HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesपत्नी के भोसड़े में गैर मर्द का लंड देख सन्न रह गया टीचर पति

पत्नी के भोसड़े में गैर मर्द का लंड देख सन्न रह गया टीचर पति

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मेरा नाम अमन कुमार है और मैं बिहार के हाजीपुर का रहने वाला हूं, उम्र 32 साल। मेरी पत्नी गुंजन कुमारी, जिसे मैंने हर खुशी दी, वो मुझे सरकारी टीचर बनने के बाद कथित रूप से छोड़कर जाने की बात सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। मगर 23 मई की उस शाम ने मेरी पूरी ज़िंदगी को ऐसे पलट दिया कि आज भी सिहरन दौड़ जाती है। उस दिन करीब साढ़े 4 बजे मुझे पड़ोसी ने फोन कर बताया कि एक अजनबी आदमी की कार हमारे घर के बाहर खड़ी है।

मैं घबराकर स्कूल से सीधा घर पहुंचा तो देखा प्रेम प्रकाश जायसवाल की सफेद कार गेट के सामने थी, जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था। मैंने तुरंत अपने मोबाइल से कार का वीडियो बनाया और सीने में धुकधुकी लिए गेट खोला। अंदर कमरे का दरवाज़ा अधखुला था और वहां से आ रही हल्की कराह और गीली आवाज़ों ने मेरे पैरों तले ज़मीन खिसका दी। मैंने दरवाज़े को ज़ोर से ठेला तो अंदर का मंज़र देख मेरी चीख ही निकल गई।

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Muft mein padhein — Dhokhebaaz patni ke bhosde mein gair mard ka lund dekh sann reh gaya teacher pati antarvasna Hindi sex XXX kahani.

मेरी धोखेबाज पत्नी गुंजन बिस्तर पर पूरी नंगी, अपनी टांगें फैलाए लेटी थी और उसके ऊपर वो गैर मर्द अपना पूरा लंड मेरी धोखेबाज पत्नी की चूत में घुसाए धक्के मार रहा था। उसकी कमर की तेज़ लय और गुंजन की बेकाबू चुदाई की आवाज़ें सुन मैं जड़ होकर खड़ा रह गया। गुंजन की आंखें बंद थीं और मुंह से बस “और ज़ोर से चोदो मुझे, प्रेम” जैसे गंदे बोल निकल रहे थे। मेरा पूरा शरीर कांपने लगा, मैंने बिना कुछ कहे गेट बंद किया और बाहर सड़क पर खड़ा हो गया। मेरी धोखेबाज पत्नी के भोसड़े में गैर मर्द का लंड देख सन्न रह गया।

मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिस गुंजन से मेरी शादी 5 साल पहले इतने प्यार से हुई थी, वो आज एक पराई मर्द का लंड अपने भोसड़े में लेकर चिल्ला चिल्लाकर चुदाई करवा रही थी। शादी के बाद के शुरुआती दिन याद आ गए जब हम दोनों एक-दूसरे के जिस्म को जानने में पागल थे। तब गुंजन का शरीर 21 साल का कच्चा आम था, उभरती हुई बोबे और तंग चूत, जिसे देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता था। पहली सुहागरात को उसकी साड़ी खोलते वक्त मेरे हाथ कांप रहे थे और उसकी सांसों की गर्माहट ने मुझे अंदर तक पिघला दिया था।

उस रात जब मैंने पहली बार उसकी बालों वाली चूत को नंगा किया तो उसकी शर्म से लाल चेहरा देख मेरा तना हुआ लंड उसकी रसदार चूत में घुसने को बेताब हो उठा था। गुंजन ने अपनी छोटी-छोटी उंगलियों से मेरे मोटे लौड़े को पहले सहलाया, फिर अपने मुंह से मुखमैथुन (Oral Sex) करके मुझे हैरान कर दिया। उसके कोमल होंठों ने जब मेरे सुपारे को चूसना शुरू किया तो मैं अपना वीर्य रोक नहीं पाया और उसकी जीभ पर ही झड़ गया। उसने मेरा चिपचिपा माल बड़े प्यार से निगल लिया था और मुझे अपनी बाहों में भरकर सो गई थी।

आने वाले महीनों में हमारी चुदाई की आवाज़ से पूरी कोठी गूंजती रहती थी और गुंजन की चूत का रस कभी सूखता नहीं था। मैं जब भी स्कूल से थका हुआ लौटता, वो अपनी चूचियों का दूध सा मांस मेरे मुंह में डालकर निप्पल चूसने के लिए मजबूर कर देती। मैं उसकी गांड में उंगली डालकर तंग छेद को चौड़ा करता और फिर अपना पूरा खड़ा लंड घुसाकर उसे चीखने पर मजबूर कर देता। वो चिल्लाती, “अमन, बहुत तेज़ है! मेरी बुर को चीर मत देना,” लेकिन फिर अपने ही कुल्हों को ज़ोर-ज़ोर से पीछे ढकेलती।

समय के साथ मुझे सरकारी टीचर की नौकरी मिली और हम हाजीपुर शिफ्ट हो गए, मगर गुंजन में बदलाव आने लगा था। वो अब मेरे छूने से ही दूर भागती और बिस्तर पर हमेशा बहाना बनाकर मुंह फेर लेती। मैं समझ गया था कि कोई गहरा सच है लेकिन उस दिन प्रेम प्रकाश जायसवाल की कार ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। मैं बाहर खड़ा-खड़ा सब कुछ दिमाग में दोहरा रहा था कि अचानक गेट खुला और प्रेम की कार निकली।

मैंने झटपट कार का दरवाजा खटखटाकर प्रेम से पूछा, “तू अंदर क्या कर रहा था मेरी पत्नी के साथ, हरामी?” और तभी वो अचानक आक्रामक हो गया और मेरी छाती पर दो घूंसे मारकर बोला, “तेरी पत्नी खुद मेरे पास आई थी अपने भोसड़े को चुदवाने के लिए, अब वो मेरी छिनाल है।” इतना सुनना था कि मैंने अपनी पूरी ताकत से उसकी गर्दन दबोच ली, मगर तभी पीछे से किसी ने मेरे सिर पर चप्पलों की बारिश कर दी। पलटकर देखा तो वही गुंजन, जिसे मैं पतिव्रता समझता था, बाल खोले, चेहरे पर चुदाई की रंगत लिए, मुझे ही पीट रही थी।

गुंजन की आंखों में कोई शर्म नहीं थी, वो बस चिल्ला रही थी, “हां, मैं प्रेम से प्यार करती हूं, तुझ जैसे बेकार इंसान के साथ नहीं रहना मुझे!” प्रेम ने मौके का फायदा उठाकर मुझे ज़मीन पर गिरा दिया और दोनों मुझे मिट्टी में लोटता छोड़कर कार में बैठकर भाग गए। मैं वहीं गिरा रहा, मुंह से खून बह रहा था, मगर दिल का दर्द उससे कहीं गहरा था। उस रात मैं देर तक सूने घर में रोता रहा, हर कोना उसकी बेवफाई की गवाही दे रहा था।

अगली सुबह गुंजन अकेली लौटी, आंखें सूजी हुईं और शरीर पर हल्की कंपकपी थी। वो मेरे पैरों पर गिरकर बोली, “अमन मुझे माफ कर दे, वो मुझे बहकाकर ले गया लेकिन अब मैं सब समझ गई हूं।” मेरे भीतर नफरत और जुनून का ऐसा मेल था कि मैंने उसे बालों से खींचकर खड़ा किया और दीवार से सटाकर बोला, “अब तू सिर्फ एक रंडी है मेरे लिए, और आज मैं तुझे वैसे ही चोदूंगा जैसे तू उससे चुदवाती थी।” गुंजन की आंखों से पश्चाताप के आंसू बह निकले लेकिन मेरे लंड ने सिर्फ बदले की आग पकड़ ली थी।

मैंने गुंजन की साड़ी एक ही झटके में फाड़ डाली और उसकी 36D की बोबे देखकर मेरा लौड़ा तन गया। उसने शर्म से हाथ छिपाना चाहा तो मैंने उसके हाथ उसकी पीठ के पीछे बांध दिए और ज़ोर से उसके स्तन दबाने लगा। गुंजन कराह उठी और मैंने उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “बता, उस हरामखोर ने तेरी चूत कैसे खाई थी?” गुंजन ने आंखें बंद कर लीं और सहमी आवाज़ में बोली, “पहले उसने मेरी चूचियों की मालिश करके निप्पल चूसे, फिर मेरी चूत चाटी और अपनी जीभ से मेरी फुद्दी का पूरा रस निकाला।”

ये सुनकर मेरे भीतर जलन की लहर दौड़ गई और मैंने उसकी दोनों टांगें उठाकर एक सोफे पर पटक दिया। मैंने उसकी चूत के पास जाकर देखा तो उसमें से अभी भी हल्की सी चिपचिपाहट बह रही थी, शायद कल की चुदाई का बचा हुआ वीर्य। मैंने घृणा से भरकर उसके भोसड़े पर थप्पड़ मारा और बोला, “इतना चौड़ा भोसड़ा हो गया है तेरा कि अब कोई भी लंड घुसा लेती है।” गुंजन ज़ोर से रो पड़ी लेकिन मैंने उसकी गांड पर लगातार थप्पड़ मारे और उसकी गांड के छेद में ज़बरदस्ती उंगली डाल दी।

गुंजन छटपटाकर बोली, “नहीं, वहाँ मत डालना, उधर बहुत तेज दर्द होता है और लेट्रिंग करने में भी तकलीफ होती है,” मगर मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी। मैंने अपनी 2 उंगलियां उसकी पिचकारी में घुसाकर अंदर-बाहर करना शुरू किया और महसूस किया कि कैसे उसकी टाइट गांड सिकुड़ रही थी। फिर मैंने अपना मुंह उस छिनाल की रसदार चूत पर लगा दिया और पूरी जीभ से उस छिनाल के भोसड़े को चाटने लगा, जिसमें कल के पराए माल की हल्की गंध अब भी बसी थी। मेरी जीभ उसके भगनासे पर फिरती तो गुंजन अनियंत्रित होकर चिल्लाती, “हाँ, वहीं चाटो, मुझे अच्छा लग रहा है।”

मैंने मेरी धोखेबाज पत्नी को घुटनों के बल लिटाकर उसकी गांड ऊपर उठाई और अपने तने हुए लंड को उसकी चिकनी चूत के मुहाने पर रगड़ने लगा। “बता, उस प्रेम का लंड मेरे मोटे लौड़े से ज्यादा बड़ा था क्या छिनाल?” मैंने ताना मारते हुए पूछा। गुंजन ने हिचकी लेते हुए कहा, “नहीं, तुम्हारा लंड ज्यादा लम्बा और मोटा है, प्लीज़ मुझे चोदो और मेरी सारी गलतियां माफ कर दो।” ये सुनकर मेरे अहंकार को तुष्टि मिली और मैंने एक ही ज़ोरदार धक्के में अपना 7 इंच का लंड पूरी तरह उसकी चूत में घुसा दिया।

गुंजन की चूत अभी भी गर्म और चिकनी थी, जिसने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया। मैंने जान-बूझकर कोई शुरुआती लाड़-प्यार नहीं किया और सीधे जानवरों की तरह झटके मारने शुरू कर दिए। मेरे अंडकोष उसकी चूतड़ों से टकराकर फड़फड़ाने लगे और पूरा कमरा गीली चुदाई की आवाज़ से गूंज उठा। गुंजन ज़ोर-ज़ोर से हिंदी में गालियां देने लगी, “चोदो मुझे, अमन, और तेज़, मैं तो तुम्हारी ही रंडी हूं, मेरी चूत फाड़ दो।” उसकी इस छिनालपन भरी बातों ने मुझे और उत्तेजित कर दिया।

मैंने तुरंत चुदाई की पोज़िशन बदली और अपनी धोखेबाज पत्नी गुंजन को अपनी गोद में उठाकर स्टैंडिंग पोज़िशन में चोदना शुरू कर दिया, जहां वो मेरी गर्दन से चिपककर उछल रही थी। मेरे हाथ उसकी गांड के नीचे थे और उंगलियां उसके गुदा छेद को खरोंच रही थीं। मैंने उसे एकदम दीवार से सटाकर अपना पूरा लंड उसके अंदर टिका दिया और उसकी गर्दन को चूसते हुए कहा, “अगर फिर से कभी किसी पराए मर्द की तरफ देखा तो तुझे जिंदा गाड़ दूंगा।” गुंजन इस डर और आवेश में बिलबिलाकर बस “हाँ” कह पाई।

फिर मैंने उसे कमरे में रखी मेज़ पर उल्टा लिटाकर उसके पैरों को बेतहाशा फैला दिया और उसकी चूत में अपना लंड घुसाकर एकदम से गुदा सेक्स के लिए तैयार हो गया। मैंने पहले अपनी 1 उंगली उसके गांड के छेद में डालकर उसे चौड़ा किया (Ass Fingering) और फिर लार से गीला करके अपना लंड लगाया। जैसे ही मैंने आगे बढ़ना चाहा, गुंजन चिल्लाई, “अभी नहीं, बहुत टाइट है,” लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और धीरे-धीरे अपना सुपारा उसकी गांड के छेद के अंदर खोंस दिया। एक बार जब मेरा लंड पूरी तरह अंदर चला गया, तो गुंजन की सिसकियां अचानक मस्ती की सुसकारियों में बदल गईं।

उसकी गांड का छेद मेरे मोटे लौड़े पर कसाव से फिसल रहा था और दोनों के जिस्मों के बीच पसीने की नमकीन गंध फैलने लगी। मैंने उसके बालों को लपेटकर खींचा और गंदी से गंदी गालियां देते हुए पूछा, “बता, किसका लंड अच्छा है, मेरा या तेरे उस रंडीबाज प्रेम का?” गुंजन ने आंखें नम करके जवाब दिया, “सिर्फ तुम्हारा, मालिक, मैं तो तुम्हारी खरीदी हुई वेश्या हूं, मुझे जैसे चाहे चोदो।” उसकी यह बात सुनकर मेरे अंडकोष (Testicular) फट पड़े और वीर्य की धार ने उसकी गांड को पूरी तरह भर दिया।

कुछ देर हम दोनों वहीं ढेर हो गए और मेरा चिपचिपा माल उसकी गांड से रिसकर उसकी चूतड़ों पर जम गया। मैंने उठकर गुसलखाने में जाकर पानी से साफ किया और लौटकर देखा तो गुंजन उसी अवस्था में पड़ी सुबक रही थी। मेरे मन में अब भी उसके प्रति एक अजीब सा कशिश और अपनापन जाग उठा, मगर जख्म बहुत गहरे थे। मैंने तय किया कि अब इस रिश्ते में कुछ नहीं बचा और अगली सुबह उसके कपड़े बांधकर उसे प्रेम के यहां भिजवा दिया।

आज यह सब याद कर लिखते हुए मेरी आंखें फिर नम हो गईं, लेकिन सच तो यही है कि किसी धोखेबाज औरत को कभी माफ नहीं करना चाहिए। मैंने अपनी सारी टूटन और गुस्सा उस आखिरी चुदाई में निकाल दिया और अब शांति महसूस करता हूं। अब मैं आप पाठकों से दिल से पूछना चाहता हूं कि क्या मेरे साथ जो हुआ उसमें मेरा कोई दोष था? कृपया ईमानदारी से अपनी राय और कमेंट में बताइएगा, मुझे आपके फीडबैक का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा।

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