पहला सेक्स अनुभव घरेलू हिंसा की शिकार मौसी के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी एक युवक की अंतरंग इच्छाओं और उसके परिवार के साथ जटिल संबंधों की कहानी है। मुख्य पात्र अपनी माँ और मौसी के प्रति आकर्षण महसूस करता है जो उसके जीवन में नई उथल-पुथल लाता है। जब उसकी सेक्सी मौसी अपने शराबी पति के द्वारा करी जाने वाली रोज की घरेलू हिंसा से तंग आकर उनके घर आ जाती है, तो युवक के मन में छुपी हुई कामुक भावनाएँ फिर से जागृत हो जाती हैं।
एक रात उस कामवासना की आग में जल रहे जवान लड़के को अपनी मौसी को अकेले में हस्तमैथुन करके आत्मसंतुष्टि करते हुए देखने का मौका मिलता है और वह उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव रखता है। शुरू में हिचकिचाहट के बाद मौसी मान जाती है और दोनों के बीच जोशीला संबंध स्थापित होता है। लेकिन कहानी में नया मोड़ तब आता है जब उसकी माँ उन्हें एक साथ देख लेती है और खुद भी इस रिश्ते का हिस्सा बनने की इच्छा प्रकट करती है।
मेरा नाम अंकित वर्मा है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 23 साल है और मैं अपनी माँ और पिताजी के साथ रहता हूँ। पिताजी का ट्रांसफर अक्सर होता रहता है इसलिए वे ज्यादातर समय घर से बाहर ही रहते हैं। मेरी माँ, जिनका नाम रश्मि वर्मा है, वे 42 साल की हैं लेकिन उनका फिगर और चेहरा ऐसा है कि कोई भी उन्हें 30 साल से ज्यादा की नहीं समझता। मेरी मौसी, यानी माँ की छोटी बहन, जिनका नाम सुमन है, वे हाल ही में अपने पति से अलग होकर हमारे घर आई हैं। मौसी की उम्र 38 साल है और वे माँ से भी ज्यादा आकर्षक हैं।
मुझे याद है जब मेरी सेक्सी मौसी पहली बार हमारे घर रहने के लिए आई थीं। उनके सुंदर से चेहरे पर गहरी उदासी थी और आँखों में डर घरेलू हिंसा की तरफ इशारा कर रहा था। माँ ने बताया कि मौसा जी शराब पीने के बाद मौसी को नंगी करके बैल्ट से मारते थे। मैंने उस दिन मौसी को गले लगाया था और कहा था कि अब वे सुरक्षित हैं। मौसी ने मेरे कंधे पर सिर रखकर रोना शुरू कर दिया था। उनके शरीर की गर्माहट और खुशबू ने मेरे अंदर एक अजीब सी गुदगुदी पैदा कर दी थी। मैंने अपनी भावनाओं को दबा दिया था लेकिन उस रात मैं मौसी के बारे में सोचकर ही सोया था।
पहला सेक्स अनुभव घरेलू हिंसा की शिकार मौसी के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

कुछ हफ्तों बाद मौसी धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। वे घर के कामों में मेरी माँ की बहुत मदद करतीं और कभी-कभी मेरे लिए विशेष व्यंजन भी बनातीं। मैं अक्सर उन्हें रसोई में काम करते हुए देखता और उनके हिलते-डुलते कूल्हों को निहारता रहता। एक दिन जब मौसी ऊपर झुककर कुछ उठा रही थीं, तो उनके ब्लाउज से उनके भरे हुए बूब्स झाँक रहे थे। मेरा लिंग तुरंत खड़ा हो गया और मुझे जल्दी से अपने कमरे में जाकर मुट्ठी मारनी पड़ी।
रात के खाने के बाद मैं अक्सर मौसी के साथ बैठकर बातें करता। वे मुझे अपने जीवन के अनुभव सुनातीं और मैं उन्हें कॉलेज की बातें बताता। एक शाम जब माँ किसी रिश्तेदार के यहाँ गई हुई थीं, मैंने मौसी से पूछ ही लिया, “मौसी, क्या आपको कभी अकेलापन महसूस होता है?” मौसी ने आँखें नीची कर लीं और बोलीं, “हाँ बेटा, कभी-कभी बहुत।” मैंने उनका हाथ थाम लिया और कहा, “मैं आपका अकेलापन दूर कर सकता हूँ।” मौसी ने हैरानी से मेरी ओर देखा लेकिन कुछ नहीं बोलीं।
रात की वह यादगार मुलाकात और घरेलू हिंसा की शिकार मौसी के साथ पहला सेक्स अनुभव
उस रात मैं सो नहीं पा रहा था। मेरा दिमाग मौसी के बारे में ही गंदा – गंदा सोच रहा था। करीब 2 बजे मुझे मौसी के कमरे से हल्की-हल्की आवाज़ें सुनाई दीं। मैं धीरे से उठा और उनके कमरे के दरवाज़े के पास गया। दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं था और मैंने अंदर झाँका। मेरी मौसी बिस्तर पर बिलकुल नंगी लेटी हुई थीं और अपने स्तनों को मसल रही थीं। उनका एक हाथ नीचे जा रहा था और वे हल्के-हल्के कराह रही थीं। मेरा लिंग पतलून में ही कड़ा हो गया और मैंने दरवाज़ा खोल दिया।
घरेलू हिंसा की शिकार मौसी ने मुझे देखा तो चौंक गईं और जल्दी से अपना नंगा जिस्म छिपाने के लिए पलंग पर पड़ी चादर ओढ़ ली। “अंकित बेटा! तुम…तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “मौसी, मैंने आपको हस्तमैथुन करते हुए देख लिया है अब आपको मुझसे कुछ छुपाने की जरुरत नहीं है। आपको शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है।” मैं उनके पास गया और चादर हटा दी। मेरी सेक्सी मौसी का नंगा शरीर चाँद की चाँदनी में चमक रहा था। मैंने उनके स्तनों को छुआ तो वे सिहर उठीं। “नहीं अंकित बेटा, यह गलत है। तुम मेरी बहने के बेटे हो और मैं तुम्हारी मौसी हूँ,” उन्होंने कहा लेकिन उनकी आवाज़ में दृढ़ता नहीं थी।
मैंने जंगली आशिक की तरह मेरी नंगी मौसी के सेक्सी जिस्म को चूमना शुरू कर दिया। पहले उनके शरबती होंठ, फिर गर्दन और धीरे-धीरे नीचे उनके स्तनों तक। मौसी अब विरोध नहीं कर रही थीं बल्कि मेरे सिर को अपनी छाती से दबा रही थीं। मैंने उनके निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो वे जोर से कराह उठीं। “अह्ह्ह… बेटा… ऐसा मत कर… पर… ओह भगवान!” मैंने अपना एक हाथ नीचे उनकी योनि पर रखा तो वह पहले से ही गीली थी। मैंने एक उंगली अंदर डाली तो मौसी ने अपनी टाँगें और खोल दीं।
मैंने अपने कपड़े उतारे और मौसी के ऊपर लेट गया। मेरा कड़ा हुआ लिंग उनकी योनि के द्वार पर था। “क्या तुम तैयार हो मौसी?” मैंने पूछा। मौसी ने आँखें बंद कर लीं और हल्के से सिर हिला दिया। मैंने धीरे से दबाव बनाया और मेरा लिंग उनकी गर्म और तंग योनि में समा गया। मौसी ने जोर से चीख मारी, “आह्ह्ह! बेटा! ओह भगवान!” मैंने धीरे-धीरे गति बनाई और मौसी मेरे साथ तालमेल बिठाने लगीं।
माँ का अचानक आगमन और उनकी भी हमारे साथ मिलकर सेक्स करने की कामुक इच्छा
हम दोनों संभोग में मग्न थे कि अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला और मेरी माँ अंदर आ गईं। मैं तुरंत रुक गया लेकिन मौसी ने मुझे रोक लिया, “नहीं… मत रुको… प्लीज… मुझे आज अपनी रंडी बनकर चोदते रहो” माँ ने मुझे उनकी बहन के साथ सेक्स करते देखा तो उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया। “यह क्या चल रहा है यहाँ?” माँ ने गुस्से में पूछा। मैंने मौसी से अपना लिंग बाहर निकाला और बिस्तर से उतर गया। “माँ, मैं… मैं समझा सकता हूँ,” मैंने कहा लेकिन माँ ने मुझे रोक दिया।
माँ ने मौसी की ओर देखा जो अब भी नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। “तुम्हें शर्म नहीं आती अपने भांजे के साथ ऐसा करते हुए?” माँ ने कहा। मौसी रोने लगीं, “दीदी, माफ़ कर दो… मैं… मैं खुद को रोक नहीं पाई…” मैंने माँ के पैर पकड़ लिए, “माँ, गलती मेरी है। मैंने ही मौसी को उकसाया।” माँ ने मुझे गौर से देखा फिर अचानक उनके चेहरे का भाव बदल गया।
माँ ने धीरे से कहा, “उठो बेटा।” फिर उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू समेटा और बिस्तर पर बैठ गईं। “मैं भी तुम दोनों की तरह अकेलापन महसूस करती हूँ, भले मैं घरेलू हिंसा की शिकार नहीं हूँ मगर पति से दूर रहने की वजह से लंड से चुदवाने के लिए तो मैं भी बैचेन रहती हूँ” माँ ने कहा। मैं और मौसी हैरानी से माँ की ओर देखने लगे। मेरी माँ सेक्स करने के लिए काफी बैचेन दिख रही थी, फिर माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी गोद में रख लिया। “क्या तुम मेरी भी इच्छाओं को पूरा करोगे बेटा?” माँ ने पूछा। मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या कहूँ। मौसी ने माँ का हाथ पकड़ा, “दीदी, हम तीनों एक साथ आनंद ले सकते हैं।”
माँ ने धीरे से अपनी साड़ी खोलनी शुरू की। मैंने उन्हें रोकते हुए कहा, “माँ, क्या आप सच में चाहती हैं…” माँ ने मेरा मुँह बंद कर दिया, “हाँ बेटा, मैं भी एक स्त्री हूँ और मेरी भी शारीरिक ज़रूरतें हैं। तुम्हारे पिता कई कई महीनों तक घर नहीं आते।” माँ की साड़ी अब पूरी तरह खुल चुकी थी और उन्होंने अपनी टाइट ब्लाउज के बटन खोल दिए। मैं और मौसी दोनों मेरी माँ के सेक्सी शरीर को निहार रहे थे।
तीनों के बीच का पहला समूह संभोग अनुभव (Our First Threesome Sex)
माँ ने अपनी ब्रा उतार फेंकी सेक्स करने के लिए। ब्रा खुलते ही उनके भरे हुए स्तन बाहर आ गए। मौसी ने तुरंत माँ के स्तनों को छूना शुरू कर दिया और उन्हें चूमने लगी। मैंने माँ के पैरों को चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ता गया। माँ की जांघों के बीच पहुँचकर मैंने उनकी पैंटी को सरकाया और उनकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। माँ जोर से कराह उठीं, “आह्ह्ह! हाँ बेटा… ऐसे ही… ओह भगवान!” मौसी अब माँ के स्तनों को चूस रही थीं और अपने हाथों से माँ के बालों को सहला रही थीं।
थोड़ी देर बाद मैंने माँ को पीठ के बल लिटा दिया और अपना कड़ा हुआ लिंग उनकी योनि के सामने रखा। माँ ने अपनी टाँगें फैला दीं और मुझे आमंत्रित करने वाली मुद्रा में आ गईं। “आ जाओ बेटा, मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए,” माँ ने कहा। मैंने धीरे से दबाव बनाया और मेरा लिंग माँ की गर्म और तंग चूत में समा गया। माँ ने जोर से चीख मारी, “आह्ह्ह! हाँ! ऐसे ही बेटा!” मैंने धीरे-धीरे गति बनाई और माँ मेरे साथ तालमेल बिठाने लगीं।
इसी बीच मौसी ने माँ के मुँह को चूमना शुरू कर दिया और अपने स्तनों को माँ के चेहरे से सटा दिया। माँ ने मौसी के निप्पल्स को चूसना शुरू कर दिया जबकि मैं उनकी योनि में लगातार धक्के दे रहा था। कमरे की हवा में संभोग की गंध और कराहने की आवाज़ें गूँज रही थीं। सेक्स के दौरना मैंने अपनी चुदाई करने की गति तेज़ कर दी और मेरी नंगी माँ चुदते चुदते बहुत ही ज्यदा जोर-जोर से चिल्लाने लगीं, “हाँ! हाँ बेटा… आह…. आह…. ! मैं आ रही हूँ! ओह भगवान!” मैंने भी अपना वीर्य माँ की योनि में छोड़ दिया और हम दोनों एक साथ चरम सुख प्राप्त करते हुए थककर गिर पड़े।
थोड़ी देर बाद मौसी ने मेरा लिंग अपने मुँह में ले लिया और उसे साफ़ करना शुरू कर दिया। माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम्हारी बारी है बहन।” मैंने मौसी को पीठ के बल लिटा दिया और माँ ने मेरा लंड मौसी की चूत में डाल दिया। इस बार मैंने सेक्स करने के दौरान ज़ोरदार तरीके से धक्के देना शुरू किया। मौसी जोर-जोर से चिल्ला रही थीं, “हाँ! हाँ! और ज़ोर से! मुझे चोदो! मेरी चूत फाड़ डालो!” माँ ने मौसी के स्तनों को मसलना शुरू कर दिया और उन्हें चूमने लगीं। थोड़ी ही देर में मैंने फिर से वीर्य छोड़ दिया और हम तीनों एक दूसरे से लिपटकर सो गए।
नियमित होते अवैध यौन संबंध और भविष्य की योजनाएँ
उस रात के बाद से हम तीनों का रिश्ता पूरी तरह बदल गया। अब जब भी मौका मिलता, हम एक साथ आनंद लेते। कभी मैं माँ के साथ संभोग करता तो मौसी हमें देखकर मुट्ठी मारती, कभी मैं मौसी को चोदता तो माँ हमारे पास आकर खुद को संतुष्ट करतीं। एक दिन माँ ने हमें बैठकर गंभीर बातचीत करने के लिए कहा। “बेटा, मैंने एक फैसला किया है,” माँ ने कहा। “मैं चाहती हूँ कि तुम मौसी से शादी कर लो।” मैं और मौसी दोनों चौंक गए।
माँ ने समझाया, “इस तरह हम तीनों का अवैध सेक्स रिश्ता समाज की नज़रों में वैध हो जाएगा। तुम्हारे पिता को भी कुछ शक नहीं होगा। और मैं… मैं तुम दोनों के साथ ही रहना चाहती हूँ।” मौसी ने माँ का हाथ थाम लिया, “दीदी, क्या तुम सच में ऐसा चाहती हो?” माँ ने मुस्कुराते हुए हाँ कहा। मैंने भी सहमति दे दी। माँ ने कहा, “लेकिन एक शर्त है। तुम दोनों का संबंध जारी रहेगा और मैं भी तुम दोनों के साथ आनंद लेती रहूँगी।” मौसी ने खुशी से सिर हिला दिया और मैंने भी हाँ कह दिया।
अगले कुछ हफ्तों में हमने शादी की तैयारियाँ शुरू कर दीं। माँ ने पिताजी को फोन करके बताया कि उन्होंने मेरी शादी अपनी छोटी बहन अर्थात मौसी से तय कर दी है। पिताजी को आश्चर्य हुआ लेकिन वे मान गए क्योंकि मौसी अब तलाकशुदा औरत थीं। शादी की तारीख तय हो गई और हम तीनों थ्रीसम सेक्स कर करते अपने गुप्त रिश्ते का आनंद लेते रहे। शादी से पहले की रात हम तीनों ने एक साथ बिताई और पूरी रात संभोग में गुज़ार दी। शादी के बाद भी हमारा त्रिकोणीय संबंध जारी रहा। मौसी अब मेरी पत्नी थीं लेकिन माँ भी हमारे यौन जीवन का अहम हिस्सा बनी रहीं। दोस्तों बहुत जल्द मेरी और मौसी की शादी होने वाली हैं मैं आप सभी को न्योता भेज दूंगा आप सभी मेरी शादी में जरुर पधारना और हाँ गिफ्ट लाना मत भूलना। दोस्तों आप मेरी शदी पर मुझे बहुत सारे कॉन्डोम दे सकते हैं ताकि मैं शादी के बाद मेरी माँ और मौसी को खूब जमकर चोदूं….


