फ्री में पढ़ें ऑफिस में बॉस ने जब मेरी स्कर्ट उठाकर मेरी रसीली चूत चाटी अन्तर्वासना हिंदी अश्लील सेक्स कहानी – Read for free When the boss in the office lifted my skirt and licked my juicy pussyAntarvasaana Hindi obscene sex story – free mein padhein office mein boss ne jab meri skirt uthakar meri rasili choot chaati antarvasana hindi ashleel sex kahani …
मेरा नाम अनन्या पांडे है। मैं 24 साल की जवान और सेक्सी माल लड़की हूँ। दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी (निजी सचिव) हूँ। मेरा बॉस, रुद्र प्रताप सिंह, करीब 38 साल का, 6 फीट 2 इंच लंबा, चौड़ी छाती, गहरी आँखें। दिल्ली का रहने वाला, बिजनेस टाइकून। जब वो मीटिंग रूम में पैर रखता था, पूरा फ्लोर खामोश हो जाता था। मैं रोज़ उसे देखती, और मेरे भीतर एक अजीब सी हलचल होती। जो पहले कभी नहीं हुई थी।
मेरी यूनिफॉर्म थी – एक ग्रे पेंसिल स्कर्ट, सफेद शर्ट, और स्टॉकिंग्स। स्कर्ट का घेरा घुटनों से 3 इंच ऊपर। आते ही पहले दिन उसकी नज़रें मेरी टाँगों पर अटकी थीं। मैं शर्मा गई थी, लेकिन भीतर ही भीतर एक चिंगारी भड़की। कुछ हफ्तों बाद, मुझे लगने लगा कि वो जानबूझकर मुझे अपने केबिन में बुलाता है। हर बार कोई न कोई फ़ाइल, कोई न कोई बहाना।
फ्री में पढ़ें ऑफिस में बॉस ने जब मेरी स्कर्ट उठाकर मेरी रसीली चूत चाटी अन्तर्वासना हिंदी अश्लील सेक्स कहानी

एक दिन मैं उसकी टेबल के पास खड़ी थी, एक डॉक्यूमेंट की गलतियाँ गिनवा रही थी। वो मेरी तरफ पीठ करके खिड़की से बाहर देख रहा था। अचानक वो मुड़ा, और हमारी नज़रें टकरा गईं। उसके होंठों पर एक अजीब सी हल्की मुस्कान थी।
“अनन्या, तुम्हारी स्कर्ट… थोड़ी छोटी नहीं है?” उसने धीमे से पूछा, आवाज़ में हल्का खुरदरापन।
“सर… कंपनी की यूनिफॉर्म है,” मैंने नज़रें झुकाकर कहा।
“मुझे पसंद है,” वो स्माइल करते हुए मेरे नजदीक आकर मेरे कानो में फुसफुसाया।
मेरा दिल धड़कने लगा। कमरे की हवा गाढ़ी होने लगी। मैंने देखा कि उसकी पैंट के आगे एक हल्का सा उभार बन रहा था। वो मेरे करीब आया, मेरे कंधे पर हाथ रखा। उसकी उंगलियाँ जलती हुई लावा सी लगीं। मैंने अपने स्तनों के बीच गर्मी महसूस की। मेरी चूत से एक पतली सी धार रिसकर मेरी पैंटी को गीला करने लगी। मुझे पता था, ये गलत है। पर मैं हिल नहीं पा रही थी।
“क्या तुम आज शाम मेरे साथ डिनर करोगी?” उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा।
“सर… आप मेरे बॉस हैं,” मैंने काँपते होंठों से कहा।
“डिनर में कोई बुराई नहीं, अनन्या। चलो, मैं तुम्हें पिक कर लूँगा।”
वो मुस्कुराया, और मेरा पूरा सेक्सी शरीर जैसे मोम हो गया। मैंने सिर हिला दिया। उस शाम, मैं काँपते हाथों से तैयार हुई। एक काली ड्रेस, बिना ब्रा के। सिर्फ निप्पल पैच लगाए। मेरी चूत बार-बार गीली हो रही थी, जैसे कोई नदी उफान पर हो। मैंने तीन बार पैंटी बदली।
रुद्र मुझे अपनी फार्महाउस ले गया। दिल्ली के बाहरी इलाके में, सुनसान। कार में बैठे-बैठे उसका हाथ मेरी जाँघ पर पड़ा। मैं चुप रही। उसकी एक उंगली धीरे-धीरे मेरे गर्म मांस पर साँप की तरह रेंगने लगी। मैंने आँखें बंद कर लीं। साँस तेज़ हो गई।
“बहुत नर्म हो तुम,” वो बुदबुदाया।
फार्महाउस के बेडरूम में जाते-जाते मेरी चूत का रस मेरी जाँघों तक बह चुका था। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, उसने मुझे दीवार से लगा लिया। उसके होंठ मेरे होंठों पर थे। जीभ ने मेरे मुँह में घुसकर मेरी सारी घबराहट चूस ली। मैंने उसकी कमर पर हाथ डाल दिए। उसकी मोटी लौड़ा मेरी नाभि के पास दब रही थी, एक कठोर लकड़ी की तरह।
“मैं तुम्हें बहुत दिनों से चाहता हूँ, अनन्या। आज मैं तुम्हारी चूत को ऐसा चोदूंगा कि तुम भूल न पाओगी,” उसने गुर्राते हुए कहा।
उस भाषा ने मेरे भीतर बैठी भद्र महिला को जला दिया और एक नंगी, भूखी रांड जाग उठी। मैंने उसकी बेल्ट खोलते हुए कहा, “तो दिखाओ, सर। बातों से नहीं, मुझे चाहिए तुम्हारा खड़ा लंड।”
रुद्र ने एक ही झटके में मेरी ड्रेस ऊपर कर दी और मेरे स्तनों पर लगे पैच फाड़ दिए। मेरे 36D के बोबे खुले में आ गए। चूचियों के ऊपर का भूरा घेरा सिकुड़कर कड़ा हो गया था। उसने मेरी दाईं चूची मुँह में ले ली और बच्चे की तरह चूसने लगा। उसकी जीभ का हर चक्कर मेरी चूत में बिजली भेज रहा था। मैं ज़ोर से कराह उठी – “आह… ऐसे ही… और ज़ोर से चूसो।”
मेरी उंगलियों ने उसकी पैंट की ज़िप खोल दी। अंदर का बॉक्सर निकाला, तो एक लम्बा लंड, कम से कम 8 इंच, हल्की सी नसों से भरा, आँखों के सामने कूद पड़ा। मैंने उसे पहली बार छुआ। गर्म, चिपचिपा। लंड के गोटे थैली में कसे हुए। मैंने नीचे झुककर उसके तने हुए मुंड को चूमा। एक बूँद प्री-कम निकलकर मेरे होंठों पर लग गई। स्वाद नमकीन-सा, कड़वा-सा, मर्दाना।
“ले मेरी रानी, मेरा लौड़ा तुम्हारे मुँह की प्यास बुझाए,” वो फुसफुसाया।
मैंने उसके पूरे लंड को होंठों में भरने की कोशिश की, लेकिन गले तक ही पहुँच पाया। मैंने धीरे-धीरे चूसना शुरू किया – कभी उसके सुपारे को जीभ से खेलती, कभी नीचे के अंडकोषों को मालिश करती। उसके मुँह से हल्की सिसकियाँ निकलीं। मेरी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी। मैंने अपनी पैंटी उतार दी और बिस्तर पर हाथ के बल झुक गई, अपनी गांड उसकी तरफ करके।
मैं कामुक रांड बोली की “सर अब। मेरी रसदार चूत लो।”
रुद्र ने मेरे कूल्हों को पकड़ा और अपनी नाक मेरी रसीली चूत के बालों पर रगड़ी। “कितनी सुंदर भोसड़ी है तुम्हारी। एकदम गुलाबी और चमकती हुई।”
फिर उसकी जीभ मेरे चूत के होठों पर पड़ी। एक बार, दो बार, फिर लगातार। वो ऐसे चाट रहा था जैसे किसी मीठे आम को चूस रहा हो। मेरी चूत का रस उसकी दाढ़ी पर चिपक गया। मैं ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अपनी ही गांड के छेद में मेरी उंगली अपने आप घुस गई।
“और… और डालो जीभ… मेरी चूत के अंदर…” मैंने भीख माँगी।
उसने मेरा कूल्हा पकड़कर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और अपना लंड बिना किसी चेतावनी के मेरी योनि के मुहाने पर लगा दिया। एक ज़ोर का धक्का। मेरे भीतर का एक कोना फट सा गया। पर दर्द के तुरंत बाद एक मीठी सी लहर दौड़ गई। मेरे स्तन उछले। मेरा मुँह खुल गया, लेकिन आवाज़ नहीं निकली। पूरे 8 इंच मेरे अंदर थे।
“आह… यस… यही तो चाहिए था मुझे… एक बड़ा लौड़ा…” मेरी आवाज़ लौटी।
रुद्र ने मेरे पैरों को अपने कंधों पर डाल लिया और एक के बाद एक धक्के मारने लगा। उसके अंडकोष मेरी गांड पर ज़ोर-ज़ोर से बजने लगे। चट-चट की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। हर धक्के के साथ मेरी चूत सिकुड़ती और फैलती। मेरे भीतर एक तूफान उठ रहा था।
“तेज़… और तेज़ चोदो मुझे… मुझे रांड बना दो… अपनी रखैल…” मेरे मुँह से वो शब्द निकले जो मैंने सपने में भी नहीं सोचे थे।
उसने मेरी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, ताकि मेरी रसीली चूत और ऊपर उठे। फिर मेरे पैरों को खोलकर मेरे मुँह के पास ले आया। मैंने अपने ही घुटने चूम लिए। इस पोज़ीशन में उसका लंड और भी गहरा पहुँच रहा था। हर धक्का मेरे गर्भाशय के मुँह पर चोट कर रहा था। मैं अपने आप पर काबू खोने लगी। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और अचानक हर तंत्रिका में करंट दौड़ गया – मेरा पहला ऑर्गेज़्म आया। मेरी चूत ने उसके लंड को कसकर जकड़ लिया और मैं चीख पड़ी।
“बाहर मत निकालना… बस अंदर ही रहना…” मैंने हाँफते हुए कहा।
वो कुछ देर स्थिर रहा। फिर बिना निकाले मुझे करवट लिटाकर, मेरी टाँग उठाकर, पीछे से घुस गया। अब उसकी उंगली मेरी गांड के गोल छेद पर घूम रही थी। मैंने गांड में ऊँगली डालने का जरा भी विरोध नहीं किया। एनल सेक्स प्रारंभ करने से पहले उसने थोड़ा सा लुब्रिकेंट अपने लंड पर और मेरी गांड के छेद पर लगाया। धीरे-धीरे, उसका मोटा सुपारा मेरे गुदा द्वार को चीरता हुआ अंदर घुसा। पहले जलन हुई, फिर एक भारीपन, फिर वही मीठी पीड़ा। मेरी दोनों सुरंगें भरी हुई थीं – चूत में लंड और गांड में उंगली।
“तुम्हारी गांड… बहुत टाइट है… सहन करो थोड़ी देर…” उसने मेरे कान में फुसफुसाकर गर्म साँस छोड़ते हुए कहा।
मैंने पीछे की तरफ झुककर उसके होंठ चूस लिए। एनल सेक्स के दौरान उसने गांड में लंड अंदर बहार करने की गति पकड़ ली। दर्द ग़ायब हो गया। केवल आनंद रह गया। एक पाशविक संतुष्टि, मानो मैं कोई पालतू पशु हो गई हूँ। मेरी चूत खाली थी, इसलिए मैंने अपनी उंगलियाँ अंदर डालकर अपने आप को ही चोदना शुरू कर दिया। अब हम तीनों अंग एक ताल में चल रहे थे।
“अब… अब मैं बीज डाल रहा हूँ… तुम्हारे अंदर…” रुद्र चुदाई करते हुए चिल्लाया।
“हाँ… मेरी रसीली चूत में भर दे अपना गाढ़ा माल… सब मेरे अंदर झाड़ दे…” मैंने चीखते हुए कहा।
मगर उसने लंड बाहर निकाला, मुझे पलटी दी, और मेरे चेहरे के सामने ही हिलाने लगा। एक, दो, तीन धारें – मेरे बालों पर, मेरी नाक पर, मेरे होंठों पर। गर्म और लसदार। मैंने जीभ बाहर निकालकर बूंदें चाट लीं। नमकीन सा स्वाद। उसके अंडकोष अभी भी सिकुड़ रहे थे।
हम दोनों लथपथ लेट गए। कमरे में केवल हाँफने की आवाज़ें थीं। मेरी चूत से उसका वीर्य रिसकर चादर पर फैल गया था। पर मुझे कोई शर्म नहीं थी। बल्कि एक अदम्य तृप्ति का भाव था। मेरी उंगली फिर से उसके ढीले पड़ते लंड पर घूमने लगी।
उस रात हमने 4 बार और चुदाई की। हर बार कोई नया कोण, कोई नया तरीका। मेरी चूत, मेरी गांड, मेरा मुँह – सब उसी के नाम हो गए। सुबह होने तक मेरे कूल्हे जवाब दे चुके थे, लेकिन मन और माँग रहा था।
अगले दिन ऑफिस में, जब वो केबिन में था, मैं कॉफी लेकर गई। उसने दरवाज़ा बंद किया। मैंने अपनी स्कर्ट उठाकर दिखाया – कोई पैंटी नहीं। सिर्फ मेरी रसीली चूत, जो फिर से उसके लिए तैयार थी। उसने मुझे वहीं टेबल पर झुका दिया और खड़े-खड़े मेरे पीछे घुस गया। मेरी हथेली मेरे मुँह पर थी, ताकि आवाज़ बाहर न जाए।
हमारा ये सिलसिला 2 साल से चल रहा है। हर हफ्ते 3 रात, कभी-कभी पूरा वीकेंड। रुद्र मेरा बॉस भी है, और मेरा मालिक भी। मैं उसकी कॉलगर्ल नहीं, बल्कि उसकी रखेल हूँ। और मुझे ये स्वीकार करने में ज़रा भी हिचक नहीं है। जब वो मेरी गांड मारता है, तो मुझे लगता है कि मैं पूरी दुनिया की रानी हूँ। उसकी रंडी। उसकी वेश्या। उसकी अपनी चीज़।
प्रिय पाठकों, यह थी मेरी आपबीती थी की कैसे मुझे ऑफिस में मेरे बॉस ने चोदा था और कैसे मेरी चूत चाटने के बाद गांड भी मारी थी। ऐसी ही कुछ और घटनाएँ हैं, कुछ इससे भी गर्म। अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई, तो कमेंट करके ज़रूर बताइए। आप क्या चाहते हैं – बॉस के साथ अगली मुलाकात का विस्तार, या मेरी ज़िंदगी की पहली चुदाई का क़िस्सा? अपनी प्रतिक्रिया नीचे लिखिए। आपके एक शब्द से मुझे अगली कहानी लिखने का हौसला मिलता है।


