ससुराल में बहू से रंडी बनी सहेली के बॉयफ्रेंड से चुदवाने के बाद अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- प्रिया एक 25 साल की नवविवाहिता गृहिणी है जो दिल्ली के एक बड़े बंगले में अपने पति अंकुर, सास-ससुर और देवर रौनक के साथ रहती है। हनीमून के बाद से उसका पति बिज़नेस की व्यस्तता में इतना थक जाता है कि रात को दो-चार धक्के लगाकर सो जाता है, जिससे प्रिया की जवानी की भूख अधर में लटक जाती है। दिन भर घर में बूढ़े ससुर की ठरकी निगाहें, देवर का खुला फ्लर्ट और घर के नौकर मुकेश की लालची आँखें उसकी चूत में आग भर देती हैं। प्रिया खुद को संस्कारी बहू बनाए रखना चाहती है, पर जब उसकी सहेली नेहा और नेहा का बॉयफ्रेंड विक्रम एक शाम घर आते हैं, तो शराब, मस्ती और पुरानी सहेलियों की कामुक यादों के बीच सब कुछ बदल जाता है। एक रात में प्रिया की सारी सीमाएँ टूटती हैं, उसकी चूत फटती है, गला भरता है और आखिर में उसे पता चलता है कि सचमुच की चुदाई क्या होती है।
Sasuraal mein bahu se randi bani saheli ke boyfriend se chudwane ke baad Antarvasna Hindi 18+ Sex Story :- मैं प्रिया मिश्रा हूँ एक बदनाम खानदान की संस्कारी बहू। शादी को अभी चार महीने भी नहीं हुए थे कि मैं समझ गई थी कि मेरी चूत की प्यास कभी नहीं बुझेगी अगर मैं सिर्फ अपने पति अंकुर पर निर्भर रही। हनीमून में शिमला की ठंडी वादियों में उसने मुझे दिन-रात चोदा था, पर दिल्ली लौटते ही उसका लंड बस नाम का रह गया। रात को जब वह थका-हारा आता, तो मैं उसकी गोद में लिपटकर उसका लंड मुँह में लेकर चूसती, पर दो मिनट में ही वह झड़ जाता और मेरी चूत सूनी रह जाती।
मैं बाथरूम में जाकर उँगलियाँ डालकर मुठ मारती और रोती कि मेरे जैसे मादक जिस्म वाली औरत को यह दिन देखना पड़ेगा। मेरी गोल-गोल चूचियाँ, पतली कमर, भारी नितंब और चूत के काले घने बाल देखकर घर का हर मर्द अपना लंड सहलाता था, पर कोई हिम्मत नहीं करता था। मैं जानबूझकर पतली साड़ी और ब्लाउज़ पहनती, झुककर ससुर को चाय देती ताकि मेरी गहरी क्लीवेज दिखे, और देवर रौनक को सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त अपनी गांड हिलाकर तड़पाती। मुझे अपनी जवानी की ताकत का नशा था।
ससुर जी की उम्र 58 की थी, पर मेरे जिस्म को देखकर उनका लौड़ा पतलून फाड़कर बाहर आने को होता। वह हर वक्त मेरे आसपास मंडराते, मेरी कमर पर हाथ फेरते और कहते, “बहू, तुम तो परी लगती हो।” मैं मुस्कुराकर टाल देती, पर अंदर से मेरी चूत में हलचल मच जाती। रौनक, मेरा 28 साल का देवर, आर्मी से छुट्टी पर आया था। उसका बदन गठीला, लंड की उभार हमेशा दिखती। वह मुझे घूरते हुए कहता, “भाभी, भैया आपका ख्याल नहीं रख पाते ना? कोई बात नहीं, मैं हूँ ना।” मैं हँसकर कहती, “चुप बदमाश, सास जी सुन लेंगी।” पर रात को बिस्तर पर लेटे-लेटे मैं उसके मोटे लंड की कल्पना करके अपनी चूत में उँगलियाँ डालती और सिसकारियाँ लेती। मुझे पता था कि मैं गलत कर रही हूँ, पर मेरी चूत की आग बुझने का नाम नहीं ले रही थी।
ससुराल में संस्कारी बहू से छिनाल रंडी बनी सहेली के बॉयफ्रेंड से चुदवाने के बाद अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

एक शाम मेरी पुरानी सहेली नेहा अपने बॉयफ्रेंड विक्रम के साथ घर आई। नेहा और मैं कॉलेज में साथ-साथ लेस्बियन सेक्स करा करते थे, हम दोनों कभी-कभी एक-दूसरे की चूचियाँ दबाया करती थीं को कभी एक दुसरे की चूत को चाट चाटकर चमकाया करते थे। वह आज भी उतनी ही रसीली थी—बड़े-बड़े दूध, चौड़ी गांड और होंठ ऐसे कि चूसने को जी चाहे। विक्रम लम्बा-चौड़ा, हैंडसम और आँखों में शरारत भरी हुई थी। डिनर के बाद सास-ससुर सो गए, अंकुर भी ऑफिस का काम खत्म कर सोने चला गया। बस हम चार लोग ड्रॉइंग रूम में बचे। नेहा ने व्हिस्की की बोतल निकाली और कहा, “चल प्रिया, आज पुराने दिन याद करते हैं।” मैंने मना किया, पर उसने मेरे होंठ पर उँगली रखकर कहा, “साली ज्यादा नाटक मत कर संस्कारी बहू बनने का, याद कर शादी से पहले तू कितनी बड़ी छिनाल हुआ करती थी” उसकी बात सुनकर मैं शरमा गई, पर मेरी चुदने की भूखी चूत में लंड लेकर चुदवाने के लिए बहुत ही ज्यादा गुदगुदी होने लगी। हमने व्हिस्की के गिलास उठाए और बातें करते हुए व्हिस्की पिने लगीं।
व्हिस्की का नशा चढ़ा तो मेरी लेस्बियन सहेली नेहा मेरे बगल में सटकर बैठ गई। उसकी गर्म साँसें मेरे गालों को छू रही थीं। उसने धीरे से मेरे कान में कहा, “तेरी चूचियाँ तो और बड़ी हो गई हैं रे छिनाल।” मैंने हँसते हुए उसकी चूची दबा दी। विक्रम हम दोनों को देखकर मुस्कुरा रहा था। उसकी पैंट में उभार साफ दिख रहा था। नेहा ने अचानक मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिए। मैं चौंकी, पर उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैंने भी उसका साथ दिया। उसका मुँह व्हिस्की और उसके रस से भरा था। विक्रम ने लाइट्स कम कर दीं और हमारे पास आकर बैठ गया। नेहा ने मेरी साड़ी का पल्लू खींच दिया। मेरी चूचियाँ ब्लाउज़ में कैद उछलने लगीं। विक्रम ने पीछे से मेरी कमर में हाथ डाले और मेरी गांड सहलाने लगा। मैं सिहर उठी। मेरी चूत से रस बहने लगा।
व्हिस्की का नशा चढ़ा तो सहेली के साथ करा लेस्बियन सेक्स
मेरी लेस्बियन सहेली नेहा ने मेरे ब्लाउज़ के बटन खोल दिए और मेरी ब्रा ऊपर सरका दी। मेरी गुलाबी निप्पल्स खड़े हो गए। उसने एक चूची मुँह में लेकर चूसने लगी और दूसरी को हाथ से मसलने लगी। मैंने आँखें बंद कर लीं और सिसकारी लेने लगी। विक्रम ने मेरी साड़ी पूरा खोल दी और मेरी पेटीकोट ऊपर उठा दिया। मेरी लेस की पैंटी पूरी गीली थी। उसने पैंटी साइड की और खींची और मेरी चूत पर उँगली फेरने लगा। “क्या रसीली चूत है तेरी प्रिया, सालों से चुदाई की प्यासी है ना?” उसने कहा। मैंने शर्म से मुँह फेर लिया, पर मेरी गांड अपने आप ऊपर उठ गई। नेहा ने मेरे होंठ चूसते हुए कहा, “चल रंडी, आज तेरी सारी प्यास बुझा देंगे।” विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाला। मैंने देखा तो दंग रह गई—कम से कम 8 इंच लम्बा और इतना मोटा कि मेरी मुट्ठी भी पूरा नहीं घेर पाए।
मैंने डरते-डरते उस लंड को हाथ में लिया। वह गर्म और फनफनाता हुआ था। नेहा ने मेरे सिर को नीचे दबाया। मैंने अपना मुँह खोला और उस मोटे सुपाड़े को अंदर लिया। मेरे होंठ पूरी तरह फैल गए। विक्रम ने मेरे बाल पकड़कर अपना लंड मेरे गले तक घुसा दिया। मुझे दम घुटने लगा, आँखों से पानी निकलने लगा, पर मेरी चूत और गीली हो गई। नेहा मेरी चूचियाँ चूस रही थी और मेरी क्लिट पर उँगलियाँ चला रही थी। मैंने कभी ऐसा मजा नहीं लिया था। विक्रम ने मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया—धीरे-धीरे फिर तेज। मेरी लार उसके लंड पर लटक रही थी। नेहा ने मेरी पैंटी उतार दी और मेरी गांड के नीचे अपना मुँह रख दिया। उसकी जीभ मेरी चूत और गांड के छेद पर नाचने लगी। मैं चिल्लाई, “नेहा… आआआह… रुक मत… चूस मुझे… छिनाल… चूस मेरी चूत…”
विक्रम ने मुझे सोफे पर लिटाया और मेरी टाँगें चौड़ी कर दीं। उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं डर गई। “विक्रम… बहुत मोटा है… मेरी चूत फट जाएगी…” मैंने रोते हुए कहा। नेहा ने मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दी और बोली, “चुप रंडी, आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाएंगे।” विक्रम ने एक जोरदार झटका मारा। उसका आधा लंड मेरी चूत में समा गया। मुझे लगा मेरी चूत फट गई। मैं चीख पड़ी, “मां… उई मां… निकालो… बहनचोद… मेरी चूत फाड़ दी…” पर विक्रम नहीं रुका। उसने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ठूँस दिया। मेरी चूत के होंठ पूरी तरह खिंच गए। नेहा मेरी चूत चाट रही थी और विक्रम का लंड अंदर-बाहर कर रही थी। दर्द धीरे-धीरे मजा बनने लगा। मैंने अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी।
विक्रम ने स्पीड बढ़ा दी। ठप-ठप-ठप की आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। मेरी बड़ी भरी चूचियाँ हवा में आजाद उछल रही थीं, नेहा उन्हें चूस रही थी। मैंने पहली बार जोर से चिल्लाया, “चोदो… जोर से चोदो मुझे… बहनचोद… अपनी रंडी बना लो मुझे…” विक्रम ने मेरी टाँगें कंधों पर रखीं और इतनी जोर-जोर से धक्के मारे कि मेरा बिस्तर हिलने लगा। मेरी चूत से चूँ-चूँ की आवाजें आने लगीं। नेहा मेरे मुँह में अपनी चूचियाँ घुसाए थी। मैं पागल हो रही थी। अचानक मेरी चूत में झनझनाहट हुई और मैं झड़ गई। मेरी चूत से रस की फव्वारा निकला। विक्रम ने भी गति बढ़ाई और मेरी चूत में अपना गर्म वीर्य उड़ेल दिया। मैं थरथरा रही थी। नेहा मेरी चूत चाटकर सारा माल पी गई।
ससुराल की रंडी बन गई सुंदर संस्कारी बहू – ससुर देवर नौकर और सभी मर्द चोदते
उस रात के बाद मैं बदल गई। नेहा और विक्रम हर हफ्ते आने लगे। कभी विक्रम मुझे अकेले चोदता, कभी नेहा और मैं एक-दूसरे की चूत चाटतीं और विक्रम हमें बारी-बारी से चोदता। मेरी चूत ढीली पड़ने लगी थी, पर मुझे मजा इतना आता कि मैं रुक नहीं पाती। एक दिन रौनक ने मुझे और नेहा को बाथरूम में चुदाई करते देख लिया। वह दरवाजे के बाहर खड़ा अपना लंड सहला रहा था। मैंने उसे देख लिया और जानबूझकर जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी। अगले दिन सुबह-सुबह वह मेरे कमरे में आया। मैं नहाकर आई थी, सिर्फ तौलिया लपेटे थी। उसने दरवाजा बंद किया और कहा, “भाभी, मुझे भी तो मजा दो ना।” मैंने शरमाते हुए तौलिया गिरा दिया। मेरी नंगी चूचियाँ और गीली चूत देखकर उसका लंड पैंट फाड़ने लगा।
उसने मुझे दीवार से सटा दिया और मेरी चूचियाँ चूसने लगा। मैंने उसका लंड बाहर निकाला—विक्रम के लंड से भी ज्यादा मोटा और लम्बा लंड था मेरे देवर का। मैं देवर का तगड़ा लंड देखकर डर गई, पर उसने मेरे मुँह की चुदाई करने के लिए मेरे मुँह में अपना लंड ठूँस दिया। मैं घुटने टेककर किसी कॉल गर्ल की तरह से उसका लंड चूसने लगी। वह मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह को चोदने लगा और मेरे मुंह से गप… गप की आवाजें आने लगी। मेरी लार उसके लंड पर लटक रही थी। उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी टाँगें चौड़ी करके अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
मुझे फिर वही दर्द हुआ, पर इस बार मैं तैयार थी। मैंने अपनी गांड उछालकर उसका साथ दिया। वह मुझे रंडी, छिनाल, बहनचोद कहकर चोद रहा था। मेरी चूत चुदते चुदते फट चुकी थी और उसमें से लाल लाल खून तक निकल आया, पर मैं रुकने को तैयार नहीं थी और देवर के साथ चुदाई का पूरा आनंद ले रही थी। उसने मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ डाली। आखिर में उसने मेरे मुँह में अपना वीर्य उड़ेल दिया। मैं निगल गई।
अब घर में ससुर जी भी मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी कामवासना शांत करने के लिए बहुत ज्यादा बेचैन रहने लगे। एक दिन जब परिवार के सभी सदस्य बाहर गए हुए थे, उन्होंने मुझे किचन में पकड़ लिया अपनी कामवासना शांत करने के लिए। इस बुढ़ापे में भी उनका लौड़ा कम नहीं था। उन्होंने मुझे स्टूल पर बैठाकर अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया। मैंने मेरे ससुर जी का लंड पुरे जोश के साथ चूसा। फिर ससुर जी ने मुझे किचन स्लैब पर लिटाकर मेरी जवान चूत चोदी अपने बुजुर्ग लंड से। मेरे बुजुर्ग ससुर जी की उम्र काफी ज्यादा थी, पर चुदाई करने के दौरान जोश ऐसा कि मैं चुदते चुदते करीब तीन बार झड़ गई। उस दिन के बाद मैं ससुराल की रंडी बन गई— मेरे पति, देवर, ससुर, नौकर मुकेश, सब मुझे बारी-बारी से चोदते तो कभी-कभी ससुराल के सभी मर्द मिलकर मेरे साथ गैंगबैंग सेक्स करा करते।
ससुराल की बहू से रंडी बन जाने के बाद से मेरी चूत और गांड हमेशा वीर्य से भरी रहती थी। मेरे ससुराल में सभी मर्द मुझे बिना कॉन्डोम लगाये चोदा करते थे जिसके फलस्वरूप मैं गर्भवती हो गई, पर मुझे पता नहीं था की मेरे पेट में किसका बच्चा पल रहा था। अंकुर को लगा उसका है, पर मुझे सच पता था। मैंने गर्भपात नहीं करवाया। मैंने फैसला किया कि मैं अपनी जवानी का पूरा मजा लूंगी, चाहे समाज मुझे मेरे ससुराल की रंडी ही क्यों ना समझे। दोस्तों गर्भावस्था में भी मुझे बहुत बुरी तरह चोदा जाता था मेरे ससुराल में मगर मुझे भी इन सब में बड़ा आनंद आया करता था. मैं मेरे ससुराल में रंडी बनकर बहुत खुश हूँ मुझे हर दिन कई मर्दों के साथ सेक्स करके अपनी अन्तर्वासना शांत करने को जो मिलता है.
ससुराल में संस्कारी बहू से छिनाल रंडी बनी सहेली के बॉयफ्रेंड से चुदवाने के बाद अन्तर्वासना हिंदी 18+ XXX सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
Sasuraal mein bahu se randi bani saheli ke boyfriend se chudwane ke baad Antarvasna Hindi 18+ Sex Story :- आज जब मैं ससुराल में बहू से रंडी बनकर चुदवाने के बाद यह अन्तर्वासना हिंदी चुदाई कहानी लिख रही हूँ तो मेरे पेट में 6 महीने का बच्चा है। मेरी चूचियाँ पहले से और ज्यादा बड़ी हो गई हैं, दूध से भरी हुईं। मैं गर्भावस्था में भी हर रोज ससुराल वालों की रंडी बनकर बिना कॉन्डोम के ही चुदती हूँ—कभी रौनक, कभी ससुर जी, कभी मुकेश मुझे पटककर चोदता है। अंकुर को शक होने लगा है, पर वह चुप है क्योंकि उसे भी मेरी चूत का मजा मिलता है।
नेहा और विक्रम अब भी मेरे ससुराल आते हैं अपनी कामवासना शांत करने के लिए, और हम सब मिलकर ग्रुप सेक्स करते हैं। मैंने सीखा कि औरत का जिस्म उसका अपना है, उसे दबाना नहीं चाहिए। हाँ, समाज मुझे रंडी कहेगा, वेश्या कहेगा, पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरी चूत की आग बुझी है, मैं खुश हूँ। आपको यह कहानी कैसी लगी? क्या आपको इसमें और ज्यादा गंदी-गंदी गालियाँ चाहिए थीं? या और रफ सेक्स वाला सीन? या प्रिया को गर्भवती होने के बाद भी चुदाई के सीन? कमेंट में जरूर बताइएगा, आपकी राय से अगली कहानी और भी रसीली बनेगी। आपकी पसंदीदा रंडी – प्रिया।


