HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesगांड में उंगली से शुरू करके गुदा सेक्स तक का सफर

गांड में उंगली से शुरू करके गुदा सेक्स तक का सफर

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पहली बार जब प्रिया ने मुझे फोन करके बताया कि उसकी शादी टूट गई, तो मेरे सीने में कुछ अजीब-सी हलचल हुई। हम बचपन के दोस्त थे, और मैं उससे हमेशा प्यार करता था, लेकिन यह बात मैंने कभी अपने मुँह से नहीं निकलने दी। उसने रोते हुए कहा, “आकाश, मैं अकेली हूँ। क्या मैं तुम्हारे पास आ सकती हूँ?” मैंने बिना सोचे हाँ कह दी।

वह शाम थी जब मुंबई की बारिश ने पूरे शहर को भिगो दिया था। मेरा वसई का फ्लैट एकदम सुनसान था, बस खिड़की से आती बूँदों की टपटप और मेरे दिल की धड़कनें एक-दूसरे से मिल रही थीं। मैं 29 साल का था, एक आम आईटी बंदा, जिसके जीवन में औरत का स्पर्श बहुत कम आया था। लेकिन प्रिया, वो तो मेरे सपनों की रानी थी – लम्बे बाल, गोरा रंग, और एक ऐसी मासूमियत जो मुझे दीवाना बना देती।

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प्रिया जब मेरे दरवाजे पर आई, तो वो पूरी तरह भीगी हुई थी। सफेद कुर्ती उसके 36D के बोबों से चिपक कर उनकी पूरी बनावट दिखा रही थी, और उसकी लाल सलवार उसके भरे हुए कुल्हों पर जैसे लिपट गई थी। उसकी आँखें सूजी हुई थीं और चेहरा उदास। मैंने उसे अंदर बुलाया, तो उसने मुझे कस कर गले लगा लिया। उसके चुचे मेरी छाती से दब गए, और मुझे तुरंत अपने लंड में एक गर्म सी सिहरन महसूस हुई।

“चल, पहले कपड़े बदल। मेरी शर्ट पहन ले,” मैंने खुद को संयत करते हुए कहा, लेकिन मेरी नज़रें बार-बार उसकी पारदर्शी कमीज़ के पीछे उभरे उन गोल-मटोल स्तनों पर जा रही थीं। मैंने अपने आप को बेवकूफ कहा – लड़की का दिल टूटा हुआ है और मुझे सिर्फ उसके बोबे दिख रहे हैं। लेकिन क्या करूँ, सालों की चाहत थी।

प्रिया ने मेरी नीली शर्ट पहन ली, जो उसके घुटनों तक आ रही थी। उसने अपने गीले बालों को ऊपर बाँधा, और फिर मेरे कंधे पर सिर रख कर बैठ गई। मैंने उसके लिए अदरक वाली चाय बनाई और 2 पैग व्हिस्की अपने लिए डाली। वो धीरे-धीरे सब बता रही थी – कैसे रोहित ने उसे शादी के 15 दिन पहले छोड़ दिया। उसकी आवाज़ काँप रही थी और मेरी उँगलियाँ उसकी पीठ पर धीरे-धीरे घिस रही थीं।

“तुझे पता है, आकाश, मैंने सोचा था शादी के बाद मैं खुश रहूँगी। पर मुझे तो कभी सच्चा प्यार मिला ही नहीं,” उसने सिसकते हुए कहा। मेरी साँस तेज़ हो रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और उसके गाल पर हाथ रखते हुए कहा, “प्यार तो तुझे मुझसे भी मिल सकता है, प्रिया। बस तुझे नज़र उठाकर देखना होगा।”

उसने मेरी तरफ देखा, उसकी पलकों पर पानी की बूँदें थीं। फिर उसने बिना कुछ कहे मेरे होंठ चूम लिए। पहले तो मैं सन्न रह गया, लेकिन फिर मेरे हाथों ने उसकी कमर को जकड़ लिया। हम दोनो उस पुराने सोफे पर आधे लेटे आधे बैठे, एक दूसरे को चूम रहे थे। उसके मुँह से रेड वाइन की हल्की महक आ रही थी, और मेरी जीभ उसकी जीभ से लड़ रही थी। मेरा लंड अब पूरी तरह से तना हुआ खड़ा लंड बन चुका था और मेरी जींस में पिस रहा था।

“आकाश, क्या हम ये ठीक कर रहे हैं?” उसने धीमे स्वर में पूछा, लेकिन उसके हाथ मेरी कमीज़ के बटन खोल रहे थे। “बिल्कुल ठीक, जान। बहुत दिनों से सोच रहा था तेरे बारे में,” मैंने कहते हुए उसे गोद में उठा लिया और बिस्तरे पर ले गया।

बेडरूम में धीमी पीली रोशनी थी। मैंने प्रिया को चित्त लिटाया और उसकी शर्ट धीरे-धीरे ऊपर सरकाई। उसके मटमैले उजले पेट के ऊपर उभरे हुए बोबे मानो मुझे पुकार रहे थे। मैंने उसकी गुलाबी निप्पलों को सहलाया, तो वो चूँ-चूँ करने लगी। “तेरे चुचे बहुत सुन्दर हैं, प्रिया। इन्हें चूसूं?” मैंने उसके कान में फुसफुसाकर कहा। उसने अपने होंठ भींचते हुए हाँ में सिर हिलाया।

मैंने झुककर उसकी बाईं चूची का निप्पल मुँह में ले लिया। मेरी जीभ उस तने हुए टोटे पर गोल-गोल घूम रही थी, और मेरा दूसरा हाथ उसके दाहिने बोबे को मसल रहा था। प्रिया की साँसें भारी होती जा रही थीं, और उसकी टाँगों के बीच से एक महक उठ रही थी – वो चूत के रस की भीनी और अमोनिया जैसी तीखी खुशबू, जो सीधे मेरे दिमाग में चढ़ रही थी। मैंने उसकी जाँघें खोलीं और उसकी भीगी हुई चड्डी पकड़ ली।

“शर्मा मत, मुझे तेरी चूत का रस पीना है,” मैंने एक कामुक औरत की तरह उसे देखते हुए कहा। फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी टाँगों को मोड़कर ऊपर कर दिया। उसकी चूत का नज़ारा अद्भुत था – उसकी झांट के बाल काले और घुँघराले थे, और उनके नीचे चूत के होंठ गुलाबी और रस से चिपचिपे हो रहे थे। वो एकदम बालों वाली चूत थी, जैसी मुझे सबसे ज़्यादा पसन्द थी। मैंने अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच दबा दिया और अपनी जीभ उसके चूतड़ की दरार से लेकर उसकी फुद्दी की फांक तक खींची। प्रिया ज़ोर से काँपी और उसने मेरे बाल पकड़ लिए।

“आह्ह्ह… आकाश… ये क्या कर रहा है… उँगलियाँ… मत कर इतना… मैं सह नहीं पाऊँगी,” वो कराह रही थी, लेकिन उसकी कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी। मैंने अपनी जीभ सीधे उसकी भोसड़ी के मुहाने पर लगाई और गोल-गोल चाटने लगा। उसका स्वाद थोड़ा नमकीन और चिपचिपा था, और हर बार जब मेरी जीभ उसकी चूत की भीतरी दीवार पर पड़ती, तो मुझे लगता मानो गर्म शहद टपक रहा हो। मैंने अपनी 2 उँगलियाँ उसके मुँह में डालीं ताकि गीली हों, फिर धीरे-धीरे उसकी चूत के छेद में डाल दीं (Wet Pussy Fingering)। प्रिया ने ज़ोर से सिसकारी भरी।

“अन्दर… बहुत टाइट चूत है तेरी… मोटा लौड़ा ले पाएगी क्या?” मैंने गन्दी बात करते हुए पूछा। मेरी उँगलियाँ उसकी गर्म और तंग चूत में अन्दर-बाहर हो रही थीं, और उसका चूत का रस मेरे हाथ की मुट्ठी तक बह रहा था। प्रिया के चेहरे पर एक बेचैन सी मुस्कुराहट थी और उसके होंठ सूजे हुए लग रहे थे। “अब गांड में उंगली करनी है तेरी। सुना है औरत बहुत चिल्लाती है उससे,” मैंने उसके कान में फिर फुसफुसाया।

प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और डर और उत्तेजना के मिले-जुले भाव से मुझे देखा। “गांड में? नहीं, आकाश, वो तो बहुत गन्दी जगह है… और दर्द होगा,” वो बोली। मैंने अपनी सनी हुई उँगलियाँ उसके गाल पर फेरीं और कहा, “बिल्कुल नहीं, जान। मैं सही से करूँगा। ज़रा हमारे पास पड़ी उस नारियल तेल की शीशी दे…” मैंने उसकी टाँगें और फैला दीं और उसके कुल्हों के नीचे 1 तकिया रख दिया ताकि उसकी गांड ऊपर उठी रहे।

मैंने सबसे पहले उसकी गांड के छेद के आस-पास अच्छी तरह जीभ से गीला किया। उसके बाद तेल से अपनी बीच वाली उँगली को चिकना किया और बड़े धीरे-धीरे उसकी गांड के ऊपर मालिश करने लगा। प्रिया की साँस रुक-रुक कर चल रही थी। “भरोसा रख, रंडी… मैं तुझे बहुत मज़ा दूँगा,” मैंने प्यार से गाली देते हुए कहा। यह सुनकर वो हल्का सी मुस्कुराई।

गांड का छेद बहुत कसा हुआ था, बिल्कुल गुलाबी और झुर्रीदार। मैंने जब पहली बार उँगली की नोक अन्दर डाली, तो प्रिया ने ज़ोर से मेरा हाथ दबोच लिया। “आह! रुक… बहुत कसा हुआ है,” वो कराही। मैंने इशारे से उसे चुप रहने को कहा और अपनी उँगली अन्दर ही रखी, बिना हिलाए। कुछ सेकंड बाद जब उसकी पकड़ ढीली हुई, मैंने उँगली को 1 इंच और अन्दर सरका दिया। मेरी उँगली पर उसकी गांड की भीतरी गर्मी और चिपचिपापन बिल्कुल नए अहसास से भरा था।

“अब थोड़ी देर में तू खुद बोलेगी मोटा लंड डालने को,” मैंने धीरे से उँगली को घुमाना शुरू कर दिया। मेरी उँगली उसके गुदा मार्ग में गोलाई में घूम रही थी, और मैं अपने दूसरे हाथ से उसकी चूत पर भी हल्की थपकी दे रहा था। यह एक अजीब सी लय थी – चूत पर हाथ की चपत, गांड में उँगली का गोल चक्कर। प्रिया अब ज़ोर-ज़ोर से साँस ले रही थी और उसके मुँह से अनायास ही गन्दी बातें निकल रही थीं।

“हाँ… अब अच्छा लग रहा है… ये भोसड़ी बहुत प्यासी है… और गांड…. उँगली धीरे-धीरे हिला… उसी जगह…” वो बुदबुदा रही थी। मैंने अपनी 1 उँगली को 2 उँगलियों में बदलने का फैसला किया। दोबारा तेल लगाकर, बहुत आहिस्ता से मैंने 2 उँगलियाँ उसकी गांड के छेद में डाल दीं। इस बार प्रिया ने अपनी कमर ऐंठी और एक दबी हुई चीख मारी। पर कुछ ही सेकंड में वो अपनी कमर को मेरी उँगलियों पर ही धक्का देने लगी।

“अब तू खुद गांड मरवा रही है, छिनाल।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा और अपनी दोनों उँगलियों को अन्दर-बाहर करने की रफ्तार बढ़ा दी। प्रिया के निप्पल पत्थर की तरह सख्त हो गए थे, और उसकी चूत से रस की एक पतली धार नीचे चादर पर बह रही थी। वो अपनी उँगलियाँ अपने मुँह में डालकर चूस रही थी, और मेरी तरफ वासना से भरी लाल आँखों से देख रही थी। मेरा लंड अब दर्द की हद तक फूल गया था और लंड के गोटे भारी हो रहे थे।

“बहुत हुआ, अब अपना मोटा लौड़ा अन्दर डालो ना,” प्रिया ने खुद ही अनुरोध किया। मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी गांड से निकालीं और उसी हाथ से अपने लंड पर तेल लगाया। मैंने प्रिया को घोड़ी बनने के लिए कहा। वो हाथों और घुटनों के बल हो गई और अपनी बड़ी-सी गांड मेरी तरफ उठा दी। उसके चूतड़ एकदम भरे हुए और चिकने नज़र आ रहे थे, और बीच में अभी भी तेल से चमकती उसकी गांड का छेद मानो मुझे बुला रहा था।

मैंने अपने लंड के अगले हिस्से को उसकी चूत के मुहाने पर रगड़ा, जिससे वो और भी चिकना हो गया। फिर एक ही झटके में पूरा लम्बा लंड उसकी रसदार चूत में घुसा दिया। प्रिया की चीख और मेरी कराह एक साथ निकली। उसकी चूत अंदर से गर्म, गीली और मखमली थी, और मेरे लंड को इतना कस कर पकड़ रही थी कि मुझे लगा अभी ही वीर्य निकल जाएगा। मैंने कुछ पल रुक कर जल्दीबाजी रोकी, फिर धीरे-धीरे लम्बे स्ट्रोक मारने शुरू कर दिए।

“चोदो मुझे… रंडी बना के चोदो…” प्रिया ज़ोर-ज़ोर से बोल रही थी। बिस्तरे की खट-खट उसकी आवाज़ के साथ मिल कर पूरे फ्लैट में गूँज रही थी। मैंने उसके बालों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी पीठ पर झुककर उसके बोबे मसलने लगा। उसकी पीठ का पसीना मेरी छाती से घिस रहा था, और हमारे शरीरों की वो सोंधी सी गन्ध मुझे और भी पागल किए दे रही थी।

सेक्स करने के दौरान लगभग 5 मिनट तक चूत मारने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और नंगी प्रिया को चित्त कर दिया। इस बार मैंने उसकी टाँगें अपने कन्धों पर रखीं और अपना लंड खड़ा अन्दर डालने से पहले उसकी गांड के छेद को फिर से चिकना किया। “अब गांड में डालूँगा तेरी,” मैंने घोषणा की। प्रिया ने अपने होंठ काटे और हाँ में सिर हिलाया।

एनल सेक्स करने के लिए मैंने अपने लंड का ऊपरी सिरा उसकी फूली हुई गांड के छेद पर टिकाया और अत्यंत धीमी गति से धक्का दिया। प्रिया के मुँह से एक भयंकर सिसकारी निकली और उसने मेरी बाँहें ज़ोर से पकड़ लीं। “रुक… 2 सेकंड….” उसने कराहा। मैं रुक गया, बस सिरा अन्दर डालकर। फिर जब उसकी साँसें सामान्य हुईं, मैंने थोड़ा और धक्का दिया, और देखते ही देखते मेरा पूरा 7 इंच का तना हुआ लंड उसकी गांड में गड़ गया।

मेरे लिए वो अनुभव किसी स्वर्ग से कम नहीं था। प्रिया की गांड मेरी चूत से भी ज़्यादा गर्म और तंग थी, और हर बार जब मैं बाहर खींचता, तो मुझे उसकी भीतरी दीवारों का खिंचाव साफ़ महसूस होता। गुदा सेक्स का वो जादू मैं पहली बार झेल रहा था, और प्रिया भी। अब वो दर्द के साथ-साथ अद्भुत आनन्द में डूबी जा रही थी, और अपनी चूत पर खुद ही उँगलियाँ चला रही थी।

मैंने उसकी चूतड़ों को पूरी ताकत से मसलते हुए गांड मारना जारी रखा। हर बार जब मैं पूरा लंड बाहर निकालता, उसकी गांड का छेद लाल-गुलाबी और खुला हुआ नज़र आता, और फिर मैं उसे वापस ठूँस देता। प्रिया की आँखें पीछे को मुड़ गईं थीं और उसके मुँह से लगातार अपशब्दों और प्यार की बौछार हो रही थी।

“हाँ… मुझे अपनी रंडी समझ कर चोद… मेरी गांड फाड़ दे… मेरा लंड प्यासा है तेरी गांड के लिए…” मैं भी चिल्ला-चिल्ला कर बक रहा था। आखिरकार, लगभग 10 मिनट की तेज़ गांड मारने के बाद, मुझे लगा कि मेरे अंडकोष सिकुड़ रहे हैं और मेरे लंड के गोटे में बहुत ज़ोर पड़ रहा है। “प्रिया… मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ गिराऊँ… तेरे चेहरे पर या मुँह में…” मैंने पूछा।

“मेरे मुँह में डाल दे, रंडीबाज… मुझे तेरा चिपचिपा माल पीना है,” उसने जवाब दिया। मैंने अपना लंड बाहर खींचा, और प्रिया तुरन्त पलट कर बैठ गई। उसने मेरे खड़े और चमकते लंड को अपने हाथ में लिया और अपने होंठ उसके सिरे पर रख दिए। मैंने अपना हाथ उसके सिर पर रखा और अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ना शुरू कर दिया। गर्म और चिपचिपी धारें सीधे उसके गले में जा रही थीं, और वो मेरे लंड के हर हिस्से को चूसती रही, एक-एक बूँद निगलती रही।

जब मेरा झटका खत्म हुआ, तो हम दोनों बेदम होकर बिस्तरे पर गिर पड़े। प्रिया का चेहरा संतुष्टि से लाल था और उसकी चूत और गांड दोनों थके-थके से लग रहे थे। मैंने उसे अपनी बाँहों में भरा और उसके बाल सहलाने लगा। “तेरे जैसी रंडी मैंने आज तक नहीं देखी, प्रिया,” मैंने प्यार भरी गाली दी और वो मुस्कुराकर मेरी छाती से लग गई। बारिश अभी भी खिड़की पर थपक रही थी, और हमारे शरीरों की गर्मी में सारा ग़म पिघल चुका था।

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