दीदी के चूतड़ों की मालिश करने के बाद कुत्तिया बनाकर चोदा (Didi ke chutarron ki malish karne ke baad kuttiya banakar choda) :- एक युवा भाई विक्रम की अपनी खूबसूरत बड़ी दीदी शिवानी के प्रति छिपी हुई तीव्र कामुक वासना की यह कहानी है। माता-पिता के गांव जाने पर घर में अकेले रहते हुए दोनों के बीच की भावनाएं उफन पड़ती हैं। दीदी की कामुक अदाएं और भाई की जलती हुई इच्छाएं एक-दूसरे से टकराती हैं, जिससे शुरू होती है वर्जित सुख की एक लंबी श्रृंखला। मालिश के बहाने शुरू हुआ स्पर्श धीरे-धीरे गहरी चुदाई तक पहुंचता है, जहां दीदी खुद को भाई की निजी रंडी बनाकर पूरी तरह समर्पित कर देती है। यह कहानी प्यार, वासना, अपराधबोध और तीव्र शारीरिक आनंद की गहराइयों में ले जाती है, जो पाठक के मन में लंबे समय तक कामुक लहरें पैदा करती रहती है।
Didi ke chutarron ki malish karne ke baad kuttiya banakar choda :- मेरा नाम विक्रम है। मैं बीस साल का जवान लड़का हूं, इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता हूं और चंडीगढ़ के एक छोटे से फ्लैट में अपनी बड़ी दीदी शिवानी के साथ रहता हूं। दीदी पच्चीस साल की हैं, एक अच्छी कंपनी में जॉब करती हैं और बेहद खूबसूरत हैं – गोरी त्वचा, लंबे काले बाल, बड़े-बड़े रसीले चूचे जो हर ड्रेस में उभरे हुए लगते हैं, पतली कमर और गोल-मटोल चूतड़ जो चलते वक्त लहराते हैं।
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दोस्तों बचपन से हम भाई-बहन दोनों बहुत करीब रहे हैं, लेकिन पिछले तीन-चार सालों से मेरे मन में उनके लिए कुछ अलग तरह के विचार आने लगे थे। रात को अकेले में मैं उनकी ब्रा-पैंटी के बारे में सोचकर मुठ मारता था, उनके तने हुए निप्पलों की कल्पना करता था और सोचता था कि कभी उनकी टाइट चूत में अपना मोटा लंड डालूं। लेकिन ये सब सिर्फ फंतासी थी, हकीकत में मैं डरता था कि दीदी को पता चले तो क्या होगा।
हमारे मम्मी-पापा गांव में रहते हैं और कभी-कभी शहर आते हैं। इसी महीने वे दस दिन के लिए गांव गए थे, क्योंकि कोई रिश्तेदारी का काम था। घर में सिर्फ हम दोनों थे। दीदी दिन भर ऑफिस जातीं और शाम को थककर आतीं। मैं कॉलेज से जल्दी आ जाता और खाना बना लेता। उन दिनों मौसम भी गरम था, दीदी घर आकर सबसे पहले कपड़े बदलतीं और हल्की नाइटी पहन लेतीं।
उनकी नाइटी में से उनके बड़े बोबे साफ दिखते थे, निप्पल उभरे हुए और गांड की शक्ल साफ नजर आती। मैं चुपके से देखता रहता और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता। रात को सोते वक्त मैं उनके कमरे के बाहर से उनकी सांसें सुनता और मुट्ठी मारता। लेकिन दीदी को कुछ पता नहीं था, या शायद था लेकिन अनजान बनती थीं।
एक शाम दीदी ऑफिस से बहुत थकी हुई आईं। बारिश हो रही थी और वे पूरी तरह भीग चुकी थीं। उनकी सफेद शर्ट चिपक गई थी और काली ब्रा साफ दिख रही थी। बड़े-बड़े चूचों की शक्ल और काले निप्पल साफ उभरे हुए थे। मैं दरवाजा खोलते ही उन्हें देखता रह गया। दीदी ने मुस्कुराकर कहा, “विक्रम, जल्दी तौलिया दे, पूरी भीग गई हूं।”
मैं तौलिया लेकर आया और वे बाथरूम में चली गईं। बाथरूम में से मेरी बहन की आवाज आई, “विक्रम भाई, मेरी पिंक ब्रा और पैंटी अलमारी से निकाल देना।” मैं अलमारी खोली और उनकी सुगंधित अंडरगार्मेंट्स देखकर मेरा लंड तन गया। मैंने ब्रा-पैंटी निकाली लेकिन मन में ख्याल आया कि एक बार सूंघ लूं। दीदी शावर ले रही थीं, मैंने जल्दी से पैंटी सूंघी – चूत की महक थी, हल्की नमकीन और कामुक। मेरा लंड पागल हो गया।
दीदी बाहर आईं तो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। पानी टपकते बाल, गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें और छोटे-छोटे चूचे ब्रा में कैद। उन्होंने देखा कि मैं उन्हें घूर रहा हूं, मुस्कुराईं और कहा, “क्या देख रहा है, भाई? जल्दी खाना गर्म कर।” लेकिन उनकी आंखों में कुछ अलग था। रात को खाना खाते वक्त वे बोलीं, “विक्रम, मेरी पीठ बहुत दुख रही है, ऑफिस में सारा दिन कुर्सी पर बैठे बैठे मेरी चूतड़ों का भी बुरा हाल हो गया है। थोड़ी मालिश कर देगा क्या भाई मेरी पीठ और चूतड़ों की?”
अपनी बहन के चूतड़ों की मालिश करने के लिए मैं खुशी से राजी हो गया। दीदी बेड पर पेट के बल लेट गईं, नाइटी ऊपर उठी हुई और दीदी की मोटी गांड की शक्ल साफ दिख रही थी। मैं उनके कंधों पर तेल लगाकर मालिश करने लगा। धीरे-धीरे हाथ नीचे गए, कमर पर, फिर चूतड़ों पर। दीदी ने कुछ नहीं कहा, सिर्फ आह भरी। मेरा लंड खड़ा होकर पैंट फाड़ रहा था।
दीदी की कमर और चूतड़ों की मालिश से शुरू हुई कामुक आग
मालिश करते-करते मेरा हाथ दीदी की जांघों पर पहुंच गया। उनकी त्वचा मुलायम और गरम थी। मैंने हिम्मत करके चूतड़ों को अच्छे से दबाया। दीदी ने सिसकारी ली और बोलीं, “विक्रम, थोड़ा नीचे भी।” मैं समझ गया कि दीदी भी गरम हो रही हैं। मैंने उनकी टांगें फैलाईं और अंदरूनी जांघों पर हाथ फेरा। दीदी की सांसें तेज हो गईं। अचानक उन्होंने करवट बदली और मुझे देखा।
उनकी आंखें कामुक थीं। बोलीं, “विक्रम, तू बड़ा हो गया है न? क्या सोचता है मेरे बारे में?” मैं डर गया लेकिन सच बोल दिया, “दीदी, मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं, गलत तरीके से।” दीदी मुस्कुराईं और बोलीं, “मुझे पता था। तेरी नजरें सब बताती हैं।” फिर उन्होंने मेरा हाथ अपने चूचों पर रख दिया। मेरे हाथ कांप रहे थे। बड़े रसीले बोबे, निप्पल तने हुए। मैंने दबाया और दीदी ने आह भरी।
उस रात हमने सिर्फ किस किया। दीदी के होंठों का रस चखा, उनके मुंह में जीभ डाली और वे मेरी जीभ चूसने लगीं। मैंने उनके चूचों को नाइटी के ऊपर से दबाया, निप्पल चुटकी से मसला। दीदी की सांसें गरम थीं, वे बोलीं, “विक्रम, धीरे-धीरे, पहली बार है न तेरी?” मैंने हां कहा। दीदी ने मेरी पैंट उतारी और मेरा मोटा लंड बाहर निकाला।
मेरा बड़ा और मोटा लंड देखकर दीदी बोलीं, “वाह, कितना बड़ा और मोटा है भाई तेरा लौड़ा, जिस किसी लड़की से तेरी शादी होगी वह तो बड़ी खुशनसीब होगी जो उसे मेरे भाई के इतने मस्त लंड से चुदवाने को मिलेगा।” फिर उन्होंने हाथ से सहलाया। मैं झड़ते-झड़ते बचा। दीदी हंसकर बोलीं, “कल और करेंगे।” मैं रात भर सो नहीं सका, उनके चूचों और चूत की कल्पना करता रहा।
अगली सुबह दीदी जल्दी ऑफिस चली गईं लेकिन शाम को आते ही बोलीं, “भाई आज पूरा दिन ऑफिस में तेरे लम्बे और मोटे लंड के बारे में सोचती रही।” मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेड पर ले गया। दीदी ने खुद नाइटी उतारी। नंगी दीदी – बड़े-बड़े चूचे, काले निप्पल, पतली कमर और झांटों वाली चूत। मैं पागल हो गया। मैंने उनके चूचों पर टूट पड़ा, एक को मुंह में लिया और चूसा। निप्पल कठोर थे, मैंने काटा और दीदी चीखीं, “आह, चूस मेरे बोबे, जोर से।” मैंने दोनों चूचों की मालिश की, दूध जैसा रस महसूस हुआ। दीदी की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।
फिर मैं नीचे गया। दीदी की चूत पर घने काले झांट के बाल थे, रसदार और गरम। मैंने चूत चाटनी शुरू की। दीदी की भगनासा पर जीभ फेरी, चूत के होंठ चाटे और अंदर जीभ डाली। दीदी पागल हो गईं, बोलीं, “विक्रम, चाट मेरी चूत, जैसे कुत्ता चाटता है। आह, कितना मजा आ रहा है।” उनका रस निकल रहा था, नमकीन और मीठा। मैंने पूरा मुंह चूत पर लगाया और चूसा। दीदी की गांड ऊपर उठ रही थी, वे चीख रही थीं, “चूत चाट, मेरी रसदार फुद्दी चाट।” दस मिनट बाद दीदी झड़ीं, उनका रस मेरे मुंह में आया। मैंने सब पी लिया।
ब्लोजॉब के लिए दीदी के मुंह में भाई का तना हुआ लंड
दीदी ने मुझे ऊपर खींचा और बोलीं, “अब मेरी बारी।” उन्होंने मेरा लंड मुंह में लिया। गरम मुंह, जीभ लंड पर घूम रही थी। दीदी ने पूरा लंड मुंह में लिया, गले तक। मैंने उनके सिर को पकड़ा और मुंह चुदाई शुरू की। दीदी की लार लंड पर लगी हुई थी, चिपचिपी। वे बोलीं, “चोद मेरे मुंह को, जैसे रंडी का मुंह चोदते हैं मर्द पैसे दे देकर।” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। दीदी की आंखें पानी से भरी थीं लेकिन वे रुकने नहीं दे रहीं थीं। आखिर मैं झड़ गया, गरम वीर्य उनके मुंह में छोड़ा। दीदी ने सब निगल लिया और बोलीं, “तेरा माल बहुत स्वादिष्ट है।”
उसके बाद हम नहाने गए। शावर के नीचे दीदी ने फिर लंड चूसा और मैंने उनके चूचों को रगड़ा। पानी में दीदी की गांड चिकनी थी, मैंने उंगली गांड के छेद में डाली। दीदी सिसकीं, “आह, गांड में उंगली, मजा आ रहा है।” लेकिन पूरा नहीं किया। रात को हम नंगे सोए। दीदी मेरे लंड को सहलाती रहीं और मैं उनकी चूत में उंगली डालता रहा। दीदी की चूत टाइट थी लेकिन रस से भरी। वे बोलीं, “कल तेरे लंड से चुदवाऊंगी।”
तीसरे दिन दीदी ने ऑफिस से छुट्टी ले ली। सुबह से हम बेड पर थे। मैंने दीदी को पूरी तरह नंगा किया और उनके शरीर को चाटा – कान, गर्दन, चूचे, पेट, जांघें और फिर चूत। दीदी तड़प रही थीं, बोलीं, “विक्रम, अब चोद मुझे, अपनी दीदी की चूत फाड़ दे।” मैंने लंड पर थूक लगाया और चूत पर रगड़ा। दीदी की चूत गरम और गीली थी। मैंने धीरे से सुपारा अंदर किया। दीदी चीखीं, “आह, दर्द हो रहा है, लेकिन रुक मत।” मैंने पूरा लंड एक झटके में डाला। दीदी की चूत टाइट थी, लंड को निचोड़ रही थी। खून जैसा कुछ निकला लेकिन दीदी बोलीं, “चोद अब, जोर से।”
मैंने चुदाई शुरू की। धीरे-धीरे फिर तेज। दीदी की सिसकारियां और चीखें – “चोद मुझे, भाई, अपनी रंडी दीदी को चोद। आह, मोटा लंड, मेरी बच्चेदानी तक पहुंच रहा है।” मैंने उनके चूचों को दबाया, निप्पल काटे और जोर-जोर से धक्के मारे। चुदाई की आवाज कमरे में गूंज रही थी – चप-चप, थप-थप। दीदी की गांड ऊपर उठ रही थी, वे मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। दस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था, दीदी बोलीं, “अंदर छोड़, मेरी चूत में अपना गरम वीर्य डाल।” मैंने पूरा माल छोड़ा, चिपचिपा स्पर्म दीदी की बच्चेदानी में। दीदी भी झड़ीं, उनका रस और मेरा वीर्य मिलकर बाहर बहने लगा।
चूतड़ों की मालिश करवाने के बाद दीदी बनी अपने भाई की निजी रंडी
चुदाई के बाद हम लेटे रहे। दीदी बोलीं, “विक्रम, अब मैं तेरी पर्सनल रंडी हूं। जब चाहे चोदना।” मैं खुश हो गया। उस दिन हमने तीन बार चुदाई की। दूसरी बार दीदी ऊपर आईं, मेरे लंड पर बैठीं और खुद उछलीं। उनके चूचे उछल रहे थे, मैंने पकड़कर दबाए। दीदी बोलीं, “देख, तेरी छिनाल बहन कैसे चुद रही है।” तीसरी बार मैंने मेरी छिनाल बहन को कुत्तिया बनाकर चोदा। दीदी चुदने के लिए कुतिया बनीं, मैंने पीछे से लंड डाला और गांड पर थप्पड़ मारे। दीदी चीखीं, “मार मेरी गांड, चोद अपनी बहन को कॉलगर्ल की तरह।” मैंने उनके बाल पकड़े और जोर-जोर से ठोका। आखिर में फिर अंदर माल छोड़ा।
अगले दिनों में हमने और नई चीजें की। एक दिन दीदी ने मेरी गांड चाटी, उंगली डाली और बोलीं, “कभी तेरी गांड भी मारूंगी।” लेकिन मैंने उनकी गांड मारी। पहले उंगली से खोला, फिर लंड डाला। दीदी दर्द से चीखीं लेकिन बोलीं, “चोद मेरी गांड, रंडी की गांड मार।” गांड की चुदाई में दीदी पागल हो गईं, उनका रस चूत से बह रहा था। हमने मुंह चुदाई, चूत चुदाई, गांड चुदाई सब किया। दीदी हर बार रंडी की तरह व्यवहार करतीं – लंड चूसतीं, वीर्य पीतीं, चीखतीं और गंदी-गंदी बातें करतीं।
हमारे बीच प्यार भी बढ़ गया। चुदाई के बाद हम गले लगकर सोते, एक-दूसरे से बातें करते। दीदी बोलीं, “विक्रम, ये गलत है लेकिन मजा इतना है कि रोक नहीं सकती।” मैंने कहा, “दीदी, तुम मेरी हो, हमेशा।” दस दिन कैसे बीते पता नहीं चला। मम्मी-पापा आने वाले थे, आखिरी रात हमने पूरी रात चुदाई की। सुबह दीदी की चूत और गांड दोनों ढीली हो गई थीं, लेकिन वे खुश थीं।
अंतिम रात की तूफानी चुदाई और वादे
आखिरी रात हमने कुछ नया ट्राई किया। दीदी ने दो उंगलियां अपनी चूत में डाली और खुद मुठ मारी, मैं दीदी के चूतड़ों को ललचाई नजरों से देखता रहा। फिर मैंने उनके मुंह में लंड डाला और चुदाई की। दीदी ने पूरा वीर्य पिया। फिर हमने 69 पोजिशन में एक-दूसरे को चाटा। दीदी की चूत का रस और मेरे लंड का रस मिल गया। आखिर में मैंने उन्हें बिस्तर पर पटका और जोर-जोर से चोदा।
दीदी चीख रही थीं, “चोद मुझ छिनाल को कॉलगर्ल की तरह, अपनी इस छिनाल दीदी को आज पूरी रंडी बना।” मैंने मेरी छिनाल दीदी के दोनों छेदों की खतरनाक चुदाई की और अंत में चूत में माल छोड़ा। हम थककर सो गए, शरीर पर पसीना और वीर्य की महक।
हमारे मम्मी-पापा जब घर वापस आए तो सब नॉर्मल हो गया। लेकिन अब भी जब मौका मिलता है, दीदी मेरी पर्सनल रंडी बन जाती हैं। हम चुपके से चुदाई करते हैं, एक-दूसरे की वासना बुझाते हैं। दीदी की चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई है और मैं उनकी रंडीपन का गुलाम।
दीदी के चूतड़ों की मालिश करने के बाद कुत्तिया बनाकर चोदा सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
Didi ke chutarron ki malish karne ke baad kuttiya banakar choda :- सगे भाई-बहन के अवैध सेक्स संबंध की यह कहानी खत्म होती है एक गहरे भावनात्मक और शारीरिक बंधन पर। विक्रम और शिवानी के बीच का रिश्ता अब सिर्फ भाई-बहन का नहीं रहा, बल्कि गुप्त प्रेमी और कामुक साथी का हो गया है। दोनों को अपराधबोध है लेकिन वासना इतनी प्रबल है कि वे रुक नहीं पाते।
मेरी दीदी में एक नई कामुक औरत जागी है जो अपनी इच्छाओं को खुलकर जीती है, जबकि विक्रम में आत्मविश्वास और प्यार बढ़ा है। वे भविष्य में सावधानी से अपने रिश्ते को बनाए रखने का वादा करते हैं। यह कहानी बताती है कि कभी-कभी वर्जित इच्छाएं भी गहरा सुख दे सकती हैं, बशर्ते दोनों की सहमति हो। अगर आपको भी ऐसी फंतासियां हैं तो सोचिए, जिंदगी छोटी है, लेकिन सावधानी जरूरी। क्या आपकी जिंदगी में भी कोई ऐसा राज है?


