HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesभिखारिन की चुदाई करी भूख और बेबसी का फायदा उठाकर

भिखारिन की चुदाई करी भूख और बेबसी का फायदा उठाकर

फ्री में पढ़ें गरीब भिखारिन की चुदाई करी भूख और बेबसी का फायदा उठाकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी (Antarvasna Hindi Sex Kahani – Garib bhikharin ki chudai kari bhookh aur bebasi ka fayda uthakar) :- मेरा नाम आकाश है और ये कहानी मेरी ज़िंदगी के उस दौर की है जब मैं 22 साल का एक कुंवारा कंप्यूटर साइंस का स्टूडेंट था। मैं दिल्ली के एक मामूली से इलाके में अपने मम्मी-पापा के साथ रहता था। हर रोज़ की तरह शाम को 4 बजे कॉलेज से लौटने के बाद मेरा एक ही काम होता था, अपने कमरे का दरवाज़ा बंद करके कंप्यूटर पर नंगी लड़कियों की तस्वीरें देखना और हस्तमैथुन करना।

मेरे पास बड़ा ही शानदार कलेक्शन था, सिर्फ न्यूड तस्वीरें, क्योंकि उस वक्त मुझे चुदाई या मुखमैथुन के सीन देखना पसंद नहीं था। मेरे हाथ में मेरा खड़ा लंड था और आंखों के सामने किसी मॉडल के रसीले बोबे, तभी दरवाजे की घंटी बजी। मैंने झट से अपनी पैंट ऊपर खींची और कंप्यूटर को वैसे ही छोड़कर बाहर की तरफ भागा।

दरवाज़ा खोला तो सामने एक जवान भिखारिन लड़की खड़ी थी। वो सेक्सी माल लड़की भीख मांग रही थी और उसकी आंखों में एक अजीब सी भूख और बेबसी साफ झलक रही थी। उस भिखारिन ने मुझसे मदद की गुहार लगाई और मैं बिना कुछ सोचे-समझे से अंदर घर में ले आया। उस वक्त मेरे दिमाग में कोई गंदी बात नहीं थी, बस एक इंसानियत का रिश्ता था जो उस भिखारिन लड़की की भूख और बेबसी को देखकर बना था।

गरीब भिखारिन की चुदाई करी भूख और बेबसी का फायदा उठाकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

गरीब भिखारिन की चुदाई करी भूख और बेबसी का फायदा उठाकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी
Antarvasna Hindi Sex Kahani – Garib bhikharin ki chudai kari bhookh aur bebasi ka fayda uthakar

मैं उसे सीधे अपने कमरे में ले गया और कुर्सी पर बैठने को कहा। जब मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उस सेक्सी भिखारिन लड़की ने अपना नाम किरन बताया और जब मैंने उससे भीख मांगने की वजह पूछी तो उसने जो बताया उसे सुनकर मेरा दिल पसीज गया। उसका बाप गरीबी और बीमारी की वजह से मर चुका था और मां भी हर वक्त बीमार रहती थी।

वो भिखारिन घर में अकेली कमाने वाली थी और पिछले दो दिनों से भूखी थी। मैं तुरंत रसोई में गया और उसके लिए खाना लेकर आया। जब मैं वापस कमरे में दाखिल हुआ तो मेरी सांसें थम गईं। किरन मेरे कंप्यूटर की स्क्रीन को घूर रही थी जहां मेरा सेक्सी स्क्रीन सेवर चल रहा था जिसमें एक नंगी औरत अपने स्तन दबा रही थी। मुझे इतनी शर्म आई कि मैं उसी वक्त जमीन में गड़ जाना चाहता था। मैंने झटपट जाकर कंप्यूटर बंद किया और उसे रोटी पकड़ा दी।

मेरा चेहरा शर्म से तमतमा उठा था। मैं सोच रहा था कि ये कैसी आफत आ गई, लेकिन किरन के चेहरे पर शर्म की जगह एक गहरी उत्सुकता और कामुकता थी। उसने मुझसे बड़ी बेशर्मी से पूछा कि क्या मैंने कभी किसी लड़की या लड़के को चोदा है। उसके इस सवाल ने मेरे पैरों तले की जमीन खिसका दी।

मैं गूंगा बना खड़ा था, कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। मैंने सिर हिलाकर इनकार किया कि मैं तो अभी तक वर्जिन हूं। किरन की आंखें चमक उठीं और उसने वो बात कही जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उसने कहा, “अगर मैं तुम्हारी वर्जिनिटी आज तोड़ दूं तो कैसा रहेगा?” मेरी तो जैसे घिग्घी बंध गई। इतनी खूबसूरत लड़की, जिसे मैंने गरीब समझकर अंदर बुलाया था, वो मुझे चोदने का ऑफर दे रही थी। मेरा लंड तो पहले से ही पैंट में तन रहा था, लेकिन अब हालत ये थी कि ज़िप की चेन टूटने को थी।

भिखारिन ने कहा कि पहले उसे वो सब दिखाओ जो कंप्यूटर पर देखा जा सकता है। किस्मत से मेरे पास एक पुरानी एक्सएक्सएक्स सीडी पड़ी थी। मैंने कांपते हाथों से वो ब्लू फिल्म की सीडी डाली और ब्लू फिल्म शुरू कर दी। पर्दे पर जैसे ही एक मोटे लौड़े को एक रसदार चूत में जाते देखा, कमरे का माहौल गर्म होने लगा। किरन ने आगे बढ़कर मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और मैं भी उसके कमीज़ के हुक निकालने लगा।

कमीज़ उतरते ही सामने उसकी हल्की गुलाबी ब्रा नज़र आई। मेरे हाथ इतने कांप रहे थे कि ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा था। किरन ने मुस्कुराते हुए खुद पीछे हाथ ले जाकर अपनी ब्रा की हुक खोली और मेरे सामने उसके जोड़ीदार बोबे उघड़ आए। कसम से, इतने खूबसूरत और परफेक्ट शेप के चुचे मैंने आज तक किसी फिल्म या मैगजीन में नहीं देखे थे। न ज्यादा बड़े और न ज्यादा छोटे, बिल्कुल सेब की तरह गोल और तने हुए निप्पल वाले।

मैं पागलों की तरह उन पर झपट पड़ा और भिखारिन लड़की के निप्पल चूसने लगा। किरन ने हल्की सी कराह भरी और फिर सीधे मेरी पैंट उतारकर मेरे तने हुए 8 इंच के लंड को अपने मुंह में ले लिया। ये एहसास इतना जबरदस्त था कि मेरी तो चीख ही निकल गई। मैंने अब तक सिर्फ अपने हाथों से ही माल निकाला था, लेकिन उसके गर्म और नम मुंह की गिरफ्त में मेरा लौड़ा मानो किसी और ही दुनिया में पहुंच गया।

वो भिखारिन मेरे लंड को अंदर-बाहर कर रही थी और मैं उसके बोबे मसल रहा था। सिर्फ दो मिनट में ही मुझे लगा कि मेरे अंडकोष में चिपचिपा माल तैयार होकर बाहर आने को बेकरार है। मैंने कहा, “किरन… मैं… मैं झड़ने वाला हूं!” लेकिन उसने मेरा लंड और जोर से दबोच लिया और मेरा सारा गाढ़ा वीर्य उसने एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।

उस भिखारिन ने मेरे शुक्राणु को ऐसे निगल लिया जैसे कोई अमृत पी रही हो। मैं आंखें बंद करके उस पल की मिठास को अपनी रगों में उतरता महसूस कर रहा था। इसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें फैलाकर उसकी बालों वाली चूत को अपने मुंह के करीब लाया।

मैंने उसकी भोसड़ी को चाटना शुरू कर दिया। उस गरीब लड़की की टाइट चूत बहुत ज्यादा गीली और गर्म थी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी फुद्दी के किनारों पर गई, किरन जोर-जोर से चीखने लगी। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी कुल्हे मेरे मुंह पर रगड़ने लगी। मैं उसकी चूत का रस पीता जा रहा था और उसकी उंगलियां मेरी पीठ में धंसती जा रही थीं। उसकी टाइट चूत बुरी तरह फड़क रही थी और उसका सारा माल मेरी जीभ पर आ गया।

इससे पहले कि हम आगे बढ़ पाते, अचानक बाहर के दरवाजे की घंटी फिर से बज उठी। मेरी तो जान ही निकल गई। मैंने सोचा मम्मी-पापा आ गए। मेरा चेहरा सफेद पड़ गया। मैंने भिखारिन लड़की से फुसफुसाकर कहा कि बिस्तर के नीचे छिप जाओ और खुद हड़बड़ी में अपने कपड़े पहनकर और चेहरा धोकर दरवाजा खोलने चला गया।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दरवाजा खोला तो सचमुच मम्मी-पापा ही थे। मम्मी ने पूछा कि रंग क्यों उड़ा हुआ है बेटा तेरे चहरे का…??? मैंने बहाना बना दिया कि सिर में दर्द था। मगर फिर मम्मी सीधे मेरे कमरे में घुस गईं। वहां पड़े गंदे बर्तन देखकर मम्मी चिल्लाईं, लेकिन किस्मत से बिस्तर के नीचे नहीं झांका। मेरी तो जान अटकी हुई थी। इतने में पापा भी मेरे कमरे में आ गए और बिना कुछ कहे कंप्यूटर ऑन करके फ्री सेल खेलने लग गए। मैं अंदर ही अंदर घुट रहा था कि कहीं किरन के पैर न दिख जाएं या उसे छींक न आ जाए।

वो बेचारी भिखारिन तीन घंटे तक मेरे पलंग के नीचे अंधेरे में दुबकी रही। तभी फोन की घंटी बजी और खबर मिली कि मेरा कज़न एक्सीडेंट में घायल हो गया है। मम्मी-पापा तुरंत हॉस्पिटल के लिए निकल गए और कह गए कि शायद रात वहीं कटे। जैसे ही उनकी गाड़ी बाहर निकली, मैंने दरवाजा लॉक किया और किरन को बिस्तर के नीचे से निकाला। बेचारी का बुरा हाल था, लेकिन उसकी आंखों में अब भी वही मस्त चमक थी।

उस रात पूरा घर हमारा था और हमारी हवस का कोई ठिकाना नहीं था। मैं बाजार से दौड़कर दो नई ब्लू फिल्में (Porn Film) ले आया। हम दोनों नंगे होकर बिस्तर पर एक दूसरे से लिपट गए। मैंने फिल्म चलाई और हम उसे देखते हुए एक-दूसरे का तन चूमने लगे। हमारे होंठ आपस में ऐसे जुड़े मानो हम बरसों से एक-दूसरे के प्यासे हों।

उस भिखारिन की जीभ मेरे मुंह में ऐसे नाच रही थी जैसे कोई रंडी नाचती है। हमारी लार एक-दूसरे के मुंह में जा रही थी और मेरा लौड़ा फिर से पत्थर की तरह सख्त हो गया था। इस बार मैंने 69 पोजीशन में आकर उसकी चूत को बुरी तरह चाटा और उसने मेरे पूरे लंड को अंदर तक गटक गया।

मेरा लंड उसकी लार से इतना तर हो गया था कि अब उसे चिकना करने की कोई जरूरत नहीं थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया और पहली बार अपने लंड की सुपारी उसकी टाइट और तंग चूत के मुंह पर रखी। उसकी चूत का रस इतना ज्यादा था कि जैसे ही मैंने जोर लगाया, मेरा पूरा मोटा लौड़ा एक झटके में उसकी फुद्दी के अंदर समा गया। किरन ने दर्द और मजे की एक गहरी आह भरी और अपनी टांगों से मेरी पीठ को जकड़ लिया।

वो मेरा पहला वाकई का इंटरकोर्स था। ये मेरी ज़िंदगी का पहला मौका था जब मेरा लंड किसी जीती-जागती चूत के अंदर था। भिखारिन की चूत की वो गर्माहट, वो भीगापन और वो टाइटनेस… ये सब बयान करने के लिए अल्फाज़ कम पड़ जाएंगे। मैं कुछ देर तक तो अपने लंड को बिना हिलाए अंदर ही रखे रहा, बस उस जादुई दबाव को महसूस करता रहा। फिर मैंने धीरे-धीरे झटके देना शुरू किया।

मैं पूरे जोश में उस कुंवारी गरीब लड़की की टाइट चूत में अपना भोसड़ा फाड़ लंड घुसेड़ रहा था। उस गरीब लड़की के मुंह से निकल रही चीखें और उसकी उंगलियां मेरी गांड पर पड़ रही खरोंचें बता रही थीं कि उसे भी असली मर्द का माल पड़ने का कितना गहरा सुख मिल रहा है। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया और पीछे से उसके गोल-मटोल चूतड़ों पर अपना लंड पटकते हुए अंदर डाल दिया। इस बार उसकी चूत और भी गहरी और जकड़ी हुई लग रही थी।

मैं उस नंगी भिखारिन लड़की के बाल खींच रहा था और उसकी गांड पर धम्म-धम्म चोद रहा था। दोनों के पसीने से बिस्तर तर-बतर हो चुका था। मेरा वीर्य इतना गाढ़ा था कि जब मैं झड़ा तो ऐसा लगा जैसे मेरे अंडकोष से सारी गर्मी निकलकर उसकी बच्चेदानी में जमा हो गई हो। हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर उसी अवस्था में सो गए।

सुबह 6:30 बजे मेरी आंख खुली तो वो भिखारिन लड़की मेरी बांहों में सो रही थी। उसके गुलाबी गाल और भरे हुए होंठ देखकर मेरा लंड एक बार फिर सलामी देने को तैयार हो गया। मैंने उसके होंठों को चूमा तो वो हल्की सी मुस्कुराई। ये जानते हुए कि ये शायद आखिरी मौका है, उसने अपनी आंखों से इशारा किया। मैंने फिर से उसकी नंगी बदन को चाटना शुरू किया, उसके कांख की महक से लेकर उसकी झांट के बालों तक, हर जगह अपनी जीभ फिराई।

इस बार उसने मेरा लंड चूसा और फिर पीछे मुड़कर बोली, “आज मेरी गांड मारो।” मेरे लिए ये बिल्कुल नया था। मैंने बेड के साइड से लोशन उठाया और अपने लंबे लंड पर लगाकर उसे चमका दिया। किरन ने घुटनों के बल होकर अपने चूतड़ फैला लिए और मैंने उसके गुलाबी गांड के छेद पर धीरे-धीरे दबाव डाला।

गुदा बहुत टाइट था उस गरीब लड़की का, एनल सेक्स करने के दौरान मेरे लंड के गोटे तक जोर से दर्द महसूस कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे मेरा सुपाड़ा उस गरीब भिखारिन की गांड के अंदर सरकता गया, किरन के मुंह से ‘आह्ह्ह्ह… भोसड़ी के… डाल पूरा अंदर’ की आवाजें आने लगीं। उस गरीब भिखारिन की गांड की गर्मी और मेरे लंड का वो कसा हुआ घर्षण इतना शानदार था कि मैं पांच मिनट भी नहीं टिक पाया और उसकी गांड के अंदर ही अपना चिपचिपा माल छोड़ दिया।

जब आंख खुली तो 8 बज चुके थे। मुझे याद आया कि मम्मी-पापा कभी भी आ सकते हैं। हमने जल्दी-जल्दी कमरा साफ किया, बिस्तर की चादर बदली और सारे सबूत मिटा दिए। जाते-जाते मैंने जबरदस्ती उसके हाथ में 1000 रुपए थमा दिए और उसकी तरफ कृतज्ञता से देखा। किरन मेरी ज़िंदगी की पहली औरत थी जिसने मुझे बिना किसी शर्त के मेरा सपना पूरा किया था।

मैंने भूख और बेबसी का फायदा उठाकर उस गरीब लड़की के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाये। उस कामुक भिखारिन लड़की ने न केवल मेरी वर्जिनिटी तोड़ी बल्कि मुझे चुदाई के वो सबक सिखाए जो किताबों या वीडियो में नहीं मिलते। उसकी रसीली चूत, गर्म गांड और मोहक बोबों का वो एहसास आज भी मेरे जिस्म में गूंजता है।

वो दरवाजे से बाहर निकली और मैं बिस्तर पर लेटकर छत को ताकता रहा। मेरे लंड पर अब भी हल्का-हल्का दर्द था, जैसे कोई निशानी हो उस बेहिसाब मजे की। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि भूख सिर्फ पेट की नहीं होती, जिस्म और रूह की भूख भी कितनी गहरी और जलाने वाली होती है।

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