HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesससुर जी को अपनी ही बेटी की ताबड़तोड़ चुदाई करते देखा

ससुर जी को अपनी ही बेटी की ताबड़तोड़ चुदाई करते देखा

यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी बहु ने ससुर जी को अपनी ही कुंवारी बेटी की ताबड़तोड़ चुदाई करते देखा एक ऐसी औरत की है, जो अपने पति के तबादले के बाद दिल्ली में अपने ससुराल में रहने आती है। पति के दूर होने से वह अकेलापन और शारीरिक इच्छाओं से जूझती है। एक दिन, गेस्ट रूम की सफाई के दौरान उसे कंडोम और आई-पिल का पैकेट मिलता है, जिससे उसका शक गहराता है। रात में, वह गुप्त रूप से गेस्ट रूम की जाँच करती है और वहाँ अपने ससुर और ननद के बीच अनैतिक सेक्स संबंध देखकर स्तब्ध रह जाती है। इस चुदाई के दृश्य को देखकर उसकी अपनी यौन इच्छाएँ जाग उठती हैं, और वह अपने ससुर के साथ सेक्स संबंध बनाने पर विचार करती है। यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी एक सवाल के साथ खत्म होती है कि जब एक बेटी अपने पिता से चुदवा सकती है तो एक बहु अपने ससुर से क्यों नहीं चुदवा सकती…

मेरा नाम शालिनी है और मैं एक शादी शुदा महिला हूँ। मेरे पति, अजय, एक सरकारी अधिकारी हैं, और उनका तबादला उत्तर प्रदेश के एक शहर में हो गया। हमारा घर दिल्ली में है, इसलिए वह महीने में एक-दो बार ही घर आ पाते हैं। मेरे ससुर, रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर, अब घर पर ही रहते हैं। मेरी ननद, रजनी, कॉलेज के पहले साल में है, और मेरा देवर, दीपांकर, नौकरी करता है। शादी के बाद मैं एक साल तक अजय के साथ रही, लेकिन ससुर और ननद की देखभाल के लिए मुझे ससुराल में रहने को कहा गया।

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अजय ने कहा कि जब तक रजनी की शादी नहीं हो जाती, मुझे यहीं रहना होगा। मैंने उनकी बात मान ली और ससुराल में रहने लगी। शुरूआत में सब कुछ अच्छा था। रजनी मेरी सहेली की तरह थी, और दीपांकर छोटे भाई सा लगता था। घर का माहौल हमेशा खुशहाल रहता था। कोई कमी नहीं थी। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, पति की कमी मुझे सताने लगी। उनकी याद में मेरी रातें बेचैन होने लगीं, और मेरी शारीरिक इच्छाएँ मुझे तड़पाने लगीं।

पति के साथ बिताए एक साल में हम बिना किसी झिझक के, कहीं भी, कभी भी अंतरंग पल साझा करते थे। लेकिन अब, उनकी अनुपस्थिति में, मैं अकेलेपन से जूझ रही थी। जब इच्छाएँ हद से ज्यादा बढ़ जातीं, तो मैं अपने कमरे की लाइट बंद कर, तकिए को अपनी जांघों के बीच रखकर अपनी तड़प को शांत करने की कोशिश करती। यह अस्थायी राहत थी, लेकिन मेरे मन की आग को पूरी तरह बुझा नहीं पाती थी।

चौंकाने वाली खोज – सफाई के दौरान कंडोम और आई-पिल की गोली का पैकेट मिला

एक सुबह, दीपांकर ऑफिस चला गया, और रजनी कॉलेज के लिए निकल गई। मैं घर में अकेली थी और बोर हो रही थी। सोचा, क्यों न गेस्ट रूम की सफाई कर लूँ, जो काफी दिनों से बंद पड़ा था। सफाई करते वक्त मुझे वहाँ एक कंडोम का पैकेट और एक आई-पिल की गोली का पैकेट मिला। मैं हैरान रह गई। जब से मैं ससुराल आई थी, कोई मेहमान तो आया नहीं था। फिर ये चीजें यहाँ कैसे? मेरा शक दीपांकर पर गया। शायद वह रात में किसी को बुलाकर यहाँ अंतरंग पल बिताता हो।

सफाई खत्म कर मैं अपने कमरे में नहाने चली गई। लेकिन कंडोम और गोली की बात ने मुझे बेचैन कर दिया था। मेरी इच्छाएँ भड़क उठीं। मैंने लाइट बंद की, अपनी साड़ी ऊपर उठाई, और अपनी गीली चूत में उंगली करने लगी। मजे में डूबकर मैं सो गई, लेकिन मन में ठान लिया कि मुझे पता लगाना होगा कि गेस्ट रूम में ये रंगरलियाँ कौन मना रहा है। मैंने रात में जाँच करने का फैसला किया।

शाम को रसोई में खाना बनाते वक्त दीपांकर का फोन आया। उसने बताया कि वह कंपनी के काम से बाहर जा रहा है और रात को घर नहीं आएगा। यह सुनकर मैं थोड़ा निश्चिंत हुई। लेकिन फिर मेरे मन में ख्याल आया कि शायद ससुर जी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। उनकी पत्नी को गुजरे कई साल हो चुके थे। मैंने पक्का कर लिया कि आज रात मुझे सच्चाई का पता लगाना है।

रात में सगे बाप और बेटी के अनैतिक रिश्ते का खुलासा

रात को खाना खाने के बाद मैं और रजनी टीवी देखने बैठे। आमतौर पर हम देर रात तक गप्पें मारते थे, लेकिन आज रजनी को जल्दी नींद आने लगी। दस बजे के आसपास वह बोली, “भाभी, मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूँ।” यह कहकर वह अपने कमरे में चली गई। मुझे सच्चाई जाननी थी, इसलिए मैं टीवी देखते हुए जागती रही। लेकिन पता नहीं कब मेरी आँख लग गई, और मैं सोफे पर ही सो गई।

रात के करीब एक बजे मेरी नींद अचानक खुली। मैंने लिविंग रूम की खिड़की से गेस्ट रूम की ओर देखा, लेकिन कोई हलचल नहीं थी। फिर भी, मेरा मन नहीं माना। मैं चुपके से गेस्ट रूम की ओर गई और दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी। कोई आवाज नहीं थी, लेकिन कमरे का एसी चल रहा था। मुझे यकीन हो गया कि कोई अंदर है। मैंने खिड़की के शीशे से झाँका, और जो देखा, उससे मेरे होश उड़ गए।

कमरे में मेरे ससुर जी और उनकी बेटी, रजनी, थे और बह दोनों पूरी तरह नंगे थे। ससुर जी रजनी की चूत को बड़े मजे से चाट रहे थे, और रजनी आँखें बंद कर मजे में सिसकारियाँ ले रही थी। वह बोल रही थी, “आह, पापा, खा जाओ मेरी चूत को… आह, ये बहुत तड़पती है।” दोनों इस कदर मस्त थे कि उन्हें नहीं पता था कि कोई उन्हें देख रहा है। मैंने अपनी आँखें मली, सोचा शायद सपना हो, लेकिन यह हकीकत थी।

मेरे ठरकी ससुर जी ने अपनी सगी बेटी रजनी की चूत में अपनी जीभ गहरे तक डाल रखी थी। रजनी सिसकारियाँ लेते हुए चिल्लाई, “आह, पापा, मैं गई!” उसने अपने पिता का मुँह अपनी गीली चूत पर जोर से दबा दिया। उसका पानी निकल चुका था, लेकिन ससुर जी रुके नहीं। मेरी ननद रजनी ने कहा, “पापा, अब और कुछ करो, मैं बहुत तड़प रही हूँ।” ससुर जी ने अपना कच्छा उतारा, और उनका 8 इंच से भी बड़ा, मोटा लंड देखकर मेरी आँखें फट गईं।

बड़ा लंड देख ताबड़तोड़ चुदाई की तड़प का तूफान

मैं सोचने लगी कि ससुर जी का इतना बड़ा और मोटा लंड मेरी ननद रजनी अपनी टाइट चूत के अंदर कैसे ले लेती होगी? मेरे ठरकी ससुर जी ने अपनी सगी बेटी रजनी की दोनों टाँगें चौड़ी करी और अपने लंड को उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगे। मेरी नंगी ननद रजनी फिर से सिसकारियाँ लेने लगी। अचानक, ससुर जी ने एक जोरदार धक्का मारा, और उनका आधा लंड मेरी ननद रजनी की चूत में घुस गया। रजनी की चीख निकली, लेकिन वह सामान्य लग रही थी। मुझे समझ आ गया कि यह उनका पहला मौका नहीं था। शायद यह सब लंबे समय से चल रहा था।

मेरे ठरकी ससुर जी ने अपनी सगी बेटी रजनी के मम्मों को मुँह में लिया और चूसते हुए चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी। फिर एक जोरदार धक्के के साथ ससुर जी का पूरा लंड मेरी ननद की चूत में समा गया। रजनी मजे में सिसकारियाँ ले रही थी और बोली, “आह, पापा, आराम से!” ससुर जी बोले, “उफ्फ, ले बेटी, अपने पिता का पूरा लंड ले। तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा आज मैं।” दोनों बाप और बेटी चुदाई के मजे में डूबे थे, और उन सगे बाप और बेटी की ताबड़तोड़ चुदाई देखकर मेरी चूत भी गीली हो गई और लंड लेने के लिए मचलने लगी। मैंने अपनी नाइटी ऊपर की और खुद की अन्तर्वासना शांत करने के लिए अपनी चूत में उंगली करने लगी।

चरमोत्कर्ष और रहस्य

लगभग 30 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद ससुर जी का पानी निकलने वाला था। मेरी ननद रजनी ने कहा, “पापा, मेरी चूत में पानी मत निकालना, वरना मुझे आई-पिल लेनी पड़ेगी।” लेकिन ससुर जी ने उसकी बात अनसुनी कर दी और सारा पानी रजनी की चूत में ही निकाल दिया। वह बोले, “बेटी, तुझे पता है, मुझे बाहर निकालना पसंद नहीं।” इसके बाद दोनों थककर वहीं लेट गए। मेरी चूत का पानी भी निकल चुका था। मैंने चुपके से यह सब अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया।

अपने कमरे में लौटकर मैं सोने की कोशिश करने लगी, लेकिन नींद नहीं आई। मेरे दिमाग में बार-बार ससुर जी का मोटा, लंबा लंड घूम रहा था। मैं सोचने लगी, अगर रजनी अपने पिता से चुदवा सकती है, तो मैं अपने ससुर से क्यों नहीं? यह सवाल मेरे मन में बार-बार उठ रहा था। क्या मुझे भी अपनी इच्छाओं को पूरा करने का मौका लेना चाहिए? यह विचार मेरे मन को बेचैन कर रहा था।

निष्कर्ष – बहु ने ससुर जी को अपनी ही कुंवारी बेटी की ताबड़तोड़ चुदाई करते देखा

यह कहानी एक ऐसी औरत की तड़प और जिज्ञासा को दर्शाती है, जो अपने पति की अनुपस्थिति में अपनी शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों से जूझ रही है। ससुराल में एक अनैतिक रिश्ते का खुलासा उसे हैरान करता है, लेकिन साथ ही उसकी अपनी इच्छाएँ भी जागृत करता है। यह कहानी समाज के छिपे हुए सच और मानवीय इच्छाओं की जटिलता को उजागर करती है। क्या शालिनी अपनी तड़प को दबाएगी या उसका रास्ता चुनेगी? यह सवाल पाठकों के लिए खुला छोड़ देती ह

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