HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesबिना कंडोम के जब ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मुझे मर्द बनाया

बिना कंडोम के जब ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मुझे मर्द बनाया

मुफ्त में पढ़ें बिना कंडोम के जब ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मुझे मर्द बनाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी – Muft mein padhen bina condom ke jab office wali chhinal didi ne mujhe mard banaya — Antarvasna Hindi sex kahani – Read for free how the promiscuous office woman made me a man without a condom — an Antarvasna Hindi sex story …

पहली बार का नाम सुनते ही पसीने छूट जाते हैं ना? मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था, पर उस रात ने मुझे वो सिखाया जो कोई किताब नहीं सिखा सकती। मैं 28 साल का जवान लड़का था, एक मीडियम साइज़ का शहर, जयपुर, और एक ऐसी औरत जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी। नाम था रूपा, उम्र 34 साल, और सेक्स का इतना तजुर्बा इतना कि मैं तो बस उसके सामने बच्चा था।

मेरी पहली नौकरी थी, एक छोटी सी प्राइवेट फर्म में। ऑफिस में रूपा दीदी सबकी फेवरेट थीं, हमेशा हंसती-खिलखिलाती, पर उनकी आंखों में एक गहराई थी जो मुझे खींचती थी। मैं उनसे बात करने के बहाने ढूंढता, चाय के कप में चीनी घोलते हुए उनकी उंगलियों को देखता। वो बिना किसी हिचक के मुझसे बातें करतीं, कभी-कभी मेरे कंधे पर हाथ रख देतीं और मेरी सांसें थम जातीं।

एक दिन बारिश में मैं भीगता हुआ ऑफिस पहुंचा। रूपा दीदी ने अपना दुपट्टा निकालकर बड़े प्यार से मेरा सिर पोंछा, उनकी उंगलियां मेरे बालों में थीं, चेहरे पर उतरता पानी उनके सेक्सी स्तनों पर टपक रहा था। उस वक्त मेरे मन में जो आया, वो बताना मुनासिब नहीं, पर लगा कि ये कामुक औरत मुझे पागल कर देगी। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं और बोलीं, “आज शाम को मेरे घर आ जाओ, कुछ ज़रूरी काम है।”

मुफ्त में पढ़ें बिना कंडोम के जब ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मुझे मर्द बनाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

मुफ्त में पढ़ें बिना कंडोम के जब ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मुझे मर्द बनाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी Muft mein padhen bina condom ke jab office wali chhinal didi ne mujhe mard banaya — Antarvasna Hindi sex kahani
Muft mein padhen bina condom ke jab office wali chhinal didi ne mujhe mard banaya — Antarvasna Hindi sex kahani

शाम को मैं कांपते कदमों से उनके फ्लैट पर पहुंचा। दरवाज़ा खोलते ही रूपा दीदी एक पारदर्शी साड़ी में थीं, उनके बोबे साफ झलक रहे थे, कमर की नाभि बार-बार मेरी नज़रें खींच रही थी। कमरे में हल्की अगरबत्ती की खुशबू थी, नीली लाइटें और ठंडी हवा। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और मेरे पैंट में लंड अकड़ने लगा था।

“आओ, बैठो,” वो बोलीं और मुझे सोफे पर बिठाकर खुद पास आ बैठीं। उनका कामुक (seductive) खुशबू वाला इत्र मेरे दिमाग को सुन्न कर रहा था, हाथ मेरी जांघों पर रख दिया। “तुम शर्माते बहुत हो, पर मैं जानती हूं तुम्हारे मन में क्या चल रहा है।” वो धीरे से हंसीं और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। सामने थे उनके 36D के चुचे, गोल-मटोल, जिनके निप्पल काले और खड़े हुए थे।

ऑफिस वाली छिनाल दीदी के गोल-मटोल बूब्स देखते ही मेरी सांसें तेज़ हो गईं। “दीदी, ये… मैंने कभी…” इतना ही कह पाया कि उन्होंने मेरा चेहरा अपने बोबों के बीच दबा लिया। गर्माहट, खुशबू और मुलायमियत ने मुझे पूरी तरह घेर लिया। उन्होंने मेरी कमीज़ उतारी और अपनी जीभ मेरे सीने पर फेरने लगीं। हर स्पर्श से करंट सा लगता था, मानो जिस्म के रोम-रोम में आग लग गई हो।

ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। साड़ी के नीचे वो बिल्कुल नंगी थीं और वहां की गर्मी और नमी ने मुझे पागल कर दिया। “आज तुझे सब सिखाऊंगी, पहली बार है ना?” वो फुसफुसाईं, उनकी सांसों में शराब और बीड़ी की महक थी। मैंने हामी में सिर हिलाया, तो वो मेरी पैंट उतारने लगीं।

मेरा लंड अब पूरी तरह तना हुआ था, 6.5 इंच का, मोटा और फूला हुआ। ऑफिस वाली छिनाल दीदी ने उसे हाथ में पकड़ा, उंगलियों से सहलाने लगीं और बोलीं, “कितना प्यारा लौड़ा है तेरा, एकदम तगड़ा।” उन्होंने मेरी आंखों में देखा और धीरे से मुंह में ले लिया। उनका मुंह गर्म और गीला था, जीभ मेरे लंड के ताज पर गोल-गोल घूम रही थी। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और हल्की-हल्की आहें भरने लगा।

वो ऑफिस वाली छिनाल दीदी ब्लोजॉब (Blowjob) देने में माहिर थीं, कभी पूरा लंड मुंह में लेतीं, कभी सिर्फ ऊपरी हिस्सा चूसतीं। मेरे लंड के गोटे उनके हाथों में थे, हल्के से दबाए जा रहे थे। मुझे लगा कि बस निकल ही जाऊंगा, पर उन्होंने मेरी आंखों में देखा और रुक गईं। “इतनी जल्दी नहीं, अभी तो बहुत कुछ बाकी है।”

फिर वो सोफे पर लेट गईं और अपनी टांगें फैला दीं। उनकी चूत के बाल हल्के से कटे हुए थे, भीतर का गुलाबी मांस चमक रहा था। “आ, अपनी रानी को चूस,” उन्होंने आदेश दिया। मैंने हिचकिचाते हुए उनके पैरों के बीच अपना मुंह रख दिया। वहां की खुशबू तेज़ थी, नमकीन और मीठी सी। मेरी जीभ उनके भीतर जाने लगी तो रूपा दीदी ज़ोर से कराह उठीं।

“हां… ऐसे ही… और तेज़…” वो मेरे बाल खींचतीं, अपनी कमर ऊपर उठातीं। मैंने उनकी चूत के रस को चाटा, वो चिपचिपा माल मेरे मुंह में भर गया। उनकी गांड का छेद भी मेरी उंगलियों की जद में आ गया था। धीरे-धीरे मैंने अपनी 2 उंगलियां उनकी चूत में डालीं और अंगूठे से उनकी गांड का छेद दबाने लगा। वो चीख पड़ीं और उनके पूरे जिस्म में ऐंठन होने लगी।

“बहुत हुआ, अब मुझे चोद,” छिनाल दीदी ने मुझे ऊपर खींचा। मैंने मेरे खड़े लंड पर कामासूत्र सुपर डॉट्स (Kamasutra Super Dots) कंडोम पहनने की कोशिश की तो वो बोलीं, “आज कंडोम रहने दे, मैं पिल्स लेती हूं बिना कंडोम के ही सेक्स कर मेरे साथ, और मुझे तेरा नंगा लंड चाहिए।” ये सुनते ही मैं उनके ऊपर था, अपना खड़ा लंड उनकी रसदार चूत के द्वार पर रगड़ने लगा। वो इतनी गीली थीं कि पहली बार में ही पूरा लंड भीतर चला गया।

उस गर्म, मुलायम और टाइट चूत का एहसास मैं कभी नहीं भूल सकता। हर बार जब मैं भीतर जाता, वो चीखतीं, “आह… और ज़ोर से, रंडीबाज! मुझे पूरी चोद डाल।” उनकी इसी गंदी बात ने मुझे और उत्तेजित कर दिया। मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा।

बिस्तर चरमरा रहा था, उनके बोबे उछल रहे थे और पसीने की बूंदें उनके माथे पर चमक रही थीं। “हां, मैं हूं छिनाल, तेरी निजी वेश्या, मुझे अच्छे से चोद!” उनकी आवाज़ कमरे में गूंज रही थी और मैं पूरी बर्बरता से उनकी चूत मार रहा था। फिर उन्होंने मुझे रोका और चारों ओर घूम गईं।

“अब मेरी गांड मार,” उन्होंने अपने चूतड़ फैलाए एनल सेक्स करने के लिए। मैंने उनकी गांड के छेद पर अपना लंड रगड़ा, वो बहुत टाइट था। उन्होंने अपनी ही चूत का रस उंगलियों से निकालकर अपनी गांड पर लगाया। मैंने धीरे-धीरे अपना लौड़ा उनके भीतर धकेला, उनकी चीख निकल गई। “आह… रुक मत, और अन्दर डाल।”

गुदा सेक्स का एहसास कुछ और ही था, गांड बहुत ज्यादा टाइट और गर्म। मैंने उनके कुल्हे पकड़ लिए और ज़ोर-ज़ोर से उनकी गांड मारने लगा वो भी बिना कंडोम के ही (Anal Sex Without Condom)। उनके बोबे आगे-पीछे झूल रहे थे, पसीना मेरी आंखों में जा रहा था, हम दोनों की सांसें मिल गई थीं। “बस, अब निकलने वाला हूं,” मैंने भारी सांसों में कहा।

“सिर्फ लंड अन्दर ही तो डालना है, मेरी चूत में आ जा,” वो छिनाल पीछे मुड़कर बोलीं और झट से घूमकर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया। 3-4 और तेज़ धक्कों के बाद मेरा सारा वीर्य उनकी चूत में निकल गया। वो गर्म शुक्राणु की लहरों को महसूस कर मेरे ऊपर ही ढह गईं। कुछ देर हम वैसे ही लिपटे पड़े रहे, हमारी सांसें सामान्य हो रही थीं।

अगली सुबह मेरे मन में घबराहट थी, क्योंकि हमने बिना कंडोम के सेक्स किया था। छिनाल दीदी ने मेरा माथा चूमा और कहा, “डर मत, मैं हर 3 महीने में अपना टेस्ट करवाती हूं, और पिल्स का पूरा ख्याल रखती हूं।” पर फिर उन्होंने समझाया, “अगली बार कंडोम ज़रूर इस्तेमाल करना, ये सिर्फ प्रेगनेंसी से नहीं, बल्कि बीमारियों से भी बचाता है। आज का दिन मेरी गलती थी।”

उस दिन के बाद हम कई बार मिले, पर हमेशा पूरी सावधानी के साथ। रूपा ने मुझे सिखाया कि एक्सपायर्ड कंडोम इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, कैसे पता करें कि कंडोम खराब तो नहीं, और हर नए पार्टनर के साथ टेस्ट करवाना क्यों ज़रूरी है। उसने मुझे ये भी बताया कि पुल आउट मेथड या पीरियड में बिना कंडोम के सेक्स करना कितनी बड़ी गलती हो सकती है। उस एक रात ने मुझे सिर्फ चुदाई का मज़ा ही नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया।

आपको मेरी ये बिना कॉन्डोम के चुदाई करने वाली अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी कैसी लगी? क्या आपने भी कभी बिना कंडोम के ऐसा कुछ अनुभव किया या कोई गलती की? मुझे अपनी प्रतिक्रिया और कमेंट्स ज़रूर बताएं, मैं आपके विचारों का इंतज़ार करूंगा।

RELATED ARTICLES

You Must Watch