HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesहलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई ससुर के साथ

हलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई ससुर के साथ

हलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई 60 साल के ससुर के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मैं आयशा हूँ, दिल्ली के एक मुस्लिम परिवार की 20 साल की बहू, जिसका पति मुझे तीन तलाक दे चुका था और दोबारा अपनाने के लिए हलाला की रस्म निभानी पड़ी। मेरे 60 साल के ससुर हाजी सलीम खान ने मुझे निकाह करके सुहागरात मनाई, जिसमें उन्होंने आयुर्वेदिक सेक्स पावर की गोलियाँ खाकर अपना बूढ़ा लंड खड़ा किया और मुझे भी कामुकता बढ़ाने वाली दवा खिलाई ताकि मैं उनकी चुदाई में साथ दूँ। उन्होंने मेरी कुंवारी सी चूत को फाड़ा, मेरे बूब्स चूसे, गांड मारी और रात भर चोदा। हलाला पूरा होने के बाद मेरा पति मुझे वापस ले गया पर अब मुझे ससुर की चुदाई भी सहनी पड़ती है। कहानी में मेरे डर, लाचारी, फिर भी चूत की आग, और अंत में गर्भपात की पीड़ा सब विस्तार से है।


Halala ke liye nikah karke suhagraat manayi sasur ke saath Antarvasna Hindi Sex Story :- दोस्तों मेरा नाम आयशा खान है और मैं एक शादी शुदा मुस्लिम महिला हूँ। उस रात की याद आज भी मेरी चूत में सुलगती है क्योंकि मैं सिर्फ 20 साल की थी और मेरा शराबी पति मुझे तीन तलाक दे चुका था। मेरे पति मुझे तीन तलाक देने के बाद फिर से अपनाना चाहते थे और इसके लिए मेरी हलाला की रस्म होनी थी। हलाला की रस्म के तहत मेरे 60 साल के ससुर हाजी सलीम खान ने मुझे निकाह किया और सुहागरात मनाने का फैसला किया। मैं डर रही थी, मेरे हाथ काँप रहे थे पर परिवार की इज्जत और पति को वापस पाने की मजबूरी में मैं तैयार हो गई अपने पिता की उम्र के ससुर जी के साथ हलाला की रस्म पूरी करने के लिए।

हलाला की रस्म के लिए मुझे मेरे 60 वर्ष के बूढ़े ससुर ने मुझे बिलकुल नयी नवेली दुल्हन के जैसे लाल जोड़े में सजाया, मेरे मोटे मोटे बूब्स पर सोने का बड़ा भारी सा मंगलसूत्र लटक रहा था और मेरी टाइट चूत में एक अजीब सी गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। कमरे में अगरबत्ती की खुशबू थी, बेड पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी थीं और ससुर ने आयुर्वेदिक सेक्स पावर की गोलियाँ खाईं। उन्होंने मुझे भी कामुकता बढ़ाने वाली दवा खिलाई और बोले, “आयशा, आज तू मेरी दुल्हन है, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम बनेगी।”

हलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई ससुर के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

हलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई ससुर के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी After getting married for Halala celebrated the wedding night with father-in-law Antarvasna Hindi sex story
Halala celebrated the wedding night with father-in-law Antarvasna Hindi sex story

मेरे 60 साल के बूढ़े ससुर हाजी सलीम खान ने मेरे घूँघट के नीचे से मेरे होंठ चूमे, उनकी दाढ़ी मेरे गालों को चुभ रही थी पर उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैंने विरोध किया, “अब्बू, ये गुनाह है।” पर वो बोले, “हलाला है बेटी, ये धर्म है, आज तुझे चोदकर तेरी चूत का मालिक बनूँगा।” उन्होंने मेरे जोड़े का ब्लाउज फाड़ा और मेरे टाइट बूब्स बाहर निकाल लिए। वो मेरे निप्पलों को चूसने लगे, उनके दाँत काट रहे थे और मेरी चूत गीली हो गई। मैं सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… अब्बू… धीरे…” पर मेरी कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी। ससुर ने अपना कुर्ता उतारा, उनका बूढ़ा बदन ढीला था पर उनकी गोलियाँ असर कर रही थीं, उनका लंड खड़ा हो गया।

मेरे ठरकी ससुर जी ने मेरा लेहंगा ऊपर किया और मेरी पैंटी फाड़ दी। पैंटी फटते ही अब मेरी गुलाबी चूत मेरे ससुर जी के सामने खुल गई, वो घुटनों पर बैठे और अपनी जीभ मेरी चूत पर फिराने लगे। मैं सिहर उठी, मेरे मुँह से “नहीं अब्बू… ये गलत है भगवान के वास्ते ये सब मत करो मेरे साथ… आह… उई माँ…. आह्ह…” निकल गया पर अपने आप ही मेरी दोनों टाँगें चौड़ी हो गईं। मेरे ससुर जी की जीभ मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी, मेरे क्लिट को चूस रही थी और मेरे बूब्स अपने आप मसलने लगे। ससुर बोले, “देख बहु, तेरी बुर तो पहले से तैयार बैठी है मेरा लंड लेने के लिए, आज तुझे अपनी बहु से रंडी बना दूँगा बेटी।” मैं रो रही थी पर मेरी चूत का रस मेरे ससुर जी के मुँह में गिर रहा था। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा, उसका गरम सुपारा मेरे होंठ चीर रहा था। मैंने मना किया, “अब्बू, मैं कुंवारी हूँ।” पर वो बोले, “तेरा पति तो तुझे छोड़ चुका, आज मैं तेरी चूत का मालिक बनूँगा।”

ससुर ने मेरी नंगी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपना बूढ़ा लंड मेरी चूत पर सटा दिया। मैंने महसूस किया कि उनका लंड मेरी चूत को चीरने वाला है। वो धीरे से धक्का मारने लगे और मेरा भोसड़ा फटने लगा। मैं चीखी, “नहीं अब्बू ऐसा मत करो… दर्द हो रहा है… आह्ह अब्बू…” पर वो रुके नहीं। चुदाई के दौरान मेरे ससुर जी ने एक जोर का धक्का मारा और उनका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मेरे ससुर जी का लंड काफी जायदा बड़ा और मोटा था जिस वजह से मेरी चूत से खून निकलने लगा। वो बोले, “देख रंडी, तेरी सील टूट गई, अब तू मेरी वेश्या है।” मैं रो रही थी पर मेरी चूत उनके लंड को निचोड़ रही थी। वो धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगे और मेरी चूत उनके लंड की आदी होने लगी। मेरे दर्द की जगह सुख लेने लगा और मेरे मुँह से “आह्ह… उफ्फ…” निकलने लगा।

हलाला की रस्म के दौरान सुहागरात की चुदाई और ससुर का काला लंड

ससुर मेरे ऊपर झुके और मेरे बूब्स चूसने लगे, उनके दाँत मेरे निप्पलों पर काट रहे थे। मैंने उनकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए और मेरी कमर अपने आप हिलने लगी। वो बोले, “अब मजा आ रहा है ना छिनाल?” मैंने शर्म से सिर झुका लिया पर मेरी चूत उनके हर धक्के पर सिकुड़ रही थी। ससुर जी ने चोदने की स्पीड बढ़ा दी और मेरी चूत में चुदाई की आवाजें गूँजने लगीं, “फच-फच… फच-फच…”। मेरे बूब्स लाल हो गए थे और मेरी टाइट चूत का रस ससुर जी के लंड पर लिपट रहा था। मैंने महसूस किया कि मैं झड़ने वाली हूँ, मेरी टाँगें काँपने लगीं और मैं चीख पड़ी, “आह्ह… मैं… मैं मर गई…” और मेरी चूत से रस की बौछार निकल पड़ी। वो भी जोर-जोर से धक्के मारने लगे और बोले, “ले रंडी, मेरे माल की बौछार।”

उन्होंने मेरे अंदर ही अपना गरम माल उड़ेल दिया, मेरी चूत उनके वीर्य से भर गई। मैं हाँफ रही थी, मेरी चूत में जलन थी पर एक अजीब सुख भी था। वो मेरे ऊपर लेटे रहे, उनका लंड अभी भी मेरी चूत में था और धीरे-धीरे सिकुड़ रहा था। मैंने उनसे कहा, “अब्बू, अब निकल जाओ, हलाला पूरा हो गया।” वो हँसे और बोले, “रंडी, रात अभी बाकी है, अब तेरी गांड मारूँगा।” मैं डर गई, मेरी आँखें नम हो गईं और मैं चुप हो गई। वो उठे, अपना लंड पोंछा और बोले, “कल फिर आऊँगा, तेरी चूत मेरी गुलाम है।” दरवाजा खोलकर चले गए और मैं नंगी ही बेड पर पड़ी रही।

मेरी चूत से उनका माल और मेरा रस टपक रहा था, मेरे मोटे मोटे बूब्स पर दाँतों के निशान थे। मैंने उठकर शावर लिया पर मेरी चूत की जलन कम नहीं हो रही थी। मैंने अपनी सास को फोन किया और सारी बात बताई। वो बोली, “आयशा, हलाला पूरा हो गया, अब तू अपने पति के पास जा।” मैं डर गई, मेरे हाथ काँपने लगे। रात को मैंने प्रेग्नेंसी टेस्ट किया और दो लाइनें आईं, मैं गर्भवती थी। मेरे पति को पता चला तो उसने मुझे वापस ले लिया पर ससुर की नजर मेरी चूत पर थी। घर में मेरी बदनामी फैल गई और लोग मुझे वेश्या कहने लगे। मैंने गर्भपात करवाया पर मेरी चूत हमेशा के लिए ढीली हो चुकी थी।

ससुर अब भी मुझे चोदते थे, कभी रसोई में, कभी छत पर। एक दिन वो मुझे अपने कमरे में ले गए और बोले, “आयशा, आज फिर सुहागरात मनाएँगे।” मैंने मना किया पर वो नहीं माने। उन्होंने मुझे बेड पर पटक दिया और मेरी सलवार उतार दी। मेरी चूत उनके सामने खुली थी, वो घुटनों पर बैठे और अपनी जीभ मेरी चूत पर फिराने लगे। मैं सिहर उठी, मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई। उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी और मेरे क्लिट को चूस रही थी। मेरे बूब्स अपने आप मसलने लगे और मेरी साँसें तेज हो गईं। वो उठे और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे, उसका गरम सुपारा मेरी चूत के होंठ चीर रहा था।

हलाला की रस्म के बाद घर में छिपी चुदाई और गर्भ की पीड़ा

ससुर ने मेरी टाँगें चौड़ी कीं और अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। मैं चीखी, “अब्बू… धीरे… आह्ह…” पर वो बोले, “चुप रंडी, तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है।” वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे और मेरी चूत में चुदाई की आवाजें गूँजने लगीं। मेरे बूब्स उछल रहे थे और मेरी गांड बेड पर रगड़ खा रही थी। मैंने महसूस किया कि मैं फिर झड़ने वाली हूँ, मेरी टाँगें काँपने लगीं और मैं चीख पड़ी, “आह्ह… मैं मर गई…” और मेरी चूत से रस की बौछार निकल पड़ी। ससुर भी झड़ गए और मेरे अंदर अपना माल उड़ेल दिया। मैं हाँफ रही थी, मेरी चूत उनके माल से भर गई। वो बोले, “आयशा, तू मेरी पर्सनल रंडी है।”

मेरा पति घर आया और मुझे अपने कमरे में ले गया। वो बोला, “आयशा, अब तू मेरी है।” पर उसकी नजर मेरे बूब्स पर थी और वो मुझे चोदने लगा। मैं लाचार थी, मेरी चूत दिन में पति से और रात में ससुर से चुदती। एक दिन मुझे फिर गर्भ ठहर गया, इस बार पति का था या ससुर का, पता नहीं। मैंने गर्भपात करवाया पर मेरी कोख खाली हो गई। मेरी सास ने मुझे घर से निकाल दिया और मैं अकेली रह गई। मेरी चूत अब ढीली थी पर मेरी हवस नहीं मिटी। मैंने एक मस्जिद के मौलवी से चुदाई शुरू कर दी।

मौलवी मेरे घर आते और मुझे चोदते। वो बोले, “आयशा, तेरी चूत अल्लाह की नेमत है।” मैं उनकी बात मानती और उनकी चुदाई सहती। मेरी जिंदगी एक रंडी की बन चुकी थी। मैंने सोचा कि हलाला ने मुझे तोड़ा नहीं, बल्कि मेरी हवस को जगा दिया। अब मैं खुद वेश्या बनकर जीती हूँ और मेरी चूत हर लंड को स्वीकार करती है। मेरे बूब्स अब भी टाइट हैं पर मेरी आत्मा एक छिनाल की हो चुकी है।

मैंने अपना घर छोड़ दिया और दिल्ली की गलियों में रंडी बन गई। रात को अलग-अलग मर्द पैसे देकर मुझे चोदते और मेरी चूत वीर्य से भर देते थे। मैंने अपनी हवस को अपना धर्म बना लिया। मेरी यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी एक हलाला से शुरू हुई पर एक रंडी की जिंदगी में खत्म हो गई। मैंने सोचा था की शादी के बाद अपने पति के साथ हर रात सेक्स करा करुँगी मगर शायद मेरी किस्मत में हर रात मेरा पति बदलना लिखा था…

ससुर के साथ हलाला की रस्म निभाने के बाद रंडी बनने का सफर और अंतिम चुदाई

एक दिन ससुर फिर आए और बोले, “आयशा बेटी, आज तुझे फिर से चोदकर गर्भवती कर दूँगा चल जल्दी से नंगी हो जा चुदवाने के लिए।” मैंने उनके साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने से मना किया पर वो नहीं माने। उन्होंने पहले मुझे बिलकुल नंदी कर दिया और फिर मुझे फर्श पर पटक कर मेरी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया। मैंने आनंद लिया और कहा, “हाँ बहनचोद, मुझे अपने बच्चे की मा बना दे चोद चोदकर।” वो मेरे अंदर झड़ गए और मैं फिर गर्भवती हो गई। इस बार मैंने गर्भ रखा पर बच्चा मर चुका था। मैंने गर्भपात करवाया और मेरी कोख हमेशा के लिए खाली हो गई। मैं रोई पर मेरी चूत फिर भी हवस में थी।

मैंने ससुर को फोन किया और कहा, “आज मेरी कोख खाली है, आकर फिर भर दो।” वो आए और मेरी फटी चूत में अपना लंड डाल दिया। मैं दर्द और सुख दोनों महसूस कर रही थी। उन्होंने मेरी गांड और चूत दोनों मारी और मैं चीखती रही। मेरी जिंदगी अब सिर्फ चुदाई थी। मैंने एक कोठे पर काम शुरू कर दिया और वहाँ ग्रुप सेक्स करने लगी। मेरे बूब्स हर लंड से मसलवाते और मेरी चूत हर रात भर जाती।


हलाला के लिए निकाह करके सुहागरात मनाई ससुर के साथ अन्तर्वासना हिंदी 18+ XXX सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

आखिरकार मैं आयशा, जो कभी एक मासूम बहू थी, ससुर के साथ हलाला की रस्म निभाने के बाद आज एक हवस की भूखी रंडी बन चुकी हूँ और मेरी चूत और गांड ने सैकड़ों लंड चख लिए हैं। उस हलाला की रस्म और सुहागरात की चुदाई ने मेरी जिंदगी बदल दी, मेरी शादी बची पर मेरी इज्जत चली गई, मेरा गर्भ गिरा पर मेरी हवस नहीं मिटी। मैंने सीखा कि मजबूरी में भी शारीरिक सुख छिपा होता है और ससुर की चुदाई के दर्द के बाद भी चूत की आग बुझती नहीं। मैं अब अपनी मर्जी से चुदाई करती हूँ, मेरे बूब्स हर मर्द के हाथों में हैं और मेरी गांड हर लंड की गुलाम है।

मेरा शराबी पति अब मुझे भूल चुका है पर मुझे कोई गम नहीं, मेरी कोख खाली है पर मेरी चूत हमेशा भरी रहती है। मैंने शादी के बाद घर से कोठे तक का सफर तय किया और अपनी हवस को स्वीकार कर लिया। क्या आपको मेरी कहानी में वो आग लगी जो मेरी चूत में सुलगती है? क्या आपको मेरे हलाला से रंडी बनने तक का सफर उत्तेजित करता है? कृपया बताएँ कि आपको मेरी चुदाई की बारीकियाँ कैसी लगीं, क्या और गंदी गालियाँ चाहिए या और हलाला की पीड़ा? आपकी राय मेरी अगली चुदाई की स्क्रिप्ट लिखेगी।

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