HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesघर लौटे पति ने जब छिनाल बीवी और बेटे को आपत्तिजनक हालत में देखा

घर लौटे पति ने जब छिनाल बीवी और बेटे को आपत्तिजनक हालत में देखा

अचानक घर लौटे पति ने जब छिनाल बीवी और बेटे को आपत्तिजनक हालत में देखा अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स कहानी – Achanak ghar laute pati ne jab chhinaal biwi aur bete ko aapattijanak haalat mein dekha antarvasna Hindi XXX sex kahani – When the husband suddenly returned home he saw his slutty wife and son in an objectionable condition. Erotic Hindi XXX sex story full of inner lust …

मैं उस दिन चंडीगढ़ से 2 दिन पहले ही वापस आ गया क्योंकि मेरी बिज़नेस मीटिंग कैंसिल हो गई थी। मैंने सोचा सुनीता को सरप्राइज़ दूं, उसके लिए उसकी पसंद की मिठाई और एक नई साड़ी लेकर घर पहुंचा। दरवाज़ा अंदर से बंद नहीं था, हल्का-सा खुला था और भीतर से अजीब-सी दबी-दबी आवाज़ें आ रही थीं। मेरे कदम अपने आप ठिठक गए, दिल ज़ोर से धड़कने लगा और एक अनजाना डर मुझ पर हावी होने लगा।

मैंने धीरे-से दरवाज़ा धकेला और बेडरूम की तरफ बढ़ा, जहां से बत्ती की हल्की रोशनी बाहर झांक रही थी। दरवाज़े की दरार से जो नज़ारा मैंने देखा, मेरी रूह कांप गई। हमारे बिस्तर पर मेरी 40 साल की छिनाल बीवी सुनीता, सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में, मेरे अपने 19 साल के बेटे रोहित को अपनी बाहों में लपेटे हुए थी। रोहित का चेहरा उसकी मां के 36D के चुचों के बीच दबा था और उसके हाथ सुनीता के खुले हुए बोबों को ज़ोर-ज़ोर से मसल रहे थे।

अचानक घर लौटे पति ने जब छिनाल बीवी और बेटे को आपत्तिजनक हालत में देखा अन्तर्वासना हिंदी XXX सेक्स कहानी

अचानक घर लौटे पति ने जब छिनाल बीवी और बेटे को आपत्तिजनक हालत में देखा XXX सेक्स कहानी Achanak ghar laute pati ne jab chhinaal biwi aur bete ko aapattijanak haalat mein dekha antarvasna Hindi XXX sex kahani
Achanak ghar laute pati ne jab chhinaal biwi aur bete ko aapattijanak haalat mein dekha antarvasna Hindi XXX sex kahani

मेरी आंखें फटी-की-फटी रह गईं, दिमाग ने ये मानने से इनकार कर दिया जो कुछ सामने हो रहा था। मेरी छिनाल बीवी सुनीता, जिसे मैं पवित्र देवी का दर्जा देता था, वो रोहित के कान में कुछ ऐसा फुसफुसा रही थी जिसे सुनकर मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। वो बोली, “चूस मेरी दुधिया चूचियां, पूरा दूध निचोड़ ले, मेरे शेर बेटे।” रोहित ने उसके निप्पल को दांतों से हल्का-सा काटा और उंगलियों से दूसरे बोबे को मरोड़ दिया, जिससे सुनीता की गहरी सिसकारी निकल गई। मैं स्तब्ध खड़ा था, मेरी मुट्ठियां भिंच गईं पर पैरों ने वहां से भागने का नाम नहीं लिया।

भीतर तरह-तरह के ख्याल आंधी की तरह घूम रहे थे – गुस्सा, धोखा, अपमान और एक बेबस उत्तेजना जिसने मेरी सोच को पूरी तरह बेकाबू कर दिया। मेरी नज़रों के सामने सुनीता ने रोहित की पैंट की चैन खोली और अंदर से उसका लंड बाहर खींच लिया जो पूरी तरह खड़ा और सख्त था। मेरे बेटे का मोटा लौड़ा देख मैं अंदर-ही-अंदर जल-भुन गया, क्योंकि पिछले 5 सालों में मैं कभी भी इतनी तेज़ी से खड़ा नहीं हो पाया था। सुनीता ने लंड को पकड़कर धीरे-धीरे मलना शुरू किया और बोली, “आज तेरा हैण्डजॉब मां देगी, अपनी रसदार चूत में लेने से पहले।”

मैं वहीं जड़ होकर खड़ा सब देखता रहा, मानो कोई कामुक ब्लू फिल्म का लाइव सीन हो और मैं कोई छुपा हुआ दर्शक। सुनीता ने झुककर रोहित के लंड के सिरे पर जीभ लगाई, उसका चिपचिपा माल पहले ही टपकना शुरू हो चुका था। उसने लंड की गर्मी और नमकीन स्वाद को होठों से साफ किया और फिर पूरा लंड गले तक ले जाकर ज़ोर से चूसने लगी। मेरी पत्नी, जिसने कभी मेरे साथ सिर्फ 2 बार ब्लोजॉब किया था, वो बेटे का मुखमैथुन इस तरह कर रही थी जैसे पूरी ज़िंदगी बस यही सीखा हो। उसकी लार लंड की रगों पर बह रही थी और मेरे बेटे का अंडकोष उसकी ठुड्डी से टकरा रहा था।

रोहित ने अपनी छिनाल माँ का सिर पकड़कर अपने लंड पर ज़ोर से ऊपर-नीचे करवाया और कराहते हुए बोला, “ओ छिनाल मम्मी, तेरा मुंह तो पूरी रांड की तरह चूसता है लंड।” ये शब्द सुनकर मेरे तनाव में एक अजीब-सी शर्मनाक हलचल हुई, मेरी अपनी पैंट के भीतर लंड खड़ा होने की कोशिश करने लगा। मैं खुद से नफरत करता रहा पर नज़रें हटा पाना नामुमकिन था। सुनीता ने अपना पेटीकोट ऊपर सरका लिया और मैंने उसकी वो झांट के बालों वाली चूत देखी जो पिछले 1 साल से मैंने नहीं देखी थी। उसकी चूत पूरी तरह गीली और सूजी हुई लग रही थी, मानो अंदर से बस चुदाई के लिए तरस रही हो।

उस छिनाल माँ ने हस्तमैथुन करने के लिए खुद अपनी दो उंगलियां चूत के अंदर डालीं और गोल-गोल घुमाकर चूत का रस बाहर निकाला जो रोशनी में चमक रहा था। फिर उसने वही उंगली बेटे के होठों पर लगाई और रोहित ने चाट ली। मेरा सीना ज़ोर से उठ-गिर रहा था, पसीना माथे पर आ गया और दिमाग में एक ही बात गूंज रही थी, “क्या मेरी बीवी वाकई इतनी छिनाल निकली है?” पर साथ ही ये सोचकर एक झुनझुनी भी दौड़ गई कि शायद इस सब में मेरा ही कसूर है। मैं पिछले कई सालों से उसे शारीरिक सुख नहीं दे पाया था, मेरा लंड हर बार बीच में ही जवाब दे जाता था और उसकी चूत की आग बुझाने के बजाय मैं मुंह फेरकर सो जाता था।

छिनाल सुनीता ने अचानक बेड पर चारों हाथ-पैरों के बल गांड ऊपर उठाई और अपना चूतड़ फैलाकर बोली, “चोद मेरी प्यासी चूत, डाल अंदर अपना मोटा लौड़ा।” रोहित उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया, अपना लंड चूत की दरार पर रगड़ने लगा और फिर एक जोरदार झटके में पूरा अंदर तक धकेल दिया। सुनीता की ज़ोर की चीख निकली, “अह्ह्ह… चोद डाल साली रंडी को, भर दे अपनी चूत का भोसड़ा।” ये सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई, मेरी पत्नी के मुंह से ऐसी गंदी गालियां कभी नहीं सुनी थीं। वो बेटे के हर धक्के पर अपने कुल्हे पीछे मार रही थी और उसके 36D के भारी भरकम चुचे हवा में आजाद झूल रहे थे।

मैंने दरवाज़े के पीछे से ही अपनी पैंट का ज़िप खोल दिया और दबा हुआ लंड बाहर निकालकर धीरे-धीरे हिलाने लगा। ये गलत था, घिनौना था, पर मेरा शरीर मेरी नैतिकता को पूरी तरह रौंद चुका था। रोहित ने एक हाथ से सुनीता की गांड पकड़ी और दूसरे से उसकी बोबों की मालिश करते हुए पीछे से धक्के पर धक्का दिए। उसकी अंड की थैली हर बार सुनीता की चूत के झांट से टकराकर गीली आवाज़ कर रही थी। मेरा हाथ अपने आप तेज़ी से चल रहा था और मैं महसूस कर रहा था कि सालों बाद मेरा लंड इतनी देर तक सख्त है।

सुनीता अचानक पलटी और उसने रोहित को नीचे लिटाकर काउगर्ल पोज़ीशन में अपनी चूत उसके लंड पर बैठा दी। अब उसके बोबे सीधे उछल रहे थे और वो पागलों की तरह ऊपर-नीचे कूद रही थी। उसकी आंखों में एक वहशी चमक थी, बाल बिखरे हुए और माथे पर पसीने की बूंदें। वो लगातार चिल्ला रही थी, “हां बेटा, चोद मां की फुद्दी, रगड़ अपना तना हुआ लंड मेरी टाइट चूत में।” मैंने देखा कैसे उसने बेटे का सिर अपनी छाती से दबा लिया और उसकी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। उस पल मुझे एहसास हुआ कि इस औरत की ये ज़रूरतें मैंने कितनी बुरी तरह नज़रअंदाज़ की थीं।

मेरा इंडियन देसी लंड अब पूरी तरह से खड़ा था और पिछले 45 मिनट से मैं अपनी पत्नी और बेटे को चुदाई करता देख हथेली पर माल टपकाने वाला था। भीतर ही भीतर एक ग्लानि घोलने वाली जलन भी थी कि मेरा अपना बेटा मेरी बीवी को वो मज़ा दे रहा है जो मैं कभी नहीं दे पाया। वो दोनों एक-दूसरे के शरीर से पूरी तरह लिपटे, पसीने से भीगे, कमरे की हवा में सेक्स की कच्ची गंध फैल चुकी थी। मैंने सुनीता की चूत से उसके चिपचिपे माल को निकलते देखा, जो रोहित के लंड पर सफेद झाग की तरह जमा हो रहा था। वो बेटे का वीर्य अपनी चूत के भीतर लेना चाहती थी और ज़ोर-ज़ोर से अपनी चूत की दीवारों को भींच रही थी।

आखिरकार मेरे बेटे रोहित ने एक ज़ोरदार चीख के साथ अपना लंड बाहर खींचा और सुनीता के बोबों पर गाढ़ा, खौलता हुआ वीर्य छोड़ दिया। माल की 6-7 धारें उसके निप्पल से बहते हुए नाभि तक पहुंचीं और सुनीता ने खुश होकर अपनी उंगलियों से माल चाट लिया। मैं भी लगभग उसी वक़्त अपने हाथ में निकल गया, शर्म से पानी-पानी हो गया। ये सोचकर कि मैंने छुपकर अपनी पत्नी और बेटे का शारीरिक संबंध देखते हुए हस्तमैथुन किया, अपनी ही नज़रों में गिर गया। पर अब और छुपना मुमकिन नहीं था, मैंने फैसला किया कि इस छिनालपन का सामना करूंगा।

मैंने दरवाज़ा ज़ोर से खोला और दोनों के सामने जाकर खड़ा हो गया। सुनीता की चीख निकल गई और रोहित शर्म से पानी की तरह बहकर बेड के कोने में सिमट गया। सुनीता ने जल्दी से पेटीकोट नीचे खींचा और घबराकर बोली, “सुनो… मैं… ये जो तुमने देखा, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो।” मेरी आवाज़ में कंपन था पर आंखों में आंसू नहीं थे, मैंने कहा, “कब से चल रहा है ये रंडीबाज़ी, सुनीता?” वो सिसकने लगी, हाथ जोड़कर बताया कि पिछले 6 महीनों से, जब से रोहित कॉलेज से वापस आया और उसकी उदासी को मैंने अनदेखा कर दिया। उसने कबूल किया कि एक रात नशे में दोनों के बीच हदें टूट गईं और फिर उसकी भूखी रसदार चूत को रोहित के जवान लंड में पूरा संतुष्टि मिलने लगी।

मेरे अंदर गुस्से का ज्वालामुखी फूटने को था, पर सुनीता मेरे पैरों में गिर पड़ी और रोते हुए बोली, “तुमने मुझे सालों से अकेला छोड़ दिया, मेरी चूत में आग लगी रहती थी और तुम हर बार मुंह फेर जाते थे। मैं कमज़ोर पड़ गई, मगर तुम्हें छोड़कर नहीं जा सकती थी।” उसके शब्द सच्चाई की तरह मेरे सीने में धंस गए। रोहित भी फूट-फूटकर रोने लगा, “पापा, मुझे माफ़ कर दो, मैं कमज़ोर निकला, मां बनकर भी वो इतनी कामुक औरत की तरह पेश आती थी कि मैं खुद को रोक नहीं पाया।” उस पूरे मंज़र ने मेरे अंदर के आदमी को तोड़ दिया और मैं वहीं सिर पकड़कर बैठ गया।

देर तक सन्नाटा रहा, बस सिसकियों की आवाज़ गूंजती रही और उस खामोशी में मेरे भीतर का एक कोना जाग उठा जो सच्चाई मानने को तैयार था। मैंने अपनी कमज़ोरी स्वीकार की, ये कि मैं उसे वो नहीं दे पाया जो एक बीवी को उसके पति से मिलना चाहिए। आज मैंने जो उसके मुख से भोसड़ा, फुद्दी, रांड जैसी गालियां सुनी थीं, वो असल में मेरी उपेक्षा की देन थीं। उसकी बगावत ने उसे एक ऐसी वेश्या बनने पर मजबूर कर दिया था जिसका धंधा सिर्फ शारीरिक भूख मिटाना था, और ग्राहक था हमारा अपना खून।

सुनीता ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और भीगी पलकों से मुझे देखा, उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी बोल्डनेस थी, “क्या तुम सच में मुझसे घृणा करते हो, या चाहते हो कि मैं तुम्हारे सामने फिर से वो सब करूं?” मैं अवाक् रह गया, उसने मेरी हथेली अपने गीले बोबे पर रख दी और गर्म सांस लेते हुए बोली, “अगर माफ़ नहीं कर सकते तो सज़ा दो, पर एक बार मेरी चूत के अंदर वो आग ठंडी करो जो रोहित के लंड ने और भड़का दी है।” उसकी उंगलियां मेरे ढीले पड़ चुके लंड पर रेंगने लगीं और मैंने महसूस किया कि मेरी नसें फिर से जाग रही हैं। मैंने विरोध किया, पर मेरी सांसें तेज़ हो चुकी थीं और दिमाग के सारे तर्क हार चुके थे।

सुनीता ने मुझे बेड पर खींच लिया और अपना ब्लाउज़ उतार फेंका, उस रंडी के बिलकुल नंगे स्तन मेरी आंखों के सामने थे जो अभी-भी माल की बूंदों से चिपचिपे थे। उसने मेरा सिर अपनी ओर खींचकर बोली, “चूस मेरे निप्पल, देख तेरी बीवी की चूचियों का दूध तेरे लिए भी उतना ही मीठा है।” मैंने बेबसी में उसके स्तन मुंह में ले लिए और उसके हाथ ने मेरा लंड पूरे ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया। रोहित कोने में खड़ा सब देख रहा था, शायद पहली बार उलझन में कि भागे या रुके। सुनीता ने बेटे को इशारा किया, “आ, तेरे पापा को दिखा कि हम दोनों मिलकर मेरी भूख कैसे मिटाते हैं, अब कोई छुपाव नहीं।”

रोहित झिझकता हुआ पास आया और मुझे देखता रहा, मैंने उसकी तरफ आंख उठाकर देखा तो उसमें एक अजीब-सी चुनौती और डर दोनों थे। सुनीता ने मेरे कान में फुसफुसाया, “अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो तो मुझे हर उस चीज़ की इजाज़त दो जो मेरी चूत को रुलाना चाहती है।” फिर उसने रोहित का लंड पकड़ा और मेरे होठों के सामने लाकर बोली, “चख अपने बेटे का स्वाद, फिर कभी ईर्ष्या नहीं होगी।” मैं चौंक गया, पर मेरी देह कांप रही थी, और आखिरकार मैंने धीरे-से अपनी जीभ मेरे बेटे के लंड के सिरे पर लगा दी। नमकीन, तीखा स्वाद और सुनीता की चूत का रस एक साथ मेरी जीभ पर फूट पड़ा, मानो सारी वर्जनाएं ध्वस्त हो गईं।

उसके बाद जो हुआ वो चुदाई का एक ऐसा तूफान था जिसमें हम तीनों सेक्स करते करते एक-दूसरे में गुम हो गए। मैं पीछे से मेरी छिनाल पत्नी सुनीता की गीली चूत में अपना खड़ा लंड डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा जबकि वो हमारे प्यारे बेटे का ब्लोजॉब (मुखमैथुन) कर रही थी। हर धक्के पर सुनीता का भोसड़ा मेरे लंड को निगलता और छोड़ता, उसकी गांड की लय पर मैं पागल हुआ जा रहा था। मैंने उसकी गांड के छेद में अपनी उंगली डाल दी और वो बेतहाशा चीखी, “हां, वहीं डाल, आज तीनों छेद तुम दोनों के नाम।” रोहित ने मेरी आंखों में आंखें डालीं और मेरे साथ मिलकर अपनी मां के जिस्म पर राज किया, हम दोनों का लंड अब एक-दूसरे के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि एक टीम बन चुका था।

हम बाप बेटे ने सुनीता की चूत में बारी-बारी से लंड डाला, एक निकलता तो दूसरा अंदर जाता, उसका चूत का भोसड़ा पूरी तरह फैल चुका था और माल की नदी बह रही थी। आखिर में मैंने सुनीता की गांड में अपना लंड डालने की हिम्मत जुटाई और धीरे-धीरे गुदा सेक्स का आनंद उठाया, जबकि रोहित ने उसकी चूत भरी रखी। सुनीता ज़ोर-ज़ोर से हांफ रही थी, “मेरी गांड फाड़ दो, मेरी चूत मसल दो, मैं रंडी हूं तुम दोनों की।” उसकी आवाज़ कमरे में गूंजी और हम तीनों एक साथ झड़ गए, माल से सनी चादर और सुनीता का शरीर एक पेंटिंग की तरह लग रहा था। थकान और एक अजीब-सी तृप्ति में हम ढेर हो गए, सांसें एक लय में चल रही थीं।

अब जब सब शांत हुआ, तो मैंने मेरी छिनाल पत्नी सुनीता और हमारे प्यारे बेटे रोहित दोनों को अपने सीने से लगा लिया और एक नई स्वीकारोक्ति के साथ जीने का फैसला किया। हम तीनों ने मिलकर एक ऐसा रिश्ता बुन लिया जो इस जालिम समाज की नज़र में गलत है, पर हमारे भीतर के अकेलेपन को मिटा दिया। इस कहानी को पढ़कर आपको जो भी महसूस हुआ, मैं जानना चाहूंगा कि क्या मेरी इस कमज़ोरी और बाद की स्वीकारोक्ति ने आपको भीतर तक हिलाया? कृपया अपनी बेबाक राय, अपनी कामुक भावनाएं और सुझाव कॉमेंट में ज़रूर साझा करें, क्योंकि आपकी सच्ची सोच ही मेरी अगली कहानी की ताकत बन सकती है।

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