HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesशौहर को पता था उनके अब्बा मेरी चुदाई करके हवस मिटाते हैं

शौहर को पता था उनके अब्बा मेरी चुदाई करके हवस मिटाते हैं

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मेरा नाम सना खान है और मैं 28 साल की एक शादीशुदा मुस्लिम औरत हूँ। मेरी शादी आसिफ खान से हुई थी, जो लखनऊ के एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखता है। हमारी शादी को 5 साल हो चुके थे और हम आसिफ और उनके 55 साल के विधुर पिता, फारूक साहब के साथ एक बड़े पुश्तैनी घर में रहते थे। मेरी सास का देहांत 3 साल पहले हो गया था, और तब से घर की सारी जिम्मेदारियाँ मेरे कंधों पर आ गई थीं।

शुरू में सब कुछ सामान्य था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से मैंने ससुर जी की निगाहों में एक अजीब सी चमक देखी। वो अक्सर मुझे घूरते, खासकर जब मैं गीले कपड़ों में नमाज़ पढ़कर आती या रसोई में काम करते हुए पसीने से तरबतर हो जाती। उनकी आँखें मेरे 36D के बोबों पर ऐसे टिक जातीं जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार को देख रहा हो। मुझे ये सब अजीब लगता था, पर मैं चुप रहती थी।

मेरे शौहर आसिफ की नौकरी ऐसी थी कि वो अक्सर रात की शिफ्ट में काम करता था। कई बार मैं अपने कमरे में अकेली लेटी सोचती कि मेरी ज़िंदगी कितनी वीरान हो गई है। मेरे शौहर आसिफ से शारीरिक संबंध भी महीने में बमुश्किल 1 या 2 बार बन पाता, और वो भी इतनी जल्दी खत्म होता कि मेरी भूख बुझने की बजाय और भड़क जाती। मेरी चूत हर रात गीली रहती, मेरे निप्पल तने रहते, लेकिन कोई उन्हें सहलाने वाला नहीं होता था।

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उस रात, आसिफ अपनी नाइट शिफ्ट पर था और मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी। गर्मी बहुत थी, इसलिए मैंने केवल एक पतली नाइटी पहनी हुई थी, जो मेरे उभरे हुए शरीर को किसी तरह छुपा पा रही थी। मेरे बाल खुले थे और उनमें से गुलाब जल की हल्की खुशबू आ रही थी। अचानक दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।

“सना, बेटा, क्या तुम जाग रही हो?” ससुर जी की भारी आवाज़ थी। मैंने जल्दी से दुपट्टा ओढ़ा और दरवाज़ा खोला। वो सफेद कुर्ते-पायजामे में थे, उनकी दाढ़ी में सफेदी थी, लेकिन शरीर अभी भी मजबूत था। “मेरा ब्लड प्रेशर चेक कर दो बेटा, तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही।” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी।

मैं उन्हें अपने कमरे में ले आई और ब्लड प्रेशर मॉनिटर लगाने लगी। वो मेरे बिस्तर पर बैठ गए और मैं उनके पास खड़ी होकर मशीन लगा रही थी। तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरी नाइटी कितनी पतली है और उनकी नज़रें मेरे बोबों पर टिकी हुई हैं। मेरे निप्पल अचानक सख्त हो गए, और मैंने देखा कि उनके पायजामे के नीचे कुछ हरकत हो रही थी। मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।

“सब नॉर्मल है ससुर जी, बस थोड़ा आराम कीजिए,” मैंने धीमी आवाज़ में कहा। “नहीं बेटा, बीपी तो ठीक है, लेकिन दिल की धड़कन तेज़ है,” उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली। उनका स्पर्श बिजली की तरह था। मैं सकपका गई, लेकिन अपना हाथ नहीं छुड़ाया। उनकी उँगलियाँ धीरे-धीरे मेरी बाँह पर ऊपर की ओर बढ़ने लगीं।

“आप… आप ये क्या कर रहे हैं?” मेरी आवाज़ काँप रही थी। “चुप रहो सना, मैं बहुत दिनों से देख रहा हूँ तुम्हें। जिस तरह तुम्हारी चूत गीली रहती है, जिस तरह तुम्हारे बोबे तड़पते हैं… क्या आसिफ कभी इन्हें सही से चोद पाया है?” उनके शब्द गंदे थे, लेकिन सच्चाई जानने वाले। मेरी साँसें तेज़ हो गईं और मेरे पैरों के बीच एक गर्म सिहरन दौड़ गई।

“लेकिन ये गलत है ससुर जी… आप रिश्ते में मेरे ससुर हैं और मैं आपकी बेटी की उम्र की हूँ…” मुझे भी मेरी हवस मिटवानी थी इस लिए मैंने कमज़ोर विरोध किया, लेकिन मेरा शरीर पहले ही धोखा दे चुका था। मेरी चूत की दरार से रस टपकने लगा था। “गलत और सही छोड़ो सना, मर्द और औरत का मिलना फितरत है।” उन्होंने मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे दुपट्टे को फर्श पर फेंक दिया। मेरे बड़े-बड़े बोबे हल्की रोशनी में चमक रहे थे।

मेरे हवस से भरे विधुर अब्बा जान का एक हाथ मेरी कमर पर था और दूसरा मेरी गांड को दबोच रहा था। “इतनी बड़ी गांड है तुम्हारी, सना। पूरे मोहल्ले की रंडियों से बढ़कर।” उनकी बातें सुनकर मेरी टाइट चूत और गीली हो गई। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके हाथों को अपने शरीर पर महसूस करने लगी। उन्होंने मेरी नाइटी का पट्टा खींच दिया और मेरे बोबे बाहर आ गए।

“अल्लाह… इतने खूबसूरत चुचे… मेरा बेटा आसिफ का क्या कसूर है जो इन्हें नहीं सहलाता।” उन्होंने मेरे निप्पल को अपने मुँह में ले लिया। उनके गर्म होंठ और जीभ का स्पर्श ऐसा था जैसे कोई भूखा बच्चा माँ का दूध पी रहा हो। मैं ज़ोर से कराह उठी। मेरे हाथ अपने आप उनके बालों में चले गए। वो बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूस रहे थे, और मेरी चूत का रस मेरी जाँघों तक बह आया था।

“अब लेट जाओ बिस्तर पर,” मुझे मेरे विधुर अब्बा जान ने आदेश दिया। मैं एक रंडी की तरह आज्ञाकारी बनकर लेट गई। उन्होंने अपना कुर्ता उतार फेंका। उनकी छाती पर सफेद बाल थे, लेकिन शरीर मज़बूत था। फिर उन्होंने अपना पायजामा नीचे सरकाया, और मेरी साँसें थम गईं। उनका लंड मेरी कल्पना से कहीं बड़ा था। एक मोटा, लम्बा खड़ा लंड, जिसके अंडकोष भारी-भारी लग रहे थे।

“इसे छूओ सना, देखो कितना तना हुआ है तुम्हारे लिए।” मेरे हाथ काँपते हुए उनके लौड़े तक पहुँचे। जैसे ही मेरी उँगलियाँ उस गर्म मांस पर पड़ीं, उन्होंने एक गहरी साँस ली। मैंने उसे धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। उनके लंड की नसें उभर आई थीं और ऊपर से चिपचिपा माल टपक रहा था। मैंने झुककर उसकी एक बूँद अपनी जीभ पर चखी—नमकीन और गाढ़ा।

“बहुत हुआ… अब अपनी टाँगें फैलाओ,” उन्होंने गुर्राते हुए कहा। मैंने अपनी नाइटी पूरी उतार फेंकी और अपनी टाँगें फैला दीं। मेरी चूत पूरी तरह गीली थी, उसके बाल हल्की रोशनी में चमक रहे थे। उन्होंने अपना चेहरा सीधे मेरी रसदार चूत पर लगा दिया। “इतनी भीगी चूत… बहुत दिनों से प्यासी थी न तुम?” कहते हुए उनकी जीभ मेरी चूत की दरार पर घूमने लगी।

मैं चीख पड़ी। ये वो एहसास था जिसकी मुझे सालों से भूख थी। मेरे विधुर अब्बा जान मेरी चूत को ऐसे चाट रहे थे जैसे कोई आम चूस रहा हो। उनकी जीभ मेरी भगनासा पर नाच रही थी, और उनकी 2 उँगलियाँ मेरी गांड के छेद को सहला रही थीं। “हाँ… और… और चाटो… मेरी भूखी चूत को चाटो…” मेरे मुँह से बेशर्मी के शब्द निकलने लगे।

“अब मेरी बारी है,” उन्होंने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। उन्होंने मेरा चेहरा अपने लंड के पास लाया। “अपनी ससुर जी का लंड चूसो, सना।” मैंने बिना हिचकिचाहट के उस गर्म तने को अपने मुँह में ले लिया। मेरे होंठ उसके सिरे पर कसे और मैंने ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। उनका लंड मेरे मुँह में फड़फड़ा रहा था और मैं उसे गले तक उतारने की कोशिश कर रही थी।

“रुको, वरना अभी झड़ जाऊँगा।” उन्होंने मेरा सिर पीछे खींचा और मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वो मेरे ऊपर चढ़ आए और अपने लंड को मेरी चूत के होठों पर रगड़ने लगे। मेरी चूत गर्म भट्टी की तरह जल रही थी। “अब डालो … प्लीज़ अब्बा… मेरी चूत में अपना लंड डालो…” मैं एक वेश्या की तरह जोरदार चुदाई की भीख माँग रही थी मेरे विधुर अब्बा जान से।

उन्होंने एक ही झटके में अपना पूरा लौड़ा मेरी चूत के अंदर उतार दिया। दर्द और आनंद का एक साथ ऐसा मिश्रण हुआ कि मेरी आँखों से आँसू निकल पड़े। मेरी टाइट चूत में इतना मोटा लंड पहली बार घुसा था। “अल्लाह… ससुर जी… आपका लंड… बहुत बड़ा है…” मैं कराह उठी। वो ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगे। हर झटके के साथ मेरे बोबे उछल रहे थे।

“चुप रहो सना… अभी तो बहुत कुछ बाकी है…” वो मेरी गांड के नीचे तकिया रखकर मेरी टाँगें अपने कंधों पर डाल चुके थे। ये पोज़िशन ऐसी थी कि उनका लंड सीधे मेरी बच्चेदानी तक जा रहा था। हर झटके के साथ मेरी चूत से चट-चट की आवाज़ें आ रही थीं। मेरी चूत का रस मेरे ससुर के अंडकोषों पर लगकर चमक रहा था।

“अब पलट जाओ बहू रानी… अपनी गांड ऊपर करो,” उन्होंने मुझे घुमा दिया। मैं कुतिया की तरह चारों हाथों पर थी, और उन्होंने पीछे से मेरी गांड पकड़कर अपना लंड फिर से घुसा दिया। अब मेरी चूत और भी टाइट महसूस हो रही थी। वो मेरी कमर पकड़कर ऐसे चोद रहे थे जैसे कोई जानवर हो। उनकी एक उँगली मेरे गांड के छेद में भी चली गई।

“हाँ… डालो उंगली… मेरी गांड में… और चोदो मेरी चूत को…” मैं पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी। मेरे अंदर एक तूफान उठ रहा था। “ससुर जी… मैं… मैं आ रही हूँ…” मेरी चूत की मांसपेशियाँ ज़ोर से सिकुड़ने लगीं। मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई और मेरी चूत ने उनके लंड को जकड़ लिया।

“ठीक है… अब मैं भी… अपनी रंडी बहू की चूत में अपना माल छोड़ता हूँ…” उन्होंने 3-4 आखिरी ज़ोरदार झटके दिए और उनके गर्म वीर्य की धारें मेरी चूत के अंदर फूट पड़ीं। मैं उनके शुक्राणु की गर्मी को अपनी बच्चेदानी में महसूस कर सकती थी। हम दोनों वहीं ढेर हो गए, पसीने से लथपथ और साँसें फूली हुई।

जब आँख खुली तो सुबह के 4 बज रहे थे। ससुर जी वहाँ नहीं थे। मेरी चूत से अभी भी उनका चिपचिपा माल रिस रहा था। मैंने अपना फोन उठाया— मेरे शौहर आसिफ का मैसेज था: “सुबह 7 बजे तक आ जाऊँगा।” मैं उठकर बाथरूम गई और पानी की तेज़ धार के नीचे खड़ी होकर सोचने लगी कि क्या हुआ था। मैंने अपने ससुर के साथ सेक्स किया था… और मुझे कोई ग्लानि नहीं हो रही थी।

बाथरूम से निकलकर मैंने अपनी चूत को तौलिये से पोंछा। शीशे में मेरा चेहरा अलग ही चमक रहा था। मेरे बोबों पर उनके दाँतों के निशान थे, और मेरी गांड पर उनकी उँगलियों के लाल चिन्ह। मैंने सोचा कि ये सब गलत था, लेकिन मेरी चूत फिर से गीली हो गई। शायद मैं सच में एक कामुक औरत थी, जिसे अपनी भूख मिटाने के लिए कोई भी रास्ता मंज़ूर था।

अगली कुछ रातों तक ऐसा ही होता रहा। जब भी आसिफ नाइट शिफ्ट पर जाता, ससुर जी मेरे कमरे में आ जाते। कभी हम फर्श पर चुदाई करते, कभी सोफे पर, कभी वो मुझे दीवार से लगाकर चोदते। उन्होंने एक रात मेरी गांड का छेद भी चाटा और उसमें अपनी जीभ डाली। मैंने उनका हस्तमैथुन (Masturbation) भी किया और कई बार ससुर जी के लंड के निचे लड़के अंगूरों जैसे अंडकोष (Testicles) चूसे। हर बार ये सोचकर कि ये आखिरी बार है, लेकिन भूख हर बार बढ़ती ही गई।

एक रात, मैंने मेरे शौहर से पूछ ही लिया: “तुम हमेशा नाइट शिफ्ट ही क्यों करते हो? क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते?” आसिफ ने मुस्कुराकर कहा: “सना, मुझे पता है कि तुम्हें मुझसे ज़्यादा कुछ और चाहिए। और मुझे पता है कि अब्बा तुम्हारा ख्याल रखते हैं।” मेरी साँसें रुक गईं। “तुम… तुम जानते हो?” मैंने काँपते हुए पूछा।

“हाँ सना, मुझे सब पता है की तुम्हरे और मेरे विधुर अब्बा जान के बीच हर रात अवैध सेक्स संबंध बनते हैं। मैं चाहता हूँ कि अब्बा खुश रहें। माँ के जाने के बाद वो बहुत अकेले थे। और तुम… तुम भी मुझसे खुश नहीं थी।” आसिफ की आँखों में आँसू नहीं थे, बल्कि एक अजीब सी स्वीकृति थी। “मैंने ही अब्बा से कहा था कि वो तुम्हारे पास जाएँ।” मेरा दिमाग सुन्न हो गया। तो ये सब आसिफ की साजिश थी?

“लेकिन अब एक शर्त है,” मेरे पति आसिफ ने कहा। “अगली बार, मैं देखना चाहता हूँ तुम्हारी और मेरे विधुर अब्बा जान की चुदाई।” उस रात के बाद, हम तीनों के रिश्ते बदल गए। मेरा शौहर आसिफ कभी-कभी कैमरा लेकर हम ससुर बहू की अवैध चुदाई रिकॉर्ड करता, कभी-कभी बस एक कोने में बैठकर हम दोनों को सेक्स करते हुए देखता। और मैं… मैं शर्म छोड़ चुकी थी। मेरी चूत की भूख ही मेरा कर्म बन गई थी।

प्रिय पाठकों, ये मेरी और मेरे विधुर ससुर के अवैध सेक्स संबंध की कहानी थी—सच्ची या झूठी, ये फैसला आपका है। मैंने अपने मन की हर बात, हर एहसास, हर चुदाई का खुलकर वर्णन किया है। अब मैं आप सभी से गुज़ारिश करती हूँ कि कृपया अपनी ईमानदार प्रतिक्रिया और विचार ज़रूर दें। क्या मैंने जो किया वो गलत था? क्या आप मेरी जगह होते तो क्या करते? आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं।

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