गाँव में रंडी बनाकर पापा के दोस्त ने थ्रीसम सेक्स किया हम माँ बेटी के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- यह कहानी एक ऐसी रात की है, जब मैंने अपनी माँ और पापा के दोस्त को चुदाई करते देखा। मैं, रीना, 19 साल की एक जवान लड़की, अपने पापा के दोस्त की बेटी की शादी में उनके गाँव गई थी। वहाँ मेरी माँ, सावित्री, और पापा के दोस्त, हरबंस, की गंदी हरकतों ने मुझे चौंका दिया।
मैंने मेरी रंडी माँ और पापा के ठरकी दोस्त को चुदाई करते रंगे हाथों पकड़ा, और फिर अपनी चूत की आग बुझाने के लिए हरबंस अंकल के लंड से अपनी वर्जिन चूत और गांड को मजे से चुदवाया। बात थ्रीसम तक पहुंची, जहाँ माँ, मैं, और पापा के ठरकी दोस्त हरबंस ने मिलकर गंदी चुदाई की। यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी शर्म, हँसी, और बेकाबू वासना से भरी है, जिसमें गाँव का माहौल, देसी गालियाँ, और गंदी बातें हैं। यह पूरी तरह मूल और काल्पनिक है, जिसमें ग्रामीण भारत की बोलचाल और रंग शामिल हैं।
मैं रीना, 19 साल की, गाँव की एक चुलबुली लड़की। मेरे बूब्स अभी-अभी जवानी की गोलाई ले रहे थे, और मेरी चूत में अक्सर आग सी लगती थी। पापा के दोस्त की बेटी की शादी थी, तो हम तीन दिन के लिए उनके गाँव गए। पापा का दोस्त हरबंस, एक जाट, लंबा-चौड़ा, 45 साल का मर्द। उसकी आँखों में ठरक भरी थी। मेरी माँ, सावित्री, 38 साल की, गोरी, भरे हुए बूब्स और बड़ी गांड वाली औरत। माँ की साड़ी का पल्लू बार-बार सरकता, और हरबंस की नजरें उसकी चूचियों पर टिकी रहतीं।
शादी का माहौल था। ढोल-नगाड़े, देसी दारू, और ठुमके। हरबंस ने माँ को बार-बार घूरना शुरू किया। मुझे शक हुआ। रात को, जब सब नाच-गाने में मस्त थे, मैंने देखा हरबंस माँ को इशारे से बुला रहा था। माँ ने हँसकर पल्लू ठीक किया, लेकिन उसकी आँखों में शरारत थी। मैंने सोचा, “ये साली रंडी क्या करने जा रही है?” मैं चुपके से उनके पीछे गई।
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हरबंस माँ को खेत के पीछे एक पुरानी खटिया पर ले गया। मैं झाड़ियों में छुप गई। हरबंस ने माँ का पल्लू खींचा, और बोला, “सावित्री, तेरी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही है, साली रंडी।” माँ ने हँसकर कहा, “हरबंस, तू भी ना, भोसड़ी का, इतनी जल्दी है?” उसने माँ की साड़ी ऊपर की, और उसकी गीली चूत पर हाथ फेरा। माँ सिसकारी, “आह, साले, धीरे कर।”
हरबंस ने अपना 8 इंच का लंड निकाला। मेरा मुँह खुला रह गया। वो लंड किसी घोड़े का लग रहा था। उसने माँ को खटिया पर लिटाया, और उसकी चूत में लंड पेल दिया। माँ चिल्लाई, “आह, भैनचोद, तेरा लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा है थोड़ा आराम आराम से चुदाई कर ले मैं तेरे दोस्त की पत्नी हूँ कोई रंडी नहीं हूँ…!” हरबंस अंकल ने जल्दी जल्दी मेरी माँ की बुर में धक्के मारने जरी रखे, और चुदाई के हर धक्के के साथ मेरी नंगी माँ की चूचियाँ जोर जोर से आगे पीछे हिल रही थीं। मैं देख रही थी, और मेरी सील पैक वर्जिन चूत गीली हो गई।
मैंने जानबूझकर खाँसी की। दोनों डर गए। माँ ने साड़ी ठीक की, और हरबंस का लंड कच्छे में घुस गया। मैं सामने आई, और बोली, “माँ, ये क्या चक्कर है? पापा को बता दूँ?” माँ घबरा गई। हरबंस ने कहा, “रीना, बेटी, चुप रह, जो माँगना है माँग।” मैंने हँसकर कहा, “अंकल, मुझे भी तुम्हारा लंड चाहिए, वरना सबको बता दूँगी।”
माँ ने गुस्से में मुझे देखा, लेकिन बोली, “ठीक है, साली, तू भी चुदवा ले।” मैंने पापा के दोस्त से चुदवाने के लिए अपने सभी कपड़े उतारे और जल्दी से नंगी हो गयी। मैंने मेरी माँ और अंकल को अपनी सीलपैक चूत दिखाई। हरबंस की आँखें चमक उठीं मेरी टाइट चूत देखकर। उसने मेरे बूब्स दबाए, और बोला, “रीना बेटी, तेरी सील पैक वर्जिन चूत तो जन्नत है मेरे लंड के लिए।”
मेरी साँसें तेज थीं। हरबंस ने मुझे खटिया पर लिटाया। उसने मेरी चूत चाटी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने पर घूम रही थी। मैं सिसकारी, “आह, अंकल, चाटो, भोसड़ी के!” उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं डर रही थी। उसने धीरे से लंड डाला। दर्द से मेरी चीख निकली, “माँ, ये तो फाड़ देगा!” खून निकला, लेकिन हरबंस ने धक्के जारी रखे।
सील पैक वर्जिन गांड और चूत की पहली चुदाई का दर्द
पापा के दोस्त ने मुझे गोद में उठाया। उसका लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा था। मैं चिल्ला रही थी, “साले, धीरे कर, मेरी चूत फट जाएगी!” वो हँसा, और बोला, “रीना, अब तू रंडी बन गई।” माँ पास खड़ी थी, और अपनी चूत में उंगली कर रही थी। वो बोली, “रीना, मजे ले, साली।”
मेरे पापा के ठरकी दोस्त ने मुझे घोड़ी बनाया, मैं समझ गयी की आज तो मेरी वर्जिन गांड की भी सील टूटने वाली है आनकर के लम्बे मोटे लंड से। उस हरामी ने मेरी गांड पर एक जोर का थप्पड़ मारा, और बोला, “तेरी गांड भी बिलकुल वर्जिन लग रही है, आज तो इसे भी फाड़ डालूँगा और आज तेरी गांड की भी सील तोड़ दूंगा।” मैं डर गई, लेकिन अंकल ने सबसे पहले मेरी गांड की जगह मेरी चूत में लंड डाला, और तेज धक्के मारे।
फिर अचानक से उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में से निकलकर मेरी गांड में पेल दिया, मैं दर्द के मारे जोर से चिल्लाई, “आह, भैनचोद फट गयी रे आज तो मेरी गांड उई माँ… आह…. आह… फिर करीब दस मिनट की गांड चुदाई के बाद मेरी फटी हुई गांड का दर्द कम हुआ और मुझे आनंद आने लगा. अपनी गांड की चुदाई करवाते करवाते मैं जोर जोर से मादक सिसकियाँ लेने लगी!”
चुदते चुदते मेरा बदन दर्द और उत्तेजना के कारण काँप रहा था। करीब आधे घंटे की गांड चुदाई के बाद अंकल ने अपना वीर्य मेरी गांड के अंदर छोड़ दिया. इसके बाद, हरबंस ने माँ को बुलाया। वो बोला, “सावित्री, क्यों ना हम थ्रीसम करें?” माँ हँसी, और बोली, “साले, तू तो पूरा ठरकी है।” मैं भी तैयार थी। हम तीनों खटिया पर थे। चाँद की रोशनी में हमारी चुदाई का खेल शुरू हुआ।
पापा के दोस्त ने चढ़ाया थ्रीसम चुदाई का नशा हम माँ बेटी को
पापा के दोस्त ने मेरी नंगी माँ को खटिया पर लिटाया। उसने मेरी नंगी माँ की चूत में अपना लंड पेल दिया, और तेज तेज धक्के मारे। मेरी रंडी माँ पापा के दोस्त से चुदवाते चुदवाते जोर जोर से चिल्ला रही थी, “आह, हरबंस, फाड़ दे मेरी चूत!” मैं पास बैठी थी, और उन दोनों को सेक्स करते देख अपनी सील पैक वर्जिन चूत में उंगली कर रही थी। हरबंस अंकल ने कुछ देर बाद माँ की चूत से अपना लंड निकला और मुझे अपने पास बुलाया, और बोला, “रीना बेटी, मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस और जरा बता तेरी माँ की चूत का स्वाद कैसा है???”
मैंने मेरे पापा के दोस्त का लंड चूसने के लिए अपने मुँह में लिया। उसका स्वाद नमकीन था। माँ की चूत का रस उस पर लगा था जिस वजह से उसका स्वाद बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट लग रहा था। मैंने लंड चूसा, और हरबंस सिसकार रहा था। उसने कहा, “रीना, तू तो रंडी से भी बड़ी रंडी है।” मैं हँसी, और बोली, “अंकल, तुम तो घोड़े हो।”
हरबंस ने सेक्स करने के लिए पोजीशन बदली। उस ठरकी ने मुझे अपने लंड पर बिठाया। मैं उछल-उछलकर चुद रही थी। माँ मेरे बूब्स चूस रही थी। मैं चिल्लाई, “माँ, ये क्या कर रही हो?” वो हँसी, और बोली, “साली, मजे ले।” हरबंस का लंड मेरी बच्चेदानी तक जा रहा था। दर्द और मजा दोनों हो रहे थे।
इसके बाद, हरबंस अंकल ने मेरी नंगी माँ को घोड़ी बनाया और एक ही झटके में उनकी गांड में अपना पूरा का पूरा लंड पेल दिया। माँ चिल्लाई, “भोसड़ी के, मेरी गांड फट जाएगी!” हरबंस ने थूक लगाया, और धीरे-धीरे लंड पेला। मैं माँ की चूत चाट रही थी। माँ का रस मेरे मुँह में आ रहा था। मैंने कहा, “माँ, तुम तो रंडी हो।” वो हँसी, और बोली, “साली, तू भी तो मेरे साथ रंडी बन रही है।”
हमने पोजीशन बदली। मैं हरबंस के लंड पर उछल रही थी, और माँ मेरी गांड में उंगली डाल रही थी। मैं चिल्लाई, “माँ, ये क्या गंदा काम है?” वो बोली, “रीना, ये सब मजे के लिए है।” हरबंस ने मेरे बूब्स दबाए, और बोला, “रीना, तेरी चूत तो जन्नत है।”
हरबंस ने हम माँ बेटी को बारी-बारी चोदा। उसने माँ की चूत में लंड डाला, फिर मेरी गांड में। गांड चुदाई के दौरान मैं दर्द से चिल्ला रही थी, लेकिन मजा भी आ रहा था। उसने कहा, “सावित्री, रीना, तुम दोनों मेरी रंडियाँ हो।” हम हँस पड़े। माँ बोली, “साले, यदि हम कुछ दिन और तेरे गाँव में रुके तो तू हम माँ बेटी को पूरी रंडी बना देगा।”
थ्रीसम चुदाई के दौरान हम माँ बेटी को प्राप्त हुआ चरम सुख
रात गहरा रही थी। हम पसीने से लथपथ थे। हरबंस अंकल ने हमें एक नई सेक्स पोजीशन में चोदा। उसने माँ को अपनी गोद में बिठाया, और उसकी चूत में लंड डाला। मैं हरबंस के मुँह पर अपनी चूत रखकर बैठ गई। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने पर घूम रही थी। मैं सिसकारी, “आह, अंकल, चाटो, भैनचोद!”
माँ मुखमैथुन के दौरान जोर जोर से चिल्ला रही थी, “हरबंस, और जोर से चाट साले, आज तो तू मेरी चूत को अपने दांतों से कच्ची चबा जा…!” मैंने मेरी नंगी माँ के बूब्स जोर जोर से दबाए, और वो चुदते चुदते मेरी चूचियाँ चूसने लगी। हम तीनों एक-दूसरे के साथ गंदी हरकतें कर रहे थे। हरबंस का लंड मेरी चूत में, उसकी जीभ माँ की चूत में, और माँ मेरे बूब्स चूस रही थी।
पापा के दोस्त ने कहा, “रीना बेटी, अब तेरी गांड की बारी।” मैं डर गई, लेकिन माँ ने कहा, “साली, डर मत, गांड चुदाई के भी मजे ले।” हरबंस ने मेरी गांड में थूक लगाया, और धीरे से लंड डाला। दर्द से मेरी चीख निकली, “भोसड़ी के, मेरी गांड फट गई!” लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा। माँ मेरी चूत में उंगली कर रही थी।
थ्रीसम चुदाई के दौरान हम तीनो ने कई सेक्स पोजीशन बदलीं। मेरे पापा के दोस्त हरबंस ने मेरी कामुकता से भरी माँ को उल्टा लिटाया, और उसकी गांड मारी। मैं माँ की चूत चाट रही थी। फिर हरबंस ने मुझे गोद में उठाया, और मेरी चूत में लंड पेला। माँ मेरे बूब्स चूस रही थी। हम तीनों चिल्ला रहे थे, “आह, भैनचोद, और जोर से!”
आखिरकार, हरबंस झड़ने वाला था। उसने अपना लंड निकाला, और हम माँ बेटी दोनों के मुँह पर माल छोड़ा। उस दिन मैंने पहली बार वीर्य का स्वाद चखा था। माँ ने हँसकर कहा, “रीना, अब तू पूरी रंडी बन गई है।” मैं शरमा गई, लेकिन हँसी भी आई।
हम तीनों थ्रीसम सेक्स करने के बाद खटिया पर लेट गए। मेरी चूत और गांड दर्द कर रही थी, लेकिन दिल में सुकून था। माँ ने मेरे बाल सहलाए, और बोली, “रीना, ये सब गलत था, लेकिन मजा आया ना?” मैंने हँसकर कहा, “माँ, तुम तो पूरी रंडी हो।” हम तीनों हँस पड़े।
गाँव में रंडी बनाकर पापा के दोस्त ने थ्रीसम सेक्स किया हम माँ बेटी के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
गाँव में उस रात की आउटडोर थ्रीसम चुदाई ने मुझे शर्म, हँसी, और वासना का ऐसा मिश्रण दिया, जो मैं कभी नहीं भूलूँगी। माँ और हरबंस के साथ थ्रीसम ने मेरी जवानी को नया रंग दिया। गाँव का माहौल, देसी गालियाँ, और गंदी चुदाई ने उस रात को जिंदगी की सबसे उत्तेजक रात बना दिया। क्या आपको यह कहानी पसंद आई? क्या रीना, सावित्री, और हरबंस के किरदार आपको उत्तेजित करते हैं? या गाँव का ठरकी माहौल आपको मजा देता है? अपने विचार बताएँ।


