HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesचुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर

चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर

गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- यह कामुकता से भरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी एक वास्तविक घटना पर आधारित काल्पनिक, अत्यंत कामुक और स्पष्ट हिंदी सेक्स कहानी है, जो घने जंगल में रहने वाले एक व्यक्ति, अबीर शर्मा, की है। अबीर शर्मा, एक 32 वर्षीय वन विभाग का कर्मचारी, अपनी 18 वर्षीय बेटी माया और अपनी 50 वर्षीय माँ शांति के साथ जंगल के एकांत बंगले में रहता है। यह कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी अबीर शर्मा के दृष्टिकोण से है, जो अपने परिवार और नौकरों के साथ अश्लील, वर्जित और हास्यपूर्ण यौन अनुभवों का वर्णन करता है।

इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी में गंदी गालियाँ, अश्लील हास्य, और स्पष्ट यौन दृश्य हैं, जो पाठकों में उत्तेजना, शर्मिंदगी और लाचारी की भावनाएँ जगाते हैं। स्थान एक सुदूर जंगल है, जहाँ अबीर शर्मा का आलिशान बंगला एकमात्र घर है, और निकटतम गाँव 80 किलोमीटर दूर है। इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी में पाँच बिहारी नौकर—सूरज, कमल, रमेश, विजय और मोहन—भी शामिल हैं, जो कहानी के कामुक और हास्यपूर्ण तत्वों को बढ़ाते हैं। यह पूरी तरह से मौलिक कहानी है, जिसमें कोई कॉपीराइट सामग्री नहीं है, और यह हिंदी में प्राकृतिक, बोलचाल की भाषा में लिखी गई है। चलिए अब कहानी विस्तार से पढ़ते हैं…


Gang bang group sex fair organized inside a luxurious bungalow built in the forest Antarvasna Hindi sex story :- मेरा नाम अबीर शर्मा है। मैं 32 साल का हूँ, वन विभाग में काम करता हूँ, और जंगल के बीचों-बीच एक बंगले में रहता हूँ। मैं दिखने में ठीक-ठाक हूँ—लंबा, गोरा, और मांसल शरीर। मेरी शादी पाँच साल पहले टूट गई, जब मेरी पत्नी ने मुझे एक दोस्त के साथ बिस्तर में पकड़ लिया। मुझे हर तरह की चुदाई पसंद है—चाहे औरत हो, मर्द हो, या कुछ और। गंदी, वर्जित चुदाई मुझे सबसे ज्यादा उत्तेजित करती है। मैं अपनी माँ शांति को बचपन से ही कई मर्दों के साथ चुदते देखता आया हूँ। उसकी चूत की भूख कभी खत्म नहीं होती।

मेरी माँ, शांति, 50 साल की हैं, लेकिन उनकी जवानी अभी भी कायम है। बड़े-बड़े बूब्स, मोटी गांड, और चिकनी चूत—वो आज भी किसी को भी ललचा सकती हैं। वो जयपुर में रहती हैं, लेकिन अक्सर मुझसे मिलने जंगल आती हैं। उनकी चुदाई की लत इतनी गहरी है कि वो हर मौके पर लंड की तलाश में रहती हैं। मैंने मेरी 16 साल की उम्र में मेरी माँ की चूत को पहली बार चोदा, और तब से हम माँ बेटे का रिश्ता और गहरा हो गया।

मुफ्त में पढ़ें गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर हिंदी सेक्स स्टोरी Gang bang group sex fair organized inside a luxurious bungalow built in the forest Antarvasna Hindi sex story
Gang bang group sex fair organized inside a luxurious bungalow built in the forest Antarvasna Hindi sex story

मेरी वर्जिन बेटी माया 18 साल की है। वो मेरे साथ सुनसान जंगल में रहती है। माया का शरीर एकदम ताज़ा माल है—दूध जैसे गोरे बूब्स, पतली कमर, और छोटी-सी सील पैक वर्जिन चूत जो अभी तक इस्तेमाल नहीं हुई। मेरी जवान बेटी अभी बहुत मासूम है, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक है, जो बताती है कि वो भी चुदाई के अश्लील खेल में जल्द शामिल होने वाली है अपनी अन्तर्वासना को शांत करने के लिए।

हमारे साथ पाँच बिहारी नौकर हैं—सूरज, कमल, रमेश, विजय, और मोहन जो की हमारे ही आलिशान बंगले में रहते हैं। हमारे ये सब बिहारी नौकर 25 से 35 साल के बीच के हैं, मज़बूत, मर्दाना, और गंदे दिमाग वाले। इनके लंड मोटे और भारी हैं, और इनकी गांडें इतनी मस्त हैं कि मन करता है चाट लूँ। बिहारी नौकर सूरज सबसे गंदा है—वो अपने लाल कच्छे में लंड को ऐसे हिलाता है जैसे कोई सांड अपना लंड हिलाता हो।

बिहारी नौकर कमल की गांड सबसे मोटी है, और वो हर वक्त मुठ मारने को तैयार रहता है। बिहारी नौकर रमेश और विजय को गंदी गालियाँ देना पसंद है, और बिहारी नौकर मोहन का लंड सबसे लंबा है—पूरा 10 इंच लंबा और चार इंच मोटा। हमारा बंगला जंगल के बीच में है। चारों तरफ घना जंगल, और सबसे नज़दीकी गाँव 80 किलोमीटर दूर। यहाँ कोई नहीं आता, और हम इस सुनसान जंगल में जो चाहे कर सकते हैं किसी को कानोंकान खबर तक नहीं होती।

जंगल में गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का गंदा खेल शुरू

उस सुबह मैं अपने बंगले के बरामदे में बैठा चाय पी रहा था। हमारा बिहारी नौकर सूरज सामने झाड़ू लगा रहा था। उसने सिर्फ़ लाल कच्छा पहना था, और उसका मोटा लंड कच्छे में उभर रहा था। झाड़ू लगाने के दौरान बार बार उसका गधे जैसा तगड़ा लंड हिलता और उसकी मस्त गांड मटकती। मेरी आँखें मेरे बिहारी नौकर की सेक्सी गांड पर टिक जातीं। मैंने सोचा, साला, इसकी गांड तो इतनी मस्त है कि चाटने का मन करता है। तभी मेरी मासूम बेटी माया बाहर आई। उसने छोटी-सी फ्रॉक पहनी थी, जिसके नीचे उसकी चूत की हल्की-सी झलक दिख रही थी। वो हमारे बिहारी नौकर सूरज को देखकर मुस्कुराई और बोली, “सूरज भैया, ये क्या हिल रहा है आपके कच्छे में केले का जैसा कहीं आपने केला चुरा कर अपने कच्छे में तो नहीं रख लिया?”

बिहारी नौकर सूरज हँसा और बोला, “बेटी, मैंने कोई केला नहीं चुराया ये तो मेरा मुरगा है। यदि आप को मुझपर शक है तो इसे बाहर निकालकर दिखा दूँ?” मैं चुपके से मेरी मासूम बेटी और बिहारी नौकर को देख रहा था। मेरी मासूम बेटी माया ने मासूमियत से कहा, “हाँ, दिखाओ ना!”फिर सूरज ने अपना कच्छा नीचे खींचा, और उसका 8 इंच का लंड बाहर आ गया। मोटा, काला, और नसों से भरा—जैसे कोई हथियार हो। माया ने उसे पकड़ लिया और बोली, “वाह, ये तो बहुत बड़ा और मोटा मुरगा है!” हमारे बिहारी नौकर सूरज ने मेरी मासूम बेटी का हाथ अपने लंड पर रगड़ा और बोला, “इस मुर्गे में से स्वादिष्ट जूस निकलता है, चखोगी क्या बेटी?”

मैंने सोचा की ये साला बिहारी नौकर तो मेरे मासूम बेटी की वर्जिन चूत में लंड पेलने की तैयारी कर रहा है। लेकिन मुझे उन दोनों की कामुकता भरी हरकतें देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर मेरी मासूम बेटी माया ने उस बिहारी नौकर सूरज का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। ब्लोजॉब करवाते करवाते बिहारी नौकर सूरज की दोनों आँखें बंद हो गईं, और वो सिसकारियाँ लेने लगा। “आह, बेटी, तू तो रंडी बनने वाली है,” उसने कहा। माया ने लंड को गले तक लिया, और उसका मुँह लार से गीला हो गया।

मेरे बेटी को बिहारी नौकर का ब्लोजॉब करते देख मेरी अन्तर्वासना जाग उठी और फिर मैंने अपने लंड को कच्छे से बाहर निकाला और मुठ मारने लगा अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए। मैं मेरी बेटी को बिहारी नौकर का ब्लोजॉब करते देख हस्तमैथुन कर रहा था की तभी शांति, मेरी माँ, बाहर आई। उसने सिर्फ़ एक पतली साड़ी लपेटी थी, जिसके नीचे उसके बड़े-बड़े बूब्स साफ़ दिख रहे थे। उसने सूरज और माया को देखा और हँसते हुए बोली, “अरे, ये क्या? मेरी वर्जिन पोती तो बचपन में ही बिहारी नौकर के लंड की दीवानी हो गई!” बिहारी नौकर सूरज ने मेरी माँ शांति को देखा और हँसते हुए बोला, “मालकिन, तुम भी आ जाओ। तुम्हारी चूत को भी तो मेरा लंड चाहिए अन्तर्वासना शांत करने के लिए।”

मेरी माँ शांति ने बिहारी नौकर के लंड के साथ मस्ती करने के लिए अपनी साड़ी उतार दी और फिर पेटीकोट और पैंटी भी खोल दी। मेरी माँ की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी, और उसकी जाँघें चमक रही थीं। वो सूरज के पास गई और उसका लंड पकड़कर बोली, “साले, तेरा लंड तो मेरी चूत का बाप है। पेल दे इसे!” बिहारी नौकर सूरज ने मेरी मासूम बेटी माया को अपनी गोद में उठाया और उसकी सील पैक वर्जिन चूत में अपनी उंगली डाल दी। मेरी वर्जिन बेटी बेटी माया दर्द के मारे जोर से चीखी, “आह, भैया, ये क्या कर रहे हो?” सूरज ने कहा, “बेटी, अभी तो तुझे असली मज़ा मिलेगा।”

मैं अब और नहीं रुक सका जो उनके इस कामुकता से भरे खेल में शामिल हो गया। मैंने अपने कपड़े उतारे और सूरज की गांड पर हाथ फेरा। उसकी गांड गर्म और चिकनी थी। मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, और वो सिसकारा। “साहब, आप भी?” उसने हँसते हुए कहा। मैंने कहा, “साले, तू मेरी बेटी को चोद रहा है, तो मैं तेरी गांड मारूँगा।”

इसके बाद, सूरज ने मेरी कुँवारी बेटी माया को ज़मीन पर लिटाया और उसकी टाइट चूत में अपना गधे जैसा लंड डाल दिया। माया की चीख निकल गई, लेकिन वो मज़े से चुदने लगी। शांति मेरे पास आई और मेरे लंड को चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी, और मैं सिहर उठा। “माँ, तू तो साली रंडी है,” मैंने कहा। वो हँसी और बोली, “बेटा, तेरे लंड ने तो मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया है और आज मैं रंडी बनी हूँ तो ये सब तेरा ही किया धरा है।”

नौकरों के साथ गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का गंदा खेल

तभी बाकी नौकर—कमल, रमेश, विजय, और मोहन—घर के अंदर आए। उन्होंने हमें इस हाल में देखा और हँसने लगे। बिहारी नौकर कमल ने कहा, “साला, ये तो पूरा चुदाई का मेला सजा हुआ है इस आलीशान बंगले में!” उसने अपना कच्छा उतारा, और उसका 9 इंच का लंड बाहर आ गया। उसका लंड इतना मोटा था कि माया की आँखें फट गईं। वो बोली, “पापा, ये तो बहुत बड़ा है!” मैंने हँसकर कहा, “बेटी, ये तेरा इम्तिहान है। ले ले इसे अपनी चूत में।”

कमल ने मेरी वर्जिन बेटी को पकड़ा और उसकी सील पैक वर्जिन चूत में अपना गधे के लंड जैसा लंड पेल दिया। चुदाई के दौरान मेरी कुंवारी बेटी माया की दर्दनाक चीखें जंगल में गूँज रही थीं। सूरज अब मेरी माँ शांति को अपनी रंडी बनाकर चोद रहा था। उसने शांति को घोड़ी बनाया और उसकी गांड में लंड डाल दिया। शांति चिल्लाई, “साले, मेरी गांड फट जाएगी!” सूरज ने हँसकर कहा, “मालकिन, तेरी गांड तो पहले से ही फटी हुई है और ज्यादा क्या फटेगी।”

रमेश और विजय मेरे पास आए। रमेश ने मेरा लंड पकड़ा और बोला, “साहब, आपका लंड तो मस्त है। इसे मेरी गांड में डालो और मेरे साथ गे सेक्स करके अपनी अन्तर्वासना शांत कर लो।” मैंने उसकी गांड में लंड पेल दिया, और वो सिसकारने लगा। विजय ने मेरा मुँह पकड़ा और अपना लंड मेरे गले में डाल दिया। मैं उसके लंड को चूस रहा था, और मेरी गांड में रमेश का लंड था।

मोहन ने माया को पकड़ा और उसकी चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं। माया सिसकार रही थी। उसने कहा, “मोहन भैया, और तेज़ करो!” मोहन ने अपना 10 इंच का लंड माया की चूत में डाला, और वो चीख पड़ी। मैंने देखा कि माया की चूत से खून निकल रहा था, लेकिन वो मज़े ले रही थी।

इसके अलावा, सूरज ने मेरी कामुकता भरी माँ शांति की गांड से लंड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया। मैं सूरज के लंड के माध्यम से मेरी माँ की गांड का स्वाद चख रहा था। “साले, तू तो पूरा मादरचोद बेटा है अपनी माँ की गांड का स्वाद बड़े मजे से चख रहा है,” सूरज ने कहा। मैंने हँसकर जवाब दिया, “सूरज, मुझे मेरी माँ की गांड कस स्वाद बचपन से ही बहुत पसंद है, जब मैं मात्र 16 वर्ष का था तब पहली बार मैंने मेरी माँ की गांड का स्वाद चखा था और बस उस दिन से मुझे ये बहुत पसंद है।”

गैंग बैंग जंगली ग्रुप चुदाई का मेला

जंगल में हमारा बंगला गैंग बैंग ब्रौप चुदाई का अड्डा बन गया था। अब हर दिन जंगल में बने हमारे इस आलीशान बंगले के अंदर चुदाई का मेला सजा करता और सभी मिलकर गैंग बैंग ग्रुप सेक्स करा करते। अब आज की ही घटना ले लो… सूरज और कमल अब मेरी मासूम बेटी माया को एक साथ चोद रहे थे और मेरी बेटी को भी थ्रीसम सेक्स करने में बड़ा आनंद आ रहा था। सूरज ने माया की चूत में लंड डाला, और कमल उसकी गांड मार रहा था। माया चीख रही थी, लेकिन उसकी आँखों में मज़ा साफ़ दिख रहा था। शांति मेरे लंड पर बैठ गई और उछलने लगी। उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरे लंड पर लार टपक रही थी।

रमेश और विजय अब एक-दूसरे को चोद रहे थे। रमेश ने विजय की गांड में लंड डाला, और विजय सिसकार रहा था। मोहन मेरे पास आया और मेरी गांड में उंगली डालने लगा। मैंने कहा, “साले, उंगली क्या डाल रहा है? अपना लंड पेल दे!” मोहन ने हँसकर अपना लंड मेरी गांड में डाला, और मैं चीख पड़ा।

तभी मेरी बदचलनमाँ शांति ने मुझसे कहा, “अबीर बेटा, तू अपनी कुँवारी बेटी को भी चोद ले। मज़ा आएगा इसकी टाइट चूत चोदने में।” मैंने मेरी कुंवारी बेटी माया को हवास भरी नजरों से देखा। उसकी चूत सूरज और कमल के लंड से लाल हो चुकी थी। मैंने जल्दी से मेरी बेटी माया को पकड़ा और उसकी चूत में थूक लगाकर अपना लंड डाल दिया। माया ने कहा, “पापा, ये गलत है भला एक पिता अपनी सगी बेटी के साथ अवैध सेक्स संबंध कैसे बना सकता है!” मैंने हँसकर कहा, “बेटी, ये जंगल है। यहाँ कोई नियम नहीं।”

माया की चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड फंस गया। मैंने धक्के मारने शुरू किए, और माया सिसकारने लगी। सूरज ने मेरी गांड में लंड डाला, और अब हम तीनों एक-दूसरे को चोद रहे थे। शांति ने कमल का लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। रमेश और विजय अब माया के बूब्स चूस रहे थे।

गंदा हास्य और चरम उत्तेजना

तभी सूरज ने हँसते हुए कहा, “साहब, आपकी कुँवारी बेटी की चूत तो ऐसी तंग है जैसे अभी तो पूरी तरह से खुली ही नहीं है मेरा तो लंड ही छिल गया चुदाई करते करते।” मैंने जवाब दिया, “साले, और तेरी गांड तो भटूरे जैसी फूली हुई है!” सब हँस पड़े। मेरी माँ शांति ने कहा, “कमल, तेरा लंड तो मेरी चूत का बाप है। इसे मेरी गांड में डाल दे और मेरी गांड मार।” कमल ने मेरी माँ शांति की गांड में अपना मुसल जैसा लंड एक झटके में पेल दिया, और फिर मेरी रंडी माँ अपनी गांड चुदवाते चुदवाते चिल्लाने लगी।

मोहन ने मासूम माया बेटी को गोद में उठाया और उसकी चूत में लंड डालकर उछालने लगा। मासूम माया की दर्दनाक चीखें सुनसान जंगल में गूँज रही थीं। मैंने सूरज की गांड में उंगली डाली और उसका लंड मुँह में लेकर उसका लंड चाट लिया। जब मैं लंड चाट रहा था तो इस दौरान उसके लंड से मूत निकल गया। “साले, तेरा मूत तो शहद जैसा है,” मैंने कहा। सूरज हँसा और बोला, “साहब, आप तो पूरी रंडी बन गए हो।”

इसके बाद, हम सबने एक-दूसरे को चोदा। माया की चूत और गांड लाल हो चुकी थी। शांति की चूत से वीर्य टपक रहा था। मैंने माया को फिर से चोदा, और इस बार उसकी गांड में लंड डाला। वो चीखी, लेकिन मज़े से चुदने लगी। सूरज और कमल ने मेरी गांड और मुँह में लंड डाला, और मैं उनके वीर्य से नहा गया।


गैंग बैंग ग्रुप चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Gang bang group sex fair organized inside a luxurious bungalow built in the forest Antarvasna Hindi sex story :- उस दिन के बाद, हमारा बंगला जंगल में चुदाई का अड्डा बन गया। माया अब हर दिन नौकरों के लंड लेती थी, और शांति की चूत की भूख और बढ़ गई। मैं खुद हर रात किसी ना किसी की गांड या चूत में लंड पेलता था। सूरज, कमल, रमेश, विजय, और मोहन हमारे परिवार का हिस्सा बन गए। हमारा जंगल अब सिर्फ़ पेड़ों और जानवरों का नहीं, बल्कि चुदाई का जंगल बन गया था।

लेकिन, इस सबके बीच, मुझे कभी-कभी शर्मिंदगी भी होती थी। माया मेरी बेटी थी, और शांति मेरी माँ। फिर भी, उनकी चूत और मेरे लंड की भूख ने हमें एक-दूसरे के करीब ला दिया। मैंने सीखा कि जंगल में कोई नियम नहीं होते। यहाँ सिर्फ़ मज़ा और उत्तेजना है। मुझे बताइए, आपको यह इंडियन हिंदी XXX ग्रुप सेक्स कहानी कैसी लगी? क्या आपको पात्रों का व्यवहार पसंद आया? क्या चुदाई का मेला सजा जंगल में बने आलीशान बंगले के अंदर गैंग बैंग ग्रुप चुदाई कहानी का हास्य और कामुकता सही थी, या इसे और गंदा करना चाहिए? आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

RELATED ARTICLES

You Must Watch