फ्री में पढ़ें मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी का गुप्त बुलावा बिजली गुल होते ही अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी (Mohalle ki sabse zyada chudakkad bhabhi ka gupt bulava bijli gul hote hi) :- मेरा नाम रजत शर्मा है और मैं पिछले 7 महीने से इस दिल्ली के सरकारी क्वार्टर में किराए पर रह रहा हूँ। ऑफिस की नौकरी और अकेलेपन की वजह से ज़िन्दगी बस एक घिसे पिटे ढर्रे पर चल रही थी। लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों से मेरी नज़र बार-बार ऊपर वाली मंज़िल पर रहने वाली तनुजा भाभी पर अटक जाती थी। उम्र होगी कोई 32-33 साल, गोरा रंग, भरा-पूरा जिस्म और आँखों में एक अजीब सी नमी और बेचैनी।
पति आर्मी में है और अक्सर बाहर रहता है। गर्मी के दिन थे, भाभी अक्सर बालकनी में सूती साड़ी पहने कपड़े सुखाती हुई मिल जाती थीं। उनके पीछे से गुज़रते वक़्त उनकी साड़ी के नीचे झूलते हुए गोल-मटोल चूतड़ और ब्लाउज़ में कसकर बंधे हुए भारी-भरकम बोबे देखकर मेरे अंदर का जानवर जाग जाता था। मैं अपनी ही निगाहों से शर्मिंदा था लेकिन मेरी नज़रें उनकी देह की रेखाओं को टटोलने से खुद को रोक नहीं पाती थीं।
मुझे शक था कि भाभी को भी मेरी इस घूरने की आदत का पता है, बल्कि कभी-कभी तो ऐसा लगता था जैसे वो जानबूझकर अपनी कमर का घुमाव ज़्यादा दिखा रही हैं या साड़ी का पल्लू इस तरह हटा रही हैं कि उनके बोबों के बीच की गहरी घाटी साफ़ नज़र आ जाए। यह मोहल्ले की चुदक्कड़ भाभी का गुप्त बुलावा था मेरे लिए…
मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी का गुप्त बुलावा बिजली गुल होते ही अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

वो दिन था 15 अगस्त का। मोहल्ले में पूरा माहौल देशभक्ति में डूबा था, लेकिन मेरे दिलो-दिमाग पर सिर्फ़ तनुजा भाभी का कब्ज़ा था। शाम को बिजली चली गई और बिजली गुल होते ही सभी के घरों में अँधेरा छा गया। बिजली गुल होने के बाद पूरे इलाके में घुप्प अंधेरा और उमस भरी गर्मी का कहर। मैं अकेला अपने कमरे में पसीने से तरबतर पड़ा था, बस एक छोटी सी रिचार्जेबल लाइट जल रही थी।
तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। मैंने चौंककर दरवाज़ा खोला तो देखा सामने तनुजा भाभी खड़ी थीं। उन्होंने एक पतली सी सफ़ेद चिकनकारी की कुर्ती पहनी थी। लाइट की हल्की रोशनी में उनके मोटे-मोटे निप्पल कपड़े को चीरते हुए बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। “रजत, मेरे घर का इन्वर्टर खराब हो गया है।
बिजली गुल हो जाने की वजह से इतनी गर्मी में मेरा दम घुट रहा है। अगर बुरा न मानो तो बिजली आने तक थोड़ी देर तुम्हारे पंखे के नीचे बैठ जाऊँ?” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी कंपकपी थी, एक ऐसी बेबसी जिसमें एक छुपी हुई कामुक इच्छा भी साफ़ झलक रही थी।
मेरे अंदर का लंड फ़ौरन तन गया और मेरे पाजामे में एक तंग तंबू बनाने लगा। “अरे भाभी, इसमें पूछने वाली क्या बात है, आप अंदर आइए।” मैंने हकलाते हुए दरवाज़ा पूरा खोल दिया। वो अंदर आईं और मेरे पलंग पर मेरे तकिए से पीठ टिकाकर बैठ गईं। उनकी कुर्ती पसीने से पूरी तरह चिपक चुकी थी और उनके बोबों का गोलाई में फैला हुआ फैलाव मेरी आँखों के सामने नंगा नाच कर रहा था।
अँधेरे और उमस ने माहौल को और भी ज़्यादा अंतरंग बना दिया था। मैं उनसे कुछ दूरी पर बैठा था लेकिन उनके जिस्म से आती खुशबू नशीली थी। पसीने और किसी मीठे इत्र का मिश्रण। “रजत, पानी मिलेगा?” उन्होंने अपने सूखे होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा। मैं उठकर गया और रसोई से पानी का गिलास भरकर ले आया। जैसे ही मैंने गिलास उनकी तरफ़ बढ़ाया, मेरी उँगलियाँ उनकी उँगलियों से छू गईं। एक करंट सा दौड़ गया।
उन्होंने शरमाकर आँखें नीची कर लीं। “भाभी, आपको ऐसे पंखा तो नहीं लग रहा होगा। आप कपड़े ढीले कर लीजिए, मैं बाहर चला जाता हूँ।” मैंने उनकी परीक्षा लेने के इरादे से कहा। “नहीं… रुको। बाहर और गर्मी है। तुम… तुम मेरी मदद करोगे?” उसकी आवाज़ भारी हो चुकी थी। वो अपनी करवट बदलकर ऐसे बैठ गई कि उनकी पीठ मेरी तरफ़ हो गई। “कुर्ती के पीछे का हुक खोल दो न, बहुत टाइट है।” मेरे हाथ काँप रहे थे।
मैंने उनकी गर्दन के पीछे झुके हुए बालों को हटाया और काँटे को छुआ। उनकी पीठ की चिकनी त्वचा पर मेरी उँगलियाँ पड़ते ही तनुजा भाभी ने एक लंबी गहरी साँस ली। मैंने हुक खोला और कुर्ती की पिछली नेकलाइन ढीली पड़ गई। उनकी कमर का ऊपरी हिस्सा और ब्रा का पिछला बैंड मेरे सामने बेनकाब हो गया। उनकी पीठ का गोश्त इतना सफ़ेद और मुलायम था कि मेरा मन किया उस पर अपने होंठ रख दूँ।
“अब ये भी खोल दो,” उन्होंने कुर्ती का घेरा ऊपर खींचते हुए ब्रा की तरफ़ इशारा किया। मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और मेरा खड़ा लंड अब अपनी पूरी शख़्ती से पाजामे को फाड़ने की कोशिश कर रहा था। मैंने ब्रा के हुक खोल दिए। जैसे ही हुक खुले, तनुजा भाभी के मोटे-मोटे बोबे पूरी तरह आज़ाद होकर झूल गए। उन्होंने कुर्ती को सिर से उतारकर एक तरफ़ फेंक दिया।
अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में बैठी थीं और उनकी पीठ मेरी तरफ़ थी। “रजत, बहुत दर्द होता है इनमें। क्या तुम ज़रा मालिश करोगे?” उनकी बात सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। ये सब किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। मैंने धीरे से अपने हाथ उनके कंधों पर रखे। उनका जिस्म आग की तरह गर्म था। मैंने अपने अँगूठों से उनकी गर्दन के पीछे दबाव बनाना शुरू किया। “आह… हाँ… यहीं।” वो धीरे से कराह उठीं।
मैंने हौसला बढ़ाया और हाथ नीचे की तरफ़ सरकाते हुए उनकी बगलों के पास तक ले गया। मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी के बोबों के बाहरी उभार को मेरी उँगलियाँ बार-बार छू रही थीं। वो जानबूझकर मेरी उँगलियों के नीचे अपनी देह को सरका रही थीं ताकि मैं उनके बोबों को पूरी तरह थाम लूँ। उनकी पीठ का पसीना मेरे हाथों में मिल रहा था और कमरे में सेक्स की एक अदृश्य सी गंध फैलने लगी थी। मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था।
मैंने हिम्मत करके अपने दोनों हाथ उनकी काँखों के नीचे से निकालकर सीधे उनके नंगे बोबों पर रख दिए। वो तुरंत सकुचाकर सिकुड़ गईं, लेकिन उन्होंने मना नहीं किया। “रजत, ये… ये गलत है। मैं तुम्हारी भाभी हूँ।” वो फ़ुसफुसाईं, लेकिन उनकी गांड मेरी जांघों से चिपकी हुई थी और वो मेरे लंड की गर्मी को साफ़ महसूस कर रही थीं। “गलत नहीं है भाभी। जो अच्छा लगे, वो गलत नहीं होता।” मैंने उनके कान में गर्म साँस छोड़ते हुए कहा और उनके मोटे-मोटे चुचे अपनी मुट्ठियों में भरकर ज़ोर से मसलने लगा।
उनके बोबे इतने बड़े और मुलायम थे कि मेरी उँगलियाँ उनमें पूरी तरह धँस गईं। मैंने उनके निप्पल को अपनी उँगलियों के बीच फँसाकर मरोड़ा। “उईं माँ… रजत… बहुत ज़ोर से। मेरी चूचियाँ बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव हैं।” वो कराह उठीं और उन्होंने अपना हाथ पीछे ले जाकर मेरे पाजामे के ऊपर से मेरे तने हुए लंड को जोर से दबा लिया। उनकी ये हरकत देखकर मुझे यकीन हो गया कि ये औरत कई दिनों से प्यासी बैठी है।
मैंने मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी को अपनी तरफ़ घुमाया और उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया। उनके मुँह से पान खाने की मीठी गंध आ रही थी। मैंने उन्हें पलंग पर पीठ के बल लिटा दिया। पेटीकोट उनकी कमर से ऊपर चढ़ गया और उनकी मोटी-मोटी जाँघें और उन जाँघों के बीच बालों वाली चूत का काला अँधेरा मेरी आँखों के सामने था। उनकी चूत के बाल पसीने से भीगकर सिकुड़े हुए थे और उनकी बुर की लाली साफ़ दिखाई दे रही थी।
“देखो न कैसी रसीली भाभी है मेरी,” मैंने शरारत से कहा और उनकी चूत पर अपनी हथेली रख दी। उनकी फुद्दी तवे की तरह गर्म थी और गीली भी थी। “उँगली डालो न अंदर… देखो न कितनी चिपचिपी हो रही है मेरी चूत।” तनुजा भाभी ने अपनी आँखें बंद करके कहा। मैंने अपनी बीच वाली उँगली उनके चूत के छेद में डाल दी। अंदर का मांस इतना गर्म और फिसलन भरा था कि मेरी उँगली फ़ौरन अंदर खिंच गई।
मैंने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया (Pussy Fingering) तो एक चुच-चुच की आवाज़ आने लगी। भाभी ने अपने कुल्हे हवा में उठाकर मेरी उँगली पर अपनी गांड घुमानी शुरू कर दी। मैं नीचे झुका और उनके बाएँ बोबे के सख्त निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। उसे चूसते हुए मैं अपनी दूसरे हाथ से उनके दूसरे बोबे को बुरी तरह मसल रहा था। “हाँ… ऐसे ही चूसो… मेरे चूचे का दूध पी लो। बहुत दिनों से कोई चूसा नहीं इन्हें।” वो बुरी तरह तड़प रही थीं।
मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी का हाथ मेरे पाजामे के नाड़े से अंदर घुस गया और उन्होंने मेरा गरम और तना हुआ लौड़ा अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। उनके हाथ की छुअन से मेरे लंड के गोटे सिकुड़ गए। वो मेरा लंड पकड़कर ज़ोर से हिलाने लगीं जैसे उसे दुह रही हों। “कितना मोटा लौड़ा है तुम्हारा… बीवी बहुत मज़े लेती होगी।” उन्होंने अपनी अश्लील बातों से मेरी बेचैनी को और बढ़ा दिया।
अब और सहन नहीं हो रहा था। मैंने उनके पैरों को मोड़कर उनके घुटनों को उनके बोबों से सटा दिया। उनकी सेक्सी गांड ऊपर उठ आई और उनकी टाइट चूत और गांड का छेद दोनों मेरे सामने खुले पड़े थे। उनकी भोसड़ी से चूत का रस टपककर उनकी गांड की थिरकन तक बह रहा था। मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुहाने पर रखा। भाभी ने अपनी आँखें खोलकर मुझे बड़ी बेबसी और प्यास से देखा। “डालो रजत… अपना मोटा लंड मेरी रसदार चूत में डालो। मुझे चोदो… ज़ोर से चोदो। मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज रात के लिए।”
उनका ‘रंडी’ शब्द सुनते ही मेरे दिमाग का संतुलन गड़बड़ा गया। मैंने एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनकी टाइट चूत में घुसेड़ दिया। “आआआआह… माँ…!” भाभी ज़ोर से चीख पड़ीं। उनकी चूत के अंदर का गीलापन और गर्मी अविश्वसनीय थी। मैंने उनके कुल्हों को अपने हाथों से पकड़ लिया और पूरी ताकत से उनकी चूत में अपना लंड ठोकने लगा। हर ठोक के साथ उनके मोटे-मोटे बोबे ज़ोर से हिल रहे थे।
पलंग की चरमराहट और हमारी चुदाई की चुच-चुच की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज रहा था। “हाँ… ऐसे ही चोदो मुझे… मेरी बुर फाड़ दो। मैं तो पिछले 3 महीने से तरस रही थी किसी मर्द के लंड के लिए।” भाभी का असली चेहरा सामने आ चुका था। ये वही संस्कारी भाभी थी जो सुबह मंदिर जाती थी, लेकिन अभी मेरे नीचे एक प्यासी छिनाल की तरह लेटी थी।
मैंने अपनी चुदाई करने की रफ़्तार और तेज़ कर दी। मेरे अंडकोष नंगी चुदक्कड़ भाभी की गांड के निचले हिस्से पर ज़ोर से टकरा रहे थे। भाभी के मुँह से सिर्फ़ अस्फुट स्वर निकल रहे थे। “अपनी टाँगें ऊपर करो,” मैंने हुक्म दिया। उन्होंने अपनी मोटी-मोटी जाँघें हवा में उठा दीं। अब मैं उनकी चूत में और भी गहराई तक घुस पा रहा था। मेरा लम्बा लंड उनकी कोख तक जा रहा था। मैंने आगे झुककर उनके होंठ चूस लिए। “चोदो मुझे… मुझे हिलने दो,” ये कहकर भाभी मुझ पर सवार हो गईं।
अब वो उल्टी दिशा में यानी मेरे पैरों की तरफ़ मुँह करके बैठी थीं। ये काउगर्ल पोज़ीशन थी। मेरी नज़रें सीधे उनकी गांड के फैलाव और मेरे लंड को निगलती हुई उनकी चूत पर टिकी थीं। भाभी ने अपने हाथ अपने घुटनों पर रखे और पूरी ताकत से मेरे लंड पर कूदने लगीं (Cock Riding) । उनकी गांड मेरी जाँघों से ज़ोर-ज़ोर से टकरा रही थी और धम्म-धम्म की आवाज़ आ रही थी। “ले मेरा लंड साली चुदक्कड़ भाभी… पूरा अंदर ले कुतिया और अपनी चूत से मेरे लंड का सारा माल निकाल।” मैं उत्तेजना में चिल्ला रहा था।
चुदक्कड़ पड़ोसी भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा, उनके चेहरे पर एक वहशी संतुष्टि थी। “शाबाश… चोद मुझे एक रंडी समझकर… मेरी गांड पर थप्पड़ मार जोर जोर से।” मैंने उनकी गोल-मटोल चूतड़ों पर ज़ोर से थप्पड़ मारा, जिससे लाल निशान पड़ गए।
कुछ देर बाद मैंने भाभी को घुमाकर कुत्ते की तरह चारों हाथ-पैरों पर खड़ा कर दिया। डॉगी सेक्स पोजीशन मेरी सबसे पसंदीदा पोज़ीशन थी। उनकी गांड का ऊपरी हिस्सा और उनकी पीठ की लचक बेहद कामुक लग रही थी। उनके बोबे नीचे गुरुत्वाकर्षण की वजह से लटक रहे थे और झूल रहे थे। मैंने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड फिर से घुसा दिया। अब मैं उनकी कमर पकड़कर उन्हें अपनी तरफ़ खींच रहा था और ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था।
इस सेक्स पोज़ीशन में मेरा लंड उनकी भोसड़ी के अंदर और भी गहरा जा रहा था। मैंने अपनी उँगली मुँह में गीली करके उनकी गांड के छेद पर रखी। भाभी चौंक गईं। “रजत… वहाँ नहीं… गंदा है।” “गंदा नहीं है, बहुत टाइट है,” मैंने कहा और धीरे से उँगली का ऊपरी पोर अंदर डाल दिया। “आह… माँ… ये क्या कर रहा है तू।” वो कराह उठीं लेकिन उन्होंने अपनी गांड को और पीछे कर दिया ताकि मेरी उँगली और अंदर जा सके।
मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी को डबल पेनेट्रेशन का अनुभव करवाने के लिए मैं एक साथ उनकी चूत में अपना लंड और उनकी गांड में अपनी उँगली डालकर उन्हें पागल कर रहा था। उनके झांट के बाल मेरे लंड से रगड़ खा रहे थे और उनकी चूत का पानी मेरे अंडकोष की थैली तक बहकर गीला कर रहा था। डबल पेनेट्रेशन का यह एहसास इतना शानदार था कि मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था।
“रजत… मैं आ रही हूँ… मैं झड़ रही हूँ…!” भाभी ज़ोर से चीखी। उनकी योनि की मांसपेशियाँ मेरे लंड पर ज़ोर से सिकुड़ने लगीं। उनका पूरा जिस्म काँप रहा था और वो मेरे नाम की रट लगा रही थीं। उनके चरमोत्कर्ष का नज़ारा देखकर मैं भी अब ज़्यादा देर नहीं रुक सकता था। “भाभी… मैं भी अंदर ही छोड़ रहा हूँ।” “हाँ… अंदर डाल दे… अपना सारा गाढ़ा वीर्य मेरी कोख में भर दे। मुझे भर दे अपने चिपचिपे माल से।”
चुदक्कड़ भाभी की बात खत्म होते ही मैंने अपना लंड उनकी चूत में एकदम गहराई तक ठूँस दिया और फट पड़ा। मेरे अंडकोष से गर्म-गर्म शुक्राणु की धार निकलकर उनकी बच्चेदानी की दीवारों से टकराने लगी। मैं कराहता रहा और भाभी का नंगा जिस्म ढीला पड़कर पलंग पर गिर गया। मेरा लंड अभी भी उनकी चूत के अंदर ही फड़फड़ा रहा था और बूँद-बूँद करके वीर्य बाहर निकल रहा था। हम दोनों बुरी तरह पसीने से लथपथ थे और हाँफ रहे थे। कमरे में कच्चे सेक्स की तेज़ गंध फैली हुई थी।
करीबन 10 मिनट तक हम दोनों बिना हिले-डुले ऐसे ही लिपटे पड़े रहे। भाभी ने धीरे से मेरा चेहरा अपनी तरफ़ किया और मेरे होंठों पर एक लंबा, संतुष्ट चुंबन लिया। “थैंक यू रजत। मुझे नहीं पता था कि ज़िन्दगी में इतना सुख भी मिल सकता है।” उनकी आँखों में पानी था। मैंने उनके माथे पर हाथ फेरा। “भाभी, ये तो बस शुरुआत है। अब जब भी बिजली जाएगी, तुम मेरे कमरे में आ सकती हो।” हम दोनों हँस पड़े।
उस रात बिजली देर से आई, और हमने उस अँधेरे का हर मुमकिन तरीके से फ़ायदा उठाया। भाभी ने उसके बाद मुझे ब्लोजॉब दिया, मेरे लंड को अपने होंठों और जीभ से पूरी तरह साफ़ किया और मेरा हर बूँद चाट गईं। उनका मुखमैथुन इतना हुनरमंद था कि मैं समझ गया कि उनका पति उन्हें कितनी बेरहमी से अकेला छोड़ता होगा। जब वो जाने लगीं तो उनके चेहरे पर एक अलग ही रौनक थी, जैसे किसी बंजर ज़मीन पर सालों बाद बारिश हुई हो।
मैंने दरवाज़े तक उन्हें छोड़ा। जाते-जाते उन्होंने मेरा फौलादी लंड एक बार फिर पकड़ा और फ़ुसफुसाई, “अब कुछ दिनों तक मेरी चूत बहुत दुखेगी, लेकिन मुझे ये मीठा मीठा तेज दर्द बहुत पसंद है।” मोहल्ले की उस चुदक्कड़ भाभी की ये आखिरी लाइन मेरे दिमाग में घर कर गई और मैं सारी रात उसी पलंग पर नंगा पड़ा उनकी गंध सूंघता रहा और मुस्कुराता रहा। अगली सुबह की शुरुआत बस इसी इंतज़ार में हुई कि पता नहीं कब फिर से बिजली जाए और मोहल्ले की सबसे ज्यादा चुदक्कड़ भाभी का गुप्त बुलावा बुलावा आये सेक्स करने के लिए…


