HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesकिरायेदार ने लंड भाभी की चूत में पेला ऊँगली गांड के छेद में

किरायेदार ने लंड भाभी की चूत में पेला ऊँगली गांड के छेद में

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आज भी जब उस रात के बारे में सोचता हूं, तो मेरी सांसें थम जाती हैं। 32 साल की रूपा भाभी… उनका चेहरा, उनकी महक, उनका जिस्म—सब कुछ ऐसे जैसे कल की बात हो। बारिश की वो तेज़ बौछारें, बिजली की कड़क, और बिस्तर पर पसरा उनका मोहक शरीर। मैं उस घर में एक किरायेदार था, एक आम लड़का, लेकिन उस रात मैंने जो चाहत और जुनून देखा, वो मेरी ज़िंदगी की सबसे कामुक औरत की दास्तान बन गया।

प्रयागराज के पुराने शहर की तंग गलियों में मेरा किराये का कमरा था। घर पुराना था, दीवारों पर नमी के धब्बे थे। ऊपर वाले हिस्से में भैया और रूपा भाभी रहते थे। भैया अक्सर बिज़नेस के सिलसिले में शेहर से बाहर ही रहते, तो घर की समस्त ज़िम्मेदारी भाभी पर ही थी। पहली बार जब मैंने उन्हें देखा, तो आंखें चुंधिया गईं। गोरा रंग, लहराते बाल, और साड़ी के पल्लू से झांकती साँवली-सी गर्दन। उनके चलने का अंदाज़, पायल की छम-छम, और मुस्कान—सब अजीब-सी बेचैनी भर देता था।

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दिन गुज़रते गए। हमारी आँखें मिलतीं, कभी चाय के बहाने बात होती। भाभी की उम्र मुझसे 4-5 साल बड़ी थी, लेकिन जवानी ऐसी कि हर कोई देखता रह जाए। एक दिन शाम को लौटा तो माचिस भीगने की वजह से गैस नहीं जल रही थी। इस दौरान भाभी मेरे कमरे में आ धमकी फिर भाभी ने हंसते हुए कहा, “आपको तो चाय बनानी भी नहीं आती। रुको, मैं बना देती हूं।” वो किचन में मसाला चाय बनाने लगीं।

भाप से उनका सुन्दर सा चेहरा गुलाबी हो उठा और पीछे से मैंने देखा कि उनकी चोली पर पसीने के धब्बे उभर आए थे। उस दिन मेरी गन्दी नज़रें अनजाने में उनके स्तनों (Breasts) और कमर के मोड़ पर बार-बार चली गईं। मन हुआ कि पीछे से उन्हें पकड़ कर ज़ोर से भींच लूं, लेकिन मैं चुपचाप खड़ा रहा, बस उनकी महक लेता रहा।

4 जुलाई की वो काली रात मुझे आज भी याद है। बाहर काफी तेज तूफ़ानी बारिश, हवाओं की सीटियाँ, और बिजलियों की कड़क। भैया बाहर थे। करीब 10 बजे होंगे, भाभी ने आवाज़ दी, “अरे, आप खिड़की तो बंद कर दो। मेरी तो साड़ी भीग गई।” मैंने जाकर देखा तो बारिश का पानी उनकी खिड़की से अंदर आ रहा था और हवा से उनका दरवाज़ा ज़ोर-ज़ोर से भिड़ रहा था। मैंने जल्दी से खिड़की का पल्ला पकड़ा, लेकिन तब तक हवा के एक और झोंके ने मुझे अन्दर धकेल दिया।

भाभी सामने खड़ी थीं, लेकिन किसी फिल्मी सीन की तरह उनकी साड़ी पूरी तरह गीली थी। उनके बदन पर साड़ी ऐसे चिपकी थी कि हर अंग, हर मोड़, उभर कर सामने आ रहा था। उनकी 36D के बोबों का उभार, और उनके स्तनों के बीच से बहता पानी का क़तरा। मैं बुरी तरह हिल गया था। मेरा लंड अपने आप तन गया, पैंट पर एक उभार बन गया। वो ठिठुर रही थीं, होंठ नीले पड़ गए थे, “मैं तो पूरी भीग गई, कपड़े बदलने दो।”

मैं पलटा, लेकिन भाभी की नज़र मेरी पैंट के उभार पर पड़ गई। वो कुछ पल शर्माईं, लेकिन फिर धीरे-धीरे पीछे मुड़ीं और बोलीं, “ज़रा ब्लाउज के हुक तो खोल दो, हाथ सुन्न हो गए हैं।” मेरे हाथ कांप रहे थे। मैंने उनके गीले बालों को साइड किया, और धीरे-धीरे हुक खोलने लगा। हर हुक के साथ उनकी पीठ का मांस बाहर निकलता जा रहा था। मेरी सांसें तेज़ हो चुकी थीं। अंदर ही अंदर मैं सोच रहा था कि ये सब सपना तो नहीं, क्योंकि ये कोई आम औरत नहीं, बल्कि मेरी रूपा भाभी हैं जो मुझसे 4-5 साल बड़ी हैं।

हुक खुलते ही ब्लाउज ढीला पड़ गया और उनका गोरा शरीर आधा नंगा हो गया। भाभी तेज़ी से पलटीं। अब हम आमने-सामने थे, महज़ 2 इंच की दूरी पर। उनके चुचे सिर्फ़ गीली साड़ी से ढके थे, और उनके तने हुए निप्पल साफ़ दिख रहे थे। पहले तो उन्होंने एक हाथ से अपने आप को छुपाने की कोशिश की, लेकिन फिर शायद मेरी आँखों में जलती आग देख ली। “तुम… तुम ऐसे क्यूँ देख रहे हो?” उनकी आवाज़ कांपी।

“पागल कर दिया है तुमने मुझे, रूपा,” मैंने हिम्मत करके पहली बार उनका नाम लिया। मैंने अपना चेहरा उनके चेहरे के करीब लाया और धीरे-धीरे उनके गीले बालों को सहलाने लगा। भाभी ने आँखें बंद कर लीं। उनके अंदर भी एक तूफ़ान उमड़ रहा था। एक ओर बड़ी उम्र और रिश्ते की मर्यादा थी, तो दूसरी ओर वो एक कामुक औरत थीं जिसका पति हफ्तों बाहर रहता था। मैंने अपना दूसरा हाथ उनकी गीली पीठ पर रखा।

भाभी ने एक ठंडी सांस भरी और मेरे सीने से लिपट गईं। उनका जिस्म बर्फ़ की तरह ठंडा था, लेकिन उनकी सांसें गर्म थीं। पहली बार उनकी चूचियाँ मेरे सीने को छू रही थीं, दोनों भीगे हुए थे, और पूरा कमरा देसी इत्र और बारिश की मिट्टी की सोंधी महक से भर गया था।

भाभी के बड़े भारी बोबों की मालिश और निप्पल चूसने की पहली सिहरन

मैंने धीरे-धीरे उनकी साड़ी का पल्लू उतार दिया। उनकी गोरी-गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। 36D के वो बोबे, दूधिया रंग के, जिन पर नीली नसें साफ़ दिख रही थीं, और उनके निप्पल गहरे गुलाबी और तने हुए थे। मैंने अपना मुँह खोला और एक निप्पल को गर्म सांस दी। भाभी ने सिहरन भरी आह भरी। “हाय, ये क्या कर रहे हो…” लेकिन उनके हाथों ने मेरा सिर पकड़ लिया और अपनी ओर खींच लिया।

मैंने एक साथ पूरा निप्पल मुँह में लेकर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया। मेरे मुँह में उनका स्तन गर्म और मुलायम लग रहा था। मैंने जीभ से निप्पल पर गोल-गोल घुमाया, फिर दाँतों से हल्का-सा काटा। इस हल्की पीड़ा से भाभी की चीख निकल गई और उनका पूरा शरीर झनझना गया।

मेरा एक हाथ उनके दूसरे बोबे पर था, जिसे मैं गूंथ रहा था। “आह, और ज़ोर से दबाओ, प्लीज़,” रूपा ने कराहते हुए कहा। मैंने उनकी बात मानी और पूरी ताक़त से उनकी चूचियों की मालिश करने लगा। उनका जिस्म आग की तरह तपने लगा था।

फिर मैं धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसका। पेट पर गीली साड़ी चिपकी थी, जो मैंने दाँतों से हटाई। उनकी साड़ी अब पूरी तरह से फर्श पर बिछ चुकी थी। मैंने उन्हें बिस्तर पर गिरा दिया और पेटीकोट ऊपर उठा दिया। उनके झांट के बाल हल्के और भूरे से थे, और उनके नीचे उनकी फुद्दी साफ़ झलक रही थी। अब तक वो चूत के रस से पूरी तरह गीली थी। रस की एक बूंद बहकर उनके गांड के छेद तक जा पहुंची थी। मैंने पहली बार अपनी उंगली से उस चिकने रस को छुआ और अपने मुंह पर लगाकर चाट लिया।

“देखो न, कितनी गर्मी है मेरी चूत में। उंगली डालो न अंदर,” रूपा की पूरी भाषा बदल चुकी थी, उनकी नज़रों में सिर्फ़ हवस थी। मैंने अपना चेहरा उनकी टांगों के बीच छुपा दिया और चूत चाटना शुरू कर दिया। पहले जीभ से पूरी बुर को चौड़ा चाटा, फिर सीधे उनकी भगनासा पर नोक से वार किया।

भाभी के शरीर में बिजली दौड़ गई। “हाय राम, ये तुम कहाँ से सीखे? मर ही जाऊंगी आज।” मैंने 2 उंगलियाँ उनकी रसदार चूत में डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा, जबकि मेरा अंगूठा उनके गांड के छेद पर गोलाई में नाच रहा था। रूपा का सारा शरीर मेरे हाथों में था, और वो बस सिसकियाँ भर रही थीं।

तना हुआ लंड और पहली बार भाभी की गहरी चुदाई

भाभी की हालत देखकर मेरा लौड़ा अब असहनीय रूप से तन चुका था। पैंट खोलते ही मेरा मोटा लंड बाहर उछल पड़ा। रूपा ने पहली बार मेरे 7 इंच के खड़े लंड को देखा, जिसकी मोटाई और उस पर उभरी नसें साफ़ दिख रही थीं। उनकी आँखें फट गईं।

वो अपने घुटनों के बल आगे आईं और मेरे लंड के गोटे सहलाने लगीं। “इतना मोटा… ये मेरी चूत में जाएगा भी या नहीं?” उन्होंने मेरे सुपारे को मुँह में लेने की कोशिश की, और फिर मेरे लिंग पर ब्लोजॉब शुरू कर दिया। उनके गर्म और गीले मुँह की वजह से मेरी आँखें पलट गईं। वो पूरे शौक से मेरा मुखमैथुन कर रही थीं, जैसे कोई भूखी हो।

मैंने उन्हें पीछे से खींचा, और कुत्ते की तरह बिस्तर पर कर दिया (Doggy Sex Position) । उनके चूतड़ मुलायम और सफ़ेद थे। मैंने अपने लंड पर उनकी चूत का रस लगाकर चिकना किया, और पहली बार उनकी चूत के होठों पर मेरे देसी लंड का सिरा लगाया। “आराम से करना, दर्द होगा,” वो सहमी हुई बोलीं।

मैंने धीरे-धीरे अपना तना हुआ लंड अंदर खिसकाना शुरू किया। जैसे ही मैंने मेरा लंड भाभी की चूत में पेला तो उनकी चूत की गर्मी और नमी ने मुझे पागल कर दिया। एक तेज़ झटके से मैंने पूरा लंड उनकी टाइट चूत में घुसेड़ दिया। रूपा ज़ोर से चिल्लाईं, लेकिन उस चीख में दर्द नहीं, बल्कि सालों की भूखी चुदाई की तड़प थी।

मैंने कमर पकड़ कर पीछे से ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरे लंड के निचे झूल रहे अंडकोष उनकी जांघों पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे। पूरे कमरे में चिपचिपे माल और चुदाई की आवाज़ें गूंज रही थीं। उनका पूरा शरीर आगे-पीछे झूल रहा था और भाभी गंदी-गंदी गालियाँ दे रही थीं, “हाँ, और ज़ोर से। मेरी फुद्दी मरोड़ दो।”

कुछ देर बाद मैंने अपनी रफ़्तार धीमी की और भाभी को पलट कर चित्त लिटा दिया। मैंने उनकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर डाल लीं और फिर से अपना बड़ा लंड अंदर घुसा दिया। इस पोज़ में मैं उनकी आँखों में सीधा देख रहा था। वो मुझे देखकर मुस्कुराईं और बोलीं, “मैं बिल्कुल रांड हूँ, लेकिन सिर्फ़ तेरे लिए।” मैंने झुककर उनके होंठों पर ज़बरदस्त चुम्बन लिया और अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी।

अचानक मुझे अपने गुदा सेक्स (Anal Sex) की कल्पना ने घेर लिया। मैंने धीरे-धीरे अपनी एक उंगली पर थूक लगाया और बिना बताए नंगी भाभी की गांड के छेद पर रख दी। रूपा की आँखें फैल गईं। “नहीं, वहाँ नहीं… पहली बार है।” लेकिन मैंने धीरे-धीरे उंगली भाभी की गांड के अंदर डाल दी। उनकी चूत और गांड दोनों में मेरी चीज़ें थीं। वो पागलों की तरह कराहने लगीं और कुछ ही सेकंड में बोलीं, “आह, बहुत मज़ा आ रहा है। और अंदर डालो।” ये सुनकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया।

वीर्य का धमाका और हम भाभी-देवर की अवैध चुदाई का अंत

अब मैं रुकने वाला नहीं था। 45 मिनट की जंगली चुदाई के बाद, मुझे लगा कि मेरे देसी लंड से शुक्राणु बाहर आने को है। रूपा भाभी भी अपनी चरम सीमा पर थीं। उनका सारा शरीर तन गया, और उन्होंने मेरी पीठ पर ज़ोर से नाखून गड़ा दिए। “मेरे अंदर ही डाल देना, अपना सारा चिपचिपा माल मेरी चूत में भर दो।” उनकी ये बात सुनकर मैं अपनी पूरी ताक़त से 3-4 तेज़ झटके मारे और उनकी टाइट चूत में अपना गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। मेरा पूरा शरीर झनझना गया, और मैं उनके ऊपर औंधा गिर पड़ा।

हम दोनों बहुत देर तक बिना हिले-डुले ऐसे ही पड़े रहे। बाहर बारिश अब भी हो रही थी। मैंने भाभी के बाल सहलाए और उनके गाल पर एक प्यारा सा चुम्मा लिया। उन्होंने आँखें बंद करके मुस्कुराते हुए कहा, “जानते हो, एक औरत को सिर्फ़ चोदने की नहीं, बल्कि उसके अंदर की गर्मी को समझने की भी ज़रूरत होती है।” मैंने बस उन्हें कसकर पकड़ लिया।

अब मैं आप सभी पाठकों से यही पूछना चाहता हूँ—क्या आपको रूपा भाभी की ये अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी अच्छी लगी? क्या आप भी अपनी ज़िंदगी की ऐसी ही कोई देसी चुदाई कहानी सुनाना चाहेंगे? मुझे नीचे कमेंट करके ज़रूर बताइए कि इस हिंदी कहानी का कौन सा हिस्सा आपको सबसे रोमांचक लगा।

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