चोदने के बाद गर्भवती रिसेप्शनिस्ट की कोख में अपना वीर्य डाला डॉक्टर ने अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मैं रीना कपूर, बत्तीस साल की एक गृहिणी, मुंबई की चकाचौंध में रहने वाली एक साधारण महिला थी जब तक कि मेरी दुनिया उस दिन नहीं बदली जब मेरे पति की नौकरी एक बड़ी कंपनी से छूट गई। पैसों की तंगी ने मुझे नौकरी करने के लिए मजबूर किया और मुझे एक निजी हॉस्पिटल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिल गई। अस्पताल के मालिक डॉक्टर अमित मल्होत्रा एक प्रतिष्ठित और रुतबेदार शख्सियत थे लेकिन अस्पताल के अंदर उनकी सच्चाई जानने वाले ही थे। उनकी मर्जी के खिलाफ जाने का मतलब था नौकरी गंवाना और अपनी इज्जत दाव पर लगाना।
दोस्तों मेरी हालत पहले से ही खराब थी कि मुझे पता चला मैं तीन महीने की गर्भवती हूँ और यह खबर मेरे लिए सदमे से कम नहीं थी। ठीक उसी दौरान डॉक्टर साहब ने मुझे देर शाम अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में बुला लिया। मैं जानती थी कि वहाँ जाना क्या मतलब रखता है, मेरी गर्भवती देह को उनकी हवस का शिकार बनाना, लेकिन पति की बेरोजगारी और घर की जिम्मेदारी ने मुझे मजबूर कर दिया। वह रात मेरी जिंदगी का सबसे काला अध्याय बन गई जब मेरी गर्भवती चूत को उनके मोटे लौड़े ने चीर डाला, मेरे स्तनों का दूध पिया गया और मेरी गांड तक को नहीं बख्शा गया। चलिए अब निचे पूरी घटना विस्तार से बताती हूँ…
उस शाम अस्पताल की चमचमाती लाइटें बुझ चुकी थीं और सन्नाटा चारों तरफ पसरा हुआ था। मैं डॉक्टर अमित के प्राइवेट वार्ड के दरवाजे के सामने डरी सहमी सी खड़ी थी, मेरे हाथ पसीने से भीगे हुए थे और दिल धकधक कर रहा था। अस्पताल के मालिक डॉक्टर अमित मल्होत्रा ने मुझे मिलने बुलाया था अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में मैंने हिम्मत करके अस्पताल के प्राइवेट वार्ड का दरवाजा खोला तो देखा वो अंदर बैठे अपने लेपटॉप पर कुछ काम कर रहे थे, उनकी नजरें सीधी मुझ पर टिकी हुईं थीं जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ रीना, तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था। तुम्हारी गर्भावस्था के बारे में फाइल देखी मैंने, बहुत खूबसूरत अहसास होता है ना माँ बनना?” मैंने डरते हुए सर हिलाया, आवाज अटक रही थी, “जी सर, लेकिन आपने बुलाया क्यों?” वह उठे और मेरे पास आए, उनकी नजरें मेरी साड़ी पर घूम रही थीं। उन्होंने मेरी ठुड्डी पकड़ी और धीरे से कहा, “तुम्हारी मजबूरी जानता हूँ रीना, तुम्हारा पति बेरोजगार है, घर चलाना मुश्किल हो रहा है। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ, तुम्हारी नौकरी पक्की कर सकता हूँ, बस तुम्हें मेरी एक छोटी सी शर्त माननी होगी।” मेरा गला सूख गया, मैं जानती थी वह शर्त क्या होगी।
चोदने के बाद गर्भवती रिसेप्शनिस्ट की कोख में अपना वीर्य डाला डॉक्टर ने चुदाई करने के बाद अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे वार्ड के अंदर के कमरे की ओर ले गए जहाँ एक बड़ा सा बिस्तर बिछा हुआ था। कमरे में दवाइयों की महक थी लेकिन उसके पीछे एक अजीब सी दमघोंटू हवा भरी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। मैं सहमकर पीछे हटी, “सर प्लीज, मैं गर्भवती हूँ, मेरे साथ ऐसा मत कीजिए।” वह हँसे, एक जहरीली हँसी, “यही तो मजा है रीना, गर्भवती औरत की चूत में तो अलग ही रस होता है।” उन्होंने एक झटके में मेरी साड़ी का पल्लू खींच लिया और मेरा उभरा हुआ पेट बाहर आ गया। उनकी नजरें मेरे पेट पर टिक गईं, फिर वह घुटने टेककर बैठ गए और मेरे पेट पर हाथ फेरने लगे। “कितना सुंदर है, अंदर एक जान पल रही है और मैं उसकी माँ की चूत चोदने वाला हूँ,” वह बुदबुदाए। मेरे रोंगटे खड़े हो गए, मैं काँपने लगी। उन्होंने मेरी कमर पकड़ी और मुझे दीवार से सटा दिया।
फिर उन्होंने मेरे रसीले होंठों पर जबरदस्ती अपने मर्दाना होंठ रख दिए, उनकी जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी। मैंने मुँह बंद रखा तो उन्होंने मेरे होंठ दाँत से काट लिए। खून का नमकीन स्वाद मेरे मुँह में फैल गया। मैंने कराह तो वह और जोर से मेरे मुँह में घुस गए। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई, लार टपकने लगी। मैं साँस नहीं ले पा रही थी, मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा। उन्होंने एक हाथ से मेरी ब्लाउज के बटन तोड़ डाले और मेरे भारी हो चुके स्तनों को बाहर निकाल लिया। मेरे निप्पल गहरे भूरे हो चुके थे और सख्त थे। उन्होंने उन्हें उँगलियों से दबाया और दूध की एक बूँद निकल आई। “अरे वाह, दूध आने लगा है तो, आज पूरा पी जाऊँगा तेरा,” वह गुर्राए। मैं रोने लगी, आँसू मेरे गालों पर बहने लगे लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं रुके।
उन्होंने मेरे स्तनों को जोर से मसलना शुरू किया, दूध की धार बह निकली और उनके हाथों पर गिरी। वह हँसे और अपनी उँगलियाँ चाटने लगे। फिर उन्होंने मेरे एक निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसना शुरू कर दिया। दूध उनके मुँह में जाने लगा, वह आवाजें कर रहे थे मानो कोई बच्चा दूध पी रहा हो। दर्द के साथ एक अजीब सी झनझनाहट मेरे पूरे शरीर में फैल गई। मैं मजबूरी में कराह उठी। उनका दूसरा हाथ मेरी साड़ी के नीचे घुसा और मेरी जाँघों को सहलाने लगा। उनकी उँगलियाँ मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत की दरार को टटोलने लगीं। मैं सिहर उठी, मेरी तंग चूत से पानी छूटने लगा था भले ही मेरा दिल और दिमाग इसका विरोध कर रहे थे। “ओह, तेरी गर्भवती चूत तो बहुत गीली हो रही है रे रंडी,” वह कान में फुसफुसाए, “आज इसे चाट-चाट कर सुखा दूँगा।”
गर्भवती रिसेप्शनिस्ट रीना की चूत चाटता है डॉक्टर अमित का लंबा मोटा लंड
उन्होंने मुझे बिस्तर की ओर धकेला और मैं गिरते-गिरते संभली। वह मेरे सामने घुटने टेककर बैठ गए और मेरी पैंटी को दाँतों से खींचकर नीचे कर दिया। मेरी फूली हुई, गुलाबी चूत बाहर आ गई। उन्होंने उसे गौर से देखा, सूँघा और फिर अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। पहली बार जब उनकी गर्म जीभ मेरे क्लिटोरिस पर पड़ी, मैं चीख पड़ी। वह जीभ को ऊपर-नीचे करते, मेरी चूत के होंठों को अलग करते और फिर दो उँगलियाँ अंदर ठूँस दीं। “आह… नहीं… सर… बहुत दर्द हो रहा है,” मैं कराही। लेकिन वह बोले, “चुप रह बहनचोद, आज तेरी गर्भवती चूत का रस पीकर ही दम लूँगा।” उनकी उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर होने लगीं, जीभ क्लिट पर नाच रही थी। मैं तड़पने लगी, मेरा शरीर दर्द और आनंद के बीच झूल रहा था। मेरी चूत से पानी की धार बह निकली।
फिर उन्होंने अपनी पैंट उतारी और उनका मोटा, काला लंड बाहर आ गया। वह मेरे चेहरे के पास ले आए और बोले, “चूस इसे रे वेश्या, नहीं तो नौकरी गई समझ लेना।” मैंने मना करना चाहा तो उन्होंने मेरे बाल जोर से खींचे। आँसुओं के बीच मैंने अपनी जीभ निकाली और उनके लंड के सिरे को चाटना शुरू किया। वह कराह उठे, “हाँ… ऐसे ही… पूरा निगल।” उन्होंने मेरा सिर आगे किया और अपना पूरा लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया। मैं दम घुटने लगी, गले में ऐंठन होने लगी लेकिन वह मेरे सिर को आगे-पीछे करते रहे। मेरी लार और उनका प्रीकम मेरी ठुड्डी पर बहने लगा। काफी देर तक मुँह चुदाई के बाद उन्होंने मुझे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गए।
उन्होंने मेरे पैरों को अपने कंधों पर रखा और अपने लंड को मेरी चूत के दरवाजे पर रगड़ने लगे। “प्लीज सर… धीरे से… मेरा बच्चा…” मैं फुसफुसाई। वह हँसे, “तुझे पता है गर्भवती औरत की चूत चोदने में कितना मजा आता है? वो ज्यादा टाइट होती है, ज्यादा गर्म होती है।” और फिर एक जोरदार धक्के के साथ उनका गधे के लंड के जैसा मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुस गया। मैं जोर से चीखी, ऐसा लगा जैसे मेरा शरीर चीर दिया गया हो। वह धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे, हर धक्के के साथ मेरी चूत में आग लग रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे, दूध की बूँदें हवा में छिटक रही थीं। वह मेरे निप्पलों को चूसते रहे, दूध पीते रहे और साथ ही मेरी चूत को चोदते रहे।
चुदते चुदते मैं दर्द से कराह रही थी लेकिन धीरे-धीरे मेरे शरीर ने प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। मेरी टाइट चूत उनके लंड को चूसने लगी, पानी और भी ज्यादा निकलने लगा। वह तेजी से चोदने लगे, मेरी चूत की चपचप की आवाज कमरे में गूँजने लगी। “हाँ… ऐसे ही चोदो मुझे… आह…” मेरे मुँह से खुद ब खुद शब्द निकलने लगे। मजबूरी कब हवस में बदल गई, पता ही नहीं चला। वह मेरे पेट को चूमते, बच्चे से बातें करते और फिर और जोर से धक्के मारते। मैं झड़ने के कगार पर पहुँच चुकी थी।
चुदाई करने के बाद गर्भवती रिसेप्शनिस्ट की कोख में अपना वीर्य डाला डॉक्टर ने
मुझे चोदते चोदते वह बहुत तेजी से साँस ले रहे थे, उनका शरीर पसीने से तरबतर था। वह बोले, “अब झड़ने वाला हूँ रे छिनाल, तेरी गर्भवती कोख में ही अपना माल भर दूँगा। इस चुदाई के बाद अब तू अब दो बच्चों की माँ बनेगी।” मैं डर गई, “नहीं सर… कंडोम पहन लीजिए… मेरे पहले ही गर्भ ठहरा हुआ है…” लेकिन मेरी बात अनसुनी कर दी गई। उन्होंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गहरे तक अपना गर्म वीर्य उड़ेल दिया। मैं भी साथ ही झड़ गई, मेरा पूरा शरीर एक झटके में काँप उठा, आँखों के सामने चमकीले बिंदु उड़ने लगे। वह मेरे ऊपर गिर पड़े, उनका लंड अभी भी मेरी चूत में फँसा हुआ था, वीर्य धीरे-धीरे बाहर रिस रहा था।
थोड़ी देर बाद उन्होंने लंड निकाला और मेरी चूत से वीर्य और मेरे पानी का मिश्रण बह निकला। वह हँसे, “देख रीना, अब तू सचमुच मेरी हो गई। अगर किसी को बताया तो तेरी नौकरी तो जाएगी ही, तेरे पति को भी पता चल जाएगा कि तू कैसी रंडी है।” मैं रो पड़ी, मेरा शरीर दर्द से भरा हुआ था लेकिन अंदर ही अंदर एक अजीब सी शांति भी थी जिससे मैं खुद से नफरत करने लगी। उन्होंने मुझे उठाया और अटैच्ड बाथरूम में ले गए। शावर चलाया और मुझे उसके नीचे खड़ा कर दिया। पानी मेरे शरीर पर बह रहा था, मेरे स्तनों का दूध पानी में घुल रहा था।
वह भी नग्न होकर अंदर आए और मुझे दीवार से सटा दिया। उनके हाथ मेरी गांड पर फिरने लगे, उँगलियाँ गांड के छेद के आसपास घूमने लगीं। मैं डर गई, “सर… वहाँ नहीं… प्लीज…” वह बोले, “क्या हुआ? गर्भवती औरत की गांड भी तो वही रस देती है। आज तेरी गांड भी फाड़ूँगा।” उन्होंने मेरी गांड को ऊपर उठाया, थोड़ा सा लुब्रिकेंट डाला और फिर अपने लंड का सिरा गांड के छेद पर रख दिया। मैं चिल्लाई, “नहीं… यह नहीं… दर्द होगा…” लेकिन वह धीरे-धीरे दबाव डालते गए। पहले एक उँगली, फिर दो, और फिर उनका मोटा लंड मेरी गांड में घुसने लगा। ऐसा दर्द हुआ जैसे मेरा शरीर चीरा जा रहा हो।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहे, मैं दीवार को मजबूती से पकड़े हुए थी, मेरे नाखून दीवार में घुस गए थे। आँसू मेरी आँखों से बह रहे थे, शावर का पानी उनमें मिल रहा था। फिर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और एक अलग तरह की भराव की अनुभूति हुई। मेरी कोख को वीर्य से भरने के बाद वह मेरी गांड मारने लगे। गांड चुदाई के दौरान हर धक्के के साथ मेरी कोख में भरा हुआ वीर्य टपकने लगा। मैं फिर से कराह उठी, इस बार दर्द नहीं बल्कि एक गहरा, अश्लील सुख महसूस हो रहा था। वह मेरे बाल खींचते, मेरे कान में गाली देते और तेजी से गांड मारते रहे।
आखिरकार मुझे चोदते चोदते डॉक्टर साहब फिर से झड़े, उनका गर्म वीर्य मेरी गांड में भर गया। मैं भी दूसरी बार झड़ गई, मेरे पैरों में जान नहीं थी। वह मुझे धोकर बाहर ले आए, एक तौलिया दिया और बोले, “कल से रोज शाम छह बजे मेरे केबिन में आया करो चुदाई करवाने के लिए इसके बदले तुम्हारा इलाज मुफ्त होगा और तुम्हे डबल सैलेरी भी मिला करेगी। नहीं तो परिणाम भुगतना होगा।” मैं चुपचाप सर हिलाकर रह गई। उस दिन के बाद मेरी जिंदगी एक नर्क बन गई। हर शाम मुझे उनके केबिन में जाना होता, कभी टेबल पर, कभी सोफे पर, कभी खिड़की के पास ही मेरी चुदाई होती। मेरी गर्भावस्था बढ़ती गई, मेरा पेट और भी उभर आया लेकिन उनकी हवस कम नहीं हुई। वह मेरे बड़े होते पेट को चूमते, उससे बातें करते और फिर बेरहमी से चोदते। कभी मेरे स्तनों का दूध पीते-पीते चोदते, कभी गांड मारते। मैं सब सहती रही क्योंकि मेरे पास कोई चारा नहीं था।
गर्भपात के बाद भी नहीं थमी मालिक की हवस
छठे महीने में एक दिन जब वह मुझे बेहद तेजी से चोद रहे थे, मुझे पेट में तेज दर्द उठा और खून बहने लगा। मैं बेहोश हो गई। होश आया तो मैं अस्पताल के एक अलग वार्ड में थी। एक नर्स ने बताया कि मेरा गर्भपात हो गया है। मेरा बच्चा, मेरे पति का बच्चा, चला गया। मेरे दिल पर जैसे कोई पहाड़ टूट पड़ा। डॉक्टर अमित ने सारे खर्चे उठाए, मुझे एक महीने की पेड छुट्टी दी लेकिन जाते समय कान में फुसफुसाए, “घबराओ मत रीना, जल्दी ही तू फिर गर्भवती बनेगी, इस बार मेरे बच्चे से।” मैं टूट चुकी थी। पति को बताया कि एक्सीडेंट हो गया था और वह मेरे दुख में शामिल हो गया। मैं अंदर ही अंदर सुलग रही थी।
एक महीने बाद जब मैं नौकरी पर लौटी, डॉक्टर अमित ने मुझे फिर से बुलाया। उनका व्यवहार और भी बदतर हो गया था। अब वह मुझे सिर्फ एक वेश्या की तरह इस्तेमाल करते, किसी भी वक्त, किसी भी जगह। मैंने हिम्मत जुटाकर एक दिन पुलिस में शिकायत करने की सोची लेकिन जब मैं थाने पहुँची तो पता चला कि उनकी पहुँच वहाँ तक है। एक सिपाही ने धमकी भरे अंदाज में कहा, “मैडम, बड़े आदमियों से पंगा लेना ठीक नहीं होता। अपनी फैमिली की सुरक्षा के बारे में सोचो।” मैं लाचार और बेबस वापस लौट आई। मेरी हालत और खराब हो गई जब दो महीने बाद मुझे पता चला कि मैं फिर से गर्भवती हूँ और इस बार यह डॉक्टर अमित का बच्चा था जो मेरी कोख में पल रहा था।
मेरे पति को पिता को पिता बनने की बहुत खुशी हुई लेकिन मेरे लिए यह एक नए नर्क की शुरुआत थी। डॉक्टर अमित अब मुझे और भी ज्यादा अपने कब्जे में लेना चाहते थे। उन्होंने मुझे अपने एक प्राइवेट फार्महाउस पर बुलाया जहाँ उनके कुछ दोस्त भी मौजूद थे। उस रात मेरे साथ जो हुआ वह मेरी यादों में आज भी एक जिंदा जख्म है। उन्होंने मुझे सबके सामने नशीली दवा पिलाई और फिर एक के बाद एक सभी ने मेरी चूत और गांड को रौंद डाला। मैं बेहोश हो गई थी, जब होश आया तो मेरे शरीर पर नील और खरोंच के निशान थे, चूत और गांड से खून रिस रहा था। मैं समझ गई थी कि अब मैं सिर्फ एक इस्तेमाल की हुई वस्तु हूँ।
लेकिन उसी रात मेरे अंदर एक ज्वाला जल उठी। मैंने फैसला किया कि अब और नहीं सहूँगी। मैंने चुपचाप सब कुछ सहना जारी रखा लेकिन साथ ही सबूत इकट्ठा करने शुरू कर दिए। मैंने अपने फोन से वीडियो रिकॉर्ड किए, ऑडियो बनाए, उनकी अवैध दवा डील्स के कागजात चुराए। मैंने एक डायरी लिखनी शुरू की जिसमें हर अपमान, हर चुदाई का विवरण दर्ज था। मैं इंतजार कर रही थी सही मौके का।
रिसेप्शनिस्ट रीना की डॉक्टर अमित से बदले की योजना
मेरा बेटा हुआ, डॉक्टर अमित का बेटा। मेरे पति को कुछ शक नहीं हुआ क्योंकि बच्चा उन्हीं जैसा दिखता था। डॉक्टर अमित ने मुझे पदोन्नति देकर अस्पताल की एक अहम पोस्ट पर बैठा दिया ताकि मैं हमेशा उनके नियंत्रण में रहूँ। लेकिन इससे मुझे फायदा हुआ। मैंने उनकी सारी वित्तीय गड़बड़ियों के बारे में पता लगा लिया, काले धन के लेनदेन की जानकारी इकट्ठी की। पाँच साल बीत गए। मेरा बेटा बड़ा हो रहा था और डॉक्टर अमित अब बूढ़े हो चले थे, उनकी सेक्स ड्राइव कम हो गई थी।
एक दिन मैंने उन्हें अपने ऑफिस में बुलाया। जब वह आए तो मैंने अपनी टेबल पर सारे सबूत रख दिए – वीडियो पेनड्राइव, ऑडियो क्लिप, कागजात की फोटोकॉपी। मैंने शांति से कहा, “सर, अगर ये सब पुलिस, मीडिया और आपकी पत्नी के पास पहुँच गए तो आपकी पूरी जिंदगी तबाह हो जाएगी।” उनका चेहरा सफेद पड़ गया। उन्होंने गुस्से में मुझे गाली देनी चाही लेकिन मैंने कहा, “मैंने हर बात की कॉपी सुरक्षित जगह रख दी है। अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो वो सब सामने आ जाएंगे।”
मैंने अपनी शर्तें रखीं – अस्पताल में पचास प्रतिशत शेयर मेरे नाम, एक बड़ी रकम मेरे बेटे के ट्रस्ट के नाम, और उनकी तरफ से कभी भी मेरे या मेरे परिवार के संपर्क में न आने का वादा। उन्हें मजबूरी में हाँ कहनी पड़ी। कागजात तैयार हुए, सब कुछ कानूनी तौर पर निपटा। आज मैं उस हॉस्पिटल की को-ओनर हूँ। डॉक्टर अमित रिटायर हो चुके हैं और एक अकेली, दयनीय जिंदगी जी रहे हैं।
चोदने के बाद गर्भवती रिसेप्शनिस्ट की कोख में अपना वीर्य डाला डॉक्टर ने अन्तर्वासना हिंदी 18+ XXX सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
The doctor injected his semen into the womb of the pregnant receptionist Antarvasna Hindi Sex Story :- आज मैं अपने पति और बेटे के साथ एक सुखद जीवन जी रही हूँ। मेरे पति को आज तक नहीं पता चला कि उनका बेटा उनका अपना नहीं है। कभी-कभी रात में अचानक नींद टूट जाती है और उन काले दिनों की यादें मुझे घेर लेती हैं। मेरे शरीर पर शायद निशान नहीं रहे लेकिन मेरी आत्मा पर उनका दाग हमेशा के लिए अंकित हो गया है। मैंने बदला ले लिया, एक साफ-सुथरे, चुपचाप तरीके से। मैंने सीखा कि कभी-कभी ताकतवर के सामने झुकना पड़ता है लेकिन टूटना नहीं चाहिए। आपको अंदर से मजबूत रहना है, अपने दर्द को अपनी ताकत बनाना है और सही मौके का इंतजार करना है।
इस कहानी को लिखने का मेरा मकसद सिर्फ अपने दिल का बोझ हल्का करना नहीं था। मैं चाहती हूँ कि जो औरतें आज भी किसी ताकतवर आदमी की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका शोषण कर रहे हैं, वो इस कहानी को पढ़ें और हिम्मत पाएं। आप अकेली नहीं हैं। आपको चुपचाप सब कुछ सहने की जरूरत नहीं है, बस समझदारी से काम लें। सबूत इकट्ठा करें, धैर्य रखें और जब वक्त आए तो एक ऐसा वार करें जिससे उठने की ताकत उनमें न रहे।
मैं जानती हूँ कि मेरी कहानी में बहुत सारा गंदा, अश्लील और दर्दनाक विवरण है। मैंने जानबूझकर कुछ भी नहीं छुपाया क्योंकि सच्चाई कड़वी होती है। क्या आपको लगता है कि मैंने चुदाई के सीन ज्यादा विस्तार से दिए? क्या गाली-गलौज ज्यादा थी या कम? क्या आपको लगता है कि मेरे बदले की योजना यथार्थवादी थी या मैंने उसे जल्दी खत्म कर दिया? क्या आप चाहते हैं कि अगली कहानी में और भी ज्यादा एक्सप्लिसिट सीन हों, जैसे गैंगरफ सेक्स, सैडोमैसोकिज्म या फिर किसी और तरह की मजबूरी का फायदा उठाने वाली कहानी?
आपकी राय मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कृपया कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको यह कहानी कैसी लगी। अगर आप भी किसी ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हैं या गुजर चुके हैं और बात करना चाहते हैं तो निःसंकोच लिख सकते हैं। मैं वादा नहीं कर सकती कि मैं कोई समाधान दे पाऊँगी लेकिन एक अच्छी श्रोता जरूर बन सकती हूँ। आपके सहयोग और प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। याद रखिए, अंधेरा चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दिन सूरज जरूर निकलता है।


