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जब मैंने अपनी आँखें खोलीं, तो हर तरफ घना जंगल था और सूरज की रोशनी पत्तों से छनकर मेरे चेहरे पर सुनहरी धब्बे बना रही थी। मैं राहुल हूँ, 32 साल का एक अकेला भटका हुआ फोटोग्राफर, जो इस सुनसान जंगल में खो चुका था। मेरा बैग खो गया था, पानी की बोतल खाली थी, और मेरे मोबाइल की बैटरी 2% पर लटक रही थी। तभी मुझे कुछ दूर से पत्तों की सरसराहट सुनाई दी, मानो कोई पैर घसीटता हुआ मेरी तरफ आ रहा हो। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि यह कोई जंगली जानवर है या कोई और।
मैंने धीरे से अपना कैमरा उठाया और आवाज की दिशा में कदम बढ़ाए, हर कदम के साथ मेरी सांसें तेज होती जा रही थीं। झाड़ियों के पीछे से एक लड़की की हल्की सी चीख निकली, जो डर और राहत दोनों से भरी हुई थी। मैंने झाड़ियों को हटाकर देखा तो सामने एक लड़की खड़ी थी, जिसकी उम्र करीब 28 साल रही होगी, उसके बाल बेतरतीब बिखरे हुए थे और कपड़े फटे हुए थे। वह नंदिनी थी, एक साहसी ट्रेकर लड़की जो अपने ग्रुप से अलग होकर यहां घने जंगलों में भटक गई थी। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर खरोंच के निशान उसकी मुश्किल कहानी बयां कर रहे थे।
फोटोग्राफर ने जंगल में चुदाई करी भटकी हुई साहसी ट्रेकर लड़की की अन्तर्वासना हिंदी आउटडोर सेक्स कहानी

“प्लीज़, मदद करो,” उस साहसी ट्रेकर लड़की ने कांपती हुई आवाज में कहा, उस कुमक लड़की के गुलाबी होंठ सूखे हुए थे और पैर लड़खड़ा रहे थे। मैंने तुरंत अपनी आधी खाली बोतल उसकी तरफ बढ़ाई और उसके पास जाकर बैठ गया, उसका हाथ थाम लिया। “तुम अकेली नहीं हो, मैं भी खोया हुआ हूँ,” मैंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, ताकि उसका डर कम हो सके। उसने मेरी आँखों में देखा और एक गहरी सांस ली, जैसे उसे विश्वास हो गया कि अब वह सुरक्षित है। हम दोनों एक पुराने बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए, जहां से जंगल का नजारा शानदार दिखता था।
उस साहसी ट्रेकर लड़की का शरीर काँप रहा था, उसकी सफेद टी-शर्ट पसीने से भीगकर उसके शरीर से चिपक गई थी, जिससे उसके उभरे हुए स्तनों की हल्की सी रूपरेखा झलक रही थी। मैंने अपनी शर्ट उतारी और उसके कंधों पर डाल दी, उस पल मुझे उसकी त्वचा की गर्माहट और इत्र की हल्की खुशबू महसूस हुई। उसने मेरी तरफ देखा और उसकी आँखों में शुक्रिया का भाव था, साथ ही कुछ और भी जो मैं समझ नहीं पा रहा था। जंगल की खामोशी में हम दोनों के बीच एक अजीब सी करीबियत पैदा हो रही थी, जो डर, अकेलेपन और एक अनजाने आकर्षण का मिश्रण थी।
“तुम्हारा नाम क्या है?” मैंने उसकी उँगलियों को सहलाते हुए पूछा, मेरी आवाज़ में वो अपनापन था जो शायद हालात ने पैदा कर दिया था। “नंदिनी,” उसने मुस्कुराकर जवाब दिया, और उसकी वो मुस्कान इतनी खूबसूरत थी कि मैं कुछ पल के लिए खो सा गया। मैंने अपना नाम बताया और फिर हम दोनों अपनी-अपनी कहानी साझा करने लगे। उसके शब्दों में एक अजीब सी कशिश थी, और मैं महसूस कर रहा था कि यह मुलाकात महज एक संयोग नहीं बल्कि किस्मत का इशारा थी।
जैसे-जैसे बातें बढ़ीं, हमारे शरीर एक-दूसरे के करीब आते गए, और हमारे बीच की दूरी मिटने लगी। नंदिनी का हाथ मेरे हाथ में था और उसकी त्वचा की नरमाहट मेरे रोंगटे खड़े कर रही थी। मैंने उसकी तरफ देखा और हमारी नजरें मिलीं, उस पल शब्दों की जरूरत नहीं थी। जंगल की नम हवा में हमारी साँसें एक लय में चलने लगीं, और मुझे लगा कि हम दोनों एक ही चीज़ चाहते हैं – एक-दूसरे का साथ और शारीरिक गर्माहट।
मैंने धीरे से अपना हाथ उस साहसी ट्रेकर लड़की के चेहरे पर रखा और उसके गालों को सहलाया, उसकी त्वचा मखमली और थोड़ी नम थी। “नंदिनी, तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने कानाफूसी की, और उसने अपनी पलकें झुका लीं। मेरा अंगूठा उसके होंठों पर फिरा, जो गुलाबी और सूखे हुए थे, मगर फिर भी बेहद आकर्षक। उसने हल्का सा होंठ खोला और मेरे अंगूठे को छुआ, जिससे मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। मैं उसकी तरफ झुका और हमारे चेहरे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए।
हमारी साँसें मिल रही थीं और हवा में पसीने, मिट्टी और उसके शरीर की खुशबू का एक नशीला मिश्रण तैर रहा था। मैंने उसके बालों को हटाकर उसकी गर्दन को देखा, जो पसीने से चमक रही थी। मेरी उँगलियाँ उसकी गर्दन से होती हुई कंधों तक गईं, और मैंने उसकी शर्ट को थोड़ा सा नीचे सरकाया। उसकी स्किन पर गूज़बंप्स उभर आए, और उसने एक गहरी साँस ली, जैसे मेरा हर स्पर्श उसे नई ज़िंदगी दे रहा हो। जंगल में पत्तों की खड़खड़ाहट और हवा की सरसराहट के बीच हमारी खामोशी और भी गहरी होती जा रही थी।
“मुझे डर लग रहा है,” उस साहसी ट्रेकर लड़की ने फुसफुसाकर कहा, लेकिन उसकी आँखें कुछ और ही कहानी कह रही थीं – वो मुझे चाह रही थी। “डरने की कोई बात नहीं, मैं तुम्हारे साथ हूँ,” मैंने उसकी कमर पर हाथ रखते हुए कहा, मेरी उँगलियाँ उसकी कमर के कर्व को महसूस कर रही थीं। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और हमारे होंठ आखिर मिल ही गए। पहला चुंबन कोमल और धीमा था, जैसे हम एक-दूसरे को टटोल रहे हों, एक-दूसरे के स्वाद को समझ रहे हों।
नंदिनी के होंठ मुलायम और थोड़े नमकीन थे, उनका स्वाद मुझ पर हावी होता जा रहा था। मेरी जीभ ने उसके होंठों को हल्के से चाटा और फिर धीरे-धीरे अंदर प्रवेश किया, जहाँ गर्माहट और नमी ने मेरा स्वागत किया। उसने मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फेर दीं और मुझे और जोर से चूमने लगी। यह चुंबन अब कोमल नहीं रहा था, बल्कि भूख और चाहत से भरा हुआ था, जैसे हम दोनों हफ्तों से प्यासे हों। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे, उसकी ब्रा का हुक ढूँढते हुए।
मैंने उसकी शर्ट को ऊपर खींचा और उसे सिर के ऊपर से उतार दिया, जिससे उसके 36D के बोबे एक काली लेस वाली ब्रा में कैद नजर आए। उसके स्तन ऊपर से हल्के से दबे हुए थे और उनकी गोलाई देखकर मेरा लंड तुरंत तन गया। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को दबाया, जो पहले से ही सख्त और उभरे हुए थे। नंदिनी ने एक हल्की सी कराह निकाली और अपनी कमर को मेरे शरीर से और जोर से चिपका दिया। मेरी उँगलियों ने ब्रा का हुक खोला और वो लटकती हुई नीचे गिर गई, अब उसके बोबे पूरी तरह से मेरे सामने थे।
उस साहसी ट्रेकर लड़की के स्तन गोल, भारी और दूधिया सफेद थे, जिन पर हल्की नीली नसें साफ दिखाई देती थीं। उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के और लगभग 1.5 इंच लम्बे थे, जो हवा के स्पर्श से और भी सख्त हो गए थे। मैंने झुककर एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा, मेरी जीभ उसके निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थी। नंदिनी की साँसें तेज हो गईं और उसने अपनी उँगलियाँ मेरे बालों में गहराई तक फँसा लीं। मेरा दूसरा हाथ उसके दूसरे स्तन को मसल रहा था, उसकी नरमाहट और भारीपन को महसूस करते हुए।
“और जोर से चूसो ना, बहुत अच्छा लग रहा है,” उसने अपनी कामुक आवाज़ में कहा, उसकी आँखें बंद थीं और होंठ खुले हुए थे। मैंने उसकी बात मानते हुए उसके निप्पल को दाँतों से हल्का सा काटा और फिर उसे और तेजी से चूसने लगा। मेरे हाथ अब उसकी जींस की तरफ बढ़ रहे थे, और मैंने उसकी बेल्ट खोलकर उसकी पैंट को नीचे सरकाना शुरू किया। नंदिनी ने खुद अपनी कमर उठाकर मेरी मदद की, और जल्द ही उसकी जींस और पैंटी दोनों उसके टखनों तक आ गईं। अब वो सिर्फ अपनी खुली शर्ट में थी, उसकी रसदार चूत मेरी नज़रों के सामने थी।
उस भटकी हुई ट्रेकर लड़की की चूत के बाल हल्के से कटे हुए थे, एक ट्रिम्ड तिकोना आकार जो उसकी भोसड़ी की तरफ इशारा कर रहा था। मैंने उसकी जाँघों को फैलाया और उस भटकी हुई ट्रेकर लड़की की देसी इंडियन चूत को करीब से देखा, उसकी चूत के होंठ गुलाबी और रस से चमक रहे थे। “बहुत देर से तरस रही हूँ, अब और मत तड़पाओ,” उसने अपनी उँगलियाँ मेरी कलाई पर जमाते हुए कहा। मैंने अपनी उँगली उसकी चूत पर रखी और धीरे-धीरे ऊपर से नीचे की तरफ सरकाई, पूरी चूत गीली और गर्म थी। मेरी उँगली पर उसका चिपचिपा माल लग गया, जो देखने में शहद जैसा और स्वाद में हल्का नमकीन था।
मैंने अपनी उँगली अपने मुँह में डाली और उसका रस चाट लिया, जिसका स्वाद मुझे और भी भूखा बना रहा था। फिर मैंने नीचे झुककर अपनी जीभ सीधे उसकी भोसड़ी पर लगाई और एक लम्बी सी चाट मारी। नंदिनी का शरीर तड़प उठा और उसने मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया, उसकी कमर हवा में उठ गई। मेरी जीभ उसकी चूत के हर हिस्से को चाट रही थी, उसके होंठों से लेकर उसके भीतर तक, जहाँ से लगातार रस बह रहा था। उसकी चूत का रस मेरी दाढ़ी पर लग गया था और उसकी गंध मेरे नथुनों में भर गई थी, एक तेज़ मादक खुशबू।
मैंने उस साहसी ट्रेकर लड़की की भगनासा को अपने होंठों के बीच लेकर चूसा और नंदिनी लगभग चीख पड़ी, उसका पूरा शरीर काँप रहा था। मेरी उँगली अब उस कामुक लड़की की देसी इंडियन चूत के अंदर थी, धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थी, जबकि मेरी जीभ उसके ऊपरी हिस्से पर काम कर रही थी। “हाँ, यही, मत रुकना, मुझे चोद दो,” वो बड़बड़ाने लगी, उसकी आवाज़ बेकाबू होती जा रही थी। मैंने अपनी उँगली की गति तेज कर दी और साथ ही उसकी चूत को और तेजी से चाटने लगा, हर चाट के साथ उसका रस मेरे मुँह में भरता जा रहा था। अचानक उसकी कमर जोर से ऊपर उठी और उसने एक तेज़ चीख के साथ अपना पहला ऑर्गैज्म हासिल किया, उसका शरीर बुरी तरह काँप रहा था और चूत का रस मेरी हथेली पर बह आया।
नंदिनी कुछ पल तक हाँफती रही, उसकी आँखें बंद थीं और चेहरे पर संतुष्टि की लाली थी। मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसके माथे पर एक कोमल चुंबन दिया, उसके शरीर की गर्माहट को महसूस करते हुए। लेकिन मेरा खड़ा लंड अभी भी मेरी पैंट में तड़प रहा था, एक बड़ा और मोटा लौड़ा जो अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। नंदिनी ने अपनी आँखें खोलीं और मेरी पैंट की तरफ देखा, जहाँ मेरे लंड का उभार साफ दिखाई दे रहा था। “अब मेरी बारी,” उसने एक शरारती मुस्कान के साथ कहा और अपने हाथ से मेरी जींस की जिप खोलने लगी।
जैसे ही मेरा लंड आज़ाद हुआ, वो तुरंत पूरी तरह तन गया, करीब 7.5 इंच का एक मोटा लौड़ा जिसके ऊपर नसें साफ उभरी हुई थीं। मेरे लंड के गोटे भारी और गर्म थे, अंडकोष की थैली कसी हुई थी। नंदिनी ने पहले तो बस उसे देखा, उसकी आँखों में चाहत और थोड़ा सा डर दोनों साफ दिख रहे थे। फिर उसने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ लिया, उसकी पकड़ मजबूत और गर्म थी। उसने धीरे-धीरे मेरे लंड को सहलाना शुरू किया, उसकी उँगलियाँ मेरे लंड के तने पर ऊपर-नीचे हो रही थीं।
“कितना मोटा लौड़ा है तुम्हारा, पूरा हाथ भर आया,” उस भटकी हुई ट्रेकर लड़की ने कामुकता से कहा और फिर झुककर मेरे लंड के ऊपरी हिस्से को चाटा। उसकी जीभ की गर्माहट ने मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ा दिया, और मैंने अनायास ही उसके बाल पकड़ लिए। नंदिनी अब मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में ले रही थी, उसका मुँह इतना गर्म और गीला था कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मेरे लंड का आधा हिस्सा उसके मुँह के अंदर था और बाकी का आधा उसकी उँगलियों की गिरफ्त में। वो मेरा ब्लोजॉब इस तरह कर रही थी मानो कोई भूखी औरत सालों बाद खाना खा रही हो।
मेरे लंड पर उसकी लार की परत चढ़ गई थी, जो हवा में ठंडी होकर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रही थी। उसने मेरे अंडकोष को भी अपने हाथ में ले लिया और धीरे से मसलने लगी, जबकि उसका मुँह मेरे लंड पर तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था। “अब और नहीं, वरना मैं तुम्हारे मुँह में ही झड़ जाऊँगा,” मैंने कराहते हुए कहा, मेरी साँसें पूरी तरह से बेकाबू थीं। नंदिनी ने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और एक शैतानी हंसी हँसते हुए बोली, “तो फिर मुझे चोदो, जंगल की रंडी बनाकर चोदो मुझे।”
उसके मुँह से ये गंदे शब्द सुनकर मेरा इंडियन देसी लंड और भी सख्त हो गया, और मैंने उसे जमीन पर लिटा दिया। मैंने उसके पैरों को उठाकर उसके कंधों पर रख दिया, और मेरा लंड अब सीधे उसकी चूत के दरवाजे पर था। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा, उसका चिपचिपा माल मेरे लंड के ऊपरी हिस्से पर लग गया। “अंदर डालो, पूरा लंड मेरी चूत में ठूँस दो,” नंदिनी ने अपनी कमर उठाकर मुझे और उकसाया। मैंने एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी टाइट चूत में डाल दिया, और नंदिनी ने एक दबी हुई चीख निकाली।
उस नंगी साहसी ट्रेकर लड़की की चूत इतनी टाइट और गर्म थी कि मुझे लगा मेरा देसी लंड पिघल जाएगा, हर अंदरूनी दीवार मेरे लंड को कसकर जकड़े हुए थी। मैंने धीरे-धीरे पहले अंदर-बाहर करना शुरू किया, उस भटकी हुई ट्रेकर लड़की की चूत की नमी और गर्माहट का पूरा आनंद लेते हुए। हर बार जब मेरा लंड अंदर जाता, तो एक गीली सी आवाज़ आती, “सप-सप”, जो जंगल की खामोशी में गूँज जाती। मेरी गति अब तेज होती जा रही थी, मैं उसे पूरी ताकत से चोद रहा था, हर झटके के साथ उसके बोबे ऊपर-नीचे हिल रहे थे। “हाँ, चोदो मुझे, पूरी ताकत से चोदो इस रंडी को,” वो लगातार बोलती जा रही थी, उसकी आवाज़ में दर्द और आनंद का मिश्रण था।
मैंने अपनी गति और तेज़ कर दी, मेरी कमर अब पूरी रफ्तार से चल रही थी, हर झटके के साथ हमारे शरीरों की टक्कर की आवाज़ आती। मेरा पसीना टपककर उसके चेहरे और बोबों पर गिर रहा था, और नंदिनी की आँखें आनंद से बंद थीं। मैंने उसके पैरों को हटाकर अब उसकी कमर पकड़ ली और और भी गहराई तक चोदने लगा। मेरा लंड अब उसकी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था, उसकी गहराई को मापता हुआ। “मैं आ रही हूँ, मैं फिर से आ रही हूँ,” नंदिनी चिल्लाई और उसकी चूत ने मेरे लंड को अंदर से और भी कसकर जकड़ लिया। दोस्तों ये मेरे जीवन का पहला आउटडोर सेक्स था जंगल में और वो भी एक अनजान लड़की के साथ।
मैंने महसूस किया कि अब मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगा, मेरे अंडकोष भारी हो गए थे और वीर्य बाहर आने को बेताब था। “मैं भी अब झड़ने वाला हूँ, बताओ कहाँ गिराऊँ?” मैंने हाँफते हुए पूछा। नंदिनी ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराई, “अंदर ही डाल दो, मेरी चूत में ही भर दो अपना माल।” ये सुनते ही मैंने अपनी आखिरी ताकत लगाकर 3-4 गहरे झटके मारे और फिर एक जोरदार झटके के साथ अपना सारा वीर्य उसकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया। मेरे लंड ने कई बार धड़कते हुए शुक्राणु की धाराएँ उसके भीतर छोड़ीं, और पूरा शरीर सिहर उठा।
मैं उसके ऊपर ही गिर गया, पूरी तरह से निढाल, हमारी साँसें एक-दूसरे से मिल रही थीं और शरीर पसीने से लथपथ थे। नंदिनी ने मेरे बालों में हाथ फेरा और मेरे माथे को चूम लिया, उसकी चूत में अभी भी मेरा लंड अंदर ही था, धीरे-धीरे ढीला पड़ता हुआ। “ये सबसे अच्छा भटकना था मेरी ज़िंदगी का,” उसने मुस्कुराकर कहा, और मैं हल्का सा हँस पड़ा। हम दोनों वहीं पत्तों पर लेट गए, एक-दूसरे की बाँहों में, जबकि ऊपर बरगद का पेड़ हमें छाँव दे रहा था और जंगल की चिड़ियाँ धीमी आवाज़ में चहचहा रही थीं।
थोड़ी देर बाद, जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, हम दोनों उठे और पास के एक झरने की आवाज़ सुनकर उधर चल दिए। ठंडे पानी में हमने एक-दूसरे को नहलाया, हर स्पर्श अब प्यार और अपनेपन से भरा था। जंगल से बाहर निकलने का रास्ता हमें एक साथ ही मिला, और जब हम सभ्यता में लौटे, तो हम दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता बन चुका था। नंदिनी अब सिर्फ एक याद नहीं बल्कि मेरी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन गई थी, जिसे पाने के लिए मैं हर दिन उस जंगल का शुक्रिया अदा करता हूँ।
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