HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesमकान मालिक की बहू को छत पर रंडी बनाकर चोदा डॉगी स्टाइल में

मकान मालिक की बहू को छत पर रंडी बनाकर चोदा डॉगी स्टाइल में

फ्री में पढ़ें चूत चाटने के बाद मकान मालिक की बहू को छत पर रंडी बनाकर डॉगी स्टाइल में चोदा इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने 2 घंटे तक अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स कहानी (Antarvasna Hindi Sex Kahani – Makaan maalik ki bahu ko chhat par randi banaakar doggy style mein choda engineering student ne)

मेरा नाम विक्रम सिंह है और मैं 22 साल का कुंवारा लड़का हूं। मैं पंजाब के छोटे से गाँव से दिल्ली आया हूं इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने। पिछले 1 साल से मैं करोल बाग में एक पुराने मकान में किराए पर रह रहा हूं। मकान मालिक बिट्टू सिंह हैं, 60 साल के बुजुर्ग, लेकिन उनकी बहू, मेरी भाभी, वो तो सच्ची मादक माल है। भाभी का नाम गुरप्रीत कौर है।

मकान मालिक की बहू की उम्र 28 साल थी। उनका पति 3 साल से दुबई में नौकरी कर रहा था। भाभी का फिगर 36D-28-36 का था। उनके 36D के बोबे इतने भरे-पूरे थे कि हर बार नजर पड़ते ही मेरा लंड अपने आप तन जाता। उनकी गांड गोल और टाइट, चूतड़ ऐसे हिलते कि देखने वाला किसी भी मर्द का खून गरम हो जाए। आंखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी, और चेहरा ऐसा कि लगता कोई पंजाबी फिल्म की हीरोइन खड़ी है।

पहले दिन जब मैं मकान देखने गया था तो भाभी ने ही चाय पिलाई। उन्होंने सफेद सूती सलवार-कमीज पहनी थी। कमीज के ऊपर से उनके बोबे ऐसे उभरे हुए दिख रहे थे कि मैं नजरें हटा ही नहीं पाया। “क्या नाम है बेटा?” उन्होंने पूछा। उनकी आवाज में मिठास थी लेकिन आंखों में कुछ और। मैंने बताया तो वे मुस्कुराईं। “अच्छा, इंजीनियर बन रहे हो। पढ़ाई पर ध्यान रखना।” लेकिन उनकी नजर मेरी जांघों पर घूम गई थी। उस दिन से ही मेरे मन में एक ख्वाब बस गया – भाभी को चोदने का।

चूत चाटने के बाद मकान मालिक की बहू को छत पर रंडी बनाकर डॉगी स्टाइल में चोदा इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने 2 घंटे तक अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स कहानी Antarvasna Hindi Sex Kahani - Makaan maalik ki bahu ko chhat par randi banaakar doggy style mein choda engineering student ne
Antarvasna Hindi Sex Kahani – Makaan maalik ki bahu ko chhat par randi banaakar doggy style mein choda engineering student ne

दिन बीतते गए। मैं रोज क्लास से लौटता तो भाभी किचन में या छत पर कपड़े सुखाते नजर आतीं। कभी-कभी वे नाइट शर्ट में होतीं जो उनके घुटनों तक आती। अंदर से ब्रा नहीं पहनती थीं तो बोबे हिलते हुए दिखते। मैं छत पर जाता तो वे मुस्कुराकर पूछतीं, “पढ़ाई कैसी चल रही है विक्रम?” मैं जवाब देता लेकिन मन में सोचता – “भाभी, तुम्हारी यह टाइट चूत कितने दिनों से सूखी पड़ी है, पता है मुझे।” उनके पति की फोटो देखी थी – वह दुबई से कभी-कभी फोन पर बात करता था। भाभी का चेहरा उदास हो जाता। मैं समझ गया था कि यह औरत सेक्स की भूखी है।

एक दिन शाम को बिट्टू अंकल को बुखार हो गया। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। भाभी अकेली रह गईं। उनकी ननद अस्पताल में उनके साथ रहने चली गई। घर में सिर्फ मैं और भाभी। शाम को मैं छत पर गया। भाभी कपड़े सुखा रही थीं। हवा में उनकी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी। उनकी पतली कमर और गोल गांड साफ दिख रही थी।

मैंने हिम्मत जुटाई और पास गया। “भाभी, अंकल को क्या हुआ?” मैंने पूछा। वे मुड़ीं। उनकी आंखें नम थीं। “कुछ नहीं, बुखार है। कल तक ठीक हो जाएंगे।” मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा। “टेंशन मत लो भाभी। मैं हूं न।” वे मेरी आंखों में देखने लगीं। उस पल कुछ हुआ। उनकी सांसें तेज हो गईं।

रात को मैं बाथरूम में नहा रहा था। जानबूझकर तौलिया बाहर छोड़ दिया था। मैंने लंड को साबुन लगाकर खड़ा कर लिया। 7 इंच लंबा, मोटा लौड़ा पूरी तरह तन चुका था। मैंने आवाज लगाई, “भाभी, प्लीज मेरे कपड़े अंदर दे दो। मैं भूल गया।” भाभी आईं। दरवाजा थोड़ा खुला था। उन्होंने कपड़े रखे और नजरें नीचे कीं। मेरा खड़ा लंड मकान मालिक की बहू के सामने कोबरा सांप की तरह फुंफकार रहा था।

मेरा लंबा मोटा लंड देखकर उनकी आंखें फटी रह गईं। “विक्रम… ये…” मैंने एक्टिंग की और फिसलने का बहाना किया। दरवाजा पूरी तरह खुल गया। मैंने उनके हाथ से तौलिया लिया लेकिन जानबूझकर लंड ढकने में देर की। भाभी की नजर लंड पर अटक गई। “भाभी, देखो मत… लेकिन अगर देखना है तो देख लो,” मैंने धीरे से कहा।

वे लाल हो गईं लेकिन हटीं नहीं। मैंने आगे बढ़कर मकान मालिक की सेक्सी बहू का हाथ पकड़ा और लंड पर रख दिया। “महसूस करो भाभी मेरे मर्दाना लंड को। कितने दिनों से सूखा पड़ा है तुम्हारा भोसड़ा?” भाभी ने सांस रोकी लेकिन हाथ हटाया नहीं मेरे लंड पर से। उन्होंने धीरे से लंड को सहलाया। “विक्रम… ये गलत है… मैं शादीशुदा हूं…” लेकिन उनकी उंगलियां लंड के गोटों को दबा रही थीं। मैंने उन्हें किचन की तरफ खींच लिया। वहां कोई नहीं था।

मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया और होंठों पर किस कर दिया। भाभी पहले झटके में विरोध किया लेकिन फिर मेरी जीभ में अपनी जीभ मिला दी। उनकी सांसें गरम थीं। मैंने हाथ नीचे सरकाया और उनकी नाइट शर्ट ऊपर की। अंदर कोई ब्रा नहीं। 36D के बोबे पूरी तरह नंगे। मैंने एक बोबा मुंह में लिया और निप्पल चूसने लगा। “आह्ह्ह… विक्रम… चूसो… मजबूत चूसो…” भाभी ने कराहते हुए कहा।

मकान मालिक की बहू की चूत पर हल्के बाल थे। रसदार चूत पहले से गीली थी। मैंने मकान मालिक की बहू की टाइट चूत के अंदर उंगली डाली। टाइट भोसड़ा था। “भाभी, तुम्हारी चूत तो पूरी तरह भूखी है।” वे शर्म से मुंह छिपाने लगीं लेकिन गांड मेरी तरफ कर दी। मैंने घुटनों पर बैठकर मकान मालिक की नंगी बहू की चूत चाटनी शुरू की। चूत का रस मीठा था। मैंने जीभ अंदर डाली और क्लिटोरिस चूसने लगा। भाभी की टांगें कांप रही थीं। “हां… चाटो… मेरी फुद्दी चाटो… मैं रंडी बन जाऊंगी तुम्हारी…” उनकी आवाज कांप रही थी।

उसके बाद हम छत पर गए। रात का अंधेरा था। छत पर पुराना चटाई बिछा था। भाभी ने अपनी सलवार भी उतार दी। अब वे पूरी नंगी। मैंने भी कपड़े फेंक दिए। मेरा लंड खड़ा, लंबा और मोटा। भाभी ने झुककर लंड मुंह में लिया। “मुखमैथुन” उन्होंने कहा और पूरा लंड गले तक चूसने लगीं। उनकी लार लंड पर चमक रही थी। मैंने उनके बाल पकड़े और मुंह में चोदने लगा। “हां रंडी… चूस मेरे लंड को… जैसे कॉलगर्ल चूसती है।” वे और जोर से चूसने लगीं।

फिर मैंने मकान मालिक की बहू को चटाई पर लिटाया। पहले मिशनरी पोजिशन में लंड चूत पर रखा। धीरे से धक्का दिया। टाइट चूत थी। “आह्ह्ह… फाड़ दो… मेरी भोसड़ी फाड़ दो विक्रम…” मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया। चूत का रस लंड पर चिपचिपा रहा। मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू किया। हर धक्के पर उनके 36D के बोबे हिल रहे थे। मैं बोबे दबाता, निप्पल काटता। भाभी चीख रही थीं। “चोदो… तेज चोदो… मैं तुम्हारी वेश्या हूं आज…” 20 मिनट तक मैंने उन्हें चोदा। वे दो बार झड़ चुकी थीं। चूत का पानी चटाई पर बह रहा था।

फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में मोड़ा। उनकी गोल गांड मेरे सामने। मैंने गांड पर थप्पड़ मारा। “कितनी मादक गांड है तुम्हारी भाभी।” लंड गांड की फांक में लगाया और एक झटके में चूत में डाला। अब तेजी से चोद रहा था। उनके चूतड़ मेरे पेट से टकरा रहे थे। आवाज पूरे छत पर गूंज रही थी – फच… फच… फच… “हां… गांड मारो… मेरी गांड फाड़ दो…” भाभी चिल्ला रही थीं। मैंने उनकी कमर पकड़ी और लंड पूरा-पूरा अंदर-बाहर किया।

तीसरी सेक्स पोजिशन में मैंने मकान मालिक की बहू को ऊपर बैठाया। काउगर्ल स्टाइल में अपनी रंडी बनाकर चोदने के लिए। भाभी ने लंड चूत में डाला और खुद हिलने लगीं। उनके बोबे मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। मैंने दोनों बोबे मुंह में लिए और चूसने लगा। वे तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं। “मेरा लंड… पूरी तरह चूस रही हो तुम… रंडीबाज भाभी…” मैंने कहा। वे हंसतीं और और तेज हिलतीं। 15 मिनट बाद वे फिर झड़ गईं। अब मेरी बारी थी। मैंने उन्हें नीचे लिटाया और आखिरी राउंड में जोर-जोर से चोदा।

“भाभी… मैं अंदर निकाल रहा हूं…” “निकालो… मेरी चूत में भर दो अपना वीर्य…” मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे और झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया। चूत से सफेद माल बाहर निकल रहा था। हम दोनों थककर लेट गए। भाभी मेरे सीने पर सिर रखे मुस्कुरा रही थीं। “विक्रम… आज के बाद मैं तुम्हारी हूं। जब चाहो चोदना। मेरी भोसड़ी हमेशा तुम्हारे लंड के लिए खुली रहेगी।”

उस रात हम 2 घंटे तक छत पर ही रहे। बीच-बीच में फिर से हस्तमैथुन करवाया, ब्लोजॉब दिया, और एक बार गुदा सेक्स भी ट्राई किया। उनकी गांड का छेद टाइट था लेकिन लंड डालने के बाद वे कराह उठीं। “हां… गांड में भी चोदो… पूरा भर दो…” मैंने धीरे-धीरे गांड चोदी। एनल सेक्स करते करते अंत में फिर वीर्य गांड में ही छोड़ा।

सुबह होने से पहले हम नीचे आए। मकान मालिक की बहू ने मुझे बड़े प्यार से किस किया और कहा, “कल फिर छत पर मिलेंगे अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए।” मैं जान गया कि यह शुरुआत है। मेरी भाभी अब पूरी तरह मेरी रंडी बन चुकी थी। दिल्ली की उस छत ने हमारी जिंदगी बदल दी। हर शाम हम छत पर मिलते, चोदते, चुदवाते। मकान मालिक की रंडी बहू की चूत, गांड, मुंह – सब मेरे लंड के लिए तैयार रहता।

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