिछले हफ़्ते जब तुम नहा रहे थे, तो मैंने बाथरूम के बाहर से तुम्हारी परछाई देखी थी,” उन्होंने बताया, “तुम्हारा लंड कितना बड़ा और मोटा लग रहा था, उस दिन से मेरी चूत रात भर गीली रहती है।”
ये सुनते ही मेरे अंदर एक जानवर जाग उठा, मैंने तुरंत अपना पायजामा उतार दिया और मेरा 7 इंच का मोटा लौड़ा बाहर कूद पड़ा। मेरी सौतेली माँ ने जैसे ही उसे देखा, उनकी आँखें फैल गईं और उनका मुँह खुला का खुला रह गया। “इतना बड़ा लंड!” वो अनायास ही बोल पड़ीं, और उनका हाथ अपनी साड़ी के अंदर चला गया। मैंने उन्हें देखा कि वो अपनी चूत को उँगलियों से रगड़ रही हैं, शायद उनकी बालों वाली चूत से रस टपक रहा था।
मैंने साहस करके एक क़दम बढ़ाया और अपने तने हुए लंड को उनके चेहरे के पास ले गया। “लीजिए, यही तो चाहिए न आपको,” मैंने रौब से कहा, अब मेरी झिझक ख़त्म हो चुकी थी। मेरी सौतेली माँ ने बिना एक पल गँवाए अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं। उनके हाथों की गर्माहट ने मुझे कँपकँपा दिया, और उनकी उँगलियों ने मेरे सुपारे को धीरे-धीरे मसलना शुरू कर दिया।
“कितना मोटा लौड़ा है तुम्हारा, आरव,” वो फुसफुसाई और उन्होंने अपनी जीभ निकालकर मेरे लंड के ऊपरी हिस्से को चाट लिया। मैंने एक गहरी सिसकारी भरी, उनका मुँह गर्म और गीला था, और उनके होंठों का स्पर्श बिजली की तरह मेरे शरीर में दौड़ गया। “अब मैं तुम्हें वो सब सिखाऊँगी जो तुम अकेले नहीं कर सकते,” उन्होंने कहा और मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। मैंने उनके बालों को कसकर पकड़ लिया क्योंकि उनके मुँह की गर्मी और जीभ की चाल ने मुझे पागल कर दिया था।
वो बड़ी कुशलता से मेरा ब्लोजॉब (Blowjob) कर रही थीं, उनका सिर आगे-पीछे हो रहा था और मेरा पूरा लंड उनके मुँह के अंदर समा गया था। मैंने ज़िंदगी में ऐसा सुख कभी महसूस नहीं किया था, मेरी टाँगें काँप रही थीं और मेरा वीर्य फूटने को तैयार था। “रुको, अभी नहीं,” मैंने मुश्किल से कहा और उन्हें पीछे खींच लिया। मैं आज इस रंडी को पूरी रात चोदना चाहता था, सिर्फ़ झटपट वीर्य नहीं निकालना चाहता था।
मेरी सौतेली माँ ने मुस्कुराते हुए अपने मुँह से लार पोंछी और फिर धीरे-धीरे अपनी साड़ी का पल्लू खोलने लगीं। “आज मैं तुम्हारी रांड बनकर रहूँगी,” उन्होंने कहा और अपनी साड़ी पूरी उतारकर ज़मीन पर गिरा दी। मेरी आँखें उनके शरीर पर ऐसे चिपक गईं जैसे कभी किसी नंगी औरत को देखा ही न हो। उनके 36D के बोबे सफ़ेद ब्रा में क़ैद थे, उनके निप्पल भूरे और बड़े थे, और उनकी पेटी पर हल्की सी चर्बी ने उन्हें और भी सेक्सी बना दिया था।
“जल्दी से अपनी ब्रा भी उतारो,” मैंने हुक्म दिया और अपने हाथ से अपने देसी लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा। उन्होंने ब्रा के हुक खोले और उनके मोटे भरी बूब्स (Big Busty Boobs) बाहर कूद पड़े, भारी और ढीले, लेकिन बेहद ख़ूबसूरत। “अब अपनी चूत दिखाओ,” मैंने कहा, मेरी आवाज़ में एक अलग ही आत्मविश्वास था। उन्होंने अपनी पेटीकोट नीचे खिसकाई और उनकी बालों वाली चूत मेरे सामने थी, उसका रस उनकी जाँघों तक बह रहा था।
मैंने आगे बढ़कर उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया और ज़ोर से उनके होंठों को चूमने लगा। हमारी जीभें एक दूसरे से उलझ गईं और मेरा हाथ उनकी गीली चूत पर चला गया। मेरी उँगलियों ने उनकी फुद्दी को सहलाया और वो मेरे मुँह में ही कराह उठीं। “उँगली मत डालो, सीधा लंड डालो,” वो हाँफते हुए बोलीं, लेकिन मैंने पहले उन्हें बिस्तर पर लिटाकर उनकी चूत चाटने का फ़ैसला किया।
मैंने उनकी जाँघों को फैलाकर अपना मुँह उनकी रसदार चूत पर रख दिया, उसकी महक मीठी और नशीली थी। मेरी जीभ ने उनकी भगनासा को छुआ और वो ज़ोर से चिल्ला पड़ीं, उनका पूरा शरीर ऐंठ गया (Pussy Licking)। मैंने उनकी चूत का रस पी लिया और फिर अपनी दो उँगलियाँ उनकी टाइट चूत में डाल दीं। “हाँ, ऐसे ही, और तेज़,” वो चिल्लाई और उन्होंने अपने बोबों को ज़ोर-ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया।
माँ की चूत इतनी गीली थी कि मेरी उँगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं, और उनकी चीख़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। “अब लंड डालो, प्लीज़,” वो गिड़गिड़ाई, उनकी आँखों में हवस की आग जल रही थी। मैंने अपनी उँगलियाँ बाहर निकालीं और अपने तने हुए लंड को उनकी चूत के मुँहाने पर रख दिया। उन्होंने अपनी कमर ऊपर उठाई और मैंने एक ही झटके में अपना पूरा मोटा लौड़ा उनकी चूत में घुसा दिया।
“आआह्ह्ह्ह!” हम माँ-बेटे दोनों एक साथ जोर से चिल्लाए, उनकी टाइट चूत ने मेरे लंड को ऐसे जकड़ लिया जैसे उसे निगलना चाहती हो। मैंने झुककर उनके निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा, जबकि मेरी कमर तेज़ी से आगे-पीछे हो रही थी। वो बुरी तरह से चुद रही थीं और उनकी चीख़ें अब दबी हुई कराहटों में बदल गई थीं। मेरे लंड का हर धक्का उन्हें चरमसीमा की ओर ले जा रहा था।
“मुझे घोड़ी बनाकर डॉगी पोजीशन में चोदो,” मेरी सौतेली माँ ने कहा और मैंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाल लिया। वो पलटीं और अपने कुल्हों को ऊपर उठाकर खड़ी हो गईं, उनकी गांड का छेद मेरे सामने था और उनकी चूत से रस टपक रहा था। मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ी और एक ही झटके में अपना लंड फिर से उनकी चूत में घुसा दिया। इस पोज़ीशन में उनके कुल्हे मेरे पेट से टकरा रहे थे और आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
“तेज़, और तेज़, मुझे रांड की तरह चोदो,” वो चिल्ला रही थीं और मैं पूरी ताक़त से उनकी चुदाई कर रहा था। मेरा पसीना उनकी पीठ पर टपक रहा था और मेरे अंडकोष उनकी जाँघों से टकरा रहे थे। मैंने अपना एक हाथ उनकी गांड के छेद पर रख दिया और अपनी उँगली से उसे धीरे-धीरे सहलाने लगा। “गांड में उंगली मत डालो, अभी नहीं,” वो हाँफते हुए बोलीं, लेकिन उनकी चूत और भी ज़ोर से भींच गई।
मैंने चुदाई करते करते अपनी उँगली उनकी गांड में डाल दी (Ass Fingering) और वो एक दबी हुई चीख़ के साथ झटके खाने लगीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को पागलों की तरह भींच रही थीं और मुझे पता था कि वो झड़ने वाली हैं। “अभी मत झड़ो, मेरे साथ-साथ,” मैंने गुर्राकर कहा और अपनी गति और तेज़ कर दी। मेरा पूरा शरीर तनाव से भर गया था और मेरे अंडकोषों में वीर्य उबल रहा था।
“अब, अभी, हाँ, मैं झड़ रही हूँ!” वो चिल्लाई और उनका पूरा शरीर झटके खाने लगा। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से भींचा कि मैं भी अपने आप को रोक नहीं पाया। मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और अपना सारा वीर्य उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। मेरे शुक्राणु की गर्म धाराएँ उनके गर्भ को भर रही थीं और हम दोनों एक साथ ज़ोर-ज़ोर से कराह रहे थे।
मैं उनके ऊपर गिर पड़ा, मेरा लंड अब भी उनकी चूत में था, और हम दोनों की साँसें तेज़ थीं। उन्होंने अपना चेहरा मेरी तरफ़ घुमाया और मेरे होंठों को हल्के से चूम लिया। “ये मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स था,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा, उनकी आँखों में संतुष्टि के आँसू थे। मैंने उनके माथे को चूमा और अपनी बाँहों में भर लिया, उस पल मुझे एहसास हुआ कि हमारा रिश्ता अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा।
अगली सुबह जब मैं उठा, तो रूपाली माँ मेरी बाँहों में सो रही थीं, उनका चेहरा बिल्कुल शांत और मासूम लग रहा था। मैंने उन्हें देखा और सोचा कि कल रात हमने जो किया, वो ग़लत था या सही, लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि ये सबसे सही चीज़ थी जो हमारे साथ हो सकती थी। वो एक भूखी औरत थीं जिन्हें सिर्फ़ प्यार और शारीरिक संतुष्टि की ज़रूरत थी, और मैं वो दे सका। अब हम दोनों के बीच कोई शर्म या झिझक नहीं थी, बस एक गहरा और अनकहा रिश्ता था।
मेरी सौतेली माँ ने धीरे से आँखें खोलीं और मुझे देखकर मुस्कुराई, उनकी आँखों में एक नई चमक थी। “गुड मॉर्निंग, मेरे शेर,” उन्होंने कहा और मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया। मैंने उनके बालों को सहलाते हुए सोचा कि अब हमारी ज़िंदगी कैसी होगी, लेकिन जो भी होगा, मैं इसके लिए तैयार था। उस एक बनियान ने, जिस पर मेरा चिपचिपा माल लगा था, हमारी क़िस्मत ही बदल दी थी। और मैं जानता था कि ये तो सिर्फ़ शुरुआत थी, अभी तो हमें एक दूसरे के शरीर के और भी कई राज़ खोजने थे।
प्रिय पाठकों, ये थी मेरी और रूपाली माँ की हवस और प्यार भरी डॉगी स्टाइल वाली सेक्स कहानी। मुझे उम्मीद है कि आपको हमारा ये सफ़र पसंद आया होगा। अब मैं आप सभी से गुज़ारिश करता हूँ कि कृपया नीचे कमेंट करके ज़रूर बताएँ कि आपको ये कहानी कैसी लगी और आप हमारे बारे में और क्या जानना चाहते हैं। आपकी ईमानदार राय मेरे लिए बहुत मायने रखती है।


