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बेटे के खड़े लंड ने तोड़ दिया पतिव्रता माँ का सतीत्व

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वो रात मेरी ज़िन्दगी की सबसे गर्म और सबसे डरावनी रात थी। मैं 24 साल का विवेक, अपनी 42 साल की माँ सुनीता के साथ उनके ही बेडरूम में नंगा खड़ा था। मेरा तना हुआ लंड उनकी रसदार चूत के अन्दर धड़क रहा था और तभी दरवाज़े पर पापा आ गए। आप सोच रहे होंगे कि ये सब कैसे शुरू हुआ। दरअसल पिछले 6 महीनों से पापा का ध्यान माँ पर से हट चुका था। वो या तो दफ़्तर में रहते या फिर अपने दोस्तों के साथ शराब की महफ़िल में डूबे रहते। माँ की आँखों की उदासी मुझसे देखी नहीं जाती थी।

मैं अकेला बेटा हूँ और लॉकडाउन में घर से ही काम कर रहा था। धीरे-धीरे माँ और मेरे बीच एक अनकहा खिंचाव पैदा होने लगा। उनकी साड़ी के पल्लू से छनकर आती उस भीनी-भीनी पसीने और इत्र की मिली-जुली खुशबू मेरे दिमाग़ को चकरा देती थी। एक दोपहर मेरी पतिव्रता माँ पंखे के नीचे सो रही थीं, उनकी साड़ी कमर से थोड़ी सरक गई थी। उनकी मोटी, गोरी कमर और पेटीकोट के अन्दर झाँकते चूतड़ों का उभार देखकर मेरा लौड़ा पहली बार बेकाबू हो गया। उस दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपने खड़े लंड को बुरी तरह रगड़ा और उन्हीं का चेहरा याद करके चिपचिपा माल निकाला।

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अगले कुछ हफ्तों में मैंने मौके ढूँढ-ढूँढकर माँ की चुचियों के हिलने का लुत्फ़ उठाया। उनकी 36D साइज़ की ब्रेसियर में क़ैद बोबे जब सीढ़ियाँ उतरते हुए उछलते थे, तो मेरे मुँह से अनायास “आह्ह” निकल जाती। माँ शायद सब जानती थीं, पर कभी कुछ बोलीं नहीं।

एक शाम पापा किसी बिज़नेस ट्रिप पर गए हुए थे। मेरी पतिव्रता माँ ने बालकनी में खड़े होकर चाय की प्याली थमाते हुए कहा, “विवेक बेटा, तू आजकल बहुत अकेला रहता है।” उनकी उँगलियाँ जानबूझकर मेरी उँगलियों पर रुकीं। मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैंने हिम्मत जुटाकर उनका हाथ दबा दिया।

उस रात करीब 11 बजे माँ अपने कमरे में टीवी देख रही थीं। मैंने शॉर्ट्स और बनियान पहनी थी, दिल धड़कता हुआ उनके पास बैठ गया। हल्की रोशनी में माँ का चेहरा बिल्कुल किसी 25 साल की रंडी जैसा कामुक लग रहा था। मैंने धीरे से पूछा, “मम्मी, क्या आपको कभी लगता है कि पापा आपको अनदेखा करते हैं?”

माँ की आँखें तुरंत भर आईं। उन्होंने सरलता से जवाब दिया, “बेटा, औरत को सिर्फ पैसों से नहीं, रात की चुदाई से भी प्यार चाहिए होता है।” फिर उन्होंने अपना पल्लू सरकाकर मेरा हाथ अपनी नंगी जाँघ पर रख दिया। वो पल मेरे दिमाग़ पर बिजली की तरह गिरा।

मैंने काँपते हाथों से उनकी जाँघों को सहलाना शुरू किया। उनकी त्वचा मखमल सी मुलायम और अन्दर से तवे की तरह गर्म थी। माँ ने हल्की सिसकारी भरते हुए अपना मुँह मेरे कान के पास लाया और फुसफुसाई, “आज अपनी माँ की बन जा… उसे असली चुदाई का मज़ा दे।”

ये शब्द सुनते ही मेरा लंड पूरी तरह खड़ा होकर शॉर्ट्स में तम्बू बना चुका था। मैंने माँ को पीठ के बल लिटाकर उनकी साड़ी और ब्लाउज़ फाड़ने की कोशिश की। उनकी नाभि के पास पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जिन्हें मैंने लपलपाती जीभ से चाट लिया। नमकीन स्वाद ने मेरी प्यास को और भड़का दिया।

माँ ने मेरी बनियान ऊपर खींची और अपने लाल सुर्ख निप्पल मेरे मुँह में ठूँस दिए। मैंने बारी-बारी से दोनों बोबे चूसे, हर दाँत की हल्की कटाई पर माँ का पूरा शरीर झनझना उठता। उनके बोबों के बीच से आती वो गंध किसी जंगली फूल और गर्म दूध जैसी थी, जो सीधे मेरे अंडकोषों तक सिहरन पैदा कर रही थी।

फिर मैंने उनका पेटीकोट नीचे सरकाया और उनकी झांट के बालों वाली चूत सामने थी। भरी हुई फुद्दी के होठ रस से तर हो चुके थे और बुर की वो मीठी-तीखी सुगंध पूरे कमरे में फैल गई। मैंने अपनी नाक बालों में धँसाकर गहरी साँस ली, “आह्ह्ह… मम्मी, आपकी चूत तो पूरी रसदार है।”

“बेटा, अब और मत सता अपनी इस छिनाल माँ को…” माँ ने बुरी तरह झुंझलाते हुए मेरा सिर दबोच लिया। मैंने अपनी जीभ से उनके चूत के बालों को सहलाया, फिर गहराई से क्लिट पर लगातार चाटा। माँ की गांड और कुल्हे उछल रहे थे, उनका ये छिनालपन देख मैं खुद पर काबू खो बैठा। मैंने एक उँगली उनकी गांड के छेद पर रगड़ी, जिससे वो ज़ोर से चिल्ला पड़ीं।

अब मेरा 7 इंच का मोटा लौड़ा कसमसा रहा था। मैंने उसे बाहर निकाला और माँ के मुँह के सामने ले गया। माँ ने किसी पेशेवर रांड की तरह एकदम लपक कर पूरा लंड हलक में ले लिया। उनके गर्म लार और कसी हुई गालों के दबाव ने मेरा वीर्य तो जैसे अभी से निकालना चाहा।

“रुको माँ, पहले आपकी बुर की गर्मी लेनी है,” मैंने कहकर उन्हें उलट दिया। मैंने उनके मोटे चूतड़ों को फैलाकर अपने तने हुए लंड को अपनी सगी माँ की तंग चूत के दरवाज़े पर रगड़ा। उनकी फुद्दी एकदम टाइट थी, मानो किसी कुँवारी का छेद हो। मैंने एक तेज़ धक्के से अन्दर प्रवेश किया तो माँ के मुँह से दबी-सी चीख निकली।

“बेटा, साली भोसडी… तोड़ मत… प्यार से कर,” माँ ने दाँत भींचे। मैंने उनकी कमर पकड़कर धीरे-धीरे लंड अन्दर-बाहर करना शुरू किया। मेरे लंड के गोटे हर झटके पर उनके चूतड़ों से टकरा रहे थे और चूत से पिचकारी जैसी चिपचिपी आवाज़ें आ रही थीं। ये ध्वनि कमरे की ख़ामोशी में हल्की-हल्की गूँज रही थी।

माँ की पीठ पर पसीने की नदी बह चली थी। उन्होंने अपना सिर घुमाकर कहा, “चोद मुझे, ज़ोर से चोद अपनी रंडी माँ को।” मैंने उनके बाल पकड़कर ऐसे ठोका जैसे कोई नाइट एंगल का घोड़ा हो। हर धक्के पर उनकी गांड थरथराती और मैं उनके भोसड़े को और गहरा भरता जाता।

करीब 15 मिनट इसी उन्माद में बीते। फिर मैंने उन्हें गोद में उठाकर खड़े-खड़े चुदाई का नज़ारा दिखाया। दीवार से पीठ लगाकर माँ मेरे लंड पर झूल रही थीं, उनकी 36D की चुचियाँ मेरी छाती पर रगड़ खा रही थीं। अचानक उनके अन्दर एक भयानक कँपकँपी दौड़ी और उन्होंने गर्म चूत का रस पूरी तरह मेरे लंड पर छोड़ दिया। “अब बेटा, मेरी भोसड़ी में मत झाड़ना, मुँह में दे,” माँ ने भीगी पलकों से गिड़गिड़ाया।

मैंने उन्हें घुटनों पर बिठाया और झटक-झटक कर अपना गाढ़ा, चिपचिपा माल उनकी जीभ पर खाली कर दिया। वीर्य की धार इतनी तेज़ थी कि कुछ बूँदें नाक पर भी गिरीं। माँ ने सब चाट लिया और मेरे लंड को चूसते हुए बोलीं, “तेरे लंड की मिठास आज तक नहीं भूलूंगी।”

तभी अचानक बाहर हॉल में बत्ती जली और पापा की आवाज़ आई, “सुनीता, अभी तक सोई नहीं?” दरवाज़ा खुलते ही मैं अपना तना हुआ लंड माँ की बुर से निकाल भी नहीं पाया था। पापा की आँखें खून से लाल हो गईं, माँ नंगी फर्श पर और मैं अपना लौड़ा पकड़े खड़ा था।

हम सगे माँ बेटे को अवैध सेक्स सम्बन्ध बनाते देखने के बाद मेरे पापा ने पल भर को भी नहीं सोचा। उन्होंने गुस्से में मेज़ पर रखा काँच का गुलदान उठाकर हमारी तरफ फेंका, लेकिन माँ ने मुझे धक्का देकर बचा लिया। फिर पापा ज़मीन पर बैठकर रो पड़े, “जिस दिन ये हवस अपनी माँ की तरफ देखी, उस दिन से डर था।” उनकी सिसकियाँ कमरे में गूँजती रहीं और माँ सिर झुकाए खड़ी रहीं।

मैंने तब एक पल के लिए महसूस किया कि कामुकता के इस खेल में हम तीनों ही कहीं न कहीं गुनहगार हैं। पापा का अनदेखापन, माँ की तड़प और मेरी बेकाबू हवस ने इस रिश्ते को छिनालपन की हद तक पहुँचा दिया। हालाँकि अब कोई वापसी नहीं थी, उस रात की चुदाई की गर्माहट मेरी हड्डियों में अब भी धधकती है।

आप सब ये सगे माँ बेटे की चुदाई कहानी पढ़कर शायद नफ़रत करें या शायद सहानुभूति दिखाएँ। मुझे पता है ये रिश्ता गलत था, लेकिन उस वक्त का सच यही था। मैं चाहता हूँ कि आप बेझिझक अपनी राय दें, क्योंकि आपकी टिप्पणी ही मेरे इस काले सच पर कोई रोशनी डाल सकेगी। कृपया मुझे ज़रूर बताएँ कि आपको यह कहानी कैसी लगी और मेरी जगह आप होते तो क्या करते।

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