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देवर ने चोदा बांझ भाभी को कंटीली झाड़ियों में पटककर

देवर ने चोदा बांझ भाभी को कंटीली झाड़ियों में पटककर अन्तर्वासना हिंदी आउटडोर सेक्स कहानी का सारांश :- यह एक अत्यधिक कामुक और भावनात्मक हिंदी एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर की कहानी है जिसमें बांझ भाभी रेखा अपने देवर अमित के साथ निषिद्ध प्रेम और तीव्र चुदाई की दुनिया में खो जाती है। शादी के कई वर्षों बाद भी संतान न होने से परिवार में कलह मची हुई है, और रेखा को मायके भेजने का फैसला हो जाता है। देवर अमित उसे कार से छोड़ने जाता है, और रास्ते में सुनसान जंगल की गोद में दोनों की दबी हुई कामवासनाएं बाहर आ जाती हैं। रेखा की आंतरिक उथल-पुथल, अमित की भूखी नजरें और उनके बीच का गहरा आकर्षण कहानी को रोमांचक बनाता है। प्रकृति के बीच होने वाली जंगली चुदाई में दोनों एक-दूसरे के शरीर को पूरी तरह लूटते हैं, जहां हर पल लस्ट और भावनाओं का तूफान उठता है।

इस एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर कहानी में विस्तृत संवेदी वर्णन, आंतरिक विचार, प्राकृतिक संवाद और अश्लील भाषा का भरपूर उपयोग किया गया है जो पाठक को भावनात्मक रूप से जोड़े रखता है। बांझपन की मजबूरी, निषिद्ध रिश्ते की उत्तेजना और चुदाई की तीव्रता से भरपूर यह स्टोरी उच्च द्वेल टाइम और गूगल डिस्कवर विजिबिलिटी के लिए पूरी तरह अनुकूलित है। रेखा की कामुकता और अमित की मर्दानगी के बीच का संघर्ष पाठकों को अंत तक बांधे रखता है, जहां हर दृश्य लंड-चूत की भूख और रसदार आनंद से सराबोर है। यह कहानी केवल सेक्स नहीं, बल्कि छिपी इच्छाओं की मुक्ति की गाथा है।


Extramarital Affairs Sex Story Devar ne choda baanjh bhabhi ko kanteeli jhaadiyon mein patak kar :- मेरा नाम रेखा गुप्ता है। मैं एक छोटे से गांव की संस्कारी बहू हूं और माता-पिता की इकलौती संतान भी, उम्र लगभग ३२ साल। मेरी शादी संजय से हुई थी, जो शहर में नौकरी करते हैं और घर कम आते हैं। शादी को दस साल हो गए, लेकिन मेरी गोद अभी तक सूनी है। डॉक्टरों ने कह दिया कि मैं बांझ हूं, कभी मां नहीं बन सकती। सास-ससुर रोज ताने मारते, परिवार में मेरी इज्जत दिन-ब-दिन गिरती जा रही थी।

एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर सेक्स स्टोरी – देवर ने चोदा बांझ भाभी को कंटीली झाड़ियों में पटककर

देवर ने चोदा बांझ भाभी को कंटीली झाड़ियों में पटककर Extramarital Affairs Sex Story Devar ne choda baanjh bhabhi ko kanteeli jhaadiyon mein patak kar
Extramarital Affairs Sex Story – Devar ne choda baanjh bhabhi ko kanteeli jhaadiyon mein patak kar

अब तो फैसला हो गया कि मुझे मायके भेज दिया जाए, ताकि संजय दूसरी शादी कर लें। मेरा देवर अमित, जो मुझसे आठ साल छोटा है, यानी २४ का जवान लड़का, मुझे अपनी कार से मायके छोड़ने जा रहा था। अमित हमेशा से मेरी तरफ कुछ अलग नजरों से देखता था। उसके देखने में एक ऐसी भूख थी जो मेरे बदन को गरम कर देती थी, लेकिन मैं बहू होने के नाते अनदेखा करती रही।

रास्ते में कार चलाते हुए अमित ने बातें शुरू कीं। वह बोला, “भाभी, आप चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।” मैं खिड़की से बाहर देखते हुए बोली, “क्या ठीक होगा अमित? मैं तो बांझ हूं, अब इस घर में मेरी कोई जगह नहीं।” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “भाभी, आप इतनी सुंदर हो, कोई भी आपको खुशी दे सकता है।” उसके शब्दों में कुछ ऐसा था जो मेरी चूत में एक हल्की सी सनसनी पैदा कर गया। मैंने उसे डांटा, लेकिन अंदर से मेरे बदन में एक पुरानी आग फिर से सुलगने लगी। संजय तो कभी मुझे ठीक से चोद भी नहीं पाते थे, उनका लंड जल्दी झड़ जाता था। अमित का जवान बदन, चौड़ी छाती और मजबूत बाजू देखकर मेरी चूत में खुजली सी होने लगी।

कार सुनसान जंगल के रास्ते से गुजर रही थी। चारों तरफ घने पेड़ और कंटीली झाड़ियां थीं। अचानक मुझे पेशाब लग आया। मैंने अमित से कहा, “रुको अमित, मुझे पेशाब करना है।” उसने कार रोकी और बोला, “भाभी, यहां कोई नहीं है, आराम से कर लो।” मैं कार से उतरी और पास की कंटीली झाड़ियों में चली गई। साड़ी ऊपर उठाकर मैं बैठ गई। मेरी चूत पर घने काले झांट थे, जो पेशाब की बूंदों से भीग गए। शू…शू… की आवाज गूंज रही थी। मैंने सोचा भी नहीं था कि अमित झाड़ियों के पास आकर छिपकर मुझे देख रहा होगा। उसकी सांसें तेज हो रही थीं, और वह अपना लंड बाहर निकालकर मुठ मारने लगा।

मैंने पेशाब खत्म किया और उठने लगी तो मेरी नजर अमित पर पड़ी। वह अपना मोटा लंड हाथ में पकड़कर जोर-जोर से मुठ मार रहा था। उसका लंड तना हुआ, लाल और गोटों से भरा हुआ था। मैं चौंक गई, लेकिन मेरी चूत में एक अजीब सी गर्मी फैल गई। मैंने उसे देखते रह गई। अमित ने आंखें खोलीं और मुझे देखकर घबरा गया। वह बोला, “सॉरी भाभी, आपकी पेशाब की आवाज सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया, मैं रोक नहीं पाया।” मैं शर्मा गई, लेकिन अंदर से मेरी रंडी वाली भूख जाग गई। मैंने कहा, “अमित, अगर मुठ मार ली है तो अब असली चूत में डालकर देखो, तेरी भाभी की बांझ चूत तुझे बुला रही है।”

जंगल की झाड़ियों में देवर की भूखी नजरें जागीं

अमित की आंखें चमक उठीं। वह बोला, “भाभी, सच कह रही हो? मैं तुम्हें पटककर चोदूंगा, जैसे रंडी को चोदते हैं।” मैंने साड़ी का पल्लू गिरा दिया और बोली, “हां हरामी, अपनी भाभी को वेश्या बना दे, मेरी चूत मार ले।” हम दोनों झाड़ियों में गहराई तक चले गए। अमित ने मुझे जोर से खींचा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, मैं उसके लंड को पकड़कर सहलाने लगी। उसका लंड इतना मोटा और गरम था कि मेरी चूत से रस टपकने लगा। मैंने उसका शर्ट उतारा, उसकी छाती पर किस करने लगी। वह मेरी साड़ी खोलने लगा, मेरे बड़े-बड़े बोबे बाहर आ गए। मेरे निप्पल तने हुए थे, वह उन्हें चूसने लगा जैसे बच्चा दूध पीता हो।

मैं सिसकारियां लेने लगी, “आह अमित, जोर से चूस मेरे चुचे, तेरी भाभी की चूचियां दबा।” उसने मेरे ब्लाउज फाड़ दिए और मेरे बोबों की मालिश करने लगा थूक लगाकर। मेरी चूत पूरी तरह भीग चुकी थी, झांटों से रस चिपचिपा हो रहा था। अमित ने मेरी पेटीकोट ऊपर उठाई और मेरी गांड पर हाथ फेरा। उसके उंगली मेरी गांड के छेद पर घूमने लगी। मैंने उसका पैंट उतारा, उसका तना हुआ लंड मेरे हाथ में था। मैं नीचे बैठ गई और उसका लंड मुंह में ले लिया। लंड चूसने का स्वाद मुझे पहली बार इतना मजा दे रहा था। मैं जोर-जोर से चूस रही थी, उसके गोटों को चाट रही थी। अमित चिल्ला रहा था, “चूस भाभी, अपनी रंडी भाभी की तरह मेरा लंड चूस।”

हम दोनों नंगे हो चुके थे। कंटीली झाड़ियां हमें खरोंच रही थीं, लेकिन कामवासना में हम मस्त थे। अमित ने मुझे जमीन पर पटक दिया। झाड़ियां कंटीली थीं, मेरी पीठ पर खरोंचें लग रही थीं, लेकिन दर्द में भी मजा आ रहा था। उसने मेरी टांगें फैलाईं और मेरी चूत पर मुंह रख दिया। उसकी जीभ मेरी भगनासा पर घूमने लगी, झांटों को चाटते हुए वह मेरी चूत चाट रहा था। मैं चीखने लगी, “चाट अमित, अपनी बहन की तरह चूत चाट, तेरी भाभी की रसदार चूत पी ले।” मेरी चूत से रस बह रहा था, वह सब पी गया। मैंने उसके सिर को दबाया, मेरी सिसकारियां जंगल में गूंज रही थीं।

अब मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैं बोली, “चोद मुझ छिनाल को अमित, अपना मोटा लंड मेरी बांझ चूत में घुसा मेरी बच्चेदानी तक।” वह उठा और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा। उसका सुपारा मेरी चूत के मुंह पर घूम रहा था, मैं कुल्हे उछाल रही थी। फिर उसने जोर का धक्का मारा और आधा लंड अंदर घुस गया। मेरी चूत टाइट थी, दर्द हुआ लेकिन मजा भी। मैं चीखी, “आह मादरचोद, धीरे से, तेरी भाभी की चूत फाड़ देगा तेरा मोटा लौड़ा।” वह रुका नहीं, पूरा लंड अंदर ठोंक दिया। अब वह जोर-जोर से चोदने लगा, चुदाई की आवाजें पच-पच-पच गूंज रही थीं।

कंटीली झाड़ियों में पटककर की गई जंगली चुदाई

मेरे बदन पर खरोंचें लग रही थीं, खून की बूंदें बह रही थीं, लेकिन मैं रुकने का नाम नहीं ले रही थी। मैं बोली, “चोद जोर से बहनचोद, अपनी भाभी को रंडी बना दे, मेरी बुर फाड़ दे।” अमित पागल हो चुका था, वह मेरे बोबे दबाते हुए, निप्पल चबाते हुए चोद रहा था। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था, हर धक्के में मेरी चूत से रस निकल रहा था। मैंने अपनी टांगें उसके कंधों पर रख दीं, अब लंड और गहराई तक जा रहा था। मैं चीख रही थी, “हां हरामी, ऐसे ही चोद, तेरी भाभी की चूत तुझे दे दी मैंने।” जंगल में पक्षी भी डरकर उड़ रहे थे, लेकिन हमारी चुदाई रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

अमित ने मुझे घुमाया और कुतिया बना दिया उसके बाद कुत्ते की तरह पीछे से चोदने लगा। मेरी गांड ऊपर थी, वह मेरे चूतड़ों को थप्पड़ मार रहा था। उसका लंड मेरी चूत में पीछे से घुस रहा था, गोटे मेरी फुद्दी पर टकरा रहे थे। मैं बोली, “गांड मारना है तो मार ले भोसड़ीके, तेरी भाभी की गांड का छेद भी तुझे देगी।” मेरे नंगे देवर ने अपनी उंगली मेरी गांड में डाली और चूत चोदते रहा। चुदने के दौरान मुझे दर्द और मजा दोनों मिल रहे थे। मेरे देवर का लंड काफी ज्यादा मोटा था जिस वजह से एक ही दिन में मेरी चूत ढीली पड़ चुकी थी, लेकिन रस से भरी हुई थी। वह बोला, “भाभी, तेरी चूत कितनी रसदार है, मैं तो रोज तुझे चोदना चाहता था।” मैंने कहा, “अब चोद ले सुवर की औलाद, जितना मन है उतना माल छोड़ मेरी चूत में।”

जंगल में मंगल करने के दौरान हमने कई पोजिशन बदले। मैं ऊपर चढ़ गई और उसका लंड अपनी चूत में लेकर उछलने लगी। मेरे बोबे हिल रहे थे, वह उन्हें पकड़कर दबा रहा था। मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “देख अमित, तेरी भाभी तेरे लंड पर रंडी की तरह नाच रही है।” उसका लंड मेरी चूत की गहराई तक पहुंच रहा था, मैं झड़ने वाली थी। मेरी चूत सिकुड़ने लगी, रस की बौछार हो गई। मैं चीखी, “झड़ गई रे मादरचोद, तेरे गधे के जैसे लंड ने मुझे झड़ा दिया।” लेकिन अमित रुका नहीं, वह मुझे फिर पटककर चोदने लगा। अब उसकी सांस तेज हो रही थी, वह बोला, “भाभी, माल छोड़ने वाला हूं, तेरी बांझ चूत में भर दूंगा।”

मैंने कहा, “छोड़ दे हरामी, अपनी भाभी की चूत को अपने गरम वीर्य से भर दे, शायद तेरे माल से मेरी कोख भर जाए।” वह जोर-जोर से धक्के मारने लगा, उसका लंड फूल गया। फिर एक जोर का धक्का और उसने मेरी चूत में अपना चिपचिपा माल छोड़ दिया। गरम वीर्य की धार मेरी चूत की दीवारों पर लग रही थी, मैं फिर से झड़ गई। हम दोनों पसीने और खून से सने हुए थे, झाड़ियों ने हमारे बदन को खरोंच दिया था, लेकिन संतुष्टि ऐसी थी जो मैंने कभी नहीं पाई। हम लेटे रहे, एक-दूसरे को चूमते हुए। अमित बोला, “भाभी, अब तुम मायके नहीं जाओगी, मैं तुम्हें रोज चोदूंगा।”

चुदाई के बाद बदन पर खरोंचें और दिल में नई आग

चुदाई के बाद हम देवर-भाभी दोनों थककर नंगे ही लेटे थे। मेरी चूत से वीर्य और रस मिलकर बह रहा था, गांड में भी उंगली की वजह से हल्का दर्द था। अमित मेरे बोबों को सहला रहा था, मेरे निप्पल चूस रहा था। मैंने उसके लंड को फिर से पकड़ा, वह फिर से तनने लगा। मैं बोली, “फिर से तैयार है मेरा रंडीबाज देवर?” वह हंसा और बोला, “भाभी, तेरी चूत ने तो मुझे दीवाना बना दिया।” हमने फिर से शुरू कर दिया। इस बार मैंने उसका लंड मुंह में लिया और जोर से चूसा। उसके गोटों को चाटा, लंड की नसों को जीभ से सहलाया। वह कराह रहा था, “चूसो भाभी अपने देवर की रंडी बनकर लंड चूसो।”

फिर मेरे देवर ने मुझे उठाया और पेड़ के तने से सटा दिया। मेरी एक टांग ऊपर उठाकर उसने लंड घुसाया। खड़े-खड़े चुदाई शुरू हो गई। मेरे कुल्हे हिल रहे थे, देवर का लंड जोरदार धक्के मार रहा था। कंटीली झाड़ियां फिर से हमें खरोंच रही थीं, लेकिन अब दर्द मजा बन चुका था। मैं चुदते हुए चीख रही थी, “चोद वेश्या की तरह, तेरी इस छिनाल भाभी को रांड बना दे।” वह चुदाई के दौरान मेरी गद्देदार गांड पर जोर जोर से थप्पड़ मार रहा था, मेरे चुचों को मसल रहा था। चुदाई की आवाजें फिर से जंगल में गूंजने लगीं। मेरी चूत फिर से रसदार हो गई, घने झांट के बालों वाली भोसड़ी की चमड़ी देवर के मोटे लंड से लिपट रही थी।

हम भाभी-देवर कई बार झड़े। तीसरी बार जब वह झड़ने वाला था, मैंने कहा, “मुंह में छोड़, मैं तेरा माल पीना चाहती हूं।” वह लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने जोर से चूसा और उसका गरम वीर्य मेरे गले में उतर गया। चिपचिपे वीर्य का नमकीन स्वाद मुझे पागल कर गया। मैंने सब पी लिया और उसे किस किया। अवैध सेक्स संबंध बनाकर हम भाभी देवर दोनों संतुष्ट थे, लेकिन अब डर भी लग रहा था। क्या होगा अगर किसी ने हम भाभी-देवर को जंगल में मंगल करते देख लिया? लेकिन यह चुदाई मेरी जिंदगी की सबसे यादगार थी। अमित ने कहा, “भाभी, अब तुम्हें कोई मायके नहीं भेजेगा, मैं तुम्हें अपना बना लूंगा।”

जंगल में मंगल करने के बाद हमने कपड़े पहने और कार में बैठ गए। मेरे बदन पर खरोंचें थीं, चूत में अभी भी वीर्य भरा था। रास्ते में हम चुप थे, लेकिन नजरें मिलते ही मुस्कुरा देते। घर पहुंचकर मैंने फैसला किया कि मैं नहीं जाऊंगी मायके। कुछ महीनों बाद मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूं। शायद अमित का माल ही कमाल कर गया। परिवार खुश था, लेकिन मुझे और अमित को पता था कि यह हमारी जंगली चुदाई का नतीजा है। अब भी जब मौका मिलता है, हम चुपके से चुदाई करते हैं।


चुदाई के बाद नई जिंदगी और छिपी कामुकता की आग

समय बीतता गया। मेरी कोख में मेरे नामर्द पति का नहीं बल्कि मेरे प्यारे देवर अमित का बच्चा पल रहा था। परिवार सोचता था कि चमत्कार हो गया, लेकिन मैं और मेरा देवर अमित जानते थे की आखिर सच क्या है। अब घर में मेरी इज्जत वापस आ गई थी। मेरे नामर्द पति संजय खुश थे, लेकिन उनकी मर्दानगी अभी भी कमजोर थी। रात में वह कोशिश करते, लेकिन जल्दी झड़ जाते। मैं अमित की राह देखती। जब सब सो जाते, अमित मेरे कमरे में आता और मुझे चोदता। कभी मेरे मुंह में लंड डालकर मुंह चुदाई करता, कभी गांड मारता। मेरी चूत अब और रसदार हो गई थी, गर्भ की वजह से बोबे और बड़े हो गए थे।

एक रात अमित ने मुझे छत पर ले जाकर चोदा। तारे देखते हुए मैं उसके लंड पर सवार होकर उछल रही थी। मैं बोली, “चोद अमित, अपनी भाभी को फिर से रंडी बना।” वह मेरे निप्पल चूसता, मेरी गांड में उंगली करता। हमारी चुदाई अब नियमित हो गई थी। मैं उसकी सेक्स की दीवानी बन चुकी थी। बांझपन की मजबूरी ने मुझे यह सुख दिया। अब मैं खुश थी, बच्चा होने वाला था, और अमित का लंड मेरी चूत की भूख मिटाता रहता था।

कभी-कभी हम भाभी-देवर आउटडोर सेक्स करने के लिए फिर से उसी जंगल में जाते। वही झाड़ियां, वही कंटीले पौधे। हम नंगे होकर खूब जमकर चुदाई करते, खरोंचें सहते, लेकिन आउटडोर चुदाई का पूरा आनंद लेते। मेरी चूत व गांड अब मेरे देवर के मोटे लंड की आदी हो चुकी थी। वह मुझे कुत्तिया कहकर चोदता, मैं रंडी बनकर लंड लेती। यह निषिद्ध संबंध हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया। मैंने कभी सोचा नहीं था कि बांझ होने की वजह से मुझे इतना सुख मिलेगा। अमित मेरा मर्द बन चुका था।

इस एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर के साथ हमारा जीवन आगे बढ़ता रहा। बच्चा हुआ, बेटा। परिवार बहुत खुश। लेकिन मेरी और अमित की भूख कभी कम नहीं हुई। हम अवैध सेक्स समंध बनाने के मौके ढूंढते और चुदाई करते अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए। कभी खेत में, कभी घर की छत पर, कभी कार में। मेरी चूत हमेशा उसके लंड के लिए तरसती। यह कहानी मेरी जिंदगी की सच्चाई है, जहां कामुकता ने मुझे नई जिंदगी दी।


एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर सेक्स स्टोरी “देवर ने चोदा बांझ भाभी को कंटीली झाड़ियों में पटककर” का निष्कर्ष

Extramarital Affairs Sex Story Devar ne choda baanjh bhabhi ko kanteeli jhaadiyon mein patak kar :- यह एक्स्ट्रा मटेरियल अफेर कहानी बताती है कि जीवन में कभी-कभी निषिद्ध रास्ते ही सच्ची खुशी देते हैं। रेखा ने बांझपन की मजबूरी में अपने देवर अमित के साथ जो अवैध सेक्स संबंध बनाया, उसने न केवल उसकी कोख भरी, बल्कि उसके दिल में प्रेम और कामुकता की नई आग जला दी।

भाभी और देवर दोनों ने भावनात्मक और शारीरिक रूप से एक-दूसरे को पूरा किया। यह स्टोरी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि इच्छाएं कितनी शक्तिशाली होती हैं। अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो अपनी राय जरूर दें, क्योंकि आपकी प्रतिक्रिया हमें और बेहतर कहानियां लिखने की प्रेरणा देती है। कामुकता जीवन का हिस्सा है, इसे स्वीकार करें और आनंद लें।

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