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सौतेली माँ बहन की चुदाई कर डाली पापा की गैरहाजिरी में

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मेरी उम्र 22 साल है और मैं लखनऊ में अपने परिवार के साथ रहता हूँ। मेरे पापा एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं और उन्हें हर महीने 5 से 7 दिन के लिए बाहर दूसरे शहर जाना पड़ता है। घर में मैं, मेरी 50 साल की सौतेली माँ शांति और मेरी 18 साल की सौतेली बहन प्रिया रहते हैं। पापा की दूसरी शादी थी, इसलिए शांति माँ और प्रिया दोनों काफी जवान और खूबसूरत हैं।

मेरी सौतेली माँ की उम्र 50 साल होने के बावजूद उनका बदन एक 35 साल की औरत जैसा गजब का भरा हुआ है। जब मैंने उन्हें पहली बार देखा था उसी दिन से मैं उनकी चुदाई करके अपनी कामुकता शांत करने की फ़िराक में था मगर कभी हिम्मत ही नहीं हुई और ना ही सही मौका मिल पाया। उनके 38D साइज के बूब्स और भरे हुए 40 इंच के कूल्हे किसी का भी लंड खड़ा कर दें। वहीं प्रिया, जो हाल ही में 18 साल की हुई थी, एकदम टाइट और गोरी चिकनी चूतड़ वाली कुवारी लड़की थी। उसके 32B साइज के चूचे अभी तक किसी मर्द के हाथ नहीं लगे थे और उसकी चूत पर भी आज तक कोई बाल नहीं आए थे।

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तेज गर्मियों का मौसम था और लू चल रही थी। पापा 5 दिन के लिए मुंबई गए हुए थे। रात के करीब 11 बज रहे थे और अचानक जोरदार गरज के साथ बिजली चली गई। इन्वर्टर भी बैटरी लो होने की वजह से 10 मिनट में बंद हो गया। कमरे में एकदम अंधेरा छा गया और गर्मी असह्य होने लगी। बाहर तेज बारिश हो रही थी और कमरे में पंखे बंद होने से हवा बिल्कुल नहीं थी। मैं अपने रूम में लेटे लेटे पसीना पूछ रहा था तभी मेरा फोन पर व्हाट्सएप आया, माँ का मैसेज था। उन्होंने लिखा कि कमरा बहुत गर्म है, मैं और प्रिया तुम्हारे बड़े रूम में आ रहे हैं क्योंकि वहां खिड़की बड़ी है और थोड़ी ठंडक भी रहती है।

2 मिनट बाद मेरी सौतेली माँ और बहन मेरे रूम में आ गईं। माँ ने एक बहुत ही पतला और ट्रांसपेरेंट सिल्क का नाइटी पहन रखा था जिसमें से उनका नंगा जैसा बदन और ब्रा की पत्तियां साफ दिख रही थीं। प्रिया ने शॉर्ट्स और एक टाइट टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से उसके खड़े हुए निप्पल का उभार साफ नजर आ रहा था। मेरा 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लंड तभी से सेमी-इरेक्ट था, लेकिन इन दोनों जवान औरतों को अपने कमरे में देखकर मेरे अंडरवियर में उसने सलामी देनी शुरू कर दी। हम तीनों ने बड़े बेड पर लेटने का फैसला किया। मैं एक किनारे, प्रिया बीच में और माँ दूसरे किनारे लेट गईं।

बारिश की ठंडी हवा खिड़की से आ रही थी और कमरे में मेरे पसीने और माँ के बदन से आने वाली हल्की सी परफ्यूम और गर्मी की मिश्रित खुशबू फैल रही थी। अंधेरे में मैं सिर्फ बारिश की आवाज सुन रहा था। करीब 1 घंटा बीत गया, मुझे नींद नहीं आ रही थी। तभी अचानक मेरा ध्यान प्रिया की सांसों पर गया, वो गहरी नींद में सो चुकी थी। मैं धीरे से अपनी तरफ मुड़ा तो देखा कि माँ भी अपनी तरफ करवट लेकर लेटी थीं। उनकी गांड मेरी जांघों के बिल्कुल करीब थी। मैं एकदम स्थिर पड़ा रहा। थोड़ी देर बाद माँ ने अपनी गांड पीछे की तरफ धीरे से धकेली। मेरा खड़ा हुआ लंड उनकी नर्म गांड से टकरा गया।

पापा की गैरहाजिरी में मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने सोचा कि शायद नींद में हुआ है, लेकिन अगले ही पल माँ ने फिर से अपनी गांड पीछे धकेली, इस बार थोड़ी ज्यादा जोर से। अब मेरा पूरा लंड उनकी गांड की दरार में फंस कर दब रहा था। मेरा हिम्मत पसंद हुआ और मैंने भी अपनी कमर थोड़ी आगे धकेल दी। माँ ने कोई विरोध नहीं किया। मैं समझ गया कि ये सब जानबूझकर हो रहा है। मैंने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और माँ की कमर पर रख दिया। वाह, क्या नर्म और गर्म चमड़ी थी। मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ को उनके पेट पर ले जाया और फिर उपर की तरफ। माँ ने अपना नाइटी पहले ही घुटनों तक ऊपर कर रखा था।

जैसे ही मेरा हाथ उनके बोबों तक पहुंचा, माँ ने एक हल्की सी सिसकारी ली। मैंने महसूस किया कि उन्होंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। मैंने उनके एक 38D साइज के बूब को अपने हाथ में जकड़ लिया। गर्मी और नरमी का एहसास मेरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया। मैंने उनके निप्पल को अपनी उंगलियों से मसलना शुरू कर दिया। निप्पल कड़क होकर एक अंगूर की तरह खड़ा हो गया। माँ पीछे मुड़ी और मेरे कान में धीरे से बोली, “साले, बहुत दिन से तड़प रही थी तेरे पापा के छोटे और पतले लंड से… आज की रात तेरे नामर्द पापा की गैरहाजिरी में तू मेरी चूत की प्यास बुझा दे।”

ये सुनकर मेरे अंदर का जोश अगले लेवल पर चला गया। मैंने जल्दी से अपनी सौतेली माँ के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए अपना शॉर्ट और अंडरवियर उतार फेंका। अब मैं नंगा लेटा था और मेरा 7 इंच का मोटा लौड़ा तन कर फंफना रहा था। मैंने माँ को अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। हम एक दूसरे को गहराई तक चूसने लगे। माँ के मुंह से जोरदार आवाजें आने लगीं। वो बीच-बीच में बोल रही थी, “उम्म्ह… छोड़ मत… पूरा मजा ले… आज तू मेरा पति नहीं, मेरा यार है।”

हमारी इस अश्लील हरकत से बीच में लेटी मेरी सौतेली बहन प्रिया जाग गई। उसने आँखें मलते हुए पूछा, “माँ, ये क्या हो रहा है?” अंधेरा था इसलिए वो साफ नहीं देख पा रही थी। माँ ने ना तो पीछे हटने का ड्रामा किया और ना ही मेरा हाथ हटाया। उसने बस प्रिया का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। “बेटी, तेरे भाई का लंड देख, कितना मस्त और मोटा है। तेरे पापा का तो 4 इंच का पतला सूखा लौड़ा है, जिससे कभी मजा नहीं आता।” माँ ने सीधे बात कह दी।

प्रिया सन्न रह गई। उसने मेरे नंगे शरीर को छूकर महसूस किया और जब उसका हाथ मेरे खड़े लंड पर पड़ा तो वो एकदम से पीछे हट गई। “माँ! ये गलत है, वो मेरा भाई है!” प्रिया ने डरी हुई आवाज में कहा। माँ बोली की इसमें कुछ गलत नहीं है बेटी, फिर वो उठी और बाहर जाकर मोमबत्ती जला लाई। अब कमरे में हल्की रोशनी थी। माँ ने खड़े होकर अपना नाइटी उतार दिया और पूरी नंगी हो गईं। 50 साल की उम्र में भी उनका बदन एकदम गोरा और चिकना था।

उनके बड़े-बड़े 38D बोबे लटके हुए थे और उनकी झांट वाली चूत से पानी टपक रहा था। “प्रिया, सेक्स कोई पाप नहीं होता जब शरीर की जरूरत हो। तुम 18 साल की हो गई हो, तुम्हारी चूत में भी खुजली होती होगी। आज तेरे भाई का लंड तुम्हारी वर्जिन चूत की सील तोड़ेगा और मेरी चूत को फाड़ेगा।”

प्रिया एकदम घबरा गई थी लेकिन माँ के नंगे और कामुक बदन को देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने मौके का फायदा उठाया और अपना लंड हिलाते हुए मेरी बहन के पास गया। मैंने प्रिया का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया। उसके हाथ कांप रहे थे। “छोड़ ना भैया, माँ क्या कहेगी?” उसने नरम आवाज में कहा। तभी माँ बोली, “मैंने तो बोल दिया ना रंडीपन करने दे आज। मजा ले तेरे पापा की गैरहाजिरी में।”

मैंने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। शुरू में उसने मुँह बंद रखा, लेकिन 2 मिनट बाद वो भी पिघलने लगी और उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। अब वो सिर्फ शॉर्ट्स में थी। उसके 32B साइज के छोटे लेकिन बहुत ही गोरे और टाइट चूचे सामने थे। मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरे को अपनी उंगलियों से पिनच किया। प्रिया ने मुँह से ‘आह्ह्ह’ की आवाज निकाल दी। माँ बीच में आई और उसने प्रिया के बाल पकड़कर उसे नीचे धकेल दिया।

माँ ने कहा, “पहले अपने भाई के लंड को चूस कर देख, कैसे एक औरत को खुश किया जाता है। मुखमैथुन करो इसका।” प्रिया ने डरते-डरते मेरा 7 इंच का लंड अपने हाथ में पकड़ा और जुभान निकालकर उसकी टोपी पर लगाई। मेरे शरीर में आग लग गई। उसने धीरे-धीरे मेरा लंड मुँह में लेना शुरू किया। एक कुवारी लड़की के गर्म मुँह में मेरा लंड जाने का अहसास कुछ और ही था। माँ पीछे से मेरी गांड पर हाथ फेर रही थी और उसकी उंगलियां मेरे अंडकोष को मसल रही थीं। 10 मिनट तक प्रिया ने मेरा ब्लोजॉब किया। अब मुझसे रहा नहीं गया।

मैंने प्रिया का सिर पकड़कर उसे अपने लंड से हटाया और माँ को बेड पर धकेल दिया। माँ ने अपनी टांगें खोल दीं। उनकी झांट वाली चूत पूरी तरह से गीली थी और उसमें से चिपचिपा पानी बाहर आ रहा था। मैंने अपना मुँह सीधा उनकी चूत पर लगा दिया और जोर-जोर से चाटने लगा। माँ सिसकियां लेने लगी, “आह्ह्ह… छोड़ मेरी चूत को… चाट इसे… उंगली डाल… आह्ह्ह बेटा… फाड़ दे आज इस भोसड़े को!” उनकी गंदी बातें सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने अपनी 2 उंगलियां उनकी चूत में घुसा दीं और अंदर-बाहर करने लगा। माँ के बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे और वो जोर से मोन कर रही थी।

प्रिया ये सब देखकर पागल हो गई थी। उसने अपनी शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी और वो भी नंगी होकर मेरे पीछे आ गई। उसने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद पर लगाई। मैंने पीछे मुड़कर उसे चूमा और उसे बेड पर लिटा दिया। अब मेरे सामने 2 एकदम नंगी औरतें थीं—एक 50 साल की अनुभवी रंडी और दूसरी 18 साल की कुवारी छिनाल।

मैंने माँ से कहा, “आज मैं आप दोनों को बिना कंडोम लगाए चोदूंगा।” माँ ने खुश होकर कहा, “हां साले, नंगे लंड से ही चूत का मजा आता है। अपना गर्म वीर्य भर देना अंदर।” मैंने पहले माँ के ऊपर चढ़ गया। उन्होंने अपने हाथों से मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर लगा दिया। एक जोरदार धक्के के साथ मैंने अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। “आह्ह्ह… माँ… कितना गर्म और टाइट भोसड़ा है तुम्हारा!” मैं चिल्लाया। माँ ने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं और बोली, “चोद अपनी माँ को… रंडी की तरह चोद… फाड़ दे मेरी चूत!”

मैं धक्के मारने लगा। पूरे कमरे में ‘पच… पच… पच…’ की आवाज गूंज रही थी। मेरा लंड माँ की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। उनके बड़े बूब्स ऐसे उछल रहे थे जैसे पानी में तरबूज हों। 15 मिनट तक मैंने उन्हें मिशनरी पोजीशन में जोरदार चुदाई की। इस बीच प्रिया बाजू में बैठकर अपनी टाइट चूत में उंगली कर रही थी। माँ 2 बार झड़ चुकी थी, उनकी चूत से बहुत सारा रस बाहर निकल कर बेडशीट को गीला कर रहा था।

अब मेरा ध्यान प्रिया पर था। मैंने अपना लंड माँ की चूत से निकाला। वो पूरा चिपचिपा और चूत के रस से लथपथ था। मैं प्रिया के ऊपर लेट गया। प्रिया बहुत डरी हुई थी क्योंकि ये उसकी पहली चुदाई थी। मैंने उसके चूचों को चूसा और उसकी गांड पर हाथ फेरकर उसे शांत किया। माँ ने भी उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा, “बेटी, पहले थोड़ा दर्द होगा, फिर बहुत मजा आएगा। अपने भाई पर छोड़ दे।”

मैंने अपने लंड की टोपी प्रिया की बिल्कुल क्लीन शेव और गुलाबी चूत पर रखी और धीरे से धक्का दिया। मेरी सौतेली बहन की सील पैक वर्जिन चूत इतनी टाइट थी कि मेरा सिर्फ 1 इंच अंदर गया और वो चिल्ला उठी। “आह्ह्ह… निकालो… छोड़ दो… फट गई… भैया मार गई!” माँ ने उसका मुँह अपने बूब्स पर दबा दिया ताकि उसकी आवाज बाहर न जाए। मैंने एक और जोरदार धक्का मारा। ‘फच्च्च’ की आवाज हुई और मेरा लंड प्रिया की चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया। प्रिया की सील टूट गई और उसकी चूत से खून बाहर आने लगा।

उस कुंवारी लड़की की आँखों से आंसू आ गए। मैं 2 मिनट तक ऐसे ही उसके अंदर धंसा रहा, उसके होंठों को चूसता रहा। धीरे-धीरे उसकी चूत ने अपना आकार बदल लिया और मेरे लंड को अपने अंदर समा लिया। अब मैंने अपने धक्के शुरू किए। पहला धक्का… दूसरा धक्का… और फिर मैंने रफ्तार पकड़ ली। खून और चूत के रस की मिश्रित चिपचिपाहट मेरे लंड को और भी मजबूत बना रही थी। प्रिया अब दर्द से नहीं, बल्कि मजे से चिल्ला रही थी। “आह्ह्ह… भैया… और जोर से चोदो अपनी इस कुंवारी बहन की टाइट चूत को… फाड़ दो अपनी बहन की चूत… आह्ह्ह!”

ये सुनकर माँ बहुत खुश हो गई। उसने मेरी पीठ पर हाथ मारते हुए कहा, “हां बेटा, इस छिनाल की चूत की ऐसे चुदाई कर कि ये जिंदगी भर भूल ना पाए।” प्रिया की टाइट चूत में लंड जाना माँ की चूत से कहीं ज्यादा अलग अनुभव था। 20 मिनट तक मैंने प्रिया की कुवारी चूत की जबरदस्त चुदाई की। उसने इस दौरान 3 बार झड़ दिया था।

मैंने अपना लंड प्रिया की चूत से निकाला और माँ से बोला, “अब मुझे डॉगी स्टाइल में आपकी गांड मारनी है।” माँ कुतिया की तरह चार पैरों के बल हो गई। उनकी भारी गांड और उनका भोसड़ा मेरे सामने था। मैंने पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। चपात चपात की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। माँ बेहद गंदी गालियां दे रही थी, “हां साले… तेरी माँ की गांड मार… वेश्या की तरह चोद… अपने बाप की रांड को चोद!”

इधर प्रिया उठी और मेरे पीछे आकर बैठ गई। उसने अपने हाथ से मेरे अंडकोष और लंड के गोटे मसलने शुरू कर दिए। ये दोहरा सुख मुझे पागल कर रहा था। मैं तेजी से माँ की चूत पर प्रहार कर रहा था। 15 मिनट बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने रुकने की कोशिश की लेकिन माँ ने पीछे से अपनी गांड धकेलते हुए कहा, “अंदर ही छोड़ दे… बिना कंडोम के मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दे… भर दे मेरे भोसड़े को!”

मैंने अपना पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया और एक तेज आवाज के साथ मेरा लंड पम्प करने लगा। मैंने अपना गर्म, चिपचिपा और गाढ़ा वीर्य सीधा माँ की चूत के अंदर छोड़ दिया। 5-6 धार में मेरा पूरा माल माँ की चूत में भर गया। माँ भी एक साथ झड़ गई और उनकी चूत ने मेरे लंड को जकड़ कर रस छोड़ दिया।

मैं थक कर माँ के ऊपर गिर गया। हमारा पसीना एक दूसरे से मिल रहा था। तभी प्रिया ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और उस पर लगे हुए माँ के चूत के रस और मेरे वीर्य को चाटने लगी। मुझे फिर से जोश आने लगा। मेरा लंड फिर से 6 इंच का होकर खड़ा हो गया। प्रिया ने कहा, “भैया, अब मेरी बारी है। मुझे भी बिना कंडोम के अपना वीर्य चूत में भरना है।”

मैंने प्रिया को बेड पर सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख दिया। इससे उसकी चूत पूरी तरह से खुल गई और उसमें से खून और रस लगा हुआ था। मैंने एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। “आह्ह्ह…” प्रिया मस्ती में चीख उठी। मैंने उसे बहुत तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मेरे धक्कों से पूरा बेड हिल रहा था। माँ बाजू में बैठकर हमारी चुदाई देख रही थी और अपनी चूत में उंगली कर रही थी।

मैंने प्रिया के दोनों चूचों को जोर से दबाया और उसके होंठों को चूसते हुए लगातार 20 मिनट तक उसकी टाइट चूत की चुदाई की। प्रिया बेहद गंदी बातें कर रही थी, “भैया… चोद अपनी छिनाल बहन को… मेरी चूत का भोसड़ा बना दे… अपना पूरा माल अंदर डाल दे… मैं तेरी रंडी हूँ!”

आखिरकार मैं झड़ने वाला था। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। प्रिया भी संभोग के कगार पर थी। हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना लंड उसकी चूत के सबसे अंदर तक धकेल दिया और मेरे लंड ने एक के बाद एक कई धारों में गर्म वीर्य की बौछार की। मेरा पूरा शुक्राणु भरा हुआ माल प्रिया की कुवारी चूत में भर गया।

मैं अपना लंड प्रिया की चूत के अंदर ही छोड़कर उसके ऊपर गिर गया। हम तीनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे। कमरे में चूत, लंड, खून और पसीने की गंदी लेकिन कामुक खुशबू फैली हुई थी। रात के करीब 4 बज रहे थे। हम तीनों नंगे ही एक-दूसरे की बाहों में लेटकर सो गए।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि माँ मेरे एक तरफ अपनी गांड मेरे लंड से चिपकाए लेटी थी और प्रिया दूसरी तरफ मेरे सीने पर अपना सिर रखकर सो रही थी। उसका हाथ मेरे लंड पर था। उस रात के बाद से जब भी पापा घर से बाहर जाते हैं, मैं अपनी 50 साल की सौतेली माँ और 18 साल की सौतेली बहन दोनों को बिना कंडोम के रातभर चोदता हूँ। हम तीनों के बीच ये रिश्ता अब एक खुला राज बन चुका है और मेरे पापा की गैरहाजिरी में हम इस कामुक तीन रातों के खेल का हर पल पूरी तरह से भोगते हैं।

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