HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesअश्लील ससुर ने बहू की चूत व गांड को अपना हलाल माल समझा

अश्लील ससुर ने बहू की चूत व गांड को अपना हलाल माल समझा

फ्री में पढ़ें अश्लील ससुर ने बहू की चूत व गांड को अपना हलाल माल समझा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी – Free mein padhein ashleel sasur ne bahu ki choot va gaand ko apna halal maal samjha Antarvasna Hindi sex kahaniRead for free Lewd father-in-law treated his daughter-in-law’s pussy and ass as his rightful property Antarvasna Hindi sex story

मैं कभी नहीं जानती थी कि मेरा नेक और शरीफ़ दिखने वाला ससुर, जिसे मैं अपने बाप समान समझती थी, मेरे हर अंग को ऐसे घूरेगा जैसे कोई चीता हिरनी को ताकता है। मेरी उम्र 32 साल है और मेरे पति फारुख़ की पोस्टिंग दुबई में है, जहाँ से वो हर 6 महीने में 1 बार घर आता है। मैं और मेरे ससुर इब्राहिम साहब, जिनकी उम्र 55 साल है, अकेले इस बड़े से हैदराबादी घर में रहते थे। मेरी सास का इंतक़ाल 3 साल पहले हो चुका था और तब से सारी ज़िम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई थी। वो जुलाई की एक चिपचिपी दोपहर थी जब मैंने पहली बार महसूस किया कि अब्बा जान का मेरे प्रति व्यवहार बदल रहा है।

बाथरूम से नहाकर जब मैं बाहर निकली तो मेरे गीले बालों से पानी की बूंदें मेरे 36D के बोबों पर गिर रही थीं। मैंने सिर्फ़ एक पतला सूती कुर्ता पहना था, जो मेरी गीली बॉडी से चिपक गया था। अब्बा जान सामने वाले कमरे से कुछ ढूंढ रहे थे और अचानक उनकी नज़र मुझ पर पड़ी। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने धीरे से अपनी ज़बान से अपने निचले होंठ को गीला किया और मुस्कुराए। मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा और मैं झट से अपने कमरे की तरफ़ भागी। पूरी रात मैं सो नहीं पाई, बस उनकी वो नज़रें याद आती रहीं।

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रात के 2 बजे मुझे नींद से जगाकर एक आवाज़ सुनाई दी। अब्बा जान का कमरा मेरे कमरे के बगल में था और दीवार इतनी पतली थी कि सब कुछ साफ सुनाई पड़ता था। मैंने सुना, “आह… मेरी जान… तेरे बोबे… उफ़… तेरी गांड का छेद… कितना टाइट होगा…” मेरा सारा बदन सुन्न हो गया। मैं दीवार के पास गई और कान लगाकर सुनने लगी। वो अपने हाथ से अपने लंड को हिला रहे थे और मेरे बारे में गंदी-गंदी गालियाँ निकाल रहे थे। “उस रंडी की चूत का रस पीना है मुझे… हाँ… मेरे बेटे फारुख़ की सेक्सी बीवी… अपने ससुर के इस देहाती लंड की गुलाम बन जा…” मेरे शरीर में एक अजीब सी कंपकंपी दौड़ गई। मेरी अपनी चूत से रस टपकने लगा और मैं हैरान थी कि एक औरत को ऐसी गंदी बातों से भी मज़ा आ सकता है।

अगले 15 दिनों तक ये सिलसिला चलता रहा। दिन में अश्लील अब्बा जान शरीफ़ बने रहते और रात को अपने मोटे लौड़े को हिलाते हुए मेरे लिए गंदी-गंदी गालियाँ निकालते। मैं भी हर रात उनकी आवाज़ सुनकर चुपके से अपनी चूत पर हाथ फेरती थी। मैं शर्मिंदा थी, लेकिन मेरा बदन अब उनके लिए तरसने लगा था।

मेरी झांट के बालों वाली चूत हर रात गीली हो जाती थी, और मैं सोचती थी कि क्या यही छिनालपन है? एक दिन मैंने जानबूझकर पारदर्शी साड़ी पहनी और बिना ब्लाउज़ के नीचे से मेरे बोबों का आकार साफ़ दिख रहा था। अब्बा जान ने मुझे देखा और उनके मुँह से अनायास ही निकल गया, “बेटी, तुम तो आज किसी कॉलगर्ल से कम नहीं लग रही हो।”

मैंने शरमाते हुए कहा, “अब्बा जान, आपको पसंद आई मेरी साड़ी?” उन्होंने एक कदम बढ़ाया और मेरे गाल पर हाथ फेरते हुए बोले, “साड़ी से ज़्यादा तो मुझे इसके अंदर का समान पसंद आ रहा है, आयशा।” मेरी सांसें तेज़ हो गईं और मैंने उनकी छाती पर अपना हाथ रख दिया। “अब्बा जान, ये गलत है… फारुख़…” उन्होंने मेरी बात बीच में ही काटी और मेरे होंठों पर अपनी उंगली रखते हुए बोले, “फारुख़ तो यहाँ है नहीं, बेटी। और तुम्हारी टाइट चूत की ज़िम्मेदारी अब मेरी है।” मैं पूरी तरह से पिघल गई और मेरे घुटने कमज़ोर पड़ गए। उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया और अपने कमरे में ले गए।

कमरे में पहुँचते ही उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू फाड़ दिया और मेरे 36D के बोबे बाहर आ गए। “क्या मोटे चुचे हैं तुम्हारे, रंडी! पूरे 36 इंच के हैं क्या?” मैंने शर्म से हाँ में सिर हिलाया। उन्होंने मेरे दोनों बोबों को ज़ोर से दबाया और मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगे।

मेरे मुँह से एक ज़ोरदार सिसकारी निकली, “अब्बा… आह… इतनी ज़ोर से मत चूसो।” लेकिन वो रुके नहीं, बल्कि मेरे दूसरे निप्पल को भी मुँह में लेकर दाँतों से काटने लगे। मैंने अपनी टाँगें कस लीं और मेरी चूत से रस की एक बूंद मेरी जाँघों पर बह निकली। उन्होंने अपना हाथ मेरी साड़ी के अंदर डाला और सीधा मेरी बालों वाली चूत पर हाथ रख दिया। “अभी से इतनी गीली? तू तो पूरी छिनाल निकली, आयशा।”

उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और ख़ुद भी अपने कपड़े उतार फेंके। पहली बार मैंने उनका लंड देखा – वो सचमुच बहुत बड़ा था, कम से कम 8 इंच लम्बा और इतना मोटा कि मेरी मुट्ठी में नहीं आ पाता था। उनके अंडकोष भी भारी और बड़े थे, मानो महीनों का जमा हुआ माल उनमें भरा हो। मैं घुटनों के बल बैठ गई और उनके तने हुए लंड को अपने हाथों में लेकर उसे चूमने लगी।

उन्होंने मेरे बालों को कसकर पकड़ा और अपना लौड़ा मेरे मुँह में ठूँसते हुए बोले, “ले, पूरा अंदर ले, वेश्या! मेरे अंडकोषों को भी चाट।” मैंने उनके अंडकोषों को अपनी ज़बान से चाटा और फिर उनके लंड को पूरा मुँह में भर लिया। उन्होंने मेरे मुँह में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे और मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। “हाँ, इसी तरह… रो, मेरी रंडी, रो… तेरा रोना देखकर मेरा लंड और भी सख़्त हो गया है।”

3 मिनट तक मेरे मुँह की चुदाई करने के बाद उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी दोनों टाँगें ऊपर उठा दीं। मेरी रसदार चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और उन्होंने अपनी ज़बान से सीधा मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया। “उफ़… अब्बा जान… क्या कर रहे हैं आप…” मैं कराह उठी। उन्होंने मेरी चूत के रस को अपने मुँह में भरकर बोले, “तेरी चूत का रस तो शहद से भी मीठा है, बेटी। अब मैं इसे रोज़ पीऊँगा।”

फिर उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद में डाली और मैं चिल्ला पड़ी। “ये क्या कर रहे हैं, अब्बा! दर्द हो रहा है।” उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “दर्द तो होगा ही, पहली बार है न तुम्हारी गांड में कुछ जा रहा है। लेकिन मज़ा भी आएगा, भरोसा रख।”

उन्होंने अपना 8 इंच का लम्बा लंड मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ा और मैंने दाँत भींच लिए। “बोल, आयशा, बोल – मुझे चोदो अब्बा, ज़ोर से चोदो!” मैंने शर्माते हुए कहा, “मुझे… चोदो… अब्बा जान…” लेकिन वो नहीं माने। “नहीं, पूरा बोल – ‘मेरी चूत फाड़ दो अब्बा, अपने बड़े लंड से मेरी भोसड़ी बजा दो!’” मैंने हारकर पूरा बोला और जैसे ही मैंने “भोसड़ी” शब्द कहा, उन्होंने एक ही झटके में अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। मेरी जोर की चीख निकल गई और उन्होंने अपनी चुदाई करने की रफ़्तार बढ़ा दी। “चिल्ला, रंडी, चिल्ला! पूरे घर में गूँजनी चाहिए तेरी चीखें!” उनकी हर धक्का मेरी कोख तक जा रही थी और मेरा पूरा बदन पसीने से तरबतर हो गया था।

करीब 15 मिनट तक उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदा। मेरे घुटने जल रहे थे और मेरे बोबे ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। उन्होंने मेरे कुल्हों पर थप्पड़ मारे और मेरी गांड लाल हो गई। फिर अचानक उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे उल्टा घुमाकर मेरी गांड के छेद पर रख दिया। “अब असली मज़ा आएगा, बेटी। तेरी गांड का छेद तो देखता हूँ कितना टाइट है।”

मैंने डर के मारे आँखें बंद कर लीं और उन्होंने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड में घुसाना शुरू किया उसे अपना हलाल माल समझकर। एनल सेक्स के दौरान उठा दर्द असहनीय था, लेकिन साथ ही एक अलग ही किस्म का मज़ा भी आ रहा था। 5 मिनट में ही वो पूरी तरह से मेरी गांड के अंदर थे और मेरी चीखें अब कराहट में बदल गई थीं। “हाँ… अब्बा… और ज़ोर से… मेरी गांड फाड़ दो…”

“अब बताओ, तुम क्या हो?” उन्होंने मेरे कान के पास आकर गुर्राया। मैंने बिना किसी हिचक के कहा, “मैं आपकी रंडी हूँ, अब्बा जान… और मेरी गांड व चूत आपका हलाल माल है…” ये सुनते ही उन्होंने अपनी आख़िरी रफ़्तार पकड़ी और गरम-गरम शुक्राणु की धारें मेरी गांड के अंदर छोड़ दीं (Cumshot inside Ass Hole)। मुझे भी एक तेज़ ऑर्गेज़म हुआ और मेरी चूत से रस की बारिश हो गई।

उनका वीर्य इतना गाढ़ा और चिपचिपा था कि मेरी गांड से बाहर निकलते हुए मेरी जाँघों पर चिपक गया। हम दोनों बेदम होकर बिस्तर पर ढेर हो गए। उन्होंने मेरे माथे को चूमा और बोले, “अब तू सिर्फ़ मेरी है, समझी? फारुख़ जब भी आएगा, उसे सिर्फ़ तेरी गांड का छेद ही मिलेगा। तेरी चूत पर तो अब मेरा हक़ है।”

उस रात के बाद से मैं रोज़ शाम को सिर्फ़ अब्बा जान के लिए तैयार होती हूँ – कभी रेशमी ब्लाउज़ में, कभी बिना ब्लाउज़ के, कभी पारदर्शी सलवार में। हर रात मेरी कम से कम 1 बार ज़रूर चुदाई होती है, और जिस दिन वो ज़्यादा हॉर्नी होते हैं, उस दिन 3 से 4 बार भी मेरी चूत और गांड दोनों की बारी लगती है।

अब तो उन्होंने मेरे लिए ख़ास सेक्स खिलौने भी मँगवाए हैं – एक रबर का लंड और एक बट प्लग – ताकि जब वो बाहर हों तो भी मेरी चूत और गांड ट्रेंड रहें। मुझे पता है कि समाज की नज़र में मैं चरित्रहीन और रंडी हूँ, लेकिन सच्चाई ये है कि मैंने कभी इतनी संतुष्ट और ख़ुश महसूस नहीं की। अब्बा जान का प्यार, उनकी गालियाँ, उनके थप्पड़, और उनका मोटा लंड – यही मेरी दुनिया है। और हाँ, मेरी कोख में अब उन्हीं का बीज पल रहा है, जिसे फारुख़ अपना समझेगा। यही मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई है।

प्रिय पाठकों, मैं आयशा हूँ और ये मेरी और मेरे ससुर की पहली एनल सेक्स कहानी है। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी ये भोग-कथा पसंद आई होगी। कृपया अपनी ईमानदार राय और टिप्पणी अवश्य दें – मैं जानना चाहती हूँ कि आपको मेरी चुदाई का कौन सा हिस्सा सबसे ज़्यादा गर्म लगा और आप आगे क्या देखना चाहेंगे।

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