HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesमाँ ने मुझे बूढ़े दादा जी की रंडी बनाया संपत्ति के लालच में

माँ ने मुझे बूढ़े दादा जी की रंडी बनाया संपत्ति के लालच में

विधवा माँ ने मुझे बूढ़े दादा जी की रंडी बनाया संपत्ति के लालच में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- मैं सोनिया गुप्ता हूँ, 18 वर्ष की एक कुंवारी जवान लड़की। हमारे अमीर परिवार में सिर्फ तीन सदस्य हैं—मेरी विधवा माँ सरिता, मेरे 80 वर्षीय दादा जी विजय सिंह और मैं। हम एक विशाल हवेली में रहते हैं जहाँ धन-दौलत और जायदाद की कोई कमी नहीं। दादा जी की उम्रदराज हवस अभी भी जल रही है और वे दूसरी शादी करके अपनी चुदाई की प्यास बुझाना चाहते हैं। अगर ऐसा हुआ तो सारी संपत्ति हमारे हाथ से निकल जाएगी। माँ ने इस संकट से बचने के लिए एक चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा जिसने मेरे जीवन की दिशा बदल दी। यह कहानी लालच, हवस, भावनाओं और निषिद्ध सुखों की है जो आपको अंत तक बाँधे रखेगी।


Maa ne mujhe boodhe dada ji ki randi banaya sampatti ke lalach mein Antarvasna Hindi Threesome Sex Story :- मेरा नाम सोनिया गुप्ता है। मैं 18 साल की हूँ और अभी तक कुंवारी हूँ। मेरी चूत कभी किसी लंड से नहीं छुई गई, बिलकुल टाइट और सील-पैक। मेरे बड़े-बड़े चुचे, गोल चूतड़ और गोरा बदन हर मर्द का लौड़ा खड़ा कर देता है। हमारी हवेली किसी महल से कम नहीं—बड़े-बड़े कमरे, नौकर-चाकर, सब कुछ। परिवार में सिर्फ तीन लोग हैं—मैं, मेरी विधवा माँ सरिता और दादा जी विजय सिंह। दादा जी की उम्र 80 साल के करीब है, लेकिन उनका मोटा लौड़ा अभी भी चुदाई के लिए तड़पता है। दादी जी के जाने के बाद उनकी भूख और बढ़ गई। वे हर समय जवान रंडियों की बात करते हैं।

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Antarvasna Hindi Sex Kahani – Maa ne mujhe boodhe dada ji ki randi banaya sampatti ke lalach mein

इसके अलावा, दादा जी अब दूसरी शादी करना चाहते थे। वे कहते थे कि पैसा देखकर कोई भी छिनाल उनके बिस्तर पर चढ़ जाएगी और उनकी चूत की आग बुझाएगी। अगर वे शादी कर लेते तो सारी जायदाद नई बहू के हाथ चली जाती और हम माँ-बेटी सड़क पर आ जातीं। माँ को यह सहन नहीं होता था। एक रात माँ ने मुझे अपने कमरे में बुलाया और गंभीर स्वर में कहा, “बेटी, तेरे दादा जी की यह मादरचोद हवस हमें बर्बाद कर देगी। अगर तू उनकी रंडी बन जाए, उनकी चुदाई करे, तो वे शादी नहीं करेंगे और सारा पैसा हमारा रहेगा।”

मैं सुनकर स्तब्ध रह गई। मैं तो वर्जिन थी, मेरी रसदार चूत कभी लंड नहीं देखी थी। बूढ़े दादा जी के काले, मोटे लौड़े से अपनी सील तुड़वाने की सोच से ही मेरी भोसड़ा सिकुड़ गया। लेकिन संपत्ति और हवेली का लालच इतना था कि मैंने हामी भर दी। माँ खुश हुईं और अगले दिन दादा जी से बात की। दादा जी तुरंत राजी हो गए। उन्होंने माँ से कहा, “अच्छा किया, आज रात अपनी छिनाल बेटी को दुल्हन बनाकर मेरे कमरे में भेज दे। मैं उसकी सुहागरात मनाऊँगा और उसकी चूत-गाँड दोनों फाड़ दूँगा।”

तभी माँ ने मुझे तैयार करना शुरू किया। मुझे लाल जोड़ा पहनाया, मंगलसूत्र डाला, सिंदूर लगाया—बिलकुल असली दुल्हन की तरह। मेरे हाथ में केसरिया दूध का गिलास थमाया। मैं डर और लालच से काँपती हुई दादा जी के बेडरूम की ओर बढ़ी। दरवाजा खोला तो दादा जी बिस्तर पर बैठे थे, उनका लौड़ा पजामे में पहले से तना हुआ था। उन्होंने मुझे देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “आजा मेरी रंडी पोती, आज तेरी चूत में मेरा माल भरूँगा।”

दुल्हन बनी पोती और दादा की पहली हवस भरी सुहागरात

दादा जी ने मुझे बुलाया और दूध का गिलास लिया। दूध पीते हुए उनकी नजर मेरे बड़े बोबों पर थी। फिर उन्होंने गिलास रखा और मेरे होंठों पर अपने मुँह रख दिया। उनका मुँह बदबू मार रहा था, लेकिन मैं चुप रही। मेरे साथ सुहागरात बनाने के लिए वे मेरे जोड़े को एक-एक करके उतारने लगे—पहले दुपट्टा, फिर ब्लाउज, फिर घाघरा। मेरी ब्रा और पैंटी देखकर वे बोले, “क्या मस्त चुचे हैं तेरे, रंडी। आज इन्हें चूस-चूस कर लाल कर दूँगा।” मैं शर्मा रही थी, लेकिन मेरी चूत में अजीब सी गीलापन शुरू हो गया था।

इसके बाद दादा जी ने मेरी ब्रा उतारी। मेरे बड़े-बड़े बोबे बाहर आए। निप्पल पहले से तने हुए थे। दादा जी उन पर टूट पड़े। एक चूचे को मुँह में भरकर जोर-जोर से चूसने लगे, दूसरे को हाथ से मसलने लगे। मैं सिसकारी लेने लगी, “आह… दादा जी… कितना अच्छा लग रहा है।” वे काट रहे थे, चूस रहे थे, जैसे भूखा शेर। मेरे निप्पल लाल हो गए। फिर उन्होंने मुझे पूरी नंगी कर दिया। मेरी बालों वाली रसदार चूत देखकर उनका लौड़ा और खड़ा हो गया।

फिर दादा जी खुद नंगे हो गए मेरे कामुक जिस्म के साथ मस्ती करने के लिए। उनका लंड देखकर मैं डर गई—80 साल की उम्र में भी इतना मोटा, लंबा, काला लौड़ा, मोटी नसें, बड़े-बड़े गोटे लटक रहे थे। वे बोले, “देख मेरी वेश्या पोती, यह तेरी टाइट भोसड़ी को फाड़ने के लिए तैयार है। आज तेरी सील टूटेगी और खून बहेगा।” मैं सहम गई, लेकिन लालच ने मुझे रोका। दादा जी ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी चूत पर मुँह लगाया। उनकी जीभ मेरी भगनासा पर फिरने लगी। वे चूत चाट रहे थे जैसे कुत्ता चाटता है।

इसके अलावा, दादा जी ने मेरी चूत में जीभ डालकर रस निकालना शुरू किया। मैं तड़पने लगी। मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “आह… दादा जी… चाटो मेरी चूत को… कितना मजा आ रहा है दादा जी।” वे बोले, “तेरी यह रसदार बुर बहुत स्वादिष्ट है मेरी रंडी पोती। अब उँगलियों से ढीला करता हूँ तेरी इस कुंवारी चूत को।” उन्होंने दो उँगलियाँ मेरी चूत में डाली और तेजी से अंदर-बाहर करने लगे। साथ ही एक उँगली मेरी गाँड के छेद में भी डाल दी। मैं चीख पड़ी, लेकिन मजा भी आने लगा था।

लंड चूसना और चूत में पहला वार

तभी दादा जी ने अपना मोटा लौड़ा मेरे मुँह के पास लाया। “चूस साली, लंड चूसना सीख। मेरी रंडी पोती बनकर लंडचूस बन।” मैंने डरते हुए लंड मुँह में लिया। इतना मोटा था कि मुँह फटने लगा। मैं चूसने लगी, जीभ से चाटने लगी, गोटे मुँह में लेकर चूसने लगी। दादा जी कराह रहे थे, “वाह… क्या मस्त चूस रही है छिनाल… रंडी की तरह मुट्ठ मार।” उनका चिपचिपा रस मेरे मुँह में आने लगा। मैं गटक गई।

इसके बाद दादा जी ने मुझे लिटाया और अपना लौड़ा मेरी चूत पर रगड़ने लगे। मेरी चूत पूरी गीली थी। वे बोले, “अब डालता हूँ, मादरचोद चूत फाड़ दूँगा।” एक जोरदार झटका दिया। आधा लंड अंदर गया। मुझे तेज दर्द हुआ, मैं चीखी, “आआआह… दादा जी… फट गई मेरी चूत… नहीं… रुक जाओ।” खून बहने लगा। लेकिन दादा जी नहीं रुके। उन्होंने पूरा लौड़ा पेल दिया और धक्के मारने शुरू कर दिए।

फिर चुदाई की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं—पैछ-पैछ, थप-थप। मेरी फटी चूत से खून और रस मिलकर बह रहा था। शुरू में दर्द था, लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा। मैं बोली, “चोदो दादा जी… और जोर से… फाड़ दो मेरी भोसड़ी को।” दादा जी हरामी की तरह चोद रहे थे। उन्होंने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदा—मिशनरी, मैं ऊपर, फिर साइड से। हर धक्के में उनका मोटा लौड़ा मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था और मेरी बच्चेदानी को अंदर धकेल रहा था।

इसके अलावा, मेरे बूढ़े दादा जी ने कई बार झड़ना शुरू किया। पहली बार मेरी चूत में गरम वीर्य की पिचकारी मारी। “ले रंडी… भर रहा हूँ तेरी चूत माल से।” मैं भी झड़ गई, मेरी चूत सिकुड़-सिकुड़ कर उनका माल निचोड़ रही थी। लेकिन दादा जी नहीं रुके। उन्होंने फिर लंड खड़ा किया और चुदाई जारी रखी। पूरी रात हम चुदते रहे। मेरी चूत ढीली पड़ गई, लेकिन मजा बढ़ता जा रहा था।

डॉगी स्टाइल में गांड की पहली चुदाई और चीखें

अब दादा जी को अपनी मनपसंद चुदाई पोजीशन चाहिए थी। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। “अब तेरी गाँड मारूँगा पोती, मेरी कुत्तिया रंडी।” मैं डर गई, “नहीं दादा जी… गाँड नहीं… बहुत दर्द होगा।” लेकिन वे नहीं माने। पहले जीभ से मेरी गाँड चाटी, छेद गीला किया। फिर उँगलियाँ डालीं। मैं तड़प रही थी। फिर उन्होंने अपना चिपचिपा लौड़ा मेरी गाँड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे धकेला।

तभी मेरे बूढ़े लंड का सुपारा अंदर गया। मुझे लगा गाँड फट जाएगी। मैं चीखी, “आआआह… फट गई मेरी गाँड… निकालो।” खून बहने लगा। लेकिन दादा जी ने पूरा लौड़ा मेरी वर्जिन गांड में पेल दिया और डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से धक्के मारने लगे। गाँड की चुदाई की आवाजें अलग थीं—चप-चप, थपाक-थपाक। दर्द के साथ मजा भी आने लगा। मैं बोली, “चोदो दादा जी… गाँड फाड़ दो… आपका मोटा लौड़ा कितना अच्छा है।”

इसके बाद दादा जी ने गाँड में भी कई बार माल छोड़ा। गरम चिपचिपा वीर्य मेरी कुंवारी गाँड में भर गया। मैं थककर चूर हो गई थी, लेकिन संतुष्ट थी। सुबह तक हम नंगे लिपटकर सोए। मेरी चूत और गाँड दोनों फटी हुई थीं, खून और माल का मिश्रण बिस्तर पर फैला था। लेकिन लालच पूरा हो रहा था—दादा जी अब दूसरी शादी नहीं करेंगे।

फिर भी रात खत्म नहीं हुई थी। दादा जी ने सुबह फिर चुदाई शुरू की। इस बार मेरे मुँह में लंड डालकर मुंह चुदाई की। “ले रंडी… मुंह में ले मेरा माल।” मैंने गटक लिया। दिन भर हम चुदते रहे। दादा जी का लंड कभी नरम नहीं पड़ता था।

माँ का चुदने के लिए शामिल होना और थ्रीसम की शुरुआत

कुछ दिन बाद माँ भी शामिल हो गईं। एक रात दादा जी ने मेरी विधवा माँ को भी बुलाया थ्रीसम सेक्स करने के लिए। माँ पहले शर्मा रही थीं, लेकिन संपत्ति के लिए राजी हो गईं। हम माँ-बेटी दोनों नंगी होकर दादा जी के बिस्तर पर थीं। दादा जी ने पहले माँ की चूत चाटी, फिर मेरी। हम दोनों सिसकारियाँ ले रही थीं। फिर दादा जी ने बारी-बारी से हमें चोदा। कभी मेरी चूत, कभी माँ की गाँड।

इसके अलावा, थ्रीसम में मजा अलग था। मैं माँ के चुचे चूसती, दादा जी मेरी गाँड मारते। माँ दादा जी का लंड चूसतीं, मैं उनकी गोटे चाटती। दादा जी बोले, “दोनों रंडियाँ मेरी… आज दोनों की भोसड़ी भर दूँगा।” हम चीख रही थीं, सिसकारियाँ ले रही थीं। दादा जी ने हम दोनों में बारी-बारी माल छोड़ा। अब हम तीनों पति-पत्नी जैसे रहने लगे।

फिर भी दादा जी को मेरी गाँड सबसे पसंद थी। हर रात डॉगी में गाँड मारते। मेरी गाँड अब ढीली पड़ गई थी, लेकिन उनका मोटा लौड़ा अभी भी मजा देता था। मैं अब चुदाई की दीवानी हो गई थी। लालच से शुरू हुआ था, लेकिन अब लत लग गई थी।

इसके बाद दादा जी ने वसीयत मेरे नाम कर दी। सारी संपत्ति सुरक्षित थी। हम माँ-बेटी उनकी रंडियाँ बनकर खुश थीं। कभी-कभी ग्रुप सेक्स, कभी सिर्फ मैं और दादा जी। हर रात चुदाई, हर रात नया मजा।

रोजाना की चुदाई और हवस की लत

अब हमारी जिंदगी बदल चुकी थी। सुबह उठते ही दादा जी का लंड मेरे मुँह में होता। मैं ब्लोजॉब देती, वे मेरे बोबे मसलते। फिर नहाने के बहाने बाथरूम में चुदाई। दादा जी मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदते। मेरी चूत का रस बहता रहता। दोपहर में माँ के साथ थ्रीसम। शाम को गाँड मारना। रात को पूरी चुदाई।

इसके अलावा, दादा जी मुझे तरह-तरह के सेक्सी कपड़े पहनाते—ट्रांसपेरेंट नाइटी, छोटी स्कर्ट। मैं उनके लिए रंडी की तरह नंगी होकर नाचती, लंड रगड़ती। वे मेरे निप्पल चूसते, गाँड में उँगली डालते। मैं उनके लंड पर बैठकर उछलती। चुदाई की आवाजें हवेली में गूँजतीं, लेकिन नौकरों को कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी।

फिर एक दिन दादा जी ने मुझे बाहर ले जाकर कार में चोदा। मैं उनकी गोद में बैठी, लंड अंदर, कार चलती रही। खतरा था, लेकिन मजा दोगुना। अब मैं पूरी सेक्स की दीवानी बन चुकी थी। दादा जी का मोटा लौड़ा मेरी जिंदगी बन गया था।

इसके बाद भी चुदाई जारी रही। साल बीत गए, लेकिन दादा जी की हवस कम नहीं हुई। मैं अब उनकी स्थायी रंडी थी। माँ कभी-कभी शामिल होतीं। हम तीनों खुश थे—पैसा भी, चुदाई भी।


माँ ने मुझे बूढ़े दादा जी की रंडी बनाया संपत्ति के लालच में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Maa ne mujhe boodhe dada ji ki randi banaya sampatti ke lalach mein Antarvasna Hindi Threesome Sex Story :- यह लालच से शुरू हुई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी अब हवस और सुख की कहानी बन चुकी है। संपत्ति मेरे नाम हो चुकी है, हवेली हमारी है, और दादा जी का मोटा लौड़ा रोज मेरी चूत-गाँड को संतुष्ट करता है चोद चोदकर। शुरू में दर्द था, शर्म थी, लेकिन अब सिर्फ मजा है। मैं उनकी रंडी बनकर खुश हूँ। कभी माँ भी शामिल होकर थ्रीसम का मजा लेती हैं। पाठकों, अगर यह कहानी आपको गरम कर गई, आपकी चूत या लंड गीला कर गई, तो बताइए। ऐसी और गंदी कहानियाँ चाहते हैं तो कमेंट करें। आपकी फैंटसी भी शेयर करें—शायद अगली कहानी आपकी हो।

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